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सुनो कहानी: प्रेमचंद की 'कौशल'

प्रेमचंद की कहानी 'कौशल' का प्रसारण

'सुनो कहानी' इस स्तम्भ के अंतर्गत हम आपको सुनवा रहे हैं उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने अनुराग शर्मा की आवाज़ में प्रेमचंद की रचना 'आधार' का पॉडकास्ट सुना था। आवाज़ की ओर से आज हम लेकर आये हैं प्रेमचंद की एक और कहानी 'कौशल', जिसको स्वर दिया है अनुराग शर्मा ने। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं। कहानी का कुल प्रसारण समय है: आठ मिनट और सत्ताईस सेकंड।


मैं एक निर्धन अध्यापक हूँ...मेरे जीवन मैं ऐसा क्या ख़ास है जो मैं किसी से कहूं
~ मुंशी प्रेमचंद (१८८०-१९३६)

प्रेमचंद की एक नयी कहानी सुनिए हर शनिवार को आवाज़ पर

पण्डित जी ब्राह्मणत्व के गौरव को इतने सस्ते दामों न बेचना चाहते थे। आलस्य छोड़कर धनोपार्जन में दत्तचित्त हो गये। छ: महीने तक उन्होने दिन को दिन और रात को रात नहीं जाना। दोपहर को सोना छोड दिया, रात को भी बहुत देर तक जागते। (प्रेमचंद की 'कौशल' से एक अंश)





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यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं, तो यहाँ देखें।

#Eleventh Story, Kaushal: Munsi Premchand/Hindi Audio Book/2008/10. Voice: Anuraag Sharma

Comments

Anonymous said…
bahut sundar rachna, padhi bhi bahut achhi gayi hai, badai Anurag ji.
यह कहानी मैंने पढ़ रखी थी। आपका वाचन भी पसंद आया, लेकिन मुझे ऐसा लगा कि रिकॉर्डिंग में कोई समस्या है क्योंकि शुरूआत में आवाज़ धीमी थी, फिर बाद में तेज़ और अंत में धीमी हो गई। ज़रा देख लें।
अनुराग जी एक मर्मस्पर्शी कहानी सुनाई आपने...कुछ और आज के समय के कथाकारों जैसे कमलेश्वर आदि की कहानियाँ भी सुनवायें. हालाँकि प्रेमचंद मेरे प्रिये हैं और उनकी रचनाएँ कालजयी हैं पर एकरसता से बचना भी जरूरी है