Friday, November 14, 2008

वो बुतखाना, ये मयखाना सब धोखा है...

भोपाल शहर की एक अलसाई सी दोपहर, एक सूनी गली का आखिरी मकान जहाँ जमा हैं "मार्तण्डया" संगीत समूह के सभी संगीत सदस्य. फिज़ा में विरक्ति के स्वर हैं, जैसे सब देखा जा चुका है, अनुभव किया जा चुका है महसूस किया जा चुका है हुस्न और इश्क जैसी सब बातों का खोखलापन, अब कहाँ दिल लगायें. मन बैरागी चाहता है कि कहीं दूर जंगल में डेरा डाला जाए और दरवेशों में बसर किया जाए. कुछ ऐसे ही भाव लिए है वर्तमान सत्र का ये २० वां गीत. संजय द्विवेदी ने लिखा है इसे और स्वरबद्ध किया है चेतैन्य भट्ट और कृष्णा पंडित ने. आवाजें हैं कृष्णा पंडित, रुद्र प्रताप और अभिषेक की. टीम के गिटारिस्ट हैं सागर और रिदम संभाला है हेमंत ने. सुनते हैं इस उभरते हुए जबरदस्त सूफी संगीत समूह का ये नया दमदार गीत. अपनी बेशकीमती राय देकर इन नए संगीत योद्धाओं का मार्गदर्शन अवश्य करें.

गीत को सुनने के लिए नीचे के प्लेयर पर क्लिक करें -



After the success of their first song "sooraj chand aur sitare" with us, this new upcoming sufi band from bhopal "martandya" is back again, with a completely different flavored song - "husn". under the guidance of Krishana Pandit and Chaitanya Bhatt, Rudra Pratap and Abhishek done the vocals. supported by Hemant and Sagar, this song has again penned by Sanjay Dwivedi. if you like the song do spare a few minutes to encourage/ guide these young talented musicians.

To listen to this brand new song, please click on the player.




Lyrics - गीत के बोल

ये हुस्न है क्या, ये इश्क है क्या,
सब धोखा है, सब धोखा है,
ये चाँदनी शब्, ये ठंडी हवा,
सब धोखा है, सब धोखा है...

वो कैस की लैला धोखा थी,
वो हीर का राँझा धोखा था,
ये ताज महल, ये लाल किला,
सब धोखा है, सब धोखा है ....

वहां शेख ठगी में माहिर है,
यहाँ साकी चालें चलता है,
वो बुतखाना, ये मयखाना,
सब धोखा है, सब धोखा है ...

अब दरवेशों में काट उमर,
यहाँ दौलत शोहरत छोड़ भी आ,
क्या फरक हुआ, जब जान लिया,
सब धोखा है, सब धोखा है ...

दूसरे सत्र के २० वें गीत का विश्वव्यापी उदघाटन आज

SONG # 20, SEASON # 02, "HUSN", OPENED ON AWAAZ ON 14/11/2008.
Music @ Hind Yugm, Where music is a passion.


8 comments:

shivani said...

hello,player nazar nahi aa raha.....sorry....

Janmejay said...

namaskaar!
badhai is sundar geet ke liye!

madhur geet hai.sangeet bara achha hai aur geet ke mood ko bhi jachta hai.
gayki bhi bari achhi hai,aur beech-beech me chorus ka prayog achha ban para hai.
geet ke bol bhi achhe hain,halanki geet me kahi gayi baat adhuri si lagti hai pura geet sun'ne ke baad,shayad geet ke bhav kuchh aur khul kar aane chahiye the shabdon me.

kul mila kar yah ek bahut sundar geet hai,jiske liye puri team badhai ki patr hai.

dhanyawaad!

-Janmejay

Madhur said...

husn k bare me kehna bhi dhokha hi hoga.

Anonymous said...

पहले गाने से भी बेहतर लगी इस गीत में कृष्ण पंडित की टीम..बधाई संजीव को प्रयोगवादी बोल लिखने के लिए विशेष बधाई

sajeev

KRISHNA RAJ KUMAR said...

Nice composition...

shivani said...

भोपाल के सूफी संगीत समूह ने ये गीत बहुतही सूफिआना अंदाज़ में पेश किया है !संजय जी ने बहुत जज्बाती गीत लिखा है ,गीत में दर्द नज़र आता है !कृष्ण पंडित जी और उनकी टीम ने गीत के साथ पूरी मेहनत की है !आपका प्रयास प्रशंसनीय है !बहुत बहुत बधाई !

अनुपम अग्रवाल said...

प्लेयर नज़र नहीं आ रहा .कृपया चेक करें .

hemant(rinku) said...

great work by u BHAIYA

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