Wednesday, May 29, 2013

सुनें राग तिलक कामोद में स्वरबद्ध कुछ सुरीले फ़िल्मी गीत संज्ञा टंडन के साथ


प्लेबैक  इंडिया ब्रोडकास्ट
राग तिलक कामोद 
स्वर एवं प्रस्तुति - संज्ञा टंडन 
स्क्रिप्ट - कृष्णमोहन मिश्र

Tuesday, May 28, 2013

सच्‍चिदानन्‍द हीरानन्‍द वात्‍स्‍यायन 'अज्ञेय' रचित "मुस्लिम-मुस्लिम भाई-भाई"

इस साप्ताहिक स्तम्भ "बोलती कहानियाँ" के अंतर्गत हम हर सप्ताह आपको सुनवाते रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने अनुराग शर्मा के स्वर में सुभद्रा कुमारी चौहान की व्यंग्यात्मक कहानी "जम्बक की डिबिया" का पाठ सुना था।

आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार सच्‍चिदानन्‍द हीरानन्‍द वात्‍स्‍यायन 'अज्ञेय' की भारत के विभाजन के दुष्काल पर आधारित मार्मिक कहानी मुस्लिम-मुस्लिम भाई-भाई जिसे स्वर दिया है अनुराग शर्मा ने।

कहानी "मुस्लिम-मुस्लिम भाई-भाई" का गद्य स्वार्थ पर उपलब्ध है। इस कथा का कुल प्रसारण समय 9 मिनट 29 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।




लेखक और पत्रकार सच्‍चिदानन्‍द हीरानन्‍द वात्‍स्‍यायन एक प्रसिद्ध स्वाधीनता संग्राम सेनानी भी थे। 1930 में क्रांतिकारी सरदार भगतसिंह को जेल से छुड़ाने की योजना में "अज्ञेय" भी शामिल थे। सच्‍चिदानन्‍द हीरानन्‍द वात्‍स्‍यायन 'अज्ञेय' (7 मार्च 1911 - 4 अप्रैल 1987)

हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी हिन्दी कहानी

जमीला को बुरा लगा, बोली, ‘‘इतना गुमान ठीक नहीं है, बहिन! हम भी तो मुसलमान हैं’’
 (सच्‍चिदानन्‍द हीरानन्‍द वात्‍स्‍यायन 'अज्ञेय' रचित "मुस्लिम-मुस्लिम भाई-भाई" से एक अंश)


नीचे के प्लेयर से सुनें.


(प्लेयर पर एक बार क्लिक करें, कंट्रोल सक्रिय करें फ़िर 'प्ले' पर क्लिक करें।)
 यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाऊनलोड कर लें:
मुस्लिम-मुस्लिम भाई-भाई MP3

#19th Story, Muslim Muslim Bhai Bhai: Agyeya/Hindi Audio Book/2013/19. Voice: Anurag Sharma

Monday, May 27, 2013

नाचने के लिए तैयार रहें यमला पगला दीवाना के संग




ताज़ा सुर ताल - यमला पगला दीवाना 02

यमला पगला दीवाना यानी ही मैन धर्मेन्द्र और उनके दो होनहार बेटों सन्नी और बोबी की शानदार तिकड़ी, जो अपने पहले संस्करण की आपार सफलता के बाद अब एक ब्रेंड के रूप में स्थापित हो चुके हैं, लौट रहे हैं दूसरे संस्करण में नए धमाल और मस्ती के साथ. जाहिर है फिल्म में पंजाबी फ्लेवर की अधिकता होगी, ऐसे में सभी गीत भी इसी कलेवर के होंगें ये तो तय है, आईये एक नज़र दौडाएं यमला पगला दीवाना २ के संगीत एल्बम में संकलित गीतों पर. फिल्म में संगीत का पक्ष संभाला है संगीतकार जोड़ी है शरीब तोशी ने.

सुखविंदर सिंह, शंकर महादेवन, और संचित्रा भट्टाचार्य की आवाजों में है पहला गीत जो कि शीर्षक गीत भी है. संगीतकार की तारीफ कि उन्होंने इस बार एल पी के रचे पारंपरिक मैं जट यमला पगला दीवाना की धुन का सहारा नहीं लिया वरन एक नयी धुन के साथ इस तिकड़ी को संगीतमयी सलामी दी. रिदम में विविधता भी है और शब्द भी सटीक हैं.

अगला गीत है चांगली है चांगली है, जिसे आवाज़ का पावर बैक अप दिया है ऊर्जा से भरे मिका सिंह ने. सड़क छाप मस्ती भरे गीतों की लंबी फेहरिस्त में एक नया जुड़ाव है ये गीत. तेज बीट्स और ऊर्जा से भरे इस गीत के अंत में ढोल और सीटियों से गजब का माहौल रचा गया है.

पहले दो गीतों से कुछ अलग है अगला गीत जिसमें लोक अंदाज़ की झलक जचती है. सूट तेरा लाल रंग द को सोनू निगम ने अपने निराले अंदाज़ में गाया है, सुनिधि की आवाज़ सोनू की आवाज़ को बढ़िया कोंट्रास्ट देती है. रिदम का उतार चढ़ाव बहुत ही बढ़िया है. धुन भी बेहद मधुर है. सुरीला गीत.

नए गायक दलजीत दोसंझ की आवाज़ में मैं एन्दा ही नाचना में देओल परिवार स्वीकार करता है कि उनकी नाचने की अदा सिने जगत के अन्य अभिनेताओं जैसी बेशक नहीं है पर जैसे भी हैं उनका मुक्तलिफ़ अंदाज़ सालों से दर्शकों को भाता आया है और भाता रहेगा. गीत की सरलता और मासूमियत ही गीत की जान है. आप ऐसे ही नाचिये धर्म जी....हम तो देखेंगें...

जट यमला पागल हो गया गीत एक और पार्टी गीत है, मिका की आवाज़ में. गीत सुनने से अधिक देखने में अच्छा लग सकता है. गीत के दो संस्करण है, शरीब साबरी का गाया संस्करण कुछ लो टोन में है. सुजेलो की आवाज़ दोनों संस्करण में अपेक्षा अनुरूप ही है.

साड्डी दारु द पानी भी दरअसल एक और संस्करण ही है शीर्षक गीत का, इसके आलावा सभी गीतों का मिला जुला एक मेष अप भी है. पंजाबी रिदम हमेशा ही आपको नयी ताजगी से भरने में कामियाब रहे हैं. मूड फ्रेश करने के लिए इन गीतों को सुनना एक अच्छी सलाह है.

एल्बम के बेहतरीन गीत
यमला पगला दीवाना, सूट तेरा लाल रंग द, मैं तो एन्दा ही नाचना
हमारी रेटिंग ३.१  

संगीत समीक्षा - सजीव सारथी

आवाज़ - अमित तिवारी
  



यदि आप इस समीक्षा को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाऊनलोड कर लें:

Sunday, May 26, 2013

राग भीमपलासी के सुरों में पिरोया एक कालजयी गीत


स्वरगोष्ठी – 122 में आज
भूले-बिसरे संगीतकार की अमर कृति- 2

सरस्वती राणे ने गाया ‘रामराज्य’ का गीत- ‘वीणा मधुर मधुर कछु बोल...’


‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ पर जारी लघु श्रृंखला ‘भूले-बिसरे संगीतकार की अमर कृति’ के दूसरे अंक में मैं कृष्णमोहन मिश्र आप सब संगीत-प्रेमियों का अभिनन्दन करता हूँ। आज के अंक में हम आपको राग भीमपलासी पर आधारित फिल्म 'रामराज्य' एक ऐसा गीत सुनवाएँगे जो सात दशक बाद भी प्रायः हम सुनते रहते हैं। परन्तु इसके संगीतकार पण्डित शंकरराव व्यास के बारे में हम अनभिज्ञ हैं।  


हात्मा गाँधी ने अपने जीवनकाल में एकमात्र फिल्म ‘रामराज्य’ देखी थी। 1943 में प्रदर्शित इस फिल्म का निर्माण प्रकाश पिक्चर्स ने किया था। फिल्म के संगीत निर्देशक अपने समय के जाने-माने संगीतज्ञ पण्डित शंकरराव व्यास थे। बहुमुखी प्रतिभा के धनी, व्यासजी की कुशलता केवल फिल्म संगीत निर्देशन के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि शास्त्रीय गायन, संगीत शिक्षण और ग्रन्थकार के रूप में भी सुरभित हुई थी। फिल्म ‘रामराज्य’ के साथ कई उल्लेखनीय तथ्य जुड़े हुए हैं, जिनमें एक यह भी तथ्य है कि पण्डित शंकरराव व्यास ने पार्श्वगायक मन्ना डे से पहली बार इस फिल्म में दो गीत गवाए थे। इसी फिल्म में पण्डित जी ने राग भीमपलासी के स्वरों में गीत- ‘वीणा मधुर मधुर कछु बोल...’ भी संगीतबद्ध किया था। आज हमारी गोष्ठी में यही गीत, राग और इसके रचनाकार, चर्चा के विषय होंगे।

शंकरराव व्यास
कोल्हापुर में 23 जनवरी, 1898 को पुरोहितों के परिवार में जन्मे शंकरराव व्यास के पिता गणेश पन्त, कथा-वाचक के साथ संगीत-प्रेमी भी थे। संगीत के संस्कार उन्हें अपने पिता से ही प्राप्त हुए। दुर्भाग्यवश जब शंकरराव आठ वर्ष के थे तब उनके पिता का देहान्त हो गया। पिता के देहान्त के बाद वे अपने चाचा श्रीकृष्ण सरस्वती के आश्रित हुए। उन्हीं दिनों पण्डित विष्णु दिगम्बर पलुस्कर भारतीय संगीत को दयनीय स्थिति से उबारने के लिए पूरे महाराष्ट्र में भ्रमण कर रहे थे और उनकी अगली योजना पूरे देश में संगीत के प्रचार-प्रसार की थी। बालक शंकरराव के संगीत-ज्ञान और उत्साह को देख कर पलुस्कर जी ने उन्हें अपने साथ ले लिया। पलुस्कर जी द्वारा स्थापित गान्धर्व विद्यालय में ही उन्होने 9 वर्षों तक संगीत शिक्षा प्राप्त की और अहमदाबाद के राष्ट्रीय विद्यालय में संगीत शिक्षक हो गए। इसी बीच पलुस्कर जी ने लाहौर में संगीत विद्यालय की स्थापना की और शंकरराव को वहीं प्रधानाचार्य के पद पर बुला लिया। लाहौर में संगीत विद्यालय विधिवत स्थापित हो जाने और सुचारु रूप से संचालित होने के बाद वे अहमदाबाद आए और यहाँ ‘गुजरात संगीत विद्यालय’ की स्थापना भी की। 1934 में उन्होने गान्धर्व संगीत महाविद्यालय की स्थापना की। इस बीच उन्होने संगीत शिक्षण के साथ-साथ संगीत सम्मेलनों में भाग लेना भी जारी रखा।

सरस्वती राणे
1938 में 40 वर्ष की आयु में शंकरराव व्यास ने फिल्म संगीत के क्षेत्र में पदार्पण किया। 1938 में रमणलाल बसन्तलाल के उपन्यास पर बनी फिल्म ‘पूर्णिमा’ में कई गीत गाये थे। गायन के साथ-साथ फिल्मों की संगीत रचना के क्षेत्र में भी उनका वर्चस्व कायम हो चुका था। व्यास जी के संगीतबद्ध, भक्ति प्रधान और नीति प्रधान गीत गली-गली गूँजने लगे थे। 1940 में ‘सरदार’, ‘नरसी भगत’ और 1942 में ‘भरतमिलाप’ फिल्मों के गीत लोकप्रियता के शिखर पर थे। इसी समय 1943 में प्रकाश पिक्चर्स की फिल्म ‘रामराज्य’ प्रदर्शित हुई। भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के दौर में प्रदर्शित फिल्म ‘रामराज्य’ में दर्शकों को गाँधीवादी रामराज्य की परिकल्पना परिलक्षित हो रही थी। इस फिल्म के राग आधारित गीत अपने समय में बेहद लोकप्रिय हुए थे, विशेष रूप से फिल्म में लव और कुश चरित्रों के पर फिल्माया गया गीत ‘भारत की एक सन्नारी की हम कथा सुनाते हैं...’ और राजमहल में फिल्माया गया गीत ‘वीणा मधुर मधुर कछु बोल...’। पण्डित शंकरराव व्यास ने इन दोनों गीतों को क्रमशः राग काफी और भीमपलासी के स्वरों में बाँधा था। आइए, अब हम प्रस्तुत करते हैं, सरस्वती राणे के गाये, रमेश चन्द्र गुप्ता के लिखे, शंकरराव व्यास के संगीतबद्ध किए और राग भीमपलासी के स्वरों की चाशनी में पगे गीत ‘वीणा मधुर मधुर कछु बोल...’


राग भीमपलासी : फिल्म रामराज्य : ‘वीणा मधुर मधुर कछु बोल...’ : संगीत – शंकरराव व्यास



अश्विनी भिड़े देशपाण्डे
राग ‘भीमपलासी’ भारतीय संगीत का एक ऐसा राग है, जिसमें भक्ति और श्रृंगार रस की रचनाएँ खिल उठती है। यह औड़व-सम्पूर्ण जाति का राग है, अर्थात आरोह में पाँच स्वर- सा, (कोमल), म, प, नि (कोमल), सां और अवरोह में सात स्वर- सां नि (कोमल), ध, प, म (कोमल), रे, सा प्रयोग किए जाते हैं। इस राग में गान्धार और निषाद कोमल और शेष सभी स्वर शुद्ध होते हैं। यह काफी थाट का राग है और इसका वादी और संवादी स्वर क्रमशः मध्यम और तार सप्तक का षडज होता है। कभी-कभी वादी स्वर मध्यम के स्थान पर पंचम का प्रयोग भी किया जाता है। भीमपलासी के गायन-वादन का समय दिन का चौथा प्रहर होता है। कर्नाटक संगीत पद्यति में ‘भीमपलासी’ के समतुल्य राग है ‘आभेरी’। ‘भीमपलासी’ एक ऐसा राग है, जिसमें खयाल-तराना से लेकर भजन-ग़ज़ल की रचनाएँ संगीतबद्ध की जाती हैं। श्रृंगार और भक्ति रस की अभिव्यक्ति के लिए यह वास्तव में एक आदर्श राग है। आइए अब हम आपको इसी राग में कण्ठ संगीत का एक मोहक उदाहरण सुनवाते हैं। सुप्रसिद्ध गायिका विदुषी अश्विनी भिड़े देशपाण्डे ने राग भीमपलासी, तीनताल में निबद्ध एक मोहक द्रुत खयाल प्रस्तुत किया है। आप इस रचना में फिल्म 'रामराज्य' के उपरोक्त गीत के स्वरों को पहचानने का प्रयास कीजिए और मुझे, इस अंक को यहीं विराम देने की अनुमति दीजिए।


राग भीमपलासी : ‘जा जा रे अपने मन्दिरवा...’ विदुषी अश्विनी भिड़े




आज की पहेली 

‘स्वरगोष्ठी’ के 122वें अंक की पहेली में आज हम आपको पाँचवें दशक के उत्तरार्द्ध में बनी एक फिल्म के राग आधारित एक गीत का अंश सुनवा रहे है। इसे सुन कर आपको दो प्रश्नों के उत्तर देने हैं। 130वें अंक तक जिस प्रतिभागी के सर्वाधिक अंक होंगे, उन्हें इस श्रृंखला (सेगमेंट) का विजेता घोषित किया जाएगा।


1 – गीत के इस अंश को सुन कर पहचानिए कि यह गीत किस राग पर आधारित है?

2 – यह गीत किस ताल में निबद्ध किया गया है?

आप अपने उत्तर केवल swargoshthi@gmail.com पर ही शनिवार मध्यरात्रि तक भेजें। comments में दिये गए उत्तर मान्य नहीं होंगे। विजेता का नाम हम ‘स्वरगोष्ठी’ के 123वें अंक में प्रकाशित करेंगे। इस अंक में प्रस्तुत गीत-संगीत, राग, अथवा कलासाधक के बारे में यदि आप कोई जानकारी या अपने किसी अनुभव को हम सबके बीच बाँटना चाहते हैं तो हम आपका इस संगोष्ठी में स्वागत करते हैं। आप पृष्ठ के नीचे दिये गए comments के माध्यम से या swargoshthi@gmail.com अथवा radioplaybackindia@live.com पर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं।


पिछली पहेली और श्रृंखला के विजेता 


‘स्वरगोष्ठी’ के 120वें अंक की पहेली में हमने आपको 1942 में प्रदर्शित फिल्म ‘भक्त सूरदास’ से लिये गए गीत का एक अंश सुनवा कर आपसे दो प्रश्न पूछे थे। पहले प्रश्न का सही उत्तर है- राग भैरवी और दूसरे प्रश्न का सही उत्तर है- ताल कहरवा। दोनों प्रश्नो के सही उत्तर लखनऊ के प्रकाश गोविन्द ने ही दिया है। प्रकाश जी को ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ की ओर से हार्दिक बधाई। 120वें अंक की पहेली की समाप्ति पर इस श्रृंखला (सेगमेंट) के प्रथम चार प्रतिभागियों के प्राप्तांक निम्नवत रहे-
1. श्रीमती क्षिति तिवारी, जबलपुर – 16 अंक

2. श्री प्रकाश गोविन्द, लखनऊ – 15 अंक

3. डॉ. पी.के. त्रिपाठी, जौनपुर – 12 अंक

4. श्री पंकज मुकेश, बैंगलुरु – 8 अंक


झरोखा अगले अंक का 


मित्रों, ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ पर जारी लघु श्रृंखला ‘एक कालजयी गीत, जिसने संगीतकार को अमर बना दिया’ के अब तक के दो अंकों में हमने आपसे देश की आज़ादी से पूर्व के राग आधारित फिल्म संगीत पर चर्चा की है। अगले अंक में हम आज़ादी के तत्काल बाद के फिल्म संगीत की जानकारी आपसे बाँटेंगे। अगले अंक में एक और विस्मृत संगीतकार के राग आधारित चर्चित गीत के साथ रविवार को प्रातः 9-30 ‘स्वरगोष्ठी’ के इसी मंच पर आप सभी संगीत-रसिकों की हम प्रतीक्षा करेंगे।


प्रस्तुति : कृष्णमोहन मिश्र

Saturday, May 25, 2013

सिने पहेली - 65 - हिन्दी चलचित्र -प्रेरणा विदेशी



सिने-पहेली - 65 में आज


'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के सभी पाठकों और श्रोताओं का सिने पहेली के 65 वें अंक में     स्वागत है. साथियों लगता है कि पिछली बार की पहेली कुछ कठिन हो गयी थी और तय समयावधि में कोई भी खिलाड़ी पाँचों उत्तर नहीं दे पाया. फिर भी आप सबको धन्यवाद कि कठिनाई के बावजूद अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी.

पहेली के उत्तर और परिणाम नीचे दिए गए हैं और आज शुरू करते हैं एक और नयी ताज़ा पहेली. इस बार उम्मीद है कि यह आप लोगों को पूर्ण अंक अर्जित करने का मौका देगी.

सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं.

आज से इस प्रतियोगिता में जुड़ने वाले नये खिलाड़ियों का स्वागत करते हुए हम उन्हें यह भी बताना चाहेंगे कि अभी भी कुछ देर नहीं हुई है, आज से इस प्रतियोगिता में जुड़ कर भी आप महाविजेता बन सकते हैं, यही इस प्रतियोगिता की ख़ासियत है। इस प्रतियोगिता के नियमों का नीचे किया गया है, ध्यान दीजियेगा।


आज की पहेली:हिन्दी चलचित्र -प्रेरणा विदेशी

दोस्तों,यूं तो हिन्दी फिल्म उद्योग अपने आप में परिपूर्ण है फिर भी आरोप लगाये जाते  हैं कि  कुछ फिल्मों की कहानी किसी विदेशी फिल्म से चुराई गयी है. कुछ समय पहले हिट हुई फिल्म 'बर्फी' को भी कुछ इसी  तरह की आलोचना झेलनी पड़ी थी जहाँ फिल्म के कई दृश्यों को कुछ विदेशी फिल्मों से हू-ब-हू उठाया गया बतलाया गया था.

खैर क्या फर्क पड़ता है अगर फिल्म की कहानी अच्छी हो और दर्शकों को उससे मनोरंजन मिले. हम इस बहस में न पड़कर पहेली की ओर ध्यान केन्द्रित करते हैं.

आज की पहेली भी इसी प्रेरणा पर आधारित है. नीचे पाँच विदेशी फिल्मों के पोस्टर दिए गए हैं और आपको इन विदेशी फिल्मों से प्रेरित हिन्दी फिल्म  और विदेशी फिल्म दोनों का नाम बतलाना है.

हर सवाल के लिए दो अंक हैं यानि की हिन्दी नाम का 1 अंक और नीचे दिखाई गयी तस्वीर की फिल्म के नाम का 1 अंक. कुल मिलाकर  सिने पहेली का 65 वां अंक पूरे 10 अंको का है.


प्रश्न संख्या 1.
 
 प्रश्न संख्या 2.


 प्रश्न संख्या 3.

 प्रश्न संख्या 4.

 प्रश्न संख्या 5.

 


पिछली पहेली का हल

1-
गाना: बसंत है आया रंगीला (फिल्म : स्त्री)
संगीतकार: सी. रामचंद्र

2 –
गाना: कभी नेकी भी उसकी जी में ( फिल्म: गाज़ी सलाहुद्दीन)
संगीतकार: खेमचन्द प्रकाश

3 –
गाना: माने ना माने ना  हाय बलम परदेशिया (फिल्म: जागीर)
संगीतकार:मदन मोहन

4 –
गाना: ज़िन्दगी आज मेरे नाम से शरमाती है  (फिल्म: सन ऑफ़ इंडिया)
संगीतकार:नौशाद

5 –
गाना: हिया जरत रहत दिन रैन हो रामा जरत रहत दिन रैन  (फिल्म: गोदान)
संगीतकार:रवि शंकर

पिछली पहेली के विजेता

सिने पहेली - 64 के के विजेताओं के नाम और उनके प्राप्तांकों पर। सबसे ज्यादा अंक मिले हैं प्रकाश गोविन्द जी  को. प्रकाश जी बहुत बहुत बधाई.

1- प्रकाश गोविन्द, लखनऊ - 12 अंक 
2- क्षिति तिवारी, जबलपुर - 9 अंक
3- विजय कुमार व्यास, बीकानेर - 7 अंक
4. चंद्रकान्त दीक्षित, लखनऊ - 6 अंक  

 इस सेगमेण्ट का अब तक का सम्मिलित स्कोरकार्ड 




नये प्रतियोगियों का आह्वान

नये प्रतियोगी, जो इस मज़ेदार खेल से जुड़ना चाहते हैं, उनके लिए हम यह बता दें कि अभी भी देर नहीं हुई है। इस प्रतियोगिता के नियम कुछ ऐसे हैं कि किसी भी समय जुड़ने वाले प्रतियोगी के लिए भी पूरा-पूरा मौका है महाविजेता बनने का। अगले सप्ताह से नया सेगमेण्ट शुरू हो रहा है, इसलिए नये खिलाड़ियों का आज हम एक बार फिर आह्वान करते हैं। अपने मित्रों, दफ़्तर के साथी, और रिश्तेदारों को 'सिने पहेली' के बारे में बताएँ और इसमें भाग लेने का परामर्श दें। नियमित रूप से इस प्रतियोगिता में भाग लेकर महाविजेता बनने पर आपके नाम हो सकता है 5000 रुपये का नगद इनाम।

कैसे बना जाए 'सिने पहेली महाविजेता?

1. सिने पहेली प्रतियोगिता में होंगे कुल 100 एपिसोड्स। इन 100 एपिसोड्स को 10 सेगमेण्ट्स में बाँटा गया है। अर्थात्, हर सेगमेण्ट में होंगे 10 एपिसोड्स।

2. प्रत्येक सेगमेण्ट में प्रत्येक खिलाड़ी के 10 एपिसोड्स के अंक जुड़े जायेंगे, और सर्वाधिक अंक पाने वाले तीन खिलाड़ियों को सेगमेण्ट विजेताओं के रूप में चुन लिया जाएगा।

3. इन तीन विजेताओं के नाम दर्ज हो जायेंगे 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में। सेगमेण्ट में प्रथम स्थान पाने वाले को 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में 3 अंक, द्वितीय स्थान पाने वाले को 2 अंक, और तृतीय स्थान पाने वाले को 1 अंक दिया जायेगा। छठे सेगमेण्ट की समाप्ति तक 'महाविजेता स्कोरकार्ड' यह रहा...



4. 10 सेगमेण्ट पूरे होने पर 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में दर्ज खिलाड़ियों में सर्वोच्च पाँच खिलाड़ियों में होगा एक ही एपिसोड का एक महा-मुकाबला, यानी 'सिने पहेली' का फ़ाइनल मैच। इसमें पूछे जायेंगे कुछ बेहद मुश्किल सवाल, और इसी फ़ाइनल मैच के आधार पर घोषित होगा 'सिने पहेली महाविजेता' का नाम।

जवाब भेजने का तरीका

उपर पूछे गए सवालों के जवाब एक ही ई-मेल में टाइप करके cine.paheli@yahoo.com के पते पर भेजें। 'टिप्पणी' में जवाब कतई न लिखें, वो मान्य नहीं होंगे। ईमेल के सब्जेक्ट लाइन में "Cine Paheli # 65" अवश्य लिखें, और अंत में अपना नाम व स्थान लिखें। आपका ईमेल हमें बृहस्पतिवार 30 मई शाम 5 बजे तक अवश्य मिल जाने चाहिए। इसके बाद प्राप्त होने वाली प्रविष्टियों को शामिल नहीं किया जाएगा।

'सिने पहेली' को और भी ज़्यादा मज़ेदार बनाने के लिए अगर आपके पास भी कोई सुझाव है तो 'सिने पहेली' के ईमेल आइडी cine.paheli@yahoo.com पर अवश्य लिखें। आप सब भाग लेते रहिए, इस प्रतियोगिता का आनन्द लेते रहिए, क्योंकि महाविजेता बनने की लड़ाई अभी बहुत लम्बी है। आज के एपिसोड से जुड़ने वाले प्रतियोगियों के लिए भी 100% सम्भावना है महाविजेता बनने का। इसलिए मन लगाकर और नियमित रूप से (बिना किसी एपिसोड को मिस किए) सुलझाते रहिए हमारी सिने-पहेली, करते रहिए यह सिने मंथन, आज के लिए मुझे अनुमति दीजिए, अगले सप्ताह फिर मुलाक़ात होगी, नमस्कार।


The Radio Playback Originals (Click on the covers to reach out the Albums)



Popular Posts सर्वप्रिय रचनाएँ