Tuesday, September 17, 2013

मुंशी प्रेमचंद की मोटर की छींटें

इस लोकप्रिय स्तम्भ "बोलती कहानियाँ" के अंतर्गत हम हर सप्ताह आपको सुनवाते रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने अनुराग शर्मा के स्वर में रयुनासुके अकुतागावाकी जापानी कहानी "संतरे" का हिंदी अनुवाद सुना था।

आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित व्यंग्यात्मक कहानी मोटर की छींटें जिसे स्वर दिया है माधवी चारुदत्ता ने।

प्रस्तुत व्यंग्य का गद्य "भारत डिस्कवरी" पर उपलब्ध है। "मोटर की छींटें" का कुल प्रसारण समय 11 मिनट 17 सेकंड है। सुनिए और बताइये कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।





मैं एक निर्धन अध्यापक हूँ ... मेरे जीवन मैं ऐसा क्या ख़ास है जो मैं किसी से कहूं
 ~ मुंशी प्रेमचंद (१८८०-१९३६)


हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी हिन्दी कहानी


"जजमान का दिल देखकर ही मैं उनका निमंत्रण स्वीकार करता हूँ ... ”
 (मुंशी प्रेमचंद कृत "मोटर की छींटें" से एक अंश)


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यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाऊनलोड कर लें:
मोटर की छींटें MP3

#30th Story, Motor Ki Chhinten : Munshi Premchand Hindi Audio Book/2013/30. Voice: Madhavi Charudatta

4 comments:

Smart Indian - अनुराग शर्मा said...

मजेदार कहानी, सुन्दर पाठ! धन्यवाद माधवी!

Suman said...

बहुत सुन्दर कहानी, कहानी पाठ के लिए बहुत बहुत बधाई माधवी जी को !

Madhavi Charudatta said...

Thank you very much to both of you.

Madhavi Charudatta said...

Thank you very much to both of you.

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