Friday, September 20, 2013

लव की घंटी बजा रहे हैं ललित कुछ 'बेशरम' होकर

90 के दशक की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में इस जोड़ी का संगीत था, दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे , कुछ कुछ होता है, जो जीता वही सिकंदर  जैसी फिल्मों के नाम जुबाँ पे आते ही याद आते हैं जतिन ललित. फना  के बाद दोनों भाईयों ने अलग अलग काम करने का फैसला लिया, और अब एक लंबे अरसे बाद ललित लौटे हैं रणबीर कपूर अभिनीत बेशरम  के साथ. देखें क्या ललित अकेले दम पर वही पुराना सुरीला जादू फिर से पैदा कर पाए हैं या नहीं.   

जैसा कि हम बता चुके हैं कि ललित फिल्म के प्रमुख संगीतकार हैं पर यहाँ एक अतिथि संगीतकार के रूप में इश्क बेक्टर भी मौजूद हैं और इन्हीं का है शीर्षक गीत बेशरम . धुन कैची है, शब्द बेतरतीब हैं, ८० के दशक जैसा टेम्पो है गीत का, और फिल्म के शीर्षक गीत के रूप में एकदम सटीक है.

रणबीर पर फिल्माए ताजा हिट गीत दिल्ली वाली गर्ल फ्रेंड  की तर्ज पर ही लगता है हम लुट गए रे पिया आके तेरे मोहल्ले  गीत भी. तेज रिदम पर ममता शर्म और एश्वर्या निगम की दिलफेंक गायकी गीत को एक चार्टबस्टर बनाने में पूरी तरह समर्थ है.

किशोर कुमार के चुलबले गीतों का अंदाज़ झलकता है लव की घंटी   गीत में. सुजीत शेट्टी के साथ खुद रणबीर की भी आवाज़ है गीत में. राजीव बरनवाल ने शब्द भी अच्छे गढे है यहाँ. सुजीत की गायिकी में संभावनाएं नज़र आती है. इस तरह के खिलंदड गीतों को निभाना आसान नहीं है, हालांकि धुन चुराई हुई है और खुद ललित भी इसे स्वीकार कर चुके हैं, तो हम ललित को इस गीत के लिए बधाई देना जरूरी नहीं समझते.

ललित अपने स्वाभाविक फॉर्म में नज़र आते हैं अगले गीत दिल का जो हाल है  , गीत रोमांटिक तो है पर चुलबुला भी. पर अभिजीत और श्रेया की आवाज़ में वो जरूरी विरोधाभास नज़र नहीं आता. शब्द भी औसत हैं. बड़े नामों के बावजूद गीत सामान्य ही लगता है.

श्रेया पिछले गीत की कमी को सोनू के साथ पूरा करती नज़र आती है तू है  गीत में, बेहतर और अधिक सुरीला है ये गीत जहाँ धुन शब्द और गायिकी सभी एक दूसरे को जरूरी साथ देते हुए प्रतीत होते हैं, गीत में सोनू की आवाज़ बहुत देर बाद प्रवेश करती है, पर उन्हीं का गायन गीत को मुक्कमल करती है यहाँ.

श्रेया एक बार सुनाई देती है जोशीले मिका के साथ. मराठी लोक धुन पर आधारित गीत आ रे आ रे एक बार फिर औसत ही लगता है. हालाँकि गायकों ने कोई कसर नहीं छोड़ी है पर गीत में नयेपन का अभाव है.

तडके में कहीं कमी न रह जाए तो ललित ले आये मिका और सीनियर मेहदी के साथ. चल हैंड उठा के नचे  एक जोशीला डांस गीत है, जो सुनने से अधिक देखने में अधिक सुखद लगेगा. बेशरम का संगीत फिल्म के अनुरूप है, शायद लंबे समय तक दिल पर टिके रहने का दम ख़म न हों इनमें पर फिल्म को जरूरी ताम झाम देने में पूरी तरह समर्थ है. ललित यहाँ प्रीतम 'मोड' में हैं.

एल्बम के बहतरीन गीत - लव की घंटी, मोहल्ले, बेशरम 
हमारी रेटिंग - ३.७ 

1 comment:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

सुनते हैं इस फिल्म के गीत।

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