Tuesday, June 4, 2013

काजल कुमार का व्यंग्य एक था गधा

इस साप्ताहिक स्तम्भ "बोलती कहानियाँ" के अंतर्गत हम हर सप्ताह आपको सुनवाते रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने अनुराग शर्मा के स्वर में हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार सच्‍चिदानन्‍द हीरानन्‍द वात्‍स्‍यायन 'अज्ञेय' की भारत के विभाजन के दुष्काल पर आधारित मार्मिक कहानी "मुस्लिम-मुस्लिम भाई-भाई" का पाठ सुना था।

आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट काजल कुमार की व्यंग्यात्मक लघुकथा एक था गधा जिसे स्वर दिया है अनुराग शर्मा ने।

कहानी "एक था गधा" का गद्य कथा कहानी ब्लॉग पर उपलब्ध है। इस कथा का कुल प्रसारण समय 1 मिनट 36 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।

कवि, कथाकार और कार्टूनिस्ट काजल कुमार के बनाए चरित्र आपने अवश्य देखे होंगे। आज हम आपका परिचय करा रहे हैं उनकी एक कहानी से। काजल कुमार दिल्ली में रहते हैं।

हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी हिन्दी कहानी

एक दिन सियार को घास में स्वाद आ गया और वह घास भी खाने लगा
 (काजल कुमार रचित "एक था गधा" से एक अंश)





नीचे के प्लेयर से सुनें.


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 यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाऊनलोड कर लें:
एक था गधा MP3

#20th Story, Ek Tha Gadha: Kajal Kumar/Hindi Audio Book/2013/20. Voice: Anurag Sharma

4 comments:

ताऊ रामपुरिया said...

लाजवाब, गधा आखिर गधा ही रहेगा, बहुत ही सुंदर पढा आपने काजल कुमार जी की इस लघु कथा को, शुभकामनाएं.

रामराम.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

आह कैसा गधा है। अभी सुनते हैं।

Smart Indian said...

:)

Amit said...

बात तो पते की कह दी गयी है इस व्यंग्य के माध्यम से

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