शनिवार, 11 फ़रवरी 2017

चित्रकथा - 6: फ़िल्मी गीतों में ’आइ लव यू’!


अंक - 6

फ़िल्मी गीतों में ’आइ लव यू’!

“लो आज मैं कहती हूँ, आइ लव यू...”



'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के सभी श्रोता-पाठकों को सुजॉय चटर्जी का प्यार भरा नमस्कार। समूचे विश्व में मनोरंजन का सर्वाधिक लोकप्रिय माध्यम सिनेमा रहा है और भारत कोई व्यतिक्रम नहीं है। बीसवीं सदी के चौथे दशक से सवाक् फ़िल्मों की जो परम्परा शुरु हुई थी, वह आज तक जारी है और इसकी लोकप्रियता निरन्तर बढ़ती ही चली जा रही है। और हमारे यहाँ सिनेमा के साथ-साथ सिने-संगीत भी ताल से ताल मिला कर फलती-फूलती चली आई है। सिनेमा और सिने-संगीत, दोनो ही आज हमारी ज़िन्दगी के अभिन्न अंग बन चुके हैं। हमारी दिलचस्पी का आलम ऐसा है कि हम केवल फ़िल्में देख कर या गाने सुनने तक ही अपने आप को सीमित नहीं रखते, बल्कि फ़िल्म संबंधित हर तरह की जानकारियाँ बटोरने का प्रयत्न करते रहते हैं। इसी दिशा में आपके हमसफ़र बन कर हम आ रहे हैं हर शनिवार ’चित्रकथा’ लेकर। ’चित्रकथा’ एक ऐसा स्तंभ है जिसमें बातें होंगी चित्रपट की और चित्रपट-संगीत की। फ़िल्म और फ़िल्म-संगीत से जुड़े विषयों से सुसज्जित इस पाठ्य स्तंभ के पहले अंक में आपका हार्दिक स्वागत है। 

हिन्दी फ़िल्में प्यार के इर्द-गिर्द घूमती है, और प्यार के इज़हार का सबसे पुराना और सबसे लोकप्रिय तरीक़ा है "आइ लव यू" कहना। ज़ाहिर सी बात है कि हिन्दी फ़िल्मी गीतों में भी "आइ लव यू" कहने का चलन पुराना है। अधिकतर लोगों को इसका चलन 70 के दशक से लगता है, पर सच्चाई यह है कि 30 के दशक में ही इस प्रथा की शुआत हो चुकी थी। किस गीत में पहली बार सुनाई दिया था "आइ लव यू", फिर उसके बाद साल-दर-साल, दशक-दर-दशक कौन कौन से "आइ लव यू" वाले गीत बने, और कब से यह चलन दम तोड़ती दिखाई दी, इन्ही सब जानकारियों को बटोरकर आज ’चित्रशाला’ का ’वैलेन्टाइन डे स्पेशल एपिसोड’ प्रस्तुत कर रहे हैं।




गर आपसे यह पूछा जाए कि कुछ ऐसे हिन्दी फ़िल्मी गीतों के नाम गिनाइए जिनके मुखड़े में "आइ लव यू" आता है, तो आप आसानी से कम से कम चार पाँच गीत तो बता ही देंगे। लेकिन अगर कोई यह पूछे कि वह कौन सा पहला हिन्दी फ़िल्मी गीत था जिसमें ये तीन शब्द मुखड़े में कहे गए थे, तो शायद आपके पास इसका जवाब ना हो। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वह गीत था वर्ष 1940 में ’रेक्स पिक्चर्स’ के बैनर तले निर्मित फ़िल्म ’देशभक्त’। इस फ़िल्म में एक गीत था "आइ लव यू, आइ लव यू, तुम्हीं ने मुझको प्रेम सिखाया, सोए हुए हृदय को जगाया..."। गीत के गायकों की जानकारी तो मिल ना सकी पर इस फ़िल्म के संगीतकार थे वसन्त कुमार नायडू और गीतकार थे वाहिद क़ुरैशी और शेफ़्ता। यह गीत दरसल एक पैरडी गीत है जिसमें पिछले दशक के कुछ गीतों के मुखड़ों को लिया गया है। अब यह "आइ लव यू" वाला अंश क्या 30 के दशक के किसी मूल गीत से लिया गया है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। फिर इसके बाद 1944 में संगीतकार नौशाद के संगीत में गीतकार डी. एन. मधोक ने एक गीत लिखा था "माइ डिअर माइ डिअर, आइ लव यू, मेरा जिया ना लागे तेरे बिना, बोल कहाँ है तू"। फ़िल्म थी ’जीवन’। इसे ज़ोहराबाई अम्बालेवाली ने गाया था। ’रतन’ से पहले नौशाद ने अपनी शुरुआती फ़िल्मों में इस तरह के कई हल्के-फुल्के गीतों की रचना की थी जो आज विस्मृत हो चुके हैं। यह गीत बहुत ख़ास है क्योंकि ज़ोहराबाई की आवाज़ में और नौशाद के संगीत में ऐसे "हिंग्लिश" गीत की कल्पना करना बहुत मुश्किल है।

50 के दशक के शुरुआती सालों में "आइ लव यू" वाला कोई भी गीत सुनाई नहीं दिया, पर 1958 में एस. एच. बिहारी का लिखा और रवि का स्वरबद्ध किया फ़िल्म ’दुल्हन’ में आशा भोसले और गीता दत्त का गाया एक गीत आया जिसके बोल थे "आइ लव यू मैडम, ऐसे मचल के जाओ ना तुमको मेरी क़सम"। गीत एक स्टेज शो में फ़िल्माया गया जिसमें नन्दा और निरुपा राय क्रम से एक पश्चिमी आदमी और एक भारतीय नारी का भेस धर कर पर्फ़ॉर्म करते हैं। गीता दत्त की आवाज़ नन्दा को मिली है और आशा भोसले ने निरुपा राय के लिए। हिन्दी फ़िल्म गीत कोश के अनुसार इस गीत का दूसरा हिस्सा "तो फिर तुमको क्या माँगता मैडम... गोरे गोरे हाथों में बाजे कंगना" इस गीत का भाग-2 है।

राज कपूर की 1964 की फ़िल्म 'संगम' में एक सिचुएशन था कि जब राज कपूर और वैजयन्तीमाला अपने
Film- Sangam
हनीमून के लिए यूरोप के टूर पर जाते हैं, वहाँ अलग अलग देशों की सैर कर रहे होते हैं, और क्योंकि यह हनीमून ट्रिप है, तो प्यार तो है ही। तो यूरोप में फ़िल्माये जाने वाले इन दृश्यों के लिए एक पार्श्व-संगीत की आवश्यक्ता थी। पर राज कपूर हमेशा एक क़दम आगे रहते थे। उन्होंने यह सोचा कि पार्श्व-संगीत के स्थान पर क्यों न एक पार्श्व-गीत रखा जाये, जो बिल्कुल इस सिचुएशन को मैच करता हो! उन्होंने अपने दिल की यह बात शंकर-जयकिशन को बतायी। साथ ही कुछ सुझाव भी रख दिये। राज कपूर नहीं चाहते थे कि यह किसी आम गीत के स्वरूप में बने और न ही इसके गायक कलाकार लता, मुकेश या रफ़ी हों। शंकर और जयकिशन सोच में पड़ गये कि क्या किया जाये! उन दिनों जयकिशन चर्चगेट स्टेशन के पास गेलॉर्ड होटल के बोम्बिलि रेस्तोराँ में रोज़ाना शाम को जाया करते थे। उनकी मित्र-मंडली वहाँ जमा होती और चाय-कॉफ़ी की टेबल पर गीत-संगीत की चर्चा भी होती थी। उसी रेस्तोराँ में जो गायक-वृन्द ग्राहकों के मनोरंजन के लिए गाया करते थे, उनमें गोवा के कुछ गायक भी थे। उन्हीं में से एक थे विविअन लोबो। ऐसे ही किसी एक दिन जब जयकिशन 'संगम' के इस गीत के बारे में सोच रहे थे, विविअन लोबो वहाँ कोई गीत सुना रहे थे। जयकिशन को एक दम से ख़याल आया कि क्यों न लोबो से इस पार्श्व गीत को गवाया जाये! लोबो की आवाज़ में एक विदेशी रंग था, जो इस गीत के लिए बिल्कुल सटीक था। बस फिर क्या था, विविअन लोबो की आवाज़ इस गीत के लिए चुन ली गई। पार्श्व में बजने वाले 3 मिनट के सीक्वेन्स के लिए एक ऐसे गीत की आवश्यक्ता थी जिसमें कम से कम बोल हों पर संदेश ऐसा हो कि जो सिचुएशन को न्याय दिला सके। तब राज कपूर ने यह सुझाव दिया कि हनीमून के दृश्य के लिए सबसे सटीक और सबसे छोटा मुखड़ा है "आइ लव यू"। तो क्यों न अलग अलग यूरोपियन भाषाओं में इसी पंक्ति का दोहराव करके 3 मिनट के इस दृश्य को पूरा कर दिया जाये! सभी को यह सुझाव ठीक लगा, और पूरी टीम जुट गई "आइ लव यू" के विभिन्न भाषाओं के संस्करण ढूंढने में। अंग्रेज़ी के अलावा जर्मन ("ich liebe dich"), फ़्रेन्च ("j’ vous t’aime") और रूसी ("ya lyublyu vas"/ "Я люблю вас") भाषाओं का प्रयोग इस गीत में हुआ है, और साथ ही "इश्क़ है इश्क़" को भी शामिल किया गया है। इस तरह से गीत का मुखड़ा कुछ इस तरह का बना:


ich liebe dich, 
I love you.
j’ vous t’aime,
I love you.
ya lyublyu vas (Я люблю вас),
I love you.
ishq hai ishq,
I love you.


1966 की फ़िल्म ’अकलमन्द’ में पी. एल. संतोषी का लिखा, ओ. पी. नय्यर का स्वरबद्ध किया गीत आया "सच कहूँ सच कहूँ सच कहूँ सच, आइ लव यू वेरी मच"। रफ़ी साहब और आशा जी की युगल आवाज़ों में यह एक कमाल का गीत है पाश्चात्य धुनों पर आधारित। इस "हिंग्लिश" गीत में आशा जी ने अपनी आवाज़ में कमाल के वेरिएशन का प्रदर्शन दिया है। इस गीत के अगलए ही साल, 1967 में आशा भोसले का गाया एक और गीत आया "आइ लव यू, यू लव मी, ओ मेरे जीवन साथी..."। फ़िल्म थी ’रात अंधेरी थी’। अख़्तर रोमानी का लिखा यह गीत उषा खन्ना के संगीत में था। गीत हेलेन पर फ़िल्माया गया है।

70 के दशक के शुरु में ही आशा भोसले की आवाज़ में दो ’आइ लव यू’ के गीत आए जो सुपर-डुपर हिट साबित हुए। पहला गीत था उषा अय्यर (उथुप) के साथ गाया हुआ 1970 की फ़िल्म ’हरे रामा हरे कृष्णा’ का जुगलबन्दी गीत "आइ लव यू... क्या ख़ुशी क्या ग़म"। आनन्द बक्शी के लिखे और राहुल देव बर्मन के संगीतबद्ध किए इस गीत में आशा और उषा की आवाज़ों का कॉनट्रस्ट सर चढ़ कर बोलता है और आज भी यह गीत बेहद आकर्षक लगता है। और दूसरा गीत है 1973 की फ़िल्म ’यादों की बारात’ का किशोर कुमार के साथ गाया हुआ "मेरी सोनी मेरी तमन्ना झूठ नहीं है मेरा प्यार, दीवाने से हो गई ग़लती जाने दो यार, आइ लव यू"। मजरूह सुल्तानपुरी की गीत रचना और संगीत एक बार फिर पंचम का। दादा बर्मन, यानी सचिन देव बर्मन भी पीछे नहीं थे। 1976 में उन्होंने आशा भोसले से गवाया फ़िल्म ’बारूद’ का गीत "आइ लव यू यू लव मी, लो मोहब्बत हो गई, तेरी दो आँखों में मेरी दुनिया खो गई"। गीत लिखा आनन्द बक्शी ने और गीत सजा रीना रॉय के होठों पर।

80 के दशक के शुरु में ही "आइ लव यू" से सजा एक ऐसा गीत आया जिसने चारों तरफ़ धूम मचा दी।
Film - Khuddar
1982 में निर्मित पर 1986 में प्रदर्शित फ़िल्म ’ख़ुद्दार’ के गीत ’82 में ही जारी हो चुके थे। इस फ़िल्म में अमिताभ बच्चन और परवीन बाबी पर फ़िल्माया "अंग्रेज़ी में कहते हैं कि आइ लव यू" बेहद कामयाब साबित हुआ। और लता मंगेशकर ने पहली बार "आइ लव यू" कहा। साथ में थे किशोर कुमार। गीत मजरूह के और संगीत राजेश रोशन का। इस गीत के बाद तो लता जी ने कई गीतों में ये तीन बेशकीमती शब्द कहे। 1989 की फ़िल्म ’मिल गई मंज़िल मुझे’ में उनका एकल गीत था "मेरे अच्छे पिया मैंने ग़ुस्सा किया मुझे माफ़ कर दे, आइ लव यू, मेरी जान गुस्से क्यों दिल साफ़ कर दे"। यह आनन्द बक्शी - राहुल देव बर्मन की रचना थी। 1985 में एक कमचर्चित फ़िल्म आई थी ’आइ लव यू’ शीर्षक से जिसमें उषा खन्ना का संगीत था। इस फ़िल्म का शीर्षक गीत अनुराधा पौडवाल और किशोर दयाराम की आवाज़ों में था - "पहली बार मिले हैं, लेकिन ऐसा लगता है, कि जैसे हम तुम एक दूजे को सदियों से पहचानते हैं, आइ लव यू..."। 1986 में एक फ़िल्म आई थी ’प्यार हो गया’। फ़िल्म तो बुरी तरह असफल रही पर इस फ़िल्म का एक गीत ख़ूब चला था। शब्बीर कुमार और अलका यागनिक का गाया "रुकी रुकी साँसों से, तीन प्यारे लफ़ज़ों में, सब कुछ कह गई तू, आइ लव यू"। गीत के संगीतकार थे धीरज-धनक और गीतकार थे जे. व्यास। आश्चर्य की बात यह है कि यह गीत दरसल 1982 में बनी पाक़िस्तानी फ़िल्म ’आइ लव यू’ का शीर्षक गीत था, बिल्कुल वही मुखड़ा, हू-ब-हू वही संगीत। यहाँ तक कि अन्तरों के बोल भी वही। गीतकार तसलीम फ़ज़ली, मसरूर अनवर और ख़्वाजा परवेज़, संगीत एम. अशरफ़ का, और आवाज़ें थीं नहीद अख़्तर, हमीदा अख़्तर, अहमद रुशदी, ए. नय्यर और मेहनाज़ की। समझ नहीं आया कि जे. व्यास और धीरज-धनक को इस तरह की चोरी करने की ज़रूरत क्यों आन पड़ी!


1987 की ब्लॉकबस्टर फ़िल्म ’मिस्टर इंडिया’ में "आइ लव यू" से सजा एक सुपरहिट गीत था। किशोर
Film - Mr India
कुमार और अलिशा चिनॉय की आवाज़ों में इस सेन्सुअस गीत ने धूम मचा दी। "काटे नहीं कटते दिन ये रात, कहनी थी तुमसे जो दिल की बात, लो आज मैं कहती हूँ, आइ लव यू..."। जावेद अख़्तर के बोल, लक्ष्मीकान्त-प्यारेलाल का संगीत। 1989 की फ़िल्म ’मैंने प्यार किया’ के अंताक्षरी गीत में इसी मुखड़े का सहारा लेकर भाग्यश्री ने सलमान ख़ान को "आइ लव यू" कहा था लता मंगेशकर की आवाज़ के ज़रिए। 90 के दशक में तो जैसे "आइ लव यू" वाले गीतों की लड़ी लग गई। 1990 में दो लोकप्रिय गीत आए। पहला फ़िल्म ’जंगल लव’ से "लैला ने कहा जो मजनूं से, रांझा ने कहा जो हीर से, वही मुझसे कहदे तू, आइ लव यू", जिसे अनुराधा और मनहर ने गाया, संगीत आनन्द-मिलिन्द का, गीत समीर का। दूसरा गीत अलका यागनिक की आवाज़ में फ़िल्म ’महासंग्राम’ से। माधुरी दीक्षित पर फ़िल्माया यह मस्ती भरा गीत है "आइ लव यू प्यार करू छू..."।


एक अकेले 1991 के साल में ही कम से कम तीन गीत बने। पहला गीत था फ़िल्म ’सौदागर’ का जिसने
Film- Saudagar
"इलु इलु" को हर आम आदमी के होठों पर चढ़ा दिया। लगभग 10 मिनट के इस गीत में बड़ी सुन्दरता से ’इलु इलु’ यानी ’आइ लव यू’ का अर्थ समझाया गया है। आनन्द बक्शी और लक्ष्मीकान्त-प्यारेलाल की जोड़ी का यह कमाल था। कविता कृष्णमूर्ति, मनहर उधास, सुखविन्दर सिंह और उदित नारायण की आवाज़ों में यह गीत लोकप्रियता की चोटी पर पहुँचा था। इसी साल की एक और ब्लॉकबस्टर फ़िल्म थी ’फूल और काँटे’ जिसने अजय देवगन को रातों रात स्टार बना दिया था। इस फ़िल्म के तमाम हिट गीतों के अलावा एक सेन्सुअस गीत था। ’मिस्टर इंडिया’ के गीत को रिक्रीएट करने की कोशिश में समीर और नदीम-श्रवण ने अलिशा चिनॉय की आवाज़ का सहारा लिया। साथ में उदित नारायण और गीत के बोल "दिल यह कहता है कानों में तेरे, थोड़ा करीब आके बाहों में तेरे, धीरे से मैं एक बात कहूँ, क्या, आइ लव यू, आइ लव यू"। और 1991 का तीसरा गीत था ’जान की कसम’ फ़िल्म का "I just called to say I love you"। यह भी समीर-नदीम-श्रवण की देन है। पर गीत प्रेरित (चोरित) है 1984 की स्टीवी वन्डर के गाए मशहूर व पुरस्कृत गीत "I just called to say I love you" से। ’जान की कसम’ में अनुराधा पौडवाल और उदित नायारण ने इसी धुन पर गाया "मोहब्बत की पहली एक नज़र में तूने मुझको पा लिया था ऐ सनम, जो मैं कभी भी कह ना सकी, मेरे दिल ने वो कह दिया, I just called to say I love you"। और इसी धुन पर राम-लक्ष्मण ने भी बांधा था ’मैंने प्यार किया’ फ़िल्म के शीर्षक गीत को। बस "आइ लव यू" की जगह आ गया "शायद मैंने प्यार किया"।


1992 में ब्लॉकबस्टर फ़िल्म ’राजु बन गया जेन्टलमैन’ में शाहरुख़ ख़ान और जुहि चावला पर फ़िल्माया
Film - Yeh Dillagi
कुमार सानू व अलका यागनिक का गाया गीत "सीने में दिल है, दिल में है धड़कन, धड़कन में है तू ही तू, तू मेरी पहली तमन्ना, तू मेरी आख़िरी आरज़ू, आइ लव यू" बहुत लोकप्रिय रहा। देव कोहली के बोल, जतिन-ललित का संगीत। इसी साल फ़िल्म ’युधपथ’ में भी एक गीत था फ़ैज़ अनवर का लिखा। दिलीप सेन - समीर सेन के संगीत में कुमार सानू व कविता कृष्णमूर्ति का गाया "छाने लगा कैसा नशा, जाने मुझे ये क्या हुआ, ऐसा लगे धीरे से दिल यह कहे, ओ आइ लव यू..." ज़्यादा चर्चित नहीं रहा। 1994 में तीन गीत बने; पहला फ़िल्म ’रखवाले’ में मोहम्मद अज़ीज़ का गाया "आइ लव यू", दूसरा फ़िल्म ’गोपी किशन’ में कुमार सानू - अलका यागनिक का गाया "दिल की बात लबों पे लाऊँ, आजा तुझको आज बताऊँ, आइ लव यू...", ये दोनों ही गीत ज़्यादा कामयाब नहीं हुए। पर तीसरा गीत फ़िल्म ’ये दिल्लगी’ का हिट हुआ; लता मंगेशकर और कुमार सानू का गाया "होठों पे बस तेरा नाम है, तुझे चाहना मेरा काम है, तेरे प्यार में पागल हूँ मैं सुबह शाम, जानम आइ लव यू, यू लव मी"। गीत का फ़िल्मांकन कामुक है, ऐसे गीत में लता जी की आवाज़ सुन कर एक अलग ही मज़ा आता है। 
"आइ लव यू" के साथ अलिशा चिनॉय का रिश्ता जारी रहा 1995 में, जव अनु मलिक ने उनसे और कुमार सानू से गवाया फ़िल्म ’गुंडाराज’ का गीत "आँखों में बसा कर ख़्वाब तेरे मैं झूमती रहती हूँ, तेरा नाम हथेली पे लिख कर मैं चूमती रहती हूँ, आइ लव यू, आइ लव यू"। यह गीत काफ़ी हिट हुआ जिसे लिखा था ज़फ़र गोरखपुरी ने। 1996 में "आइ लव यू" का एक बेहद लोकप्रिय गीत तो आया लेकिन इसमें प्रेमी ने अपनी प्रेमिका से नहीं बल्कि एक बच्चे ने अपने पिता से "आइ लव यू" कहा था। जी हाँ, फ़िल्म ’अकेले हम अकेले तुम’ में आदित्य नारायण और उदित नारायण का गाया "तू मेरा दिल, तू मेरी जान, ओ आइ लव यू डैडी" अनु मलिक के उत्कृष्ट गीतों में से एक है। इसे मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखा था। 1997 की फ़िल्म ’दावा’ में भी एक बेहद हिट गीत था "दिल में है तू, धड़कन में है तू, ओ माइ डारलिंग् आइ लव यू..."। गीत - रानी मलिक, संगीत - जतिन-ललित, गायक - कुमार सानू व पूर्णिमा। 

90 के दशक के साथ-साथ जैसे फ़िल्मी गीतों की धारा ने एक मोड़ ले ली। अब गीतों में प्यार के इज़हार
Film - Mujhse Dosti Karoge
कुछ अलग ही तरीक़ों से होने लगे। अब "आइ लव यू" कहने का चलन भी धीरे धीरे ख़त्म होने लगा। 2000 के दशक में गिनती भर के गीत बने। उल्लेखनीय गीतों में एक था 2002 का फ़िल्म ’मुझसे दोस्ती करोगे’ का सोनू निगम व अलिशा चिनॉय का गाया "आज के लड़के आइ टेल यू, कितने लल्लु व्हाट टू डू, कोई मुझे पूछे हाउ आर यू, कोई मुझे बोले हाउ डू यू डू, कोई कभी मुझसे ना कहे ओ माइ डारलिंग् आइ लव यू..."। गीत आनन्द-बक्शी, संगीत राहुल शर्मा। यह बक्शी साहब के लिखे अन्तिम गीतों में से एक है। हृतिक रोशन और करीना कपूर पर फ़िल्माया यह गीत यंग जेनरेशन के लिए जैसे एक ताज़े हवा के झोंके के साथ आया, पर फ़िल्म के पिट जाने से गीत भी लम्बा नहीं चला। फिर 2008 में आतिफ़ असलम का गाया फ़िल्म ’रेस’ में गीत आया "पहली नज़र में कैसा जादू कर दिया... बेबी आइ लव यू..."। यह गीत ख़ूब चला। उन दिनों आतिफ़ असलम छाये हुए थे। समीर का गीत, प्रीतम का संगीत। प्रीतम के ही संगीत में 2011 की फ़िल्म ’बॉडीगार्ड’ फ़िल्म में ऐश किंग और क्लिन्टन सेरेजो का गाया नीलेश मिश्र का लिखा गीत आया "दिल का यह क्या राज़ है, जाने क्या कर गए, जैसे अंधेरों में तुम चांदनी भर गए, करे चाँद तारों को मशहूर इतना क्यों, कमबख़्त इनसे भी ख़ूबसूरत है तू, आइ लव यू"।


आज "आइ लव यू" वाले गीत नहीं बनते। क्यों नहीं बनते? शायद इसलिए कि फ़िल्म समाज का आइना है, और समाज में आजकल "आइ लव यू" कहने की परम्परा शायद ख़त्म होती जा रही है। आपने आख़िरी बार "आइ लव यू" कब कहा था, याद है कुछ???




आपकी बात


पिछले अंक में ’गुलज़ार के गीतों में विरोधाभास’ शीर्षक पर लिखा लेख आपको पसन्द आया, यह देख कर हमें भी अच्छा लगा। हमारी नियमित पाठक अनीता जी ने टिप्पणी की है कि गुलज़ार के गीत हर उम्र के श्रोता को लुभाते हैं, उनके गीतों में विरोधाभास ही उनकी पहचान है, सुंदर आलेख के लिए बधाई! अनीता जी, आपने बिल्कुल सच कहा है गुलज़ार साहब के बारे में, और आपको लेख पसन्द आया, यह जानकर हमें अच्छा लगा, आपको धन्यवाद।


आख़िरी बात

’चित्रकथा’ स्तंभ का आज का अंक आपको कैसा लगा, हमें ज़रूर बताएँ नीचे टिप्पणी में या soojoi_india@yahoo.co.in के ईमेल पते पर पत्र लिख कर। इस स्तंभ में आप किस तरह के लेख पढ़ना चाहते हैं, यह हम आपसे जानना चाहेंगे। आप अपने विचार, सुझाव और शिकायतें हमें निस्संकोच लिख भेज सकते हैं। साथ ही अगर आप अपना लेख इस स्तंभ में प्रकाशित करवाना चाहें तो इसी ईमेल पते पर हमसे सम्पर्क कर सकते हैं। सिनेमा और सिनेमा-संगीत से जुड़े किसी भी विषय पर लेख हम प्रकाशित करेंगे। आज बस इतना ही, अगले सप्ताह एक नए अंक के साथ इसी मंच पर आपकी और मेरी मुलाक़ात होगी। तब तक के लिए अपने इस दोस्त सुजॉय चटर्जी को अनुमति दीजिए, नमस्कार, आपका आज का दिन और आने वाला सप्ताह शुभ हो!




शोध,आलेख व प्रस्तुति : सुजॉय चटर्जी 
प्रस्तुति सहयोग : कृष्णमोहन मिश्र  



रेडियो प्लेबैक इण्डिया 

3 टिप्‍पणियां:

Pooja Anil ने कहा…

बहुत बढ़िया आलेख सुजॉय जी। इतने I love songs की हमने कल्पना भी नहीं की थी। :)
70 के पहले वाले गाने सुनवा भी देते, खास कर 30 और 40 के गाने।

आलेख की आखिरी लाइन तो समाज की वस्तुस्थिति का आइना है, सच।

Pankaj Mukesh ने कहा…

Dhanyawaad ek utkrisht post ke liye. Waise to maine last time I L U 2009 mein kaha, magara aaj fir kahata hoon, Radioplaybackindia !!! I Love You !!!
super script and super khoj !!

Sujoy Chatterjee ने कहा…

Dhanyawaad Pooja ji aur Pankaj ji

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