Saturday, February 7, 2015

"हर कोई चाहता है एक मुट्ठी आसमाँ..." - जानिये, किस भागमभाग में रेकॉर्ड हुआ था यह गाना


एक गीत सौ कहानियाँ - 52
 

हर कोई चाहता है एक मुट्ठी आसमाँ...




'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के सभी श्रोता-पाठकों को सुजॉय चटर्जी का प्यार भरा नमस्कार। दोस्तों, हम रोज़ाना रेडियो पर, टीवी पर, कम्प्यूटर पर, और न जाने कहाँ-कहाँ, जाने कितने ही गीत सुनते हैं, और गुनगुनाते हैं। ये फ़िल्मी नग़में हमारे साथी हैं सुख-दुख के, त्योहारों के, शादी और अन्य अवसरों के, जो हमारे जीवन से कुछ ऐसे जुड़े हैं कि इनके बिना हमारी ज़िन्दगी बड़ी ही सूनी और बेरंग होती। पर ऐसे कितने गीत होंगे जिनके बनने की कहानियों से, उनसे जुड़े दिलचस्प क़िस्सों से आप अवगत होंगे? बहुत कम, है न? कुछ जाने-पहचाने, और कुछ कमसुने फ़िल्मी गीतों की रचना प्रक्रिया, उनसे जुड़ी दिलचस्प बातें, और कभी-कभी तो आश्चर्य में डाल देने वाले तथ्यों की जानकारियों को समेटता है 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' का यह स्तम्भ- 'एक गीत सौ कहानियाँ'। इसकी 52वीं कड़ी में आज जानिये फ़िल्म 'एक मुट्ठी आसमाँ' के शीर्षक गीत "हर कोई चाहता है एक मुट्ठी आसमाँ..." के बारे में जिसे किशोर कुमार ने गाया था।


1973 की एक ऑफ़-बीट फ़िल्म थी 'एक मुठी आसमाँ'। निर्माता, निर्देशक व लेखक विरेन्द्र सिन्हा निर्मित व निर्देशित यह एक कम बजट की फ़िल्म थी जिसमें मुख्य कलाकार थे विजय अरोड़ा, योगिता बाली, प्राण, राधा सलूजा, महमूद आदि। वीरेन्द्र सिन्हा मूलत: एक संवाद लेखक थे जिन्होंने 'हिमालय की गोद में', 'दो बदन', 'मिलन', 'कल आज और कल' और 'ज़हरीला इन्सान' जैसी चर्चित फ़िल्मों के संवाद लिखे हैं। बतौर निर्माता उनकी केवल तीन फ़िल्में आयीं - 'बुनियाद', 'ज़हरीला इन्सान' और 'एक मुट्ठी आसमाँ'। किशोर कुमार की आवाज़ के प्रति अत्यधिक लगाव के कारण वीरेन्द्र सिन्हा ने अपनी इन तीनों फ़िल्मों में उन्हें गवाया। 1972 की फ़िल्म 'बुनियाद' के बुरी तरह असफल होने के बाद, 'एक मुट्ठी आसमाँ' के लिए उनका बजट और कम हो गया। इतनी तंग हालत थी कि सोच विचार के बाद यह निर्णय लिया गया कि फ़िल्म में केवल एक ही गीत रखा जायेगा, जो फ़िल्म का शीर्षक गीत भी होगा और किशोर कुमार की आवाज़ में ही होगा। इस गीत के अलग अलग अन्तरे पूरे फ़िल्म में कई बार आते रहेंगे तो गीत की कमी पूरी होती रहेगी। इस एक गीत के लिए गीतकार इन्दीवर और संगीतकार मदन मोहन को कार्यभार सौंपा गया। फ़िल्म की कहानी और अलग-अलग सिचुएशन के हिसाब से इन्दीवर ने गीत के सारे अन्तरे लिखे और जब सारे अन्तरे और इन्टरल्यूड म्युज़िक को जोड़ा गया तो गीत की कुल अवधि बनी करीब करीब 9 मिनट और 25 सेकण्ड। गीत का एक हिस्सा प्राण पर फ़िल्माया गया और बाक़ी नायक विजय अरोड़ा पर। यह गीत बन कर तैयार हो गया, पर इस फ़िल्म से जुड़े सभी को केवल एक गीत वाली बात खटक रही थी। सभी को कम से कम एक डुएट गीत की ज़रूरत महसूस हो रही थी क्योंकि फ़िल्म में एक नहीं दो दो नायिका मौजूद थीं। ऐसे में जब इन्दीवर और मदन मोहन ने "प्यार कभी कम ना करना सनम" जैसा एक श्योर-शॉट हिट गीत बना डाले तो वीरेन्द्र सिन्हा भी इसे रेकॉर्ड और पिक्चराइज़ेशन  करने का फ़ैसला लिया। किशोर दा तो थे ही, पर इस युगल गीत के लिए लता मंगेशकर को गवाने का बजट विरेन्द्र सिन्हा के पास नहीं था। इसलिए वाणी जयराम को इस गीत के लिए चुन लिया गया जिन्होंने हाल ही में 'गुड्डी' में गीत गा कर हिन्दी फ़िल्म इण्डस्ट्री में हलचल पैदा कर दी थी। और यह डुएट फ़िल्माया गया विजय अरोड़ा और राधा सलूजा पर। तो इस तरह से 'एक मुट्ठी आसमाँ' में दो गीत रखे गये।

किशोर कुमार और मदन मोहन
अब ज़िक्र 'एक मुट्ठी आसमाँ' के शीर्षक गीत के रेकॉर्डिंग की। मदन मोहन ने किशोर कुमार से रेकॉर्डिंग की बात की, उन्हें रेकॉर्डिंग की तारीख़ बतायी और किशोर कुमार ने उन्हें हाँ भी कर दी। जब रेकॉर्डिंग की तारीख़ करीब आयी तो किशोर कुमार बड़े धर्मसंकट में फँस गये। दरअसल बात यह थी कि रेकॉर्डिंग की जो तारीख़ तय हुई थी, उसी दिन किशोर कुमार को शाम चार बजे की फ़्लाइट से विदेश यात्रा पर जाना था। उन्हें शोज़ के लिए एक ओवरसीस ट्रिप पर जाना था। सिर्फ़ यही बात होती तो सुबह रेकॉर्डिंग ख़त्म करके वो शाम की फ़्लाइट पकड़ सकते थे, पर बात यह थी कि उसी दिन उन्होंने राहुल देव बर्मन को भी रेकॉर्डिंग के लिए सुबह का समय दे रखा था। इतनी बड़ी गड़बड़ किशोर दा ने कैसे की, यह अब बताना मुश्किल है। इतनी टाइट शिड्यूल के बावजूद उन्होंने ना तो मदन मोहन की रेकॉर्डिंग कैंसिल की और ना ही पंचम की। वो किसी को भी निराश नहीं करना चाहते थे और उन्हें पता था कि रेकॉर्डिंग कैंसिल करने का मतलब निर्माता के पैसों की बरबादी करना है, जो वो नहीं चाहते थे। ख़ैर, रेकॉर्डिंग का वह दिन आ गया। मदन मोहन के गाने की रेकॉर्डिंग 'फ़ेमस स्टुडियो' में होनी थी, और पंचम की रेकॉर्डिंग 'फ़िल्म सेन्टर' में। दोनों जगह एक दूसरे से काफ़ी दूर थे। किशोर कुमार को सुबह 11 बजे तक पंचम के साथ रेकोर्डिंग करनी थी और उसके बाद उन्हें मदन जी के रेकॉर्डिंग पर पहुँच जाना था। एयरपोर्ट पर विशेष सन्देश पहुँचाया भी गया था कि उन्हें 'चेक-इन' करने में विलम्ब हो सकता है, तो यह बात ध्यान में रखी जाये। 2 बजे तक रेकॉर्डिंग ख़त्म करके उन्हें सीधे एयरपोर्ट की तरफ़ निकलना था, ऐसी तैयारी के साथ किशोर दा घर से निकले थे। पर सब कुछ योजना के अनुसार कहाँ हो पाता है भला? पंचम की रेकॉर्डिंग शुरू तो समय पर ही हुई थी पर समय लम्बा खींच गया, और किशोर दा भी उसमें ऐसे मगन हो गए कि 11 कब बज गये उन्हें पता ही नहीं चला। नतीजा यह हुआ कि उन्हें मदन मोहन की रेकॉर्डिंग में जाने का ख़याल ही नहीं आया। उधर 'फ़ेमस स्टुडियो' में मदन मोहन रेकॉर्डिंग की सारी तैयारी कर किशोर का इन्तज़ार कर रहे थे। दो घन्टे तक इन्तज़ार करने पर जब किशोर कुमार नहीं आये तो मदन जी का पारा थोड़ा खिसकने लगा। अपने एक सहायक को बुलवाने भेजा। वो शख्स वहाँ पहुँचकर किशोर कुमार को जब बताया कि मदन साहब उनका स्टुडियो में इन्तज़ार कर रहे हैं गुस्से में, तो किशोर कुमार के होश ठिकाने आ गये। दोपहर हो चुकी थी। शाम को फ़्लाइट भी पकड़नी थी। और इधर गाने का कुछ काम बचा हुआ था। अब करें तो क्या करें! तब किशोर कुमार ने सोचा कि पंचम तो दोस्त है, उसे तो वो किसी न किसी तरह सम्भाल ही लेंगे, मगर मदन मोहन को सम्भालना भारी पड़ जायेगा। इसलिए वो पंचम के इधर-उधर होते ही चुपचाप पीछे के दरवाज़े से भागे और सीधे 'फ़ेमस स्टुडियो' पहुँच गये। वहाँ पहुँच कर मदन मोहन जी से माफ़ी माँगी, और रेकॉर्डिंग शुरू की। अब इधर जब पंचम को पता चला कि किशोर स्टुडियो में दिख नहीं रहे हैं तो उन्होंने किशोर की तलाश शुरू कर दी। काफ़ी देर खोजने के बाद पंचम को पता चला कि मदन जी का एक सहायक वहाँ आया था और उन्हें 'फ़ेमस स्टुडियो' ले गये हैं। अब पंचम भागे 'फ़ेमस स्टुडियो'। पहुँच कर देखा कि किशोर कुमार मदन जी का गाना रेकॉर्ड कर रहे थे। अब दोनो म्युज़िक डिरेक्टर्स को एक साथ देख कर किशोर कुमार डर गये। वो तुरन्त पंचम के पास आये और उनसे नुरोध किया कि उन्हें थोड़ा समय दे दो, बस इनका गाना पूरा करते ही तुम्हारे पास आता हूँ और तुम्हारा गाना पूरा करके ही मैं फ़्लाइट पकड़ूंगा। तो इस तरह किशोर ने पंचम को किसी तरह शान्त करके वापस भेज दिया, और मदन मोहन के पास जाकर बोले कि माफ़ कीजिये मैं आपकी रेकॉर्डिंग के बारे में भूल ही गया था और उधर पंचम का गाना भी अधूरा छोड़ कर आया हूँ; अगर हो सके तो थोड़ा जल्दी कर लीजिये ताकि विदेश जाने से पहले उसका गाना भी रेकॉर्ड हो जाये वरना वो अटक जायेगा। तब मदन मोहन ने फ़टाफ़ट रेकॉर्डिंग शुरू की और एक टेक में ही यह इतना लम्बा गीत रेकॉर्ड हो गया, और बन गया किशोर कुमार का एक मास्टरपीस गीत। किशोर वहाँ से फ़टाफ़ट पंचम के पास भागे और उनका गाना भी कम्प्लीट किया। और इस तरह भागमभाग में रेकॉर्ड हुए दो गीत। एक तो था "हर कोई चाहता है एक मुट्ठी आसमाँ", पर पंचम का वह कौन सा गीत था यह मैं नहीं खोज पाया। क्या आप में से किसी को पता है कि वह दूसरा गीत कौन सा था जो उस दिन पंचम के वहाँ रेकॉर्ड हुआ था? आपको यदि राहुलदेव बर्मन के उस गीत की जानकारी हो तो नीचे दिये गए ई-मेल आई.डी. पर अवश्य सूचित करें। और अब आप 'एक मुट्ठी आसमाँ' का वह गीत सुनिए।

फिल्म एक मुट्ठी आसमाँ : 'हर कोई चाहता है एक मुट्ठी आसमाँ...' : किशोर कुमार : संगीत मदन मोहन : गीत इन्दीवर 



अब आप भी 'एक गीत सौ कहानियाँ' स्तम्भ के वाहक बन सकते हैं। अगर आपके पास भी किसी गीत से जुड़ी दिलचस्प बातें हैं, उनके बनने की कहानियाँ उपलब्ध हैं, तो आप हमें भेज सकते हैं। यह ज़रूरी नहीं कि आप आलेख के रूप में ही भेजें, आप जिस रूप में चाहे उस रूप में जानकारी हम तक पहुँचा सकते हैं। हम उसे आलेख के रूप में आप ही के नाम के साथ इसी स्तम्भ में प्रकाशित करेंगे। आप हमें ईमेल भेजें cine.paheli@yahoo.com के पते पर।



खोज, आलेख व प्रस्तुति : सुजॉय चटर्जी
प्रस्तुति सहयोग: कृष्णमोहन मिश्र 

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