Tuesday, January 20, 2015

अनुराग शर्मा की लघुकथा गुरु का ऑडियो

इस लोकप्रिय स्तम्भ "बोलती कहानियाँ" के अंतर्गत हम हर सप्ताह आपको सुनवाते रहे हैं नई, पुरानी, अनजान, प्रसिद्ध, मौलिक और अनूदित, यानि के हर प्रकार की कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने अनुराग शर्मा के स्वर में अनुराग शर्मा की प्रवासी कहानी "कंजूस मक्खीचूस" का पाठ सुना था।

आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं अनुराग शर्मा की ही एक अन्य लघुकथा, गुरु जिसे स्वर दिया है अनुराग शर्मा ने।

प्रस्तुत लघुकथा "गुरु" का गद्य "बर्ग वार्ता ब्लॉग" पर उपलब्ध है। "गुरु" का कुल प्रसारण समय 3 मिनट 56 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।



प्रश्न कठिन हो जाते हैं,
हर उत्तर पे इतराते हैं
मैं चिंता में घुल जाता हूँ,
चलूँ तो पथ डिग जाते हैं।
 ~ अनुराग शर्मा

हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी हिन्दी कहानी

"दोनों कान हाथ से पकड़कर उसे एक झटके से अपने चारों और घुमाना, कभी झाड़ियों से इकट्ठी की गई पतली संटियों से सूतना, तो कभी मुर्गा बनाकर पीठ पर ईंटें रखा देना।”
 (अनुराग शर्मा कृत लघुकथा "गुरु" से एक अंश)


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यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाऊनलोड कर लें:
गुरु MP3

#Third Story, Guru: Anurag Sharma Hindi Audio Book/2015/03. Voice: Anurag Sharma

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