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बॉलीवुड में उतरी नूरां बहनें तो शेखर रव्जिवानी भी पहुंचें माईक के पीछे

ताज़ा सुर ताल # 2014-06


खुद गायक सोनू निगम मानते हैं कि संगीतकार विशाल ओर शेखर न सिर्फ एक बहतरीन संगीतकार जोड़ी है बल्कि दोनों ही बहुत बढ़िया गायक भी है. विशाल तो अन्य बड़े संगीतकारों जैसे शंकर एहसान लॉय और विशाल भारद्वाज के लिए भी गायन कर चुके हैं. आज हम सुनेगें, इस जोड़ी के दूसरे संगीतकार की रूमानी गायिकी. दोस्तों क्या आप जानते हैं कि विशाल दादलानी और शेखर रव्जिवानी को प्यार में कभी कभी  के लिए अलग अलग तौर पर संगीतकार चुना गया था, चूँकि दोनों एक दूसरे से परिचित थे तो इन्होने अपनी अपनी धुनों को एक दूसरे के साथ बांटा और इसी दौरान उन्हें महसूस हुआ कि वो मिलकर कुछ बड़ा धमाल कर सकते हैं. यहीं से शुरुआत हुई विशाल शेखर की ये जोड़ी. ओम शान्ति ओम  के बाद वो शाहरुख के पसंदीदा संगीतकारों में आ गए, और पिछले ही साल चेन्नई एक्सप्रेस  की कामियाबी ने इस समीकरण को और मजबूत कर दिया. शाहरुख के साथ साथ निर्देशक करण जौहर भी उनके खास मुरीद रहे हैं, करण द्वारा निर्मित बहुत सी फिल्मों में विशाल शेखर सुरों का जादू चला चुके हैं. इसी कड़ी की ताज़ा पेशकश है हँसी तो फँसी  जहाँ विशाल शेखर के साथ जुड़े हैं गीतकार अमिताभ भट्टाचार्य. शेखर ने इस रोमांटिक गीत के लिए अमिताभ से एक कैची शब्द की फरमाईश की. अमिताभ ने उन्हें शब्द दिया बेतहाशा, मगर तभी उन्हें एक और शब्द भी याद आया जहेनसीब , इस शब्द के आस पास जब शेखर ने धुन संवारी तो उन्होंने बेतहाशा को भी मुखड़े में रखा, क्योंकि अमिताभ का सुझाया ये पहला शब्द भी उन्हें बेहद पसंद आया था. तो लीजिए सुनिए जेहनसीब जिसे गाया है खुद शेखर ने, साथ दिया है चिन्मई श्रीपदा ने.
     

आज के एपिसोड का दूसरा गीत वो है जिसका बहुत दिनों से इन्तेज़ार था, तब से, जब से इरशाद कामिल ने फेसबुक पर इस गीत की रिकॉर्डिंग की खबर दी और नूरां बहनों की तारीफ की थी. नूरां बहनें यानी ज्योति और सुल्ताना नाम की दो कमसिन उम्र गायिकाएं, जिनकी आवाज़ और अदायगी बड़े बड़े सूफी गायकों को भी हैरत में डाल चुकी है. ऐसा लगता है जैसे ये आवाजें कई जन्मों से खलाओं में गूँज रही थी, और सदियों का रियाज़ इन्हें कुदरती तौर पर नसीब हो गया हो. एम् टी वी पर जुगनी  गाकर मशहूर हुई नूरां बहनें सीधे ही रहमान के स्टूडियो में दाखिल हुई और पटखा गुडिये  जैसा अनूठा गीत श्रोताओं के लिए तैयार हो गया. ये है फिल्म हाईवे  के लिए रहमान और इरशाद कामिल का तोहफा. वैसे आपको बताते चलें कि पहले इम्तियाज़ अली की इस नई फिल्म के लिए संगीत के नाम पर सिर्फ पार्श्व संगीत तक सीमित रहने का ही इरादा था, पर सौभाग्य से फिल्म की टीम ने इस फैसले को बदल दिया और अब इस एल्बम में है ९ एकदम ताज़े गीत, जिनका जिक्र हम आगे भी करेगें, फिलहाल सुनिए सूफी संगीत का ये जादू. 


Comments


ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन अब मृत परिजनों से भी हो सकेगी वीडियो चैट - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

बेहतरीन पोस्ट। मन आनंद से भर गया।

दोनो गीत बेहतरीन हैं और संगीत? क्या कहने! लाज़वाब।..आभार आपका।
AVADH said…
सचमुच दोनों गीत बहु अच्छे लगे.
धन्यवाद
अवध लाल
Anonymous said…
wow

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