रविवार, 17 फ़रवरी 2013

मर्डर ३ में फिर ले आया दिल प्रीतम और सैयद को एक साथ.

प्लेबैक वाणी -34 - संगीत समीक्षा - मर्डर ३



भट्ट कैम्प की फिल्मों के बारे में हम पहले भी ये कह चुके हैं कि ये एक ऐसा बैनर है जो कहानी की जरुरत के हिसाब से एल्बम में गीतों को सजाता है, जबरदस्ती का कोई आईटम नहीं, कोई गैर जरूरी ताम झाम नहीं. ये एक ऐसा बैनर है जहाँ आज भी मेलोडी और शाब्दिक सौन्दर्य को ही तरजीह दी जाती है. 

आईये इस बैनर की नई पेशकश ‘मर्डर ३’ के संगीत के बारे में जानें. ‘मर्डर’ के पहले दो संस्करणों का संगीत बेहद सफल और मधुर रहा हैं, विशेषकर अनु मालिक का रचे पहले संस्करण के गीतों को श्रोता अब तक नहीं भूले हैं. ‘मर्डर ३’ के संगीतकार हैं प्रीतम और गीतकार हैं सैयद कादरी.


रोक्सेन बैंड के मुस्तफा जाहिद की आवाज़ में है “हम जी लेंगें”. मुस्तफा की आवाज़ अन्य रोक् गायकों से कुछ अलग नहीं है, पर शब्दों से सैयद ने गीत को दिलचस्प बनाये रखा है – ‘किसको मिला संग उम्र भर का यहाँ, वो हो रुलाये दिल चाहे जिसको सदा...’, गीत युवा दिलों को ख़ासा आकर्षित करेगा क्योंकि प्रेम और दिल टूटने के अनुभव से गुजर चुके सभी दिल इस गीत से खुद को जोड़ पायेंगें.


जहाँ पहले गीत में गीतकार का असर ज्यादा था, वहीँ ‘जाता है तुझ तक’ में प्रीतम का चिर परिचित जैज अंदाज़ खूब सुहाना लगता है. आवाज़ की दुनिया में नई सनसनी ‘निखिल डी’सूजा’ की दमदार आवाज़ में गीत स्वाभाविक ही दिल तक पहुँच जाता है. ये गीत ऐसे हैं जिन्हें सुनते हुए आप कोई भी काम कर सकते हैं, यक़ीनन ऐसे गीत रेडियो सुनने वालों को खासे पसंद आते हैं, ये रेल्क्सिंग रिदम का गीत लोकप्रिय न हो तो हैरत ही होगी.    

अगले गीत की शुरूआती वोइलेन पीस कमाल का है, ‘मत आजमा रे’ है मेरे पसंदीदा के के की आवाज़ में, शब्द और धुन बेहद सही तरीके से घुल मिल गए हैं, ‘हसरतें बार बार बार बार यार की करो’, वाकई इस गीत को बार बार सुनने का मन करता है. एक बार फिर ये गीत उस जेनर का है जिसका हम जिक्र पहले कर चुके है. थकी हुई जेहन की नसों को मसर्रत के पल देता ये गीत भी श्रोताओं का दिल जीत लेगा. वोइलेन पीस और के के की गायकी तो है ही असरदायक.

एक बात खास गैरतलब है, भट्ट कैम्प की इन फिल्मों में पुरुष गायकों का ही दबदबा रहता है, किसी अभिनेत्री पर फिल्माए गीत को भी पुरुष गायक द्वारा ही गाया जाता है, ये ‘राज़’ क्या है कोई समझाए, बहरहाल मर्डर ३ के सभी ४ गीतों को भी पुरुष गायकों ने ही गाया है, अंतिम गीत ‘तेरी झुकी नज़र’ को गाया है शफकत अमानत अली ने. फिर वही चिर परिचित रोमांटिक अंदाज. सैयद लगातार भट्ट कैम्प के साथ अच्छा काम कर रहे हैं.

मर्डर ३ का संगीत कुछ नया पेश न कर के भी पुरानी चीज़ों को सुनने लायक रूप में पेश करते हुए श्रोताओं को कुछ सुरीली सौगातें दे जाता हैं. रेडियो प्लेबैक दे रहा है इस एल्बम को ३.६ की रेटिंग. 

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