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बोलती कहानियाँ - ठिठुरता हुआ गणतन्त्र

'बोलती कहानियाँ' इस स्तम्भ के अंतर्गत हम आपको सुनवा रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने अर्चना चावजी की आवाज़ में मंटो की रचना "खोल दो" का पॉडकास्ट सुना था। आवाज़ की ओर से आज हम लेकर आये हैं प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार हरिशंकर परसाई का व्यंग्य "ठिठुरता हुआ गणतंत्र" जिसे स्वर दिया है अर्चना चावजी ने।

इस व्यंग्य का पाठ (टेक्स्ट) हिंदिनी पर पढ़ा जा सकता है। "ठिठुरता हुआ गणतन्त्र" का कुल प्रसारण समय 5 मिनट 29 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं। यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।

"इस देश के बुद्धिजीवी शेर हैं, पर वे सियारों की बरात में बैंड बजाते हैं।"
 ~ हरिशंकर परसाई (1922-1995)

हर सप्ताह "बोलती कहानियाँ" पर सुनें एक नयी कहानी

"समाजवाद परेशान है। उधर जनता भी परेशान है। समाजवाद आने को तैयार खड़ा है, मगर समाजवादियों में आपस में धौल-धप्पा हो रहा है।"
(हरिशंकर परसाई के व्यंग्य "ठिठुरता हुआ गणतंत्र" से एक अंश)

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#2nd Story, Thithurata Gantantra: Harishankar Parsai/Hindi Audio Book/2013/2. Voice: Archana Chaoji

Comments

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
एक सार्थक प्रस्तुति ... आभार !

चल मरदाने,सीना ताने - ब्लॉग बुलेटिन आज की ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !
Archana Chaoji said…
आभार आप सबका...
वाह वाह। बढ़िया । अच्‍छा प्रयोग। बधाई एवं शुभकामनाएँ।
Smart Indian said…
इस रोचक व्यंग्य के प्रभावी पाठ के लिए बधाई!