रविवार, 9 दिसंबर 2018

राग वृन्दावनी सारंग : SWARGOSHTHI – 397 : RAG VRINDAVANI SARANG






स्वरगोष्ठी – 397 में आज

पूर्वांग और उत्तरांग राग – 12 : राग वृन्दावनी सारंग

आशा भोसले और रफी से फिल्मी गीत और विदुषी अश्विनी भिड़े से राग वृन्दावनी सारंग सुनिए




अश्विनी भिड़े देशपाण्डे
आशा भोसले और मोहम्मद रफी
‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ के मंच पर जारी हमारी श्रृंखला “पूर्वांग और उत्तरांग राग” की बारहवीं कड़ी में मैं कृष्णमोहन मिश्र, आप सब संगीत-प्रेमियों का हार्दिक स्वागत करता हूँ। रागों को पूर्वांग और उत्तरांग में विभाजित करने के लिए सप्तक के सात स्वरों के साथ तार सप्तक के षडज स्वर को मिला कर आठ स्वरों के संयोजन को दो भागों में बाँट दिया जाता है। प्रथम भाग षडज से मध्यम तक पूर्वांग और दूसरे भाग पंचम से तार षडज तक उत्तरांग कहा जाता है। इसी प्रकार जो राग दिन के पहले भाग (पूर्वार्द्ध) अर्थात दिन के 12 बजे से रात्रि के 12 बजे के बीच में गाया-बजाया जाता हो उन्हें पूर्व राग और जो राग दिन के दूसरे भाग (उत्तरार्द्ध) अर्थात रात्रि 12 बजे से दिन के 12 बजे के बीच गाया-बजाया जाता हो उन्हें उत्तर राग कहा जाता है। भारतीय संगीत का यह नियम है कि जिन रागों में वादी स्वर सप्तक के पूर्वांग में हो तो उन्हें दिन के पूर्वार्द्ध में और जिन रागों को वादी स्वर सप्तक उत्तरांग में हो उन्हे दिन के उत्तरार्द्ध में गाया-बजाया जाना चाहिए। राग का वादी स्वर यदि सप्तक के प्रथम भाग में है संवादी स्वर निश्चित रूप से सप्तक के दूसरे भाग में होगा। इसी प्रकार यदि वादी स्वर सप्तक के दूसरे भाग में हो तो संवादी स्वर सप्तक के पूर्व में होगा। वादी और संवादी स्वरों में सदैव तीन अथवा चार स्वरों का अन्तर होता है। इसलिए यदि वादी स्वर ऋषभ है तो संवादी स्वर पंचम या धैवत होगा। इसी प्रकार यदि वादी स्वर धैवत हो तो संवादी स्वर गान्धार अथवा ऋषभ होगा। भीमपलासी, बसन्त और भैरवी जैसे कुछ राग इस नियम के अपवाद होते हैं। इस कठनाई को दूर करने के लिए सप्तक के पूर्वांग और उत्तरांग का क्षेत्र बढ़ा दिया जाता है। पूर्वांग का क्षेत्र षडज से पंचम तक और उत्तरांग का क्षेत्र मध्यम से तार सप्तक के षडज तक माना जाता है। इस प्रकार वादी-संवादी में से यदि एक स्वर पूर्वांग में हो तो दूसरा स्वर उत्तरांग में हो जाता है। इस श्रृंखला में हम आपसे कुछ पूर्वांग और उत्तरांग प्रधान रागों पर चर्चा करेंगे। इस श्रृंखला के लिए चुने गए अधिकतर रागों में वादी स्वर षडज अथवा ऋषभ होता है और संवादी स्वर पंचम अथवा मध्यम होता है। श्रृंखला की बारहवीं कड़ी में आज हमने राग वृन्दावनी सारंग चुना है। श्रृंखला की इस कड़ी में आज हम मोहम्मद रफी और आशा भोसले के स्वर में 1966 में प्रदर्शित फिल्म “दिल दिया दर्द लिया” से राग वृन्दावनी सारंग पर आधारित एक युगलगीत प्रस्तुत कर रहे हैं। इसके साथ ही राग के शास्त्रीय स्वरूप को समझने के लिए सुविख्यात गायिका विदुषी अश्विनी भिड़े देशपाण्डे के स्वर में राग वृन्दावनी सारंग में निबद्ध एक रचना भी हम प्रस्तुत कर रहे हैं।



राग वृन्दावनी सारंग का सम्बन्ध काफी थाट से माना जाता है। इस राग में गान्धार और धैवत स्वर वर्जित होता है। अतः इसकी जाति औड़व-औड़व होती है। राग के आरोह में शुद्ध निषाद और अवरोह में कोमल निषाद का प्रयोग किया जाता है। अन्य स्वर शुद्ध प्रयोग होते हैं। कुछ विद्वान राग वृन्दावनी सारंग को खमाज थाट का राग मानते हैं, किन्तु इसे काफी थाट का राग मानना उचित है। “राग परिचय” ग्रन्थ के लेखक हरिश्चन्द्र श्रीवास्तव के अनुसार किसी भी राग का थाट निश्चित करने के लिए स्वर से अधिक महत्वपूर्ण राग का स्वरूप होता है। स्वरूप की दृष्टि से यह राग, खमाज की तुलना में काफी थाट के अधिक समीप है। इस राग के प्राचीन ध्रुवपदों में कहीं-कहीं अल्प शुद्ध धैवत स्वर का प्रयोग मिलता है, किन्तु वर्तमान इस राग में शुद्ध धैवत का प्रयोग कभी नहीं होता। सारंग के कई प्रकार हैं, जैसे शुद्ध सारंग, मियाँ की सारंग, मध्यमादि सारंग आदि। इस राग की रचना उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र में प्रचलित एक लोक संगीत के आधार पर हुई है। साधारण बोल-चाल की भाषा में राग सारंग का अर्थ वृन्दावनी सारंग ही माना जाता है। राग के शास्त्रीय स्वरूप को समझने के लिए अब हम आपको सुविख्यात गायिका विदुषी अश्विनी भिड़े देशपाण्डे के स्वर में इस राग की एक बन्दिश प्रस्तुत कर रहे हैं। रचना के बोल हैं, -“सखी री मोरा जिया बेकल होत...”। यह रचना मध्यलय, मत्तताल में निबद्ध है।

वृन्दावनी सारंग : “सखी री मोरा जिया बेकल होत...” : अश्विनी भिड़े देशपाण्डे


फिल्म संगीत में रागों का सर्वाधिक उपयोग यदि किसी संगीतकार ने किया है, तो वह हैं, नौशाद अली। फिल्म संगीत के क्षेत्र में नौशाद को उनके समय तक सर्वाधिक प्रतिष्ठा प्राप्त थी। नौशाद पहले संगीतकार थे जिन्होने अपने व्यक्तित्व और कृतित्व के बल पर फिल्म जगत में संगीतकार का दर्जा भी नायक या निर्देशक के समकक्ष ला खड़ा किया। नौशाद ऐसे संगीतकार थे, जिन्होने फिल्मों में अपनी रचनाएँ भारतीय संगीत पद्धति के अन्तर्गत विकसित की। उन्होने राग आधारित स्वरक्रम के साथ कभी तो विशुद्ध शास्त्रीय बन्दिशें सृजित की तो कभी शास्त्रीय संगीत के आधार में लोकसंगीत के अस्तित्व को स्वीकार करते हुए बहुत ही सरस और मीठे गीत रचे। ऐसा ही एक राग आधारित गीत आज हम आपको सुनवा रहे हैं। 1966 में दिलीप कुमार और वहीदा रहमान अभिनीत फिल्म “दिल दिया दर्द लिया” प्रदर्शित हुई थी। फिल्म के गीतकार शकील बदायूनी और संगीतकार नौशाद थे। फिल्म में नौशाद के स्वरबद्ध कई राग आधारित गीत हैं। इनमें से एक गीत –“सावन आए या न आए...” राग वृन्दावनी सारंग के स्वरों पर आधारित इतनी विराट और कसी हुई रचना है कि फिल्मी गीतों में राग का इतना सफल रूपान्तरण बहुत कठिनाई से परिलक्षित होता है। जिस प्रकार मल्हार को वर्षा ऋतु का राग माना जाता है, उसी प्रकार राग सारंग को ग्रीष्म ऋतु का राग माना जाता है। आइए सुनते हैं, राग वृन्दावनी सारंग पर आधारित यह फिल्मी गीत। आप इस मधुर गीत का रसास्वादन करें और हमे आज की इस कड़ी को यहीं विराम देने की अनुमति दीजिए।

वृन्दावनी सारंग : “सावन आए या न आए...” : मुहम्मद रफी और आशा भोसले : फिल्म – दिल दिया दर्द लिया



संगीत पहेली

“स्वरगोष्ठी” के 397वें अंक की संगीत पहेली में आज हम आपको वर्ष 1966 में प्रदर्शित एक फिल्म से रागबद्ध गीत का अंश सुनवा रहे हैं। गीत के इस अंश को सुन कर आपको दो अंक अर्जित करने के लिए निम्नलिखित तीन में से कम से कम दो प्रश्नों के सही उत्तर देने आवश्यक हैं। यदि आपको तीन में से केवल एक अथवा तीनों प्रश्नों का उत्तर ज्ञात हो तो भी आप प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं। इस वर्ष की अन्तिम पहेली तक जिस प्रतिभागी के सर्वाधिक अंक होंगे, उन्हें वर्ष 2018 के पाँचवें सत्र का विजेता घोषित किया जाएगा। इसके साथ ही पूरे वर्ष के प्राप्तांकों की गणना के बाद वर्ष के अन्त में महाविजेताओं की घोषणा की जाएगी और उन्हें सम्मानित भी किया जाएगा।




1 – इस गीतांश को सुन कर बताइए कि इसमें किस राग की झलक है?

2 – इस गीत में प्रयोग किये गए ताल को पहचानिए और उसका नाम बताइए।

3 – इस गीत में किस गायिका के स्वर हैं?

आप उपरोक्त तीन मे से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर केवल swargoshthi@gmail.com या radioplaybackindia@live.com पर ही शनिवार, 15 दिसम्बर, 2018 की मध्यरात्रि से पूर्व तक भेजें। आपको यदि उपरोक्त तीन में से केवल एक प्रश्न का सही उत्तर ज्ञात हो तो भी आप पहेली प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं। COMMENTS में दिये गए उत्तर मान्य हो सकते हैं, किन्तु उसका प्रकाशन पहेली का उत्तर देने की अन्तिम तिथि के बाद किया जाएगा। “फेसबुक” पर पहेली का उत्तर स्वीकार नहीं किया जाएगा। विजेता का नाम हम उनके शहर, प्रदेश और देश के नाम के साथ ‘स्वरगोष्ठी’ के 399वें अंक में प्रकाशित करेंगे। इस अंक में प्रस्तुत गीत-संगीत, राग, अथवा कलासाधक के बारे में यदि आप कोई जानकारी या अपने किसी अनुभव को हम सबके बीच बाँटना चाहते हैं तो हम आपका इस संगोष्ठी में स्वागत करते हैं। आप पृष्ठ के नीचे दिये गए COMMENTS के माध्यम से तथा swargoshthi@gmail.com अथवा radioplaybackindia@live.com पर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं।


पिछली पहेली के विजेता

‘स्वरगोष्ठी’ की 395वें अंक की संगीत पहेली में हमने आपको वर्ष 1964 में प्रदर्शित फिल्म “मैं सुहागन हूँ” के एक रागबद्ध गीत का अंश सुनवा कर आपसे तीन में से किसी दो प्रश्न के उत्तर पूछा था। पहले प्रश्न का सही उत्तर है; राग – देश, दूसरे प्रश्न का सही उत्तर है; ताल – तीनताल और तीसरे प्रश्न का सही उत्तर है; स्वर – मोहम्मद रफी और आशा भोसले

“स्वरगोष्ठी” की इस पहेली प्रतियोगिता में तीनों अथवा तीन में से दो प्रश्नो के सही उत्तर देकर विजेता बने हैं; वोरहीज, न्यूजर्सी से डॉ. किरीट छाया, कल्याण, महाराष्ट्र से शुभा खाण्डेकर, चेरीहिल न्यूजर्सी से प्रफुल्ल पटेल, फीनिक्स, अमेरिका से मुकेश लाडिया, मेरिलैण्ड, अमेरिका से विजया राजकोटिया, जबलपुर, मध्यप्रदेश से क्षिति तिवारी और हैदराबाद से डी. हरिणा माधवी। उपरोक्त सभी प्रतिभागियों को ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ की ओर से हार्दिक बधाई। सभी प्रतिभागियों से अनुरोध है कि अपने पते के साथ कृपया अपना उत्तर ई-मेल से ही भेजा करें। इस पहेली प्रतियोगिता में हमारे नये प्रतिभागी भी हिस्सा ले सकते हैं। यह आवश्यक नहीं है कि आपको पहेली के तीनों प्रश्नों के सही उत्तर ज्ञात हो। यदि आपको पहेली का कोई एक भी उत्तर ज्ञात हो तो भी आप इसमें भाग ले सकते हैं।


अपनी बात

डी.हरिणा माधवी की पुस्तक का मुखपृष्ठ
मित्रों, ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ पर जारी हमारी श्रृंखला “पूर्वांग और उत्तरांग राग” की बारहवीं कड़ी में आपने राग वृन्दावनी सारंग का परिचय प्राप्त किया। इस राग में आपने सुविख्यात गायिका विदुषी अश्विनी भिड़े देशपाण्डे के स्वर में एक बन्दिश का रसास्वादन किया। साथ ही आपने इस राग पर आधारित संगीतकार नौशाद द्वारा संगीतबद्ध फिल्म “दिल दिया दर्द लिया” का एक गीत आशा भोसले और मोहम्मद रफी के युगल स्वर में सुना। “स्वरगोष्ठी” के 394 और 395वें अंक में हमने आपको संगीत विषयक एक नवीन पुस्तक के प्रकाशन की शुभ सूचना दी थी। हैदराबाद निवासी, संगीत शिक्षिका, “स्वरगोष्ठी” की नियमित पाठक और पहेली का नियमित उत्तर देने वाली सुश्री हरिणा माधवी ने अपने संगीत-शिक्षण-कार्य के दौरान अनेक स्वरचित बन्दिशों का एक संकलन तैयार किया है, जिसका संक्षिप्त विवरण और मुखपृष्ठ का चित्र हमें प्राप्त हुआ है। इस प्रकाशन का विस्तृत विवरण अपने पाठकों को हम शीघ्र ही सूचित करेंगे।

Book Title – “PRERNA” - Hindustani Shastriya Sangeet ki Swarachit Bandishe.

ISBN - 978-93-5281-756-6

Subject content

- Includes 61 bandishes in 25 popular ragas beginning from Bhairav to Bhairavi.

- Bhavarth of each Bandish is given to picturise the content to the learner.

- Pictures / illustration were drawn / given by the students to support the subject matter / poetic content of few Bandishes.

- Ragas included in the book are placed in an order, according to time theory of Ragas (Samay chakra).

- Utmost care was taken to keep the content unmanipulated.

- All bandishes have been performed in music concerts, well appreciated by audiences.

- The book 'Prerna' is an outcome of their suggestion, consent, and approval of my able Gurus and eminent artist of the music field.

- Cover page of the book is attractive and informative in citing each Swara is traditionally known to have originated from the respective animal.

हमें विश्वास है कि हमारे अन्य पाठक भी “स्वरगोष्ठी” के प्रत्येक अंक का अवलोकन करते रहेंगे और अपनी प्रतिक्रिया हमें भेजते रहेगे। आज के अंक और श्रृंखला के बारे में यदि आपको कुछ कहना हो तो हमें अवश्य लिखें। हमारी वर्तमान अथवा अगली श्रृंखला के लिए यदि आपका कोई सुझाव या अनुरोध हो तो हमें swargoshthi@gmail.com पर अवश्य लिखिए। अगले अंक में रविवार को प्रातः 7 बजे हम ‘स्वरगोष्ठी’ के इसी मंच पर एक बार फिर सभी संगीत-प्रेमियों का स्वागत करेंगे।

प्रस्तुति : कृष्णमोहन मिश्र  

रेडियो प्लेबैक इण्डिया 
राग वृन्दावनी सारंग : SWARGOSHTHI – 397 : RAG VRINDAVANI SARANG : 9 दिसम्बर, 2018

4 टिप्‍पणियां:

अनाम ने कहा…

Your means of explaining all in this article is actually pleasant, all be able to without difficulty understand it, Thanks a lot.

इन्दु पुरी ने कहा…

'सावन आए या न आए'सुन रही हूं। मेरे कदम जैसे थम-से गये हैं। मन भीग भीग सा गया।भीतर कैसा मेह बरसा करता बताऊं! अश्विनी भिड़े जी को अब सुनती हूं। :)

कृष्णमोहन ने कहा…

धन्यवाद, इन्दु जी। आपकी प्रतिक्रिया हमारे लिए उत्साहवर्द्धक होती है।

इन्दु पुरी ने कहा…

:) दूर हूं,अलग कभी नही हुई सर!

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