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काँच के शामियाने - रश्मि रविजा

लोकप्रिय स्तम्भ "बोलती कहानियाँ" के अंतर्गत हम हर सप्ताह आपको सुनवाते रहे हैं नई, पुरानी, अनजान, प्रसिद्ध, मौलिक और अनूदित, यानि के हर प्रकार की कहानियाँ। इस शृंखला में पिछली बार आपने उषा छाबड़ा के स्वर में विश्व प्रसिद्ध साहित्यकार खलील जिब्रान की लघुकथा "आनंद और पीड़ा" का वाचन सुना था।

आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं रश्मि रविजा के चर्चित उपन्यास काँच के शामियाने का एक अंश जिसे स्वर दिया है पूजा अनिल ने।

प्रस्तुत अंश का कुल प्रसारण समय 8 मिनट 17 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं। इस उपन्यास की अधिक जानकारी रश्मि रविजा के ब्लॉग अपनी, उनकी, सबकी बातें उपलब्ध है।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।

“मंजिल मिले ना मिले, ये ग़म नहीं मंजिल की जुस्तजू में, मेरा कारवां तो है।” ‍‍- रश्मि रविजा


हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी हिन्दी कहानी

“पर भैया तो मरने को तैयार है, फिर मैं क्या करूँ?”
 (रश्मि रविजा के चर्चित उपन्यास काँच के शामियाने से एक अंश)



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यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाऊनलोड कर लें:
काँच के शामियाने MP3

#First Story, Kaanch Ke Shaamiyane; Rashmi Ravija; Hindi Audio Book/2017/1. Voice: Pooja Anil

Comments

Unknown said…
Very nice story

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