बुधवार, 16 नवंबर 2016

"'पिंक' ने लोगों की उन्हीं भावनाओं को स्वर दिया है जो वो पहले से महसूस करते थे"- रितेश शाह : एक मुलाकात ज़रूरी है

एक मुलाकात ज़रूरी है 
एपिसोड - 37


कुछ फ़िल्में व्यवसायिक सफलता से भी अधिक दर्शकों के दिलो-जेहन में अपनी एक स्थिर उपस्तिथि दर्ज करने में कामियाब रहती है. इस वर्ष प्रदर्शित "पिंक" एक ऐसी ही फिल्म है, मिलिए इसी फिल्म के लेखक रितेश शाह से आज के एपिसोड में. नमस्ते लन्दन, कहानी, एयर लिफ्ट, मदारी, जैसी ढेरों फ़िल्में रितेश लिख चुके हैं, और अपनी हर फिल्म के साथ इंडस्ट्री में अपनी पहचान मजबूत करते जा रहे हैं रितेश. इस एपिसोड में हमने "पिंक" पर एक विमर्श भी किया है, जिसमें आप श्रोताओं के सवाल भी रितेश के सामने रखे गए हैं, बहुत कुछ है रितेश के पास कहने को और आपके लिए सुनने को, तो देर किस बात की, प्ले का बटन दबाएँ और इस साक्षात्कार का आनंद लें.  



एक मुलाकात ज़रूरी है इस एपिसोड को आप यहाँ से डाउनलोड करके भी सुन सकते हैं, लिंक पर राईट क्लीक करें और सेव एस का विकल्प चुनें 

1 टिप्पणी:

kunwarji's ने कहा…

सन्जीव भाई आपका बहुत बहुत आभार, धन्यवाद, कि आपने मेरी जिज्ञासा सुनी और बातचीत में शामिल करने के लिए चुनी भी। आपने बहुत ही बढ़िया तरीके से मेरी बात रखी, इसके लिए मैं एक बार फिर धन्यवाद करता हूँ।

और मैं धन्यवाद करता हूँ रितेश जी का भी कि इन्होंने बहुत ही ईमानदारी से जवाब दिया।उन्होंने साफ़ कहा कि किसी को सलाह देना उनका उद्देश्य नहीं था, लोग अपना भला बुरा अपने आप देख सकते है। उन्होंने बस जो कानून है वो दिखाया है, देश-समाज के भले बुरे से ऊपर उठ कर।

मेरा भी ऐसा ही मानना है कि फ़िल्म बनाते समय देश समाज का भला बुरा शायद निर्माता-कलाकारों के मन मस्तिष्क में नहीं होता।बस जो विचारधारा वो मानते है उसका पोषण और धनार्जन ही उद्देश्य होते है।

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