गुरुवार, 16 जून 2016

खुशी ने मुझको ठुकराया है... आइये, सुनते हैं आज बेगम अख्तर की जीवन यात्रा!


दोस्तों सुजोय और विश्व दीपक द्वारा संचालित "कहकशां" और "महफिले ग़ज़ल" का ऑडियो स्वरुप लेकर हम हाज़िर हैं, "महफिल ए कहकशां" के रूप में पूजा अनिल और रीतेश खरे  के साथ।  अदब और शायरी की इस महफ़िल में आज सुनिए शकील बदायूनीं की ग़ज़ल बेगम अख्तर की पुरकशिश आवाज़ में.

मुख्य स्वर - पूजा अनिल एवं रीतेश खरे 
स्क्रिप्ट - विश्व दीपक एवं सुजॉय चटर्जी

1 टिप्पणी:

Unknown ने कहा…

वाह अब निखार आने लगा है, आवाज़ में
मगर टेम्पो अभी थोड़ा स्लो है, कही कही प्रतीत होता है, शायद आप भी महसूस करेंगे
बाकी बहुत खूब, अच्छे से अंजाम दिया आपने

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