शनिवार, 6 दिसंबर 2014

"अंगना आयेंगे साँवरिया..." - देवेन वर्मा को श्रद्धांजलि, उन्हीं के गाये इस गीत के माध्यम से



एक गीत सौ कहानियाँ - 47
 

देवेन वर्मा की आवाज़ में सुनिए- ‘अँगना आयेंगे साँवरिया...





'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के सभी श्रोता-पाठकों को सुजॉय चटर्जी का प्यार भरा नमस्कार। दोस्तों, हम रोज़ाना रेडियो पर, टीवी पर, कम्प्यूटर पर, और न जाने कहाँ-कहाँ, जाने कितने ही गीत सुनते हैं, और गुनगुनाते हैं। ये फ़िल्मी नग़में हमारे साथी हैं सुख-दुख के, त्योहारों के, शादी और अन्य अवसरों के, जो हमारे जीवन से कुछ ऐसे जुड़े हैं कि इनके बिना हमारी ज़िन्दगी बड़ी ही सूनी और बेरंग होती। पर ऐसे कितने गीत होंगे जिनके बनने की कहानियों से, उनसे जुड़ी दिलचस्प क़िस्सों से आप अवगत होंगे? बहुत कम, है न? कुछ जाने-पहचाने, और कुछ कमसुने फ़िल्मी गीतों की रचना प्रक्रिया, उनसे जुड़ी दिलचस्प बातें, और कभी-कभी तो आश्चर्य में डाल देने वाले तथ्यों की जानकारियों को समेटता है 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' का यह स्तम्भ 'एक गीत सौ कहानियाँ'। इसकी 47-वीं कड़ी में आज श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं अभिनेता देवेन वर्मा को उन्हीं के गाए 'दूसरा आदमी' फ़िल्म के गीत "अंगना आयेंगे साँवरिया..." के ज़रिए। 



देवेन वर्मा उन हास्य अभिनेताओं में से एक थे जिन्हें अपने दर्शकों को हँसाने के लिए लाउड कॉमेडी की ज़रूरत नहीं पड़ती थी। अपने सीधे-सरल अभिनय, ज़बरदस्त कॉमिक टाइमिंग और अभिव्यक्ति के माध्यम से देवेन वर्मा हर बार दर्शकों के दिलों में उतर जाते थे। हर किरदार को उन्होंने बख़ूबी निभाया, और नायक-नायिका और तमाम बड़े स्टार्स के होने के बावजूद अपनी हर फ़िल्म में वो भीड़ में से अलग नज़र आए। उनके अभिनय का लोहा हर कोई मानता था। 70 और 80 के दशक में देवेन वर्मा मध्यवित्त पृष्ठभूमि पर बनने वाली फ़िल्मों में नियमित रूप से नज़र आए; फिर वह ॠषीकेश मुखर्जी की 'गोलमाल' और 'रंग बिरंगी' हो या फिर बासु चटर्जी की 'खट्टा-मीठा' हो या 'प्रियतमा' या फिर 'दिल्लगी'। इन समस्त फ़िल्मों में देवेन वर्मा ने अपने स्तरीय हास्य अभिनय क्षमता का प्रदर्शन कराते हुए दर्शकों के दिलों में घर कर गए। देवेन वर्मा सिर्फ़ अभिनय तक ही सीमित नहीं रहे, उन्होंने फ़िल्मों का निर्माण भी किया और कुछ फ़िल्मों का निर्देशन भी। लेकिन उनकी जिस प्रतिभा से आम जनता सबसे कम वाक़िफ़ हैं, वह है उनकी गायकी। देवेन वर्मा एक अच्छे गायक भी थे जिसका प्रमाण उन्होंने दो तीन फ़िल्मों के गीतों में आवाज़ देकर दिया। वैसे देखा जाए तो समय समय पर कई हास्य अभिनेताओं ने फ़िल्मों में गीत गाए हैं। आइ. एस. जौहर ने मोहम्मद रफ़ी के साथ 'शागिर्द' के "बड़े मियाँ दीवाने ऐसे न बनो..." गीत में "यही तो मालूम नहीं है" कहे थे। महमूद ने एक नहीं बल्कि कई कई गीत गाये हैं, उदाहरण के तौर पर फ़िल्म 'शाबाश डैडी' में उनका गाया एक एकल गीत था, 'पड़ोसन' में किशोर कुमार और मन्ना डे के साथ, 'एक बाप छह बेटे' में सुलक्षणा पंडित और विजेता पंडित के साथ, 'कुंवारा बाप' में एक बार फिर किशोर कुमार के साथ, और 'काश' में मोहम्मद अज़ीज़ और सोनाली मुखर्जी के साथ महमूद ने गीत गाये। एक बार फिर कल्याणजी-आनंदजी नें फ़िल्म 'वरदान' के किसी गीत में महमूद साहब की आवाज़ ली। अमरीश पुरी ने अल्का याज्ञ्निक के साथ 'आज का अर्जुन' में "माशूका माशूका" गीत में दो लाइनें गाये, शक्ति कपूर की आवाज़ सुनाई दी शैलेन्द्र सिंह के साथ फ़िल्म 'पसंद अपनी अपनी' के एक गीत में, जॉनी लीवर ने भी अपना रंग जमाया 'इश्क़' और 'इण्टरनैशनल खिलाड़ी' जैसी फ़िल्मों के गीतों में, तो अनुपम खेर साहब गाये उषा कृष्णदास के साथ 'एक अलग मौसम' फ़िल्म का गीत और यश चोपड़ा की पत्नी व गायिका पामेला चोपड़ा के साथ 'विजय' फ़िल्म का एक गीत।

पामेला चोपड़ा ने पहली बार 1977 की यश चोपड़ा की फ़िल्म 'दूसरा आदमी' में देवेन वर्मा के साथ मिल कर एक गीत गाया था जिसके बोल थे "माथे पे लगाइके बिंदिया, अँखियन उड़ाइके निंदिया, खड़ी रे निहारे गोरी, आयेंगे साँवरिया, अँगना आयेंगे साँवरिया..."। इस फ़िल्म के सभी गीत बेहद लोकप्रिय हुए। अधिकांश गीत किशोर कुमार और लता मंगेशकर की युगल आवाज़ों में थे जैसे कि "नैनों में काजल है", "आओ मनायें जश्न-ए-मोहब्बत जाम उठायें जाम के बाद", "नज़रों से कहदो प्यार में मिलने का मौसम आ गया", और "क्या मौसम है" (रफ़ी के साथ)। किशोर कुमार और पामेला चोपड़ा का गाया "जान मेरी रूठ गई" भी हिट रहा। पर देवेन वर्मा और पामेला चोपड़ा के गाए "अंगना आयेंगे साँवरिया" गीत की बात ही कुछ और है। देवेन वर्मा के चाहने वालों को अचम्भित कर दिया था यह गीत क्योंकि यह कोई साधारण गीत नहीं था, बहुत ऊँची पट्टी पर गाया हुआ भोजपुरी लोक-शैली का यह गीत है जिसे हर कोई नहीं गा सकता। फ़िल्म में सिचुएशन कुछ ऐसी है कि नायिका (नीतू सिंह) अपने मामा जी (देवेन वर्मा) के घर एक जन्मदिन की पार्टी में गईं हुईं है और उनके पति (ॠषी कपूर) को दफ़्तर से सीधे वहीं पार्टी में आना है। अन्य सभी निमंत्रित आ चुके हैं, पार्टी शुरू हो चुकी है। लेकिन ऋषी कपूर आने में देर कर रहे हैं और नीतू सिंह उदास हो रही है और बार बार दरवाज़े की तरफ़ देख रही है। ऐसे में देवेन वर्मा साहब हारमोनियम और पूरी संगीतमय टोली के साथ ज़मीन पर बैठे गीत छेड़ते हैं "माथे पे लगाइके बिंदिया..."। यह सांकेतिक गीत है जो नीतू सिंह के उस समय के दिल का हाल बयान कर रहे हैं।

कहा जाता है कि इस गीत को शुरू-शुरू में किशोर कुमार और पामेला चोपड़ा से ही गवाने का ख़याल आया था, पर म्युज़िक सिटिंग के दौरान यूँ ही एक दिन देवेन वर्मा इस गीत को गा उठे। संगीत की अच्छी समझ रखने वाले यश चोपड़ा को यह निर्णय लेने में ज़रा सी भी देर नहीं लगी कि इस गीत के लिए देवेन वर्मा की आवाज़ और गायकी का अंदाज़ ही सर्वोत्तम रहेगा। इस तरह से यह गीत आ गया देवेन वर्मा की झोली में। राजेश रोशन ने देवेन वर्मा को कुछ टिप्स दिये और इस तरह से रेकॉर्ड हो गया यह गीत। इसी साल 1977 में देवेन वर्मा अभिनीत फ़िल्म 'आदमी सड़क का' में भी उन्हें दो गीत गाने के अवसर मिले - "आज मेरे यार की शादी है" और अनुराधा के साथ "बुरा ना मानो दोस्ती यारी में"। 1981 की फ़िल्म 'जोश' में अमजद ख़ान के साथ गाया हुआ उनका "खाट पे खटमल चलेगा जब दिन में सूरज ढलेगा" गीत वैसे ज़्यादा सुनने को नहीं मिला। आश्चर्य की बात है कि देवेन वर्मा अभिनीत सर्वाधिक चर्चित फ़िल्म 'अंगूर' में गायक सपन चक्रवर्ती ने सी. एच. आत्मा का मशहूर गीत "प्रीतम आन मिलो" को गाया था जो देवेन वर्मा पर फ़िल्माया गया था। सपन चक्रवर्ती की आवाज़ देवेन वर्मा पर इतनी फ़िट बैठी और देवेन वर्मा ने भी उसे इतना अच्छा निभाया कि लोगों को लगा कि इसे देवेन वर्मा ने ख़ुद ही गाया है। देवेन वर्मा आज हमारे बीच नहीं हैं पर उनका अभिनय हमारे पास सुरक्षित है, जब भी हम उदास होंगे, उनकी फ़िल्में हमें गुदगुदा जायेंगी, हँसा जायेंगी, उदासी के बादल को उड़ा जायेंगी। 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' की ओर से देवेन वर्मा की पुण्य स्मृति को विनम्र नमन। सुनते हैं फ़िल्म 'दूसरा आदमी' का यह गीत।

फिल्म - दूसरा आदमी : ‘अँगना आयेंगे साँवरिया...’ : स्वर - देवेन वर्मा और पामेला चोपड़ा : संगीत - राजेश रोशन : गीत - मजरूह सुल्तानपुरी 




अब आप भी 'एक गीत सौ कहानियाँ' स्तम्भ के वाहक बन सकते हैं। अगर आपके पास भी किसी गीत से जुड़ी दिलचस्प बातें हैं, उनके बनने की कहानियाँ उपलब्ध हैं, तो आप हमें भेज सकते हैं। यह ज़रूरी नहीं कि आप आलेख के रूप में ही भेजें, आप जिस रूप में चाहे उस रूप में जानकारी हम तक पहुँचा सकते हैं। हम उसे आलेख के रूप में आप ही के नाम के साथ इसी स्तम्भ में प्रकाशित करेंगे। आप हमें ईमेल भेजें cine.paheli@yahoo.com के पते पर।


खोज, आलेख व प्रस्तुति : सुजॉय चटर्जी
प्रस्तुति सहयोग: कृष्णमोहन मिश्र 

2 टिप्‍पणियां:

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत सुन्दर जानकारी...देवेंन वर्मा जी को विनम्र श्रद्धांजलि...

Smart Indian ने कहा…

विनम्र श्रद्धांजलि! गीत सुना था लेकिन यह अनुमान नहीं था कि स्वर देवेन वर्मा का है।

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