शनिवार, 6 सितंबर 2014

"तुम जियो हज़ारों साल...", आशा जी के जन्मदिन पर यही कह कर उन्हें शुभकामनाएँ देते हैं


एक गीत सौ कहानियाँ - 40
 

‘तुम जियो हज़ारों साल...





'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के सभी श्रोता-पाठकों को सुजॉय चटर्जी का प्यार भरा नमस्कार। दोस्तों, हम रोज़ाना रेडियो पर, टीवी पर, कम्प्युटर पर, और न जाने कहाँ-कहाँ, जाने कितने ही गीत सुनते हैं, और गुनगुनाते हैं। ये फ़िल्मी नग़में हमारे साथी हैं सुख-दुख के, त्योहारों के, शादी और अन्य अवसरों के, जो हमारे जीवन से कुछ ऐसे जुड़े हैं कि इनके बिना हमारी ज़िन्दगी बड़ी ही सूनी और बेरंग होती। पर ऐसे कितने गीत होंगे जिनके बनने की कहानियों से, उनसे जुड़ी दिलचस्प क़िस्सों से आप अवगत होंगे? बहुत कम, है न? कुछ जाने-पहचाने, और कुछ कमसुने फ़िल्मी गीतों की रचना प्रक्रिया, उनसे जुड़ी दिलचस्प बातें, और कभी-कभी तो आश्चर्य में डाल देने वाले तथ्यों की जानकारियों को समेटता है 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' का यह स्तम्भ 'एक गीत सौ कहानियाँ'। इसकी 40वीं कड़ी में आज जानिये फ़िल्म 'सुजाता' के गीत "तुम जियो हज़ारों साल..." के बारे में। 

फ़िल्म-संगीत की एक ख़ास बात यह रही है कि इसमें मानव जीवन के हर रंग को, हर मूड को, हर त्योहार-पर्व को, और रोज़-मर्रा के जीवन के हर पहलू को दर्शाने वाले गीत मौजूद हैं। ये गीत हमारे पारिवारिक, सामाजिक, और धार्मिक जीवन से इस तरह से जुड़े हुए हैं कि अगर इन गीतों को हमारे जीवन से निकाल दिया जाये तो ये पर्व, ये त्योहार बड़े ही बदरंग, बड़े ही सूने से लगने लगेंगे। जन्मदिन पर बजाये या गाये जाने वाले गीत भी बहुत सारे बने हैं समय-समय पर। लेकिन जिन दो गीतों की गिनती सबसे पहले होती रही है, वो हैं फ़िल्म 'फ़र्ज़' का "बार-बार दिन यह आये, बार-बार दिन यह गाये" और दूसरा गीत है फ़िल्म 'सुजाता' का "तुम जियो हज़ारों साल, साल के दिन हों पचास हज़ार"। ये गीत फ़िल्मी गीत होते हुए भी फ़िल्म की कहानी के बाहर भी उतने ही सार्थक हैं। दूसरे शब्दों में यूँ कह सकते हैं कि ये यूनिवर्सल गीत हैं जो हर दौर में, हर समाज में, हर उम्र में समान अर्थ रखते हैं। 'सुजाता' को हिन्दी सिनेमा का एक माइलस्टोन फ़िल्म कहा जा सकता सकता है। इसमें बिमल राय ने नायक सुनील दत्त के एक निम्न जाति की लड़की सुजाता (नूतन द्वारा अभिनीत) से प्यार को दिखाया गया है। 'सुजाता' नाम का चुनाव भी बड़े सोच-समझ कर रखा गया था क्योंकि 'सुजाता' शब्द का अर्थ है 'अच्छी जाति का'। इस फ़िल्म में नूतन के जानदार और दिल को छू लेनेवाले अभिनय ने उन्हें जितवाया उस वर्ष की सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार। गीत-संगीत की बात करें तो सचिनदेव बर्मन के सुरीले संगीत और मजरूह सुल्तानपुरी के अर्थपूर्ण बोलों ने इस फ़िल्म के गीतों को अमर बना दिया है। "जलते हैं जिसके लिए मेरी आँखों के दीये" को न केवल तलत महमूद के सर्वोत्तम गीतों में माना जाता है, बल्कि रोमांटिक गीतों की श्रेणी में भी बहुत ऊपर स्थान दिया जाता है। दादा बर्मन की आवाज़ में "सुन मेरे बन्धु रे" हमें बंगाल के भटियाली जगत में ले जाता है तो रफ़ी साहब का गाया "वाह भई वाह" हमें गुदगुदा जाता है। गीता दत्त और आशा भोसले की आवाज़ों में "बचपन के दिन भी क्या दिन थे", गीता जी की एकल आवाज़ में "नन्ही कली सोने चली हवा धीरे आना", तथा आशा जी की एकल आवाज़ में "काली घटा छाये मोरा जिया तड़पाये" को सुनना जैसे एक स्वर्गिक अनुभूति है।

अगर आप यह सोच रहे हैं कि उपर इस फ़िल्म के गीतों और गायक कलाकारों का उल्लेख करते हुए "तुम जियो हज़ारों साल" का उल्लेख क्यों नहीं किया गया, तो उसके पीछे एक कारण है। और वह कारण यह कि एक लम्बे समय तक इस बात पर संशय बना रहा कि आख़िर इस गीत को गाया किसने है - गीता दत्त या फिर आशा भोसले। और यही है इस गीत से जुड़ा हुआ सबसे मज़ेदार किस्सा। हुआ यूँ कि सचिनदेव बर्मन ने शुरू शुरू में इस फ़िल्म के चार फ़ीमेल सोलो गीतों में से दो गीत गीता दत्त के लिए और दो गीत आशा भोसले के लिए विभाजित कर रखे थे। (लता मंगेशकर से हुए मन-मुटाव के कारण उन दिनों लता और उनका आपस में काम बन्द था)। "तुम जियो हज़ारों साल" गीत को दादा ने गीता दत्त की झोली में डाल रखा था और उनकी ही आवाज़ में इसे रेकॉर्ड भी कर लिया। गाना बहुत अच्छा बना, गीता दत्त ने भी बहुत ख़ूब गाया, दादा बर्मन को किसी भी शिकायत का मौका नहीं दिया। पर बर्मन दादा को पता नहीं क्यों इस गीत में कुछ कमी सी महसूस होने लगी। सब कुछ ठीक-ठाक होने के बावजूद उन्हें ऐसा लग रहा था कि कुछ तो कमी है इस गीत में। जब कुछ समझ नहीं आया तो उन्होंने यह निर्णय लिया कि वो इस गीत को दोबारा आशा भोसले की आवाज़ में रेकॉर्ड करेंगे। इस बात का पता न गीता जी को चला और ना ही आशा जी को यह किसी ने बताया कि गीता जी यह गीत रेकॉर्ड करवा चुकी हैं। नतीजा, आशा जी की आवाज़ में भी यह गीत रेकॉर्ड हो गया। और इस बार सचिन दा को गीत पसन्द आ गया और उन्होंने इसे ही फ़िल्म में और साउण्डट्रैक में रखने का फ़ैसला किया। और इसी फेर-बदल के चलते 'बिमल राय प्रोडक्शन्स' ने गलती से आशा जी के गाये इस गीत के लिए गीता जी का नाम डाल कर HMV को भेज दिया। इस तरह से ग्रामोफ़ोन रेकॉर्ड के कवर पर गीता दत्त का नाम प्रकाशित हो गया। अब आशा जी और गीता जी की आवाज़ों में और अंदाज़ में थोड़ी-बहुत समानता तो थी ही, जिस वजह से जनता तो क्या फ़िल्म-संगीत के बड़े से बड़े समीक्षक भी धोखा खा गए। सालों तक इस गीत के रेकॉर्ड पर गीता जी का नाम छपता चला गया। यहाँ तक कि गीता दत्त के देहान्त के बाद जब HMV ने उन पर एक LP जारी किया 'In Memorium Geeta Dutt' के शीर्षक से, उसमें आशा भोसले के गाये इस गीत को शामिल कर दिया गया। यह अपने आप में बहुत बड़ी गड़बड़ी थी। राहुलदेव बर्मन, जो इस गीत के निर्माण के समय अपने पिता के सहायक के रूप में कार्य कर रहे थे, ने यह कन्फ़र्म किया कि गीता जी के गाये गीत को उनके पिता ने दोबारा आशा जी से गवाया। HMV ने इस ग़लती का इल्ज़ाम अपने सर लेने से यह कहते हुए मना कर दिया कि उन्होंने वही छापा है जो उन्हें 'बिमल राय प्रोडक्शन्स' के तरफ़ से मिला था। लेकिन यह वाक़ई आश्चर्य में डालने वाली बात है कि बिमल राय, सचिन देव बर्मन, आशा भोसले और गीता दत्त में से किसी ने भी कभी इस बात का उल्लेख कभी नहीं किया! इस गीत के बनने के 27 साल बाद, 1986 में आशा भोसले ने यह स्वीकारा कि उन्होंने इस गीत को गाया था, पर उन्हें इस बात का पता ही नहीं चला कि रेकॉर्ड पर गीता दत्त का नाम दिया गया है क्योंकि न तो वो कभी रेडियो सुनती थी और न ही अपने गाये हुए गीतों को। गीत एक बार रेकॉर्ड हो गया तो वो अगले दिन से अगले गीत के पीछे लग जाती। आशा जी के इस खुलासे के बाद HMV ने इस ग़लती को सुधारा और आशा भोसले के गाये गीतों के अगले कलेक्शन में इस गीत को शामिल करवा दिया, तथा गीता जी के कलेक्शन से हटा दिया। आशा जी ने बड़प्पन का परिचय देते हुए और इस विवाद को ख़त्म करते हुए अन्त में कहा - "अगर इस गीत के लिए गीता जी को क्रेडिट दिया भी गया है, तो इससे न उनके नाम को कोई फ़र्क पड़ता है और न ही मेरे नाम को। यह बहुत ही छोटी सी बात है। और मैं उनकी बहुत इज़्ज़त करती हूँ।"
और अब आप यही गीत सुनिए-

फिल्म - सुजाता : 'तुम जियो हजारों साल, साल के दिन हों पचास हजार...' : आशा भोसले : संगीत - सचिनदेव बर्मन : गीत - मजरूह सुल्तानपुरी 




अब आप भी 'एक गीत सौ कहानियाँ' स्तंभ के वाहक बन सकते हैं। अगर आपके पास भी किसी गीत से जुड़ी दिलचस्प बातें हैं, उनके बनने की कहानियाँ उपलब्ध हैं, तो आप हमें भेज सकते हैं। यह ज़रूरी नहीं कि आप आलेख के रूप में ही भेजें, आप जिस रूप में चाहे उस रूप में जानकारी हम तक पहुँचा सकते हैं। हम उसे आलेख के रूप में आप ही के नाम के साथ इसी स्तम्भ में प्रकाशित करेंगे। आप हमें ईमेल भेजें cine.paheli@yahoo.com के पते पर।



खोज, आलेख व प्रस्तुति : सुजॉय चटर्जी 

2 टिप्‍पणियां:

Pankaj Mukesh ने कहा…

IS SHRENI MEIN AAJ HAMARE BOLLYWOOD MEIN JAANE KITNEY GANON KI FEHARIST PADI HUI HAI,,
--SINGER MUKESH JI AUR MD + SINGER HEMANT KUMAR JI KE GEETON KO KAISE BHOOLA JA SAKATA HAI??
MUJHE YAAD HAI MUKESH JI KA GAYA GANA FILM SHOLEY-1963, AI DIL TU KAHIN LE CHAL, JISE BAAD MEIN KHUD HEMANT DA BHI GAYA AUR RELEASE KIYA, MAGAR MOVIE MEIN MUKESH JI KA GEET HAI SHAMSHAD BEGUM JI KE SATH,
--FILM EK JHALAK-1957 KA GEET-GORI CHORI CHORI JANA BURI BAAT HAI, JISE MUKESH AND HEMANT DA DONO NE GAYA.
--ISI TARAH SE, YAHI DONO SINGERS NE ISI FILM KE LIYE GAYE-YE HASTA HUWA KARWAN ZINDAGI KA CHALA, MAGAR YAHAN SATHI KALAKAAR BADAL GAYIN-HEMANT DA KE SATH AASHA BHOSLE AA GAYIN, AUR MUKESH JI KE SATH WAHI POORANI SINGER-MISS J.B.BHASANIYA
https://www.youtube.com/watch?v=0K3yhNy0Grs

MUKESH JI'S VERSION SONG-
https://www.youtube.com/watch?v=3lYcliQ86KU

--KUCHH GEET AISE HAI JO DO SINGERS KE DWARA GAANE KA REHEARSAL CHALNE LAGA, MAGAR
FINAL HUWA 1 SINGER PAR. (YE EK VIWADASPAD TIPAANI HO SAKATI HAIN ISLIYE SANKSHEP MEIN KAHUNGA, RAFI SAHAB, RK FILMS MAHENDRA KAPOOR ETC.,AUR HAAN AI MERE WATAN KE LOGON BHI TO HAI)
--KUCHH AISE BHI GEET HAIN, JO RECORD PAR EK SINGER KA VERSION SONG HAI TO MOVIE MEIN DOOSARE KA (IS CATEGORI MEIN SINGER MUKESH JI AUR UNKE DUET SONG KI LIST JYADA LAMBI HAI),
-- KUCHH AISE BHI GEET HAI JO MAIN GEET KO KISI ANYA SINGER NE GAYA HAI, MAGAR CLIP MEIN KISI AUR NE. UDAHARAN KE LIYE MUKESH JI DEATH KI WAJAH SE FILM DHARAM VEER KA GEET 7 AZOOBE IS DUNIA KE, ISKE MAIN GEET AUR HAPPY VERSION CLIP MEIN MUKESH JI RAFI SAHAB KE SATH HAIN, MAGAR SAD VERSION CLIP MEIN NITIN MUKESH JI..

AAGRAH KARUNGA SUJO JI SE KI AISEE GEETON KI SHRINKHALA BHI SURU KEE JAANI CHAHIYE RADIOPLABACK INDIA PAR, BADA HI DILCHASP AUR JANKAARI WARDHAK HOGA.
SHUKRIYA IS CATEGORI KE SONGS KI VIVECHANA KE LIYE.

Sujoy Chatterjee ने कहा…

Shukriya Pankaj ji. bhavishya mein aisi koi series hui to is par zaroor amal karunga. Old is Gold ke liye ek aisa series ho sakta tha, par ab Ek Geet Sau Kahaaniyan mein koi series nahi kar sakte kyunki ye maheene mein keval do baar aata hai.

Regards
Sujoy

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