Showing posts with label k l sehgal. Show all posts
Showing posts with label k l sehgal. Show all posts

Sunday, November 18, 2012

फिल्मों के आँगन में ठुमकती पारम्परिक ठुमरी – ७


स्वरगोष्ठी – ९६ में आज
लौकिक और आध्यात्मिक भाव का बोध कराती ठुमरी


‘बाबुल मोरा नैहर छूटो जाय...’


चौथे से लेकर छठें दशक तक की हिन्दी फिल्मों के संगीतकारों ने राग आधारित गीतों का प्रयोग कुछ अधिक किया था। उन दिनों शास्त्रीय मंचों पर या ग्रामोफोन रेकार्ड के माध्यम से जो बन्दिशें, ठुमरी, दादरा आदि बेहद लोकप्रिय होती थीं, उन्हें फिल्मों में कभी-कभी यथावत और कभी अन्तरे बदल कर प्रयोग किये जाते रहे। चौथे दशक के कुछ संगीतकारों ने फिल्मों में परम्परागत ठुमरियों का बड़ा स्वाभाविक प्रयोग किया था। फिल्मों में आवाज़ के आगमन के इस पहले दौर में राग आधारित गीतों के गायन के लिए सर्वाधिक यश यदि किसी गायक को प्राप्त हुआ, तो वह कुन्दनलाल (के.एल.) सहगल ही थे। उन्होने १९३८ में प्रदर्शित ‘न्यू थियेटर’ की फिल्म ‘स्ट्रीट सिंगर’ में शामिल पारम्परिक ठुमरी- ‘बाबुल मोरा नैहर छूटो जाय...’ गाकर उसे कालजयी बना दिया। ‘स्वरगोष्ठी’ के आज के अंक में आप संगीत-प्रेमियों के बीच, मैं कृष्णमोहन मिश्र, भैरवी की इसी ठुमरी से जुड़े कुछ तथ्यों पर चर्चा करूँगा।

वध के नवाब वाजिद अली शाह संगीत-नृत्य-प्रेमी और कला-संरक्षक के रूप में विख्यात थे। नवाब १८४७ से १८५६ तक अवध के शासक रहे। उनके शासनकाल में ही ठुमरी एक शैली के रूप में विकसित हुई थी। उन्हीं के प्रयासों से कथक नृत्य को एक अलग आयाम मिला और ठुमरी, कथक नृत्य का अभिन्न अंग बनी। नवाब ने 'कैसर' उपनाम से अनेक गद्य और पद्य की रचनाएँ भी की थी। इसके अलावा ‘अख्तर' उपनाम से दादरा, ख़याल, ग़ज़ल और ठुमरियों की भी रचना की थी। राग खमाज का सादरा –‘सुध बिसर गई आज अपने गुनन की...’ तथा राग बहार का ख़याल –‘फूलवाले कन्त मैका बसन्त...’ उनकी बहुचर्चित रचनाएँ हैं। उनका राग खमाज का सादरा संगीतकार एस.एन. त्रिपाठी ने राग हेमन्त में परिवर्तित कर फिल्म ‘संगीत सम्राट तानसेन’ में प्रयोग किया था। ७ फरवरी, १८५६ को अंग्रेजों ने जब उन्हें सत्ता से बेदखल किया और बंगाल के मटियाबुर्ज नामक स्थान पर नज़रबन्द कर दिया तब उनका दर्द ठुमरी भैरवी –‘बाबुल मोरा नैहर छुटो जाए...’ में अभिव्यक्त हुआ। नवाब वाजिद अली शाह की यह ठुमरी इतनी लोकप्रिय हुई कि तत्कालीन और परवर्ती शायद ही कोई शास्त्रीय या उपशास्त्रीय गायक हो जिसने इस ठुमरी को न गाया हो। १९३६ के लखनऊ संगीत सम्मलेन में जब उस्ताद फैयाज़ खाँ ने इस ठुमरी को गाया तो श्रोताओं की आँखों से आँसू निकल पड़े थे। इसी ठुमरी को पण्डित भीमसेन जोशी ने अनूठे अन्दाज़ में गाया, तो विदुषी गिरिजा देवी ने बोल-बनाव से इस ठुमरी का आध्यात्मिक पक्ष उभारा है। फिल्मों में भी इस ठुमरी के कई संस्करण उपलब्ध हैं। १९३८ में बनी फिल्म 'स्ट्रीट सिंगर' में कुन्दनलाल सहगल के स्वरों में यह ठुमरी भैरवी सर्वाधिक लोकप्रिय हुई। आज सबसे हम प्रस्तुत कर रहे है, पण्डित भीमसेन जोशी के स्वरों में यह ठुमरी।

ठुमरी भैरवी : ‘बाबुल मोरा नैहर छुटो जाए...’ : पण्डित भीमसेन जोशी



चौथे और पाँचवें दशक की फिल्मों में रागदारी संगीत की उन रचनाओं को शामिल करने का चलन था जिन्हें संगीत के मंच पर अथवा ग्रामोफोन रेकार्ड के माध्यम से लोकप्रियता मिली हो। फिल्म ‘स्ट्रीट सिंगर’ में इस ठुमरी को शामिल करने का उद्येश्य भी सम्भवतः यही रहा होगा। परन्तु किसे पता था कि लोकप्रियता की कसौटी पर यह फिल्मी संस्करण, मूल पारम्परिक ठुमरी की तुलना में कहीं अधिक चर्चित होगी। इस ठुमरी का साहित्य दो भावों की सृष्टि करता है। इसका एक लौकिक भाव है और दूसरा आध्यात्मिक। ठुमरी के लौकिक भाव के अन्तर्गत विवाह के उपरान्त बेटी की विदाई का प्रसंग और आध्यात्मिक भाव के अन्तर्गत मानव का नश्वर शरीर त्याग कर परमात्मा में विलीन होने का भाव स्पष्ट होता है। सुप्रसिद्ध गायिका विदुषी गिरिजा देवी ने इस ठुमरी के गायन में दोनों भावों की सन्तुलित अभिव्यक्ति दी है। आइए, सुनते हैं, उनके स्वर में यह भावपूर्ण ठुमरी।

ठुमरी भैरवी : ‘बाबुल मोरा नैहर छुटो जाए...’ : विदुषी गिरिजा देवी




फिल्म ‘स्ट्रीट सिंगर’ में सहगल द्वारा प्रस्तुत इस ठुमरी को जहाँ अपार लोकप्रियता मिली, वहीं उन्होने इस गीत में दो बड़ी ग़लतियाँ भी की है। इस बारे में उदयपुर के ‘राजस्थान साहित्य अकादमी’ की पत्रिका ‘मधुमती’ में श्री कलानाथ शास्त्री का एक लेख प्रकाशित हुआ था, जिसके कुछ अंश हम यहाँ अपने साथी शरद तैलंग के सौजन्य से प्रस्तुत कर रहे हैं। 

“बहुधा कुछ उक्तियाँ, फिकरे या उदाहरण लोककण्ठ में इस प्रकार समा जाते हैं कि कभी-कभी तो उनका आगा-पीछा ही समझ में नहीं आता, कभी यह ध्यान में नहीं आता कि वह उदाहरण ही गलत है, कभी उसके अर्थ का अनर्थ होता रहता है और पीढी-दर-पीढी हम उस भ्रान्ति को ढोते रहते हैं जो लोककण्ठ में आ बसी है। ‘देहरी भई बिदेस...’ भी ऐसा ही उदाहरण है जो कभी था नहीं, किन्तु सुप्रसिद्ध गायक कुन्दनलाल सहगल द्वारा गायी गई कालजयी ठुमरी में भ्रमवश इस प्रकार गा दिये जाने के कारण ऐसा फैला कि इसे गलत बतलाने वाला पागल समझे जाने के खतरे से शायद ही बच पाये।


पुरानी पीढी के वयोवृद्ध गायकों को तो शायद मालूम ही होगा कि वाजिद अली शाह की सुप्रसिद्ध शरीर और आत्मा के प्रतीकों को लेकर लिखी रूपकात्मक ठुमरी ‘बाबुल मोरा नैहर छूटो जाय...’ सदियों से प्रचलित है जिसके बोल लोककण्ठ में समा गये हैं– ‘चार कहार मिलि डोलिया उठावै मोरा अपना पराया छूटो जाय...’ आदि। उसमें यह भी रूपकात्मक उक्ति है– ‘देहरी तो परबत भई, अँगना भयो बिदेस, लै बाबुल घर आपनो मैं चली पिया के देस...’। जैसे पर्वत उलाँघना दूभर हो जाता है वैसे ही विदेश में ब्याही बेटी से फिर देहरी नहीं उलाँघी जाएगी, बाबुल का आँगन बिदेस बन जाएगा। यही सही भी है, बिदेस होना आँगन के साथ ही फबता है, देहरी के साथ नहीं, वह तो उलाँघी जाती है, परबत उलाँघा नहीं जा सकता, अतः उसकी उपमा देहरी को दी गई। हुआ यह कि गायक शिरोमणि कुन्दनलाल सहगल किसी कारणवश बिना स्क्रिप्ट के अपनी धुन में इसे यूँ गा गये ‘अँगना तो पर्वत भया देहरी भई बिदेस...’ और उनकी गायी यह ठुमरी कालजयी हो गई। सब उसे ही उद्धृत करेंगे। बेचारे वाजिद अली शाह को कल्पना भी नहीं हो सकती थी कि बीसवीं सदी में उसकी उक्ति का पाठान्तर ऐसा चल पड़ेगा कि उसे ही मूल समझ लिया जाएगा। सहगल साहब तो ‘चार कहार मिल मोरी डोलिया सजावैं...’ भी गा गये जबकि कहार डोली उठाने के लिए लगाये जाते हैं, सजाती तो सखियाँ हैं। हो गया होगा यह संयोगवश ही अन्यथा हम तो कालजयी गायक सहगल के परम- प्रशंसक हैं।”


और अब हम यही ठुमरी प्रस्तुत कर रहे सुविख्यात युगल गायक बन्धु पण्डित राजन और साजन मिश्र के स्वरों में। मिश्र बन्धुओं ने इस ठुमरी के आध्यात्मिक पक्ष को बड़े ही प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया है।

ठुमरी भैरवी : ‘बाबुल मोरा नैहर छुटो जाए...’ : पण्डित राजन और साजन मिश्र



वर्ष १९३८ में ‘न्यू थियेटर’ द्वारा निर्मित फिल्म ‘स्ट्रीट सिंगर’ के निर्देशक फणी मजुमदार थे। फिल्म के संगीत निर्देशक रायचन्द्र (आर.सी.) बोराल ने अवध के नवाब वाजिद अली खाँ की इस कृति के लिए कुन्दनलाल सहगल की आवाज़ को चुना। फिल्म में सहगल साहब ने अपनी गायी इस ठुमरी पर स्वयं अभिनय किया है। उनके साथ अभिनेत्री कानन देवी हैं। हालाँकि उस समय पार्श्वगायन की शुरुआत हो चुकी थी, परन्तु फिल्म निर्देशक फणी मजुमदार ने गलियों में पूरे आर्केस्ट्रा के साथ इस ठुमरी की सजीव रिकार्डिंग और फिल्मांकन किया था। एक ट्रक के सहारे माइक्रोफोन सहगल साहब के निकट लटकाया गया था और चलते-चलते यह ठुमरी और दृश्य रिकार्ड हुआ था। सहगल ने भैरवी के स्वरों का जितना शुद्ध रूप इस ठुमरी गीत में किया है, फिल्म संगीत में उतना शुद्ध रूप कम ही पाया जाता है। आप सुनिए, कुन्दनलाल सहगल के स्वरों में यह ठुमरी और इस अंक को यहीं विराम देने की हमें अनुमति दीजिए।


ठुमरी भैरवी : ‘बाबुल मोरा नैहर छुटो जाए...’ : फिल्म – स्ट्रीट सिंगर : कुन्दनलाल सहगल




आज की पहेली

आज की संगीत पहेली में हम आपको एक पूरब अंग की सुविख्यात गायिका के स्वर में एक पारम्परिक ठुमरी का अंश सुनवा रहे हैं। इसे सुन कर आपको दो प्रश्नों के उत्तर देने हैं। पहेली के सौवें अंक तक जिस प्रतिभागी के सर्वाधिक अंक होंगे, उन्हें इस श्रृंखला का विजेता घोषित किया जाएगा।



१- यह ठुमरी किस राग में निबद्ध है?

२- इस ठुमरी का प्रयोग सातवें दशक की एक फिल्म में किया गया था। क्या आप उस फिल्म का नाम हमें बता सकते हैं?
 

आप अपने उत्तर केवल swargoshthi@gmail.com पर ही शनिवार मध्यरात्रि तक भेजें। comments में दिये गए उत्तर मान्य नहीं होंगे। विजेता का नाम हम ‘स्वरगोष्ठी’ के ९८वें अंक में प्रकाशित करेंगे। इस अंक में प्रस्तुत गीत-संगीत, राग अथवा कलासाधक के बारे में यदि आप कोई जानकारी या अपने किसी अनुभव को हम सबके बीच बाँटना चाहते हैं तो हम आपका इस संगोष्ठी में स्वागत करते हैं। आप पृष्ठ के नीचे दिये गए comments के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं। हमसे सीधे सम्पर्क के लिए swargoshthi@gmail.com अथवा radioplaybackindia@live.com पर अपना सन्देश भेज सकते हैं।



पिछली पहेली के विजेता

‘स्वरगोष्ठी’ के ९४वें अंक की पहेली में हमने आपको विदुषी गिरिजा देवी के स्वरों में भैरवी की पारम्परिक ठुमरी ‘बाजूबन्द खुल खुल जाए...’ का एक अंश सुनवा कर आपसे दो प्रश्न पूछे थे। पहले प्रश्न का सही उत्तर है- राग ‘भैरवी’ और दूसरे प्रश्न का सही उत्तर है- गायिका गिरिजा देवी। दोनों प्रश्नों के सही उत्तर जबलपुर से क्षिति तिवारी और जौनपुर, उत्तर प्रदेश से डॉ. पी.के. त्रिपाठी ने दिया है। लखनऊ से प्रकाश गोविन्द ने दूसरे प्रश्न के उत्तर में गायिक को सही नहीं पहचाना, उन्हें इस बार एक अंक से ही सन्तोष करना होगा। तीनों प्रतिभागियों को रेडियो प्लेबैक इण्डिया की ओर से हार्दिक बधाई।


झरोखा अगले अंक का 


मित्रों, ‘स्वरगोष्ठी’ के अगले अंक में हम आपको एक और पारम्परिक ठुमरी और उसके फिल्मी गीत के रूप में प्रयोग की चर्चा करेंगे। आपकी स्मृतियों में यदि किसी मूर्धन्य कलासाधक की ऐसी कोई पारम्परिक ठुमरी या दादरा रचना हो जिसे किसी भारतीय फिल्म में भी शामिल किया गया हो तो हमें अवश्य लिखें। आपके सुझाव और सहयोग से इस स्तम्भ को अधिक सुरुचिपूर्ण रूप दे सकते हैं। अगले रविवार को प्रातः ९:३० बजे हम और आप इसी मंच पर पुनः मिलंगे। आप अवश्य पधारिएगा।


कृष्णमोहन मिश्र



Thursday, October 4, 2012

स्मृतियों के झरोखे से : भारतीय सिनेमा के सौ साल – 17


भूली-बिसरी यादें


भारतीय सिनेमा के शताब्दी वर्ष में आयोजित विशेष श्रृंखला ‘स्मृतियों के झरोखे से’ के एक नये अंक के साथ मैं कृष्णमोहन मिश्र अपने साथी सुजॉय चटर्जी के साथ आपके बीच उपस्थित हुआ हूँ। आज मास का पहला गुरुवार है और पहले व तीसरे गुरुवार को हम आपके लिए मूक और सवाक फिल्मों की कुछ रोचक दास्तान लेकर आते हैं। तो आइए पलटते हैं, भारतीय फिल्म-इतिहास के कुछ सुनहरे पृष्ठों को।


यादें मूक फिल्मों के युग की : नवयुवक सालुंके बने थे तारामती


अन्ततः 3मई, 1913 को मुम्बई के कोरोनेशन सिनेमा में दादा साहब फालके द्वारा निर्मित प्रथम मूक फिल्म ‘राजा हरिश्चन्द्र’ का पहला सार्वजनिक प्रदर्शन हुआ। विदेशी उपकरणों की सहायता से किन्तु भारतीय कथानक पर भारतीय कलाकारों द्वारा इस फिल्म का निर्माण हुआ था। ढुंडिराज गोविन्द फालके, उपाख्य दादा साहब फालके भारतीय फिल्म जगत के पहले निर्माता-निर्देशक ही नहीं बल्कि पहले पटकथा लेखक, कैमरामैन, मेकअप मैन, कला निर्देशक, सम्पादक आदि भी थे। फिल्म का एक उल्लेखनीय तथ्य यह भी है कि भारत की इस पहली फिल्म के नायक दत्तात्रेय दामोदर दबके थे जबकि नायिका तारामती की भूमिका निभाई थी, एक नवयुवक सालुंके ने। पहली महिला अभिनेत्री को कैमरे के सामने लाने का श्रेय भी दादा साहब फलके को ही दिया जाता है। 1913 में ही फालके की दूसरी फिल्म ‘भस्मासुर मोहिनी’ बनी थी। इस फिल्म में उन्होने भारतीय फिल्म के इतिहास की पहली महिला अभिनेत्री कमला को प्रस्तुत किया था। फिल्म में अभिनेत्री कमला ने नायिका की भूमिका निभाई थी। कमला की माँ दुर्गाबाई ने भी इस फिल्म में अभिनय किया था। फिल्म 'राजा हरिश्चन्द्र' की एक विशेषता यह भी थी कि फिल्म में राजकुमार रोहित की भूमिका दादा साहब के पुत्र भालचन्द्र ने निभाई थी।

सवाक युग के धरोहर : शरतचन्द्र का साहित्यिक दस्तावेज 'देवदास'

सवाक फिल्मों के आरम्भिक दौर की उल्लेखनीय फिल्मों के अन्तर्गत आज हम 1935-36 में बनी सबसे चर्चित फ़िल्म थी ‘देवदास’। शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय के इसी नाम से उपन्यास पर बनी इस फ़िल्म का मुख्य चरित्र के.एल. सहगल ने निभाया था। साथ में पारो, चन्द्रमुखी और चुनीबाबू के किरदारों में नज़र आये जमुना, राजकुमारी (कलकत्ते वाली) और पहाड़ी सान्याल। फ़िल्म को अपार कामयाबी मिली। सहगल, जिनकी गायकी का लोहा सब मान चुके थे, इस फ़िल्म ने उन्हें अभिनय का भी सम्राट बना दिया। ‘सहगल’ जैसे ‘दर्द’ का पर्यायवाची शब्द बन गए थे। ‘देवदास’ के निर्देशक थे प्रमथेश चन्द्र बरुआ, जो इस फ़िल्म के बांग्ला संस्करण के नायक भी थे। इस फ़िल्म की अभूतपूर्व सफलता ने ‘न्यू थियेटर्स’ को फ़िल्म निर्माण कम्पनियों में सबसे उपर ला खड़ा कर दिया। बांग्ला ‘देवदास’ में भी सहगल ने एक छोटा सा रोल निभाया था। इसी से जुड़े एक दिलचस्प प्रसंग का ज़िक्र करना चाहूँगा। हुआ यूँ कि एक शनिवार की शाम संगीतकार रायचन्द बोराल ‘देवदास’ फ़िल्म के दो गीतों पर काम कर रहे थे। बोराल इस असमंजस में थे कि क्या सहगल बांगला के शब्दों का सटीक उच्चारण कर पायेंगे? जब सहगल को बोराल की इस दुविधा के बारे में पता चला तो वो बोराल के पास गए और उनसे पूछा कि क्या वो अपनी बांग्ला गायकी का एक नमूना पेश कर सकते हैं? तब शरतचन्द्र को वहाँ बुलाया गया ताकि वो सहगल के उच्चारण पर सही या ग़लत की मोहर लगा सके। शरतचन्द्र ने अपनी आँखें बन्द बंद की और सहगल ने गाना शुरु किया। सहगल के गाये “गोलाप होये उठुक फूले...” ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि न केवल बांग्ला संस्करण में उनके गाये गीत थे, हिन्दी संस्करण के शीर्षक चरित्र के लिए उन्हें ही चुना गया। ‘देवदास’ के प्रदर्शित होने पर ‘दि बॉम्बे क्रोनिकल’ समाचारपत्र ने लिखा था - “Devdas is a brilliant contribution to the Indian Film Industry. One wonders as one sees it when shall we have another.”

‘देवदास’ फ़िल्म जितनी कामयाब थी, उतने ही लोकप्रिय हुए थे इसके गीत। तिमिर बरन भट्टाचार्य और केदार शर्मा फ़िल्म के संगीतकार व गीतकार थे। तिमिर बरन भले फ़िल्म जगत में 1935 में आये, पर तब तक वो संगीत जगत में अपनी पहचान बना चुके थे। नृत्यों और नृत्य नाटिकाओं में ऑरकेस्ट्रा का इस्तेमाल करने वाले वो प्रथम संगीतकार थे जो उदय शंकर की डान्स-ट्रूप के सदस्य थे। उदय शंकर के बाद देश-विदेश में उन दिनों इस क्षेत्र में तिमिर बरन का ही नाम लिया जाता था। प्रमथेश बरुआ ने उनमें कुछ अलग बात ज़रूर देखी होगी जिस वजह से न्यू थियेटर्स में उन दिनों आर.सी. बोराल और पंकज मल्लिक जैसे सफल संगीतकारों के होते हुए भी ‘देवदास’ के लिए तिमिर बरन को चुना। 1970 में रेकॉर्ड की हुई ‘विविध भारती’ के ‘जयमाला’ कार्यक्रम में फ़ौजी जवानों को सम्बोधित करते हुए तिमिर बरन ने अपने बारे में ज़्यादा तो नहीं बताया, पर यह बात ज़रूर कही- “मुझे गीतों से ज़्यादा साज़-ओ-संगीत से प्रेम है, क्योंकि मैं ख़ुद एक सरोदवादक हूँ।” फिल्म ‘देवदास’ में तिमिर बरन अलग-अलग अंदाज के गीतों के लिए सहगल, के.सी. डे और पहाड़ी सान्याल से गीत गवाए थे। के.सी. डे ने इस फ़िल्म में “मत भूल मुसाफ़िर तुझे जाना ही पड़ेगा...” और “न आया मन का मीत...” जैसे गीत गाये थे। लीजिए, पहले के.सी. डे का गाया वह गीत सुनिए, जिसमें जीवन का सत्य परिभाषित है।

फिल्म – देवदास : ‘मत भूल मुसाफिर...’ : के.सी. डे


फिल्म ‘देवदास’ राजकुमारी की आवाज़ में एक गीत “नाहीं आए घनश्याम...” भी अपने समय में खूब लोकप्रिय हुआ था। फिल्म में संगीतकार तिमिर बरन ने पहाड़ी सान्याल से एक बेहद खूबसूरत गजल भी गवाया था। आइए अब हम आपको पहाड़ी सान्याल की गाई वही ग़ज़ल “छुटे असीर तो बदला हुआ ज़माना था...” सुनवाते हैं।

फिल्म – देवदास : ‘छुटे असीर तो बदला हुआ ज़माना था...’ : पहाड़ी सान्याल


फ़िल्म का सर्वाधिक लोकप्रिय गीत बना “बालम आये बसो मोरे मन में...”। बिना ताल की ठुमरी “पिया बिन नहीं आवत चैन...” और राग देस पर आधारित “दुख के दिन अब बीतत नाही...” में शराब के नशे में डूबे सहगल ने जो अंदाज़-ए-बयाँ पेश किया, वह उनका स्टाइल बन गया और आगे के वर्षों में इस शैली पर उनसे बहुत से गीत संगीतकारों ने गवाये। कहते हैं कि “बालम आय…” और “दुख के दिन…” को स्वयं सहगल ने स्वरबद्ध किया था। ऐसा भी सुना गया है कि लता मंगेशकर द्वारा खरीदा हुआ पहला रेकॉर्ड “बालम आय...” का था। सहगल ने इस गीत को राग काफी के स्वरों में और ठुमरी अंग में गाकर इसे अमर गीत बना दिया। आइए, सुनते हैं यही अमर गीत।

फिल्म – देवदास : ‘बालम आय बसो मोरे मन में...’ : के.एल. सहगल


इसी गीत के साथ आज हम ‘भूली-बिसरी यादें’ के इस अंक को यहीं विराम देते हैं। आपको हमारी यह प्रस्तुति कैसी लगी, हमें अवश्य लिखिएगा। आपकी प्रतिक्रिया, सुझाव और समालोचना से हम इस स्तम्भ को और भी सुरुचिपूर्ण रूप प्रदान कर सकते हैं। ‘स्मृतियों के झरोखे से : भारतीय सिनेमा के सौ साल’ के आगामी अंक में बारी है- ‘मैंने देखी पहली फिल्म’ स्तम्भ की। अगला गुरुवार मास का दूसरा गुरुवार होगा। इस दिन हम प्रस्तुत करेंगे एक बेहद रोचक संस्मरण। यदि आपने ‘मैंने देखी पहली फिल्म’ प्रतियोगिता के लिए अभी तक अपना संस्मरण नहीं भेजा है तो हमें तत्काल radioplaybackindia@live.com पर हमें मेल करें।



प्रस्तुति : कृष्णमोहन मिश्र



 
'मैंने देखी पहली फिल्म' : आपके लिए एक रोचक प्रतियोगिता

दोस्तों, भारतीय सिनेमा अपने उदगम के 100 वर्ष पूरा करने जा रहा है। फ़िल्में हमारे जीवन में बेहद खास महत्त्व रखती हैं, शायद ही हम में से कोई अपनी पहली देखी हुई फिल्म को भूल सकता है। वो पहली बार थियेटर जाना, वो संगी-साथी, वो सुरीले लम्हें। आपकी इन्हीं सब यादों को हम समेटेगें एक प्रतियोगिता के माध्यम से। 100 से 500 शब्दों में लिख भेजिए अपनी पहली देखी फिल्म का अनुभव radioplaybackindia@live.com पर। मेल के शीर्षक में लिखियेगा ‘मैंने देखी पहली फिल्म’। सर्वश्रेष्ठ तीन आलेखों को 500 रूपए मूल्य की पुस्तकें पुरस्कारस्वरुप प्रदान की जायेगीं। तो देर किस बात की, यादों की खिड़कियों को खोलिए, कीबोर्ड पर उँगलियाँ जमाइए और लिख डालिए अपनी देखी हुई पहली फिल्म का दिलचस्प अनुभव। प्रतियोगिता में आलेख भेजने की अन्तिम तिथि 31अक्टूबर, 2012 है।




Wednesday, April 11, 2012

"बाबुल मोरा नैहर छूट ही जाए" - कुंदनलाल सहगल की जयन्ती पर इस ठुमरी से संबंधित कुछ रोचक तथ्य


कई बार कुछ उक्तियाँ लोककंठ में इस प्रकार समा जाते हैं कि कभी-कभी तो उनका आगा-पीछा ही समझ में नहीं आता, कभी उसके अर्थ का अनर्थ होता रहता है और पीढी-दर-पीढी हम उस भ्रान्ति को ढोते रहते हैं। "देहरी भई बिदेस" भी ऐसा ही उदाहरण है जो कभी था नहीं, किन्तु कुन्दनलाल सहगल द्वारा गाई गई कालजयी ठुमरी में भ्रमवश इस प्रकार गा दिये जाने के कारण ऐसा फैला कि इसे गलत बतलाने वाला पागल समझे जाने के खतरे से शायद ही बच पाये। आज, ११ अप्रैल, सहगल साहब की जयन्ती पर इसी विषय पर चर्चा 'एक गीत सौ कहानियाँ' की १५-वीं कड़ी में सुजॉय चटर्जी के साथ...


एक गीत सौ कहानियाँ # 15

१९३८ में 'न्यू थिएटर्स' की फ़िल्म ‘स्ट्रीट सिंगर’ ने एक बार फिर से १९३७ की फ़िल्म ‘विद्यापति’ जैसी विजयगाथा दोहराई। दोनों ही फ़िल्मों में रायचन्द बोराल का संगीत था। 'स्ट्रीट सिंगर' में कुंदनलाल सहगल और कानन देवी की जोड़ी पहली बार पर्दे पर नज़र आई और फ़िल्म सुपर-डुपर हिट हुई। बतौर निर्देशक यह फणि मजुमदार की भी पहली फ़िल्म थी। ‘स्ट्रीट सिंगर’ की कहानी दो बाल्यकाल के मित्रों – भुलवा (सहगल) और मंजू (कानन) की है जो कलकत्ता में स्ट्रीट सिंगर के रूप में पल कर बड़े होते हैं। भुलवा का सपना है एक स्टेज-आर्टिस्ट बनना जबकि इसमें कामयाबी मिलती है मंजू को। शोहरत और कामयाबी के शिखर पर पहुँचकर मंजू भुलवा को लगभग भुला देती है और दोनों में दूरी आ जाती है। ऐसे में भुलवा के टूटे दिल से आवाज़ आती है “जीवन बीन मधुर न बाजे, झूठे पड़ गए तार”। यह एक ट्रेण्डसेटर फ़िल्म सिद्ध हुई इस बात के लिए कि इस तरह की कहानी पर आगे चलकर कई फ़िल्में आईं जिनमें उल्लेखनीय रहीं अमिताभ-जया अभिनीत ‘अभिमान’ और आमिर-मनीषा अभिनीत ‘अकेले हम अकेले तुम’। सहगल और कानन देवी के गाये युगल गीतों में शामिल हैं “ऋतु है सुहानी मस्त हवाएँ, “घुंघरवा बाजे छनननन”, “सांवरिया प्रेम की बंसी सुनाये”जैसे कर्णप्रिय गीत, पर सहगल-कानन की आवाज़ में फ़िल्म का सर्वाधिक चर्चित और कालजयी युगल गीत था राग भैरवी पर आधारित एक पारम्परिक ठुमरी “बाबुल मोरा नैहर छूट ही जाए”। इस गीत की रेकॉर्डिंग को याद करते हुए बोराल ने विविध भारती के किसी साक्षात्कार में कहा था, “उन दिनों ‘आउटडोर’ में भी रेकॉर्डिंग् करनी पड़ती थी। फ़िल्म ‘स्ट्रीट सिंगर’ में तो सड़कों पर, कुछ साज़िन्दे ‘ट्रक’ पर, कुछ टेक्निशियन्स चलते चलते, यह गाना रेकॉर्ड हुआ था।”

जहाँ एक तरफ़ इस ठुमरी ने अपार लोकप्रियता हासिल की है, वहीं दूसरी तरफ़ सहगल ने इस गीत में दो जगह दो बड़ी ग़लतियाँ भी हैं। इस बारे में उदयपुर के ‘राजस्थान साहित्य अकादमी’ द्वारा प्रकाशित ‘मधुमती’ में एक लेख प्रकाशित हुआ जिसके कुछ अंश यहाँ प्रस्तुत कर रहे हैं---

“पिछले दिनों लेखिकाओं की आपबीती बयान करने वाली तथा नारी की निष्ठुर नियति का सृजनात्मक चित्रण करने वाली आत्मकथाओं के अंशों का संकलन कर सुविख्यात कथाकार, सम्पादक और चिन्तक राजेन्द्र यादव के सम्पादन में प्रकाशित पुस्तक 'देहरी भई बिदेस' की चर्चा चली तो हमारे मानस में वह दिलचस्प और रोमांचक तथ्य फिर उभर आया कि बहुधा कुछ उक्तियाँ, फिकरे या उदाहरण लोककंठ में इस प्रकार समा जाते हैं कि कभी-कभी तो उनका आगा-पीछा ही समझ में नहीं आता, कभी यह ध्यान में नहीं आता कि वह उदाहरण ही गलत है, कभी उसके अर्थ का अनर्थ होता रहता है और पीढी-दर-पीढी हम उस भ्रान्ति को ढोते रहते हैं जो उस फिकरे में लोककंठ में आ बसी है। देहरी भई बिदेस भी ऐसा ही उदाहरण है जो कभी था नहीं, किन्तु सुप्रसिद्ध गायक कुन्दनलाल सहगल द्वारा गाई गई कालजयी ठुमरी में भ्रमवश इस प्रकार गा दिये जाने के कारण ऐसा फैला कि इसे गलत बतलाने वाला पागल समझे जाने के खतरे से शायद ही बच पाये।

पुरानी पीढी के वयोवृद्ध गायकों को तो शायद मालूम ही होगा कि वाजिद अली शाह की सुप्रसिद्ध शरीर और आत्मा के प्रतीकों को लेकर लिखी रूपकात्मक ठुमरी “बाबुल मोरा नैहर छूटो जाय” सदियों से प्रचलित है जिसके बोल लोककंठ में समा गये हैं – “चार कहार मिलि डोलिया उठावै मोरा अपना पराया टूटो जाय” आदि। उसमें यह भी रूपकात्मक उक्ति है – “देहरी तो परबत भई, अँगना भयो बिदेस, लै बाबुल घर आपनो मैं चली पिया के देस”। जैसे परबत उलाँघना दूभर हो जाता है वैसे ही विदेश में ब्याही बेटी से फिर देहरी नहीं उलाँघी जाएगी, बाबुल का आँगन बिदेस बन जाएगा। यही सही भी है, बिदेस होना आँगन के साथ ही फबता है, देहरी के साथ नहीं, वह तो उलाँघी जाती है, परबत उलाँघा नहीं जा सकता, अतः उसकी उपमा देहरी को दी गई। हुआ यह कि गायक शिरोमणि कुन्दनलाल सहगल किसी कारणवश बिना स्क्रिप्ट के अपनी धुन में इसे यूँ गा गये “अँगना तो परबत भया देहरी भई बिदेस” और उनकी गाई यह ठुमरी कालजयी हो गई। सब उसे ही उद्धृत करेंगे। बेचारे वाजिद अली शाह को कल्पना भी नहीं हो सकती थी कि बीसवीं सदी में उसकी उक्ति का पाठान्तर ऐसा चल पड़ेगा कि उसे ही मूल समझ लिया जाएगा। सहगल साहब तो “चार कहार मिल मोरी डोलियो सजावैं भी गा गये” जबकि कहार डोली उठाने के लिए लगाये जाते हैं, सजाती तो सखियाँ हैं। हो गया होगा यह संयोगवश ही अन्यथा हम कालजयी गायक सहगल के परम- प्रशंसक हैं।”

कुंदनलाल सहगल ने केवल इस गीत में ही नहीं एक और गीत में भी गड़बड़ी की थी। अमीरबाई कर्नाटकी के साथ गाया फ़िल्म 'भँवरा' का यह गीत है "क्या हमने बिगाड़ा है, क्यों हमको सताते हो"। इस गीत के आख़िर में अमीरबाई कर्नाटकी की लाइन "तुम हमें अपना बनाते हो" दो बार आना था। लेकिन जैसे ही अमीरबाई एक बार इस लाइन को गाती हैं और दूसरी बार गाने के लिए शुरु करती हैं तो सहगल साहब ग़लती से अपनी लाइन "क्या हमने बिगाड़ा है" गाते गाते रुक जाते हैं। और अमीरबाई की लाइन होने के बाद उसे सही जगह पर गाते हैं। आज कुंदनलाल सहगल साहब की जयन्ती पर उनकी ग़लतियाँ निकालना हमारा मक़सद नहीं था; हमारा मक़सद केवल इन दिलचस्प प्रसंगों को आप तक पहुँचाना था, वरना सहगल साहब का फ़िल्म-संगीत जगत में क्या योगदान है, इस बारे में नया कुछ कहने की आवश्यक्ता नहीं है।

"बाबुल मोरा नैहर छूटो ही जाए" सुनने के लिए नीचे प्लेयर पर क्लिक करें।


तो दोस्तों, यह था आज का 'एक गीत सौ कहानियाँ'। कैसा लगा ज़रूर बताइएगा टिप्पणी में या आप मुझ तक पहुँच सकते हैं cine.paheli@yahoo.com के पते पर भी। इस स्तंभ के लिए अपनी राय, सुझाव, शिकायतें और फ़रमाइशें इसी ईमेल आइडी पर ज़रूर लिख भेजें। आज बस इतना ही, अगले बुधवार फिर किसी गीत से जुड़ी बातें लेकर मैं फिर हाज़िर हो‍ऊंगा, तब तक के लिए अपने इस ई-दोस्त सुजॉय चटर्जी को इजाज़त दीजिए, नमस्कार!


Wednesday, January 18, 2012

"सैगल ब्लूज़" - सहगल साहब की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजली एक नए अंदाज़ में


कुंदनलाल सहगल को इस दुनिया से गए आज ६५ वर्ष हो चुके हैं, पर उनकी आवाज़ आज भी सर चढ़ के बोल रहा है। फ़िल्म 'डेल्ही बेली' में राम सम्पत और चेतन शशितल नें सहगल साहब को श्रद्धांजली स्वरूप जिस गीत की रचना की है, उसी की चर्चा सुजॉय चटर्जी के साथ, 'एक गीत सौ कहानियाँ' की तीसरी कड़ी में...

एक गीत सौ कहानियाँ # 3

हिन्दी सिनेमा के प्रथम सिंगिंग् सुपरस्टार के रूप में कुंदनलाल सहगल के नाम से हम सभी भली-भाँति वाक़िफ़ हैं। फ़िल्म-संगीत की जब शुरुआत हुई थी, तब वह पूर्णत: शास्त्रीय, उप-शास्त्रीय और नाट्य संगीत से प्रभावित थी। कुंदनलाल सहगल और न्यु थिएटर्स के संगीतकारों नें फ़िल्म-संगीत को अपनी अलग पहचान दी, और जनसाधारण में अत्यन्त लोकप्रिय बनाया। जब भी कभी फ़िल्म-संगीत का इतिहास लिखा जाएगा, सहगल साहब का नाम सबसे उपर स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। सहगल साहब की आवाज़ और गायकी का ३० और ४० के दशकों में कुछ ऐसा क्रेज़ था कि अगली पीढ़ी के नवोदित गायक उन्हीं की शैली को अनुकरण कर संगीत के मैदान में उतरते थे। तलत महमूद, मुकेश और किशोर कुमार तीन ऐसे बड़े नाम हैं जिन्होंने अपनी शुरुआत सहगल साहब को गुरु मान कर की थी। पर बाद में अपना अलग स्टाइल ज़रूर अख़्तियार कर लिया था। लेकिन अगर किसी गायक नें ता-उम्र सहगल साहब की शैली में गाते रहे, तो वो थे सी. एच. आत्मा। सिर्फ़ वो ही नहीं, उनके बेटे चन्द्रू आत्मा नें भी सहगल अंदाज़ में गीत गाए।

कुंदनलाल सहगल को गुरु मानने वाले या उनसे मुतासिर होने वालों की फ़ेहरिस्त तलत, मुकेश, किशोर, सी. एच. आत्मा और चन्द्रू आत्मा पर आकर ही समाप्त नहीं हो जाती, आज भी सहगल साहब के चाहने वालों की संख्या हज़ारों, लाखों में है। और इनमें एक हैं इस दौर के संगीतकार राम सम्पत। 'आमिर ख़ान प्रोडक्शन्स' की २०११ की चर्चित फ़िल्म 'डेल्ही बेली' में राम सम्पत नें कुंदनलाल सहगल को श्रद्धांजली स्वरूप एक गीत कम्पोज़ किया है "सैगल ब्लूज़" (Saigal Blues) शीर्षक से। सहगल को दर्द का पर्याय माना जाता है, इसलिए 'सैगल ब्लूज़' भी टूटे हुए दिल की ही पुकार है। सहगल शैली का आधुनिक रूप कहा जा सकता है 'सैगल ब्लूज़' को। सहगल शैली और ब्लूज़ जौनर का फ़्युज़न है यह गीत जिसे राम सम्पत और चेतन शशितल नें मिलकर लिखा है और चेतन शशितल नें बिल्कुल सहगल अंदाज़ में गाया है। गीटार पर कमाल किया है रूडी वलांग और हितेश धुतिया नें। जब भी इस तरह का कोई नवीन प्रयोग किया जाता है, और ख़ास कर किसी महान कलाकार का अनुकरण किया जाता है, तो उस पर मिली-जुली प्रतिक्रियायें मिलती हैं; इस गीत के साथ भी यही हुआ। यूं तो अधिकतर लोगों और समालचकों नें इस गीत को "थम्स-अप" ही दिया, पर कुछ लोगों को यह बिल्कुल अच्छा नहीं लगा। उन्हें यह सहगल का अपमान महसूस हुआ। इन्टरनेट को खंगालने पर मुझे इसके दो कारण हाथ लगे - पहला यह कि गायक नें सहगल के नैज़ल अंदाज़ की नकल की है, और दूसरी, सहगल शैली के गीत को पाश्चात्य रंग देकर (फ़्युज़न के ज़रिए) सहगल जौनर को दूषित किया है।

"दुनिया में प्यार जब बरसे, न जाने दिल यह क्यों तरसे, हाय, इस दिल को कैसे समझाऊँ, पागल को कैसे मैं मनाऊँ, इस दर्द की न है दवाई, मजनूं है या तू है कसाई...", यही है 'सैगल ब्लूज़' गीत के बोल। जब इसके संगीतकार राम सम्पत से इस बारे में पूछा गया, तो उनका जवाब था - "मैं के. एल. सहगल साहब का बहुत बड़ा फ़ैन हूँ। मैं समझता हूँ कि सहगल साहब भारत का सबसे महान "ब्लूज़ सिंगर" हैं। मैंने 'डेल्ही बेली' फ़िल्म के निर्देशक अभिनय देव और गायक-गीतकार चेतन शशितल से इस बारे में कई साल पहले ही बात की थी कि मैं सहगल साहब को एक "ब्लूज़ ट्रिब्युट" देना चाहता हूँ। पर कोई सिचुएशन या फ़िल्म ऐसी नहीं बन रही थी जिसमें मेरा यह सपना सच हो सके। 'डेल्ही बेली' इस गीत को लौंच करने के लिए सटीक माध्यम मुझे महसूस हुआ। फ़िल्म का साउण्डट्रैक इस गीत के लिए पर्फ़ेक्ट था और आमिर ख़ान जैसे निडर निर्माता के होते मुझे किस बात की फ़िक्र थी! आमिर ख़ान को पुराने समय और इतिहास से बहुत लगाव है। मेरे इस सुझाव को उन्होंने हाथोंहाथ स्वीकार कर लिया। मुझे आशा है कि इस गीत के माध्यम से हम लोगों को, ख़ास कर इस पीढ़ी के लोगों को के. एल. सहगल की गायकी से अवगत करा पाएंगे।" एक अन्य इन्टरव्यू में राम सम्पत नें बताया कि यूं तो 'डेल्ही बेली' के कई गीत हिट हुए हैं जैसे कि "भाग डी के बोस", "स्विट्टी स्विट्टी", "आइ हेट यू", "बेदर्दी राजा", "जा चुड़ैल", लेकिन जो गीत उनके दिल के सबसे करीब है, वह है "सैगल ब्लूज़"। "मुझे ख़ास तौर से 'सैगल ब्लूज़' पर गर्व है क्योंकि लोग यह समझ रहे हैं कि यह सहगल साहब का ही गाया हुआ कोई गीत है जिसका रीमिक्स हुआ है, जबकि हक़ीक़त यह कि यह मेरा ऑरिजिनल कम्पोज़िशन है और गीत के बोल भी बिल्कुल नए हैं", राम सम्पत नें एक प्रेस कॉन्फ़्रेन्स में बताया। सम्पत नें यह भी बताया कि इस फ़िल्म के संगीत निर्माण में आमिर ख़ान का भी बड़ा योगदान रहा है।

उधर चेतन शशितल का नाम बहुत अधिक लोगों नें नहीं सुना होगा। आपको याद होगा २००४ में ऐश्वर्या राय और विवेक ओबेरॉय की फ़िल्म आई थी 'क्यों.. हो गया न!', जिसमें एक गीत था "बात समझा करो", उस गीत में चेतन की आवाज़ थी शंकर महादेवन और जावेद अली के साथ। उसी साल 'दि किंग ऑफ़ बॉलीवूड' फ़िल्म के लिए भी उन्होंने गाया था। उसके बाद चेतन एक बार फिर से गुमनामी में चले गए, पर 'सैगल ब्लूज़' के साथ जैसे रातों रात वो छा गए। हालाँकि इस गीत को वह लोकप्रियता नहीं मिली, या यूं कहे कि इस गीत को फ़िल्म के दूसरे गीतों के मुकाबले कम प्रोमोट किया गया, पर इस फ़िल्म के संगीत से जुड़े सभी कलाकारों को यह गीत अत्यन्त प्रिय है। चेतन शशितल नें बताया कि इस गीत को उन्होंने दो साल पहले ही रेकॉर्ड कर लिया था। चेतन बताते हैं, "राम (सम्पत) 'डेल्ही बेली' के बैकग्राउण्ड पर काम कर रहे थे और वो मुझसे कुछ प्रयोगधर्मी चीज़ चाहते थे। उन्होंने मुझसे कहा कि क्यों न मैं सहगल साहब की आवाज़ में गाऊँ? उस वक़्त हमें ज़रा सा भी अन्दाज़ा नहीं था कि यह बात हमें किस मुकाम तक ले जायेगी। शुरुआत में जब यह गीत रेकॉर्ड हुआ तो केवल वोकल और ड्रम्स का इस्तमाल हुआ था, पर सम्पत नें बाद में इसे जो रूप दिया, मैं तो हैरान रह गया। मुझे तो अन्त तक यह मालूम ही नहीं था कि इस गीत को 'डेल्ही बेली' के साउण्डट्रैक में शामिल कर लिया गया है। जब भी मेरी राम सम्पत से मुलाक़ात होती तो मैं यह ज़रूर पूछता कि अपने गाने का क्या हुआ? एक दिन उन्होंने मुझे आकर बताया कि आमिर ख़ान और अभिनय देव नें इस गीत को सुना है और उन्हें पसन्द भी आया है। मैंने जब गीत का फ़ाइनल वर्ज़न सुना तो वह बिल्कुल अलग ही बन चुका था।"

चेतन शशितल ख़ुद एक अच्छे गायक हैं, जो पिछले १७ वर्षों से भारतीय शास्त्रीय संगीत सीख रहे हैं। शशितल नें यह साफ़ बताया कि इस गीत को गाते हुए उनका यह कतई उद्देश्य नहीं था कि सहगल साहब जैसे महान कलाकार की नकल कर उन पर कोई व्यंग किया जाये या उनका मज़ाक उडाया जाये! यह सिर्फ़ और सिर्फ़ एक श्रद्धांजली थी उस पूरे दौर के नाम। "यह गीत सुनने में बिल्कुल सहगल की शैली का लगता है। उस दौर की यही ख़ास बात थी कि गानें इसी अंदाज़ में गाए जाते थे। उस दौर के अन्य गायक, जैसे जगमोहन, श्याम और सुरेन्द्र, भी इसी अंदाज़ में गाया करते थे। अगर आप इस गीत को सुनें, तो शायद आपको सहगल साहब की याद आये, पर मेरे लिए यह गीत केवल सहगल साहब को ही नहीं, बल्कि उस पूरे दौर को श्रद्धांजली है। For me it was more about recreating the voice of that era. अफ़सोस की बात है कि जब लोग नकल करते हैं, तो वो उस कलाकार के कमी को ज़्यादा बढ़ा-चढ़ा कर प्रस्तुत करते हैं, और तब ऐसा लगता है जैसे उस कलाकार का व्यंग किया जा रहा हो। पर हमने ऐसा नहीं किया।" आज जहाँ सहगल की आवाज़ केवल 'विविध भारती' के 'भूले बिसरे गीत' कार्यक्रम में ही सुनाई देती है, ऐसे में आज की युवा पीढ़ी को सहगल से मिलवाने में 'डेल्ही बेली' का यह गीत शायद ज़्यादा कारगर होगा। आज सहगल को गए ६५ वर्ष बीत चुके हैं, पर उनकी आवाज़ का जादू आज भी सर चढ़ कर बोलता है, और इसका प्रमाण है 'डेल्ही बेली' का "दुनिया में प्यार जब बरसे"।

फ़िल्म 'डेल्ही बेली' से "दुनिया में प्यार जब बरसे..." सुनने के लिए नीचे प्लेयर में क्लिक करें...



तो दोस्तों, आज 'एक गीत सौ कहानियाँ' में बस इतना ही, अगले सप्ताह फिर किसी गीत से जुड़ी बातें लेकर मैं फिर उपस्थित हो‍ऊंगा, अनुमति दीजिए अपने इस दोस्त, सुजॉय चटर्जी को, नमस्कार!

Thursday, June 23, 2011

भैरवी के सुरों में श्रृंगार, वैराग्य और आध्यात्म का अनूठा संगम -"बाबुल मोरा नैहर छुटो ही जाए.."

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 685/2011/125

'ओल्ड इज गोल्ड' पर जारी श्रृंखला "रस के भरे तोरे नैन" की पाँचवी कड़ी में मैं कृष्णमोहन मिश्र आपका स्वागत करता हूँ| दोस्तों; संगीत के मंच की एक परम्परा है कि गायक या वादक अपनी प्रस्तुतियों का समापन राग भैरवी के गायन-वादन से करते हैं| आज की यह सप्ताहान्त प्रस्तुति है, अतः आज हमने आपके लिए जो ठुमरी चुनी है वह राग भैरवी में निबद्ध है| राग भैरवी को "सदा सुहागन राग" कहा गया है| संगीत के अन्य रागों को समय (प्रहर) या ऋतुओं में ही गाने-बजाने की परम्परा है, किन्तु "भैरवी" हर मौसम और हर समय कर्णप्रिय लगता है| राग "भैरवी की एक विशेषता यह भी होती है कि इस राग के बाद दूसरा कोई भी राग सुनने में अच्छा नहीं लगता, इसीलिए हर कलाकार द्वारा प्रस्तुति के अन्त में "भैरवी" का गायन-वादन किया जाता है| सभी कोमल स्वरों वाला यह राग उपशास्त्रीय और सुगम संगीत की रचनाओं के लिए सबसे उपयुक्त राग है| इसीलिए फिल्म संगीत में राग आधारित गीतों में सर्वाधिक संख्या भैरवी आधारित गीतों की ही है|

श्रृंखला की पिछली कड़ियों में हमने अवध के नवाब वाजिद अली शाह के संगीत-नृत्य-प्रेम के विषय में चर्चा की थी| आज उसी चर्चा को आगे बढाते हैं| नवाब वाजिद अली शाह 1847 से 1856 तक अवध के शासक रहे| उनके कार्यकाल में ही "ठुमरी" एक शैली के रूप में विकसित हुई थी| उन्हीं के प्रयासों से कथक नृत्य को एक अलग आयाम मिला और ठुमरी, कथक नृत्य का अभिन्न अंग बनी| नवाब ने 'कैसर' उपनाम से अनेक गद्य और पद्य की स्वयं रचनाएँ भी की| इसके अलावा "अख्तर' उपनाम से दादरा, ख़याल, ग़ज़ल और ठुमरियों की भी रचना की थी| राग "खमाज" का सादरा -"सुध बिसर गई आज अपने गुनन की..." तथा राग "बहार" का ख़याल -"फूलवाले कन्त मैका बसन्त गडुआ मोल ले दे रे....." उनकी बहुचर्चित रचनाएँ हैं| उनका राग "खमाज" का सादरा संगीतकार एस.एन. त्रिपाठी ने राग "हेमन्त" में परिवर्तित कर फिल्म "संगीत सम्राट तानसेन" में प्रयोग किया था| 7 फरवरी 1856 को अंग्रेजों ने जब उन्हें सत्ता से बेदखल किया और बंगाल के मटियाबुर्ज नामक स्थान पर नज़रबन्द कर दिया तब उनका दर्द ठुमरी भैरवी -"बाबुल मोरा नैहर छुटल जाए...." में अभिव्यक्त हुआ| नवाब वाजिद अली शाह की यह ठुमरी इतनी लोकप्रिय हुई कि तत्कालीन और परवर्ती शायद ही कोई शास्त्रीय या उपशास्त्रीय गायक हो जिसने इस ठुमरी को ना गाया हो| 1936 के लखनऊ संगीत सम्मलेन में जब उस्ताद फैयाज़ खां ने इस ठुमरी को गाया तो श्रोताओं की आँखों से आँसू निकल पड़े थे| इसी ठुमरी को पण्डित भीमसेन जोशी ने अनूठे अन्दाज़ में गाया, तो विदुषी गिरिजा देवी ने बोल-बनाव से इस ठुमरी का अध्यात्मिक पक्ष उभारा है| फिल्मों में भी इस ठुमरी के कई संस्करण उपलब्ध हैं| 1938 में बनी फिल्म 'स्ट्रीट सिंगर' में कुन्दन लाल सहगल के स्वरों में यह ठुमरी भैरवी सर्वाधिक लोकप्रिय हुई|

श्रृंखला का प्रारम्भ हमने सहगल साहब के स्वरों से किया था| आज हम पुनः उन्हीं की आवाज़ में आपको वर्ष 1938 में बनी फिल्म "स्ट्रीट सिंगर" की ठुमरी भैरवी -"बाबुल मोरा नैहर छुटो ही जाए..." सुनवाने जा रहे हैं| फिल्म के संगीतकार आर.सी. (रायचन्द्र) बोराल थे| सहगल साहब ने अपनी गायी इस ठुमरी पर स्वयं अभिनय किया है| उनके साथ अभिनेत्री कानन देवी हैं| हालाँकि उस समय पार्श्वगायन की शुरुआत हो चुकी थी, परन्तु फिल्म निर्देशक फणी मजुमदार ने गलियों में पूरे आर्केस्ट्रा के साथ इस ठुमरी की सजीव रिकार्डिंग और फिल्मांकन किया था| एक ट्रक के सहारे माइक्रोफोन सहगल साहब के निकट लटकाया गया था और चलते-चलते यह ठुमरी और दृश्य रिकार्ड हुआ था| राग भैरवी में निबद्ध यह एक शानदार ठुमरी है| भैरवी के स्वरों का जितना शुद्ध रूप इस ठुमरी गीत में किया गया है, फिल्म संगीत में उतना शुद्ध रूप कम ही पाया जाता है| आइए सुनते हैं, नवाब वाजिद अली शाह की सर्वाधिक लोकप्रिय ठुमरी रचना-
राग भैरवी : "बाबुल मोरा नैहर छुटो ही जाए..." : फिल्म - स्ट्रीट सिंगर



क्या आप जानते हैं...
कि नवाब वाजिद अली शाह की इस ठुमरी को गाते समय के.एल. सहगल ने कुछ शब्दों में परिवर्तन किया था, किन्तु विदुषी गिरिजा देवी ने इस ठुमरी को गाते समय मूल शब्दों का ही प्रयोग किया है|

दोस्तों अब पहेली है आपके संगीत ज्ञान की कड़ी परीक्षा, आपने करना ये है कि नीचे दी गयी धुन को सुनना है और अंदाज़ा लगाना है उस अगले गीत का. गीत पहचान लेंगें तो आपके लिए नीचे दिए सवाल भी कुछ मुश्किल नहीं रहेंगें. नियम वही हैं कि एक आई डी से आप केवल एक प्रश्न का ही जवाब दे पायेंगें. हर १० अंकों की शृंखला का एक विजेता होगा, और जो १००० वें एपिसोड तक सबसे अधिक श्रृंखलाओं में विजय हासिल करेगा वो ही अंतिम महा विजेता माना जायेगा. और हाँ इस बार इस महाविजेता का पुरस्कार नकद राशि में होगा ....कितने ?....इसे रहस्य रहने दीजिए अभी के लिए :)

पहेली 06/शृंखला 19
गीत का ये हिस्सा सुनें-


अतिरिक्त सूत्र - बेहद आसान.
सवाल १ - किस अभिनेत्री पर फिल्मांकित है ये गीत - ३ अंक
सवाल २ - गीतकार कौन हैं - २ अंक
सवाल ३ - संगीतकार का नाम बताएं - १ अंक

पिछली पहेली का परिणाम -


खोज व आलेख- कृष्ण मोहन मिश्र



इन्टरनेट पर अब तक की सबसे लंबी और सबसे सफल ये शृंखला पार कर चुकी है ५०० एपिसोडों लंबा सफर. इस सफर के कुछ यादगार पड़ावों को जानिये इस फ्लेशबैक एपिसोड में. हम ओल्ड इस गोल्ड के इस अनुभव को प्रिंट और ऑडियो फॉर्मेट में बदलकर अधिक से अधिक श्रोताओं तक पहुंचाना चाहते हैं. इस अभियान में आप रचनात्मक और आर्थिक सहयोग देकर हमारी मदद कर सकते हैं. पुराने, सुमधुर, गोल्ड गीतों के वो साथी जो इस मुहीम में हमारा साथ देना चाहें हमें oig@hindyugm.com पर संपर्क कर सकते हैं या कॉल करें 09871123997 (सजीव सारथी) या 09878034427 (सुजॉय चटर्जी) को

Sunday, June 19, 2011

पिया बिन नाहीं आवत चैन: राग झिंझोटी के सुरों में उभरी देवदास की बेचैनी

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 681/2011/121

मस्कार! 'ओल्ड इज़ गोल्ड' के सभी दोस्तों को सुजॉय चटर्जी का नमस्कार! सजीव सारथी के निर्देशन में इस सुरीले कारवाँ को लेकर आगे बढ़ते हुए हम बहुत जल्द पहुँचने वाले हैं अपने ७००-वे पड़ाव पर। इस ख़ास मंज़िल को छू पाना हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इसलिए हमें लगा कि जिस शृंखला के ज़रिये हम इस ७००-वे अंक तक पहुँचेंगे, वह शृंखला बेहद ख़ास होनी चाहिए। इस मनोकामना को साकार करने के लिए हम एक बार फिर से आमंत्रित कर रहे हैं हमारे अतिथि स्तंभकार और वरिष्ठ कला-समीक्षक व पत्रकार श्री कृष्णमोहन मिश्र को। आइए 'ओल्ड इज़ गोल्ड' के अगले तीस अंकों (६८१ से ७१०) का हम आनंद लें कृष्णमोहन जी के साथ।
************************************************************************

'ओल्ड इज गोल्ड' के संगीत प्रेमी पाठकों/श्रोताओं का आज से शुरू हो रही हमारी नई श्रृंखला 'रस के भरे तोरे नैन...' में कृष्णमोहन मिश्र की ओर से हार्दिक स्वागत है| आपको शीर्षक से ही यह अनुमान हो ही गया होगा कि इस श्रृंखला का विषय फिल्मों में शामिल उपशास्त्रीय गायन शैली "ठुमरी" है| सवाक फिल्मों के प्रारम्भिक दौर से ही फ़िल्मी गीतों के रूप में ठुमरियों का प्रयोग आरम्भ हो गया था| विशेष रूप से फिल्मों के गायक सितारे कुंदनलाल सहगल ने अपने कई गीतों को ठुमरी अंग में गाकर फिल्मों में ठुमरी शैली की आवश्यकता को बल दिया| चौथे दशक के मध्य से लेकर आठवें दशक के अन्त तक की फिल्मों में सैकड़ों ठुमरियों का प्रयोग हुआ है| इनमे से अधिकतर ठुमरियाँ ऐसी हैं जो फ़िल्मी गीत के रूप में लिखी गईं और संगीतकार ने गीत को ठुमरी अंग में संगीतबद्ध किया| कुछ फिल्मों में संगीतकारों ने परम्परागत ठुमरियों का भी प्रयोग किया है| इस श्रृंखला में हम आपसे ऐसी ही कुछ चर्चित-अचर्चित फ़िल्मी ठुमरियों पर चर्चा करेंगे|

आज के ठुमरी गीत पर चर्चा से पहले भारतीय संगीत की रस, रंग और भाव से परिपूर्ण शैली "ठुमरी" पर चर्चा आवश्यक है| "ठुमरी" उपशास्त्रीय संगीत की लोकप्रिय गायन शैली है| यद्यपि इस शैली के गीत रागबद्ध होते हैं, किन्तु "ध्रुवपद" और "ख़याल" की तरह राग के कड़े प्रतिबन्ध नहीं रहते| रचना के शब्दों के अनुकूल रस और भाव की अभिव्यक्ति के लिए कभी-कभी गायक राग के स्वरों में अन्य स्वरों को भी मिला देते हैं| ऐसी ठुमरियों को 'मिश्र खमाज', 'मिश्र पहाडी', 'मिश्र काफी' आदि रागों के नाम से पहचाना जाता है| ठुमरियों में श्रृंगार और भक्ति रसों की प्रधानता होती है| कुछ ठुमरियों में इन दोनों रसों का अद्भुत मेल भी मिलता है| ठीक उसी प्रकार जैसे सूफी गीतों और कबीर के निर्गुण पदों में उपरी आवरण तो श्रृंगार रस से ओत-प्रोत होता है, किन्तु आन्तरिक भाव आध्यात्म और भक्ति भाव की अनुभूति कराता है|

आइए, अब आज के ठुमरी गीत पर थोड़ी चर्चा कर ली जाए| इस श्रृंखला की पहली फ़िल्मी ठुमरी के लिए हमने 1936 की फिल्म "देवदास" का चयन किया है| यह फिल्म सुप्रसिद्ध उपन्यासकार शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय के इसी नाम के उपन्यास पर बनाई गई थी| यह उपन्यास 1901 में लिखा गया और 1917 में पुस्तक रूप में प्रकाशित हुआ था| "देवदास" पर सबसे पहली बार 1928 में मूक फिल्म 'इस्टर्न फिल्म सिंडिकेट' ने बनाई थी, जिसमे देवदास की भूमिका नरेश चंद्रा ने निभाया था| सवाक फिल्मों के युग में "देवदास" उपन्यास पर अब तक सात और फ़िल्में बन चुकी हैं| अकेले 'न्यू थिएटर्स' ने ही चार अलग-अलग भाषाओं में फिल्म "देवदास" का निर्माण किया था| 1935 में पी.सी. बरुआ (प्रथमेश चन्द्र बरुआ) के निर्देशन में बांग्ला भाषा की फिल्म "देवदास" का निर्माण हुआ| 1936 में श्री बरुआ के निर्देशन में ही हिन्दी में और 1937 में असमीया भाषा में यह फिल्म बनी थी| 1936 में ही 'न्यू थिएटर्स' की ओर से पी.वी. राव के निर्देशन में इस फिल्म के तमिल संस्करण का निर्माण भी किया गया था, किन्तु दक्षिण भारत में यह फिल्म बुरी तरह असफल रही| 1953 में तमिल और तेलुगु में "देवदास" के निर्माण का पुनः प्रयास हुआ और इस बार दक्षिण भारत में यह द्विभाषी प्रयोग सफल रहा| 1955 में विमल राय के निर्देशन में "देवदास" का निर्माण हुआ, जिसमें दिलीप कुमार देवदास की भूमिका में थे| इसके बाद 2002 में शाहरुख़ खान अभिनीत "देवदास" का निर्माण हुआ था|

आज हम आपके लिए फिल्म "देवदास" के जिस गीत को लेकर उपस्थित हुए हैं वह 1936 में हिन्दी भाषा में निर्मित फिल्म "देवदास" का है| फिल्म के निर्देशक पी.सी. बरुआ हैं, देवदास की भूमिका में कुंदनलाल सहगल, पारो (पार्वती) की भूमिका में जमुना बरुआ और चन्द्रमुखी की भूमिका में राजकुमारी ने अभिनय किया था| फिल्म के संगीतकार तिमिर बरन (भट्टाचार्य) थे| तिमिर बरन उस्ताद अलाउद्दीन खां के शिष्य और संस्कृत के प्रकाण्ड विद्वानों के कुल के थे| साहित्य और संगीत में कुशल तिमिर बरन के 'न्यू थियेटर्स' में प्रवेश करने पर पहली फिल्म "देवदास" का संगीत निर्देशन सौंपा गया| इस फिल्म के गीत आज आठ दशक के बाद भी चिर-नवीन लगते हैं| फिल्म के दो गीतों (ठुमरी) पर आज हम विशेष चर्चा करेंगे| पहली ठुमरी है -"बालम आय बसों मोरे मन में....."| राग "काफी" की यह ठुमरी प्राकृतिक परिवेश में, प्रणय निवेदन के भाव में प्रस्तुत किया गया है| दूसरी ठुमरी है -"पिया बिन नाहीं आवत चैन...", जो वास्तव में राग "झिंझोटी" की एक परम्परागत ठुमरी है, जिसका स्थायी और एक अन्तरा सहगल साहब ने अत्यन्त संवेदनशीलता के साथ गाया है| "झिंझोटी" की यह विशेषता होती है कि श्रृंगार रस प्रधान, चंचल प्रवृत्ति का होते हुए भी अद्भुत रस, भ्रम, बेचैनी और आश्चर्य भाव की अभिव्यक्ति में भी सक्षम होता है| राग "झिंझोटी" की यह ठुमरी 1925 -26 में महाराज कोल्हापुर के राज-गायक खां साहब अब्दुल करीम खां के स्वरों में अत्यन्त लोकप्रिय थी| रिकार्डिंग के बाद सहगल साहब की आवाज़ में इस ठुमरी को अब्दुल करीम खां साहब ने सुना और सहगल साहब की गायन शैली की खूब तारीफ़ करते हुए उन्हें बधाई का एक सन्देश भी भेजा था| सहगल साहब ने परदे पर शराब के नशे में धुत देवदास की भूमिका में इस ठुमरी का स्थाई और एक अन्तरा गाया है| गायन के दौरान ठुमरी में ताल वाद्य (तबला) की संगति नहीं की गई है| पार्श्व संगीत के लिए केवल वायलिन और सरोद की संगति है| आइए, राग "झिंझोटी" की यह ठुमरी के.एल. सहगल के स्वरों में सुनते हैं -



क्या आप जानते हैं...
कि "देवदास" उपन्यास के लेखक शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय ने फिल्म देख कर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था -"फिल्म देखने के बाद मुझे ऐसा लग रहा है कि इस उपन्यास को लिखने के लिए ही मेरा जन्म हुआ है और इसे सिनेमा के परदे पर मूर्त रूप देने के लिए ही आपका (पी.सी. बरुआ) का जन्म हुआ है|

दोस्तों अब पहेली है आपके संगीत ज्ञान की कड़ी परीक्षा, आपने करना ये है कि नीचे दी गयी धुन को सुनना है और अंदाज़ा लगाना है उस अगले गीत का. गीत पहचान लेंगें तो आपके लिए नीचे दिए सवाल भी कुछ मुश्किल नहीं रहेंगें. नियम वही हैं कि एक आई डी से आप केवल एक प्रश्न का ही जवाब दे पायेंगें. हर १० अंकों की शृंखला का एक विजेता होगा, और जो १००० वें एपिसोड तक सबसे अधिक श्रृंखलाओं में विजय हासिल करेगा वो ही अंतिम महा विजेता माना जायेगा. और हाँ इस बार इस महाविजेता का पुरस्कार नकद राशि में होगा ....कितने ?....इसे रहस्य रहने दीजिए अभी के लिए :)

पहेली 01/शृंखला 19
गीत का ये हिस्सा सुनें-


अतिरिक्त सूत्र - फिल्म की नायिका अभिनेत्री मुमताज शान्ति थीं.
सवाल १ - फिल्म का नाम बताएं - १ अंक
सवाल २ - गायिका बताएं - २ अंक
सवाल ३ - गीतकार का नाम बताएं - ३ अंक

पिछली पहेली का परिणाम -
क्षिति जी कमाल कर दिया आपने, ३ अंकों की बहुत बधाई. शानदार शुरुआत, इस बढ़त को बरकरार रखें

खोज और आलेख
कृष्ण मोहन मिश्र



इन्टरनेट पर अब तक की सबसे लंबी और सबसे सफल ये शृंखला पार कर चुकी है ५०० एपिसोडों लंबा सफर. इस सफर के कुछ यादगार पड़ावों को जानिये इस फ्लेशबैक एपिसोड में. हम ओल्ड इस गोल्ड के इस अनुभव को प्रिंट और ऑडियो फॉर्मेट में बदलकर अधिक से अधिक श्रोताओं तक पहुंचाना चाहते हैं. इस अभियान में आप रचनात्मक और आर्थिक सहयोग देकर हमारी मदद कर सकते हैं. पुराने, सुमधुर, गोल्ड गीतों के वो साथी जो इस मुहीम में हमारा साथ देना चाहें हमें oig@hindyugm.com पर संपर्क कर सकते हैं या कॉल करें 09871123997 (सजीव सारथी) या 09878034427 (सुजॉय चटर्जी) को

Sunday, June 5, 2011

एक राजे का बेटा लेकर उड़ने वाला घोड़ा....सुनिए एक कहानी सहगल साहब की जुबानी

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 671/2011/111

मस्कार! 'ओल्ड इज़ गोल्ड' की एक नई सप्ताह के साथ मैं, सुजॉय चटर्जी, साथी सजीव सारथी के साथ आप सब की ख़िदमत में हाज़िर हूँ। दोस्तों, बचपन में हम सभी नें अपने दादा-दादी, नाना-नानी और माँ-बाप से बहुत सारी किस्से कहानियाँ सुनी हैं, है न? उस उम्र में ये कहानियाँ हमें कभी परियों के साम्राज्य में ले जाते थे तो कभी राजा-रानी की रूप-कथाओं में। कभी भूत-प्रेत की कहानियाँ सुन कर रात को बाथरूम जाने में डर भी लगा होगा आपको। और हम जैसे जैसे बड़े होते जाते हैं, हमारी कहानियाँ भी उम्र और रुचि के साथ साथ बदलती चली जाती है। कहानी-वाचन भी एक तरह की कला है। एक अच्छा कहानी-वाचक सुनने वालों को बाकी सब कुछ भूला कर कहानी में मग्न कर देता है, और कहानी के साथ जैसे वो बहता चला जाता है। हमारी फ़िल्में भी कहानी कहने का एक ज़रिया है। और फ़िल्मों के गीत भी ज़्यादातर समय फ़िल्म की कहानी को ही आगे बढ़ाते हैं। लेकिन कई बार ऐसा भी हुआ है कि कोई फ़िल्मी गीत भी अपने आप में कोई कहानी कहता है। कुछ ऐसे ही गीतों को लेकर, जिनमें छुपी है कोई कहानी, हम आज से एक नई शृंखला की शुरुआत कर रहे हैं। कहानी भरे गीतों का जैसे ही ख़याल आया तो सब से पहले मुझे जो गीत याद आया, वह है फ़िल्म 'जब जब फूल खिले' का "एक था गुल और एक थी बुलबुल"। लेकिन क्योंकि यह गीत 'ओल्ड इज़ गोल्ड' पर आनन्द बक्शी साहब पर केन्द्रित शृंखला में बज चुका है, इसलिए इस शृंखला के लिये इतना सटीक होते हुए भी हम इसे शामिल नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन बक्शी साहब की लिखी इस कहानी को सलाम करते हुए हम इस शृंखला का शीर्षक रखते हैं - 'एक था गुल और एक थी बुलबुल'।

इस शृंखला के लिये गीतों की खोज करते हुये मेरे हाथ जो सबसे पुराना गीत लगा, वह है साल १९३७ का। वैसे एक नहीं, वर्ष १९३७ के मुझे दो ऐसे गीत मिले हैं जिनमें कहानी है। और इस शृंखला की पहली दो कड़ियों में ये ही दो गीत आप सुनने जा रहे हैं। शुरु करते हैं पहले सिंगिंग् सुपरस्टार कुंदनलाल सहगल से। १९३७ की फ़िल्म 'प्रेसिडेण्ट' का गीत "इक बंगला बने न्यारा" आप हाल ही में इस स्तंभ में सुन चुके हैं। इस गीत में सहगल साहब सपना देखते हैं उस मिल का मालिक बनने का जिसमें वो एक मज़दूर की हैसियत से काम करते हैं। लेकिन लगता है उनका यह सपना टूट जाता है, उनकी नौकरी चली जाती है, और वो इस बात को अपने परिवार से छुपाने की कोशिश करते हैं। इसी सिचुएशन पर फ़िल्म का अगला गीत है "एक राजे का बेटा लेकर उड़ने वाला घोड़ा"। यह गीत उनकी कोशिश है अपनी नौकरी चले जाने को छुपाने की। किदार शर्मा के लिखे इस गीत को स्वरबद्ध किया है रायचन्द बोराल नें। गीत बच्चों वाला है, जिसमें रूपकथा है, लेकिन फ़िल्म के सिचुएशन के हिसाब से यह ग़मज़दा गीत है क्योंकि नायक की नौकरी चली गई है। इस गीत में जो कहानी है, उसे पूरा तो नहीं कहा जा सकता, लेकिन जो भी है, गीत उस ज़माने का सुपरहिट गीत रहा है। गीत सुनने से पहले ये रही इस गीत में कही गई कहानी:

एक राजे का बेटा लेकर उड़ने वाला घोड़ा,
देश देश के सैर की ख़ातिर अपने घर से निकला।

उड़ते-उड़ते चलते-चलते थके जो उसके पाँव,
तो इक जगह पर बैठ गया वो देख के ठण्डी छाँव।

इतने में होनी ने अपनी बंसी वहाँ बजायी,
जिसको सुन कर परियों की शहज़ादी दौड़ी आयी।


उसके बाद क्या हुआ, उसकी आप ख़ुद ही कल्पना कर लीजिये, और हो सके तो इस गीत को पूरा लिख कर हमें oig@hindyugm.com पर ज़रूर लिख भेजिये।



क्या आप जानते हैं...
कि संगीतकार रायचन्द बोराल के पिता लालचन्द बोराल अपने ज़माने के मशहूर गायक और पखावजवादक थे।

दोस्तों अब पहेली है आपके संगीत ज्ञान की कड़ी परीक्षा, आपने करना ये है कि नीचे दी गयी धुन को सुनना है और अंदाज़ा लगाना है उस अगले गीत का. गीत पहचान लेंगें तो आपके लिए नीचे दिए सवाल भी कुछ मुश्किल नहीं रहेंगें. नियम वही हैं कि एक आई डी से आप केवल एक प्रश्न का ही जवाब दे पायेंगें. हर १० अंकों की शृंखला का एक विजेता होगा, और जो १००० वें एपिसोड तक सबसे अधिक श्रृंखलाओं में विजय हासिल करेगा वो ही अंतिम महा विजेता माना जायेगा. और हाँ इस बार इस महाविजेता का पुरस्कार नकद राशि में होगा ....कितने ?....इसे रहस्य रहने दीजिए अभी के लिए :)

पहेली 2/शृंखला 18
गीत का ये हिस्सा सुनें-


अतिरिक्त सूत्र - शांता आप्टे की आवाज़ है इसमें.
सवाल १ - गीतकार बताएं - ३ अंक
सवाल २ - संगीतकार बताएं - २ अंक
सवाल ३ - फिल्म के निर्देशक बताएं - १ अंक

पिछली पहेली का परिणाम -
एक बार फिर अमित और अनजाना जी ने शानदार शुरुआत की है, अविनाश जी लगता है इस बार उन्हें अच्छी टक्कर दे पायेंगें. पिछली शृंखला का आत्मविश्वास उनके जरूर काम आएगा, प्रतीक जी को भी बधाई

खोज व आलेख- सुजॉय चटर्जी



इन्टरनेट पर अब तक की सबसे लंबी और सबसे सफल ये शृंखला पार कर चुकी है ५०० एपिसोडों लंबा सफर. इस सफर के कुछ यादगार पड़ावों को जानिये इस फ्लेशबैक एपिसोड में. हम ओल्ड इस गोल्ड के इस अनुभव को प्रिंट और ऑडियो फॉर्मेट में बदलकर अधिक से अधिक श्रोताओं तक पहुंचाना चाहते हैं. इस अभियान में आप रचनात्मक और आर्थिक सहयोग देकर हमारी मदद कर सकते हैं. पुराने, सुमधुर, गोल्ड गीतों के वो साथी जो इस मुहीम में हमारा साथ देना चाहें हमें oig@hindyugm.com पर संपर्क कर सकते हैं या कॉल करें 09871123997 (सजीव सारथी) या 09878034427 (सुजॉय चटर्जी) को

Thursday, April 7, 2011

मोहब्बत में कभी ऐसी भी हालत पायी जाती है.....और मोहब्बत के भेद बताते बताते यूं हीं एक दिन अचानक सहगल साहब अलविदा कह गए

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 630/2010/330

सुर-सम्राट कुंदन लाल सहगल को समर्पित 'ओल्ड इज़ गोल्ड' की लघु शृंखला 'मधुकर श्याम हमारे चोर' की अंतिम कड़ी में आप सभी का स्वागत है। कल हमारी बातचीत १९४६ की यादगार फ़िल्म 'शाहजहाँ' पर आकर रुकी थी। इसी साल लाल मोहम्मद के संगीत में मुरारी पिक्चर्स की फ़िल्म आयी 'ओमर ख़ैयाम', जिसमें सहगल साहब एक बार फिर सुरैया के साथ नज़र आये। और फिर आया भारत के इतिहास का सुनहरा वर्ष १९४७। हालाँकि यह सुनहरा दिन १५ अगस्त को आया, इस साल की शुरुआत एक ऐसी क्षति से हुई जिसकी फिर कभी भरपाई नहीं हो सकी। १८ जनवरी को सहगल साहब चल बसे। पूरा देश ग़म के सागर में डूब गया। एक युग जैसे समाप्त हो गया। आपको शायद पता होगा कि उस दौरान लता मंगेशकर संघर्ष कर रही थीं और फ़िल्मों में अभिनय किया करती थीं अपने परिवार को चलाने के लिए। लता ने अपनी कमाई में से कुछ पैसे बचाकर एक रेडिओ ख़रीदा और घर लौट कर उसे 'ऒन' किया और आराम से बिस्तर पर लेट गईं। और तभी रेडियो पर सहगल साहब के इंतकाल की ख़बर आई। लता इतनी हताश हुईं कि उस रेडियो को जाकर वापस कर आईं। लता के उस वक़्त की मनोस्थिति का आप अंदाज़ा लगा सकते हैं क्योंकि लता सहगल साहब को सब से ज़्यादा मानती थीं। विविध भारती के 'जयमाला' कार्यक्रम में लता जी ने कहा था, "स्वर्गीय श्री के. एल. सहगल, वैसे तो उनसे सीखने का सौभाग्य मुझे प्राप्त नहीं हुआ, मगर उनके गानें सुन सुन कर ही मुझमें सुगम संगीत गाने की इच्छा जागी। मेरे पिताजी, श्री दीनानाथ मंगेशकर, जो अपने ज़माने के माने हुए गायक थे, उनको सहगल साहब की गायकी बहुत पसंद थी। वो अक्सर मुझ सहगल साहब का कोई गीत सुनाने को कहते।"

सहगल साहब के गुज़र जाने के बाद १९४७ में उनकी अंतिम फ़िल्म प्रदर्शित हुई - 'परवाना'। 'जीत प्रोडक्शन्स' निर्मित इस फ़िल्म में एक बार फिर सुरैया नज़र आईं सहगल साहब के साथ। डी. एन. मधोक ने फ़िल्म के गानें लिखे और संगीतकार थे ख़ुरशीद अनवर। "डूब गये सब सपने मेरे", "ये फूल हँसके बाग में कलियाँ खिलाये जा", "उस मस्त नज़र पे जो पड़ी नज़र", "कौन बुझावे हे रामा हो" और "मोहब्बत में कभी ऐसी भी हालत पायी जाती है" जैसे सहगल साहब के गीतों नें इस फ़िल्म की शोभा बढ़ाई। आइए आज इस शृंखला की अंतिम कड़ी में सुनें "मोहब्बत में कभी ऐसी भी हालत पायी जाती है, तबीयत और घबराती है जब बहलायी जाती है, झिझक के गुफ़्तगूँ करना है अपना राज़ कह देना, इसी पर्दे के पीछे तमन्ना पायी जाती है, मोहब्बत दिल में छुप सकती है आँखों में नहीं छुपती, ज़ुबाँ ख़ामोश है लेकिन नज़र शरमाई जाती है"। और इसी के साथ इस अज़ीम और अमर गायक-अभिनेता कुंदन लाल सहगल पर केन्द्रित 'मधुकर श्याम हमारे चोर' शृंखला यहीं सम्पन्न होती है। सहगल साहब के गाये बहुत से गीत छूट गये, जिन्हें हम आगे चलकर समय समय पर सुनवाएँगे। 'ओल्ड इज़ गोल्ड' के सफ़र में आप युंही हमारा हमसफ़र बनें रहिए। इस स्तंभ के लिये अपनी राय और सुझाव oig@hindyugm.com के पते पर लिख भेजिये। शनिवार की शाम विशेषांक के साथ फिर हाज़िर होंगे, तब तक के लिए दीजिए इजाज़त, नमस्कार!



क्या आप जानते हैं...
कि कुंदन लाल सहगल के बेटे का नाम है मदन मोहन, और दो बेटियाँ हैं नीना और बीना। अफ़सोस की बात यह कि इनमें से कोई भी आज जीवित नहीं हैं।

दोस्तों अब पहेली है आपके संगीत ज्ञान की कड़ी परीक्षा, आपने करना ये है कि नीचे दी गयी धुन को सुनना है और अंदाज़ा लगाना है उस अगले गीत का. गीत पहचान लेंगें तो आपके लिए नीचे दिए सवाल भी कुछ मुश्किल नहीं रहेंगें. नियम वही हैं कि एक आई डी से आप केवल एक प्रश्न का ही जवाब दे पायेंगें. हर १० अंकों की शृंखला का एक विजेता होगा, और जो १००० वें एपिसोड तक सबसे अधिक श्रृंखलाओं में विजय हासिल करेगा वो ही अंतिम महा विजेता माना जायेगा. और हाँ इस बार इस महाविजेता का पुरस्कार नकद राशि में होगा ....कितने ?....इसे रहस्य रहने दीजिए अभी के लिए :)

पहेली 1/शृंखला 14
गीत का ये हिस्सा सुनें-


अतिरिक्त सूत्र - एस डी बर्मन का है संगीत.

सवाल १ - किस अभिनेता ने पार्श्वगायन किया है इस गीत में - 3 अंक
सवाल २ - गीतकार बताएं - 2 अंक
सवाल ३ - फिल्म का नाम बताएं - १ अंक

पिछली पहेली का परिणाम -
खैर इस बार मुकाबला सख्त और पहेलियाँ भी बेहद विविदास्पद रही. मगर फिर भी अमित जी अनजाना जी से मात्र एक अंक अधिक लेकर छटी बार विजेता बन गए हैं. अब तक श्याम कान्त जी ४ बार, शरद जी २ बार और अनजाना जी एक बार विजेता बने हैं. नयी श्रृंखला के लिए सभी को शुभकामनाये

खोज व आलेख- सुजॉय चटर्जी



इन्टरनेट पर अब तक की सबसे लंबी और सबसे सफल ये शृंखला पार कर चुकी है ५०० एपिसोडों लंबा सफर. इस सफर के कुछ यादगार पड़ावों को जानिये इस फ्लेशबैक एपिसोड में. हम ओल्ड इस गोल्ड के इस अनुभव को प्रिंट और ऑडियो फॉर्मेट में बदलकर अधिक से अधिक श्रोताओं तक पहुंचाना चाहते हैं. इस अभियान में आप रचनात्मक और आर्थिक सहयोग देकर हमारी मदद कर सकते हैं. पुराने, सुमधुर, गोल्ड गीतों के वो साथी जो इस मुहीम में हमारा साथ देना चाहें हमें oig@hindyugm.com पर संपर्क कर सकते हैं या कॉल करें 09871123997 (सजीव सारथी) या 09878034427 (सुजॉय चटर्जी) को

Wednesday, April 6, 2011

चाह बरबाद करेगी हमें मालूम न था....एक गीत जो वास्तव में बेहद करीब था सहगल के जीवन के भी

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 629/2010/329

फ़िल्म जगत के प्रथम सिंगिंग् सुपरस्टार कुंदन लाल सहगल को समर्पित 'ओल्ड इज़ गोल्ड' की लघु शृंखला 'मधुकर श्याम हमारे चोर' की नौवीं कड़ी में आप सब का एक बार फिर बहुत बहुत स्वागत है। १९४२ में 'भक्त सूरदास' और १९४३ में 'तानसेन' में अभिनय व गायन करने के बाद १९४४ में सहगल साहब और रणजीत मूवीटोन के संगम से बनीं एक और लाजवाब म्युज़िकल फ़िल्म 'भँवरा'। लेकिन इस फ़िल्म को वो बुलंदी नहीं मिली जो 'भक्त सूरदास' और 'तानसेन' को मिली थी। आपको शायद याद होगा इस फ़िल्म का अमीरबाई के साथ उनका गाया गीत "क्या हमने बिगाड़ा है, क्यों हमको सताते हो" हमनें 'ओल्ड इज़ गोल्ड' की लघु शृंखला 'गीत गड़बड़ी वाले' में सुनवाया था और बताया कि किस तरह से सहगल साहब नें इस गाने में गड़बड़ी की थी। ख़ैर, इसी साल १९४४ में सहगल साहब वापस कलकत्ता गये और उसी न्यु थिएटर्स के लिए एक फ़िल्म में अभिनय/गायन किया जिस न्यु थिएटर्स से वो शोहरत की बुलंदियों तक पहुँचे थे। यह फ़िल्म थी 'माइ सिस्टर'। पंडित भूषण के लिखे और पंकज मल्लिक के संगीतबद्ध किये इस फ़िल्म के गीतों नें फिर एक बार न्यु थिएटर्स को चर्चा में ले आया। "ऐ क़ातिब-ए-तक़दीर मुझे इतना बता दे", "है किस बुत की मोहब्बत में", "छुपो ना छुपो ना हमसे छुपो ना" और सब से लोकप्रिय "दो नैना मतवारे तिहारे हम पर जुलुम करे" जैसे गीत ज़ुबाँ ज़ुबाँ पर चढ़े। १९४५ में सहगल और सुरैया के अभिनय से सजी फ़िल्म आई 'तदबीर', जिसका एक गीत हम सुरैया पर केन्द्रित शृंखला 'तेरा ख़याल दिल से भुलाया न जायेगा' में सुनवाया था। यह जयंत देसाई की फ़िल्म थी। इसी साल १९४५ में सहगल साहब नें यूनिटी पिक्चर्स की फ़िल्म 'कुरुक्षेत्र' में भी अभिनय किया जिसके संगीतकार थे गणपतराव।

१९४६ की सब से उल्लेखनीय फ़िल्म थी ए. आर. कारदार की 'शाहजहाँ', जिसे सहगल साहब के फ़िल्मी सफ़र का अंतिम ब्लॊकबस्टर माना जाता है। इस फ़िल्म के दो गीत "ग़म दिए मुस्तक़िल" और "जब दिल ही टूट गया" हम सुन चुके हैं और फ़िल्म संबंधित तमाम जानकारियाँ भी बता चुके हैं। आज बारी है इस फ़िल्म से एक और गीत सुनने की, गीतकार हैं खुमार बाराबंकवी - "चाह बरबाद करेगी हमें मालूम न था"। सही अर्थ में सहगल साहब के शराब पीने की चाह ने ही उन्हें बरबादी के कगार तक ले पहुँचाया था। शराब पी पी कर गानें रेकॊर्ड किया करते और लोग उनकी वाह वाही करते कि पी कर उनका गला और निखर जाता है। १९४६ के आते आते उनकी तबीयत बहुत ख़राब हो चुकी थी। 'शाहजहाँ' के गीत "जब दिल ही टूट गया" की रेकॊर्डिंग् से पहले नौशाद साहब नें उनसे दर्ख्वास्त की कि एक टेक बिना पीये दे दें, फिर चाहे तो वो शराब पी कर गायें। सहगल साहब मान गये और अगले दिन जब बिना पीये रेकॊर्ड किए वर्ज़न को सुना तब सहगल साहब हैरान रह गये कि बिना पीये वाला वर्ज़न पीकर गाने वाले वर्ज़न से बेहतर था। नौशाद साहब नें उनसे कहा, "जिन लोगों नें आप से यह कहा कि पीये बग़ैर आपकी आवाज़ नहीं खुलती, वो आप के दोस्त नहीं है"। इस पर सहगल साहब का जवाब था, "अगर यही बात मुझसे पहले किसी ने कहा होता तो शायद कुछ दिन और जी लेता।" और सहगल साहब की इस झूठी चाहत नें उनका सर्वनाश कर दिया, और १८ जनवरी १९४७ को ४२ वर्ष की आयु में वो इस दुनिया को हमेशा हमेशा के लिए अल्विदा कह दिया। आइए सुनें "चाह बरबाद करेगी हमें मालूम न था, रोते रोते ही कटेगी हमें मालूम न था, मौत भी हम पे हँसेगी हमें मालूम न था, ज़िंदगी रोग बनेगी हमें मालूम न था।" कितनी अजीब बात है कि इस गीत का एक एक शब्द जैसे उन्हीं पर लागू हो गया!



क्या आप जानते हैं...
कि कुंदन लाल सहगल नें १९३३ में ३ रील की एक लघु उर्दू/हिंदी हास्य फ़िल्म में अभिनय किया था, जिसका शीर्षक था 'दुलारी बीबी'।

दोस्तों अब पहेली है आपके संगीत ज्ञान की कड़ी परीक्षा, आपने करना ये है कि नीचे दी गयी धुन को सुनना है और अंदाज़ा लगाना है उस अगले गीत का. गीत पहचान लेंगें तो आपके लिए नीचे दिए सवाल भी कुछ मुश्किल नहीं रहेंगें. नियम वही हैं कि एक आई डी से आप केवल एक प्रश्न का ही जवाब दे पायेंगें. हर १० अंकों की शृंखला का एक विजेता होगा, और जो १००० वें एपिसोड तक सबसे अधिक श्रृंखलाओं में विजय हासिल करेगा वो ही अंतिम महा विजेता माना जायेगा. और हाँ इस बार इस महाविजेता का पुरस्कार नकद राशि में होगा ....कितने ?....इसे रहस्य रहने दीजिए अभी के लिए :)

पहेली 10/शृंखला 13
गीत का ये हिस्सा सुनें-


अतिरिक्त सूत्र - सहगल साहब का गाया एक और क्लास्सिक गीत.

सवाल १ - संगीतकार कौन हैं इस बेहद मशहूर गीत के - 3 अंक
सवाल २ - गीतकार बताएं - 2 अंक
सवाल ३ - फिल्म का नाम बताएं - १ अंक

पिछली पहेली का परिणाम -
गीतकोश के अनुसार खुमार बराम्बंकी साहब ने खुद इस गीत को लिखने की बात कही थी पर रिकॉर्ड लेबल पर मजरूह का नाम गलती से आ गया था जिसके चलते बहुत सी साईटों पर ये मजरूह को ही क्रेडिट है, पर हम खुमार साहब की बात पर अधिक विश्वास करेंगें और ३ अंक अवध जी को ही देंगें यानी कल की पहेली में अमित जी और अनजाना जी कोई अंक नहीं अर्जित कर सके

खोज व आलेख- सुजॉय चटर्जी



इन्टरनेट पर अब तक की सबसे लंबी और सबसे सफल ये शृंखला पार कर चुकी है ५०० एपिसोडों लंबा सफर. इस सफर के कुछ यादगार पड़ावों को जानिये इस फ्लेशबैक एपिसोड में. हम ओल्ड इस गोल्ड के इस अनुभव को प्रिंट और ऑडियो फॉर्मेट में बदलकर अधिक से अधिक श्रोताओं तक पहुंचाना चाहते हैं. इस अभियान में आप रचनात्मक और आर्थिक सहयोग देकर हमारी मदद कर सकते हैं. पुराने, सुमधुर, गोल्ड गीतों के वो साथी जो इस मुहीम में हमारा साथ देना चाहें हमें oig@hindyugm.com पर संपर्क कर सकते हैं या कॉल करें 09871123997 (सजीव सारथी) या 09878034427 (सुजॉय चटर्जी) को

Tuesday, April 5, 2011

दीया जलाओ, जगमग जगमग....बैजू बावरा की आवाज़ बने थे सहगल

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 628/2010/328

ल्ड इज़ गोल्ड' में कुंदन लाल सहगल साहब के संगीत यात्रा की चर्चा करते हुए कल की कड़ी में हम आ पहुँचे थे वर्ष १९४२ में जब कलकत्ते के न्यु थिएटर्स को छोड़ सहगल साहब बम्बई के रणजीत मूवीटोन से जुड़ गये और यहाँ उनकी पहली फ़िल्म आयी 'भक्त सूरदास'। आइए आगे बढ़ते हैं और आज इस शृंखला की आठवीं कड़ी में चर्चा करते हैं रणजीत की ही एक और बेहद चर्चित फ़िल्म 'तानसेन' की जो बनी थी वर्ष १९४३ में। ज्ञान दत्त के जगह आ गये संगीतकार खेमचंद प्रकाश, जिन्होंने इस फ़िल्म के ज़रिये फ़िल्म संगीत जगत में हलचल पैदा कर दी। सहगल और ख़ुर्शीद अभिनीत इस फ़िल्म के गीत-संगीत नें न केवल खेमचंद प्रकाश की प्रतिभा का लोहा मनवाया, बल्कि संगीत सम्राट तानसेन के चरित्र को साकार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। खेमचंद साहब नें ध्रुपद गायकी और राजस्थानी लोक संगीत, इन दोनों का ही इस्तेमाल कर और राग रागिनियों के प्रयोग से इस फ़िल्म के गीतों का ऐसा समा बांधा कि इस फ़िल्म के गीत फ़िल्म-संगीत धरोहर के अनमोल नगीने बन गये। शंकरा, मेघ मल्हार, दीपक, सारंग, दरबारी, तिलक कामोद और मिया मल्हार जैसी रागों का प्रयोग सुना जा सकता है इन गीतों में। और सहगल साहब की भी क्या गायकी थी! हर एक गीत लाजवाब, हर एक गीत २४ कैरट का खरा सोना। इस फ़िल्म से आज के अंक के लिए हमनें चुना है राग दीपक पर आधारित "दीया जलाओ, जगमग जगमग"। ऐसा कहा जाता है कि तानसेन जब राग दीपक गाते थे तो दीये ख़ुद ब ख़ुद जल उठते थे। पता नहीं इस बात में कितनी सच्चाई है, लेकिन हम कम से कम इतना ज़रूर कह सकते हैं कि सहगल साहब की आवाज़ में इस गीत से आज हमारे इस महफ़िल की शमा ज़रूर रोशन हो गई है। इस गीत को लिखा है इंद्र चंद्र नें।

संगीतकार नौशाद खेमचंद प्रकाश को अपना गुरु मानते थे, और एक बार उन्होंने ऐसा कहा था कि उन्होंने १९५२ की अपनी फ़िल्म 'बैजु बावरा' में वही जादू उत्पन्न करने की कोशिश की थी जो जादू खेमचंद साहब नें 'तानसेन' में किया था, लेकिन वो उस मुकाम तक 'बैजु बावरा' को नहीं पहुँचा सके जिस मुक़ाम तक 'तानसेन' का संगीत पहँचा था। सहगल साहब के लिए नौशाद साहब के उद्‍गार हम कल की कड़ी में शामिल करेंगे, आइए आज पढ़ें सोहराब मोदी के विचार इस अज़ीम फ़नकार के लिए - "हज़ारों साल नर्गिस अपनी बेनूरी पे रोती है, बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर पैदा। फ़िल्म संगीत में तो क्या, बल्कि मैं तो कहता हूँ कि जहान-ए-फ़ानी में ऐसे लोग मुश्किल से होते हैं जो अपनी राह में वो नक्श-ए-क़दम छोड़ कर चले जाते हैं जो कभी नहीं मिटते। संगीत की दुनिया में ऐसे एक थे के. एल. सहगल, जिन्हें हम कभी नहीं भूल सकते।" तो दोस्तों, सुनिए एक ऐसा ही गीत जिसे भी भुला पाना नामुमकिन है।



क्या आप जानते हैं...
कि कुंदन लाल सहगल नें कुल ३६ फ़िल्मों में अभिनय किया, जिनमें २८ हिंदी, ७ बंगला और १ तमिल है।

दोस्तों अब पहेली है आपके संगीत ज्ञान की कड़ी परीक्षा, आपने करना ये है कि नीचे दी गयी धुन को सुनना है और अंदाज़ा लगाना है उस अगले गीत का. गीत पहचान लेंगें तो आपके लिए नीचे दिए सवाल भी कुछ मुश्किल नहीं रहेंगें. नियम वही हैं कि एक आई डी से आप केवल एक प्रश्न का ही जवाब दे पायेंगें. हर १० अंकों की शृंखला का एक विजेता होगा, और जो १००० वें एपिसोड तक सबसे अधिक श्रृंखलाओं में विजय हासिल करेगा वो ही अंतिम महा विजेता माना जायेगा. और हाँ इस बार इस महाविजेता का पुरस्कार नकद राशि में होगा ....कितने ?....इसे रहस्य रहने दीजिए अभी के लिए :)

पहेली 9/शृंखला 13
गीत का ये हिस्सा सुनें-


अतिरिक्त सूत्र - सहगल साहब का गाया एक और क्लास्सिक गीत.

सवाल १ - संगीतकार कौन हैं इस बेहद मशहूर गीत के - २ अंक
सवाल २ - गीतकार बताएं - ३ अंक
सवाल ३ - फिल्म का नाम बताएं - १ अंक

पिछली पहेली का परिणाम -
अमित जी जहाँ तक हमारी जानकारी है ये गीत राग दीपक पर आधारित है, इसलिए फिलहाल हम ३ अंक प्रतीक जी के खाते में डाल रहे हैं. हम कृष्ण मोहन जी अनुरोध करेंगें कि मार्ग दर्शन करें.

खोज व आलेख- सुजॉय चटर्जी



इन्टरनेट पर अब तक की सबसे लंबी और सबसे सफल ये शृंखला पार कर चुकी है ५०० एपिसोडों लंबा सफर. इस सफर के कुछ यादगार पड़ावों को जानिये इस फ्लेशबैक एपिसोड में. हम ओल्ड इस गोल्ड के इस अनुभव को प्रिंट और ऑडियो फॉर्मेट में बदलकर अधिक से अधिक श्रोताओं तक पहुंचाना चाहते हैं. इस अभियान में आप रचनात्मक और आर्थिक सहयोग देकर हमारी मदद कर सकते हैं. पुराने, सुमधुर, गोल्ड गीतों के वो साथी जो इस मुहीम में हमारा साथ देना चाहें हमें oig@hindyugm.com पर संपर्क कर सकते हैं या कॉल करें 09871123997 (सजीव सारथी) या 09878034427 (सुजॉय चटर्जी) को

Monday, April 4, 2011

मधुकर श्याम हमारे चोर.....आज उनकी जयंती पर हम याद कर रहे हैं हिंदी सिनेमा के पहले सिंगिंग स्टार के एल सहगल को

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 627/2010/327

ज है ४ अप्रैल २०११। आज ही के दिन १०७ साल पहले जन्म हुआ था सुर-गंधर्व कुंदन लाल सहगल का। उन्हीं को समर्पित लघु शृंखला 'मधुकर श्याम हमारे चोर' की सातवीं कड़ी में आज हम उनकी जयंती पर उन्हें श्रद्धांजली अर्पित करते हुए उनकी संगीत सफ़र की दास्तान को आगे बढ़ाते हैं। आज की कड़ी में हम क़दम रख रहे हैं ४० के दशक में। १९४० में सहगल साहब के अभिनय और गायन से सजी फ़िल्म आयी 'ज़िंदगी', जिसके गीतों नें एक बार फिर सिद्ध किया कि इस नये दशक के सरताज भी सहगल साहब ही हैं। "सो जा राजकुमारी सो जा", 'ज़िंदगी' की इस कालजयी लोरी को 'ओल्ड इज़ गोल्ड' पर 'प्योर गोल्ड' शृंखला में हम सुनवा चुके हैं। १९४० में न्यु थिएटर्स में भीषण आग लगी जिससे इस स्टुडिओ को माली नुकसान पहुँचा। लेकिन अपने आप को संभालते हुए १९४१ में इस कंपनी ने दो फ़िल्में प्रदर्शित कीं - 'लगन' और 'डॊक्टर'। 'लगन' में कानन देवी और सहगल साहब की जोड़ी थी जबकि 'डॊक्टर' में कानन देवी का साथ दिया पंकज मल्लिक नें। आरज़ू लखनवी के लिखे और आर.सी. बोराल के संगीतबद्ध किए और सहगल साहब के गाये 'लगन' के गीतों में "हट गई लो काली घटा", "मैं सोते भाग जगा दूँगा", "ये कैसा अन्याय दाता" और सब से लोकप्रिय "काहे को राड़ मचायी" उल्लेखनीय हैं। इसी फ़िल्म से कानन देवी की आवाज़ में एक गीत पियानो वाले़ सीरीज़ में हमनें आपको सुनवाया है। १९४२ के आते आते कई कलाकार फ़िल्म कंपनियों से इस्तीफ़ा देकर फ़्रीलांसिंग् शुरु करने लगे थे। कानन देवी भी इनमें शामिल थीं। उनके न्यु थिएटर्स से निकलते ही इस कंपनी को एक और झटका तब लगा जब सहगल साहब भी कलकत्ते को छोड़ बम्बई चले आये और जुड़े रणजीत मूवीटोन से। न्यु थिएटर्स छोड़ने का मतलब यह भी था कि रायचंद बोराल और पंकज मल्लिक से भी साथ छूट जाना। और इसी के साथ न्यु थिएटर्स का वह सुनहरा युग भी अपनी समाप्ति की तरफ़ बढ़ गया।

रणजीत मूवीटोन में सहगल साहब की पहली फ़िल्म थी 'भक्त सूरदास', जिसमें उनकी नायिका बनीं गायिका-अभिनेत्री ख़ुर्शीद। ज्ञान दत्त उन दिनों रणजीत के संगीतकार हुआ करते थे, और इस फ़िल्म में उनका दिया संगीत उनके करीयर का सफलतम संगीत बना। डी.एन. मधोक साहब के लिखे गीतों नें भक्तिमूलक होनें के बावजूद ख़ूब लोकप्रियता हासिल की। सहगल साहब के गाये गीतों में "मधुकर श्याम हमारे चोर", "निस दिन बरसत नैन हमारे", "तथा राग दरबारी कानड़ा आधारित "नैनहीन को राह दिखा प्रभु" सर्वाधिक लोकप्रिय हुए। उनकी आवाज़ में कुछ अन्य गीत हैं "दिन से दुगुनी हो जाये रतिया", "रैन गयी अब हुआ सवेरा", "कदम चले आगे" आदि। सहगल साहब नें ख़ुर्शीद के साथ एक युगल गाया "जिस जोगी का जोग लिया" और राजकुमारी के साथ उन्होंने गाया "सर पे कदम की छैया मुरलिया बाजे रही"। इस फ़िल्म से आइए सुनते हैं "मधुकर श्याम हमारे चोर"। कहा जाता है कि इस गीत की रेकॊर्डिंग् के समय सहगल साहब नशे में धुत थे। यह देख कर ज्ञान दत्त साहब काफ़ी तनाव में आ गये, पर सहगल साहब नें उन्हें भरोसा दिलाया और इसी हालत में रेकॊर्डिंग् की और सब को चमत्कृत कर दिया। इस गीत को सुनते हुए आपको यकीनन ६० के दशक में आई "अजहुं न आये साजना सावन बीता जाये" गीत की याद आ ही जायेगी। कैसे आयेगी यह आप ख़ुद ही सुनकर महसूस कर लीजिएगा। तो आइए इस गीत को सुनें, ज्ञान दत्त साहब की चर्चा हम फिर किसी कड़ी में करेंगे।



क्या आप जानते हैं...
कि 'भक्त सूरदास' संगीतकार ज्ञान दत्त की एकमात्र ऐसी फ़िल्म है जिसमें उन्होंने सहगल साहब को गवाया था।

दोस्तों अब पहेली है आपके संगीत ज्ञान की कड़ी परीक्षा, आपने करना ये है कि नीचे दी गयी धुन को सुनना है और अंदाज़ा लगाना है उस अगले गीत का. गीत पहचान लेंगें तो आपके लिए नीचे दिए सवाल भी कुछ मुश्किल नहीं रहेंगें. नियम वही हैं कि एक आई डी से आप केवल एक प्रश्न का ही जवाब दे पायेंगें. हर १० अंकों की शृंखला का एक विजेता होगा, और जो १००० वें एपिसोड तक सबसे अधिक श्रृंखलाओं में विजय हासिल करेगा वो ही अंतिम महा विजेता माना जायेगा. और हाँ इस बार इस महाविजेता का पुरस्कार नकद राशि में होगा ....कितने ?....इसे रहस्य रहने दीजिए अभी के लिए :)

पहेली 8/शृंखला 13
गीत का ये हिस्सा सुनें-


अतिरिक्त सूत्र - सहगल साहब का गाया एक और क्लास्सिक गीत.

सवाल १ - किस राग पर आधारित है मशहूर गीत - ३ अंक
सवाल २ - गीतकार बताएं - २ अंक
सवाल ३ - फिल्म का नाम बताएं - १ अंक

पिछली पहेली का परिणाम -
लगातार टाई का मामला चल रहा है, पर पहली कड़ी की बढ़त अमित जी की अभी भी जारी है....जी अमित जी कोशिश करेंगें कुछ नया बनाने की. फिल्हाल तो इस खुशी को सिंक हो जाने दीजिए पूरी तरह :)

खोज व आलेख- सुजॉय चटर्जी



इन्टरनेट पर अब तक की सबसे लंबी और सबसे सफल ये शृंखला पार कर चुकी है ५०० एपिसोडों लंबा सफर. इस सफर के कुछ यादगार पड़ावों को जानिये इस फ्लेशबैक एपिसोड में. हम ओल्ड इस गोल्ड के इस अनुभव को प्रिंट और ऑडियो फॉर्मेट में बदलकर अधिक से अधिक श्रोताओं तक पहुंचाना चाहते हैं. इस अभियान में आप रचनात्मक और आर्थिक सहयोग देकर हमारी मदद कर सकते हैं. पुराने, सुमधुर, गोल्ड गीतों के वो साथी जो इस मुहीम में हमारा साथ देना चाहें हमें oig@hindyugm.com पर संपर्क कर सकते हैं या कॉल करें 09871123997 (सजीव सारथी) या 09878034427 (सुजॉय चटर्जी) को

Sunday, April 3, 2011

करूँ क्या आस निरास भयी...एक और कालजयी गीत सहगल साहब का गाया

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 626/2010/326

'ओल्ड इज़ गोल्ड' की एक और नए सप्ताह के साथ हाज़िर हैं दोस्तों। आशा है रविवार की इस छुट्टी के दिन का आपनें भरपूर आनंद लिया होगा और विश्व कप में भारत की शानदार जीत से सुरूर से अभी पूरी तरह से उभर नहीं पाए होंगें। कुंदन लाल सहगल साहब पर केन्द्रित लघु शृंखला में पिछले हफ़्ते हम उनकी संगीत यात्रा की चर्चा करते हुए और उनके गाये गीतों व ग़ज़लों को सुनते हुए आप पहुँचे थे साल १९३७ में। आइए आज वहीं से उस सुरीली यात्रा को आगे बढ़ाते हैं। १९३८ में न्यु थिएटर्स नें आर.सी. बोराल और पंकज मल्लिक को मौका दिया अपनी संगीत यात्रा को एक बार फिर से बुलंदी पर बनाये रखने का। बोराल साहब नें 'अभागिन' और 'स्ट्रीट-सिंगर' में, तथा मल्लिक बाबू नें 'धरतीमाता' में कालजयी संगीत दिया। 'स्टीट-सिंगर' और 'धरतीमाता' में सहगल साहब के स्वर गूंजे। 'स्ट्रीट-सिंगर' की कालजयी ठुमरी "बाबुल मोरा नैहर छूटो जाये" हम 'ओल्ड इज़ गोल्ड' और 'सुर-संगम', दोनों ही स्तंभों में सुनवा चुके हैं। १९३८ में सहगल साहब नें 'प्रयाग संगीत समारोह' में भाग लिया, जिसमें मौजूद थे उस्ताद फ़ैयाज़ ख़ान, अब्दुल करीम ख़ान, बाल गंधर्व और पंडित ओम्कार नाथ जैसे दिग्गज फ़नकार। सहगल साहब की गायकी से वे इतने प्रभावित हुए कि उनकी गायी राग दरबारी सुनने के बाद उस्ताद फ़ैयाज़ ख़ान साहब ने उनसे कहा, "बेटे, ऐसा कुछ नहीं है जो मैं तुम्हे अब सिखा सकूँ"।

फिर आया साल १९३९। न्यु थिएटर्स अपनी पूरी शबाब पर था। इस कंपनी के चार फ़िल्में इस साल प्रदर्शित हुई - 'बड़ी दीदी', 'दुश्मन', 'जवानी की रीत' और 'सपेरा'। पहले दो में संगीत पंकज बाबू का था और बाक़ी दो में बोराल साहब के धुन गूंजे। इन चारों फ़िल्मों में 'दुश्मन' के गानें सब से ज़्यादा लोकप्रिय हुए। आरज़ू लखनवी साहब के लिखे गीतों को सहगल साहब ने अपनी जादूई आवाज़ में ढाला। फ़िल्म का सब से लोकप्रिय गीत "करूँ क्या आस निरास भयी" सहगल साहब के करीयर का एक और बेहद महत्वपूर्ण गीत रहा है। यह गीत आशावादी और निराशावादी, दोनों है। गीत शुरु होता है "करूँ क्या आस निरास भयी", लेकिन अंतिम अंतरे में आरज़ू साहब लिखते हैं "करना होगा ख़ून का पानी, देनी होगी हर क़ुर्बानी, हिम्मत है इतनी तो समझ ले आस बंधेगी नयी, कहो ना आस निरास भयी, कहो ना आस निरास भयी"। यानी कि 'आस निरास भयी' ऐसा न कहने की सलाह दी जा रही है। फ़िल्म के साउण्डट्रैक में हर गीत से पहले कुछ न कुछ शब्द बोले गये हैं। अब इसी गीत को लीजिए, गीत शुरु होने से पहले सहगल साहब कहते हैं, "आवाज़ की दुनिया के दोस्तों, फ़र्ज़ कीजिए कि किसी की ख़ुशी की दुनिया बरबाद हो चुकी हो और जहाँ तक उसकी निगाह जाती हो, उसे अंधेरे की निराशा और निराशा के अंधेरे के सिवा और कोई चीज़ दिखायी न देती हो, ऐसे वक़्त में उसे क्या करना चाहिए? मेरा ख़याल है कि.... करूँ क्या आस निरास भयी"। तो 'आवाज़' की दुनिया के दोस्तों, लीजिए इस कालजयी रचना का आनंद लीजिए सहगल साहब की कालजयी आवाज़ में।



क्या आप जानते हैं...
कि तलत महमूद साहब नें 'विविध भारती' में 'जयमाला' कार्यक्रम को प्रस्तुत करते हुए सहगल साहब के गाये इसी गीत "करूँ क्या आस निरास भयी" को बजाया था।

दोस्तों अब पहेली है आपके संगीत ज्ञान की कड़ी परीक्षा, आपने करना ये है कि नीचे दी गयी धुन को सुनना है और अंदाज़ा लगाना है उस अगले गीत का. गीत पहचान लेंगें तो आपके लिए नीचे दिए सवाल भी कुछ मुश्किल नहीं रहेंगें. नियम वही हैं कि एक आई डी से आप केवल एक प्रश्न का ही जवाब दे पायेंगें. हर १० अंकों की शृंखला का एक विजेता होगा, और जो १००० वें एपिसोड तक सबसे अधिक श्रृंखलाओं में विजय हासिल करेगा वो ही अंतिम महा विजेता माना जायेगा. और हाँ इस बार इस महाविजेता का पुरस्कार नकद राशि में होगा ....कितने ?....इसे रहस्य रहने दीजिए अभी के लिए :)

पहेली 6/शृंखला 13
गीत का ये हिस्सा सुनें-


अतिरिक्त सूत्र - सहगल साहब का गाया एक और क्लास्सिक गीत.

सवाल १ - फिल्म का नाम बताएं - १ अंक
सवाल २ - गीतकार बताएं - ३ अंक
सवाल ३ - मात्र इसी फिल्म में इस संगीतकार ने सहगल से गवाया था, संगीतकार कौन हैं - २ अंक

पिछली पहेली का परिणाम -
अमित जी, अवध जी और अंजाना जी के साथ साथ आज हम पूरे देश वासियों को भी बधाई देना चाहेंगें विश्व कप में शानदार जीत के लिए

खोज व आलेख- सुजॉय चटर्जी



इन्टरनेट पर अब तक की सबसे लंबी और सबसे सफल ये शृंखला पार कर चुकी है ५०० एपिसोडों लंबा सफर. इस सफर के कुछ यादगार पड़ावों को जानिये इस फ्लेशबैक एपिसोड में. हम ओल्ड इस गोल्ड के इस अनुभव को प्रिंट और ऑडियो फॉर्मेट में बदलकर अधिक से अधिक श्रोताओं तक पहुंचाना चाहते हैं. इस अभियान में आप रचनात्मक और आर्थिक सहयोग देकर हमारी मदद कर सकते हैं. पुराने, सुमधुर, गोल्ड गीतों के वो साथी जो इस मुहीम में हमारा साथ देना चाहें हमें oig@hindyugm.com पर संपर्क कर सकते हैं या कॉल करें 09871123997 (सजीव सारथी) या 09878034427 (सुजॉय चटर्जी) को

Total Pageviews

The Radio Playback Originals (Click on the covers to reach out the Albums)



Popular Posts

खरा सोना गीत

खरा सोना गीत - ऑडियो पॉडकास्ट
आपको प्यार छुपाने की बुरी आदत है
सी ए टी कैट...कैट माने बिल्ली
डम डम डिगा डिगा
रुला के गया सपना मेरा
शोख नज़र की बिजिलियाँ
टिम टिम टिम तारों के दीप जले
मेरी दुनिया है माँ तेरे आँचल में
वो हमसे चुप हैं
माई री मैं कासे कहूँ
यार बादशाह
आज की ताज़ा खबर
आँखों से जो

मिलिए रेडियो प्लेबैक के इन दमदार आर्टिस्टों से

संग्रहालय

Labels

sujooi chatterjee (863) old is gold (848) old classics (751) lata mangeshkar (303) suno kahani (268) krishnamohan mishra (258) sajeev sarathie (239) sujoy chatterjee (216) amit tiwari (214) Anurag Sharma (209) vishwa deepak tanha (148) taaza sur taal (139) सुनो कहानी (134) mohammad rafi (132) sujoy chaterji (118) mehfil-e-ghazal (116) Aaj ka Gaana (115) बोलती कहानियाँ (115) krishn mohan mishra (109) kahani (105) Bolti Kahaniyan (102) mukesh (100) Famous stories (98) Hindi audio book (95) hindi kahaniyan (94) story narration (94) stories (93) story in voice (92) kahaniyon mein aawaaz (90) kishore kumar (89) manna dey (86) .lata mangeshkar (84) Hindi (84) majrooh sultanpuri (83) Shailendra (80) Sangya Tandon (77) gulzaar (77) anand bakshi (76) s d burman (76) old classic (75) taaza sangeet (74) r d burman (73) Shankar Jaikishan (66) अनुराग शर्मा (64) krishna mohan mishra (63) Interview (62) sahir ludhayanvi (62) Audiology (60) cine paheli (60) asha bhonsle (58) Podcast (55) audio book (55) laxmikant pyarelal (55) asha bhonsale (54) premchand (53) Hind Yugm (52) geeta dutt (51) vishwa deepak (51) Audio (50) sujoi chatterjee (50) sur sangam (50) Madan Mohan (49) Naushad (48) ek mulakaat zaroori hai (47) ghazal collections... (47) music review (47) jagjit singh (46) krishnmohan mishra (46) Rashmi Prabha (45) ek geet sau kahaniyan (45) indian classical music (44) download (43) old is gold revival (43) hemant kumar (42) swar goshthi (42) shakeel badayuni (40) 100 years of indian cinema (39) gulzar (39) a r rahman (38) cover version (38) saturday special (38) Archana Chaoji (37) Salil Chaudhari (36) khara sona geet (36) playback india broadcast (36) Talat Mahmood (35) Kavita (34) hasrat jaipuri (34) mirza ghalib (34) o p nayyar (34) pooja anil (34) hindiyugm (33) rag bhairavi (33) Poem (32) Composed Song (31) kalyanji anand ji (30) win 5000 cash (30) c ramchandra (29) k l sehgal (29) sundaymorning coffee (29) लघुकथा (29) Awaz (28) Geet Ateet (28) pandit bhimsen joshi (28) emailkebahaneyaadonkekhazane (26) roshan (26) anuraag sharma (25) shradhanjali (25) Abhishek Ojha (24) death Anniversary (24) kaifi aazmii (24) khayyam (24) Harishankar Parsai (23) Reetesh Khare (23) kavyapaath (23) mohd rafi (23) naushaad (23) raj kapoor (23) sonu nigam (22) आवाज़ (22) Music (21) audio story (21) mehfil e kahkshaan (21) season # 03 (21) Podcast Kavi Sammelan (20) Shaifali Gupta (20) asha bhosale (20) jaidev (20) raja mehandi ali khan (20) vasant desai (20) Kuhoo Gupta (19) ghazal (19) pritam (19) rafique sheikh (19) ravi composer (19) rishi s (19) shreya ghoshal (19) ustad amir khan (19) anil biswaas (18) devotional songs (18) har geet ki ek kahani hoti hai (18) indeevar (18) javed akhtar (18) lata sangeet parv (18) musical tribute (18) nida fazli (18) rajendra krishan (18) rare gems (18) songs reviews (18) sujoy chatterji (18) swargoshthi (18) amitabh bhattacharya (17) blogger's choice with rashmi prabha (17) irshad kamil (17) sameer goswami (17) short story (17) sumit chakravorthy (17) suresh wadkar (17) FEATURED ARTIST OF THE WEEK (16) Filmy Chakra (16) Hindi audio (16) Shanno Aggarwal (16) bharat vyas (16) biswajit nanda (16) girija devi (16) maine dekhi pahli film (16) pankaj subeer (16) playback vani (16) sanjay patel (16) shankar ehsaan loy (16) surraiya (16) thumari (16) amit trivedi (15) classical music (15) kavi pradeep (15) rajesh roshan (15) sangya tondon (15) ustad bismillah khan (15) Khushbu (14) Munshi Premchand (14) Sangeet Sameeksha (14) Shobha Mahendru (14) hariharan (14) mehender kapoor (14) nusrat fateh ali khan (14) qamar jalalabaadi (14) ravindra jain (14) sangya tandan (14) suman kalyanpur (14) ustad rashid khan (14) NEW RELEASE (13) dev anand (13) featured album of the month (13) indian folk music (13) music review 2011 (13) music review 2013 (13) original uploads (13) rajender krishan (13) shamshaad begum (13) Geetcast (12) Rahat Fateh Ali Khan (12) awaaz mahotsav (12) bhupendra (12) mohit chauhan (12) new songs (12) noorjahan (12) prakash pandit (12) shamshad begum (12) sufi music (12) thaath (12) vishv deepak tanha (12) Deepali Pant Tiwari (11) RAG BASED SONGS OF MADAN MOHAN (11) RAG BASED SONGS OF NAUSHAD (11) RAG BASED SONGS OF ROSHAN (11) Rabindra Nath Tagore (11) Radio Salaam namaste (11) Sajeev Sarthie (11) Sharad Tailang (11) Swapn Manjusha (11) broadcasting (11) chitragupt (11) dilip kavathekar (11) featured artist of the month (11) hridaynath mangeshkar (11) judgement first round (11) k.l. sahgal (11) lata birthday (11) lavanya shah (11) mukesh special (11) rag kedar (11) remembering ghalib (11) roop kumar rathod (11) shishir parkhie (11) sukhvinder singh (11) sunidhi chauhaan (11) Articles (10) FIMON KE ANGAN MEN THUMAKATI PARAMPARIK THUMARI (10) Jaishankar Prasad (10) Shivani Singh (10) aaj ka kalaakaar (10) amitabh bachan (10) asad bhopali (10) baal Kavita (10) bachchon ki kavitayen (10) bhupen hazarika (10) geeta datt (10) indian classical (10) jaan nisaar akhtar (10) last series (10) male lories (10) music directors worked for raj kapoor (10) neelam Mishra (10) new song every friday (10) o p naiyyar (10) prashn pratiyogita (10) rare song (10) ravindra jain special (10) satire (10) season 2 (10) shabdon ki chaak par (10) shailesh bharatwasi (10) tapan sharma chintak (10) yogesh (10) साहित्य (10) Aditya Prakash (9) Baal Udyan (9) Girijesh Rao (9) HINDI SONGS (9) Himesh Reshmiya (9) Kishor Kumar (9) Mridul Kirti (9) Pawas ke rag (9) SHAAN (9) abida parveen (9) amit kumar (9) bahadur shah zafer (9) ek pal kii umr lekar (9) friday release (9) kailash kher (9) kamal barot (9) khemchandra prakash (9) kishore kumar series (9) lakshmikant pyarelal (9) lata di (9) mahendra kapoor (9) music news (9) music news week (9) new hindi song (9) new upload (9) nikhil anand giri (9) pandit jasraj (9) parasmani acharya (9) purvaayi (9) rag bhimpalasi (9) rag kafi (9) rag malkauns (9) rare songs of lata (9) s h bihari (9) shabdon ke chaak par (9) shankar mahadevan (9) songs 2013 (9) songs 2014 (9) story (9) sudha malhotra (9) varsha geet (9) win 5000 (9) उषा छाबड़ा (9) 2nd season (8) Anita Kumar (8) Gungunate Lamahe (8) Manna De (8) RAGAS AND TIME (8) Ranjana Bhatia (8) Top 50 songs of year 2008 (8) ahteraam (8) amrita pritam (8) anil vishwas (8) bappi lahiri (8) begum akhtar (8) bimal roy (8) hind yugm awaaz (8) kajari songs (8) kk (8) manuj mehta (8) mazrooh sultanpuri (8) mehdi hasan (8) new composer singer (8) new song review (8) nutan (8) pandit ajay chakravorthy (8) pandit narender sharma (8) pandit ravi shankar (8) pandit ravishankar (8) prem dhawan (8) rag bageshri (8) rag khamaj (8) s n tripathi (8) sameer (8) swanand kirkire (8) traditional thumaries (8) vani jayaram (8) vidushi girija devi (8) अर्चना चावजी (8) Geeton Bhari Kahani (7) Har Geet Kii Ek Kahaani Hoti Hai (7) KAHKASHAN (7) Kajal Kumar (7) Poetry recital (7) RAGAS WITH TWO MADHYAMS (7) Ranjana Bhatia Ranju (7) Srinivas Panda (7) The radio playback originals (7) Urdu (7) Usha Chhabra (7) ahmed faraz (7) alka yagnik (7) amit khanna (7) anjaan (7) annual countdown 2008 (7) anu malik (7) anuradha paudwal (7) asha bhosle (7) ashok kumar (7) azeem shayaron ko salaam (7) basant desai (7) baton baton men (7) boigraphy (7) chitalkar (7) chitra singh (7) d n madhok (7) dilip kumar (7) entertainment news (7) filmon men thumri (7) gold series (7) hindi music (7) husnlaal bhagtram (7) indian instrumental music (7) k j yesudas (7) khemchand prakash (7) madan mohan special (7) mahatma gandhi (7) malini rajurkar (7) manoj kumar (7) mitti ke geet (7) naksh lyalpuri (7) new track (7) pandit kumar gandharva (7) prasoon joshi (7) radio interview (7) rag jogiya (7) rag lalit (7) rag megh malhar (7) rag pahadi (7) raj kapoor vishesh (7) rupesh rishi (7) sumit chakravarthy (7) tribute (7) tripti shakya (7) tujhase naraz nahin zindagi (7) ustad bade gulam ali khan (7) ustad shayaron ko salaam (7) varshik geetmaala (7) vishaal bhardwaj (7) vishaal shekhar (7) vishva deepak tanha (7) wikipedia (7) पूजा अनिल (7) Asghar Wajahat (6) Dr. Prabha Atre (6) Har Geet Kii Ek Kahani Hoti Hai (6) Kabir (6) Mahadevi Verma (6) Meenakshi (6) Meenu (6) Music Article (6) PAWAS RITU KE RAG (6) R.D. Burman (6) SHREYA GHOSAL (6) SINGER (6) SUNITA YADAV (6) Sakshatkar (6) ali sardar zafari (6) anil biswas (6) ashwini bhide deshpande (6) birthday special (6) chaiti (6) choice of sharad tailang (6) dhrupad (6) festival special (6) film chacha zindabad (6) film godan (6) geet sameeksha (6) ghulam ali (6) gurudutt (6) holi special (6) jaydev (6) johrabai ambalewali (6) kaumudi majumdaar (6) kishori amonkar (6) krishan raj kumar (6) kumar aditya (6) manto (6) meer taki meer (6) mohammad ibrahim zauk (6) muveen (6) muzaffer ali (6) n dutta (6) neeraj (6) nirala (6) pandit omkarnath thakur (6) pankaj malik (6) pankaj udhaas (6) parag sankla (6) r c boral (6) rag bahar (6) rag bhupali (6) rag gaud malhar (6) rag pilu (6) rag yaman kalyan (6) s.n. tripathi (6) sachindev barman (6) sangam (6) sangeet sameksha (6) shahnai (6) shubha mudgal (6) sitar recital (6) sunil dutt (6) tarana (6) ujjwal kumar (6) vidushi malini rajurkar (6) waah ustad waah (6) yesudas (6) Aparajita Kalyani (5) Bhisham Sahni (5) Chhayawaadi Kavita (5) Faiz Ahmad Faiz (5) Gaurav Solanki (5) Happy new year (5) Hindi Famous stories (5) Krishna Raj Kumar (5) Pakistani Singer (5) Pittsburgh (5) Pt. Sudarshan (5) Usha Mangeshkar (5) Voice (5) amirbai karnataki (5) arijit singh (5) artist of hind yugm (5) b r chopra (5) bhajan (5) bhimsen joshi (5) birth anniversary (5) chhaya ganguli (5) classical singer (5) dadara (5) darna jhukna (5) dr. n. rajam (5) film baiju bawara (5) film jhanak jhanak payal baaje (5) film ladaki (5) film ramrajya (5) film tansen (5) g m durrani (5) harivansh ray bachan (5) hemant badaya (5) hindi kavitayen (5) hit pared 2013 (5) hrishikesh mujherjee (5) indivar (5) instrumental music (5) kajri (5) kuldeep singh (5) kumar sanu (5) linta manoj (5) lyricist shailendra (5) mahesh bhatt (5) majaz lakhnavi (5) meena kapoor (5) meenu singh (5) mere ye geet yaad rakhna (5) mubarak begum (5) music director roshan (5) nirmala devi (5) online release of book (5) pandit chhannulal mishra (5) parul ghosh (5) playback vaani (5) rabindra sangeet (5) racheta tandon (5) radio playback india (5) rag basant bahar (5) rag bhatiyar (5) rag kamod (5) rag sohani (5) rag todi (5) rajesh khanna (5) rashmi nair (5) reader's choice (5) sajjad hussain (5) salim sulemaan (5) sameeksha (5) shakil badayunni (5) shakti samanta (5) shankar jayakishan (5) shweta pandey (5) singer manna dey (5) slumdog millionaire (5) snehil bhatkar (5) sooraj chand aur sitare (5) subhojit (5) talat azeez (5) talat mehmood (5) usha khanna (5) ustaad vilayat khan (5) ustad abdul kareem khan (5) ustad amjad ali khan (5) ustad shahid parvez (5) vandana gupta (5) video download (5) vishal bhardwaj (5) waah ustaad waah series (5) yeshudas (5) अभिषेक ओझा (5) 500th episode of old is gold (4) Alok Shankar (4) FAGUN KE RANG (4) FILMY GEETON MEN THUMARI KE TATWA (4) Gopal Das Neeraj (4) Harihar Jha (4) Ismat Chugtai (4) KAHAKASHAN (4) Krishan Chander (4) Madhavi Ganapule (4) Maithilisharan Gupt (4) Monica Gupta (4) Priti Sagar (4) S D Barman (4) SANGEET KE SHIKHAR PAR (4) Sangeet Sameekshak (4) Sudha Arora (4) Vimochan (4) adnan sami (4) aisa nahi ki aaj mujhe (4) akhiri baar bas (4) amir khusro (4) amrita imroz (4) anuj srivastav (4) anvita das guptan (4) aradhna (4) atal bihari vajpeyee (4) awara dil (4) azam khan (4) baiju bawara (4) begam parvin sultana (4) best songs of 2009 (4) bhupendra singh (4) caravan cine-sangeet ka (4) chale jaana (4) deep jagdeep (4) dil padosi hai (4) dipti saxena (4) faiz ahmed faiz (4) famous interview (4) film bideshiya (4) film hamdard (4) film malhar (4) film meera (4) film mera saya (4) film sur sangam (4) ghulam mohammad (4) golden globe (4) gulshan bawara (4) gundecha bandhu (4) hafiz hoshiyaarpuri (4) hansraj behal (4) hasarat jaypuri (4) hemlata (4) hind yugm specials (4) hindi film sangeet (4) illayaraja (4) imroz (4) independence day (4) iqbal bano (4) jeet ke geet (4) kahkashaan (4) kalyan jee-anand jee (4) kamaal amrohi (4) kamal sadana (4) kaminey (4) kavita podcast (4) khushmizaz mitti (4) kidaar sharma (4) kshiti tiwari (4) laxmi pyare (4) laxmikant pyarelaal (4) lyricist (4) madhubala (4) main aur mera saaya (4) main nadi (4) mallika pukhraaz (4) manish vandemataram (4) mayuri veena (4) meena kumari (4) meera bhajan (4) mika (4) momin khan momin (4) mughle azam (4) mukul roy (4) music 2013 (4) music review -year 2009 (4) music video (4) nargis (4) neeraj shridhar (4) new song download (4) new tracks (4) new years special (4) nitin mukesh (4) o muniya (4) o sahibaa (4) p l santoshi (4) palash sen (4) pandit narendra sharma (4) pandit shiv kumar sharma (4) pankaj mukesh (4) paravin sultana (4) piyush mishra (4) pradeep somsundaran (4) pt. ravishankar (4) qateel shifai (4) rachita tandon (4) radhika budhkar (4) radio playback top 25 (4) rag adana (4) rag asavari (4) rag bhairav (4) rag bilawal (4) rag hansdhwani (4) rag miyan ki malhaar (4) rag tilak kamod (4) rag yaman (4) rahuldev barman (4) raja harishchandra (4) rajendra krishna (4) rakesh bakshi (4) ram sampat (4) ramdhari singh dinkar (4) rasoolan baai (4) ravivaar subah ki coffee aur kuch durlabh geet (4) rekha bhardwaaj (4) sach bolta hai (4) sadhna sargam (4) salim (4) sangeet dilon ka utsav hai (4) sanskaar geet (4) sarangi (4) saraswati devi (4) sartaj geet (4) shabbir kumar (4) shamsha begum (4) sharada (4) shiv hari (4) short film series (4) sitar (4) subhash ghai (4) subodh sathe (4) sunidhi chauhan (4) suraj jagan (4) surya kant tripathi (4) terrorism (4) third judge (4) thumri (4) top 25 radio playback india (4) tribute to the legand poets (4) udit narayan (4) uma devi (4) ustaad amjad ali khan (4) ustaad bade gulaam ali khaan (4) ustad faiyaaz khan (4) ustad vilayat khan (4) ustad zakir hussain (4) uttar pradesh (4) v. shantaram (4) vijay akela (4) vishal dadlani (4) vivek srivastava (4) vividh bharti (4) weekly news update (4) yearly review (4) yunus khan (4) प्रेमचंद (4) 1st judge (3) 2017 (3) AIR FM Gold (3) Bachpan (3) Cartoonist (3) Dharmendra Kumar Singh (3) Divya Prakash (3) Ek Gadhe Ki Vapasi (3) HOLI & CHAITI SONGS (3) Hindi recording (3) Kavyanaad (3) LP (3) Lyrics writer (3) Madhavi Ganpule (3) Madhukar Rajasthani (3) Media (3) Nazim Naqvi (3) Nikhil (3) O Henry (3) Pakistani Shayra (3) Pradeep Manoria (3) Pradeep Sharma (3) Pratham Rashmi (3) Rajkumar singh (3) Raksha Bandhan (3) Renu Sinha (3) Shyam Sakha (3) Sudha Om Dhingra (3) Sumitra Nandan Pant (3) Thumari - Bhairavi (3) Upendranath Ashq (3) Vande Mataram (3) Vimal Chandra Pandey (3) Vishnu Prabhakar (3) Vivek Asthana (3) aapki baat (3) aarti anklikar (3) abhishek bhola (3) ahmed hussain (3) allama iqbal (3) aman kii asha (3) ameen sayani (3) ameerbai karnataki (3) amir meenai (3) amitabh verma (3) amol palekar (3) antara chakravarthy (3) anushka manchandani (3) appeal (3) archana (3) artist profile (3) asha (3) awaara (3) awaaz collection (3) babul mora naihar chooto jaaye (3) bade gulam ali khan (3) badhe chalo (3) balamurli balu (3) balika vadhu (3) basant dev (3) been (3) begum abida parveen (3) beintehaa pyaar (3) bhent mulaqat (3) bhojpuri (3) bollywood music composer (3) brand new ghazal (3) bulo c rani (3) chaya ganguli (3) chinmayi (3) composers (3) d. harina madhavi (3) deepawali (3) delhi (3) devika raani (3) diler mehandi (3) dilraj kaur (3) dosti (3) dr. lalmani mishra (3) east india company (3) ek mulkaat zaroori hai (3) featured artists of the month (3) film basant bahar (3) film bhakt surdas (3) film goonj uthi shahnai (3) film guddi (3) film kohinoor (3) film sangeet samrat tansen (3) flute (3) flutist (3) gam diye mustakil kitna nazuk hai dil (3) gauhar jaan (3) geet sameksha (3) ghalib ke khat (3) ghulam haider (3) golden era of urdu poetry (3) goonj uthi shahnayi (3) gopal singh nepali (3) guddo dadi (3) happy diwali (3) harshdeep kaur (3) hasan kamaal (3) hasrat mohani (3) hemant (3) hemanti shukla (3) hindi poem (3) hindustani classical (3) hindyugm (3) hiradevi mishra (3) hit pared (3) holi songs (3) husn (3) hussain brothers (3) ibne insha (3) ibrahim ashq (3) indian folk music series (3) indu puri goswami (3) interview with sujoy chatterjee (3) jai ho (3) jaideep sahani (3) jalaluddin rumi (3) jatin lalit (3) javed ali (3) kabban mirza (3) kalpana (3) kanan devi (3) kathapath (3) kausar munir (3) kavita krihsnamurthy (3) kavvalli (3) kedar sharma (3) khayal (3) khursheed anwar (3) khurshid begam (3) kolkatta (3) krishna pandit (3) kumar (3) kundanlal sahagal (3) lalit pandit (3) listen stories (3) lyricists (3) lyrics (3) madanmohan (3) madhushree (3) mala sinha (3) mani ratnam (3) manish kumar (3) master salim (3) meenu purushotham (3) mehboob khan (3) mera naam jokar (3) mere sarkaar (3) mirza daag dehalvi (3) mithun (3) mohammad hussain (3) mohd irfan (3) muhammad rafi (3) mujra songs in bollywood films (3) mumbai (3) music competition (3) music director ramlal (3) musician (3) nakshab jarachabi (3) new album (3) new season (3) o.p.naiyar (3) oscar (3) pahala sur (3) pancham (3) pandit d v paluskar (3) pandit hari prasad chaurasia (3) pandit rajan mishra (3) pandit rajan sajan mishra (3) pandit ramnarayan (3) pandit ravi kichalu (3) pandit vidyadhar mishra (3) parasmani acahrya (3) patriotic (3) pehla sur (3) podcast on ahmed faraz (3) podcast pustak sameeksha (3) poetry book release (3) preeti sagar (3) pt. hariprasad chaurasiya (3) pustak charcha (3) raag kaafi (3) raaj kapoor (3) rag aabhogi (3) rag basant (3) rag darbari (3) rag gaud sarang (3) rag jayant malhar (3) rag jhinjhoti (3) rag mishra khamaj (3) rag ramdasi malhar (3) rag shyam kalyan (3) ragas & time (3) rahaten saari (3) rahman (3) rajender krishn (3) rajendra kumar (3) ramkali (3) rare images of kishore and other singers (3) ravii (3) recitation (3) remembering meer (3) republic day special (3) reshma (3) runa laila (3) sahir ludhiyanavi (3) sajeevsarathie (3) sajid wajid (3) sajjad ali (3) salil chaudhary (3) salman khan (3) sangeet hind yugm (3) sanjog (3) santosh anand (3) saptaah kii sangeet surkhiyan (3) sarod recital (3) shammi kapoor (3) shamshad begam (3) shanakar jaikishan (3) sheela dixit (3) shevan rizvi (3) short film (3) shuddh sarang (3) singer composer (3) singing competition (3) sitamber ke sikander (3) sohail sen (3) songs of october (3) songs that became part of indian freedom struggle (3) soulful melodies (3) special series (3) special songs (3) sreeram emaani (3) sudeep yashraj (3) sufism in india (3) sulakshan pandit (3) suleiman (3) surinder kaur (3) taaza khabar (3) tansen (3) tanveer naqvii (3) telephonic interview (3) tere chehre pe (3) the originals (3) thumri in films (3) total scores (3) tumsa nahi dekha (3) tushar bhatia (3) unreleased song (3) ustad ali akbar khan (3) ustad asad ali khan (3) ustad bade ghulam ali khan (3) ustad faiyaz khan (3) ustad rais khan (3) v shantaram (3) vaada (3) vaani jayraam (3) vaijaiyantimala (3) vani jayram (3) varanasi (3) vasant dev (3) vijaya rajkotiya (3) violin (3) vishal (3) wahida rahman (3) woh kaun thi (3) yash chopra (3) माधवी चारुदत्ता (3) 2 states (2) 50 years of bhojpuri cinema (2) Aamir khan (2) Abbas Raza Alvi (2) Abhijit Ghoshal (2) Agyeya (2) Ajay Navaria (2) Ajay Yadav (2) Alam Ara (2) Amitabh Meet (2) Anupama Chauhan (2) Arjun Rampal (2) Arun Ye Madhumay Desh Hamara (2) Ati Kya Khandala (2) Australia (2) B. Raghav (2) Band Darwaza (2) Bhairavi Thumari (2) Bharatendu Harishchandra (2) Bollywood music review (2) CHAITI GEET (2) CHITRAKATHA (2) Chaand Shukla Hadiabadi (2) DELHI BELLY (2) DU-FM (2) Dashte Tanhai mein (2) De de khuda ke naam pe (2) Deepak Baba (2) Deepak Mashal (2) Deepali Aab (2) Dipak Mashal (2) Film mugal-e-azam (2) Geetkast (2) Girijesh Kumar (2) Gori Tore Naina Kaajar Bin Kaare (2) Guide (2) Hindi kids poetry (2) Holi aayi re (2) Internet kavi goshthi (2) Jagdish Rawtani (2) Kabuliwala (2) Kahanipath (2) Kala (2) Kamal Kishor Singh (2) Kamalpreet Singh (2) Kavita Verma (2) Kavyagoshthi (2) LP sucess story with top directors (2) Lokarpan (2) Lokpreey Geet (2) MANASI PIMPLEY (2) Madhavi Charudatta (2) Manohar Lele (2) Mantra (2) Mithila (2) Munshi (2) Naseeb Apna Apna (2) Nautanki Saala (2) Neelam Prabha (2) Parul (2) Parul Pukhraj (2) Pittsburg (2) Poetry (2) Premchand Sahajwala (2) Puraskaar (2) Purushottam Pandey (2) RISHI S BALAJI (2) Rag - Pilu (2) Rag Khamaaj (2) Rag Marubihag (2) Raja (2) Rajeev Ranjan Prasad (2) Rajkumar Rao (2) Rakhi (2) Ramchandra Bhave (2) Rashmi Ravija (2) Rasoolan Bai (2) Salil Varma (2) Sangeetkaar (2) Saraswati Prasad (2) Satish Vammi (2) Sawal-jawab (2) Seema Sachdev (2) Seema Singhal (2) Sharad Joshi (2) Sharda Arora (2) Shikha Varshney (2) Shishir Krishna Sharma (2) Srikant Mishra 'Kant' (2) Sujoy Chaiterji (2) Suman Patil (2) Sumedha (2) Sydney (2) Tulsidas (2) Tushar Joshi (2) Ustad Raashid Khan (2) VOI (2) Vikash Kumar (2) Vishnu Bairagi (2) Web Radio (2) aag (2) aalam aara (2) aalha (2) aap kyon roye (2) abhi to main jaavan hoon (2) abis rizavi (2) about india (2) about manna dey (2) abraar alwi (2) acharya sajiv salil verma (2) achchhan bai (2) acting (2) actor (2) adharshila films (2) aggay (2) ak deepesh (2) akshay kumar (2) alama iqbaal (2) album hawa hawa (2) ali zafar (2) alia bhatt (2) all india radio (2) altaf raja (2) ameer khusro (2) amir khusaro (2) anand (2) anand milind (2) andheri raat ka sooraj (2) anmol ghadi (2) anpadh (2) antara chakravarthi (2) anup jalota (2) anupama (2) anuraag kashyap (2) anuradha (2) anuroop (2) anushka sharma (2) anvita dutt (2) anvita dutt guptan (2) arafat mehmood (2) arijeet singh (2) arpita (2) arshna singh (2) arun kumar (2) arvind tiwari (2) arzoo laknawi (2) asaam folk music (2) asha birthday (2) ashok pandey (2) augest ke ashvarohi geet (2) baal udhaan (2) baarish (2) baba bulle shah (2) baba nagarjun (2) babul (2) bachchan singh (2) bade ramdas (2) bageshri (2) balraj sahani (2) bandini (2) bappa lahiri (2) bappi lahri (2) baramasa (2) basant prakash (2) basu bhattacharya (2) beat of indian youth (2) bees saal baad (2) begam akhtar (2) begum parveen sultana (2) beintehaa (2) benny dayal (2) bharat ratn (2) bharateey gyanpeeth (2) bhatiyar (2) bhikhari thakur (2) bhopal (2) bhupendra-mitali (2) biddu (2) bikram ghosh (2) billu barber (2) blue (2) bollywood dairies (2) bombay ka babu (2) bombay talkies (2) bulle shah (2) c a t cat (2) c. ramchandra (2) chaha tha ek shaksh ko jaane kahan chala gaya.. (2) chaitanya bhatt (2) chaiti songs (2) chal ri sajani (2) chaliya (2) chandan sa badan chanchal chitwan (2) chandidas (2) chandrakauns (2) chhalla (2) chhath geet (2) chitchor (2) cochin (2) complete boigraphy (2) concert (2) cricket world cup 2011 theme song (2) d.n. madhok (2) daag (2) danish iqbal (2) dastak (2) dattaram (2) dedh ishkiya (2) delhi 6 (2) deshi (2) dev kohli (2) devotional music (2) dhamar (2) dhaniraam (2) dhaniram (2) dharmendra (2) dhoom 3 (2) dhruvapad (2) dil aaj shayar hai gam aaj nagma hai (2) dil hi to hai (2) dilli 6 (2) dilruba (2) dipali tiwari (2) do biigha zameen (2) dr. kamala shankar (2) dr. soma ghosh (2) dr.mukesh garg (2) drut khayal (2) durlabh geeton ki duniya (2) dutta ram (2) ek charcha sangya tandon ke saath (2) ek dhakka do (2) ek manzil raahi do (2) ek parichay (2) ek raat men (2) euphoria (2) evening ragas (2) faiyaz haashmi (2) fareeda khanum (2) farhaan akhtar (2) farhan akhter (2) farhat shazad (2) farida khannum (2) film bandini (2) film bazar (2) film chashmebaddoor (2) film chitralekha (2) film dekh kabira roya (2) film dhool ka phool (2) film dhoop chhano 1935 (2) film guide (2) film hum dono (2) film kismat (2) film kshudhit pashan (2) film mugal-e-aazam (2) film narasi bhagat (2) film naubahar (2) film personalities (2) film prempatra (2) film roar - tigers of sundarban (2) film sangam (2) film sanjog (2) film sardari begam (2) film sehra (2) film shaq (2) film silsila (2) film songs of 2008 (2) filmfare report (2) filmi chakra (2) flute recital (2) folk song (2) gaman (2) gazal (2) geet (2) geet chaturvedi (2) geet gaaya patharon ne (2) ghajini (2) ghalib asad bhopali (2) ghatam (2) ghazal collections of begum akhtar (2) ghazal singer composer (2) go green (2) govind nihalani (2) grammy awards (2) greatest flute player (2) guitar (2) gulzaar birthday special (2) gumraah (2) gyaan dutt (2) gyandutt (2) habib wali mohammed (2) hafiz jalandhari (2) hai apna dil to awaara na jaane kis pe aayega (2) haqiqat (2) harindranath chattopadhyay (2) harmandir singh hamraaz (2) hasan jahangir (2) haule haule (2) helen (2) highway (2) hind yugm video (2) hind-yugm choices (2) hindi bhavan (2) hori folk songs (2) hricha mukherjee (2) hum bekhudi men tumko pukare chale gaye (2) ina meena dika (2) indu jain (2) ineterview (2) inse miliye (2) interview with kishore kumar (2) interview with rohan kapoor (2) iqubal bano (2) ismat chugtayi (2) j m soren (2) jaane tu ya jaane na (2) jab se mili tose akhiyan jiyara dole re (2) jaddan bai (2) jagdeep singh (2) jagjeet singh (2) jagjit kaur (2) jagmohan bakshi (2) janmashthmi (2) javed badayuni (2) jeena yahan marna yahan (2) jeet ganguli (2) jeet ka junoon (2) jigar muradabaadi (2) jise tu kabool kar le wo ada kahan se laaon (2) jo chala gaya use bhool jaa (2) jodha akbar (2) josh (2) josh malihabadi (2) joy kumar (2) july ke jadugar (2) junaid warsi (2) k c dey (2) k. aasif (2) k.c. dey (2) kaanchi (2) kabir by abida (2) kagaz ke phool (2) kaif bhopali (2) kajari (2) kalam aaj unki jai bol (2) kalyanj anand ji (2) kamal dasgupta (2) kanika kapoor (2) kanu roy (2) karaoke track (2) karthik (2) kashmir (2) kashmir ki kali (2) kavita krishnamoorthy (2) kavita seth (2) kavitanjali (2) kavitayen (2) khuda ke liye (2) khwaza ahmed abbas (2) khyyam (2) kismat (2) kitaab (2) kohinoor (2) kohra (2) krishmamohan mishra (2) krishn dayal (2) kumaar (2) kumaar aditya (2) kumar gandharv (2) laayi hayaat aaye (2) lakshmi shankar (2) lakshmikaant pyarelal (2) lambi judai (2) lata mangeshkar special (2) lata sings ghalib (2) laxmi (2) leela naidu (2) leena chandavarkar (2) lengendary actress (2) letters of ghalib (2) lok geet (2) lokgeet (2) london dreams (2) love aajakal (2) m m kreem (2) m.s. shubhlakshmi (2) madhavi bandhopadhyay (2) madhu rani (2) mahalakshmi ayyar (2) mahendra bhatnagar (2) mahiya debut song. song 21 (2) makhdoom muhiuddin (2) malvika kanan (2) manhar (2) marasim (2) master gulam haidar (2) meera (2) meet brothers anjaan (2) mehandi hasan (2) mehboob (2) mehfil-e-kahkashan (2) melody (2) memories (2) mera kuch saman (2) meri duniya hai maa (2) merry christmas (2) micheal jackson (2) microstory (2) mirza galib (2) mirzapur (2) mohammad rafi sauda (2) mohan veena (2) mohinder kumar (2) moinuddin aulliya (2) moinuddin chisti (2) monika hathila (2) monty sharma (2) morning ragas (2) mother india (2) motilal (2) mr and mrs 55 (2) muhammad husain and ahamad husain (2) mujra (2) mukhde pe gesu aa gaye aadhe idhar aadhe udhar (2) multani (2) music director n. dutta (2) music today (2) music video of the month (2) my name is khan (2) n v krishnan (2) nadeem shrawan (2) nagarjun (2) nakkara (2) nandini (2) naqsh fariyaadi hai (2) naqsh lyallpuri (2) navlekhan award (2) naya gyanoday (2) naziya hasan (2) neelesh mishra (2) neeraj guru (2) neha bhasin (2) nepali sarangi (2) new composer ghazal (2) new movie (2) new series on awaaz (2) new theatars (2) new video (2) new york (2) nigaahon ke saaye (2) nishant akshar (2) nitin dubey (2) non filmy ghazals (2) noor dewasi (2) nyay sharma (2) official trailor (2) oh re taal mile nadi ke jal men (2) old is gold special (2) old is gold weekly special (2) online (2) online kavi sammelan (2) padmini kolhapuri (2) padosan (2) pahli ghazal (2) pakistani ghazal singer (2) pamela chopra (2) pandit bheemsen joshi (2) pandit channu lal mishra (2) pandit d.v. paluskar (2) pandit govind ram (2) pandit nikhil benerjee (2) pandit raghunath seth (2) pandit rajan and sajan mishra (2) pandit sreekumar misra (2) pandit vinayak rao patvardhan (2) pankaj awasthi (2) parasmani (2) parichay (2) parveen sultana (2) perub (2) play fresh song (2) playback india vaani (2) poems for schools (2) poets of hind yugm (2) poll (2) prabha aatre (2) pradeep pathak (2) prakash mehra (2) pritam chakravarthy (2) prithviraj kapur (2) priya (2) pt. ajay chakravarti (2) pt. jasraj (2) pt. omkarnath thakur (2) pt. shrikumar mishra (2) pune (2) purab aur paschim (2) purane tarane (2) pyarelaal (2) pyasa (2) queen (2) r.c. boral (2) raag bageshri (2) raag basant bahaar (2) raag bhairav (2) raag bhairavi (2) raag chhayanat (2) raag gaud malhar (2) raag jaijaivanti (2) raag miyan ki malhar (2) raag pahadi (2) raag shankara (2) raamlaal (2) rabbi shergil (2) radio (2) radio playback artists (2) radio playback hit pared (2) radio sabrang (2) rag - bhairavi (2) rag adaana (2) rag bihag (2) rag charukeshi (2) rag chhayanat (2) rag des malhar (2) rag desi (2) rag hamir (2) rag jaijaivanti (2) rag jayjayvanti (2) rag jog (2) rag kafi hori (2) rag kalyan (2) rag kalyan or yaman (2) rag kirwani (2) rag marava (2) rag marawa (2) rag maru bihag (2) rag multani (2) rag nand (2) rag paraj (2) rag puriya dhanashri (2) rag ramkali (2) rag shuddh sarang (2) rag sohni (2) rag sur malhar (2) rag tilang (2) raga based film songs (2) ragini (2) ragmala song (2) raja hasan (2) rajasthani folk (2) rajnigandha (2) rajshree films (2) rakesh khandelwal (2) ramakant and umakant gundecha (2) raman mahadevan (2) ramgopal verma (2) ramlakshman (2) rang malhar ke (2) rare ghazals (2) rare love songs of geeta dutt (2) rashtrakavi (2) rasulan bai (2) re man sur men gaa (2) rekha (2) rekha bhardwaj (2) richa sharma (2) rishi kapoor (2) rock on (2) roshan aara begum (2) rudra (2) s p balasubramanium (2) s. janaki (2) s. n. tripathi (2) s.d. barman (2) saadgi (2) sabita banerjee (2) sachin jigar (2) sachiv dev burman (2) sadhana (2) sagar (2) sagar patel (2) sajeev saarthie (2) salil chowdhury (2) salma aaga (2) salute to the martyr (2) sameer lal (2) sangeet samraat taansen (2) sangeeta shankar (2) sanjay leela bansali (2) saptaah kii surkhiyan (2) saraswati kumar deepak (2) saraswati rane (2) sargam (2) sarod (2) sarveshwar dayal saxena (2) saturday specail (2) satyajit baroh (2) sawan kii ghata (2) school days (2) scores so far (2) season # 02 (2) seema gupta (2) shaam se aankh men (2) shabdon men sansaar (2) shafakat amanat ali khan (2) shaharyaar (2) shahida parveen (2) shahjahan (2) shahrukh khan (2) shail hada (2) shankar hussain (2) shankarrao vyas (2) shantanu moitra (2) shanti mathur (2) shashi kapoor (2) shashikala (2) shaukat ali (2) shilpa rao (2) shobha gurtu (2) shokh nazar kii bijiliyan (2) shola aur shabnam (2) shradha bhilave (2) shyaam sunder (2) shyam benegal (2) singer rajkumari (2) singer sudha malhotra (2) song from UK (2) songs (2) songs of july (2) songs of kishore kumar for amitabh bachhan (2) songs of mukesh (2) songs of o p nayyar (2) sonik omi (2) special editions (2) special feature (2) sridevi (2) srividya kasturi (2) stage shows (2) star voice of india (2) story book vimochan (2) story collection (2) story to play (2) subhojet (2) success mantra (2) sudershan fakir (2) sudhir fadke (2) sufi song (2) sujata (2) sujoi home (2) sunday ke sunday (2) suprabha sarkar (2) suraiya (2) surayya (2) surbahar (2) sushma shreshth (2) swami ramanand (2) swargoshthi 253 (2) taal se taal mila (2) tahira syed (2) talaash (2) tanvi shah (2) tapas relia (2) tappa (2) tara balakrishnan (2) tarannum malik (2) taza nazm (2) teentaal (2) teental (2) teesari kasam (2) tere sur aur mere geet (2) thandi hawa kaali ghata aa hi gayi jhoom ke (2) the return of alam aara (2) thumari bhairavi (2) tim tim tim taaron ke deep jale (2) timir baran (2) title track (2) tochi raina (2) top 10 hind films till 2000 (2) top 10 songs of year 2008 (2) top 20 songs of 2012 (2) tu rubaru (2) tulsi kumar (2) tum kahan ho (2) tum kya jaano tumhari yaad men ham kitna roye (2) udta parinda (2) unnikrishnan k b (2) uper gagan vishaal (2) upkaar (2) usha uthup (2) ustaad shayaar (2) ustad abdul rasheed khan (2) ustad akhtar ali (2) ustad amjad ali khaan (2) ustad ghulam mohamad saaznawaaz (2) ustad gulam mustafa khan (2) ustad sultan khan (2) vanaraj bhatiya (2) vanraj bhatia (2) varun dhawan (2) veena sahastabuddhe (2) vichitra veena (2) vidushi n. rajam (2) vijay anand (2) vinay prajapati nazar (2) vinayak rao patvardhan (2) vinod (2) vinod bhardwaj (2) vinod khanna (2) vipin chaudhary (2) vishesh (2) vividh bharati (2) vocal classic singer (2) wake up sid (2) whats your raashi (2) writing articles (2) yaadein (2) yaar badshah yaar dilruba (2) yaas yagana changezi (2) yaman (2) yatindra mishra (2) year 2010 songs (2) zafar gorakhpuri (2) zubeen garg (2) ओold classics (2) कमलेश्वर (2) घुघूतीबासूती (2) छोटे मियाँ (2) 10 rare songs of gulzaar (1) 100th episode (1) 14 september 2008 (1) 150 th episode (1) 1949 (1) 1956 (1) 1958 (1) 1968 (1) 1982 a love marriage (1) 2008-09 (1) 26 november (1) 2nd october (1) 3 idiots (1) 300 years completed (1) 5 years of radio playback india (1) 50th episode (1) A Service Of Love (1) A Strange Story (1) ABCD (1) ACTOR MODEL & FORMER CRICKETER SAJIL KHANDELWAL (1) AFFAN QURESHI: (1) AIR (1) AIR FM Rainbow (1) AKARSHAN (1) ARR (1) AVM (1) AZEEM NAWAZ RAHI (1) Aadar Jain (1) Aakhen (1) Aakrosh (1) Aam Adami (1) Aaran Chaudhary (1) Aarazu Lakhanavi (1) Aashim Gulati (1) Aashiqui 2 (1) Aawaaz ke vahak (1) Abhinav Shukla (1) Abhishek Kashyap (1) Abhishek Patni (1) Abrar Zahoor (1) Achchan Baai (1) Achchha Bura (1) Adbhut Samvad (1) Adhar (1) Adhatiya (1) Aditya Pathak (1) Agni Samarpan (1) Agnisamadhi (1) Ahan Shetty (1) Ahmed Sagheer Siddiqui (1) Ajat Shatru (1) Ajay Singh Rathaur (1) Ajay pandey "sahaab" (1) Akbar Ke Navaratna (1) Akeli Si (1) Akhiri Tohfa (1) Akshay Rangshahi (1) Akshay mann (1) Alokananda Dasgupta (1) Altaf Fatima (1) Amar Ujala (1) Ami Mishra (1) AmitTiwari (1) Amrit Kumbh Ki Khoj Mein (1) Amritlal Nagar (1) An Astrologer's Day (1) Anand Math (1) Anandam (1) Andhe Jahan ke Andhe Raste (1) Anil Chadda (1) Anil Vishwaas (1) Anokhi Kalakriti (1) Anshuman Jha (1) Anton Chekhov (1) Anubhav Priya (1) Anugoonj (1) Anup manchalwar (1) Anurag Arya (1) Anurag Sharma; शोभा रस्तोगी (1) Anybody Can Dance (1) Apanapan (1) Apnon Ne Loota (1) Appeal ka Jadoo (1) April 2009 (1) Arjun Gupta (1) Arjun Kapoor (1) Armaan Jain (1) Arsh Sehrawat (1) Asakti Ki Mrigtrishna (1) Asamarth Data (1) Asha Gupta Ashu (1) Ashalata Biswas (1) Ashfaq Ullah Khan (1) Ashish Bisht (1) Ashish Sankrityaayan (1) Ashlil (1) Ashok Bajpai (1) Ashok Bhatia (1) Ashok vajpayee (1) Asit Kumar Mishra (1) Assamese film music (1) Athanni Ka Chor (1) Atma-sangeet (1) Atmaram (1) Audio songs (1) August (1) Aurangzeb (1) Avanish Gautam (1) B.L Nastik (1) BHK (1) BIBO (1) Babu Ki Badli (1) Badchalan (1) Bade Ghar Ki Beti (1) Bahubali 2 The Conclusion (1) Baizzat Bari (1) Bal Mukund Gupta (1) Balkavi Bairagi (1) Banka Zamindar (1) Bankim Chandra Chattopadhyay (1) Barish (1) Bechara Bhala Admi (1) Begum Jaan (1) Bekhud (1) Bemel Vivah (1) Benazara (1) Bhagvati Charan Varma (1) Bhagwan Raam (1) Bhakti Kaal (1) Bharat Mata par geet (1) Bhola (1) Bhookh (1) Bhool Bhuliya (1) Bhupendra Kumar (1) Bikharate Rishte (1) Bohni (1) Bore (1) Brocheta Espanya (1) Buddhijiviyon Ka Dayitva (1) Butarkhaunki (1) C.I.D (1) CAS studio (1) CHAYAGEET (1) CINE PAHELI MAHAMUKABALA (1) Campus (1) Canberra Radio (1) Chamchasan (1) Chandrashekhar Phanase (1) Channulal Mishra (1) Chappal (1) Char Bete (1) Chara Machine (1) Charles (1) Chatterjee (1) Chaube Ji (1) Cheel (1) Chester Bennington (1) Chetas Pandey (1) Chhannulal (1) Chhipkali Adami (1) Chhota Jadugar (1) Chhote Miyan (1) Chirag Jain (1) Chirag Paswan (1) Chitrangada (1) Chori Ka Arth (1) Chris Cornell (1) Cine Paheli 67 (1) Cine Paheli 75 (1) Cine Paheli 78 (1) Cine Paheli 79 (1) Cine Paheli 80 (1) Cine Paheli 81 (1) Comrade (1) Cycle ki Savari (1) D-lab hyderabaad (1) DDLJ (1) Daadara (1) Daadaraa (1) Dadi Jee Ki Chidiya (1) Dadra (1) Dag Dehalavi (1) Dajyu (1) Dakshin Bharat (1) Daler Mehndi (1) Dard E Disco (1) Dard Ki Mehak (1) Darshan Singh Ashat (1) Darshan do ghanshyam (1) Datta Davajekar (1) Daur saifi (1) David (1) Dawat (1) Deepika Padukon (1) Deputy Collector: Harishankar Parsai (1) Devendra Pathak (1) Devi (1) Dhamaar (1) Dheemi (1) Dhela Patta (1) Dhrupad Rag Bhairavi (1) Digvijay Singh Pariyar (1) Dinesh Mehta (1) Do Hath (1) Doosara Kamra (1) Doosri Shadi (1) Dr Preeti Prakash Prajapati (1) Dr Rekha Vyas (1) Dr. Amar Kumar (1) Dr. Kirit Chhaya (1) Dr. M. Balmurali Krishna (1) Dr. Mridul Kirti (1) Dum Dum (1) Durga Ka Mandir (1) EK GEET SAU KAHANIYAN 100 (1) EK GEET SAU KAHANIYAN 86 (1) EK GEET SAU KAHANIYAN 93 (1) EK GEET SAU KAHANIYAN 95 (1) EK GEET SAU KAHANIYAN 96 (1) EK GEET SAU KAHANIYAN 98 (1) EK GEET SAU KAHANIYAN 99 (1) EKGEET SAU KAHANIYAN (1) Ek Ashuddh Bevaqoof (1) Ek Gadha Nefa Mein (1) Ek Padhi Likhi Stri (1) Ek Raat (1) Ek Thi Daayan (1) Ek Tokri Bhar Mitti (1) Ek Vichitra Kahani (1) Ekansh Bhardwaj (1) Ekta Agarwal (1) Ektaal (1) Episode 01 (1) Episode 9 (1) F C Mehra (1) FICCI auditorium (1) FIRST AND SECOND MAHAVIJETA (1) Faisala (1) Fariyal (1) Fark (1) Farukh Kaisar (1) Favorite songs (1) Female duet (1) Feri Vala (1) Film - Aapki Seava Men (1) Film - Bajuband (1) Film - Bekasoor (1) Film - Bhartrihari (1) Film - Bideshiya (1) Film - Chitralekha (1) Film - Devdas (1) Film - Dil Hi To Hai (1) Film - Dooj Ka Chand (1) Film - Ladaki (1) Film - Main Suhagan Hoon (1) Film - Malhar (1) Film - Manzil (1) Film - Pakiza (1) Film - Ramrajya (1) Film - Saaj (1) Film - Sautela Bhai (1) Film - Shaq (1) Film - Street Singer (1) Film - Swami (1) Film -Nai Umar Ki Nai Fasal (1) Film Aarati (1) Film Amar (1) Film Babar (1) Film Bhinna Shadaj (1) Film Dadi Man (1) Film Gaman (1) Film Mother India (1) Film Naubahaar (1) Film Sanskar (1) Film Sant Gyaneshwar (1) Film Seema (1) Film Son Of India (1) Film Surat aur sirat (1) Film Tajmahal (1) Film naya andaz (1) Folk Kajari Songs (1) Folklore (1) Fun Asia (1) Fusion music (1) G S Kohali (1) GAK (1) GUDIA HAMSE ROOTH RAHOGI (1) Gair Mulki Ladki (1) Ganapat vandana (1) Ganapati bappa morya (1) Ganja (1) Garajpal Ki Chitthi (1) Gate (1) Gaurav Ajay Kaura (1) Gaurav Arora (1) Gaurav Sharma (1) Gaurav Vashishtha (1) Gautam Gulati (1) Gautam Rajrishi (1) Gautam Rode (1) Geet Ateet 03 (1) Geetkar (1) Ghar Aur Bahar (1) Gharjamai (1) Gheesa (1) Ghoos De doon Kya (1) Ghughuti Basuti (1) Girish Taurani (1) Gopal Prasad Vyas (1) Greeting card (1) Guitar Recital (1) Gujarati (1) Gulelbaz Ladka (1) Gulli Danda (1) Gummi (1) Gururbrahma (1) Gyan Prakash Singh (1) Gyan Prakash Vivek (1) Gyani (1) HERO HONDA SA RE GA MA PA (1) HMV (1) HORI THUMARI (1) Haan Deewana hon main (1) Half Girlfriend (1) Hamara Khandan (1) Hamara Mulk (1) Hans Christian Andersen (1) Hansi (1) Hansraj Sugya (1) Har Ki Jeet (1) Hari Krishna Devsare (1) Harkeerat Heer (1) Harmonium (1) Harshvardhan Kapoor (1) Harshvardhan Rane (1) Harsukh Bhatt (1) Hathon mein machhliyan (1) Hello tunes (1) Hema Sardesaai (1) Hemant Foundation (1) Hind Yugm Publication (1) Hindi Akademy (1) Hindi Karyakram (1) Hindi Story narrator (1) Hindi caller Tune... (1) Hindi film film released in 2008 (1) Hindi goshthi (1) Hindi ringtones (1) Hindi sugam Sangeet (1) Hindyugm ki kahani (1) Holi Ke Rang Tesu Ke phool (1) Homaira Rahman (1) Hum Dekhenge (1) Humaira Rahman (1) I hate luv storys (1) Ibadat (1) Ibn e Insha (1) Idgaah (1) Images of Kumbh Mela (1) Imandar (1) Imran Abbas (1) Inkaar (1) Interview with Digvijay Singh Pariyar (1) Intezar (1) Invitation (1) Irshad (1) Ishmit Singh (1) Isteefa (1) Jaa Re Ud Jaa Re (1) Jaane kya ho gaya (1) Jalta hai Badan (1) Japanese (1) Jay Shankar Prasad (1) Jeena isi ka naam hai (1) Jhalmala (1) Jhanki (1) Jhaptal (1) Jhooth Barabar Tap Nahin (1) Jin Raton ki bhor (1) Jism Kamane Nikal Gaya Hai (1) July (1) Junaid Wasi (1) June 2009 (1) Juniana Lanning (1) Jyotish Joshi (1) Jyotishi Ka Naseeb (1) Jyotsana Pandey (1) K.J. Yeshudas (1) KAHAKASHAN 25 (1) Kaash (1) Kachhua aur Khargosh (1) Kai Po Che (1) Kailash vajpayee (1) Kaka Hathrasi (1) Kalakaar Kaise Kaise (1) Kalyanji Anandji (1) Kalyug (1) Kamzor (1) Karan Kundra (1) Karanvir Sharma (1) Karma Ji Ki Tunn Parade (1) Kashmakash (1) Katti batti (1) Kaushal (1) Kauwa (1) Kavi Ka Sath (1) Kavigoshthi (1) Kavita Patowary (1) Kayar (1) Keshav Kumar 'Karn' (1) Khalil Gibran (1) Khari Boli (1) Khat Jo Likha Nahin Gaya (1) Khoobsurat Hain Aankhen Teri (1) Khoon Do (1) Khurshid Bano (1) Kiran Sindhu (1) Kishor Kumar Khorendra (1) Kranti (1) Kranti Trivedi (1) Krishna Chaturvedi (1) Krishnamoahan Mishra (1) Kuchh Kuchh Sabko Milta Hai (1) Kuldeep Anjum (1) Kunal Verma (1) Kunwar Shyam (1) Kusum Sharma (1) Kutta (1) Kutte Ki Dua (1) Kya Ve Unhen (1) Kya bhuloon kya yaad Karoon (1) Ladki Thi Vah (1) Ladkiyan (1) Lady Sriram College (1) Lakshamikant Pyarelal (1) Lalit Mohan Trivedi (1) Late Hemant (1) Laton Ke Bhoot (1) Listen (1) Loongi Lota aur Salaam (1) Lost Without You (1) M M Keeravani (1) MUHAMMAD WALEED MUSTAFA:Lead vocalist (1) Maa (1) Madhav Nagda (1) Madhavrao Sapre (1) Madhuri Joglekar (1) Madhuri Lata Pandey (1) Madhyam Vargiya Kutta (1) Mahashweta devi (1) Mahavijeta Special (1) Mahavir Aur Gadiwan (1) Mahotsav (1) Main Ek Bhartiya (1) Main ek bachche ko pyar kar rahi thi (1) Malti Joshi (1) Malvika Nirajan (1) Mamta (1) Mamta Ki Chhaon Mein (1) Mandir aur masjid (1) Manjushree (1) Manmohan Bhatia (1) Mannu Bhandari (1) Manohar Kahani (1) Mauzi Babu (1) Megan Mylan (1) Meherunnisa (1) Meherzan Mazda (1) Mele Ka Oont (1) Mere zazbaat (1) Meri bhains Ko Danda (1) Mintu (1) Mirage (1) Model & Actor (1) Mohammad Safi (1) Mohan Das (1) Mohit Suri (1) Motor Ki Chhinte (1) Mrinal Pandey (1) Muhammd Rafi (1) Mukesh Garg (1) Mukesh Pandey (1) Mummy ke super star (1) Mundan (1) Munia Ka Bachpan (1) Munish Sharma (1) Munshi Nawal Kishore (1) Murder 3 (1) Music - Timir Baran (1) Music Director - Roshan (1) Music Director Ravi (1) NIGAAHEN MILANE KO JEE CHAHTA HAI (1) Namak Ka Daroga (1) Nar Ho Na Nirash Karo Mann Ko (1) Naresh Rana (1) Nasihaton ka daftar (1) Nasoor (1) National poet (1) Naukari Ramesh Battra (1) Naveen Kumar (1) Naya Saal (1) Nayan (1) Nazar laagi raaza (1) Neeraj Basliyal (1) Neeraj Goswami (1) Neki (1) Nirmal Verma (1) Nirvasan (1) Nitin Vyas (1) Nitya Shefali (1) Nivedhitha (1) O Re Kaharo (1) O jane wale balamwa (1) O.P. Naiyar (1) OLD CHAITI GEET (1) Om Arya (1) Oranges (1) P Bhavini (1) P C Rampuria (1) PSVB (1) Pachhaheen Thumari (1) Padumlal Punnalal Bakshi (1) Paheli (1) Pakshi Aur Dimak: Muktibodh (1) Palash (1) Panchlight (1) Pandit Bade Ramdas Mishr (1) Pandit Balavant Rao Bhatt (1) Pandit Indra (1) Pandit Mallikarjun Mansur (1)