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Friday, November 22, 2013

'गन्दी बात' में भी बहुत कुछ अच्छा है प्रीतम दा के साथ


बॉलीवुड में दक्षिण की सफल फिल्मों का रिमेक जोरों पे जारी है. सभी बड़े सुपर स्टार जैसे सलमान, अजय देवगन, अक्षय कुमार आदि इन फिल्मों से सफलता का स्वाद चख चुके हैं, अब शाहिद कपूर भी आ रहे हैं रेम्बो राजकुमार बनकर....ओह माफ कीजियेगा आर...राजकुमार बनकर. फिल्म के नाम में रेम्बो का इस्तेमाल वर्जित (कोपीराईट कारणों से) होने के कारण फिल्म के नाम में ये बदलाव करना पड़ा. फिल्म में संगीत है हिट मशीन प्रीतम का, आईये नज़र डालें इस फिल्म के एल्बम पर, और जानें कि संगीत प्रेमियों के लिए क्या है इस एक्शन कोमेडी फिल्म के गीतों में. 

एल्बम के पहले तीन गीत पूरी तरह से दक्षिण के तेज रिदम वालों गीतों से प्रेरित हैं. इनमें प्रीतम की झलक कम और दक्षिण के संगीतकारों की छवि अधिक झलकती है. पहला गीत गन्दी बात एक मस्त मलंग गीत है जिसकी ताल और धुन इतनी जबरदस्त है कि सुनकर कोई भी खुद को कदम थिरकाने से नहीं रोक पायेगा. अनुपम अमोद के शब्द चटपटे हैं और कुछ पारंपरिक श्रोताओं को आपत्तिजनक भी लग सकते हैं. मिका की आवाज़ इस गीत के लिए एकदम सही चुनाव है पर गीत का सुखद आश्चर्य है कल्पना पटोवरी की जोशीली आवाज़ जिसने मिका को जबरदस्त टक्कर दी है. निश्चित ही एक हिट गीत. 

नए गायक नक्श अज़ीज़ ने खुल कर गाया है अगला गीत साडी के फाल से गायिका अन्तरा मित्रा के साथ. गीत की सरंचना बहुत खूब है, जहाँ गायक के हिस्से में मुखड़े की धुन और अंतरा पूरा का पूरा गायिका ने निभाया है. धुन मधुर है और रिदम भी बहुत ही कैची है. शब्द अच्छे हो सकते थे, पर शायद ही इसकी कमी गीत की लोकप्रियता पर असर डालेगी. हाँ मगर बेहतर शब्द इसे एक यादगार गीत में तब्दील अवश्य कर देते. गीत के अंत में नक्श की हंसी खूब जची है. 

दक्षिण की धुनों से प्रेरित तीसरा गीत मत मारी में कुणाल गांजावाला की आवाज़ सुनाई दी है बहुत समय के बाद, अगर कहें कि ये गीत अगर इतना मस्त बन पाया है तो इसकी सबसे बड़ी वजह कुणाल और गायिका सुनिधि की आवाजें हैं तो गलत नहीं होगा. खास तौर पर सुनिधि ने अपना हिस्सा इतनी खूबी से गाया है कि क्या कहने. कहीं कहीं तो वो हुबहू फिल्म की नायिका सोनाक्षी की ही आवाज़ में ढल गयीं हैं. वाकई जैसे कि गीत में कहा गया है कि मुझे तेरी गाली भी लगती है ताली...सुनिधि ने गलियां भी सुरीले अंदाज़ में गायीं हैं. वैसे गीत के अंत में सोनाक्षी अपने खास अंदाज़ में खामोश भी कहती है, जो गीत का एक और खास आकर्षण बन गया है. इस गीत की भी सफलता तय है. 

अरिजीत सिंह का रोमांटिक अंदाज़ सुनाई देता है अगले गीत धोखा धड़ी में. ये एल्बम का पहला और एकमात्र गीत है जहाँ लगता है कि ये प्रीतम की एल्बम है. गीत में प्रीतम की छाप है, निलेश मिश्रा के शब्द बेहद अच्छे हैं. एल्बम के तेज तड़क गीतों में ये गीत कुछ कम सुना रह जाए तो आश्चर्य नहीं होगा. 

अंतरा मित्रा का एक अलग अंदाज़ नज़र आता है कद्दू कटेगा गीत में. एकबार तो लगेगा कि ये ममता शर्मा हैं मायिक के पीछे. आशीष पंडित का लिखा ये गीत फिर एक बार दक्षिणी गीतों से प्रेरित है, पर एल्बम में शामिल इस श्रेणी के अन्य गीतों के मुकाबले ये गीत बेहद कमजोर है. हाँ इसका फिल्मांकन जरूर धमाल होने वाला है. 

एल्बम के गीत लंबे समय तक बेशक लोगों को याद न रहें, पर इनका हिट फ्लेवर फिल्म को सफलता की राह अवश्य दिखा सकता है. संक्षेप में कहें तो आर...राजकुमार एक मास अपील एल्बम है जो क्लब पार्टियों में तो शूम मचायेगा ही, गली मोहल्लों के उत्सवों में भी जमकर बजेगा. 

एल्बम के सर्वश्रेष्ठ गीत - गन्दी बात, साडी के फाल से, मत मारी, धोखा धड़ी 
हमारी रेटींग - ४.२      

Friday, November 15, 2013

सोनू निगम ने सुर जोड़े 'सिंह साहेब' की ललकार में

न्नी देओल निर्देशक अनिल शर्मा के साथ जोड़ीबद्ध होकर लौटे हैं एक बार फिर, जिनके साथ वो ग़दर -एक प्रेम कथा, और अपने जैसी हिट संगीतमयी फ़िल्में दे चुके हैं. सिंह साहेब द ग्रेट में अनिल ने चुना है सोनू निगम को जो इस फिल्म के साथ बतौर संगीतकार फिल्मों में अपनी नई पारी शुरू कर रहे हैं, पार्श्वगायन में अपने लिए एक खास मुकाम बना लेने के बाद सोनू ने हालाँकि अपनी एल्बम क्लासीकली माईल्ड में संगीत निर्देशन का जिम्मा उठाया था पर सिंह साहेब उनकी पहली फिल्म है इस नए जिम्मे के साथ.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सोनू ने फिल्म जगत में कदम रखा था बतौर बाल कलाकार फिल्म बेताब से, जो कि सन्नी देओल की भी पहली फिल्म थी बतौर नायक. अब इसे नियति ही कहेंगें कि सोनू की इस नई कोशिश में भी उन्हें साथ मिला है सन्नी पाजी का. एल्बम में कुल ५ गीत हैं जिसमें एक गीत अतिथि संगीतकार आदेश श्रीवास्तव का रचा हुआ है, आईये एक नज़र डालें इस ताज़ा एल्बम में संकलित गीतों पर. 

शीर्षक गीत में सोनू ने अपने 'कम्फर्ट ज़ोन' से बाहर आकर पंजाबी लोक गीतों के गायकों के भांति ऊंची पिच पर लेकर गाया है और उनका ये प्रयास बहुत ही कामियाब और सुरीला रहा है. सोनू की बहन तीशा निगम ने अपना हिस्सा बहुत ही खूबी से निभाया है. दोनों की गायकों का विरोधाभासी अंदाज़, लोक सुरों से उपजी धुन और सटीक शब्द इस गीत को बेहद खास मुकाम दे देते हैं. 

पंजाबी फ्लेवर की बात हो और जिक्र न हो दारु का तो बात कुछ अधूरी लगती है. दारु बंद कल से एक ऐसा फ्रेस है जो हर शराबी अपने अंतिम जाम के साथ बोलता है और अलगी महफ़िल के सजने तक वो इस वादे को निभाता भी है....खैर वापस आते गईं गीत पर, जहाँ गीतकार ने इस फ्रेस को हुक बनाकर अच्छा खाका रचा है. एक बार फिर सोनू गायकी में ऊर्जा से भरपूर रहे हैं, वास्तव में पूरी एल्बम में उन्होंने खुद को नए पिचों पर आजमाया है, कहा जा सकता है संगीत निर्देशन में उनकी प्रेरणा अपने भीतर के गायक को विविध आयामों में देखना ही है.

पान और पनवाडी का जिक्र लाकर उत्तर पूर्व के दर्शकों /श्रोताओं को रिझाने के लिए बना है आईटम गीत पलंग तोड़ जिसे आदेश श्रीवास्तव ने स्वरबद्ध किया है और गाया भी है प्रमुख गायिका सुनिधि चौहान के साथ मिलकर. गीत इन दिनों चल रहे आईटम गीतों सरीखा ही है. बहुत दिनों तक इसका स्वाद टिका रहेगा, कहना मुश्किल है. 

जब मेहंदी लग लग जाए में सोनू और श्रेया की सदाबहार जोड़ी एक साथ आई है एक सुरीले शादी गीत के साथ. गीत में पंजाबी शादियों की महक भी है और पर्याप्त मस्ती का इंतजाम भी. कदम थिरकाते बीट्स और शब्द भी सार्थक हैं. निश्चित ही एल्बम के बेहतर गीतों में से एक. सोनू ने एल्बम में एक हीर भी गाई है, पारंपरिक हीर का सुन्दर प्रयोग श्रोता सुन चुके हैं फिल्म प्रतिज्ञा के सदाबहार उठ नींद से मिर्ज़ा गीत में. प्रस्तुत हीर को सुनकर उस यादगार गीत की यादें अवश्य ताज़ी हो जाती है पर यहाँ अच्छे शब्दों के अभाव में वो माहौल नहीं बन पाया है जिसकी अपेक्षा थी. 

सिंह साहेब द ग्रेट का संगीत सुरीला अवश्य है पर नयेपन का अभाव है. एक दो गीतों को छोड़ दिया जाए तो बाकी गीतों में श्रोताओं को बाँध के रखने का माद्दा नहीं है. फिर भी सोनू की संगीतकार और गायक की दोहरी भूमिका को सराहा जा सकता है. उम्मीद करेंगें कि वो आने वाले दिनों में कुछ और बेहतर गीतों का तोहफा अपने श्रोताओं को देंगें. 

एल्बम के बहतरीन गीत - सिंह साहेब द ग्रेट, जब मेहंदी लग लग जाए, दारू बंद कल से
हमारी रेटिंग - ३.४      

  

Friday, October 25, 2013

एक आवाज़ जिसने गज़ल को दिए नए मायने

खमली आवाज़ की रूहानी महक और ग़ज़ल के बादशाह जगजीत सिंह को हमसे विदा हुए लगभग २ साल बीत चुके हैं, बीती १० तारिख को उनकी दूसरी बरसी के दिन, उनकी पत्नी चित्रा सिंह ने उनके करोड़ों मुरीदों को एक अनूठी संगीत सी डी का लाजवाब तोहफा दिया. "द वोईस बियोंड' के नाम से जारी इस नायब एल्बम में जगजीत के ७ अप्रकाशित ग़ज़लें सम्मिलित हैं, जी हाँ आपने सही पढ़ा -अप्रकाशित. शायद ये जगजीत की गाई ओरिजिनल ग़ज़लों का अंतिम संस्करण होगा, पर उनकी मृत्यु के पश्चात ऐसी कोई एल्बम नसीब होगी ऐसी उम्मीद भी आखिर किसे थी ? 

खुद चित्रा सिंह ने जो खुद भी एक बेमिसाल गज़ल गायिका रहीं हैं, ने इस एल्बम को श्रोताओं के लिए जारी किया यूनिवर्सल मुय्सिक के साथ मिलकर. जगजीत खुद में गज़ल की एक परंपरा हैं और उनकी जगह खुद उनके अलावा और कोई नहीं भर सकता. जगजीत की इस एल्बम में आप क्या क्या सुन सकते हैं आईये देखें. 

निदा फाजली के पारंपरिक अंदाज़ में लिखा गया एक भजन है. धडकन धडकन धड़क रहा है बस एक तेरो नाम ... जगजीत के स्वरों में इसे सुनते हुए आप खुद को ईश्वर के बेहद करीब पायेंगें. नन्हों की भोली बातों में उजली उजली धूप , गुंचा गुंचा चटक रहा है बस एक तेरो नाम  सुनकर जगजीत -निदा के एल्बम इनसाईट  की बरबस ही याद आ जाती है. 

अगली ग़ज़ल एक तेरे करीब आने से  को सुनकर लगता है कि शयद जगजीत के बेहद शुरूआती दिनों की गज़ल रही होगी जो किसी कारणवश प्रकाशित नहीं हो पायी. जाने क्यों बिजलियों को रंजिश है, सिर्फ मेरे ही आशियाने से , आग दिल की सुलगती रहने दो, और भड़केगी ये बुझाने से  अब यहाँ भड़केगी  जैसे शब्दों पे उनकी पकड़ को ध्यान से सुनिए...क्या कहें कमाल ....

अगली ग़ज़ल तो सरापा जगजीत की छाप लिए है. जिंदगी जैसी तम्मना थी नहीं कुछ कम है .... आगे के मिसरे सुनिए - घर की तामीर तस्सवुर ही में हो सकती है, अपने नक़्शे के मुताबिक ये ज़मीन कुछ कम है .... वाह क्या कहने शहरयार साहब. हैरत होती है कि ऐसे नायब हीरे कैसे अप्रकाशित रह गए होंगें. 

दाग दहलवी का लिखा रस्मे उल्फत सिखा गया कोई  सरल शब्दों में बहुत कुछ कहती है. जगजीत की गायिकी शब्दों को एक अलग ही मुकाम दे जाती है. विंटेज जगजीत का मखमली अंदाज़. वहीँ सईद राही की गज़ल खुदा के वास्ते  में किसी और ही दौर के जगजीत नज़र आते हैं. ये क्या कि खुदी हुए जा रहे हो पागल से, ज़रा सी देर तो रुख पे नकाब रहने दो.... वाह.

शायर नसीम काज़मी की एक बेहद खूबसूरत गज़ल है आशियाने की बात करते हो  वैसे चित्रा जी इन ग़ज़लों के साथ कुछ इन ग़ज़लों के बनने की बातें भी अगर बांटती तो सोने पे सुहागा हो जाता. हादसा था गुजर गया होगा , किसके जाने की बात करते हो  जैसे अशआर सुनकर बहुत कुछ महसूस होता है.

अंतिम गज़ल के शायर हैं गुलज़ार साहब. दर्द हल्का है  को सुनकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि इसे एल्बम कोई बात चले  के लिए पहले इसे चुना गया होगा, मगर बाद में सुझाव बदल दिया गया होगा, क्योंकि उस एल्बम की एक गज़ल में भी गुलज़ार खुद अपनी आवाज़ में इस गज़ल का एक मिसरा बोलते सुनाई दिए हैं आपके बाद भी हर घडी हमने, आपके साथ ही गुज़री है . वही गुलज़ार, वही जगजीत वही जादू....और क्या कहें.

दोस्तों ऐसा तोहफा हाथ से छोडना समझदारी बिलकुल नहीं होगी. ये एल्बम हर हाल में आपकी लाईब्रेरी का हिस्सा हो, हमारी सिफारिश तो यही रहेगी. चलते चलते एक बार फिर चित्रा सिंह का बहुत बहुत आभार जिन्होंने हम जैसे जगजीत प्रेमियों के लिए उनकी आवाज़ को एक बार फिर से जिंदा कर दिया इस खूबसूरत एल्बम का नजराना देकर. आप ओनलाईन भी इन ग़ज़लों का लुत्फ़ उठा सकते हैं नीचे दिए लिंकों में.

गाना डॉट कॉम
स्मैश हिट्स

Friday, October 4, 2013

सुरों की मशाल लाया सुपर हीरो "क्रिश 3"

कोई मिल गया और क्रिश की कामियाबी ने भारतीय फिल्म परदे को दिया है, सुपरमैन स्पाईडरमैन सरीखा एक सुपर हीरो जो दर्शकों में, विशेषकर बच्चों में ख़ासा लोकप्रिय है, इसी लोकप्रियता को अपने अगले मुकाम तक ले जाने के लिए निर्देशक राकेश रोशन लेकर आये हैं क्रिश ३. राकेश की अब तक की सभी फिल्मों में उनके भाई राजेश रोशन का ही संगीत रहा है और इस परंपरा का निर्वाह क्रिश ३ में भी हुआ है. इससे पहले कि फिल्म, वर्ष २०१३ में आपकी दिवाली को जगमगाए आईये देखें फिल्म का संगीत क्या ऐसा है जिसे आप चाहें कि गुनगुनाएं. 

देसी सुपर हीरो क्रिश को अपने पहले संस्करण में कोई थीम गीत नहीं मिला था, तो चलिए इस कमी को पूरा कर दिया है इस एल्बम में. क्रिश का शीर्षक गीत ममता शर्मा की आवाज़ में है जिसमें खुद राजेश रोशन और अनिरुद्ध भोला ने बैक अप स्वरों का रंग मिलाया है. आखिरकार लगभग दो सालों तक मात्र आईटम गीतों की अपनी आवाज़ देने के बाद किसी बॉलीवुड संगीतकार ने ममता से कुछ अलग गवाया है, और उम्मीद के अनुरूप ममता ने गीत के साथ पूरा न्याय किया है. हाँ क्रिश जैसे सुपर हीरो के लिए कुछ इससे बेहतर गीत भी हो सकता था. 

शांति  के मसीहा, यानी हमारे बापू महात्मा गांधी जी का जन्म मास है ये, और इसे इत्तेफाक ही कहिये कि उनके प्रिय भजन रघुपति राघव वर्ष का २०१३ में बॉलीवुड ने जम कर इस्तेमाल किया, कभी फिल्म के प्रमुख गीत के रूप में (सत्याग्रह) तो कभी पार्श्व संगीत के रूप में (जंजीर). क्रिश ३ में भी इस भजन को एक कदम थिरकाने वाले गीत में तब्दील कर पेश किया गया है. यहाँ मैं गीतकार संगीतकार को विशेष बधाई देना चाहूँगा जिन्होंने भजन के प्रमुख शब्द युग्म को बेहद सफाई से अपने गीत में ढाला है. धुन जुबाँ पे चढ़ने वाली है और नीरज श्रीधर तो ऐसे गीतों के उस्ताद माने जाते हैं, यूँ बीते कुछ दिनों से वो अपने मेंटर प्रीतम के संगीत निर्देशन में सुनाई नहीं पड़े हैं. पर इस झुमाने वाले गीत के रूप में उन्हें साल का एक हिट गीत तो मिल ही गया है. 

एल्बम  की एक और बड़ी खासियत है कि इसके दो गीतों में अलीशा चिनॉय की नशीली आवाज़ का इस्तेमाल हुआ है. अलीशा देश की पहली पोप डी'वा हैं और उनकी आवाज़ में वही कशिश, वही कसक आज भी बरकरार है. गीत दिल तू ही बता में उनके साथ हैं और एक जबरदस्त गायक जुबीन गर्ग. गीत की रिदम और इंटरल्यूड गजब के हैं. अच्छा और पैशनेट गीत है जो एक दो बार सुनने के बाद ही शायद आपको पसंद आये, पर गीत की मिठास लंबे समय तक आपके साथ रहेगी. 

अलीशा  की आवाज़ में दूसरा गीत यू माई लव भी एक युगल गीत है जिसमें उन्हें साथ मिला है आज के सबसे सफल गायकों में से एक मोहित चौहान का. गीत कैची है और पति पत्नी की नोक झोंक में बुने शब्द माहौल को हल्का फुल्का बनाते हैं. अलीशा की आवाज़ एक बार फिर गीत की जान है. गीत का फिल्मांकन अगर अच्छा हुआ तो ये गीत जल्दी ही टॉप चार्ट पे होगा. 

सोनू निगम और श्रेया के युगल स्वरों में है क्रिश का दूसरा थीम गीत जो अधिक पारंपरिक है शब्द और संगीत दोनों लिहाज में. गोड अल्लाह और भगवान में देश के सच्चे हीरो की कल्पना की गयी है. उद्देश्य अच्छा है पर गीत में कोई नयापन नहीं मिलता. कुल मिलाकर क्रिश में ५ गीत हैं दो गीतों को अलीशा से संभाल लिया है. एक गीत में गाँधी जी का मंत्र काम कर गया और दो थीम गीत भी बच्चों को पसंद आयेंगें. यूँ भी फिल्म संगीत से अधिक अपने स्पेशल एफ्फेक्ट्स पर अधिक केंद्रित है. ऐसे में एक औसत एल्बम भी फिल्म के लिए काफी होगी जो राजेश रोशन की एल्बम निश्चित ही है. 

एल्बम के सर्वश्रेष्ठ गीत - रघुपति राघव, यू माई लव, दिल तू ही बता 
हमारी रेटिंग - ३.५

संगीत समीक्षा - सजीव सारथी
आवाज़ - अमित तिवारी 
 
   

Friday, September 6, 2013

सब कुछ पुराना ही है नई जंजीर में

भी कभी समझना मुश्किल हो जाता है कि एक ऐसी फिल्म जिसे अपने मूल रूप में आज भी बड़े आनंद से देखा जा सकता है, उसका रिमेक क्यों बनाया जाता है. खैर रेमेकों की फेहरिश्त में एक नया जुड़ाव है जंजीर , वो फिल्म जिसने इंडस्ट्री को एंग्री यंग मैन के रूप अमिताभ बच्चन का तोहफा दिया था ७० के दशक में. जहाँ तक फिल्म के प्रोमोस् दिखे हैं नई जंजीर अपने पुराने संस्करण से हर मामले में अलग दिख रही है. ऐसे में इसके संगीत को भी अलग नज़रिए से सुना समझा जाना चाहिए. अल्बम में चार सगीत्कारों का योगदान है. चित्रान्तन भट्ट, आनंद राज आनंद, मीत ब्रोस अनजान और अंकित के सुरों से संवरी इस ताज़ा एल्बम में क्या कुछ है आईये एक नज़र दौडाएं.

मिका  की जोशीली आवाज़ में खुलता है एल्बम का पहला गीत मुम्बई के हीरो . बीच के कुछ संवाद तो बच्चन साहब की आवाज़ में है...भाई अगर उन्हीं की आवाज़ चाहिए थी तो फिर रिमेक की क्या ज़रूरत थी ये मेरी समझ से तो बाहर है.

एक बोरिंग गीत के बाद एक और जबरदस्ती का आईटम गीत सामने आ जाता है. ममता शर्मा की आवाज़ में पिंकी  अब तक सुनाई दिए आईटम गीतों से न तो कुछ अलग है न बेहतर. शब्द घिसे पिटे और धुन भी रूटीन है. एक और ठंडा गीत.

श्रीराम और श्यामली की युवा युगल आवाजों में ये लम्हा तेरा मेरा  सुनकर आखिरकार एल्बम से कुछ उम्मीदें जाग जाती है. बहुत ही सुरीला गीत जिसके साथ दोनों गायक कलाकारों ने भरपूर न्याय किया है.

अगला गीत एक कव्वाली है (पुराने संस्करण के क्लास्सिक यारी है ईमान मेरा  जैसा). मैं तुलना तो नहीं करूँगा पर सुनने में बुरा हरगिज़ नहीं है ये गीत भी. सुखविंदर की आवाज़ में जोश भरपूर है.

श्वेता पंडित का गाया कातिलाना  एक क्लब गीत है जिसकी धुन एक बार पुराने संस्करण के दिल जलों का दिल जला कर  से सीधी उठा ली गयी है. हंसी आती है ऐसे बेतुके प्रयागों पर.

अंतिम  गीत में श्रेया की सुरीली आवाज़ है शकीला बानो हिट हो गयी... शकीला का तो पता नहीं पर एल्बम केवल गीत संगीत के दम पर हिट हो जाए तो चमत्कार ही होगा. एल्बम निराश ही करती है.

सुनने लायक गीत  -  ये लम्हा तेरा मेरा
हमारी  रेटिंग - २ / ५

Friday, August 30, 2013

सचिन जिगर को मिला बड़ा कैनवस शुद्ध देसी रोमांस के रूप में

रोमांस हमारी फिल्मों का एक अहम हिस्सा है. विवधता लाने के लिए इसे नए नए पहनावे दे दिए जाते हैं. इसी चिर परिचित रोमांस का नया नामकरण हुआ है शुद्ध देसी रोमांस  के रूप में. यश राज बैनर की इस ताज़ा पेशकश में संगीत है सचिन जिगर का. गो गोवा गोन  के विवादास्पद मगर हिट गीतों के बाद ये गुज्जू संगीतकार जोड़ी इन दिनों काफी अच्छे फॉर्म में है. 

साईकिल  की घंटियाँ, सीटी और होर्न जैसी ध्वनियाँ गीत पहले गीत तेरे मेरे बीच में  का मूड बनाते हैं. मोहित और सुनिधि की आवाजों में ये गीत कमाल का है. शब्दों और धुन का ऐसा मेल बहुत दिनों में सुनने को मिला है. जबरदस्त संगीत संयोजन इसे और भी लाजवाब बना देता है. जयदीप सहानी के शब्द गजब हैं. 

 जिगर और प्रिया की युगल आवाजों में गुलाबी  गीत जयपुर शहर को समर्पित है. धुन कैची है और मधुर है. और पार्श्व संगीत के रूप में प्रभावी भी. 

हवन  कुंड  के बाद दिव्या कुमार की जोशीली आवाज़ एक बार फिर रोक्किंग फॉर्म में है चंचल मन  गीत में. लोक राजस्थानी अंदाज़ को पाश्चात्य पहनावे में ढालकर बढ़िया सजाया गया है गीत को. 

एल्बम का सबसे शानदार गीत है टाईटल ट्रेक जो है बेनी दयाल और सुनिधि के स्वरों में. जितने बढ़िया शब्द हैं उतनी ही सुरीली और गुनगुनाने पर मजबूर करने वाली धुन है. एक और शानदार गीत. 

इस एल्बम में भी ढेर सारे वाध्य पीसस् हैं जिन्हें बेहद दिलचस्प नाम दिए गए हैं जैसे मुझे किस कर सकते हो, तेज वाला अट्रेक्शन, बॉय फ्रेंड बनोगे  आदि. हमारी राय में ये सचिन जिगर का सर्वश्रेष्ठ काम है. इसे सुनते हुए हमारे श्रोता एक बार फिर पहले प्रेम की फुलकारियाँ महसूस कर पायेंगें ऐसा हमें लगता है. 

एल्बम के सर्वश्रेष्ठ गीत  -   तेरे मेरे बीच में, शुद्ध देसी रोमांस 
हमारी रेटिंग - ४.३ 

संगीत समीक्षा - सजीव सारथी
आवाज़ - अमित तिवारी

Friday, July 12, 2013

सुरीला है ये आग का दरिया - 'इस्सक' तेरा

प्रेम कहानियां और वो भी कालजयी प्रेम कथाएं फिल्मकारों को सदा से ही प्रेरित करती आईं है. हीर राँझा हो सोहनी महिवाल या फिर रोमियो जूलियट, इन अमर प्रेम कहानियों में कुछ तो ऐसा है जो दर्शक बार बार इन्हें देखने के लिए लालायित रहते हैं. रोमियो जूलियट शेक्सपियर की अमर कृति है, जिस पर अब तक ढेरों फ़िल्मी कहानियां आधारित रहीं है. एक बार फिर इस रचना का भारतीयकरण हुआ है मनीष तिवारी निर्देशित इस्सक  में जहाँ राँझना  के बाद एक बार फिर दर्शकों के देखने को मिलेगी बनारस की पृष्ठभूमि. खैर देखने की बात होगी बाद में फिलहाल जान लें कि इस इस्सक  में सुनने लायक क्या क्या है...

मोहित  चौहान की सुरीली आवाज़ ऐसे लगती है जैसे पहाड़ों में गूंजती हवा हो, और अगर गीत रोमानी हो तो कहना ही क्या, एल्बम की शुरुआत इसी रेशमी आवाज़ से होती है इस्सक तेरा  एक खूबसूरत प्रेम गीत है. जितने सुन्दर शब्द है मयूर पूरी के, सचिन जिगर की जोड़ी ने इसे उतने ही नर्मो नाज़ुक अंदाज़ में स्वरबद्ध किया है. एल्बम को एक दिलकश शुरुआत देता है ये गीत. 

अगले  गीत में रशीद खान की आवाज़ है, गहरी और मर्म को भेदती, झीनी रे झीनी  गीत के शब्दकार हैं निलेश मिश्रा और इस गीत को संगीत का जामा पहनाया है संगीतकार कृष्णा ने. तानु वेड्स मनु  में यादगार संगीत देने के बावजूद कृष्णा को बहुत अधिक काम मिल नहीं पाया है जो वाकई ताज्जुब की बात है. अब इस गीत को ही देखिये, ठेठ देसी स्वरों से इस प्रतिभाशाली संगीतकार ने इस गीत को यादगार बना दिया है. गीत में प्रतिभा भगेल की आवाज़ का सुन्दर इस्तेमाल हुआ है, पर फिर भी रशीद की आवाज़ गीत की जान है. 

बरसों  पहले एक गीत आया था शिवजी ब्याहने चले . शिव के महाविवाह पर इसके बाद शायद कोई गीत कम से कम बॉलीवुड में तो नहीं आया. इसी कमी को पूरा करता है अगला गीत भोले चले, हालाँकि ये गीत उस पुराने गीत की टक्कर का तो कहीं से भी नहीं है, पर आज की पीढ़ी के लिए इस महाआयोजन को गीत स्वरुप में पेशकर टीम ने कुछ अनूठा करने की कोशिश तो की ही है जिसकी तारीफ होनी चाहिए. इंडियन ओशन  के राहुल राम की आवाज़ में खासी ताजगी है और इस गीत के लिए शायद उनसे बेहतर कोई नहीं हो सकता था. गीत के संगीतकार है सचिन गुप्ता. 

रोक्क् गायकी में सबसे ताज़ा सनसनी बनकर उभरे हैं अंकित तिवारी आशिकी २   के बाद. अगला गीत आग का दरिया  हालाँकि उनकें पहले गीत जितना प्रभावी नहीं बन पाया है. अच्छे पंच के बावजूद गीत अपनी छाप छोड़ने में असफल रहा है. अगले गीत एन्ने उन्ने  में पोपोन की जबरदस्त आवाज़ है जिन्हें साथ मिला है कीर्ति सगाथिया और ममता शर्मा का. गीत में पर्याप्त विविधता है, गायकों ने भी जम कर अपने काम को अंजाम दिया है. एक बार फिर कृष्णा ने अच्छा संयोजन किया है.  

अगला  गीत भागन की रेखा  एक विदाई गीत है, बिना लाग लपेट के ये गीत शुद्ध भारतीय है. रघुबीर यादव और मालिनी अवस्थी की दमदार आवाज़ में ये गीत सुनने लायक है. बहुत दिनों बाद किसी बॉलीवुड फिल्म में इतना मार्मिक गीत सुनने को मिला है. शायद आज की पीढ़ी को ये कुछ अटपटा लगे पर यही तो है हमारी अपनी मिटटी के गीत.  पूरी टीम इस गीत के लिए बधाई की हकदार है. इसके आलावा एल्बम में इस्सक तेरा  और आग का दरिया  के कुछ अलग से संस्करण हैं. वास्तव में आग का दरिया  अपने अल्प्लगड संस्करण में कुछ हद तक बेहतर है. 

एल्बम से सबसे अच्छे गीत - इस्सक तेरा, झीनी रे झीनी  और भागन की रेखा
हमारी रेटिंग - ४.२/५

संगीत समीक्षा - सजीव सारथी
आवाज़ - अमित तिवारी 

यदि आप इस समीक्षा को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाऊनलोड कर लें:


Friday, July 5, 2013

प्रेरणात्मक स्वरों में मस्ती की झनकार और मासूम प्रेम की पुकार -'मिल्खा' का जीवन सार

कुछ एलबम्स ऐसी होती हैं जिनके बारे में लिखते हुए वाकई दिल से खुशी का अनुभव मिलता है, क्योंकि खुशियों की ही तरह अच्छे संगीत को बांटना भी बेहद सुखद सा एहसास होता है, आज हम एक ऐसे ही एल्बम का जिक्र आपसे साँझा करने वाले हैं. वैसे इन दिनों हिंदी फिल्म संगीत प्रेमियों की चांदी है. राँझना , और लूटेरा  का संगीत पहले ही संगीत प्रेमियों को खूब रास आ रहा है ऐसे में एक और दमदार एल्बम की आमद हो जाए तो और भला क्या चाहिए.

दोस्तों बायोपिक यानी किसी व्यक्ति विशेष के जीवन पर हमारे यहाँ बहुत कम फ़िल्में बनी हैं, शायद इसकी वजह निर्माता निर्देशकों के विवादों और कानूनी झमेलों से बचने की प्रवर्ति है, खैर आज हम चर्चा करेंगें भाग मिल्खा भाग  के संगीत पक्ष की. भाग मिल्खा...धावक मिल्खा सिंह की जीवनी है जहाँ मिल्खा बने हैं फरहान अख्तर. फिल्म का संगीत पक्ष संभाला है शंकर एहसान लॉय की तिकड़ी ने और गीत लिखे हैं प्रसून जोशी ने. 

एल्बम की शुरुआत दिलेर मेहदी के रूहानी स्वर में नानक नाम जहाज़ दा  से होती है. मात्र डेढ़ मिनट की इस गुरबानी से बेहतर शुरुआत भला क्या हो सकती थी. इसके तुरंत बाद शुरू होता है गीत जिंदा ...शंकर महादेवन के सुपत्र सिद्धार्थ ने क्या दमदार आवाज़ में गाया है इसे, सच कहें तो इस एक गीत में उन्होंने दिखा दिया है कि उनकी क्षमताएं आपार है. गीत में ऊर्जात्मक हिस्से हैं तो कुछ नार्मोनाजुक पहलू भी हैं और कहीं से भी सिद्धार्थ नहीं लगते कि अपना पहला गीत गा रहे हों. वाह इंडस्ट्री इस जबरदस्त गायक से ढेरों संभावनाएं तलाश सकती है. लीजिए सिद्धार्थ की तारीफ में हम संगीतकार गीतकार का जिक्र तो भूल ही गए. भाई ये गीत है ही कुछ ऐसा, संगीतकार तिकड़ी और प्रसून के सबसे बहतरीन कामों में से एक. सिर्फ एक शब्द में कहें तो अद्भुत. 

लेकिन रुकिए अगर जिंदा  ने आपके भीतर की आग को फिर से जिन्दा कर दिया हो तो अगला गीत अलफ अल्लाह  को सुनते हुए आप सुरों की स्वर लहरियों में पूरी तरह डूब जाएँ तो भी गम न करें. अब इतना मधुर हो गीत तो सब कुछ माफ है. वो नूर का झरना है मैं प्यास पुरानी  जैसे शब्द और जावेद बशीर की दिलकश आवाज़ एक अलग ही समां बाँध देते हैं. हर गीत के लिए सबसे उपयुक्त गायक का चुनाव इस संगीतकार तिकड़ी की सबसे बड़ी खासियत रही है. गीत का संयोजन बेहद सधा हुआ है और बिना किसी पेचोखम के गीत दिल में उतर जाता है. इसे आप लूप में लगाकर चाहें तो पूरा दिन सुन सकते हैं. 

कुछ अलग तरह के गीतों से धीरे धीरे अपनी पहचान बना रहे हैं गायक दिव्या कुमार जिनकी आवाज़ में है अगला गीत मस्तों का झुण्ड . गीत मरदाना शान का बखान है और कोरस में उपयुक्त स्वरों में वही मरदाना खिलंदडपन झलकता है. आर डी बर्मन अंदाज़ में कुछ ठेठ वाध्यों से माहौल की मस्ती को उभरा गया है. बीन जैसे किसी वाध्य का पार्श्व में शानदार इस्तेमाल हुआ है. फौजियों की घर परिवार से दूर के जीवन की झलक भी प्रसून के शब्दों में खूब झलकती है. 

जिसने भी उनका जुगनी  सुना वो उनका दीवाना हो गया, जी हाँ हम बात कर रहे हैं पाकिस्तानी गायक आरिफ लोहार की. सरिया वो सरिया मोड दे आग का दरिया  जैसे शब्दों से प्रसून ने एक बेहद प्रेरणात्मक गीत लिखा है. जिसे खुल कर बिखर जाने दिया है आरिफ से स्वरों में शंकर एहसान लॉय ने....गायक ने गीत को गाया ही नहीं जिया है. एक बेमिसाल गीत जिसे बरसों बरसों गाया गुनगुनाया जायेगा. 

लॉय मेंडोंसा के ताजगी भरे स्वरों से खुलता है स्लो मोशन अंग्रेजा  गीत, जिसके बाद सुखविंदर अपने अलग ही अंदाज़ में सामने आते हैं और गीत कई करवट लेता हुआ उड़ने लगता है. वाह क्या अंदाज़ है गायन का, शब्द दिलचस्प है और संगीत में भारतीय और पाश्चात्य का मेल इतना सहज है कि कब कौन सा अंदाज़ गीत पर हावी होता है सुनते हुए श्रोता इस बात को लगभग भूल सा जाता है. ये गीत एल्बम के अन्य सभी गीतों से एकदम अलग है और एल्बम को विविधता देता है. 

एल्बम का अंतिम गीत ओ रंगरेज  में जावेद बशीर का साथ दिया है श्रेया घोषाल ने. जावेद द्वारा एक बहुत ही अंतरंग शुरुआत के बाद श्रेया की आवाज़ से गीत का अपेक्षाकृत सरल पहलू खुलता है. राजस्थानी लोक वाध्यों, सारंगी के स्वर और तबले की थाप पर दोनों गायकों की सुन्दर गायिकी इस गीत को बेहद खास बना देते हैं. पूरी तरह से भारतीय अंदाज़ का गीत...एक सुरीला जादू जैसा...वाह. एल्बम में शीर्षक गीत का एक रोक्क् संस्करण भी है एक बार फिर सिद्धार्थ महादेवन की आवाज़ में. क्या कहें ये गायक तो वाकई जबरदस्त है. यकीन मानिये ये रोक्क् संस्करण भी उतना ही प्रेरणादायक है. 

क्या कहें इस एल्बम के बारे में, एक एक गीत जैसे तराशा हुआ हीरा हो. मेरी राय में तो ये एल्बम इस साल की अब तक सबसे जबरदस्त प्रस्तुति रही है. एक लंबे अंतराल बाद शंकर एहसान लॉय की तिकड़ी लौटी है और देखिये क्या शानदार वापसी है ये. ५/५ है हमारी रेटिंग...आपकी राय क्या है ? जरूर सुनें  और बताएं...
संगीत समीक्षा - सजीव सारथी

आवाज़ - अमित तिवारी 

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Monday, June 17, 2013

जब रहमान और इरशाद साथ साथ आयें तो कोई 'नज़र लाये न' इस जोड़ी को

आर रहमान यानी समकालीन बॉलीवुड संगीत का बेताज बादशाह. लंबे समय तक शीर्ष पर राज करने के बाद रहमान इन दिनों सिर्फ चुनिन्दा फ़िल्में ही कर रहे हैं, यही कारण है कि संगीत प्रेमियों को उनकी हर नई एल्बम का बेसब्री से इंतज़ार रहता है. उनसे उम्मीदें इतनी अधिक बढ़ गयी हैं कि संगीत प्रेमियों को कुछ भी कम स्वीकार्य नहीं होता. ऐसे में उनकी नई प्रस्तुति राँझना  संगीत के कद्रदानों और उनके चहेतों की कसौटी पर कितना खरा उतर पायी है, आईये आज ज़रा इसी बात की तफ्तीश करें. राँझना  में गीत लिखे हैं इरशाद कामिल ने, जिनके साथ रहमान रोक स्टार  में जबरदस्त हिट गीतों की बरसात कर चुके हैं. 
इससे पहले कि हम राँझना  के गीतों की बात करें, हम आपको बता दें कि रहमान का संगीत सामान्य से कुछ अलग रहता है तो उस पर राय बनाने से पहले कम से कम ५-६ बार उन गीतों को अवश्य सुनें. नये गायक जसविंदर सिंह और शिराज उप्पल के स्वरों में शीर्षक गीत एक ऊर्जा से भरा गीत है. धुन बेहद 'कैची' है और संयोजन में रहमान से भारतीय वाद्यों को पाश्चात्य वाद्यों से साथ बेहद खूबसूरती से मिलाया है. इरशाद के शब्द अच्छे हैं.
पखावज और बांसुरी के मधुर स्वरों में मिश्री की तरह घुल जाती है श्रेया घोषाल की आवाज़, बनारसिया  फिल्म के एक प्रमुख पात्र के रूप में शहर बनारस को स्थापित करती है. शब्दों का बहतरीन जाल बिछाया है इरशाद ने यहाँ...तबले की थाप से समां और भी सुरीला हो जाता है जब गीत अंतरे तक आता है...अगला गीत पिया मिलेंगें  एक सूफी रोक्क् गीत है, जहाँ सुखविंदर की आवाज़ एक शांत समुन्दर की तरह फैलती है, रहमान संयोजन को बेहद सरल रखते हैं ताकि गीत के पंच तक आते आते कोरस का स्वर मुखरित होकर सामने आये....अकल के परदे पीछे कर दे  तोहे पिया मिलेंगें ....खूबसूरत अलफ़ाज़...
बनारसिया  की ही तरह एक और भारतीय रंग में रंग गीत है ए सखी  जिसमें चिन्मया, मधुश्री और सहेलियों के मिश्रित स्वरों में संवाद रुपी शब्द रचना हैं गीत की. कभी है वादी कभी संवादी ....जैसे फ्रेस से इरशाद एक खूबसूरत समां बांध देते हैं. गायिकाओं की आवाज़ में शहनाई जैसे वाद्यों के स्वर मुहँ से बनाकर निकलना गीत को और भी सुरीला बना देता है.... अगला गीत नज़र लाये न  रशीद अली और नीति मोहन की आवाजों में एक खूबसूरत रोमांटिक गीत है जहाँ समर्पण और अपने प्रेम को अपने तक समेट कर रखने की भावनाएं निखर कर सामने आती है. 
रहमान और रब्बी शेरगिल पहली बार एक साथ आये हैं तू मन शुधि  में, आरंभिक पर्सियन शब्दों के बाद गीत रब्बी के अनूठे उच्चारण वाले पंजाबी शब्दों में आगे बढ़ता है. मेरे ख़याल से ये एल्बम का सबसे शानदार गीत है. जब रब्बी गाते हैं हमसे वफाएं लेना  तो कदम ही नहीं दिल भी थिरक उठते हैं....खुद रहमान माइक के पीछे आते हैं अगले गीत ऐसे न देखो  के लिए, इस गीत की धुन और संयोजन जाने तू या जाने न  के शीर्षक गीत की याद दिला जाता है. धुन में नयेपन की कमी है पर रहमान की गायिकी उच्चतम स्तर की है जो श्रोताओं को स्वाभाविक ही गीत से जोड़ देता है, पर यहाँ बाज़ी मारी है इरशाद ने, शब्द देखिये - मैं उन लोगों का गीत, जो गीत नहीं सुनते, पतझर का पहला पत्ता , रेगिस्तान में खोया आँसू....वाह....
एक बार फिर बनारस का पार्श्व उभरता है इंस्ट्रूमेंटल लैंड ऑफ शिवा  में, मन्त्रों के उच्चारण की पृष्ठभूमि में ये छोटा सा संगीत का टुकड़ा अगर कुछ और लंबा होता तो आनंद आ जाता. अंतिम गीत तुम तक  में प्रमुख आवाज़ है रशीद अली की. ये गीत भी एक प्रेमी के एकतरफा समर्पण की दास्ताँ है मगर ये समर्पण भी एक जश्न है यहाँ...सरल धुन के चलते ये गीत एल्बम के अन्य गीतों से अधिक लोकप्रिय हो सकता है. भाई हमारी राय में रहमान और इरशाद की ये टीम संगीत प्रेमियों की उम्मीदों पर खरा उतरी  हैं. पर जैसा की हमने पहले कहा कि ये गीत आपसे कुछ सब्र चाहते हैं...ये वो गीत हैं जो धीरे धीरे आपके दिल में उतरेंगें और अगर इस मामले ये सफल रहे जो कि फिल्म की सफलता पर भी बहुत अधिक निर्भर करता है, तो फिर यक़ीनन वहाँ से कभी नहीं उतरेगें. 
एल्बम के बहतरीन गीत -
राँझना , बनारसिया, ए सखी, नज़र लाये न , तू मन शुधि, तुम तक  
हमारी रेटिंग  - ४.६ / ५          


संगीत समीक्षा - सजीव सारथी

आवाज़ - अमित तिवारी 
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