Saturday, January 2, 2016

"याद आ रही है, तेरी याद आ रही है..." - क्यों पंचम इस गीत के ख़िलाफ़ थे?


नववर्ष पर सभी पाठकों और श्रोताओं को हार्दिक शुभकामनाएँ  



एक गीत सौ कहानियाँ - 73
 
'याद आ रही है, तेरी याद आ रही है...' 



रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के सभी श्रोता-पाठकों को सुजॉय चटर्जी का प्यार भरा नमस्कार। दोस्तों, हम रोज़ाना रेडियो पर, टीवी पर, कम्प्यूटर पर, और न जाने कहाँ-कहाँ, जाने कितने ही गीत सुनते हैं, और गुनगुनाते हैं। ये फ़िल्मी नग़में हमारे साथी हैं सुख-दुख के, त्योहारों के, शादी और अन्य अवसरों के, जो हमारे जीवन से कुछ ऐसे जुड़े हैं कि इनके बिना हमारी ज़िन्दगी बड़ी ही सूनी और बेरंग होती। पर ऐसे कितने गीत होंगे जिनके बनने की कहानियों से, उनसे जुड़े दिलचस्प क़िस्सों से आप अवगत होंगे? बहुत कम, है न? कुछ जाने-पहचाने, और कुछ कमसुने फ़िल्मी गीतों की रचना प्रक्रिया, उनसे जुड़ी दिलचस्प बातें, और कभी-कभी तो आश्चर्य में डाल देने वाले तथ्यों की जानकारियों को समेटता है 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' का यह स्तम्भ 'एक गीत सौ कहानियाँ'। इसकी 73-वीं कड़ी में आज जानिए 1981 की फ़िल्म ’लव स्टोरी’ के मशहूर गीत "याद आ रही है, तेरी याद आ रही है..." के बारे में जिसे अमित कुमार और लता मंगेशकर ने गाया था। बोल आनन्द बक्शी के और संगीत राहुल देव बर्मन का।


गायक अमित कुमार ने लता मंगेशकर के साथ कई लोकप्रिय युगलगीत गाया है। अधिकतर लोगों का अनुमान रहा है कि इन दोनों ने साथ में पहली बार ’लव स्टोरी’ फ़िल्म में गीत गाये हैं, जबकि यह तथ्य सही नहीं है। लता-अमित का गाया पहला युगल गीत आया था साल 1979 में; फ़िल्म थी ’दुनिया मेरी जेब में’ और गीत के बोल थे "देख मौसम कह रहा है..."। फ़िल्म के फ़्लॉप होने और इस गीत में भी कोई ख़ास बात ना होने की वजह से यह गीत ज़्यादा सुना नहीं गया। ख़ैर, आज हम चर्चा कर रहे हैं फ़िल्म ’लव स्टोरी’ के गीत "याद आ रही है.." की जिसके दो संस्करण हैं, एक लता-अमित का युगल, और दूसरा अमित का एकल सैड वर्ज़न। इस फ़िल्म को अभिनेता राजेन्द्र कुमार ने बनाई अपने बेटे कुमार गौरव को लौन्च करने के लिए। राजेन्द्र कुमार जब स्टार थे तब उनकी ज़्यादातर फ़िल्मों के संगीतकार या तो शंकर-जयकिशन हुआ करते थे या नौशाद साहब। दोनों बर्मन, यानी कि एस.डी. और आर.डी, कभी भी उनकी पहली पसन्द नहीं रहे। अमित कुमार के अनुसार रमेश बहल (जो राजेन्द्र कुमार के रिश्तेदार थे) के सुझाव पर ’लव स्टोरी’ के लिए राजेन्द्र कुमार ने राहुल देव बर्मन को साइन कर लिया। राजेन्द्र कुमार के लिए यह जायज़ था कि वो किसी ऐसे संगीतकार को अपनी फ़िल्म के लिए चुने जिनके विचार उनसे मेल खाते। इसलिए अन्य वरिष्ठ संगीतकारों को चुनने के बजाय पंचम को चुनना जितना आश्चर्यजनक था उससे भी ज़्यादा आश्चर्य की बात थी अपने बेटे के पार्श्वगायन के लिए अमित कुमार जैसे नए और अनभिज्ञ गायक को चुनना जो अब तक एक हिट गीत के लिए तरस रहा था। ’लव स्टोरी’ में राजेन्द्र कुमार और किशोर कुमार के बीच में ’किशोर का लड़का, मेरा लड़का’ वाला समीकरण आ गया, और राजेन्द्र कुमार और किशोर कुमार जिस विश्वविद्यालय से उत्तिर्ण हुए थे, उनके बेटे भी वहीं पे पढ़ रहे थे। इस तरह से राजेन्द्र कुमार का मन साफ़ हो गया।


"याद आ रही है..." गीत में बांसुरी-नवाज़ पंडित रणेन्द्रनाथ (रोनु) मजुमदार ने पहली बार किसी फ़िल्मी गीत में बांसुरी बजाया था। और इस गीत के लिए अमित कुमार को 1982 के सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक का फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार मिला था। और रोचक बात यह है कि उस पुरस्कार के नामांकन में दो गीत उनके पिता किशोर कुमार के भी थे और दोनों गीत एक से बढ़ कर एक लाजवाब! वो गीत थे फ़िल्म ’कुदरत’ का "हमें तुमसे प्यार कितना..." और फ़िल्म ’याराना’ का "छू कर मेरे मन को..."। ये दोनों ही गीत इतने हिट हुए थे कि इन्हीं में से किसी को पुरस्कार मिलना स्वाभाविक था और लोगों का अनुमान भी। यहाँ तक कि ख़ुद किशोर कुमार भी हैरान रह गए थे। अमित कुमार ने ख़ुद एक बार इस बात का ज़िक्र किया है कि ’ल\व स्टोरी’ से पहले उनके पिता कभी उनकी तारीफ़ नहीं करते थे और हर गीत के बाद उससे बेहतर करने का सुझाव देते थे। पर ’लव स्टोरी’ के उस गीत ने जब ’कुदरत’ और ’याराना’ को मात दे दी तो उन्होंने अपने बेटे को शाबाशी दिये बिना नहीं रह सके और कहा कि आज तूने मुझे हरा दिया। और यह भी बताना आवश्यक है कि उसके बाद अगले चार सालों तक इस पुरस्कार पर किशोर कुमार ने किसी को भी हक़ जमाने नहीं दिया, यहाँ तक कि अपने बेटे को भी नहीं। 1983 में "कि पग घुंगरू बाँध मीरा नाची थी...", 1984 में "हमें और जीने की चाहत न होती...", 1985 में "मंज़िलें अपनी जगह हैं, रास्ते अपनी जगह..." और 1986 में "सागर किनारे दिल यह पुकारे..." के लिए किशोर दा को यह पुरस्कार मिला, और इसके अगले ही साल वो चल बसे। अमित कुमार से ’लव स्टोरी’ की सफलता के बारे में जब पूछा गया तब उन्होंने बताया कि ’लव स्टोरी’ के गीतों की अपार लोकप्रियता और खुशी को वो ठीक तरह से मना नहीं सके क्योंकि उन्हीं दिनों उनकी शादी टूट गई थी और पिता किशोर कुमार को दिल का दौरा पड़ गया था। कई महीनों तक अमित केवल अपने पिता के स्वास्थ्य की तरफ़ नज़र रख रहे थे। किशोर कमज़ोर हो गए थे, पर उनके मुख पर एक सुखद उत्तेजना थी जो बता रही थी कि वो ’लव स्टोरी’ की सफलता से कितने ख़ुश हुए हैं।


आइए अब बढ़ते हैं इस गीत के निर्माणाधीन समय की कुछ रोचक बातों की ओर। फ़िल्म के गाने रेकॉर्ड हो चुके थे। पर यह गाना पंचम को रेकॉर्ड होने के बावजूद जम नहीं रहा था। पंचम को यह गाना रोमान्टिक कम और भजन ज़्यादा लग रहा था। उनको धुन में मज़ा नहीं आ रहा था, लग रहा था कि धुन रोमान्टिक नहीं बल्कि भक्ति रस वाला है। और वो इस गाने को लेकर इतने पशोपेश में थे कि इस गाने को बदल देना चाहते थे। लेकिन सबको यह गाना बहुत अच्छा लग रहा था। इसलिए निर्माता, निर्देशक और तमाम लोगों के साथ बातचीत के बाद यह तय हुआ कि इस गीत को जैसा है, उसी रूप में फ़िल्म में रख लिया जाएगा। सबके फ़ैसले और सबके दबाव के बाद पंचम ने अनमने मन से अपने हथियार फेंक दिए और इस गाने को उसी रूप में फ़िल्म में जाने दिया जैसा रेकॉर्ड हुआ था। फ़िल्म रेलीज़ हुई और वह हुआ जो पंचम ने सोचा भी नहीं था। इस गाने को पंचम के सर्वश्रेष्ठ और कामयाब गानों में शुमार कर लिया गया। पंचम ने अमित कुमार से यह कहा कि "देख अमित, ज़िन्दगी में कुछ मोड़ कैसे आ जाती हैं; यह मेरे करीअर का सबसे ख़राब कम्पोज़िशन्स में से एक है और यह कितना बड़ा हिट हो गया"। 

फिल्म लव स्टोरी : "याद आ रही है..." : लता मंगेशकर और अमित कुमार : राहुलदेव बर्मन : आनन्द बक्शी



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खोज, आलेख व प्रस्तुति : सुजॉय चटर्जी
प्रस्तुति सहयोग: कृष्णमोहन मिश्र 




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