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काव्य तरंग - Episode 45 - अर्चना चावजी, आभासी रिश्ते...आभासी नहीं हैं...

                 काव्य तरंग 


‘’ब्लॉग जगत में आभासी रिश्तों के बारे में बहुत कुछ कहा गया ...मैने भी बनाए रिश्ते यहाँ...जो सहयोग मुझे मिला उसके लिए आभारी हूँ सभी की...मुझे लगता ही नहीं कि हम लोग मिले नहीं हैं..रिश्तों के बारे में बातें करते हुए…’’ ये शब्द हैं ब्लॉगर एवं सबसे पुराने पॉडकास्टर में से एक आदरणीय अर्चना चावजी के, जिन्होंने आभासी हों या वास्तविक, हर तरह से रिश्ते निभाने को सदैव प्राथमिकता दी है। आइये आज काव्य तरंग में सुनते हैं उनकी गीत रूपी कविता उन्हीं के स्वर में। उम्मीद है आप भी हमारे साथ इस कविता का आनंद लेंगे, हमें अपने विचार लिखना न भूलियेगा। आप सभी को बहुत धन्यवाद।  






कविता एवं स्वर - अर्चना चावजी 
संयोजन, संकलन - पूजा अनिल


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