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Doordarshan || Film Recommendation || Gagan Puri || Susheel P || Ahwaan Padhee


80 और 90 के दशकों वाले लोगों के लिए दूरदर्शन शब्द एक झरोखा है बीती यादों का. इस शब्द को सुनते ही इस दौर के लोगों के चेहरों पर एक सुरीली मुस्कान उभर आती है, अब सोचिए की कोई दूरदर्शन एरा का व्यक्ति किसी वजह से कोमा में चला जाए और 30 साल बाद अचानक कोमा से जाग उठे तो उसके लिए ये दुनिया किस हद तक बदल चुकी होगी, है ना ये दिलचस्प प्लॉट ? जी हां इसी तरह की एक कहानी बयान करती है लेखक निर्देशक गगन पूरी निर्देशित फिल्म “दूरदर्शन”, डॉली अलुवालिया, मनु ऋषि और माही गिल जैसे कलाकारों ने इस फिल्म में अभिनय किया है, इस फिल्म से गुज़रना, जैसे बीते समय को वापस मूड कर देखने जैसा है, हल्के फुल्के अंदाज़ की ये फिल्म एक अच्छी फॅमिली एंटरटेनर है, जो कम से कम एक बार तो ज़रूर देखी ज सकती है, और फॅमिली के साथ एंजाय की जा सकती है. आज हम इसी फिल्म को आपकी फॅमिली व्यूयिंग के लिए रेकमेंड कर रहे हैं, साथ ही इस फिल्म पर चर्चा करने के लिए आज हमारे साथ हैं खुद इस फिल्म के लेखक निर्देशक गगन पूरी, जिनसे बातचीत कर रहे हैं हमारे इन हाउस फिल्म क्रिटिक आह्वान पढ़ी

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महफ़िल-ए-ग़ज़ल #११३ सू फ़ियों-संतों के यहां मौत का तसव्वुर बडे खूबसूरत रूप लेता है| कभी नैहर छूट जाता है, कभी चोला बदल लेता है| जो मरता है ऊंचा ही उठता है, तरह तरह से अंत-आनन्द की बात करते हैं| कबीर के यहां, ये खयाल कुछ और करवटें भी लेता है, एक बे-तकल्लुफ़ी है मौत से, जो जिन्दगी से कहीं भी नहीं| माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रोंदे मोहे । एक दिन ऐसा आयेगा, मैं रोदुंगी तोहे ॥ माटी का शरीर, माटी का बर्तन, नेकी कर भला कर, भर बरतन मे पाप पुण्य और सर पे ले| आईये हम भी साथ-साथ गुनगुनाएँ "भला हुआ मेरी मटकी फूटी रे"..: भला हुआ मेरी मटकी फूटी रे । मैं तो पनिया भरन से छूटी रे ॥ बुरा जो देखन मैं चला, बुरा ना मिलिया कोय । जो दिल खोजा आपणा, तो मुझसा बुरा ना कोय ॥ ये तो घर है प्रेम का, खाला का घर नांहि । सीस उतारे भुँई धरे, तब बैठे घर मांहि ॥ हमन है इश्क़ मस्ताना, हमन को हुशारी क्या । रहे आज़ाद या जग से, हमन दुनिया से यारी क्या ॥ कहना था सो कह दिया, अब कछु कहा ना जाये । एक गया सो जा रहा, दरिया लहर समाये ॥ लाली मेरे लाल की, जित देखूं तित लाल । लाली देखन मैं गयी, मैं भी हो गयी लाल ॥ हँस हँस कु...

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