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"विकलांगता पर हमारी फ़िल्में अधिक संवेदनशील और व्यावहारिक होनी चाहिए" - संजीवन लाल : एक मुलाकात ज़रूरी है

एक मुलाकात ज़रूरी है 
एपिसोड - 39


किसी दिव्यांग व्यक्ति और उसके आस पास के सप्पोर्ट सिस्टम पर बनी फिल्मों में एक ख़ास स्थान रखती है फिल्म "बबल गम", जिसके निर्देशक संजीवन एस लाल हैं हमारे आज के मेहमान, जिनसे हमने विकलांगता के विषय पर बनी कुछ अन्य फिल्मों पर भी चर्चा की, ३ दिसंबर को विश्व विकलांगता दिवस के उपलक्ष्य पर हमारा ये विशेष एपिसोड, हमें उम्मीद है आपको पसंद आएगा....प्ले पर क्लिक कर सुनें और आनंद लें....  



ये एपिसोड आपको कैसा लगा, अपने विचार आप 09811036346 पर व्हाट्सएप भी कर हम तक पहुंचा सकते हैं, आपकी टिप्पणियां हमें प्रेरित भी करेगीं और हमारा मार्गदर्शन भी....इंतज़ार रहेगा. एक मुलाकात ज़रूरी है के इस एपिसोड के प्रायोजक थे अमेजोन डॉट कॉम, अमोज़ोन पर अब आप खरीद सकते हैं, महान कथाकार प्रेमचंद की अनमोल कहानियों का ये संकलन, खरीदने के लिए क्लिक करें एक मुलाकात ज़रूरी है इस एपिसोड को आप यहाँ से डाउनलोड करके भी सुन सकते हैं, लिंक पर राईट क्लीक करें और सेव एस का विकल्प चुनें.

मिलिए इन जबरदस्त कलाकारों से भी -
मंजीरा गांगुली, रितेश शाह, वरदान सिंह, यतीन्द्र मिश्र, विपिन पटवा, श्रेया शालीन, साकेत सिंह, विजय अकेला, अज़ीम शिराज़ी, संजोय चौधरी, अरविन्द तिवारी, भारती विश्वनाथन, अविषेक मजुमदर, शुभा मुदगल, अल्ताफ सय्यद, अभिजित घोषाल, साशा तिरुपति, मोनीश रजा, अमित खन्ना (पार्ट ०१), अमित खन्ना (पार्ट २), श्रध्दा भिलावे, सलीम दीवान, सिद्धार्थ बसरूर, बबली हक, आश्विन भंडारे , आर्व, रोहित शर्मा, अमानो मनीष, मनोज यादव, इब्राहीम अश्क, हेमा सरदेसाई, बिस्वजीत भट्टाचार्जी (बिबो), हर्षवर्धन ओझा, रफीक शेख, अनुराग गोडबोले, रत्न नौटियाल, डाक्टर सागर

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