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बाबा दामदेव कहिन "I am joking..." || A Run for Fun || Arun Kalra

 दोस्तों, अब शरीर है तो कुछ न कुछ परेशानी तो लगी ही रहेगी, और जब परेशानी होगी तो उसका इलाज भी करवाना पड़ेगा, सवाल ये है कि इलाज किस तरीके से किया जाए, चिकिस्ता की किस पद्धति पर विश्वास करें किस पर नहीं, यही बहस इन दिनों जोरों पर है, लीजिए सुनिए सुप्रसिद्ध अभिनेता और कॉमेडियन अरुण कालरा की आवाज में इसी टॉपिक पर कुछ मजेदार बातें.
सुनिए ये कॉमेडी पॉडकास्ट, जिसका उद्देश्य किसी की भावना या विश्वास को आहत करना बिल्कुल भी नहीं है ये सिर्फ आपके मनोरंजन के लिए है और हमारा उद्देश्य आपके थके जेहन को थोड़ा सा सकूँ देना और जीवन के उलझनों से घिरे आपके उदास चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कराहट लाना भर है। 



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भला हुआ मेरी मटकी फूटी.. ज़िन्दगी से छूटने की ख़ुशी मना रहे हैं कबीर... साथ हैं गुलज़ार और आबिदा

महफ़िल-ए-ग़ज़ल #११३ सू फ़ियों-संतों के यहां मौत का तसव्वुर बडे खूबसूरत रूप लेता है| कभी नैहर छूट जाता है, कभी चोला बदल लेता है| जो मरता है ऊंचा ही उठता है, तरह तरह से अंत-आनन्द की बात करते हैं| कबीर के यहां, ये खयाल कुछ और करवटें भी लेता है, एक बे-तकल्लुफ़ी है मौत से, जो जिन्दगी से कहीं भी नहीं| माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रोंदे मोहे । एक दिन ऐसा आयेगा, मैं रोदुंगी तोहे ॥ माटी का शरीर, माटी का बर्तन, नेकी कर भला कर, भर बरतन मे पाप पुण्य और सर पे ले| आईये हम भी साथ-साथ गुनगुनाएँ "भला हुआ मेरी मटकी फूटी रे"..: भला हुआ मेरी मटकी फूटी रे । मैं तो पनिया भरन से छूटी रे ॥ बुरा जो देखन मैं चला, बुरा ना मिलिया कोय । जो दिल खोजा आपणा, तो मुझसा बुरा ना कोय ॥ ये तो घर है प्रेम का, खाला का घर नांहि । सीस उतारे भुँई धरे, तब बैठे घर मांहि ॥ हमन है इश्क़ मस्ताना, हमन को हुशारी क्या । रहे आज़ाद या जग से, हमन दुनिया से यारी क्या ॥ कहना था सो कह दिया, अब कछु कहा ना जाये । एक गया सो जा रहा, दरिया लहर समाये ॥ लाली मेरे लाल की, जित देखूं तित लाल । लाली देखन मैं गयी, मैं भी हो गयी लाल ॥ हँस हँस कु...

‘बरसन लागी बदरिया रूमझूम के...’ : SWARGOSHTHI – 180 : KAJARI

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राग चन्द्रकौंस : SWARGOSHTHI – 358 : RAG CHANDRAKAUNS

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