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स्वरगोष्ठी - 500: वर्ष 2020 के संगीत पहेली महाविजेताओं की प्रस्तुतियाँ

     




स्वरगोष्ठी – 500 में आज 


वर्ष 2020 के संगीत पहेली  महाविजेताओं  का उनकी प्रस्तुतियों  से अभिनन्दन




“रेडियो प्लेबैक इण्डिया” के साप्ताहिक स्तम्भ "स्वरगोष्ठी" के मंच पर मैं सुजॉय चटर्जी, आप सब संगीत प्रेमियों का हार्दिक स्वागत करता हूँ। एक सफ़र जो शुरू हुआ था 2 जनवरी 2011 को, आज 7 फरवरी 2021 तक जारी है। 500 सप्ताह पूरा करके यह सफ़र आज इस मुकाम तक आ पहुँचा है। शास्त्रीय, उपशास्त्रीय और लोक संगीत से सजे इस सुरीले सफ़र का नाम है "स्वरगोष्ठी"। इस सफ़र के चालक के रूप में प्रथम आठ कड़ियों में आपके इस दोस्त सुजॉय चटर्जी ने कमान सम्हाला था, उसके बाद 30-वें अंक तक हमारे साथी सुमीत चक्रवर्ती ने मोर्चा सम्भाला, और फिर उसके बाद 31-वीं कड़ी से लेकर 495-वें अंक तक कृष्णमोहन मिश्र जी ने पूरी निष्ठा, लगन और समर्पण के साथ ’स्वरगोष्ठी’ को यहाँ तक पहुँचाया है। आज ’स्वरगोष्ठी’ के 500 अंक पूर्ति पर हमें प्रसन्नता के साथ-साथ बहुत तकलीफ़ भी हो रही है क्योंकि ’स्वरगोष्ठी’ के इस ऐतिहासिक अंक को प्रस्तुत करने के लिए कृष्णमोहन जी अब हमारे बीच नहीं रहे। आज के इस विशेषांक पर केवल और केवल कृष्णमोहन जी का ही अधिकार होना चाहिए था। आज इस अंक को लिखते हुए ऐसा प्रतीत हो रहा है कि मानो कृष्णमोहन जी बगल में खड़े होकर हमें यह अंक लिखता हुआ देख रहे हों। यह उन्हीं का आशिर्वाद है कि उनके 495-वें अंक में हमसे बिछड़ जाने के बाद हम उनके इस प्रिय स्तम्भ को 500-वें अंक तक पहुँचा सके हैं। 

’स्वरगोष्ठी’ को एक उच्चस्तरीय स्तम्भ के रूप में परिवर्तित करने के लिए कृष्णमोहन जी ने अथक प्रयास तो किए ही थे, बल्कि इसे और भी अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए उहोंने एक साप्ताहिक संगीत पहेली की योजना बनाई, और वर्ष के अन्त में सभी प्रतिभागियों के साप्ताहिक अंकों को जोड़ कर प्रथम पाँच सर्वोच्च अंक अर्जित करने वाले प्रतिभागियों को वर्ष के महाविजेताओं के रूप में घोषित करने की एक नई प्रथा शुरू की। वर्ष 2020 के महाविजेताओं का चयन भी उन्होंने कर लिया था, पर इससे पहले कि वे इन पाँच महाविजेताओं की घोषणा कर पाते, काल के क्रूर हाथों ने उन्हें हमसे हमेशा के लिए छीन लिया। हमें यह तो पता चल गया कि कौन से पाँच प्रतियोगी शीर्ष के पाँच पायदानों तक पहुँचे हैं, और कृष्णमोहन जी के अन्तिम पोस्ट से हमें यह भी पता चल गया कि चौथे और पाँचवे स्थानों पर कौन कौन रहे, पर हमें यह नहीं पता चल पाया कि बाकी के जो तीन महाविजेता हैं, उनमें से किन्हें प्रथम स्थान मिला, किन्हें द्वितीय और किन्हें तृतीय। आज ’स्वरगोष्ठी’ के इस 500-वें विशेषांक में हम कृष्णमोहन जी द्वारा पाँच महाविजेताओं की घोषणा करने का जो अधूरा काम है, उसे अंजाम देने के लिए उपस्थित हुए हैं। परन्तु सटीक जानकारी उपलब्ध ना होने की वजह से प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान पाने वाले महाविजेताओं के स्थानों का उल्लेख नहीं करेंगे, बल्कि तीनों प्रतियोगियों को प्रथम तीन महाविजेता कह कर सम्बोधित करेंगे। तो आइए आपका परिचय करवाते हैं वर्ष 2020 के ’स्वरगोष्ठी संगीत पहेली प्रतियोगिता’ के पाँच महाविजेताओं से और सुनवाते हैं उनकी या उनके पसन्द की प्रस्तुतियाँ।



विदुषी डी. हरिणा माधवी
“स्वरगोष्ठी” की संगीत पहेली में नियमित रूप से भाग लेकर वर्ष 2020 की महाविजेता बनीं हैं, हैदराबाद की डी. हरिणा माधवी। ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ टीम की ओर से हरिणा जी को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएँ। “संगीत जीवन का विज्ञान है”, इस सिद्धान्त को केवल मानने वाली ही नहीं बल्कि अपने जीवन में उतार लेने वाली हरिणा जी दो विषयों की शिक्षिका का दायित्व निभा रही हैं। हैदराबाद के श्री साईं स्नातकोत्तर महाविद्यालय में विगत 18 वर्षो से स्नातक और स्नातकोत्तर कक्षाओं को लाइफ साइन्स पढ़ा रही हैं। इसके साथ ही स्थानीय वासवी कालेज ऑफ म्यूजिक ऐंड डांस से भी उनका जुड़ाव है, जहाँ विभिन्न आयुवर्ग के विद्यार्थियों का मार्गदर्शन भी करती हैं। हरिणा जी को प्रारम्भिक संगीत शिक्षा अपनी माँ श्रीमती वाणी दुग्गराजू से मिली। आगे चल कर अमरावती, महाराष्ट्र के महिला महाविद्यालय की संगीत विभागाध्यक्ष श्रीमती कमला भोंडे से विधिवत संगीत सीखना शुरू किया। हरिणा जी के बाल्यावस्था के एक और संगीत गुरु एम.वी. प्रधान भी थे, जो एक कुशल तबला वादक भी थे। इनके अलावा हरिणा जी ने गुरु किरण घाटे और आर. डी. जी. कालेज, अकोला के संगीत विभागाध्यक्ष श्री नाथूलाल जायसवाल से भी संगीत सीखा। हरिणा जी ने मुम्बई के अखिल भारतीय गन्धर्व महाविद्यालय से संगीत अलंकार की उपाधि प्राप्त की है। दो वर्ष पूर्व हरिणा जी की संगीत विषयक पुस्तक; “प्रेरणा” का प्रकाशन हुआ था। यह उनकी स्वरचित बन्दिशों का संग्रह है, जिसमें राग भैरव से लेकर राग भैरवी तक प्रचलित 25 रागों में कुल 61 बन्दिशें सम्मिलित की गई हैं। हमारे आग्रह पर इस अंक के  लिए हरिणा जी ने स्वयं अपने ही स्वर में त्रिताल में निबद्ध राग नट भैरव की एक रचना हमें भेजी है, जिसके बोल है; "हे मृगराज महा नरसिंह..."। आज के इस विशेष अंक में हम शिक्षिका और विदुषी डी. हरिणा माधवी का हार्दिक अभिनन्दन करते हैं और आपको उनके स्वर में यह छोटा ख़याल सुनवाते हैं।





डॉ. किरीट छाया
वोरहीज, न्यूजर्सी के डॉ. किरीट छाया वर्ष 2020 की संगीत पहेली में बढ़-चढ़ कर भाग लेकर महाविजेताओं की सूची में स्थान प्राप्त कर लिया है। किरीट जी पेशे से चिकित्सक हैं और अमेरिका में 1971 से प्रवास कर रहे हैं। मुम्बई से चिकित्सा विज्ञान से एम.डी. करने के बाद आप सपत्नीक अमेरिका चले गए। बचपन से ही किरीट जी के कानों में संगीत के स्वर स्पर्श करने लगे थे। उनकी बाल्यावस्था और शिक्षा-दीक्षा शास्त्रीय संगीत के प्रेमी और पारखी मामा और मामी के संरक्षण में बीता। बचपन में ही मामा-मामी से सुने हुए भारतीय संगीत के स्वरों के कारण किरीट जी का संगीत के प्रति निरन्तर अनुराग बना रहा। किरीट जी न तो स्वयं गाते हैं और न बजाते हैं, परन्तु संगीत सुनने के दीवाने हैं। वह इसे अपना सौभाग्य मानते हैं कि उनकी पत्नी को भी संगीत के प्रति लगाव है। नब्बे के दशक के मध्य में किरीट जी ने अमेरिका में रह रहे कुछ संगीत अनुरागी परिवारों के सहयोग से “रागिनी म्यूजिक सर्कल” नामक संगीत संस्था का गठन किया है। इस संस्था की ओर से प्रायः संगीत के अनुष्ठान और संगोष्ठ आदि का आयोजन किया जाता है। अब तक उस्ताद विलायत खाँ, उस्ताद अमजद अली खाँ, पण्डित अजय चक्रवर्ती, पण्डित मणिलाल नाग, पण्डित बुद्धादित्य मुखर्जी आदि की संगीत सभाओं का आयोजन यह संस्था कर चुकी है। दो वर्ष पूर्व विदुषी कौशिकी चक्रवर्ती की संगीत सभा का फिलेडेल्फिया नामक स्थान पर सफलतापूर्वक आयोजन किया गया था। किरीट जी गैस्ट्रोएंट्रोंलोजी चिकित्सक के रूप में विगत 40 वर्षों तक सेवा करने के बाद जुलाई, 2014 में सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के बाद किरीट जी अब अपना अधिकांश समय अपनी अभिरुचि; फोटोग्राफी के साथ शास्त्रीय संगीत और वर्ष 1950 से 1970 के बीच के फिल्म संगीत के श्रवण को दे रहे हैं। “स्वरगोष्ठी” के मंच से किरीट जी का सम्पर्क हमारी एक नियमित पाठक और प्रतिभागी श्रीमती विजया राजकोटिया के माध्यम से हुआ है। किरीट जी हमारे नियमित सहभागी हैं और संगीत के प्रति अपने अनुराग के कारण और स्वरों की समझ के कारण वर्ष 2020 के संगीत पहेली के महाविजेता बने हैं। रेडियो प्लेबैक इण्डिया परिवार उन्हें यह महाविजेता का सम्मान सादर समर्पित करता है। हमारी परम्परा है कि हम जिन्हें सम्मानित करते हैं स्वयं उनका अथवा उनकी पसन्द का संगीत सुनवाते हैं। लीजिए, प्रस्तुत है, डॉ. किरीट छाया द्वारा प्रेषित यू-ट्यूब का यह वीडियो। इस वीडियो के माध्यम से हम आपको पंडित अजय चक्रवर्ती के स्वर में राग मारवा में एक रचना सुनवा रहे हैं। किरीट जी ने हमें बताया कि इस वर्ष उनका पसन्दीदा गीत रहा "विरह" जो टीवी सीरीज़ ’बन्दिश बैन्डिट’ का हिस्सा था और जो राग मारवा पर आधारित था।





क्षिति तिवारी
2019 की संगीत पहेली में सर्वाधिक 94 अंक अर्जित कर जबलपुर, मध्यप्रदेश की क्षिति तिवारी ने प्रथम महाविजेता होने का गौरव प्राप्त किया है। संगीत पहेली में प्रथम महाविजेता होने का सम्मान प्राप्त करने वाली जबलपुर, मध्यप्रदेश की श्रीमती क्षिति तिवारी की संगीत शिक्षा लखनऊ और कानपुर में सम्पन्न हुई। लखनऊ के भातखण्डे संगीत महाविद्यालय से गायन में प्रथमा से लेकर विशारद तक की परीक्षाएँ उत्तीर्ण की। बाद में इस संस्थान को विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त हुआ, जहाँ से उन्होने संगीत निपुण और उसके बाद ठुमरी गायन मे तीन वर्षीय डिप्लोमा भी प्राप्त किया। इसके अलावा कानपुर के वरिष्ठ संगीतज्ञ पण्डित गंगाधर राव तेलंग जी के मार्गदर्शन में खैरागढ़, छत्तीसगढ़ के इन्दिरा संगीत कला विश्वविद्यालय की संगीत स्नातक और स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। क्षिति जी के गुरुओं में डॉ. गंगाधर राव तेलंग के अलावा पण्डित सीताशरण सिंह, पण्डित गणेशप्रसाद मिश्र, डॉ. सुरेन्द्र शंकर अवस्थी, डॉ. विद्याधर व्यास और विनीत पवईया प्रमुख हैं। क्षिति को स्नातक स्तर पर भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से ग्वालियर घराने की गायकी के अध्ययन के लिए दो वर्ष की राष्ट्रीय छात्रवृत्ति भी मिल चुकी है। कई वर्षों तक लखनऊ के महिला कालेज और जबलपुर के एक नेत्रहीन बच्चों के विद्यालय मे माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों को संगीत की शिक्षा देने के बाद वर्तमान में जबलपुर के ‘महाराष्ट्र संगीत महाविद्यालय’ में संगीत गायन की शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं। ध्रुपद, खयाल, ठुमरी और भजन गायन के अलावा उन्होने प्रोफेसर कमला श्रीवास्तव से गुरु-शिष्य परम्परा के अन्तर्गत लोक संगीत भी सीखा है, जिसे अब वह अपने विद्यार्थियों में बाँट रही हैं। क्षिति जी कथक नृत्य और नृत्य नाटिकाओं में गायन संगति की विशेषज्ञ हैं। सुप्रसिद्ध नृत्यांगना और भातखण्डे संगीत विश्वविद्यालय की पूर्व प्रोफेसर कुमकुम धर और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कला संकाय की प्रोफेसर और नृत्यांगना विधि नागर के कई कार्यक्रमों में अपनी इस प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकी हैं। आज के इस विशेष अंक में क्षिति तिवारी के कथक नृत्य के साथ गायन संगति की एक रिकार्डिंग हम प्रस्तुत कर रहे हैं। इस रिकार्डिंग में क्षिति तिवारी पहले राग यमन में निबद्ध शिवस्तुति, “नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय...” प्रस्तुत किया है। अगले चरण में नृत्यांगना के भाव प्रदर्शन के लिए उन्होने राग तिलक कामोद की एक बन्दिश “नीर भरन कैसे जाऊँ...” का गायन प्रस्तुत किया है। लीजिए, अब आप यह रचनाएँ सुनिए और प्रथम महाविजेता क्षिति तिवारी का अभिनन्दन कीजिए।






प्रफुल्ल पटेल
पहेली प्रतियोगिता में 79 अंक प्राप्त कर चौथे महाविजेता बने हैं, चेरीहिल, न्यूजर्सी के प्रफुल्ल पटेल। भारतीय शास्त्रीय संगीत में गहरी रुचि रखने वाले प्रफुल्ल पटेल न्यूजर्सी, अमेरिका में रहते हैं। साप्ताहिक स्तम्भ, ‘स्वरगोष्ठी’ को पसन्द करने वाले प्रफुल्ल जी शास्त्रीय संगीत के अलावा भारतीय लोकप्रिय संगीत भी रुचि के साथ सुनते हैं। इस प्रकार के संगीत से उन्हें गहरी रुचि है। परन्तु कहते हैं कि उन्हें पाश्चात्य संगीत ने कभी भी प्रभावित नहीं किया। पेशे से इंजीनियर, भारतीय मूल के प्रफुल्ल जी पिछले पचास वर्षों से अमेरिका में रह रहे हैं। प्रफुल्ल जी स्वान्तःसुखाय हारमोनियम बजाते हैं और स्वयं गाते भी है, किन्तु बताते हैं कि उनकी गायन और वादन का स्तर ‘स्वरगोष्ठी’ में प्रसारित गायन अथवा वादन जैसा नहीं है। जब हमने उनका गाया-बजाया अथवा उनकी पसन्द का आडियो या वीडियो क्लिप उनसे भेजने का अनुरोध किया तो पहले उन्होने संकोच के साथ टाल दिया। हमारे दोबारा आग्रह पर उन्होने अपनी आवाज़ में एक आकर्षक गैरफ़िल्मी गीत हमें भेज दिया। ‘स्वरगोष्ठी’ की पहेली में नियमित रूप से भाग लेने वाले प्रफुल्ल जी के संगीत ज्ञान का अनुमान इसी तथ्य से किया जा सकता है कि वर्ष 2020 की पहेली प्रतियोगिता में 79 अंक अर्जित कर प्रफुल्ल जी ने वार्षिक महाविजेताओ की सूची में चौथे महाविजेता का सम्मान प्राप्त किया है। श्री पटेल गायक सी.एच. आत्मा और जगमोहन आदि की गायकी के बहुत बड़े प्रसंशक हैं। “स्वरगोष्ठी” के आज के अंक के माध्यम से “रेडियो प्लेबैक इण्डिया” सभी संचालक और सम्पादक मण्डल के सदस्य प्रफुल्ल जी का महाविजेता के रूप में हार्दिक अभिनन्दन करते हैं और उनकी आवाज़ में एक गैरफ़िल्मी गीत "प्रीतम आन मिलो..." प्रस्तुत का रहे हैं। मूल गीत सी. एच. आत्मा का गाया हुआ गीत है जो उनके गाये प्रसिद्ध ग़ैर-फ़िल्मी गीतों में से एक है। पिछले वर्ष प्रफुल्ल जी ने सी. एच. आत्मा का ही गाया हुआ “मुझे न सपनों से बहलाओ...” अपनी आवाज़ में रिकॉर्ड करके भेजा था जिसे श्रोताओं ने बहुत सराहा था। तो लीजिए इस बार प्रफुल्ल जी के स्वर में सुनिए "प्रीतम आन मिलो"। 






मुकेश लाडिआ
पहेली प्रतियोगिता में महाविजेता के पाँचवें स्थान को सुशोभित करने वाले अहमदाबाद, गुजरात निवासी मुकेश लाडिया हैं। मुकेश जी “स्वरगोष्ठी” के 378वें अंक से अर्थात पिछले तीन वर्षों से हमारे नियमित पाठक हैं। विगत तीन वर्षों से वह निरन्तर पहेली प्रतियोगिता में भाग ले रहे हैं। मूलतः अहमदाबाद, गुजरात निवासी मुकेश जी बीच बीच में फीनिक्स, अमेरिका में भी प्रवास करते रहे हैं। वह चाहे भारत में रहें या अमेरिका में “स्वरगोष्ठी” पढ़ना और सुनना तथा पहेली प्रतियोगिता में भाग लेना नहीं भूलते। मुकेश जी शास्त्रीय संगीत के विधिवत कलाकार अथवा शिक्षक नहीं है, किन्तु संगीत-प्रेमी अवश्य हैं। पिछले पाँच दशकों में अहमदाबाद में आयोजित होने वाले सभी संगीत समारोहों और गोष्ठियों में शामिल होकर देश के लगभग सभी प्रतिष्ठित कलासाधकों की प्रस्तुतियों का रसास्वादन करते रहे हैं। उन्होने वायलिन वादन की प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त कर अखिल भारतीय संगीत विद्यालय की प्रवेशिका पूर्ण कक्षा की परीक्षा उत्तीर्ण की है। इसके बाद अनेक प्रतिष्ठित कलाकारों को अनेक माध्यमों से श्रवण कर अध्ययन किया। संगीत के प्रति अनुराग होने के साथ साथ मुकेश जी ने अपने पारिवारिक और व्यावसायिक दायित्वों के साथ उन्हें शास्त्रीय गायन के अभ्यास की ललक थी, परन्तु इच्छानुसार अधिक नहीं कर सके। वर्तमान में 68 वर्षीय मुकेश लाडिया प्रतिदिन रिकार्डेड अथवा सजीव माध्यम से प्रतिदिन संगीत श्रवण करते हैं। “स्वरगोष्ठी” की संगीत पहेली प्रतियोगिता 2020 में अपने संगीत ज्ञान और अनुराग के बल पर 58 अंक प्राप्त कर मुकेश जी ने महाविजेताओं की सूची में पाँचवाँ स्थान प्राप्त किया है। हम आज “रेडियो प्लेबैक इण्डिया”, इसके संचालक और सम्पादक मण्डल की ओर से हम उनका हार्दिक अभिनन्दन करते हैं और उनके सम्मान में उन्हीं के पसंदीदा वाद्य वायलिन पर राग झिंझोटी सुनवा रहे हैं। इसे विदुषी एन. राजम् प्रस्तुत कर रही हैं।






विजया राजकोटिया जी का संदेश
और अब प्रस्तुत है ’स्वरगोष्ठी’ के बहुत पुराने श्रोता-पाठक विजया राजकोटिया जी का संदेश। कृष्णमोहन जी के साथ विजया जी का एक लम्बा नाता रहा है और स्वरगोष्ठी के प्रति उनका योगदान भी उल्लेखनीय है। विजया जी ने कई नए पाठकों को ’स्वरगोष्टी’ के तरफ़ प्रोत्साहित भी किया है, जिनमें से आज के महाविजेता डॉ. किरीट छाया शामिल हैं। कृष्णमोहन जी के इस तरह अचानक चले जाने से हम सब की तरह विजया जी को भी गहरा सदमा पहुँचा है। उन्होंने अपना शोक संदेश कुछ इन शब्दों में व्यक्त किया है:


और अब इसी के साथ ’स्वरगोष्ठी’ के इस विशेष अंक से मुझे यानी सुजॉय चटर्जी को अनुमति दीजिए, अगले सप्ताह फिर भेंट होगी, इसी उम्मीद के साथ, नमस्कार!

संवाद

मित्रों, इन दिनों हम सब भारतवासी, प्रत्येक नागरिक को कोरोना वायरस से मुक्त करने के लिए प्रयत्नशील हैं। देश के कुछ स्थानों पर अचानक इस वायरस का प्रकोप इन दिनों बढ़ गया है। अप सब सतर्कता बरतें। संक्रमित होने वालों के स्वस्थ होने का प्रतिशत निरन्तर बढ़ रहा है। परन्तु अभी भी हमें पर्याप्त सतर्कता बरतनी है। विश्वास कीजिए, हमारे इस सतर्कता अभियान से कोरोना वायरस पराजित होगा। आप सब से अनुरोध है कि प्रत्येक स्थिति में चिकित्सकीय और शासकीय निर्देशों का पालन करें और अपने घर में सुरक्षित रहें। इस बीच शास्त्रीय संगीत का श्रवण करें और अनेक प्रकार के मानसिक और शारीरिक व्याधियों से स्वयं को मुक्त रखें। विद्वानों ने इसे “नाद योग पद्धति” कहा है। “स्वरगोष्ठी” की नई-पुरानी श्रृंखलाएँ सुने और पढ़ें। साथ ही अपनी प्रतिक्रिया से हमें अवगत भी कराएँ। 


अपनी बात

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कृष्णमोहन मिश्र जी की पुण्य स्मृति को समर्पित
प्रस्तुति : सुजॉय चटर्जी   

रेडियो प्लेबैक इण्डिया 
स्वरगोष्ठी - 500: वर्ष 2020 के संगीत पहेली महाविजेताओं की प्रस्तुतियाँ: 07 फरवरी, 2021



Comments

अमित तिवारी said…
सभी महाविजेताओं को बहुत बहुत बधाई
Smart Indian said…
🙏 आभार और बधाई सुजॉय जी। सभी विजेताओं का हार्दिक अभिनंदन
sunita yadav said…
हार्दिक अभिनंदन !सुजॉय,सुमित और कृष्ण मोहन जी के कार्य को अनेक साधुवाद !

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