शनिवार, 4 अप्रैल 2015

पलट, तेरा ध्यान किधर है


एक गीत सौ कहानियाँ - 56
 

पलट, तेरा ध्यान किधर है...’




'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के सभी श्रोता-पाठकों को सुजॉय चटर्जी का प्यार भरा नमस्कार। दोस्तों, हम रोज़ाना रेडियो पर, टीवी पर, कम्प्यूटर पर, और न जाने कहाँ-कहाँ, जाने कितने ही गीत सुनते हैं, और गुनगुनाते हैं। ये फ़िल्मी नग़में हमारे साथी हैं सुख-दुख के, त्योहारों के, शादी और अन्य अवसरों के, जो हमारे जीवन से कुछ ऐसे जुड़े हैं कि इनके बिना हमारी ज़िन्दगी बड़ी ही सूनी और बेरंग होती। पर ऐसे कितने गीत होंगे जिनके बनने की कहानियों से, उनसे जुड़ी दिलचस्प क़िस्सों से आप अवगत होंगे? बहुत कम, है न? कुछ जाने-पहचाने, और कुछ कमसुने फ़िल्मी गीतों की रचना प्रक्रिया, उनसे जुड़ी दिलचस्प बातें, और कभी-कभी तो आश्चर्य में डाल देने वाले तथ्यों की जानकारियों को समेटता है 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' का यह स्तम्भ 'एक गीत सौ कहानियाँ'। इसकी 56वीं कड़ी में आज जानिये 1943 की फ़िल्म 'संजोग' के गीत "पलट तेरा ध्यान किधर है..." के बारे में, जिसे चार्ली ने गाया था। 


'पलट तेरा ध्यान किधर है!' इस जुमले को देख कर हमारे नौजवान पाठक शायद यह समझ रहे होंगे कि आज हम डेविड धवन की हाल की फ़िल्म 'मैं तेरा हीरो' के अरिजीत सिंह के गाये गीत "पलट, तेरा ध्यान किधर है, ये तेरा हीरो इधर है" की चर्चा करने जा रहे हैं; पर हमारे उम्रदराज पाठक ज़रूर समझ गये होंगे कि गुज़रे ज़माने के किस हास्य अभिनेता-गायक की चर्चा आज हो रही है। भारतीय सिनेमा के प्रथम सुपरस्टार अगर कुन्दनलाल सहगल थे तो प्रथम स्टार कॉमेडियन माना गया है चार्ली को। नूर मोहम्मद के नाम से उन्होंने जन्म तो लिया पर चार्ली चैपलिन के दीवाने थे और इसलिए अभिनेता बनने के बाद अपने नाम के साथ चार्ली जोड़ लिया और बन गये नूर मोहम्मद 'चार्ली'। और मज़े की बात यह है कि आगे चलकर उनका नाम केवल "चार्ली" बन कर रह गया। 30 और 40 के दशकों में चार्ली ने ख़ूब नाम कमाया और कई बार तो फ़िल्म के नायक से ज़्यादा उनकी फ़ीस हुआ करती थी। और कई फ़िल्में उन्हीं को ध्यान में रख कर बनायी गई। हास्य अभिनेता होते हुए भी वो कई फ़िल्मों के नायक बने और कई गीत भी गाये। ऐसा ही एक गीत था "पलट, तेरा ध्यान किधर है भाई...", जिसे अरशद गुजराती ने लिखा था और नौशाद साहब ने स्वरबद्ध किया था 1943 की फ़िल्म 'संजोग' के लिए, जो नौशाद की शुरुआती फ़िल्मों में से एक थी। इस गीत को सुन कर आश्चर्य होता है कि हमेशा शास्त्रीय संगीत को आधार बना कर गीत रचने वाले नौशाद साहब ने ही इस गीत की रचना की थी। वरिष्ठ ग्रामोफ़ोन रेकॉर्ड कलेक्टर वी. एस. दत्ता ने 'विविध भारती' को दिये एक साक्षात्कार में कहा था - "एक मैं आपको दिलचस्प बात बताता हूँ। नौशाद साहब के बारे में कहा जाता है कि वो क्लासिकल म्युज़िक दिया करते थे, जो बिल्कुल सही बात है। मगर नौशाद साहब ने आपके स्टेशन पर जो कार्यक्रम किया था, फ़िल्म 'शारदा' (1942) के बाद वो सीधे 'बैजु बावरा' (1952-53) पर आ गये थे, उन्होंने बीच का पोर्शन बिल्कुल गोल कर दिया था। अब मैं आप से कहना चाहूंगा कि उस बीच के पोर्शन में उन्होंने ऐसे गाने बनाये जो बहुत सस्ते थे। एक मेरे पास है, जो आप चाहें तो लेकर श्रोताओं को सुना सकते हैं। एक चार्ली होता था कॉमेडियन, तो उन्होंने चार्ली से यह गाना गवाया था, "अरे पलट तेरा ध्यान किधर है भाई...", और यह फ़िल्म शायद 'संजोग' थी।" नौशाद के शुरुआती दौर के सस्ते गीतों की बात करें तो कुछ और गीत जो याद आते हैं, वो हैं "हाँ हाँ तू मेरा चेला..." (प्रेम नगर, 1940), "सासूजी सासूजी मेरे सैयाँ बुलाये रे..." (माला, 1941), "माइ डियर आइ लव यू..." (जीवन, 1944), "बूढ़ा-बूढ़ा पुरानी-पुरानी ढीली-ढीली कमर की कमानी..." (ऐलान, 1947) आदि।

'पलट तेरा ध्यान किधर है', यह जुमला काफ़ी पुराना है और इसकी उत्पत्ति कहाँ से हुई थी यह बताना मुश्किल है। किसी का ध्यान आकर्षित करने के लिए प्रयोग होने वाला यह जुमला फ़िल्मी गीतों में भी कई बार थोड़े फेर-बदल के साथ सुनाई देता रहा है। चार्ली के गाये फ़िल्म 'संजोग' के इस गीत के अलावा 1957 की फ़िल्म 'नाग पद्मिनी' में गीतकार प्रेम धवन का लिखा और सन्मुख बाबू का स्वरबद्ध किया सुधा मल्होत्रा और एस. बलबीर का गाया गीत "पलट के ज़रा देख तेरा ध्यान किधर है..." की तरफ़ लोगों का ध्यान नहीं गया क्योंकि यह फ़िल्म कम बजट की फ़िल्म थी और चली भी नहीं। उसके बाद 1960 की हास्य फ़िल्म 'बेवकूफ़' में आशा भोसले का गाया एक हास्य गीत था "देख इधर देख तेरा ध्यान कहाँ है..."। मजरूह के लिखे और सचिन देव बर्मन के संगीत से सजे इस गीत की ख़ास बात यह है कि यह गीत आइ. एस. जोहर पर फ़िल्माया गया है जो एक विधवा औरत के रूप में सज कर यह गीत गा रहे हैं तथा मुकरी और उल्हास उनको रिझाने की कोशिशें कर रहे हैं। इस गीत में दो पुरुष स्वर सुनाई देते हैं पर ये आवाज़ें किनकी हैं इसमें थोड़ा संशय है। एक आवाज़ तो मन्ना डे की लगती है पर दूसरी आवाज़ का पता नहीं चल पाया। आशा भोसले ने इस फिल्म के कई गीत गाये हैं। 'बेवकूफ़' के बाद 1970 की फ़िल्म 'आन मिलो सजना' का वह गीत तो सभी को याद ही होगा, "पलट मेरी जान, तेरे कुर्बान, ओ तेरा ध्यान किधर है...", जिसमें आशा पारेख राजेश खन्ना को छेड़ रही हैं। इस जुमले के तमाम गीतों में शायद यही गीत सबसे ज़्यादा लोकप्रिय रहा है। साल 1979 में आशा भोसने ने फ़िल्म 'सरकारी मेहमान' में फिर एक बार गाया "ऐ सरकारी मेहमान, पलट किधर है तेरा ध्यान..."। इसे रवीन्द्र जैन ने लिखा व स्वरबद्ध किया था। इस फ़िल्म के अन्य दो गीतों ("बम्बई शाम के बाद" और "पर्चा मोहब्बत का") की तरह यह गीत उतना लोकप्रिय नहीं हुआ था।

1981 की अमिताभ बच्चन अभिनीत फ़िल्म 'कालिया' में किशोर कुमार का गाया गीत था "जहाँ तेरी ये नज़र है, मेरी जाँ मुझे ख़बर है, देख इधर यार, ध्यान किधर है़..."। और फिर हाल में आया हुआ अरिजीत सिंह का गाया, कौसर मुनीर का लिखा और साजिद-वाजिद का स्वरबद्ध डान्स नंबर "पलट, तेरा ध्यान किधर है, यह तेरा हीरो इधर है...", जिसकी ताल पर आज सारे रेडियो चैनल्स झूम रहे हैं। डेविड धवन ने इस गीत के बारे में बताया कि इस जुमले को साजिद-वाजिद ने उन्हें जैसे ही गा कर सुनाया तो उन्होंने फ़ौरन कह दिया कि यह मेरा गाना है, यह मुझे चाहिये इस फ़िल्म में। कॉलेज कैम्पस में नायक अपनी नायिका को मनाने के लिए यह गीत गा रहा है। वरुण धवन पर फ़िल्माया यह गीत चल पड़ा और चार्ट-बस्टर सिद्ध हुआ। वैसे इस गीत को ग़ौर से सुनने पर अहसास होता है कि इसकी धुन कुछ-कुछ "जहाँ तेरी ये नज़र है मेरी जाँ मुझे ख़बर है" से मिलती है, और कई जगहों पर तो डेविड धवन की ही पुरानी फ़िल्म 'हीरो नंबर वन' के गीत "मैने पैदल से जा रहा था, उन्हें साइकिल से आ रही थी" से काफ़ी मेल खाता है। तो इस तरह से "पलट तेरा ध्यान किधर है" फ़िल्मी गीतों में दशकों से आता-जाता रहा है और शायद आगे भी इसका चलन जारी रहे, देखते हैं। लीजिए, अब आप 1943 में बनी फिल्म 'संजोग' में चार्ली का गाया वह गीत सुनिए।

फिल्म - संजोग : 'पलट तेरा ध्यान किधर है...' : नूर मोहम्मद 'चार्ली' : संगीत - नौशाद



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खोज, आलेख व प्रस्तुति : सुजॉय चटर्जी
प्रस्तुति सहयोग: कृष्णमोहन मिश्र 

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