बुधवार, 5 दिसंबर 2007

वेश्या - Veshya

कवि- रविन्दर टमकोरिया 'व्याकुल'

स्वर- विकास कुमार

अक्षर- वेश्या

स्रोत- हिन्द-युग्म

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1 टिप्पणी:

Anonymous ने कहा…

ye kahani auraat ki yugo-yugo se chali aa rahi hai ,agar vidhata ne use dil ki jagah ek pashad diya hota .shayad aisa na hota

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