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Friday, December 26, 2008

मुझे वक्त दे मेरी जिंदगी...

दूसरे सत्र के २६ वें गीत विश्वव्यापी उदघाटन आज

दोस्तों आज यूँ तो हमारे नए गीतों के प्रकाशन के इस वर्तमान सत्र का अन्तिम शुक्रवार है पर इस प्रस्तुत गीत को मिलकर हमारे पास ३ प्रविष्टियाँ हैं ऐसी जो इस सत्र में अपना स्थान बनाना चाहती है, जिनका प्रकाशन हम क्रमश आने वाले सोमवार और बुधवार को करेंगें यानी कि सत्र का समापन २८ वें गीत के साथ होगा जो वर्ष की अन्तिम तारिख को प्रकाशित होगा, फिलहाल आनंद लेते हैं २६ वें गीत का. ये संयोग ही है की पिछले सत्र के अंत में भी जिस कलाकारा ने आकर अपनी आवाज़ और गायकी से सबके मन को चुरा लिया था उसी युवा संगीतकार/गायिका के दो नए गीत हैं दूसरे सत्र के अन्तिम ३ गीतों में भी.पिछले सत्र में भी आभा मिश्रा और निखिल आनंद गिरी की जोड़ी ने "पहला सुर" एल्बम दो खूबसूरत ग़ज़लें दी थी. कुछ श्रोताओं ने हिदायत दी थी कि यदि उन ग़ज़लों का संगीत संयोजन अच्छा होता तो और बेहतर होता. इस बार इसी कमी को दुरुस्त करने के लिए हमने सहारा लिया युग्मी संगीतकार साथी रुपेश ऋषि का. तो दोस्तों हिंद युग्म गर्व के साथ प्रस्तुत करता है एक बार फ़िर आभा मिश्रा को, जिन्होंने इस गीत को न सिर्फ़ अपनी आवाज़ दी है, वरन इसकी धुन भी उन्होंने ख़ुद बनाई है, संयोजन है रुपेश ऋषि का और गीत के बोल लिखे हैं निखिल आनंद गिरी ने. सुनें और बतायें कि कैसी लगी आपको हमारी ये ताज़ातरीन प्रस्तुति.

सुनने के लिए नीचे के प्लेयर पर क्लिक करें -






Song # 26, marks the return of very talented composer/singer of Hind Yugm family, Abha Mishra is here again along with lyricist Nikhil Anand Giri, and for their first song for this present season "mujhe waqt de jindagi" music arrangement has been done by our very own Rupesh Rishi. So guys, listen to this brand new song from this great musical "jodi", and do let us know what you feel about this new offering from Hind Yugm Awaaz.

To listen, please click on the player -




Lyrics - गीत के बोल -

मुझे वक्त दे मेरी जिंदगी, तेरा हाथ थामे चल सकूं,
मुझे भर ले मेरी मांग में, कि न रेत बन के फिसल सकूं,
मुझी वक्त दे, मुझे वक्त दे.....

अभी रौशनी की न बात कर, मैं हूँ आंसुओं से घिरा हुआ,
मेरे यार मुझको दे हौसला, मैं हूँ आंसुओं से घिरा हुआ....
मेरे आंसुओं में वो बात हो, लिखा वक्त का भी बदल सकूं...
मुझे वक्त दे....मुझे वक्त दे.....

अभी हूँ सवालों की क़ैद में, कई उलझनें, मजबूरियाँ,
अभी रहने भी दे ये दूरियां, कई उलझनें, मजबूरियां...
अभी उस मुकाम पे हूँ खड़ा, कि न गिर सकूं, न संभल सकूं,
मुझे वक्त दे.....मुझे वक्त दे....

मुझे एक रात नवाज़ दे, तुझे मैं खुदा-सा प्यार दूँ,
गुनाह सारे उतार दूँ, तुझे मैं खुदा-सा प्यार दूँ...
मुझे मां की तरह गोद में, तू चूम ले, मैं मचल सकूं....
मुझे वक्त दे, मुझे वक्त दे.....

SONG # 26, SEASON # 02, "MUJHE WAQT DE MERI JINDAGI", OPENED ON AWAAZ, HIND YUGM.
Music @ HInd Yugm, Where music is a passion.



Friday, November 28, 2008

मेरी आगोश में आज है...कहकशां....

मैं देखता हूँ तुम्हारे हाथ
चटख नीली नसों से भरे
और
उंगलियों में भरी हुई उड़ान
मैं सोचता हूँ
तुम्हारी अनवरत देह की सफ़ेद धूप
और उसकी गर्म आंचश
मैं जीत्ताता हूँ तुमको
तुम्हारे व्याकरण और
नारीत्व की शर्तो के साथ
मैं हारता हूँ
एक पूरी उम्र
तुम्हारे एवज में!

हिंद युग्म के इस माह के यूनिकवि डॉ मनीष मिश्रा की इन पक्तियों में छुपे कुछ भाव लिए है हमारे दूसरे सत्र का ये २२ वां गीत जहाँ "जीत के गीत" की तिकडी ऋषि एस, बिस्वजीत नंदा और सजीव सारथी लौटे हैं लेकर एक नया गीत "तू रूबरू" लेकर. सुनिए ये ताज़ा तरीन गीत और अपने विचार देकर हमारा मार्गदर्शन/ प्रोत्साहन करें.




The composer singer and lyricist trio Rishi S, Biswajith Nanda, and Sajeev Sarathie of super successful "jeet ke geet" fame is back again with their new creation called "tu ru-ba-ru". This time the mood is much more romantic with a bit sufiayana feel in it. so enjoy this brand new offering from the awaaz team, and leave your valuable comments.




Lyrics- गीत के बोल

तू रूबरू....
चार सू....सिर्फ़ तू....
रूबरू....

तू है मेरे रूबरू, मुझे हासिल है दोनों जहाँ,
मेरी आगोश में आज है...कहकशां....
तू रूबरू....
चार सू....सिर्फ़ तू....
रूबरू....

सजदों इबादत में,
इश्कों मोहब्बत में,
देखूं तुझे ही मैं...मेहरबां.....
तू रूबरू....
चार सू....सिर्फ़ तू....
रूबरू....

सुरमई उदासियों के सायों में,
चम्पई उम्मीदों की आमद तू,
बेरंगों बेज़ार सी मेरी आँखों में,
ख्वाबों की हसीन जन्नत तू...
तू रूबरू....
चार सू....सिर्फ़ तू....
रूबरू....

शिकवे तुझसे हैं, तुझसे चाहतें,
दर्द भी तुझ से है, तुझसे राहतें...
तू ही हर खुशी, तू ही जिंदगी,
तू ही धडकनों की है बंदगी
तू रूबरू....
चार सू....सिर्फ़ तू....
रूबरू....
तू है मेरे रूबरू, मुझे हासिल है दोनों जहाँ,
मेरी आगोश में आज है...कहकशां....

दूसरे सत्र के २२ वें गीत का विश्व व्यापी उदघाटन आज
SONG # 22, SEASON # 02, "TU RU-BA-RU", OPENED ON AWAAZ ON 28/11/2008.
Music @ Hind Yugm, Where music is a passion.


Friday, November 21, 2008

सरहद पार से आया आवारा "माहिया"


आज आवाज़ पर सरहद पार से कुछ मेहमाँ आए हैं जो लाये हमारे संगीत प्रेमियों के लिए एक अनूठा तोहफा. संगीत का भी प्रेम की तरह कोई कोई मजहब नही होता. इसे आप सरहदों में बाँट नही सकते. भुगौलिक नज़रिए से भारत -पाकिस्तान आज दो अलग अलग मुल्क सही पर संगीत प्रेमियों के लिए इन जमीं पर खिंछी रेखाओं का कोई महत्त्व नही. संगीत की लम्बी परम्परा में आज एक और नए पाकिस्तानी बैंड का नाम जुड़ रहा है - आवारा. आवाज़ गर्व के साथ आज इस संगीत समूह को विश्वपटल पर पेश कर रहा है इनके सबसे पहले गीत "माहिया" के साथ.

"माहिया" एक सॉफ्ट रॉक गीत है, जिसे गाया है मोहम्मद वलीद मुस्तफा ने जो इस बैंड के रिदम गिटारिस्ट और इस गीत के गीतकार भी हैं. साथ में हैं लीड गिटारिस्ट अफान कुरैशी और drummer वकास कादिर बालूच. सुनते हैं ये जोरदार गीत जिसने दिया आवाज़ को एक और ऐतिहासिक दिन. हम उम्मीद करेंगे कि हमारे सुधी श्रोता इस ताज़ा गीत को भरपूर प्यार देंगे. हो सकता है कि आपका प्रोत्साहन /मार्गदर्शन, "आवारा" बैंड की कमियाबी के लिए मील के पत्थर का काम करे.



AWARA THE BAND:


MUHAMMAD WALEED MUSTAFA:Lead vocalist,Rhythm guitarist,Lyrics writer
AFFAN QURESHI:Lead guitarist,back vocalist
WAQAS QADIR BALOCH:Drummer,basses
Band was formed in 2007 at Islamabad (Pakistan).All the band members started their music career in the age of 15.AWARA releasing their debut song MAHIYA in association with "Awaaz" (India's only music community site dedicated to promote original talents). So for the first time from Pakistan here comes 'AWARA'- the band, with their debut song "mahiya". Hear it and share your thoughts about this brand new offering from Hind Yugm.



Lyrics -

baton mein tum ho khayalo mein tum
subho mein meri shamo mein tum
ji na paoon tere bin mein sanam
tum hi khushi tum hi ho ghum

aye khuda kya dard diya
chaha jisay woh laapata

mahiya maHiYa tu hai kahan
mahiya mahiya tu hai kahan

ankh mein pani hai sansein hain thum
jan jati hai niklay hai dum
roya hai yeh dil kahan gaey tum
maan bhi jao satao na tum

o sathiya yeh kya kiya
tor kar dil chalay kahan

mahiya mahiya a bhi ja
mahiya mahiya a bhi ja

jahan hogi tum mujhko pao gi tum
asani say na bhul pao gi tum
meri ho tum bas meri ho tum
zindagi kuch nahi bin teray sanam
maan lay janejan
pyar sirf tujh say kiya

mahiya mahiya sun lay sada
mahiya mahiya sun lay sada

दूसरे सत्र के २१ वें गीत का विश्वव्यापी उदघाटन आज

SONG # 21, SEASON # 02, "MAHIYA" OPENED ON AWAAZ ON 21-11-2008.
Music @ Hind Yugm, Where music is a passion



Friday, November 14, 2008

वो बुतखाना, ये मयखाना सब धोखा है...

भोपाल शहर की एक अलसाई सी दोपहर, एक सूनी गली का आखिरी मकान जहाँ जमा हैं "मार्तण्डया" संगीत समूह के सभी संगीत सदस्य. फिज़ा में विरक्ति के स्वर हैं, जैसे सब देखा जा चुका है, अनुभव किया जा चुका है महसूस किया जा चुका है हुस्न और इश्क जैसी सब बातों का खोखलापन, अब कहाँ दिल लगायें. मन बैरागी चाहता है कि कहीं दूर जंगल में डेरा डाला जाए और दरवेशों में बसर किया जाए. कुछ ऐसे ही भाव लिए है वर्तमान सत्र का ये २० वां गीत. संजय द्विवेदी ने लिखा है इसे और स्वरबद्ध किया है चेतैन्य भट्ट और कृष्णा पंडित ने. आवाजें हैं कृष्णा पंडित, रुद्र प्रताप और अभिषेक की. टीम के गिटारिस्ट हैं सागर और रिदम संभाला है हेमंत ने. सुनते हैं इस उभरते हुए जबरदस्त सूफी संगीत समूह का ये नया दमदार गीत. अपनी बेशकीमती राय देकर इन नए संगीत योद्धाओं का मार्गदर्शन अवश्य करें.

गीत को सुनने के लिए नीचे के प्लेयर पर क्लिक करें -



After the success of their first song "sooraj chand aur sitare" with us, this new upcoming sufi band from bhopal "martandya" is back again, with a completely different flavored song - "husn". under the guidance of Krishana Pandit and Chaitanya Bhatt, Rudra Pratap and Abhishek done the vocals. supported by Hemant and Sagar, this song has again penned by Sanjay Dwivedi. if you like the song do spare a few minutes to encourage/ guide these young talented musicians.

To listen to this brand new song, please click on the player.




Lyrics - गीत के बोल

ये हुस्न है क्या, ये इश्क है क्या,
सब धोखा है, सब धोखा है,
ये चाँदनी शब्, ये ठंडी हवा,
सब धोखा है, सब धोखा है...

वो कैस की लैला धोखा थी,
वो हीर का राँझा धोखा था,
ये ताज महल, ये लाल किला,
सब धोखा है, सब धोखा है ....

वहां शेख ठगी में माहिर है,
यहाँ साकी चालें चलता है,
वो बुतखाना, ये मयखाना,
सब धोखा है, सब धोखा है ...

अब दरवेशों में काट उमर,
यहाँ दौलत शोहरत छोड़ भी आ,
क्या फरक हुआ, जब जान लिया,
सब धोखा है, सब धोखा है ...

दूसरे सत्र के २० वें गीत का विश्वव्यापी उदघाटन आज

SONG # 20, SEASON # 02, "HUSN", OPENED ON AWAAZ ON 14/11/2008.
Music @ Hind Yugm, Where music is a passion.


Friday, November 7, 2008

दिल को बहलाना है, इस तरह या उस तरह...

इश्क हो या दुनिया की चाहत, अक्सर वो नसीब नही होता जिसको पाने की आरजू होती है. जिंदगी चलती रहती है, बहती रहती है. पर कहीं न कहीं दिल के किसी कोने में एक खला बनी रहती है. कहीं कुछ रहता है जो कचोटता है तन्हाईयों में. कुछ कमरे ऐसे भी होते हैं जहनो दिल में जो किसी के जाने के बाद भी हमेशा खाली रहते हैं, उन्हें कोई भर नही पाता. कुछ ऐसे ही जज़्बात लिए है इस शुक्रवार का ये नया गीत. जिसके रचनाकार, संगीतकार और गायक हैं सुदीप यशराज. नए सत्र में उनका ये दूसरा गीत है, तो सुनतें हैं सुदीप की आवाज़ में "उड़ता परिंदा". अपनी राय देकर इस उभरते हुए बेहद प्रतिभाशाली संगीतकार गायक का मार्गदर्शन अवश्य करें -

गीत को सुनने के लिए नीचे के प्लयेर पर क्लिक करें -




After his first song "beintehaa pyar" Sudeep Yashraj is here again in this new season with a brand new song "udta parinda". Penned and composed by Sudeep himself, this song has a retro feel to it which come across with his unique style of singing. So guys, lets enjoy this brand new song and let us know what you feel about it.

To listen to the song please click on the player below -



गीत के बोल - Lyrics

उड़ता परिंदा, उड़ते उड़ते थक के कहीं सो जाएगा,
शायद वो बैचैन हो गई, ख़त को कौन पहुँचायेगा...

हमने खायी है कसम
भूलेंगे न हम तेरा नाम
आके ही सुनायेंगें,
दिल की हर एक दास्तां,
देख के तुमको रंग बदलता क्यों है,
काला सा बादल, रंगों में ढलता क्यों है,
कोई और नही, ये मैं हूँ सनम,
छूने को तुझे लिया बूँदों का जनम,
बूँदें ही सजायेंगीं मांग तेरी दिलबर,
चूम के दे जायेंगीं, नाम मेरा लबों पर,

ये जो हैं, बूँदें ओस की,
क्या है इनसे तुम्हारी दोस्ती,
जब भी नाम लेता हूँ, तुम्हारी महक आए,
अरे चल रे पगले चल, तू क्यों दिल को बहलाए,
दिल को बहलाना है, इस तरह या उस तरह,
जिंदगी फ़साना है, इस तरह या उस तरह,
तेरे मेरे बीच में जो भी आए दीवार,
उनको मैं तोड़ दूँगा,
अनचाहे आए कोई तूफ़ान हज़ार,
उनको मैं मोड़ दूँगा,
और दस्तक दे कोई...
चारों पहर दरवाजे पे....खोलो...
खोलो ...खोलो....खोलो...

दूसरे सत्र के १९ वें गीत का विश्वव्यापी उदघाटन आज.

SONG # 19, SEASON # 02, "UDTA PARINDAA" OPENED ON AWAAZ ON 07-11-2008.
Music @ Hind Yugm, Where music is a passion

Friday, October 31, 2008

तूने ये क्या कर दिया ...ओ साहिबा...

दूसरे सत्र के १८ वें गीत का विश्वव्यापी उदघाटन आज

"जीत के गीत" और "मेरे सरकार" गीत गाकर अपनी आवाज़ का जादू बिखेरने वाले बिस्वजीत आज लौटे हैं एक नए गीत के साथ, और लौटे हैं कोलकत्ता के सुभोजित जिन्होंने छोटी सी उम्र में ही अपनी प्रतिभा से हर किसी को प्रभावित किया है. सजीव सारथी के लिखे इस नए गीत में प्रेम की पहली छुअन है जिसका बिस्वजीत अपने शब्दों में कुछ इस तरह बखान करते हैं -

"कुछ गाने ऐसे होते है जिनमें खो जाने को मन करता है. "साहिबा" ऐसा एक गाना है. सच बताऊँ तो गाने के समय एक बार भी मुझे लगा नहीं कि मैं गा रहा हूँ. ऐसे लगा जैसे इस कहानी में मैं ही वो लड़का हूँ जिस पर कोई लड़की जादू कर गई है, कुछ पल की मुलाक़ात के बाद और चंद लम्हों में मेरी साहिबा बन चुकी है. तड़प रहा हूँ मैं दूरी से, जो दिल में बस गई है उसके ना होने से. सजीव जी के शब्दों ने मुझे मजबूर कर दिया उस तड़प की गहराइयों को महसूस करने के लिए. सुभोजित का म्यूजिक भी लाजवाब है. आशा कर रहा हूँ ये गाना भी सभी को पसंद आएगा"

आप भी सुनें सुभोजित का स्वरबद्ध और बिस्वजीत का गाया ये नया गीत और अपनी राय देकर इस गीत के रचियेताओं तक अपनी बात पहुंचायें.

गीत को सुनने के लिए नीचे के प्लेयर पर क्लिक करें -






This brand new song "o sahibaa" has a romantic feel in it, based on a situation where the protagonist falls in love with a beautiful hill station girl. Composed by our youngest composer Subhojit and rendered by Biswajit Nanda, penned by Sajeev Sarathie. So enjoy this brand new song and do let us know what you guys feel for it.

To listen please click on the player -



Lyrics - गीत के बोल

खामखाँ तो नही, ये खुमारी सनम,
बेवजह ही नही बेकरारी सनम,
कुछ तो है बात जो छाई है ऐसी बेखुदी,
है होश गुम मगर,जागी हुई सी है जिंदगी,
तुने ये क्या कर दिया ....ओ साहिबा.
ये दर्द कैसा दे दिया ...ओ साहिबा...
ओ साहिबा... ओ साहिबा...
ओ साहिबा...ओ साहिबा...

दिल के जज़्बात भी,अब तो बस में नही,
वक्त ओ हालात का, होश भी कुछ नही,
कब जले दिन यहाँ, कब बुझे रातें,
अपनी ख़बर हो या, यारों की बातें... याद कुछ भी नही...
कुछ है तो बात जो.....

दूर होकर भी तू, हर घड़ी पास है,
फ़िर भी दीदार की आँखों में प्यास है,
खुशबू से तेरी है सांसों में हलचल,
मेरे वजूद पे छाया जो हर पल... तेरा एहसास है....
कुछ तो है बात जो....

SONG # 18, SEASON # 02, "O SAHIBAA" OPENED ON AWAAZ ON 31/10/2008.
Music @ Hind Yugm, Where music is a passion.

Friday, October 24, 2008

तेरा दीवाना हूँ...मेरा ऐतबार कर...

दूसरे सत्र के सत्रहवें गीत का विश्वव्यापी उदघाटन आज -

अपनी पहली ग़ज़ल "सच बोलता है..." गाकर रफ़ीक शेख ने ग़ज़ल गायन में अपनी पकड़ साबित की थी. आज वो लेकर आए हैं एक ताज़ी नज़्म -"आखिरी बार बस...". यह नज़्म रफ़ीक साहब की आवाज़ का एक नया अंदाज़ लिए हुए है, उनकी अब तक की तमाम ग़ज़लों से अलग इस नज़्म की नज़ाकत को उन्होंने बहुत बखूबी से निभाया है.रफ़ीक साहब की एक और खासियत ये है कि वो हमेशा नए शायरों की रचनाओं को अपनी आवाज़ में सजाते हैं. इस तरह वो हमारे मिशन में मददगार ही साबित हो रहे हैं. उनकी पिछली ग़ज़ल के शायर अज़ीम नवाज़ राही भी किसी ऐसे स्थान पर रहते हैं जहाँ इन्टरनेट आदि की सुविधा उपलब्ध नहीं है, यही कारण है कि हमें अब तक उनकी तस्वीर और अन्य जानकारियाँ उपलब्ध नहीं हो पायी हैं. लेकिन इस बार के रचनाकार मोइन नज़र के विषय में हमारे बहुत से श्रोता पहले से ही परिचित होंगे। मोइन नज़र वही शायर हैं जिनका कलाम 'इतना टूटा हूँ कि छूने से बिखर जाऊँगा, अब अगर और दुआ दोगे तो मर जाऊँगा' गाकर ग़ज़ल गायक गुलाम अली ने दुनिया में अपना परचम फहराया। मोइन नज़र साहब रेलवे में चाकरी करते हैं और फिलहाल मुम्बईवासी हैं। कहते हैं फनकार का काम बोलता है, तो आप भी सुनिए मोईन साहब ने क्या खूब बोल लिखे हैं यहाँ. अपने विचार देकर रफ़ीक शेख और नये शायर मोईन नज़र की हौसलाफजाई अवश्य करें.

नज़्म को सुनने के लिए प्लेयर पर क्लिक करें-



Here comes song no.17 for the season 2. "Akhiri baar bas..." is composed and rendered by Rafique Sheikh, and penned by a new writer Moin Nazar. This sad romantic nazm will surely touch your heart, so hear it and share your thoughts about it. Your valuable comments will help us to improvise.

To listen,please click on the player below -



बोल - Lyrics

आखिरी बार बस, तेरा दीदार कर,
मैं चला जाऊँगा, छोड़कर ये शहर,

अपनी चिलमन से बाहर निकल के ज़रा,
दुनिया वालों से छुप के संभल के ज़रा,
दो कदम आ मेरी सिम्त चल के ज़रा,
बैठ पहलु में मेरे, तू मचल के ज़रा,
तेरा दीवाना हूँ, तेरा दीवाना हूँ,
मेरा ऐतबार कर .....

तेरे जलवे चुरा लूँ, इन निगाहों में आ,
मैं तेरे हुस्न को, भर लूँ बाहों में आ,
साए में ताज के, चांदनी रात में,
दुधिया जिस्म को ले पनाहों में आ,
देख लूँ मैं तुझे, देख लूँ मैं तुझे,
आज भर के नज़र....

फ़िर उसके बाद मुलाकात न होगी शायद,
धड़कते दो दिलों में बात न होगी शायद,
जमीन प्यार की बंज़र मेरे हो जायेगी,
बरसों इन आँखों से बरसात न होगी शायद,
साथ मेरे तू चल, साथ मेरे तू चल,
ये सनम बाम पर...

SONG # 17, SEASON # 02, "AKHIRI BAAR BAS..." OPENED ON 24/10/2008 ON AWAAZ, HIND YUGM.
Music @ Hind Yugm, Where music is a passion

Friday, October 17, 2008

मैं इबादत करूँ...या मोहब्बत करूँ.....

दूसरे सत्र के सोलहवें गीत का विश्वव्यापी उदघाटन आज -

सूफी संगीत की मस्ती का आलम कुछ अलग ही होता है. आज आवाज़ पर हम आपको जिस संगीत टीम से मिलवा रहे हैं उनका संगीत भी कुछ युहीं डुबो देने वाला है. भोपाल मध्य प्रदेश की यह संगीत टीम अब तक आवाज़ पर पेश हुई किसी भी संगीत टीम से बड़ी है, सदस्यों की संख्या के हिसाब से. आप कह सकते हैं कि ये एक मुक्कमल संगीत टीम है, जहाँ गायक, संगीत संयोजक गीतकार और सभी सजिंदें एक टीम की तरह मिल कर काम करते हैं. टीम की अगुवाई कर रहे हैं गायक अरेंजर और रिकोरडिस्ट कृष्णा पंडित और निर्देशक हैं चेतन्य भट्ट. साथ में हैं गीटारिस्ट सागर, रिदम संभाला है हेमंत ने गायन में कृष्णा का साथ दिया है अभिषेक और रुद्र प्रताप ने. इस सूफियाना गीत के बोल लिखे हैं गीतकार संजय दिवेदी ने. पूरी टीम ने मिलकर एक ऐसा समां बंधा है की सुनने वाला कहीं खो सा जाता है. तो सुनकर आनंद उठायें इस बेहद मदमस्त गीत का और इस दमदार युवा संगीत टीम को अपना आशीर्वाद और प्रेम देकर हौसला अफजाई दें.

गीत को सुनने के लिए नीचे वाले प्लेयर पर क्लिक करें-



A complete sufi band is here to present the 16th song of the season - "sooraj chand aur sitare". lead playback by Krishna Pandit supported by Abhishek aur Rudra Pratap, Chetanya Bhatt plays the director, lead guitarist is Sagar.Hemant handled the rhythm section while Krishna Pandit did the arranging and recording work. this very soulful sufiyana song has been penned by lyricist Sanjay Diwedi is surely has the power to uplift your spirit. so enjoy this song here and encourage this very young team who has all the elements in them to make it big in the coming days. all they need is your love and support.

Click on the player to listen to this brand new song -



गीत के बोल - Lyrics

सूरज चाँद और सितारे,
तेरे ही दम के सहारे,
तेरे ही करिश्में में जग समाया है,
मेरी साँसों में धडकनों में,
इश्क के जज्बातों में,
और सभी के दिलों में तू समाया है...
सूरज चाँद और सितारे ...

धडकनों की जबां पे नाम तेरा ही है,
हर एक लम्हें में जुस्तुजू तेरी है
इस गुलिस्तान में तुझको पाया,
आरजू में तू ही छाया,
मेरे हर सफर में तू समाया है...

इस जमीं आसमान में तेरा ही जलवा है,
तेरी एक नज़र से महका ये आलम है
हर तरफ़ है तेरा जादू,
हर खुशी हर गम है तू,
इस दुनिया का तू सरमाया है....

मैं इबादत करूँ या मोहब्बत करूँ
तेरे दीवाने पन में मैं दीवाना बनूँ,
तेरी चाहत में सबको भूलूँ
तू मेरा और मैं तेरा हो लूँ ,
तेरे ही इश्क में तुझको पाया है....


SONG # 16, SEASON # 02, "SOORAJ CHAND AUR SITARE..." OPENED ON AWAAZ, HINDYUGM ON 17/10/2008.
Music @ Hind Yugm, Where music is a passion.


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Friday, September 12, 2008

दोस्तों ने निभा दी दुश्मनी प्यार से...

दूसरे सत्र के ग्यारहवें गीत का विश्वव्यापी उदघाटन आज.

ग्यारहवें गीत के साथ हम दुनिया के सामने ला रहे हैं एक और नौजवान संगीतकार कृष्ण राज कुमार को, जो मात्र २२ वर्ष के हैं, और जिन्होंने अभी-अभी अपने B.Tech की पढ़ाई पूरी की है, पिछले १४ सालों से कर्नाटक गायन की दीक्षा ले रहे हैं. कृष्ण का परिचय हिंद युग्म से, "पहला सुर" के संगीतकार निरन कुमार ने कराया, कृष्ण कुमार जिस दिन हिंद युग्म के कविता पृष्ट पर आए, उसी दिन युग्म के वरिष्ट कवि मोहिंदर कुमार की ताजी कविता प्रकाशित हुई थी, कृष्ण ने उसी कविता / गीत को स्वरबद्ध करने का हमसे आग्रह किया.

लगभग डेढ़ महीने तक इस पर काम करने के बाद उन्होंने इस गीत को मुक्कमल कर अपनी आवाज़ में हमें भेजा, जिसे हम आज आपके समक्ष लेकर हाज़िर हुए हैं, हम चाहेंगे कि आप इस नए, प्रतिभावान संगीतकार/गायक को अपना प्रोत्साहन और मार्गदर्शन अवश्य दें.

गीत को सुनने के लिए प्लेयर पर क्लिक करें -



With this new song, we are introducing another new singer / composer from Cochi, Krishna Raj Kumar, lyrics are provided by another Vattern poet from Hind Yugm, Mohinder Kumar, the song is more like a poetry about relationships and the hard facts of life. We hope you will like this presentation, give your guidance to this young composer, so that he can better himself for the future.

Click on the player to listen to this brand new song



Lyrics - गीत के बोल

राहतें सारी आ गई हिस्से में उनके
और उजाले दामन के सितारे हो गये
चांद मेरा बादलों में खो गया है
कौन जाने इस घटा की क्या वजह है

आखिरी छोर तक जायेगा साथ मेरे
और फ़िर वो साया भी मेरा न होगा
ख्वाबों के लिये हैं ये सातों आसमान
हकीकत के लिये पथरीली सतह है


राहों से मंजिलों का पता पूछता है
बीच राह में गुमराह राही हो गया है
कौन जाने गुजरे पडाव मंजिलें हों
भूलना ही हार को असली फ़तह है

दोस्तों ने निभा दी दुश्मनी प्यार से
सोचने को अब बाकी क्या बचा है
राह शोलों पर भी चल कर कट जायेगी
इस दिल मे जख्मों के लिये जगह है...

यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंकों से डाऊनलोड कर लें (ऑडियो फ़ाइल तीन अलग-अलग फ़ॉरमेट में है, अपनी सुविधानुसार कोई एक फ़ॉरमेट चुनें)



VBR MP364Kbps MP3Ogg Vorbis


SONG # 11, SEASON # 02, "RAHATEN SAARI" OPENED ON 12/09/2008, ON AWAAZ, HIND YUGM.
Music @ Hind Yugm, Where music is a passion


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Friday, September 5, 2008

कहने को हासिल सारा जहाँ था...

दूसरे सत्र के १० वें गीत और उसके विडियो का विश्वव्यापी उदघाटन आज.

चलते चलते हम संगीत के इस नए सत्र की दसवीं कड़ी तक पहुँच गए, अब तक के हमारे इस आयोजन को श्रोताओं ने जिस तरह प्यार दिया है, उससे हमारे हौसले निश्चित रूप से बुलंद हुए है. तभी शायद हम इस दसवें गीत के साथ एक नया इतिहास रचने जा रहे हैं, आज ये नया गीत न सिर्फ़ आप सुन पाएंगे, बल्कि देख भी पाएंगे, यानि "खुशमिजाज़ मिट्टी" युग्म का पहला गीत है जो ऑडियो और विडियो दोनों रूपों में आज ओपन हो रहा है.


सुबोध साठे की आवाज़ से हमारे, युग्म के श्रोता बखूबी परिचित हैं, लेकिन अब तक उन्होंने दूसरे संगीतकारों, जैसे ऋषि एस और सुभोजित आदि के लिए अपनी आवाज़ दी है, पर हम आपको बता दें, सुबोध ख़ुद भी एक संगीतकार हैं और अपनी वेब साईट पर दो हिन्दी और एक मराठी एल्बम ( बतौर संगीतकार/ गायक ) लॉन्च कर चुके हैं, युग्म के लिए ये उनका पहला स्वरबद्ध गीत है, जाहिर है आवाज़ भी उनकी अपनी है, संगीत संयोजन में उनका साथ निभाया है, पुणे के चैतन्य अड़कर ने. गीतकार हैं युग्म के एक और प्रतिष्टित कवि, गौरव सोलंकी, जिनका अंदाज़ अपने आप में सबसे जुदा है, तो आनंद लें इस ताजातरीन प्रस्तुति का, और अपने विचार टिप्पणियों के माध्यम से हम तक अवश्य पहुंचायें.


गीत को सुनने के लिए नीचे के प्लेयर पर क्लिक करें -





To listen to this brand new song, please click on the player below -




With this 10th song of the season, we are creating a new history, as this is the first song, which we are opening in audio and video format together. Subodh who sung many song for us before, this time handle the tough job of composing also, along with singing in his mesmerizing voice.


Song penned by another reputed poet from yugm family, Gaurav Solonki, while Chaitanya Adhker from Pune, helped with music arrangement. So now after hearing the audio watch here the video of "khushmizaz mitti".We hope you like this effort, feel free to post your comments about the song and its video so that we can better ourselves in accordance with your suggestions.

Other credits - (Regarding Video)

Video Direction - Subodh Sathe.
Camera - Navendu thosar, Pankaj Makhe.
Editing - Manoj Pidadi

Video of "khushmizaz mitti"



Lyrics - गीत के बोल


खुशमिजाज मिट्टी
पहले उदास थी
चाँदनी की चिट्ठी
अँधेरे के पास थी
सुस्त सुस्त शामें थीं,
सुबहें उनींदी
सूरज के होठों को उजाले की प्यास थी
कहने को हासिल सारा जहाँ था
तुम जो नहीं थे तो कुछ भी कहाँ था...

इधर था मोहल्ला नींदों का लेकिन
रातों में पागल सोता नहीं था
अजब सी थी हालत दिल की भी मेरे
हँसता नहीं था, रोता नहीं था
कहने को हासिल सारा जहाँ था
तुम जो नहीं थे तो कुछ भी कहाँ था...

बहुत डोर थी, बहुत थी पतंगें
मगर उड़ती कैसे, नहीं थी उमंगें
ऐसा हुआ था, दिल में कुँआ था
पानी का साया भी डूबा हुआ था
कहने को हासिल सारा जहाँ था
तुम जो नहीं थे तो कुछ भी कहाँ था...

यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंकों से डाऊनलोड कर लें (ऑडियो फ़ाइल तीन अलग-अलग फ़ॉरमेट में है, अपनी सुविधानुसार कोई एक फ़ॉरमेट चुनें)




VBR MP364Kbps MP3Ogg Vorbis



SONG # 10, SEASON # 02, "KHUSHMIZAZ MITTI" (Khushmizas Mitti), OPENED ON 05/09/2008, AWAAZ, HIND YUGM.Music @ Hind Yugm, Where music is a passion.

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