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Thursday, February 19, 2009

दक्षिण भारत में आवाज की गूँज

इस बार हिन्द-युग्म आवाज़ की गूँज दक्षिण में सुनाई पड़ी है। ११ फरवरी २००९ को बंगलुरू से प्रकाशित हिन्दी दैनिक 'दक्षित भारत' में आवाज़ की पोस्ट 'रहमान के बाद अब बाज़ी मारी उस्ताद जाकिर हुसैन ने भी...' के कुछ अंश प्रकाशित हुये हैं। सीमा सचदेव ने स्कैन्ड कॉपी भेजी है। वैसे इससे पहले अमर उजाला के ब्लॉग पृष्ठ पर आवाज़ के ३ आलेखों की चर्चा हुई है, पर दक्षिण भारत के किसी अखबार में शायद ये पहली बार है. आप भी देखें (गलत-सही ही सही कुछ छापा तो उन्होंने)।



Wednesday, September 3, 2008

मैं अमर के शब्दचित्र में उतरी एक छोटी-सी कविता हूँ...

मैं अमर के शब्दचित्र में उतरी एक छोटी-सी कविता हूँ,
है फख्र कि मैं भी उस जैसा कई लोकों का रचयिता हूँ।
कहना है विश्व दीपक "तन्हा" का.

विश्व दीपक "तन्हा",एक कवि के रूप में इन्टरनेट पर एक ऐसा नाम है जो किसी परिचय का मोहताज नही है,अपनी कविताओं और कहानियो से एक उभरते हुए साहित्यकर्मी के रूप में अपनी पहचान बनने वाले "तन्हा",का लिखा पहला स्वरबद्ध गीत "
मेरे सरकार",पिछले हफ्ते आवाज़ पर ओपन हुआ,और बेहद सराहा गया,आईये मिलते हैं,कवि कथाकार और गीतकार विश्व दीपक तन्हा से,जो हैं इस हफ्ते हिंद युग्म,आवाज़ के उभरते सितारे -

अपने बारे में ज्यादा क्या बताऊँ? एक संक्षिप्त परिचय यानि कि intro दे देता हूँ बस । जन्म बिहार के सोनपुर में हुआ, दिनांक २२ फरवरी १९८६ को। अब मैं अपने सोनपुर से आप सब को अवगत करा देता हूँ। मेरा/हमारा सोनपुर हरिहरक्षेत्र के नाम से विख्यात है, जहाँ हरि और हर एक साथ एक हीं मूर्त्ति में विद्यमान है और जहाँ एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला लगता है। पूरा क्षेत्र मंदिरों से भरा हुआ है। इसलिए बचपन से हीं धार्मिक माहौल में रहा। लेकिन मैं कभी भी पूर्णतया धार्मिक न हो सका। पूजा-पाठ के श्लोकों और दोहों को मैं कविता की तरह हीं मानता था। पर मेरे परिवार में कविता, कहानियों का किसी का भी शौक न था। आश्चर्य की बात है कि जब मैं आठवीं में था, तब से पता नहीं कैसे मुझे कविता लिखने की आदत लग गई । फिर तो चूहा, बिल्ली, चप्पल, छाता किसी भी विषय पर लिखने लगा। मेरे परिवार में पढाई के अलावा कुछ भी करना पढाई से आँख और नाक चुराने जैसा माना जाता था। इसलिए घरवालों से छिपाकर लिखता था।


पहली कविता कौन-सी थी याद नहीं लेकिन पहली कविता जिसे मेरे पिताजी ने स्वीकार किया, वो याद है। जब मैं दसवीं में था, तो मेरी छोटी बहन को १५ अगस्त के अवसर पर अपने स्कूल में एक कविता सुनानी थी। मैने अपनी लिखी एक कविता "तिरंगा के तीन रंग" अपनी बहन को दी और कहा कि पापा से पूछ लेना कि इसे कैसे गाना है। मेरे पिताजी ने मेरी बहन को कहा कि कवि से हीं पूछो ;) । अपनी कविता की स्वीकृति सुनकर मुझे बेहद अच्छा लगा। फिर जब मैं १२वीं में था पिताजी के कार्यालय में होली के अवसर पर एक कविता की आवश्यकता थी। मेरी खुशी का ठिकाना न रहा जब मेरे पिताजी ने खुद मुझसे कविता लिखने के लिए कहा। यह अलग बात है कि वह कविता कार्यालय में पढी नहीं जा सकी , क्योंकि कुछ बड़े कवि आए हुए थे, लेकिन मुझे जो चाहिए था, वह मैने पा लिया था।
इसतरह शनै:शनै: कविता-लेखन का मेरा सफ़र चलता रहा।

१२वीं के बाद आई०आई०टी० जे०ई०ई० की तैयारी के लिए पटना चला गया।माहौल बदला, मूड बदला, उमर बदली तो प्यार-मोहब्बत की कविताएँ लिखने लगा। कभी महसूस होता था कि कहीं मेरी कविताएँ मेरे भविष्य को बर्बाद न कर दे, क्योंकि हर समय कुछ न कुछ लिखता हीं रहता था , तैयारी अधोगति पर थी। फिर भी कुछ दुआओं और सदबुद्धि आने के बाद बहुत सारी मेहनत के बलबूते मैं आई०आई०टी० में प्रवेश पाने में सफल हुआ। नामांकन संगणक विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग(Computer science and Engineering Department) में हुआ। बिहार बोर्ड का छात्र होने के कारण मुझे कम्पूटर की कुछ भी जानकारी न थी। इसलिए नामांकन के बाद मुझे बाकी छात्रों के लेवेल में आने के लिए खासी मेहनत करनी पड़ी। लेखन का दौर धीरे-धीरे खत्म होने लगा।

इंजीनियरिंग के प्रथम और द्वितीय वर्षों में मैने नाम-मात्र की कविताएँ लिखीं। हास्टल मैगजीन और इन्स्टीच्युट मैगजीन के लिए एक-दो कविताएँ लिखता रहा बस। फिर तृतीय वर्ष में आरकुट पर "गिरीराज जोशी" ,"शैलेश भारतवासी" और "राजीव रंजन प्रसाद" से मुलाकात हुई। इन लोगों के माध्यम से हिन्द-युग्म के संपर्क में आया। दिसंबर २००६ में मैं हिन्द-युग्म का नियमित सदस्य हो गया। अब तो हर सप्ताह कविताएँ, मुझे लगा जैसे मैने खुद को वापस पा लिया। तकनीकी दुनिया और साहित्यिक दुनिया के बीच का पुल मैने पा लिया था। पहली कविता जो मैने युग्म पर प्रकाशित की थी , वो थी "याद" । आज भी मुझे याद है कि जब इस कविता पर सकारात्मक टिप्पणियाँ आई थीं तो दिल कितना खुश हुआ था। कुछ महीनों के पश्चात काव्य-पल्लवन की शुरूआत हुई। एक दिए गए विषय पर लिखना एक नया हीं अनुभव था। युग्म के अन्य मित्रों के सहयोग से धीरे-धीरे मैं भी अनुभवी होता गया।

फरवरी २००७ के यूनिकवि विजेता "गौरव सोलंकी" के प्रयास से युग्म ने एक नया अभियान शुरू किया , जिसका नाम था "कहानी-कलश" । युग्म बस कविताओं तक हीं सीमित नहीं रहना चाहता था , उसके पास कहानिकारों की भी एक उम्दा फौज थी। इसलिए कहानी-कलश भी चल निकला। मैने कभी पहले कोई कहानी नहीं लिखी थी, लेकिन मित्र गौरव के कहने पर मुझमे भी कहानी-लेखन की जिज्ञासा जगी। कुछ कच्चे शब्दों को जोड़कर मैने भी एक कहानी रच डाली "तुलसी की छांव" । कुछ सुधि पाठकों ने मेरी प्रथम कहानी को सराहा । फिर २-३ महीनों के अंतराल पर मैने कहानी लिखने का प्रण किया। ३-४ कहानियाँ लिख डालीं, लेकिन अब भी मुझे कहानी लेखन बड़ा हीं मेहनत का काम लगता है, इसलिए ज्यादा लिख नहीं पाता।

इसी तरह "राजीव रंजन प्रसाद" की कड़ी निष्ठा के बदौलत युग्म ने बाल-साहित्य पर भी काम करने का वचन लिया। इसी दिशा में "बाल-उद्यान" नाम का एक नया मंच तैयार किया गया। मैने भी अपनी कुछ कविताएँ वहाँ प्रेषित की , जो मैने आठवीं से दसवीं के बीच लिखी थी। जब लिखी थी, तब मुझे वो रचनाएँ बचकानी नहीं लगती थी, लेकिन अब वे बचकानी के अलावा कुछ नहीं लगतीं ;) बाल-उद्यान अभी भी अपने कार्य में सफलतापूर्वक तल्लीन है।

कुछ महीनों के बाद युग्म पर "सजीव सारथी" का पदार्पण हुआ और उन्होंने युग्म को एक नई दिशा हीं दे दी। कविताएँ, कहानियाँ अब बस लिखी हीं नई जाने लगीं, बल्कि उनमें आवाज रूपी जान भी पैदा की गई। गीत बनने लगें, गज़लें तैयार होने लगीं, नए-नए संगीतकार,गीतकार और गायकों का युग्म पर आगमन शुरू हो गया।शुरू-शुरू में हर महीने एक नया गीत युग्म की शोभा बढाने लगा, फिर हर पंद्रह दिनों पर और अब हर सप्ताह। मैने भी सोचा कि अपनी प्रतिभा का इम्तीहान लिया जाए। मैने अपना एक गीत सुभोजित को भेज दिया। २ हफ्तों की माथापच्ची के बाद गीत के बोल में ढेर सारे परिवर्त्तन किए गए । २-३ महीनों की मेहनत के पश्चात सुभोजित ने इसे फाईनल लूक और टच दिया और १-२ हफ्तों की कलाकारी और गलाकारी लगाकर बिस्वजीत ने इसे अपनी आवाज से एक नया हीं रंग दे दिया। आखिरकार वह गीत पिछले सप्ताह आवाज़ के मंच पर रीलिज हो गया। उम्मीद है कि सभी पाठको और श्रोताओं ने उस गीत का रसास्वादन किया होगा।

"मेरे सरकार" इस गीत के पीछे की कहानी कुछ खास नहीं है। आज सबके समक्ष मैं उस कहानी का पर्दाफाश कर रहा हूँ। दर-असल सुभोजित ( हमारे प्यारे संगीतकार साहब) , जो कि अभी ११वीं में पढते हैं, को एक ऎसे गाने की जरूरत थी, जो वे अपनी भावी प्रेमिका को सुना सकें और उसे मोहित कर सकें। भावी इसलिए क्योंकि वो सौभाग्यशाली लड़की अभी तक उनकी प्रेमिका बनी नहीं थी, एकतरफा प्यार था। मैने उसे जो गाना दिया था, उसमें कुछ बांग्ला के भी शब्द थे। मैने सोचा था कि लड़की बंगाली हीं होगा, इसलिए "बोलबो आमि सोना, तुमाके भालो बासि"(मैं तुमसे कहूँगा कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ) जैसे वाक्य मैने जानकर डाले थे। लेकिन न जाने क्यों सुभोजित ने वह गाना स्वीकार नहीं किया। शायद लड़की बंगाली नहीं होगी :) । उसने कहा कि एक हिंदी गाना लिखकर दो। तो मैने "मेरे सरकार" लिखा। और वाह............सुभोजित ने वह गाना स्वीकार कर लिया। उसने कहा कि बहुत हीं मीठे बोल हैं, मैं इसपर कुछ क्लासिकल टाईप का म्युजिक दूँगा। मैं हैरान.....इस गाने पर क्लासिकल म्युजिक। मरता क्या न करता....आखिर मेरा पहला गाना था। मैने बोला कि तुम जो भी बनाओगे , अच्छा हीं बनाओगे, तुम्हारी मर्जी क्लासिकल हीं दो। और उसने जो म्युजिक(संगीत) दिया, मैने उसकी आशा भी नहीं की थी। बहुत हीं खूबसूरत.....मजा आ गया।

तो ये रही "मेरे सरकार" के पीछे की कहानी..............। अब पता नहीं सुभोजित अपने सरकार को अपनी प्रेयसी बना पाए कि नहीं ;)

जब मैं युग्म का सदस्य बना था, तो बमुश्किल १० लोग हीं हमारे साथ थे। लेकिन हम सबों के प्रयास से युग्म की सदस्य-संख्या बढती गई। अब तो ५० से भी ज्यादा लोग हमारे कारवां में शामिल हैं। इसलिए युग्म की प्रगति में हम सबका बराबर का सहयोग अपेक्षित है। मैं बस यही दुआ करता हूँ कि हर कोई निस्वार्थ भाव से यूँ हीं युग्म की सेवा करते रहे और युग्म अपने हरेक मंच पर सफलता का परचम लहराए।

- विश्व दीपक "तन्हा"

युग्म परिवार की तरफ़ से भी "तन्हा" जी को बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनायें. इसी बात पर क्यों न एक बार फ़िर आनंद लें सप्ताह के गीत "मेरे सरकार" का, और हौंसलाअफजाई करें आवाज़ की इस नयी संगीत टीम का -




आप भी इसका इस्तेमाल करें

Monday, July 28, 2008

पहला सुर के गीतों को अपना कॉलर ट्यून बनायें

इंटरनेट के माध्यम से बने पहले संगीतबद्ध एल्बम 'पहला सुर' के गीतों को अपना कॉलर ट्यून बनायें

Very First Musical Albumयह बहुत खुशी की बात है कि हिन्द-युग्म के पहले एल्बम 'पहला सुर' के गीतों/ग़ज़लों को आप अपना कॉलर ट्यून बना सकते हैं। अभी यह सुविधा वोडाफोन के साथ है। जल्द ही यह सुविधा हम अन्य मोबाइल नेटवर्क उपभोक्ताओं को भी देंगे। हिन्दी ब्लॉगिंग के लिए भी यह एक सफलता ही है कि ब्लॉगिंग के माध्यम से एक एल्बम बना और वो इतनी जगह, इतनी बार सुना गया और सराहा गया।

Friends,

We are very happy to announce that the tracks of Hind-Yugm's very first album of 'Pehla Sur' that was made through internet jamming, are uploaded at Vodafone... You can set those as your caller tune..
CODESONG_NAMEALBUM_NAME
10600300Baat Yeh Kya Hai JoPehla Sur
10600301In DinonPehla Sur
10600302JhalakPehla Sur
10600303Mujhe Dard DePehla Sur
10600304SammohanPehla Sur
10600305Subah Jeeta HunPehla Sur
10600306Subah Ki TaazgiPehla Sur
10600307Tu Hal Dil Ke PaasPehla Sur
10600308Wo Narm SiPehla Sur
10600309Yeh Zaroori NahinPehla Sur


SMS CT to 56789 to set the song as your Caller tune

For Example: If you want to set 'Wo Narm Si' as your Vodafone Caller Tune, then create/compose/write a SMS CT space followed by code (CT 10600308) and sent it to 56789..

Rs 15 / Caller tune selection I Rs 30 / month I Rs 3 / SMS


'पहला सुर' के गीतों को कॉलर ट्यून के रूप में अपने मोबाइल में सेट करने से पहले उन्हें यहाँ सुन लें।
Please listen all the tracks of Pehla Sur here, before setting these as your caller tune..

नोट- कॉलर ट्यून अगस्त के पहले सप्ताह से एक्टिवेट किया जा सकेगा। थोड़ी सी प्रतीक्षा।

Friday, July 4, 2008

संगीत दिलों का उत्सव है - संगीत के नए सत्र की पहली सौगात

मित्रों,
आज से आवाज़ पर शुरू हो रहा है, संगीत का एक नया उत्सव,"पहला सुर" के कामियाब प्रयोग के बाद संगीत का ये नया सत्र शुरू करते हुए, हिंद युग्म उम्मीद करता है कि इस सत्र में प्रस्तुत होने वाले सभी गीत आपको और अधिक पसंद आयेंगे, जो संगीतकार हमारे साथ पहली एल्बम में जुड़े थे उनके भी संगीत में आप गजब की परिपक्वता देंखेंगे और उससे भी ज्यादा खुशी की बात यह है कि जो नए संगीतकार इस बार जुड़े हैं, सभी नौजवान हैं और बेहद गुणी हैं अपने फन में.
संयोगवश जिस गीत को हमने इस सत्र की शुरुवात करने के लिए चुना है, वो भी दस्तक है एक नए युवा संगीतकार जोड़ी की, जो दूर केरल के दो प्रान्तों में रहते हैं और कोयम्बतूर के करुणया महाविद्यालय से b-tech की पढ़ाई कर रहे हैं, इनके नाम है निखिल और चार्ल्स, निखिल के संगीत में जहाँ बारिश में भीगी मिटटी की सौंधी सौंधी महक मिलेगी आपको, तो चार्ल्स के गायन में किसी निर्झर सा प्रवाह, एक और आवाज़ है इस गीत में, गायिका मिथिला की, जिन्होंने बाखूबी साथ दिया है इस जोड़ी का, इस गीत को और खूबसूरत बनाने में, सजीव सारथी के लिखे, इस गीत को अपने एक दोस्त के होम स्टूडियो में दो दिन लगातार १०- १० घंटे काम कर मुक्कमल किया है-निखिल और चार्ल्स की टीम ने, इनकी मेहनत कहाँ तक सफल हुई है, सुन कर बताएं, और कोई सुधार की गंजाइश बता कर आप इन्हें मार्गदर्शन दें, तो प्रस्तुत है समीक्षा के लिए, आपके समुख हिंद युग्म का यह पहला नज़राना

Friends,
After the glorious success of Hind Yugm's debut album Pahla Sur, we are happy to announce the beginning of a new season of music @ Hindyugm, Where Music is a Passion, we wish all our existing and new composers a very happy music year ahead.
From today onwards,till December 31st, we will release a new song every Friday, so all you music lovers, mark your Fridays as music Fridays, from now on. We will surly give your ears a grand musical treat.

We are proudly opening this season from a song called " Sangeet Dilon Ka Utsav Hai ", composed by a composer duo from south Nikhil and Charles, and penned by Sajeev Sarathie, this song speaks about the magic of music,which make our lives so colourful. This song completed after 10-10 long hours of jammng for 2 complete days by the team, and very beautifully rendered by Charles and Mithila. So enjoy this soulful melody and leave your comments. so friends, Here comes THE FIRST SONG OF THE SEASON for you – LISTEN AND ENJOY



गीत के बोल -

जब सुर खनकते हैं,
बेजान साजों से,
आवाज़ के पंखों पर उड़ने लगता है कोई गीत जब,
झूम झूम लहराते हैं ये दिल क्योंकि..
संगीत दिलों का उत्सव है,
संगीत दिलों का उत्सव है...उत्सव है.....

गीतों के रंग न हो तो, नीरस है ये जीवन,
सरगम के सुर न छिड़े तो, सूना है मन आंगन,
हवाओं में संगीत है,
लहरों में संगीत है,
संगीत है बारिश की रिमझिम में,
धड़कन में संगीत है,
सांसों में संगीत है,
संगीत है कुदरत के कण कण में,
जब ताल से उठे,
दिल की सदा कोई,
हौले से ख्वाबों को सहला जाता है कोई गीत जब,
घूम घूम बलखाते हैं ये दिल क्योंकि...
संगीत दिलों का उत्सव है,
संगीत दिलों का उत्सव है...उत्सव है.....

गहरे ये रिश्ते हैं, संग रोते हँसते हैं,
सुख दुःख के सब मौसम, गीतों में बसते हैं,
कभी गूंजे बांसुरी,
वीणा की धुन कभी,
कभी ढोल मंजीरे बजते हैं,
तबले की थाप पर,
कभी नाचता है मन,
कभी सुर सितार के बहते हैं,
जब ताल से उठे,
दिल की सदा कोई,
धीमे से यादों को धड़का जाता है कोई गीत जब,
साथ साथ गुनुगुनाते हैं ये दिल क्योंकि ...
संगीत दिलों का उत्सव है,
संगीत दिलों का उत्सव है...उत्सव है.....

जब सुर खनकते हैं.....

Lyrics

jab sur khankte hain,
bezaan sajon se,
awaaz ke pankhon par udne lagta hai koi geet jab,
jhoom jhoom lehrate hain ye dil kyonki...
sangeet dilon ka utsav hai,
sangeet dilon ka utsav hai.... utsav hai....

geeton ke rang na ho to, neeras hai ye jeevan,
sargam ke sur na chide to, sunaa hai man aangan,
hawavon men sangeet hai,
lehron men sangeet hai,
sangeet hai barish ki rimjhim men,
dhadkan men sangeet hai,
sanson men sangeet hai,
sangeet hai kudrat ke kan kan men,
jab taal se uthe,
dil ki sada koi,
haule se khwabon ko sahla jaata hai koi geet jab,
ghoom ghoom balkhate hain ye dil kyonki...
sangeet dilon ka utsav hai,
sangeet dilon ka utsav hai.... utsav hai....


gahre ye rishte hain, sang rote hanste hain,
sukh dukh ke sab mausam, geeton men baste hain,
kabhi gunje bansuri,
veena ki dhun kabhi,
kabhi dhol manjeere bajte hain,
tablee ki thaap par,
kabhi nachta hai man,
kabhi sur sitaar ke bahte hain,
jab taal se uthe,
dil ki sada koi,
dheeme se yadon ko dhadka jaata hai koi geet jab,
saath saath gungunate hain ye dil kyonki...
sangeet dilon ka utsav hai,
sangeet dilon ka utsav hai.... utsav hai....

jab sur khankte hain......


You can download the song according to your prefrence from here -

यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंकों से डाऊनलोड कर लें (ऑडियो फ़ाइल तीन अलग-अलग फ़ॉरमेट में है, अपनी सुविधानुसार कोई एक फ़ॉरमेट चुनें)




VBR MP364Kbps MP3Ogg Vorbis


SANGEET DILON KA UTSAV HAI

Wednesday, July 2, 2008

पॉडकास्ट पर संगीतबद्ध गीतों, कवि-सम्मेलनों, बालोपयोगी सामग्रियों और कहानियों का प्रसारण

दोस्तो,

हिन्द-युग्म यह संकल्प लेकर चला है कि अपने प्रयासों में दिवस प्रति दिवस गुणात्मक सुधार हो। ३ फरवरी २००८ को पहला म्यूजिक एल्बम 'पहला सुर' रीलिज करने के बाद हिन्द-युग्म अब ऐसे हज़ारों एल्बम निकालने का इरादा रखता है, ताकि हिन्दी और इसके अच्छे साहित्य को अधिक से अधिक पापुलर किया जा सके। आज से अपने इस आवाज़ पृष्ठ पर स्थाई तौर पर ४ स्थाई कार्यक्रम जोड़ रहे हैं।

१) प्रत्येक शुक्रवार नये संगीतबद्ध गीत का प्रकाशन
२) महीने के अंतिम रविवार को पॉडकास्ट कवि सम्मेलन का प्रसारण
३) महीने में कम से कम दो बाल-साहित्य के पॉडकास्ट का प्रसारण
४) प्रत्येक माह एक कहानी के पॉडकास्ट का प्रसारण

संगीतबद्ध गीत के लिए-
next songसंगीतबद्ध गीत के लिए ७ पुराने संगीतकारों के अतिरिक्त हमने ३ नये संगीतकार (सुभोजेत, निखिल/चार्ल्स और अनुरूप) को जोड़ा है जो बहुत से गीतों पर काम कर रहे हैं। हमारी कोशिश है कि हम उभरते हुए गायकों, संगीतकारों और गीतकारों को इस महाअभियान से एक महामंच दे पाये। भविष्य के उदियमान सितारे बनें। इसके लिए हमने जजों की एक खास टीम बनाई है। निर्णायक मंडली में विविध भारती रेडियो के सुप्रसिद्ध रेडियो जॉकी यूनुस खान, उभरती हुई गायिका कविता सेठ (गेंगस्टर फेम) और यूनिवर्सल म्यूजिक कंपनी में मैनेजर सुरिन्दर रत्ती शामिल है।

हमारे कार्यों की समीक्षा और सलाह के लिए हमने चुना है हिन्दी ब्लॉगिंग में वरिष्ठ संगीत समीक्षक और संगीत मर्मज्ञ मनीष कुमार को।

यदि आपमें भी गीत गाने, संगीत देने और लिखने का शौक है तो podcast.hindyugm@gmail.com पर संपर्क कीजिए।

पॉडकास्ट कवि-सम्मेलन के लिए-
हिन्द-युग्म एक नया प्रयोग करने जा रहा है। हर महीने के अंतिम रविवार के सुबह १०-१२ बजे के मध्य कवियों की अपनी आवाज़ में उनकी कविताओं का प्रसारण किया जायेगा।
जो कवि इस आयोजन में हिस्सा लेना चाहते हैं वो अपनी आवाज़ में अपनी कविता रिकार्ड करके २० जुलाई २००८ तक podcast.hindyugm@gmail.com पर ईमेल करें। अच्छी क्वालिटी के पॉडकास्ट हो हम पॉडकास्ट कवि सम्मेलन में स्थान देंगे।

बाल-साहित्य का पॉडकास्ट-
फिलहाल श्रीमती मीनाक्षी धनवंतरि बाल-उद्यान में प्रकाशित रचनाओं को अपनी आवाज़ देकर आवाज़ पर प्रकाशित करती हैं। आप भी बाल-उद्यान में प्रकाशित बाल-रचनाओं को स्वरबद्ध करें और podcast.hindyugm@gmail.com भेज दें। यदि आपके पास खुद का कम्पोज किया हुआ कोई बालोपयोगी रिकार्डिंग है तो उसे भी उपर्युक्त ईमेल पते पर भेज दें।

कहानियों का पॉडकास्ट-
हिन्द-युग्म ने प्रत्येक माह एक कहानी का प्रसारण करना चाहता है। यदि आपको लगता है कि आपकी वाचनशैली में दम है तो अपनी आवाज़ में कहानी-कलश पर प्रकाशित कहानियों का पॉडकास्ट बनायें और podcast.hindyugm@gmail.com पर ईमेल करें। आप किसी चर्चित कहानी, या चर्चित कहानीकार की कहानियों का भी पॉडकास्ट भेज सकते हैं। इसे हम आवाज़ में प्रकाशित करेंगे।

तो आयें और हमारा हाथ बँटायें।

Monday, June 2, 2008

आलोक शंकर का रेडियो काव्यपाठ

भारतीय समयानुसार २ जून २००८ की सुबह ८ बजे डैलास, अमेरिका के हिन्दी एफ॰एम॰ रेडियो सलाम नमस्ते पर हिन्द-युग्म के प्रथम यूनिकवि आलोक शंकर का काव्यपाठ और बातचीत प्रसारित किए गये। हमने रिकॉर्ड करने की कोशिश की। हम इस भ्रम में रहे कि पूरा कवितांजलि कार्यक्रम रिकॉर्ड हो रहा है, परंतु तकनीकी असावधानियों के कारण ठीक से रिकॉर्ड नहीं कर सके। हिन्द-युग्म की स्थाई पाठिका रचना श्रीवास्तव ने आलोक शंकर का हौसला बढ़ाने के लिए फोन भी किया, मगर वो भी रिकॉर्ड न हो सका। जितना हो पाया है, आपके समक्ष प्रस्तुत है, ज़रूर बताये कैसा लगा?



प्लेयर से न सुन पा रहे हों तो यहाँ से डाऊनलोड कर लें।

Kavya-path of Alok Shankar on Radio Salaam Namaste

Wednesday, May 28, 2008

तुषार जोशी की आवाज़, मनीष वंदेमातरम् के शब्द

हिन्द-युग्म पर पॉडकास्टिंग की शुरूआत १५ फरवरी २००७ को तुषार जोशी ने अपने पॉडकास्ट ब्लॉग Audio Experiments पर मनीष वंदेमातरम् की कविता 'आवोगी ना' से की थी। इस पॉडकास्ट को ३०० से अधिक लोगों ने डाऊनलोड किया। हमने सोचा कि हिन्द-युग्म के पॉडकास्ट के स्थाई पेज़ 'आवाज़' पर इधर-उधर बिखरे पड़े पॉडकास्ट को लाकर संग्रकित करना उचित होगा ताकि श्रोताओं को सारी सामग्री एक जगह मिल जाय।

सुनिए मनीष की कविता 'आवोगी ना' का पॉडकास्ट


तुषार जी की ही आवाज़ में मनीष की दो अन्य कविताएँ सुनें-

चाहता हूँ मैं


सनीचरी



हिन्द-युग्म के ढेरों पॉडकास्ट यहाँ उपलब्ध हैं।

Monday, May 19, 2008

KAVI.COM की शुरूआत

सामुदायिक रेडियो डीयू-एफ॰एम॰ पर प्रति सप्ताह प्रसारित होने वाले कार्यक्रम कवि डॉट कॉम का गणतंत्र दिवस विशेषांक आपने आवाज़ पर सुना और सराहा भी। बहुत सौभाग्य की बात है कि इस कार्यक्रम की शुरूआत हिन्द-युग्म के कवियों से ही हुई थी। एक ही साथ दो एपीशोडों की रिकॉर्डिंग हुई थी। जिसमें हिन्द-युग्म की ओर से अभिषेक पाटनी, मनीष वंदेमातरम्, विपिन चौहान 'मन', शैलेश भारतवासी और अजय यादव ने भाग लिया। आप भी सुनें और बतायें कि हिन्दी कविता को समर्पित इस कार्यक्रम की शुरूआत को शानदार बनाने में हिन्द-युग्म के कवियों की कितनी भूमिका रही।

नीचे के प्लेयर से सुनें.

(प्लेयर पर एक बार क्लिक करें, कंट्रोल सक्रिय करें फ़िर 'प्ले' पर क्लिक करें।)



यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंकों से डाऊनलोड कर लें (ऑडियो फ़ाइल तीन अलग-अलग फ़ॉरमेट में है, अपनी सुविधानुसार कोई एक फ़ॉरमेट चुनें)




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Kavya-path of many poets of Hind-Yugm @ Kavi.Com (a special programme of DU-FM

Monday, May 12, 2008

मातृ दिवस पर गौरव सोलंकी और विपुल शुक्ला का काव्य-पाठ

डैलास, अमेरिका के हिन्दी एफ॰एम॰ चैनल रेडियो सलाम नमस्ते के कार्यक्रम में 11 मई 2008 की रात्रि 9 बजे (भारतीय समयानुसार 12 मई 2008 की सुबह 7:30 बजे) मातृ दिवस पर आयोजित 'कवितांजलि' के विशेष अंक में हिन्द-युग्म की ओर से गौरव सोलंकी और विपुल शुक्ला ने काव्यपाठ किया। गौरव सोलंकी और विपुल शुक्ला के प्रोत्साहन के लिए हिन्द-युग्म की स्थाई पाठिका रचना श्रीवास्तव ने फोन करके दोनों को बधाइयाँ दी, उसे भी हमने रिकार्ड किया है, लेकिन वो ठीक से रिकार्ड नहीं हो पाया है। अमेरिका के ही पेशे से कवि हृदयी डॉक्टर कमल किशोर ने भी अपने काव्यपाठ के बाद गौरव सोलंकी की कविता की सराहना की। इस कार्यक्रम का संचालन श्री आदित्य प्रकाश करते हैं।

नीचे के प्लेयर से सुनें.

(प्लेयर पर एक बार क्लिक करें, कंट्रोल सक्रिय करें फ़िर 'प्ले' पर क्लिक करें।)



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Gaurav Solnaki's & Vipul Shukla's Kavyapaath

Thursday, May 8, 2008

KAVI.DOT.COM लोधी गार्डन (काव्यपाठ)

58वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर DU-FM के कार्यक्रम कवि डॉट कॉम का विशेष अंक हिन्द-युग्म के कवियों पर केन्द्रित था। आकाशवाणी के वरिष्ठ उद्घोषक प्रदीप शर्मा हिन्द-युग्म के कवियों से मिलने दिल्ली के मशहूर पार्क लोधी गार्डन पहुँचे। हिन्द-युग्म के सक्रिय कार्यकर्ता निखिल आनंद गिरि को संचालन की जिम्मेदारी सौंपी और 30 मिनट के इस विशेष कवि सम्मेलन की रिकार्डिंग की। भाग लेने वाले कवि थे-

मनीष वंदेमातरम्
रंजना भाटिया
भूपेन्द्र राघव
शैलेश भारतवासी
अजय यादव
राशी जमुआर
अवनीश गौतम
निखिल आनंद गिरि

इसकी रिकॉर्डिंग अब हम तक पहुँच पाई है। अब इसे हमें अपने इंटरनेटीय श्रोताओं के समक्ष लेकर प्रस्तुत हैं। आप भी सुनें और इस कवि सम्मेलन का आनंद लें।

नीचे के प्लेयर से सुनें.

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Kavya-path of many poets of Hind-Yugm @ Kavi.Com (a special programme of DU-FM

Tuesday, May 6, 2008

हरिहर झा का काव्य-पाठ (Kavya-Paath of Harihar Jha)

होली के अवसर पर कैनबरा रेडियो (कैनबरा, ऑस्ट्रेलिया) पर हिन्द-युग्म के कवि हरिहर झा का काव्य-पाठ प्रसारित हुआ, जिसकी रिकॉर्डिंग हमें प्राप्त हो गई है। आप भी सुनें और बतायें कैसा लगा?

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Kavya-path of Harihar Jha on Radio Canberra

Thursday, May 1, 2008

इस तरह से बजा 'पहला सुर' (Story of Pahala Sur)

मार्च 2008 के अंत में आकाशवाणी के वरिष्ठ उद्घोषक प्रदीप शर्मा ने हिन्द-युग्म के पहले स्वरबद्ध एल्बम 'पहला सुर' के इंचार्ज़ सजीव सारथी से बातचीत की, जिसे दिल्ली विश्वविद्यालय के सामुदायिक रेडियो DU-FM पर प्रसारित भी किया गया। हमें उस प्रोग्राम की रिकार्डिंग प्राप्त हो गई तो हमने सोचा कि क्यों ने इंटरनेट के श्रोताओं को भी इसे सुनवाया जाय, ताकि इंटरनेट के श्रोता भी जान पायें कि 'पहला सुर' के पीछे की कहानी क्या है? पूरा कार्यक्रम 52:30 मिनट का है, अतः धैर्य से सुनें और ज़रूर बतायें कि यह कार्यक्रम कैसा लगा?

झटपट सुनने के लिए नीचे ले प्लेयर से सुनें.

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Interview of Sajeev Sarathie on 90.4 DU-FM

Tuesday, April 29, 2008

अनुपमा चौहान का साक्षात्कार (Interview of Anupama Chauhan)

धीरे-धीरे हिन्द-युग्म की आवाज़ें रेडियो के श्रोताओं तक भी पहुँचने लगी हैं। रेडियो सलाम नमस्ते से जुड़े श्री आदित्य प्रकाश जी ने जब युग्म के युवा कवि निखिल आनंद गिरि का काव्य-पाठ बजाया तो बहुत से श्रोताओं ने उन्हें बधाइयाँ दी। इसी का परिणाम है कि कल यानी 28 अप्रैल 2008 की सुबह डैलास, अमेरिका के एफ॰एम॰ रेडियो चैनल 'रेडियो सलाम नमस्ते' पर कवितांजलि कार्यक्रम के दरम्यान श्री आदित्य प्रकाश ने हिन्द-युग्म की युवा कवयित्री अनुपमा चौहान से भी बात की, उनके विचार जाने। अनुपमा जी ने अपने एक गीत 'नाता' को पूरे सुर में गाकर भी सुनाया। इंटरनेट कनैक्शन में आये क्षणिक व्यवधान के कारण पूरे साक्षात्कार में लगभग १५ सेकेण्ड की रिकार्डिंग छूट गई है। आप सुनें और ज़रूर बतायें कि कैसा लगा?

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Kavya-path of Anupama Chauhan on Radio Salaam Namaste

नाता का उच्च गुणवत्ता का पॉडकास्ट यहाँ भी सुना जा सकता है।

Monday, April 21, 2008

चाँद पे होता घर जो मेरा (Chaand Pe Hota Ghar Jo Mera)

बच्चो,

बहुत दिनों से अपनी व्यस्तताओं की वजह से मीनू आंटी ने हमारे लिए कोई उपहार नहीं लाया था। लेकिन बहुत व्यस्त होने के बावजूद भी वो अपने आपको रोक नहीं पाईं और आज एक रिकॉर्डिंग लेकर चली ही आईं। इस बार इन्होंने सीमा सचदेव की कविता 'चाँद पे होता घर जो मेरा' का पॉडकास्ट तैयार किया है। चलिए सुनते हैं।

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Saturday, April 12, 2008

रंजना भाटिया, निखिल आनंद गिरि, सुनीता 'शानू', मनीष वंदेमातरम्, शैलेश भारतवासी की बातें और काव्य-पाठ

हिन्द-युग्म की टीम विश्व पुस्तक मेला २००८ से मधुरतम समय निकाले तो शायद अभिनव शुक्ल से जुड़ी बातें उनमें से एक होंगी। मेले के पहले ही दिन से उनका स्टैंड पर आना, हिन्द-युग्म के वाहकों से इनके हाल-चाल लेना, नाश्ते-पानी का प्रबंध करके जाना आदि भावविभोर कर देते थे। कई कार्यकर्ता तो इसलिए हैरान थे कि उन्हें यह ही नहीं पता चल पाता था कि भला ये महानुभाव कौन हैं? अभिनव शुक्ल जी इतनी आत्मीयता से मिलते थे कि किसी की भी यह पूछने की हिम्मत नहीं होती थी कि भाईसाहब आपका नाम क्या है? अभिनव जी बहुत कम ही समय के लिए हिन्द-युग्म के स्टैंड पर आते थे मगर पूरे माहौल को खुशनुमा कर जाते थे।

मेले के समापन से एक दिन पहले स्टैंड को बंद करने के वक़्त इन्होंने वहाँ उपस्थित सभी साथियों का इंटरव्यू लिया और काव्य-पाठ रिकार्ड किया ताकि रेडियो सलाम नमस्ते के श्रोताओं को सुनवाया जा सके।

आप भी सुनिए रंजना भाटिया 'रंजू', निखिल आनंद गिरि, सुनीता 'शानू' और मनीष वंदेमातरम् की बातें और काव्यपाठ-

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अभिनव जी ने शैलेश भारतवासी के भी विचार जानें। पूरी बातचीत सुनें। यह मेरेकविमित्र से हिन्द-युग्म होने की कहानी है।

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(Interview of Ranjana Bhatia 'Ranju', Nikhil Anand Giri, Sunita Chotia 'Shanoo', Manish Vandemataram and Shailesh Bharatwasi for Radio Salaam Namaste)

Monday, April 7, 2008

निखिल आनंद गिरि का रेडियो सलाम नमस्ते पर काव्य-पाठ

7 अप्रैल 2008 के भारतीय समयानुसार सुबह 7:30 हिन्द-युग्म के सदस्य निखिल आनंद गिरि का जीवंत टेलीफोनिक साक्षात्कार और काव्य-पाठ प्रसारित किया गया। यह प्रसारण डैलास, अमेरिका के एफ॰एम॰ रेडियो स्टेशन 'रेडियो सलाम नमस्ते' से 'कवितांजलि' कार्यक्रम के अंतर्गत किया गया। यह कार्यक्रम वहाँ के स्थानीय समयानुसार प्रत्येक रविवार की रात्रि ९ बजे से १० बजे तक होता है जिसका संचालन श्री आदित्य प्रकाश जी करते हैं। इस कार्यक्रम में दुनिया भर से हिन्दी के लगभग सभी नामचीन मंचिय कवियों ने काव्य-पाठ किया है।

हमने निखिल के साक्षात्कार को रिकार्ड करने का यत्न किया है। डेंटन निवासी युवा कवयित्री रचना श्रीवास्तव ने भी हिन्द-युग्म के युवा कवि का प्रोत्साहन करने के लिए काव्य-पाठ और बातचीत के बाद स्टूडियों फोन किया था, मगर हम उनकी बातों को ठीक से रिकार्ड नहीं कर सके। फिर भी हिन्द-युग्म उन्हें लिखित धन्यवाद ज़रूर देना चाहेगा।

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Kavya-path of Nikhil Anand Giri on Radio Salaam Namaste

Wednesday, April 2, 2008

परियों की शहज़ादी (Pariyon ki Shahzadi)

श्रोताओं की सलाहों पर ध्यान देते हुए, बच्चो, इस बार मीनू आंटी ने बिलकुल नये अंदाज़ में सीमा सचदेव की कविता 'परियों की शहज़ादी' को रिकार्ड किया है। अब वो कितनी सफल हुई हैं, यह तो आपलोग ही बतायेंगे।

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Saturday, March 29, 2008

सूरज (Sooraj)

बच्चो,

बहुत दिन हुए आपकी प्रिय मीनू आंटी की आवाज़ में हम कोई कविता पॉडकास्ट नहीं कर पा रहे थे। लेकिन आपका इंतज़ार खत्म हो गया है। हम इसबार बालकवि ऋषिकेश शिवाजी नलावडे की कविता 'सूरज' लेकर आये हैं। ज़रूर सुनिएगा, अपने दोस्तों को सुनाइएगा और बताइएगा कि कैसा लगा।

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Wednesday, March 19, 2008

गुड़िया रानी बड़ी सयानी (Gudiya Rani Badi Sayani)

अभी २ दिन पहले ही हमने वादा किया था कि बाल-रचनाओं का पॉडकास्ट लेकर हम आते रहेंगे। लीजिए हम फिर हाज़िर हैं। इस बार मीनाक्षी 'मीनू' ने बाल-उद्यान में प्रकाशित केशव कुमार कर्ण की कविता 'गुड़िया रानी बड़ी सयानी' को अपनी आवाज़ दी है।

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Monday, March 17, 2008

तितली परी (Titali Pari)

आज से हिन्द-युग्म अपने आवाज़-मंच पर एक नई शुरूआत कर रहा है। अभी तक हम कहानियों का पॉडकास्ट, कविताओं का पॉडकास्ट, संगीतबद्ध गीतों का पॉडकास्ट प्रकाशित करता रहा था। लेकिन इस बार हम बाल साहित्य का पॉडकास्ट आरम्भ कर रहे हैं। बाल-उद्यान पर प्रकाशित बाल-रचनाओं (कविता, कहानी, ज्ञानवर्धक लेख आदि) को एक-एक करके नियमित रूप से मीनाक्षी 'मीनू' अपनी आवाज़ देंगी।

आज हम बच्चों के लिए पहले पॉडकास्ट के रूप में कवि कुलवंत सिंह की कविता 'तितली परी' का पॉडकास्ट लेकर आये हैं। मीनाक्षी 'मीनू' और हिन्द-युग्म का यह प्रयास आपको कितना पसंद आया, यह तो आपकी प्रतिक्रियाओं से पता चलेगा।

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