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बाल-दिवस - किसके लिए?

कुछ दिनों पूर्व हिन्द-युग्म जब नवम्बर माह की प्रतियोगिता से हमने पंखुड़ी कुमारी की कविता 'बाल दिवस -किसके लिए?' प्रकाशित की थी तो हमारे एक पाठक शैलेश चन्द्र जम्लोकी (मुनि) ने अनुरोध किया था कि इस कविता को सुरों में ढाला जाना चाहिए। हमने स्वरबद्ध तो नहीं किया है लेकिन हाँ, विकास कुमार की आवाज़ में पॉडकास्ट अवश्य कर रहे हैं। नीचे ले प्लेयर से सुनें और ज़रूर बतायें कि कैसा लगा? (प्लेयर पर एक बार क्लिक करें, कंट्रोल सक्रिय करें फ़िर 'प्ले' पर क्लिक करें।) यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंकों से डाऊनलोड कर लें (ऑडियो फ़ाइल तीन अलग-अलग फ़ॉरमेट में है, अपनी सुविधानुसार कोई एक फ़ॉरमेट चुनें) VBR MP3 64Kbps MP3 Ogg Vorbis

तरबूज का भूत

पिछले महीने हिन्द-युग्म ने उद्‌घोषणा की थी कि जल्द ही प्रो॰ राजीव शर्मा की आवाज में उन्हीं की व्यंग्य कविताएँ पॉडकास्ट की जायेंगी। आज हम पहली व्यंग्य कविता लेकर हाज़िर हैं। विपुल शुक्ला के सहयोग से प्रो॰ राजीव शर्मा की व्यंग्य रचना 'तरबूज का भूत' हम तक पहुँच सका है। नीचे ले प्लेयर से सुनें और ज़रूर बतायें कि कैसा लगा? (प्लेयर पर एक बार क्लिक करें, कंट्रोल सक्रिय करें फ़िर 'प्ले' पर क्लिक करें।) यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंकों से डाऊनलोड कर लें (ऑडियो फ़ाइल तीन अलग-अलग फ़ॉरमेट में है, अपनी सुविधानुसार कोई एक फ़ॉरमेट चुनें) VBR MP3 64Kbps MP3 Ogg Vorbis

कहानी का प्रसारण

हिन्द-युग्म बहुत समय से ऐसा विचार कर रहा था कि कहानी-कलश का पॉडकास्ट करे साथ ही साथ महान कहानीकारों की कहानियों का पॉडकास्ट करे। हिन्द-युग्म के दमदार आवाज़ विकास कुमार ने महान कथाओं को पॉडकास्ट का काम 'सुनो कहानी' पर शुरू भी कर दिया है। आज हम इसी दिशा में अगली कोशिश कहानी-कलश की कहानी का पॉडकास्ट प्रसारित करके कर रहे हैं। पहली कहानी है वरिष्ठ कथाकार सूरज प्रकाश की कहानी 'दो जीवन समांतर'। जिसे आवाज़ दिया है श्रीकांत मिश्र 'कांत' और शोभा महेन्द्रू ने। मज़ेदार बात यह है हमने यह ऑडियो भी इंटरनेट के कमाल से बनाया है। जीटॉक पर ही पूरा अभिनय हुआ है। श्रीकांत मिश्र 'कांत' ने चंडीगढ़ से तो शोभा महेन्द्रू ने फ़रीदाबाद से अपनी आवाज़ दी है। (परिचय स्वर- श्वेता मिश्र) नीचे ले प्लेयर से सुनें और ज़रूर बतायें कि कैसा लगा? (प्लेयर पर एक बार क्लिक करें, कंट्रोल सक्रिय करें फ़िर 'प्ले' पर क्लिक करें।) ज़रूर बतायें कि हमारा यह प्रयास कैसा लगा?

वेश्या - Veshya

कवि- रविन्दर टमकोरिया 'व्याकुल' स्वर- विकास कुमार अक्षर- वेश्या स्रोत- हिन्द-युग्म नीचे ले प्लेयर से सुनें और ज़रूर बतायें कि कैसा लगा? (प्लेयर पर एक बार क्लिक करें, कंट्रोल सक्रिय करें फ़िर 'प्ले' पर क्लिक करें।)

वो नर्म सी ( Wo Narm see)

हिन्द-युग्म ने अपना दूसरा संगीतबद्ध गीत भी ज़ारी कर दिया गया है। १९ नवम्बर २००७ को हिन्द-युग्म की उसी पुरानी टीम ने नया गीत श्रोताओं के हवाले कर दिया। पूरा विवरण यहाँ है। कवि- सजीव सारथी स्वर- सुबोध साठे संगीत- ऋषि एस॰ बालाजी अक्षर- वो नर्म सी... स्रोत- हिन्द-युग्म नीचे ले प्लेयर से सुनें और ज़रूर बतायें कि कैसा लगा? (प्लेयर पर एक बार क्लिक करें, कंट्रोल सक्रिय करें फ़िर 'प्ले' पर क्लिक करें।)

सुबह की ताज़गी हो (Subah ki Tazagi ho)

हिन्द-युग्म दिसम्बर के अंत तक ८ गीतों का एक संगीत अल्बम पूरा कर लेना चाहता है। इस दिशा में युग्म ने पहला प्रयास किया है। हिन्द-युग्म का पहला संगीतबद्ध गीत 'सुबह की ताज़गी हो' ( सुबोध साठे द्वारा गाया हुआ, ऋषि एस॰ बालाजी द्वारा संगीतबद्ध तथा सजीव सारथी द्वारा रचित) २७ अक्टूबर को लॉन्च किया गया था। पूरा विवरण और टिप्पणियाँ यहाँ प्रकाशित हैं। नीचे ले प्लेयर से सुनें और ज़रूर बतायें कि कैसा लगा? (प्लेयर पर एक बार क्लिक करें, कंट्रोल सक्रिय करें फ़िर 'प्ले' पर क्लिक करें।) कवि- सजीव सारथी स्वर- सुबोध साठे संगीत- ऋषि एस॰ बालाजी अक्षर- सुबह की ताज़गी स्रोत- हिन्द-युग्म

युग्मवाणी ( Yugmvani )

कई बार शब्दों में परिचय जानना मुश्किल हो जाता है। कभी-कभी लेखक को लगता है कि मैं अपने दिल की बात नहीं बता पा रहा हूँ। इसलिए हिन्द-युग्म के वाहक निखिल आनंद गिरि ने अपने दो सहयोगियो महविश रहमान और रितिका पंत के साथ मिलकर हिन्द-युग्म का परिचय रिकार्ड किया। आप सभी सुनें और हमारे इस यज्ञ में अपनी आहूति दें। यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंकों से डाऊनलोड कर लें (ऑडियो फ़ाइल तीन अलग-अलग फ़ॉरमेट में है, अपनी सुविधानुसार कोई एक फ़ॉरमेट चुनें) VBR MP3 64Kbps MP3 Ogg Vorbis