रविवार, 31 जनवरी 2021

राग भैरवी में "सुन ले बापू ये पैग़ाम" : SWARGOSHTHI – 499 : RAG BHAIRAVI

    




स्वरगोष्ठी – 499 में आज 

देशभक्ति गीतों में शास्त्रीय राग – 4 

"सुन ले बापू ये पैग़ाम", गांधीजी के आदर्शों की धज्जियाँ उड़ाते समाज की दशा, राग भैरवी के सुरों में




“रेडियो प्लेबैक इण्डिया” के साप्ताहिक स्तम्भ "स्वरगोष्ठी" के मंच पर मैं सुजॉय चटर्जी, आप सब संगीत प्रेमियों का हार्दिक स्वागत करता हूँ। मित्रों, जनवरी का महीना देशभक्ति पर्वों का महीना है - 11 जनवरी को लाल बहादुर शास्त्री जी की पुण्यतिथि, 12 जनवरी को मास्टरदा सूर्य सेन का शहीदी दिवस, 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जयन्ती, 26 जनवरी को राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस, 28 जनवरी को लाला लाजपत राय जयन्ती और 30 जनवरी को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि व शहीद दिवस। इन सब को ध्यान में रखते हुए इन दिनों ’स्वरगोष्ठी’ पर जारी है श्रृंखला ’देशभक्ति गीतों में शास्त्रीय राग’। अब तक प्रकाशित इस श्रृंखला की तीन कड़ियों में तीन अलग गीतकारों (कवि प्रदीप, आनन्द बक्शी, साहिर लुधियानवी), तीन अलग संगीतकारों (सी रामचन्द्र, कल्याणजी-आनन्दजी, एन. दत्ता) और तीन अलग गायकों (लता, रफ़ी, आशा) के फ़िल्मी देशभक्ति गीतों की चर्चा हुई है। ये गाने हैं "ऐ मेरे वतन के लोगों", "वतन पे जो फ़िदा होगा" और "सारे जहाँ से अच्छा"। आज इस श्रृंखला की चौथी कड़ी में 30-जनवरी को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर एक ऐसे गीत की चर्चा जिसमें उनके आदर्शों और मूल्यों की धज्जियाँ उड़ाते समाज का चित्रण किया गया है।  यह गीत है राग भैरवी पर आधारित फ़िल्म ’बालक’ का गीत "सुन ले बापू ये पैग़ाम, मेरी चिट्ठी तेरे नाम"। गीतकार भरत व्यास, संगीतकार दत्ताराम, गायिका सुमन कल्याणपुर। साथ ही आनन्द लीजिए पंडित रामभाउ बीजापुरे का हारमोनियम पर बजाया राग भैरवी।


शंकर-जयकिशन
के पसन्दीदा रागों में एक महत्वपूर्ण राग रहा है भैरवी। उनके सहायक रह चुके दत्ताराम जब स्वतंत्र रूप से संगीत देने लगे, तब उन्होंने भी राग भैरवी का अपने गीतों में ख़ूब प्रयोग किया। 60 के दशक के अन्त तक आते-आते फ़िल्म संगीत की धारा काफ़ी बदल चुकी थी। पाश्चात्य संगीत काफ़ी हद तक इसमें अपने लिए जगह बना चुका था। 50-60 के दशकों के दिग्गज संगीतकार ढलान पर थे, और कल्याणजी-आनन्दजी, लक्ष्मीकान्त-प्यारेलाल और राहुल देव बर्मन के गाने सर चढ़ कर बोलने लगे थे। ऐसे में ना केवल पिछले दौर के बड़े संगीतकार पीछे लुढ़कते गए बल्कि उस दौर के अन्य कमचर्चित संगीतकारों को भी बी और सी-ग्रेड फ़िल्मों से ही गुज़ारा करना पड़ा। और इनमें एक नाम दत्ताराम का है। 1969 में ’कला मण्डल’ के बैनर तले बी. के. आदर्श निर्देशित एक कम बजट की फ़िल्म आयी थी ’बालक’, जिसमें ’बालक’ की भूमिका में परदे पर नज़र आयीं बेबी सारिका। ये वोही बेबी सारिका हैं जो आगे चल कर सारिका के नाम से नायिका बनीं। पर फ़िल्म में उनका किरदार एक बालक का होने की वजह से उनका नाम फ़िल्म की नामावली में बेबी सारिका के बजाय मास्टर सूरज लिखा गया। फ़िल्म के गीतकार थे पंडित भरत व्यास और संगीतकार दत्ताराम। फ़िल्म में बस चार ही गीत थे, चारों एकल गीत और चार अलग-अलग आवाज़ों में - मोहम्मद रफ़ी, आशा भोसले, सुमन कल्याणपुर और शान्ति माथुर। इनमें से जो देशभक्ति गीत है, वह सुमन कल्याणपुर की आवाज़ में है। फ़िल्म के ना चलने से इन गीतों पर किसी का ख़ास ध्यान नहीं गया, पर प्रस्तुत गीत बड़ा प्रभावशाली गीत है, जिसके बोल है "सुन ले बापू ये पैग़ाम, मेरी चिट्ठी तेरे नाम"। गीत में तीन अन्तरे हैं जिनमें वर्तमान समाज की दयनीय स्थिति का वर्णन किया गया है। बालक महात्मा गांधी जी को पत्र लिख कर दु:ख व्यक्त कर रहा है कि किस तरह से उनके मूल्यों और आदर्शों की दज्जियाँ उड़ायी जा रही हैं। काला धन, काला बाज़ार, रिश्वतखोरी, हिंसा, घेराव, प्रान्तीयता, विदेशी चीज़ों में आसक्ति, चोरी-जमाखोरी, नेताओं की अनैतिकता, बच्चों का तोड़-फोड़, युवाओं का नशे में मत्त होना, इन सब का ज़िक्र है इस गीत में। तीसरे अन्तरे का समापन बड़ा सशक्त है जब गीतकार इस बात की ओर इशारा करते हैं कि एक तरफ़ जहाँ बापू के आदर्शों को ख़ाक में मिलाया जा रहा हैं, वहीं दूसरी तरफ़ उनके समाधि स्थल राजघाट में सुबह-शाम फूल चढ़ाये जा रहे हैं। इस विरोधाभास को बड़ी सुन्दरता से व्यक्त किया गया है गीत में।

दत्ताराम ने "सुन ले बापू ये पैग़ाम" को राग भैरवी के सुरों में ढाला है, जिसके कोमल ऋषभ स्वर में करुणा, दया और संवेदनशीलता का भाव है तो कोमल गान्धार स्वर में आशा का भाव महसूस होता है। कोमल धैवत में जागृति भाव तो कोमल निषाद में स्फूर्ति का सृजन होता है। और भैरवी का शुद्ध मध्यम इन सभी भावों को गाम्भीर्य प्रदान करता है। इस तरह से प्रस्तुत गीत का जो भाव है, उसे और अधिक प्रभावशाली बनाने में भैरवी का महत्वपूर्ण योगदान है। कहरवा ताल में निबद्ध इस गीत में दत्ताराम ने साज़ों की निरर्थक भीड़ नहीं लगायी है, बल्कि एक बहुत ही सादे-सरल कम्पोज़िशन के माध्यम से भरत व्यास के प्रभावशाली शब्दों को प्रस्तुत किया है ताकि भारी-भरकम वाद्यों में ये महत्वपूर्ण बोल कहीं खो ना जाएँ। सुमन कल्याणपुर ने बहुत सी फ़िल्मों में बाल-कलाकारों के लिए प्लेबैक किया है और यह गीत भी उन्हीं में से एक है। तो लीजिए अब आप यह गीत सुनिए।





गीत : “सुन ले बापू ये पैग़ाम...” : फ़िल्म: बालक, गायिका: सुमन कल्याणपुर 



पंडित रामभाउ बीजापुरे
अभी आपने जो गीत सुना, उसमें राग भैरवी के स्वर लगे हैं। स्वरों के माध्यम से प्रत्येक रस का सृजन करने में राग भैरवी सर्वाधिक उपयुक्त राग है। संगीतज्ञ इसे ‘सदा सुहागिन राग’ तथा ‘सदाबहार’ राग के विशेषण से अलंकृत करते हैं। सम्पूर्ण जाति का यह राग भैरवी थाट का आश्रय राग माना जाता है। राग भैरवी में ऋषभ, गान्धार, धैवत और निषाद सभी कोमल स्वरों का प्रयोग किया जाता है। इस राग का वादी स्वर मध्यम और संवादी स्वर षडज होता है। राग भैरवी के आरोह स्वर हैं, सा, रे॒ (कोमल), ग॒ (कोमल), म, प, ध॒ (कोमल), नि॒ (कोमल), सां  तथा अवरोह के स्वर, सां, नि॒ (कोमल), ध॒ (कोमल), प, म ग (कोमल), रे॒ (कोमल), सा  होते हैं। यूँ तो इस राग के गायन-वादन का समय प्रातःकाल, सन्धिप्रकाश बेला है, किन्तु आमतौर पर इसका गायन-वादन किसी संगीत-सभा अथवा समारोह के अन्त में किये जाने की परम्परा बन गई है। राग भैरवी मानसिक शान्ति प्रदान करता है। इसकी अनुपस्थिति से मनुष्य डिप्रेशन, उलझन, तनाव जैसी असामान्य मनःस्थितियों का शिकार हो सकता है। प्रातःकाल सूर्योदय का परिवेश परमशान्ति का सूचक होता है। ऐसी स्थिति में भैरवी के कोमल स्वर- ऋषभ, गान्धार, धैवत और निषाद, मस्तिष्क की संवेदना तंत्र को सहज ढंग से ग्राह्य होते है। इस राग के गायन-वादन का सर्वाधिक उपयुक्त समय प्रातःकाल होता है। भैरवी के स्वरों की सार्थक अनुभूति कराने के लिए अब हम प्रस्तुत कर रहे हैं पंडित रामभाउ बीजापुरे द्वारा हारमोनियम पर बजाया हुआ राग भैरवी। तबले पर उनके साथ संगत की है नारायण गणचारी ने और तानपुरे पर हैं श्रीधर कुलकर्णी। इस रचना के माध्यम से राग भैरवी के मिठास का अनुभव कीजिए और मुझे आज के इस अंक को यहीं विराम देने की अनुमति दीजिए। ’स्वरगोष्ठी’ का अगला अंक 500-वाँ अंक है। यह एक विशेषांक होगा जिसमें हम वर्ष 2020 के महाविजेताओं की घोषणा के साथ-साथ उनकी प्रस्तुतियाँ शामिल करेंगे। ’देशभक्ति गीतों में शास्त्रीय राग’ श्रृंखला 501-वीं कड़ी से जारी रहेगी।




राग भैरवी : हारमोनियम : कलाकार - पंडित रामभाउ बीजापुरे


संगीत पहेली के महाविजेताओं के लिए सूचना 

वर्ष 2020 में ’स्वरगोष्ठी’ में पूछे गए पहेलियों में भाग लेकर पाँच प्रतियोगी महाविजेता बने हैं। स्वर्गीय कृष्णमोहन जी के निधन के बाद हमने उन पाँच महाविजेताओं की पहचान तो कर ली है जिसकी घोषणा हम अपने 500-वें अंक में करेंगे जो एक विशेषांक होगा महाविजेताओं की प्रस्तुतियों से सजा हुआ। हमने पाँचों महाविजेताओ को ई-मेल के माध्यम से सूचित किया है कि उन्होंने अपनी जो भी प्रस्तुति या मनपसन्द रचना कृष्णमोहन जी को भेजी थी, उन्हें कृपया एक बार फिर से हमें प्रेषित करें soojoi_india@yahoo.co.in के पते पर ताकि हम उन्हें 500-वें अंक में शामिल कर सकें। इस राह में हमें अब तक केवल दो प्रतियोगियों से जवाब मिला है। बाकी तीन प्रतियोगियों से सविनय निवेदन है कि शीघ्रातिशीघ्र हमें वह ईमेल प्रेषित कर दें।

संवाद

मित्रों, इन दिनों हम सब भारतवासी, प्रत्येक नागरिक को कोरोना वायरस से मुक्त करने के लिए प्रयत्नशील हैं। देश के कुछ स्थानों पर अचानक इस वायरस का प्रकोप इन दिनों बढ़ गया है। अप सब सतर्कता बरतें। संक्रमित होने वालों के स्वस्थ होने का प्रतिशत निरन्तर बढ़ रहा है। परन्तु अभी भी हमें पर्याप्त सतर्कता बरतनी है। विश्वास कीजिए, हमारे इस सतर्कता अभियान से कोरोना वायरस पराजित होगा। आप सब से अनुरोध है कि प्रत्येक स्थिति में चिकित्सकीय और शासकीय निर्देशों का पालन करें और अपने घर में सुरक्षित रहें। इस बीच शास्त्रीय संगीत का श्रवण करें और अनेक प्रकार के मानसिक और शारीरिक व्याधियों से स्वयं को मुक्त रखें। विद्वानों ने इसे “नाद योग पद्धति” कहा है। “स्वरगोष्ठी” की नई-पुरानी श्रृंखलाएँ सुने और पढ़ें। साथ ही अपनी प्रतिक्रिया से हमें अवगत भी कराएँ। 


अपनी बात

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कृष्णमोहन मिश्र जी की पुण्य स्मृति को समर्पित
प्रस्तुति : सुजॉय चटर्जी   

रेडियो प्लेबैक इण्डिया 
राग भैरवी में "सुन ले बापू ये पैग़ाम" : SWARGOSHTHI – 499 : RAG BHAIRAVI: 31 जनवरी, 2021



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