Wednesday, February 13, 2013

राग बसंत बहार - एक चर्चा संज्ञा टंडन के साथ

प्लेबैक इंडिया ब्रोडकास्ट 

राग बसंत और बसंत बहार 

स्वर एवं प्रस्तुति - संज्ञा टंडन 

स्क्रिप्ट - कृष्णमोहन मिश्र 



Monday, February 11, 2013

एनी बडी कैन डांस - इसका संगीत है ही नाचने के लिए

प्लेबैक वाणी -33 -संगीत समीक्षा - ए बी सी डी - एनी बडी कैन डांस



विश्व सिनेमा में डांस म्युसिकल्स की पारंपरिक श्रृखलाएं रहीं हैं जो बेहद कामियाब भी साबित हुई है. भारत में इस ट्रेंड को बहुत अधिक परखा नहीं गया कभी. पर अब रेमो डीसूजा प्रभु देवा के साथ मिलकर अपने इस ख्वाब रुपी फिल्म को अमली जामा पहना चुके हैं, फिल्म थ्री डी में है इसमें देश के सबसे उन्दा डांसर्स दर्शकों को एक साथ नज़र आयेंगें. चलिए आज बात करते हैं इसी संगीतमय फिल्म के संगीत की, जिसे संवारा है सचिन जिगर ने.

शंकर महादेवन और विशाल दादलानी के स्वरों में शभु सुतया से बेहतर और क्या शुरुआत हो सकती थी एल्बम की. पारंपरिक ढोल रिदम के साथ ये नृत्य प्रार्थना कहीं कहीं शिव के नटराज रूप की भी झलक देती है. गीत के अंतिम हिस्से में शंकर अपने चिर परिचित अंदाज़ में श्रोताओं का दिल जीत ले जाते हैं.

बेजुबान एक नृत्य प्रेमी की भावनाओं को स्वर देता गीत है, जिसमें सफलता से दूर रहने की कुंठा और हर हाल में कामियाब होने की लगन दोनों बखूबी झलकते हैं. मोहित चौहान के साथ ढेरों अन्य गायक भी हैं पर मोहित की आवाज़ ही इस गीत की जान है. गीतकारा प्रीती पंचाल की भी आवाज़ है गीत में. एक शानदार ट्रेक जो लंबे समय तक श्रोताओं को याद रहेगा.

अगला गीत सायिको रे एक मस्त अंदाज़ का गीत है. दक्षिण भारतीय शहनाई के फ्लेवर में मिका के पंजाबी तडके का जबरदस्त कोकटेल है ये गीत. उदित नारायण बहुत दिनों बाद फॉर्म में सुनाई दिये हैं. बीच बीच में रैप और संवाद भी दिलचस्प हैं.

अनुष्का मनचंदा की आवाज़ में है मन बसियो संवारियो. गायिकी को छोड़ दिया जाए तो गीत कुछ खास प्रभावी नहीं है. शब्द भी सामान्य हैं.

गायकों की एक फ़ौज है अगले गीत चंदू की गर्लफ्रेंड में. ये गीत देखने में बढ़िया लग सकता है पर सुनने में कुछ खास असरदायक नहीं है. इस ढर्रे के बहुत से गीत बन चुके हैं और ये गीत विशेष कुछ खास पेश नहीं करता.

माधव कृष्णा की दमदार आवाज़ में अगला गीत दुहाई है बेहद जबरदस्त है, बेजुबान की ही तरह ये गीत भी एक कलाकार के सफर और सफलता की अंधी दौड में आती धूप छांव को सहेजता से रेखांकित करता है ये नगमा. शब्द और गायिकी में भी गीत अन्य गीतों पर भारी है, एल्बम का एक बहतरीन ट्रेक.

अपने बीट्स और तेज रिदम के कारण अगला गीत सॉरी सॉरी सुनने लायक बन गया है. शब्द दिलचस्प हैं और पंजाबी अंदाज़ का संगीत संयोजन गीत को लोकप्रिय बना सकता है.

सूरज जगन की आवाज़ है कर जा रे या मर जा रे में. शायद ये फिल्म का क्लाईमेक्स गीत है. बहुत ऊर्जा है गीत में. यक़ीनन ये गीत परदे पर बहुत रंग जामने वाला है. गा गा गा गणपति को हार्ड कोर ने एक सोलिड बेस दिया है. एक और धमाकेदार गीत. कुल १० गीतों से सजी इस संगीतमय एल्बम को रेडियो प्लेबैक दे रहा है ४.१ की रेटिंग.                   

यदि आप इस समीक्षा को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाऊनलोड कर लें:

Sunday, February 10, 2013

पाँचवें प्रहर के कुछ आकर्षक राग



स्वरगोष्ठी – 107 में आज
राग और प्रहर – 5

शाम के अन्धकार को प्रकाशित करते राग


‘स्वरगोष्ठी’ के 107वें अंक में, मैं कृष्णमोहन मिश्र आप सब संगीत-प्रेमियों का इस मंच पर हार्दिक स्वागत करता हूँ। मित्रों, पिछले रविवार को इस स्तम्भ का अगला अंक मैं अपनी पारिवारिक व्यस्तता के कारण प्रस्तुत नहीं कर सका था। आज के अंक में हम प्रस्तुत कर रहे हैं, पाँचवें प्रहर के कुछ मधुर रागों में चुनी हुई रचनाएँ। तीन-तीन घण्टों की अवधि में विभाजित दिन और रात के चौबीस घण्टों को आठ प्रहरों के रूप में पहचाना जाता है। इनमें पाँचवाँ प्रहर अर्थात रात्रि का पहला प्रहर, सूर्यास्त के बाद से लेकर रात्रि लगभग नौ बजे तक की अवधि को माना जाता है। इस प्रहर में गाये-बजाए जाने वाले राग गहराते अन्धकार में प्रकाश के विस्तार की अनुभूति कराते हैं। आज के अंक में हम ऐसे ही कुछ रागों पर आपसे चर्चा करेंगे।

पाँचवें प्रहर के रागों में आज हम सबसे पहले राग कामोद पर चर्चा करेंगे। कल्याण थाट और कल्याण अंग से संचालित होने वाले इस राग को कुछ विद्वान काफी थाट के अंतर्गत भी मानते हैं। औड़व-सम्पूर्ण जाति के इस राग के आरोह में गान्धार और निषाद स्वर का प्रयोग नहीं किया जाता। अवरोह में दोनों मध्यम का और शेष सभी शुद्ध स्वरों का प्रयोग किया जाता है। इस राग का वादी स्वर ऋषभ और संवादी स्वर पंचम होता है। राग वर्गीकरण के प्राचीन सिद्धान्तों के अनुसार राग कामोद को राग दीपक की पत्नी माना जाता है। अब आपको इस राग पर आधारित एक फिल्मी गीत सुनवाते हैं। सुप्रसिद्ध उपन्यासकार भगवतीचरण वर्मा की कालजयी कृति ‘चित्रलेखा’ पर 1964 में इसी नाम से फिल्म का निर्माण हुआ था। फिल्म के संगीतकार रोशन थे। उन्होने फिल्म का एक गीत- ‘ए री जाने ना दूँगी...’ राग कामोद पर आधारित स्वरबद्ध किया था। सितारखानी ताल में निबद्ध यह गीत लता मंगेशकर के स्वरों में श्रृंगार रस की सार्थक अनुभूति कराता है। लीजिए, आप यह मोहक गीत सुनिए।


राग कामोद : फिल्म चित्रलेखा : ‘ए री जाने ना दूँगी...’ : लता मंगेशकर 



पाँचवें प्रहर में गाये-बजाए जाने वाले रागों में एक सदाबहार राग है- ‘पूरिया धनाश्री’। यह राग पूर्वी थाट के अन्तर्गत माना जाता है। सम्पूर्ण-सम्पूर्ण जाति, अर्थात आरोह-अवरोह में सात-सात स्वरों के इस राग में तीव्र मध्यम, कोमल ऋषभ और कोमल धैवत सहित शेष शुद्ध स्वरों का प्रयोग किया जाता है। इस राग का वादी स्वर पंचम और संवादी स्वर षडज होता है। राग पूरिया धनाश्री में लगने वाले स्वर राग श्री में भी प्रयोग किए जाते हैं, किन्तु इसका चलन भिन्न होता है। आपको राग पूरिया धनाश्री का आकर्षक उदाहरण सुनवाने के लिए आज हमने सरोद वाद्य चुना है। भरपूर गमक से युक्त इस वाद्य पर राग पूरिया धनाश्री में तीनताल की एक मोहक रचना प्रस्तुत कर रहे हैं, विश्वविख्यात सरोद-वादक उस्ताद अमजद अली खाँ। यह रचना उनके पिता और गुरु उस्ताद हाफ़िज़ अली खाँ की है।


राग पूरिया धनाश्री : सरोद पर मध्य लय तीनताल की गत : उस्ताद अमजद अली खाँ



एक अत्यन्त प्रचलित राग है भूपाली, जिसे राग भूप भी कहा जाता है। ‘स्वरगोष्ठी’ के आज के अंक में हम पाँचवें प्रहर के कुछ रागों पर चर्चा कर रहे हैं। भूपाली इस प्रहर का एक प्रमुख राग है। यह राग कर्नाटक संगीत के राग मोहनम् के समतुल्य है। कल्याण थाट के अन्तर्गत माना जाने वाला यह राग औड़व-औड़व जाति का होता है। इसमें मध्यम और निषाद स्वर का प्रयोग नहीं किया जाता। शेष सभी स्वर शुद्ध प्रयोग होते हैं। राग भूपाली का वादी स्वर गान्धार और संवादी स्वर धैवत होता है। यह पूर्वांग प्रधान राग है। राग देशकार में भी इन्हीं स्वरों का प्रयोग होता है, किन्तु उत्तरांग प्रधान होने के कारण यह भूपाली से अलग हो जाता है। आज हम आपको राग भूपाली में सितार वादन सुनवाते हैं। जाने-माने सितारनवाज उस्ताद शाहिद परवेज़ राग भूपाली में सितार पर तीनताल की गत और झाला प्रस्तुत कर रहे हैं। तबला संगति वाराणसी के रामकुमार मिश्र ने की है।


राग भूपाली : सितार पर तीनताल की गत और झाला : उस्ताद शाहिद परवेज़ 



आज के इस अंक में हम पाँचवें प्रहर अर्थात रात्रि के पहले प्रहर के कुछ रागों की चर्चा कर रहे हैं। आजकल संगीत की अधिकतर सभाओं के आयोजन का यही समय होता है। इसी कारण इस प्रहर के राग संगीत-प्रेमियों के बीच अधिक लोकप्रिय हैं। ऐसा ही एक अत्यन्त लोकप्रिय राग है, यमन। प्राचीन संगीत के ग्रन्थों में इस राग का नाम कल्याण कहा गया है। इसका यमन नाम मुगल शासनकाल में प्रचलित हुआ। कर्नाटक संगीत का राग कल्याणी इसके समतुल्य है। इसे कल्याण थाट का आश्रय राग माना गया है। सम्पूर्ण-सम्पूर्ण जाति के इस राग में मध्यम स्वर तीव्र और शेष सभी स्वर शुद्ध लगते हैं। इस राग का वादी स्वर गान्धार और संवादी स्वर निषाद होता है। इस राग के अवरोह में यदि दोनों मध्यम स्वरों का प्रयोग किया जाए तो यह राग यमन कल्याण कहलाता है। यदि आरोह-अवरोह में तीव्र मध्यम के स्थान पर शुद्ध मध्यम का प्रयोग का दिया जाए तो यह राग बिलावल तथा यदि शुद्ध निषाद के स्थान पर कोमल निषाद का प्रयोग कर दिया जाए तो यह राग वाचस्पति की अनुभूति कराने लगता है। आज इस राग में हम आपको एक अत्यन्त आकर्षक तराना सुनवाते हैं, जिस प्रस्तुत कर रही हैं, विदुषी मालिनी राजुरकर। यह तराना द्रुत एकताल में निबद्ध है। आप यह तराना सुनिए और मुझे आज के इस अंक को यहीं विराम लेने की अनुमति दीजिए।


राग यमन : द्रुत एकताल का तराना : विदुषी मालिनी राजुरकर



आज की पहेली

‘स्वरगोष्ठी’ की 107वीं संगीत पहेली में हम आपको एक राग आधारित फिल्मी गीत का अंश सुनवा रहे है। इसे सुन कर आपको दो प्रश्नों के उत्तर देने हैं। ‘स्वरगोष्ठी’ के 110वें अंक तक जिस प्रतिभागी के सर्वाधिक अंक होंगे, उन्हें इस श्रृंखला का विजेता घोषित किया जाएगा।



1 - संगीत के इस अंश को सुन कर पहचानिए कि यह गीत किस राग पर आधारित है?

2 – यह गीत किस ताल में निबद्ध है?

आप अपने उत्तर केवल swargoshthi@gmail.com पर ही शनिवार मध्यरात्रि तक भेजें। comments में दिये गए उत्तर मान्य नहीं होंगे। विजेता का नाम हम ‘स्वरगोष्ठी’ के 109वें अंक में प्रकाशित करेंगे। इस अंक में प्रस्तुत गीत-संगीत, राग, अथवा कलासाधक के बारे में यदि आप कोई जानकारी या अपने किसी अनुभव को हम सबके बीच बाँटना चाहते हैं तो हम आपका इस संगोष्ठी में स्वागत करते हैं। आप पृष्ठ के नीचे दिये गए comments के माध्यम से अथवा radioplaybackindia@live.com पर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं।

पिछली पहेली के विजेता

‘स्वरगोष्ठी’ के 105वें अंक में हमने आपको फिल्म ‘हमदर्द’ से राग गौड़ सारंग पर आधारित एक गीत का अंश सुनवा कर आपसे दो प्रश्न पूछे थे। पहले प्रश्न का सही उत्तर है- राग गौड़ सारंग और दूसरे प्रश्न का सही उत्तर है- तीनताल। दोनों प्रश्नो के सही उत्तर लखनऊ के प्रकाश गोविन्द, बैंगलुरु के पंकज मुकेश, जौनपुर के डॉ. पी.के. त्रिपाठी और मिनिसोटा, अमेरिका से दिनेश कृष्णजोइस ने दिया है। चारो प्रतिभागियों को ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ की ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ।

झरोखा अगले अंक का

मित्रों, ‘स्वरगोष्ठी’ पर इन दिनों ‘राग और प्रहर’ शीर्षक से लघु श्रृंखला जारी है। श्रृंखला के आगामी अंक में हम आपके लिए दिन के छठें प्रहर अर्थात रात्रि के दूसरे प्रहर में गाये-बजाए जाने वाले कुछ आकर्षक रागों की प्रस्तुतियाँ लेकर उपस्थित होंगे। आप हमारे आगामी अंकों के लिए आठवें प्रहर तक के प्रचलित रागों और इन रागों में निबद्ध अपनी प्रिय रचनाओं की फरमाइश भी कर सकते हैं। हम आपके सुझावों और फरमाइशों को पूरा सम्मान देंगे। अगले अंक में रविवार को प्रातः 9-30 ‘स्वरगोष्ठी’ के इस मंच पर आप सब संगीत-रसिकों की हम प्रतीक्षा करेंगे। 

कृष्णमोहन मिश्र 


Saturday, February 9, 2013

'सिने पहेली' में आज गीत अपना धुन पराई


9 फ़रवरी, 2013
सिने-पहेली - 58  में आज 

पहचानिये कुछ प्रेरित गीतों को


'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के सभी पाठकों और श्रोताओं को सुजॉय चटर्जी का प्यार भरा नमस्कार। दोस्तों, पिछले दिनों मैं चण्डीगढ़ से नोएडा स्थानान्तरित हुआ हूँ और नया आलम ऐसा है कि दफ़्तर की व्यस्तता कुछ हद से ज़्यादा ही बढ़ गई है। जैसा कि शायद आज हर निजी कंपनी में होता होगा कि काम का दबाव बहुत ज़्यादा है, जो व्यक्तिगत जीवन पर असर डाल रही है। बच्चे के साथ खेलने का समय नहीं मिलता, पत्नी से दो बातें कहने बैठें तो फ़ोन की घण्टी बज उठती है और लैपटॉप ऑन करके दफ़्तर के काम में लग जाना पड़ता है। इस भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में जहाँ थकना मना है, शुकर है 'सिने पहेली' मेरे साथ है जिसे आयोजित करते हुए मेरी सारी थकान दूर हो जाती है। आइए शुरू करें आज की 'सिने पहेली'।:


आज की पहेली : अरे दीवानों, इन्हे पहचानो



नीचे पाँच विदेशी गीतों के ऑडियो-विडियो दिये गये हैं। क्या आप बता सकते हैं कि इनकी धुनों से प्रेरित हिन्दी फ़िल्मी गीत कौन कौन से हैं? यानी आपको हर विदेशी गीत के लिए एक हिन्दी फ़िल्मी गीत बताने है जिसकी धुन उस विदेशी धुन से प्रेरित है। हर सही जवाब के लिए 2 अंक।











जवाब भेजने का तरीका


उपर पूछे गए सवालों के जवाब एक ही ई-मेल में टाइप करके cine.paheli@yahoo.com के पते पर भेजें। 'टिप्पणी' में जवाब कतई न लिखें, वो मान्य नहीं होंगे। ईमेल के सब्जेक्ट लाइन में "Cine Paheli # 58" अवश्य लिखें, और अंत में अपना नाम व स्थान लिखें। आपका ईमेल हमें बृहस्पतिवार 14 फ़रवरी शाम 5 बजे तक अवश्य मिल जाने चाहिए। इसके बाद प्राप्त होने वाली प्रविष्टियों को शामिल नहीं किया जाएगा।



पिछली पहेली का हल

दोस्तों, "ताजमहल" शब्दों से सजे कई सारे गीत आप सब ने सुझाये हैं, पूरी फ़ेहरिस्त मैं अगले अंक में शामिल करूँगा।


पिछली पहेली का परिणाम

इस बार 'सिने पहेली' में कुल 5 प्रतियोगियों ने भाग लिया। सबसे पहली 100% सही जवाब भेज कर इस बार 'सरताज प्रतियोगी' बने हैं लखनऊ के श्री चन्द्रकान्त दीक्षित। चन्द्रकान्त जी, बहुत बहुत बधाई आपको। आइए अब नज़र डालते हैं इस सेगमेण्ट के अब तक के सम्मिलित स्कोरकार्ड पर।




नये प्रतियोगियों का आह्वान

नये प्रतियोगी, जो इस मज़ेदार खेल से जुड़ना चाहते हैं, उनके लिए हम यह बता दें कि अभी भी देर नहीं हुई है। इस प्रतियोगिता के नियम कुछ ऐसे हैं कि किसी भी समय जुड़ने वाले प्रतियोगी के लिए भी पूरा-पूरा मौका है महाविजेता बनने का। अगले सप्ताह से नया सेगमेण्ट शुरू हो रहा है, इसलिए नये खिलाड़ियों का आज हम एक बार फिर आह्वान करते हैं। अपने मित्रों, दफ़्तर के साथी, और रिश्तेदारों को 'सिने पहेली' के बारे में बताएँ और इसमें भाग लेने का परामर्श दें। नियमित रूप से इस प्रतियोगिता में भाग लेकर महाविजेता बनने पर आपके नाम हो सकता है 5000 रुपये का नगद इनाम।


कैसे बना जाए 'सिने पहेली महाविजेता?

1. सिने पहेली प्रतियोगिता में होंगे कुल 100 एपिसोड्स। इन 100 एपिसोड्स को 10 सेगमेण्ट्स में बाँटा गया है। अर्थात्, हर सेगमेण्ट में होंगे 10 एपिसोड्स।

2. प्रत्येक सेगमेण्ट में प्रत्येक खिलाड़ी के 10 एपिसोड्स के अंक जुड़े जायेंगे, और सर्वाधिक अंक पाने वाले तीन खिलाड़ियों को सेगमेण्ट विजेताओं के रूप में चुन लिया जाएगा।

3. इन तीन विजेताओं के नाम दर्ज हो जायेंगे 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में। सेगमेण्ट में प्रथम स्थान पाने वाले को 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में 3 अंक, द्वितीय स्थान पाने वाले को 2 अंक, और तृतीय स्थान पाने वाले को 1 अंक दिया जायेगा। पाँचवें सेगमेण्ट की समाप्ति तक 'महाविजेता स्कोरकार्ड' यह रहा...





4. 10 सेगमेण्ट पूरे होने पर 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में दर्ज खिलाड़ियों में सर्वोच्च पाँच खिलाड़ियों में होगा एक ही एपिसोड का एक महा-मुकाबला, यानी 'सिने पहेली' का फ़ाइनल मैच। इसमें पूछे जायेंगे कुछ बेहद मुश्किल सवाल, और इसी फ़ाइनल मैच के आधार पर घोषित होगा 'सिने पहेली महाविजेता' का नाम। महाविजेता को पुरस्कार स्वरूप नकद 5000 रुपये दिए जायेंगे, तथा द्वितीय व तृतीय स्थान पाने वालों को दिए जायेंगे सांत्वना पुरस्कार।

'सिने पहेली' को और भी ज़्यादा मज़ेदार बनाने के लिए अगर आपके पास भी कोई सुझाव है तो 'सिने पहेली' के ईमेल आइडी पर अवश्य लिखें। आप सब भाग लेते रहिए, इस प्रतियोगिता का आनन्द लेते रहिए, क्योंकि महाविजेता बनने की लड़ाई अभी बहुत लम्बी है। आज के एपिसोड से जुड़ने वाले प्रतियोगियों के लिए भी 100% सम्भावना है महाविजेता बनने का। इसलिए मन लगाकर और नियमित रूप से (बिना किसी एपिसोड को मिस किए) सुलझाते रहिए हमारी सिने-पहेली, करते रहिए यह सिने मंथन, आज के लिए मुझे अनुमति दीजिए, अगले सप्ताह फिर मुलाक़ात होगी, नमस्कार। 

Thursday, February 7, 2013

राग चारुकेशी - एक चर्चा संज्ञा टंडन के साथ

प्लेबैक इंडिया ब्रोडकास्ट 

राग चारुकेशी 

स्वर एवं प्रस्तुति : संज्ञा टंडन 

स्क्रिप्ट - कृष्णमोहन मिश्र  


Tuesday, February 5, 2013

ओ हेनरी की इबादत (अ सर्विस ऑफ़ लव)

'बोलती कहानियाँ' स्तम्भ के अंतर्गत हम आपको सुनवा रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने अनुराग शर्मा की आवाज़ में डा. अमर कुमार की लघुकथा ""अपनों ने लूटा" का पॉडकास्ट सुना था। आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं प्राख्यात अमेरिकी कथाकार ओ हेनरी की अंग्रेज़ी कहानी "A service of love" का हिन्दी अनुवाद "इबादत", अर्चना चावजी, अनुभव प्रिय और सलिल वर्मा की आवाज़ में। हिन्दी अनुवाद अनुभव प्रिय का है और प्रस्तुति को संगीत से संवारा है पद्मसिंह ने।

कहानी का कुल प्रसारण समय 13 मिनट 42 सेकंड है। आप भी सुनें और अपने मित्रों और परिचितों को भी सुनाएँ  और हमें यह भी बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

 यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।

“जब बिना कालर का चोर पकड़ा जाता हैं, तो उसे सबसे दुराचारी और दुष्ट कहा जाता है।”
ओ हेनरी

हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी कहानी

"अच्छा, जल्दी से हाथ मुँह धो लो, मैं खाना लगती हूँ।"
(ओ हेनरी की "इबादत" से एक अंश)

नीचे के प्लेयर से सुनें.
 
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VBR MP3

 #Fifth Story, Ibadat  O Henry/Hindi Audio Book/2013/5. Voice: Archana Chaoji 

Monday, February 4, 2013

तीन कहानियाँ - तीन डेविड - कुछ भिन्न संगीत

प्लेबैक वाणी -32 -संगीत समीक्षा - डेविड  



नए संगीत को परखने की हमारी इस कोशिश में आपका फिर एक बार से स्वागत है. आज जिस एल्बम की हम चर्चा कर रहे हैं वो है बिजॉय ‘शैतान’ नाम्बियार की नई फिल्म ‘डेविड’ के संगीत से सजी. एल्बम में ८ संगीतकारों और ११ गीतकारों ने अपना योगदान दिया है. चलिए देखें इन युवा संगीत कर्मियों ने किन किन रंगों से सजाया है ‘डेविड’ को.

एल्बम खुलता है रौक बैंड ब्रह्मफुत्रा के एक शानदार ट्रेक के साथ. ‘गुम हुए’ न सिर्फ अपनी गायिका और धुन के लिए वरन अपने शब्दों के कारण भी खास है. ‘ढूंढेगे उन्हीं राहों को, सुकूँ भरी छांओं को.....वो रास्ते जहाँ खोये थे हम...’ यक़ीनन श्रोताओं को कहीं दूर अपनी यादों में ले जाते हैं. ये बैंड मार्क फुल्गडो और गौरव गोडखिंडी से मिलकर बनता है और इस गीत में अपनी आवाज़ भरी है सिद्धार्थ बसरूर ने. यक़ीनन सिद्धार्थ भी एक जबरदस्त टेलेंट हैं, जिनसे भविष्य में भी श्रोता उम्मीद लगा सकते हैं.

८० के दशक से श्रोताओं के दिलों पर छाया हुआ एक गीत है ‘दमा दम मस्त कलंदर’ जिसे जाने कितने गायकों ने अपने अपने अंदाज़ में श्रोताओं तक पहुँचाया है. इस कालजयी गीत का नशा आज भी वैसा ही है जैसा तब था. इस एल्बम में इसे गाया है रेखा भारद्वाज ने. एल्बम में इसका एक रोंक संस्करण भी है जिसका असर भी उतना ही जादूई है.

अगला गीत भी एक संगीत समूह ‘मातिबानी’ का है. ये बैंड भारतीय शास्त्रीय और लोक अंदाज़ को विश्व संगीत के साथ जोड़ कर पेश करने के लिए मशहूर है. यहाँ उनका गठबंधन फ्रेच संगीत के साथ है. फ्रेच शब्दों को स्वर दिया है जॉयशांति ने जिसके साथ निराली कार्तिक की जुगलबंदी सुनते ही बनती है. ‘तोरे मतवाले नैना’ एक ऐसा गीत है जिसे आप बार बार सुनना चाहेंगें.

‘मरिया पिताचे’ में रेमो आपको गोवा के पारंपरिक लोक अंदाज़ में ले जायेंगें जहाँ वो मरिया के पिता की कहानी सुनाते हैं. गीत के अधिकतर शब्द कोंकणी भाषा में है, मगर बहुत सी साईटों पर आप इसका अनुवाद पढ़ सकते हैं. वैसे इस लाजवाब गीत का मज़ा लेने के लिए आपको शब्दों की समझ कतई जरूरी नहीं है. रेमो अपने संगीत से ऐसा समां बाँध देते हैं कि बस सुनते ही चले जाने का मन करता है.

चुटकी, सीटी, के साथ पियानो और गिटार के सरलतम और कम से कम इस्तेमाल कर अगले गीत ‘तेरे मेरे प्यार की कहानी’ को संगीतकार प्रशांत पिल्लई, एक खूबसूरत प्रेम कविता में बदल देते हैं. नरेश अय्यर और श्वेता पंडित की आवाजें पूरी तरह से एक दूजे में घुलती महसूस होती हैं, गोपाल दत्त के शब्द भी अच्छे हैं.

हार्डरोक् अंदाज़ का ‘बंदे’ एक छोटा सा गीत है जिसे मोडर्न माफिया नाम के बैंड ने रचा है. तेज रिदम और अंकुर तिवारी के शब्द इस गीत को मजेदार तो बनाते हैं, पर ये एकबम के बाकी गीतों जितना प्रभावी नहीं हो पाया शायद, या फिर संभव है कि इस जेनर के प्रति मेरी नापसंदगी इसकी वजह हो.

अनिरुद्ध रविचंदर को ‘कोलावारी डी’ ने रातों रात एक मशहूर संगीतकार में तब्दील कर दिया था, पर यहाँ आप उनका एक अलग ही रूप देखेंगें. ‘यूँ ही रे’ एक बहुत ही मधुर गीत है जिसकी धुन जितनी लुभावनी है संगीत संयोजन भी उतना ही दिलचस्प है. हल्की बारिश की स्वर ध्वनियों से खुलता है ये गीत जिसमें बाँसुरी और अन्य पारंपरिक वाध्यों का सुन्दर प्रयोग हुआ है. खुद अनिरुद्ध और श्वेता मोहन की आवाजें इस गीत में खूब जमी है. शब्द भी सुरीले है. वोइलेन के पीस पर आकर अंजाम तक पहुँचते हुए गीत अपनी खास छाप छोड़ जाता है. गीत हालाँकि रहमान के ‘चुपके से’ जैसे गीतों की याद दिलाता है मगर अपनी खुद की पहचान भी अवश्य बनाने में कामियाब है, इसमें कोई शक नहीं.

रिदम की तेज और दमदार थाप पर कार्तिक की दमदार आवाज़ बेहद प्रभावी लगती है, अगले गीत ‘रब दी मर्ज़ी’ में. यहाँ भी शब्द सशक्त हैं. यक़ीनन इस गीत की ऊर्जा इसे विशेष बनाती है.

‘आउट ऑफ कंट्रोल’ जैसे एक गीत की उम्मीद मुझे बिजॉय के एल्बम में थी. ये गीत अंग्रेजी और हिंदी में है. निखिल डी’सूजा बहुत से वेस्टर्न क्लास्सिकल गायकों की याद दिलाते हैं, हिंदी शब्द प्रीती की आवाज़ में है, ये दर्द भरा गीत अपनी सुन्दर जुगलबंदी के कारण बेहद सुन्दर बन पड़ा है. आखिर दर्द और कुंठा की कोई भाषा कहाँ होती है.

पर ठहरिये जरा, अभी एल्बम में और भी बहुत कुछ है. मसलन अगले गीत को लें. संगीतकार हैं प्रशांत पिल्लई और आवाज़ है मेरे पसंदीदा लकी अली की. उनकी आवाज़ और अंदाज़ एकदम अलग ही सुनाई देता है इस गीत में. ताजिया यात्रा के दौरान होने वाले नारों जैसा कोरस है पार्श्व में. तरुज़ के शब्द पूरे वाकये को तस्वीर में बदल देते हैं. लकी अली का ‘या हुसैन’ एक जबरदस्त ट्रेक है, जिसे सुनकर ही महसूस किया जा सकता है.

सौरभ रे के रोक् बैंड ने रचा है एक पूरी तरह का अंग्रेजी गीत ‘थ्री किल्स’ जो एक बार फिर आपको पारंपरिक वेस्टर्न रोक् गीतों की याद दिला जाएगा. एक और वाध्य रचना है रेमो का रचा जिसे नाम दिया गया है ‘लाईट हाउस सिम्फोनी’. एक बार फिर गोवा की खुश्बू को श्रोता इस ट्रेक में महसूस कर पायेंगें. कुल १५ रचनाएँ है एल्बम में और सभी किसी न किसी खास वजह से सुनने लायक है. सबका अपना एक मिजाज़ है और अपना ही अंदाज़ भी. ‘डेविड’ एक एल्बम के रूप में श्रोताओं को भरपूर संतुष्ट करती है. बशर्ते अगर आप कुछ नया, कुछ अलग सुनने के शौकीन हैं तो. बहरहाल हम रेडियो प्लेबैक पर इसी नयेपन को, इसी निरालेपन को हमेशा ही सराहते रहे है, इसीलिए अपने श्रोताओं को इस एल्बम को सुनने की खास सिफारिश के साथ देंगें इस ४.८ की रेटिंग. अगले हफ्ते फिर किसी नए संगीत की चर्चा लेकर हाज़िर होंगें तब तक दीजिए इज़ाज़त                  

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