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Thursday, April 10, 2014

झूमती आ रही है सुबह प्यार की....

खरा सोना गीत - रात के हमसफ़र 

 प्रस्तोता - अर्शाना सिंह 
स्क्रिप्ट - सुजोय  
               प्रस्तुति - संज्ञा टंडन                 



या फिर यहाँ से डाउनलोड करें 

Wednesday, October 23, 2013

सूफी संतों के सदके में बिछा सूफी संगीत (सूफी संगीत ०३)


सूफी संगीत पर विशेष प्रस्तुति संज्ञा टंडन के साथ 
सूफी संतों की साधना में चार मकाम बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं- शरीअततरी-कतमारि-फत तथा हकीकत। शरीयत में सदाचरण कुरान शरीफ का पाठपांचों वक्त की नमाजअवराद यानी मुख्य आयतों का नियमित पाठअल्लाह का नाम लेनाजिक्रे जली अर्थात बोलकर या जिक्रे शफी यानी मुंह बंद करके अल्लाह का नाम लिया जाता है। उस मालिक का ध्यान किया जाता है। उसी का प्रेम से नाम लिया जाता है। मुराकवा में नामोच्चार के साथ-साथ अल्लाह का ध्यान तथा मुजाहिदा में योग की भांति चित्त की वृत्तियों का निरोध किया जाता है। पांचों ज्ञानेन्दियों के लोप का अभ्यास इसी में किया जाता है। इस शरीअत के बाद पीरो मुरशद अपने मुरीद को अपनाते हैं उसे रास्ता दिखाते हैं। इसके बाद शुरू होती है तरी-कत। इस में संसार की बातों से ऊपर उठकर अहम् को तोड़ने छोड़ने का अभ्यास किया जाता है।

अपनी इद्रियों को वश में रखने के लिए शांत रहते हुए एकांतवास में व्रत उपवास किया जाता है। तब जाकर मारिफत की पायदान पर आने का मौका मिलता है। इस परम स्थिति में आने के लिए भी सात मकाम तय करने पड़ते हैं। तौबा, जहद, सब्र, शुक्र, रिजाअ, तबक्कुल और रजा की ऊंचाइयों पर चढ़ने के बाद सूफी साधक इस दुनिया को ही नहीं, बल्कि खुद को भी भूलकर अल्लाह के इश्क में पूरी तरह से डूब जाते हैं, वे परम ज्ञानी हो जाते हैं। इसके बाद सूफी साधक हकीकत से रूबरू होता है। यह परम स्थिति उसे प्रेम के चरम पर ले जाती है। उसे खुशी और तकलीफों से छुटकारा दिलाती है। ऐसी स्थिति में पहुंचने के बाद फिर बस अल्लाह के अलावा दूसरा न कोई सूझता है और न सुहाता है। हर वक्त उसी अल्लाह में प्रेम की लौ लगी रहती है। दिल के अंदर उसी की चाहत बसी रहती है। सारी इच्छाएं , चिंताएं स्वत: समाप्त हो जाती हैं। मीरा के प्रेम और सूफियों के इश्क में कोई अंतर नहीं लगता है। आंसुओं के जल से दिल का मैल जब घुलने लगे , जिंदगी में फूल हर तरफ खिलने लगें , तब समझना रास्ता है ठीक आगे बढ़ने के लिए। सारे झंझट छोड़ दिल में प्रेम रस घुलने लगे। प्रेम ऐसा , जो सिर्फ दिखावटी न हो। प्रेम ऐसा , जो जिंदगी में पूरी तरह रच बस जाए। हर तरफ बस तू ही तू-तू ही तू नजर आए। (साभार -ममता भारती)

Wednesday, October 16, 2013

इस ईद "जिक्र" उस परवरदिगार का सूफी संगीत में

प्लेबैक इंडिया ब्रोडकास्ट 

सूफी संगीत भाग २ 

कहा जाता है कि सूफ़ीवाद ईराक़ के बसरा नगर में क़रीब एक हज़ार साल पहले जन्मा. भारत में इसके पहुंचने की सही सही समयावधि के बारे में आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता लेकिन बारहवीं-तेरहवीं शताब्दी में ग़रीबनवाज़ ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती बाक़ायदा सूफ़ीवाद के प्रचार-प्रसार में रत थे. (पूरी पोस्ट यहाँ पढ़ सकते हैं)

Wednesday, September 4, 2013

हरफनमौला कलाकार हैं हमारे पियूष मिश्रा

वो थियटर के एक बड़ी शख्सियत हैं, फिल्मों में उनके लिए ख़ास किरदार लिखे जाते हैं, कभी वो खुद भी कहानियों को परदे पर साकार करने वाले सेतु बन जाते हैं, तो कभी गायक, गीतकार और संगीतकार की भूमिका अख्तियार कर लेते हैं, आईये हमारे पोडकास्टर सुनील के साथ पड़ताल करें हरफनमौला कलाकार पियूष मिश्रा के रचनात्मक सफ़र की.  


Thursday, August 8, 2013

कातिल आँखों वाले दिलबर को रिझाती आशा की आवाज़

खरा सोना गीत - यार बादशाह यार दिलरुबा
स्वर  - दीप्ती सक्सेना
प्रस्तुति  - संज्ञा टंडन
स्क्रिप्ट - सुजॉय चट्टरजी



Wednesday, July 31, 2013

राग गौड़ मल्‍हार के गीत

प्लेबैक इण्डिया ब्रोडकास्ट

‘गरजत बरसत सावन आयो...’


राग गौड़ मल्हार पर आधारित फिल्मी गीत
                                               




आलेख : कृष्णमोहन मिश्र 

स्वर एवं प्रस्तुति : संज्ञा टण्डन

Thursday, July 25, 2013

नाराज़गी ऐसी ...हाय तौबा

गोल्ड सीरीस - वो हमसे चुप हैं ....
स्वर - श्वेता पाण्डेय
प्रस्तुति - संज्ञा टंडन

Monday, July 22, 2013

दुनिया की हर माँ के नाम एक गीत

मेरी दुनिया है माँ तेरे आँचल में....
स्क्रिप्ट  - सुजॉय चट्टर्जी
स्वर - अर्शिना सिंह
प्रस्तुति - संज्ञा टंडन

Thursday, July 18, 2013

तारों की छांव में प्रीत की बायर

गोल्ड सीरिस - खरा सोना गीत ०६
टिम टिम टिम तारों के दीप जले....
स्वर  - लता, तलत
शब्द - भरत व्यास
संगीत - वसंत देसाई

कार्यक्रम स्क्रिप्ट - सुजॉय चट्टरजी
प्रस्तुतकर्ता एवं कार्यक्रम संचालक - संज्ञा टंडन

Thursday, July 11, 2013

छला जिस लूटेरे ने उसी का है इंतज़ार...

गोल्ड सीरीस, खरा सोना गीत 04
रुला के गया सपना मेरा
लता मंगेशकर
शैलेन्द्र
एस डी बर्मन

शो स्क्रिप्ट : सुजॉय चट्टर्जी
स्वर : अन्तरा चक्रवर्ती
प्रस्तुति : संज्ञा टंडन

Monday, July 1, 2013

सी ए टी कैट, कैट माने बिल्ली...एक खिलखिलाता गीत

खरा सोना गीत ०२ 
गीत : सी ए टी कैट, कैट माने बिल्ली...
गायक  कलाकार : किशोर और आशा 
गीतकार : मजरूह सुल्तानपुरी
संगीतकार : रवि 
स्क्रिप्ट  :  सुजॉय चट्टर्जी
स्वर  : श्वेता 
प्रस्तुति  : संज्ञा टंडन
संकल्पना  : सजीव सारथी 

Wednesday, May 29, 2013

सुनें राग तिलक कामोद में स्वरबद्ध कुछ सुरीले फ़िल्मी गीत संज्ञा टंडन के साथ


प्लेबैक  इंडिया ब्रोडकास्ट
राग तिलक कामोद 
स्वर एवं प्रस्तुति - संज्ञा टंडन 
स्क्रिप्ट - कृष्णमोहन मिश्र

Monday, December 31, 2012

संगीत 2012 - कैसा था संगीत के लिहाज से बीता वर्ष -एक अवलोकन

वर्ष २०१२ में श्रोताओं ने क्या क्या सुना, किसे पसंद किया और किसे सिरे से नकार दिया, किन गीतों ने हमारी धडकनों को धड़कने के सबब दिया, किन शब्दों ने हमारे ह्रदय को झकझोरा, और किन किन फनकारों की सदाएं हमारी रूह में उतर कर अपनी जगह बनने में कामियाब रहीं, आईये इस पोडकास्ट में सुनें पूरे वर्ष के संगीत का एक मुक्कमल लेखा जोखा. साथ ही किन संगीत योद्धाओं को हमारे श्रोताओं ने दिया वर्ष-सर्वश्रेष्ठ का खिताब, ये भी जाने. कुछ कदम थिरकाने वाले गीतों के संग आईये अलविदा कहें वर्ष २०१२ को और स्वागत करें २०१३ का. नववर्ष आप सबके लिए मंगलमय हो. इसी कामना के साथ प्रस्तुत है रेडियो प्लेबैक का ये पोडकास्ट. 



Wednesday, October 17, 2012

शास्त्रीय रागों में समय प्रबंधन


प्लेबैक इंडिया ब्रोडकास्ट (17)


हर राग को गाये जाने  के लिए एक समय निर्धारित होता है, इनका विभाजन बेहद वैज्ञानिक है. दिन के आठ पहर और हर पहर से जुड़े हैं रागों के विभिन्न रूप. आज के ब्रोडकास्ट में इसी राग आधारित समय प्रबंधन पर एक चर्चा हमारी नियमित पॉडकास्टर संज्ञा टंडन के साथ. अवश्य सुनें और अपनी राय हम तक पहुंचाएं  

The Radio Playback Originals (Click on the covers to reach out the Albums)



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