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Sunday, January 1, 2012

अल्बम - संगीत दिलों का उत्सव है

Album - Sangeet Dilon Ka Utsav Hai




संगीत दिलों का उत्सव है - गायक : चार्ल्स फिन्नी, मिथिला कानुगो, गीतकार : सजीव सारथी, संगीत : निखिल रंजन

बढे चलो - गायक : जयेश शिम्पी, मानसी पिम्पले, ऋषि एस, गीतकार : अलोक शंकर, सजीव सारथी, संगीत : ऋषि एस

मैं नदी - गायक : मानसी पिम्पले, गीतकार : सजीव सारथी, संगीत : ऋषि एस

जीत के गीत - गायक : बिस्वजीत, गीतकार : सजीव सारथी, संगीत : ऋषि एस

मेरे सरकार - गायक : बिस्वजीत, गीतकार : विश्व दीपक, संगीत :सुभोजित

ज़ीनत - गायक : कुहू गुप्ता, गीतकार - विश्व दीपक, संगीत - सतीश वम्मी

चुप सी - गायक : श्रीराम ईमनी, गीतकार : सजीव सारथी, संगीत : सुभोजित

प्रभु जी - गायक : श्रीनिवास पंडा, गीतकार : सजीव सारथी, संगीत : श्रीनिवास पंडा

प्रभु जी - गायक : कुहू गुप्ता, गीतकार : सजीव सारथी, संगीत : श्रीनिवास पंडा

आवारगी का रक्स - गायक : श्रीविद्या कस्तूरी, तारा बालाकृष्णन, गीतकार : सजीव सारथी, संगीत : ऋषि एस

छू लेना - गायक : कुहू गुप्ता, स्वाति कानिटकर, गीतकार : सजीव सारथी, संगीत : मुरली वेंकट

दिल यार यार - गायक : रमेश चेलामनी, गीतकार : सजीव सारथी, संगीत : ऋषि एस

ढाई आखर - गायक : ह्रिचा देबराज, गीतकार : विश्व दीपक, संगीत : सतीश वम्मी

ओ साहिबा - गायक : बिस्वजीत, गीतकार : सजीव सारथी, संगीत : सुभोजीत

एक नया दिन - गायक/गीतकार/संगीत ; मालविका निरंजन

क्या हसीन इत्तेफाक - गायक - उन्नीकृष्णन के बी, कुहू गुप्ता, गीतकार : नितिन दुबे

Original Uploads - All Rights Reserved

अल्बम - एक रात में...

Album - Ek Raat Men




जो शजर - गायक/ संगीत : रफीक शेख, गीतकार : दौर सैफी

तेरे चेहरे पे - गायक : निशांत अक्षर, गीतकार : मनुज मेहता, संगीत : अनुरूप कुकरेजा

चले जाना - गायक /संगीत : रूपेश ऋषि, गीतकार :शिवानी सिंह

राहतें सारी - गायक /संगीत : कृष्ण राजकुमार, गीतकार :मोहिंदर कुमार

सच बोलता है - गायक/संगीत : रफीक शेख, गीतकार : अजीम नवाज़ राही

ऐसा नहीं - गायक : प्रतिष्ठा शर्मा, गीतकार : शिवानी सिंह, संगीत : रूपेश ऋषि

आखिरी बार बस - गायक /संगीत : रफीक शेख, गीतकार : मोईन नज़र

चाँद का आंगन - गायक/संगीत : कुमार आदित्य, गीतकार : गौरव सोलंकी

सूरज हाथ से - गायक/संगीत : कुमार आदित्य, गीतकार : नाजिम नकवी

मुझे वक्त दे - गायक : आभा मिश्रा, गीतकार : निखिल आनंद गिरी, संगीत : रूपेश ऋषि

एक रात में - गायक/संगीत : रफीक शेख, गीतकार : नजीर बनारसी

Original Uploads - All Rights Reserved

अल्बम - इट्स रोक्किंग


ALBUM # ITS ROCKING







तू रुबुरु - गायक : बिस्वजीत, गीतकार : सजीव सारथी, संगीत : ऋषि एस

आवारा दिल - गायक : सुबोध साठे, गीतकार : सजीव सारथी, संगीत : सुभोजित

बेंतेहा - गायक/गीतकार/संगीत - सुदीप यशराज

खुशमिजाज़ मिटटी - गायक : सुबोध साठे, गीतकार : गौरव सोलंकी, संगीत : सुबोध साठे

ओ मुनिया - गायक : जे ऍम सोरेन, गीतकार : सजीव सारथी, संगीत : जे ऍम सोरेन

डरना झुकना - गायक : जोगी सुरेंदर, अमन कौशल, गीतकार : सजीव सारथी, संगीत : पेरुब

उड़ता परिंदा - गायक/गीतकार/संगीत : सुदीप यशराज

महिया - बैंड : आवारा MUHAMMAD WALEED MUSTAFA:Lead vocalist,Rhythm guitarist,Lyrics writer
AFFAN QURESHI:Lead guitarist,back vocalist
WAQAS QADIR BALOCH:Drummer,basses

बुलबुला - गायक : ह्रिचा देबराज, गीतकार : सजीव सारथी, संगीत : बालमुरली बालू

धडका (UNPLUGGED) - गायक : कुहू गुप्ता, गीतकार : सजीव सारथी, संगीत : विक्रमादित्य मौर्या

शामियाने - गायक : कृष्ण राज कुमार, गीतकार : सजीव सारथी, संगीत : कृष्ण राजकुमार

नसीमे सुबह - गायक : रमेश चेलामनी, गीतकार : सजीव सारथी, संगीत : रमेश चेलामनी

जनाबे जाना - गायक : अमन कौशल, गीतकार : सजीव सारथी, संगीत : पेरुब

लौट चल - गायक : कृष्ण राजकुमार, गीतकार : सजीव सारथी, संगीत : ऋषि एस

धडका - गायक : कुहू गुप्ता, गीतकार : सजीव सारथी, संगीत : विक्रमदित्य मौर्या

जनाबे जाना - गायक : जोगी सुरेंदर, गीतकार : सजीव सारथी, संगीत पेरुब

तू ही तो है - गायक : सागर पाटिल, गीतकार : प्रदीप पाठक, संगीत : सागर पाटिल

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Saturday, February 19, 2011

ग्यारह हो हमारा, देश का यही है आज नारा -ठोंक दे किल्ली टीम इंडिया....करोड़ों भारतीयों की आवाज़ को सुरों में पिरोया देश विदेश में बसे संगीत योद्धाओं ने

Awaaz mahotsav World Cup Cricket 2011 Special Song

आज मीरपुर में भारतीय क्रिकेट टीम विश्व कप पर २८ सालों बाद बेहद मजबूती के साथ अपनी दावेदारी पेश करने उतरेगी....आज पूरा देश उन्हें शुभकामनाएँ दे रहा है. दोस्तों क्रिकेट हमारे देश में किसी धर्म से कम नहीं है, और विश्व कप उन खास मौकों में से एक है जब पूरा देश एक सूत्र में बंध जाता है, सब एक दूसरे से बस यही पूछते नज़र आते है -"स्कोर क्या है ?". जब जीत हार एक खेल से बढ़ कर कुछ हो जाए, जब करोड़ों धड़कनों की दुआ बस एक हो जाए, तो छाना लाजमी ही है - जीत का जूनून. इसी जीत के जज्बे को सलाम करने उतरे हैं आज हिंद युग्म के कुछ नए तो कुछ तजुर्बेकार सिपाह सलार...वहाँ मैदाने जंग में जब भारत के ११ खिलाड़ी अपने हुनर का दम लगायेंगें वहीं करोड़ों दर्शक एक सुर में गायेंगें....क्या ? अरे घबराईये नहीं, हम लाये हैं एक ऐसा गीत जो २ अप्रैल तक हर क्रिकेट प्रेमी की जुबान पे होगा, हर मैच से पहले और बाद में हर कोई बस यही गुनगुनाएगा...."ठोंक दे किल्ली टीम इंडिया"...आपके शब्दों को सुरों में ढाल कर आज हिंद युग्म गर्व से पेश करता है टीम इंडिया को शुभकामनाएँ देता ये दमदार गीत, जिसके माध्यम से आज हिंद युग्म परिवार में जुड रहे कुछ बेहद नए मगर प्रतिभाशाली संगीतकर्मी.....

गीत के बोल -

जोश भी है, होश भी है हबीब,
हौंसले भी बुलंद है,
मांग अपनी खैर मेरे रकीब,
दिन अब तेरे चंद है,
निकले हैं धुन में,
हम जियाले नौजवाँ,
मैदाने जंग है ये खेल नहीं,
ठोंक दे किल्ली, टीम इंडिया ओ ओ ओ,
गाढ़ दे बल्ला, come on india lets go...,
छा ने दे - जीत का जूनून

स स स स सुनो नगाड़े, किला हिला दो बढ़ो चलो,
च च च च चलो दहाड़े, किला हिला दो बढ़ो चलो,
विजय तिरंगा फहराना है, किला हिला दो बढ़ो चलो,
है करोड़ों उम्मीदें तुमसे....हार के पंजों से,
जीत को, छीन लो,
नाम हमारे हो फ़तेह,
ठान लो,
एक से एक मिले तो हों ग्यारह, ग्यारह हो हमारा, (means 2011 should belongs to us)
देश का यही है आज नारा,
ठोंक दे किल्ली, टीम इंडिया ओ ओ ओ,
गाढ़ दे बल्ला, come on india lets go...,


मेकिंग ऑफ़ "जीत का जूनून" - गीत की टीम द्वारा

ईश्वर रविशंकर: An idea.. conceived... endeavored... now delivered...

The song started of from the brain-cells of AK Deepesh who came up with the thought of making a song to cheer the Indian Cricket Team for this World Cup. The very thought was vibrant and struck a chord with every one on our team.

We embarked on this project a month back when Sajeev Sarathie penned some fantastic lines off his mind. Sajeev speaking for this song was a masterstroke for us since Sajeev, a being cricket enthusiast himself was obviously thrilled at the thought amd did not just stop with passionate writing but also went out of his way to help us throughout the song.

Once the lyrics and the melody were in place, we started off with the groove design with Manoj at the helm. Needless to say, the amazing drummer that he is, he nailed it! With the basic framework now in place, we started off on arrangements & programming and from there on it was a process of evolution set in motion.

This was also the first time we got the chance to work with Kuhoo Gupta (thanks to Sajeev Bhaiya). Have always been a great fan of her singing and working with her was ever better than we had ever imagined. Versatility, speed and a thorough professional attitude describe her the best (not to mention amazingly cheery all the time). She finished off her portions in no time and proved to be such a value add to our team!

Tara Balakrishnan who has almost always been a part of our projects worked her magic in the very last minute with some breath-taking harmonies and super-expressive singing.

With Anup Menon - The Guitarist on the team, there could obviously be no dearth for energy. He played an active part in the song offering suggestions and improvisations most of which when incorporated improve the song.

I didn't have to go far in searching for the male lead, Deepesh being an amazing singer himself. Apart from singing the lead, Deepesh stayed up while making the song right from Day 1 and this song is as much his baby as mine.

Two people who stood by us no matter what deserve a special mention. Baba Vijay and Vinod Venugopal are not only the ones behind the video for the song and the teaser but also the right catalyst charging us up when the chips were down!

Balamurali Balu is another friend we would like to thank for his guidance throughout.

Last but not the least, we thank all our friends (active and passive) who have motivated us, kept us on our toes, criticized for improvements and helped us through out the promotions from the day the teaser was out!

Jeet Ka Junoon required a junoon of our own since we did have a lot of hurdles jump across (what with lack of a proper funding to execute a project so ambitious, etc) but it finally proved to worth all our efforts.

We sure had a blast working together and hope you will too, when you listen!

सजीव सारथी: मैं कुछ ऐसा करना चाहता था इस वर्ल्ड कप के लिए पर जिन संगीतकारों के साथ जिद के साथ ऐसा गीत करने को कह सकता था, वो सब यहाँ वहाँ व्यस्त थे. तभी एक दिन ईश्वर का मेल आया, ईश्वर ने मेरे लिखे एक गीत की (मुरली वेंकट के लिए) की अर्रेंजमेंट की थी, जब ईश्वर ने कहा उसके एक मूल धुन पर गीत लिखना है तो मुझे लगा कि कोई दूसरे तरह का गीत होगा, पर जब अगली मेल में उसने लिखा कि ये गीत वर्ल्ड कप के लिए है तो मुझे बहुत ख़ुशी हुई...इस गीत में बहुत बड़ी टीम थी, और सबको ईश्वर ने बहुत सलीके से संभाला है, दीपश शुरू में बहुत चिंतित था मगर कई कई बार प्रक्टिस करने के बाद उसमें काफी जोश आ गया, और तारा ने भी हरमोनिस में उसका अच्छा साथ निभाया. कुहू ने लास्ट मिनट में एंट्री की है और देखिये अपने स्पनिश अलाप से कैसा जादू चलाया है...पर मेरी नज़र में जो इस गीत को एक लेवल ऊपर लेकर जाता है वो है इसका गिटार, अनूप ने जो एनर्जी इस गीत में फूंकी है वो लाजावाब है.... २०११ हमारा होगा, मुझे उम्मीद ही नहीं विश्वास है, इंडियन क्रिकेट टीम एक बार फिर इतिहास लिखेगी...come on India lets go....ये कप हमें दे दे ठाकुर :)




Kuhoo - Singer (Pune)
Kuhoo, as her name implies, is gifted with a melliflous voice. The rich tonal quality captivates the listener instantly and everytime. She began singing at the tender age of 5. Her formal education in music started at the age of 11 when she started training in Hindustani Classical Vocals. This was to be the beginning of a journey for her as she improved her singing every passing day. She won many national level prizes in singing. Equally competent in academics, Kuhoo studied in IIT Mumbai and completed her M. Tech from Computer Science department.

Anup Menon - Guitars (Paris)
An elite academic whose passions are rock, heavy metal and the likes apart from his precious books, Anup is an ultra-dynamic guitarist. Creative and spontaneous, his energy is infectious!

सजीव सारथी
हिन्द-युग्म के 'आवाज़' मंच के प्रधान संपादक सजीव सारथी हिन्द-युग्म के वरिष्ठतम गीतकार हैं। हिन्द-युग्म पर इंटरनेटीय जुगलबंदी से संगीतबद्ध गीत निर्माण का बीज सजीव ने ही डाला है, जो इन्हीं के बागवानी में लगातार फल-फूल रहा है। कविहृदयी सजीव की कविताएँ हिन्द-युग्म के बहुचर्चित कविता-संग्रह 'सम्भावना डॉट कॉम' में संकलित है। सजीव के निर्देशन में ही हिन्द-युग्म ने 3 फरवरी 2008 को अपना पहला संगीतमय एल्बम 'पहला सुर' ज़ारी किया जिसमें 6 गीत सजीव सारथी द्वारा लिखित थे। पूरी प्रोफाइल यहाँ देखें।

Tara Balakrishnan - Female Vocals (Houston)
Fabulous singer with a blessed voice and amazing creativity Tara can sing any genre with unbelievable ease and grace. A highly competent singer with 10 years of carnatic training, she has even sung in a Tamil movie.
Based out of Houston, SAP Consultant.

AK Deepesh - Male Vocals (Cochin)
A highly positive person with a dynamic & contemporary voice, Deepesh is a highly promising singer who is sure to rock the industry very soon.

Manoj Krishnan - Groove Design (California)
A sudden turn around during high school caused Manoj to get suddenly interested in music. There has been no looking back ever since. He rocked his college with his formidable drumkit and is now actively into programming and other aspects of music as well.

Eshwar Ravishankar - Composition and Arrangement (Chennai)
An aspiring management student by day and a musician by night, Eshwar is ever passionate about every job he undertakes. He is into composing jingles for ads/corporate videos and the likes under the brand name Sonus Unbound.

Song - Jeet Ka Junoon
Vocals - AK Deepesh, Tara Balakrishnan, Kuhoo
Groove Design - Manoj Krishnan
Guitars - Anup Menon
Composition and Arrangement - Eshwar Ravishankar
Lyrics - Sajeev Sarathie

Graphics - Prashen's media


All rights reserved with the artists and Hind Yugm

Friday, November 5, 2010

शुभ दीपवाली - जब पूरा आवाज़ परिवार एक सुर हुआ रफ़ीक शेख के साथ आपको बधाई देने के लिए

आवाज़ महोत्सव ओरिजिनल संगीत में गीत # २१

दोस्तों, क्या आपने कभी महसूस किया है कि दीपावली के आते ही कैसे अपने आप ही हमारे अंदर एक नयी सी खुशी, नयी सी आशा का संचार हो जाता है. यही इन त्योहारों की खासियत है कि ये वातावरण में एक ऐसी सकरात्मक ऊर्जा को घोल देते हैं कि हर कोई खुश और मुस्कुराता नज़र आता है. दोस्तों यूँ तो आज आपका मोबाइल, ई मेल इन्बोक्स आदि शुभ संदेशों से भरे हुए होंगें, पर जिस अंदाज़ में आज आपको "आवाज़" शुभकामना सन्देश देने जा रहा है, वो सबसे अनूठा अनोखा है. हमने अपने पुराने साथी संगीतकार/गायक रफीक शेख के साथ मिलकर एक गीत खास आपके लिए बनाया है, दिवाली की बधाईयों वाला. शब्द पारंपरिक है और संगीत संयोजन खुद रफीक का है. तो इस गीत को सुनिए और मुस्कुरा कर इस पवन त्यौहार का आनंद लीजिए. इस बार जन्मी ये सकारात्मकता अब यूँहीं हम सब के अंग संग रहें. सुख समृधि और खुशियों से हम सबके जीवन सजे. एक बार फिर आप सबको सपरिवार दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ.



रफ़ीक़ शेख
रफ़ीक़ शेख आवाज़ टीम की ओर से पिछले वर्ष के सर्वश्रेष्ठ गायक-संगीतकार घोषित किये जा चुके हैं। रफ़ीक ने दूसरे सत्र के संगीत मुकाबले में अपने कुल 3 गीत (सच बोलता है, आखिरी बार, जो शजर सूख गया है) दिये और तीनों के तीनों गीतों ने शीर्ष 10 में स्थान बनाया। रफ़ीक ने पिछले वर्ष अहमद फ़राज़ के मृत्यु के बाद श्रद्धाँजलि स्वरूप उनकी दो ग़ज़लें (तेरी बातें, ज़िदंगी से यही गिला है मुझे) को संगीतबद्ध किया था। बम्पर हिट एल्बम 'काव्यनाद' में इनके 2 कम्पोजिशन संकलित हैं।

Awaaz Originals # 21 - Shubh Deepwali
Lyrics - Traditional
Music & Voice - Rafique Sheikh

Creative Commons License
shubh deepawali-original song by Rafique Sheikh & Hind Yugm is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivs 3.0 Unported License.

Friday, September 17, 2010

भर के गागर कलियों से, ज्यों ढलके हों मोगरे....ब्रिज भाषा की मिठास और क्लास्सिकल पाश्चात्य संगीत का माधुर्य जब मिले

Season 3 of new Music, Song # 20

दोस्तों आज का हमारा नया गीत एकदम खास है, क्योंकि इसमें पहली बार ब्रिज भाषा की मिठास घुल रही है. नए प्रयोगों के लिए जाने जाने वाले हमारे इन हॉउस गीतकार विश्व दीपक लाए है एक बहुत मधुर गीत जिसे एक बेहद मीठी सी धुन देकर संवारा है सतीश वम्मी ने जो इससे पहले इसी सत्र में "जीनत" देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर चुके हैं. गायिका हैं "बुलबुला" में जिंदगी का फलसफा देने वाली आवाज़ की शान गायिका ह्रिचा देबराज नील मुखर्जी. तो दोस्तों अब और अधिक भूमिका में आपको न उलझाते हुए सीधे गीत की तरफ़ बढते हैं. ऑंखें मूँद के सुनिए और खो जाईये, इस ताज़ा तरीन गीत की रुमानियत में....और हाँ हमारे युवा संगीतकार सतीश जी को विवाह की बधाईयां भी अवश्य दीजियेगा, क्योंकि कहीं न कहीं उनके जीवन में आये इस नए प्रेम का भी तो योगदान है इस गीत में. हैं न ?

गीत के बोल -


ढाई आखर अंखियों से
जब झलके हैं तो मोहे
मिल जावे चैना.... मोरे सांवरे!!

भर के गागर कलियों से
ज्यों ढलके हों मोगरे
बिछ जावें भौंरे..... होके बावरे!!

तोसे पुछूँ
तू नैनन से
यूँ पल-पल छल कर... लूटे है मोहे..
कि पक्की है... ये प्रीत रे!!!

ढाई आखर अंखियों से
जब झलके हैं तो मोहे
मिल जावे चैना.... मोरे सांवरे!!

भर के गागर कलियों से
ज्यों ढलके हों मोगरे
बिछ जावें भौंरे..... होके बावरे!!

काहे तू
हौले-हौले
कनखियों से खोले है घूँघट मोरी लाज-शरम के..

अब ना संभले मोसे,
सजना बीरहा तोसे,
धर ले सीने में तू,
मोहे टुकड़े कर के.....

ढाई आखर अंखियों से
जब झलके हैं तो मोहे
मिल जावे चैना.... मोरे सांवरे!!

भर के गागर कलियों से
ज्यों ढलके हों मोगरे
बिछ जावें भौंरे..... होके बावरे!!




मेकिंग ऑफ़ "ढाई आखर" - गीत की टीम द्वारा

सतीश वम्मी: "ढाई आखर" हिन्द-युग्म पर मेरा दूसरा गाना है और ह्रिचा देबराज के साथ पहला। ह्रिचा के बारे में मुझे जानकारी मुज़िबु से हासिल हुई थी। उनके साथ काम करने का मेरा अनुभव बड़ा हीं सुखद रहा। सच कहूँ तो अंतर्जाल के माध्यम से किसी गाने पर काम करना आसान नहीं होता क्योंकि उसमें आप खुलकर यह बता नहीं पाते कि आपको गीतकार या गायक/गायिका से कैसी अपेक्षाएँ हैं, लेकिन ह्रिचा के साथ बात कुछ अलग थी। उन्हें जैसे पहले से पता था कि गाना कैसा बनना है और इस कारण मेरा काम आसान हो गया। ह्रिचा ने गाने में एक नई जान डाल दी और इसके लिए मैं उनका शुक्रगुजार हूँ। विश्व भाई तो मेरे लिए फुल-टाईम गीतकार हो चुके हैं.. उनके साथ पहले "ज़ीनत" आई और अब "ढाई आखर"। अभी भी इनके लिखे ४ गाने मेरे पास पड़े हैं, जिन्हें मैं जल्द हीं खत्म करने की उम्मीद करता हूँ। "ढाई आखर" दर-असल एक मेल-सॉंग (निगाहें, जिसे बाद में "झीनी झालर" नाम दिया गया) होना था, लेकिन हमें लगा कि इस धुन पर फीमेल आवाज़ ज्यादा सुट करेगी। ऐसे में नए बोलों के साथ यह गाना "ढाई आखर" बन गया। बोल और धुन तैयार हो जाने के बाद मैंने ह्रिचा से बात की और अच्छी बात यह है कि उन्होंने पल में हीं हामी भर दी। अब चूँकि मैं कोई गायक नहीं, इसलिए डेमो तैयार करना मेरे लिए संभव न था। मैंने ह्रिचा के पास धुन और बोल भेजकर उनसे खुद हीं धुन पर बोल बैठाने का आग्रह किया। मेरी खुशी का ठिकाना तब न रहा जब मैंने ह्रिचा की आवाज़ में पहला ड्राफ्ट सुना। मुझे वह ड्राफ़्ट इतना पसंद आया कि अभी फाईनल प्रोडक्ट में भी मैने पहले ड्राफ्ट का हीं मुखरा हू-ब-हू रखा है। हाँ, अंतरा में बदलाव हुए क्योंकि हमें कई सारे हार्मोनिज़ एवं लेयर्स के साथ प्रयोग करने पड़े थे। अभी आप जो गीत सुन रहे हैं, उसमें एक हीं लिरिक़्स को छह अलग-अलग वोकल ट्रैक्स पर अलग-अलग धुनों पर गाया गया है। इस गाने की धुन रचने में मुझे ५ मिनट से भी कम का समय लगा था... मुझे उस वक़्त जो भी ध्यान में आया, मैंने उसे गाने का हिस्सा बना डाला। इससे मेरा काम तो आसान हो गया, लेकिन विश्व के लिए मुश्किलें बढ गईं। कई जगहॊं पर धुन ऐसी थी, जहाँ शब्द सही से नहीं समा रहे थे और मैं धुन बदलने को राज़ी नहीं था। हालांकि, विश्व ने मुझे बाद में बताया कि ऐसी स्थिति से उनका हीं फायदा होता है क्योंकि उन्हें नई सोच और नए शब्द ढूँढने होते हैं। गाना बनकर तैयार होने में ४-५ महिनों का वक़्त लग गया और इसमें सारा दोष मेरा है, क्योंकि मैं कुछ व्यक्तिगत मामलों में उलझ गया था। दर-असल, इसी बीच मेरी शादी हुई थी :) शुक्रिया.. बधाईयों के लिए शुक्रिया। यह गाना हमारा संयुक्त प्रयास है और हमने यथासंभव इसमें रूह डालने की कोशिश की है। आशा करता हूँ कि आपको हमारी यह छोटी पेशकश पसंद आएगी। आपकी टिप्पणियों का इंतज़ार रहेगा।

ह्रिचा देबराज नील मुखर्जी: गीत "ढाई आखर अंखियों से" बड़ा हीं प्रयोगात्मक गीत है.. शुरूआत में यह नज़्म सतीश की कल्पना-मात्र थी। उन्होंने ऐसे हीं पियानो पर एक टीज़र बना कर मुझे यह धुन भेजी और मुझे इस गीत में हिस्सा बनने के लिए पूछा, जिसके लिए मैने तुरंत हामी भर दी। लेकिन कहीं मैं इस सोच में थी कि यह धुन गीत से अधिक एक अच्छी खासी थीम म्युज़िक साउंड कर रही है, क्या इसकी रचना ठीक ढंग से हो भी पाएगी या नहीं.. इस के लिए विश्व जी की जितनी तारीफ़ की जाए कम है क्योंकि जिस तरह से सतीश ने इस गीत में पाश्चात्य बैले संगीत और कर्नाटिक अंग के साथ प्रयोग किया है उसी तरह विश्व जी ने शुद्ध हिन्दी के शब्दों में गीत के बोलों की रचना कर इसे और खूबसूरत बनाने में अपना सफल योगदान दिया है। आशा करती हूँ कि यह गीत सभी को पसंद आएगा।

विश्व दीपक: इस गीत के पीछे के कहानी बताते वक़्त सतीश जी ने "निगाहें" और "झीनी झालर" का ज़िक्र किया, लेकिन वो उससे भी पहले की एक चीज बताना भूल गए। जैसा कि ह्रिचा ने कहा कि यह धुन वास्तव में एक थीम म्युज़िक या इन्स्ट्रुमेन्टल जैसी प्रतीत हो रही थी तो असलियत भी यही है। लगभग चार महिने पहले सतीश जी ने इसे "क्लोज़ योर आईज़" नाम से मुज़िबु पर पोस्ट किया था और श्रोताओं की राय जाननी चाही थी कि क्या इसे गाने के रूप में विस्तार दिया जा सकता है। फिर मेरी सतीश जी से बात हुई और हमने यह निर्णय लिया कि इसे एक मेल सॉंग बनाते हैं। मेल सॉंग बनकर तैयार भी हो गया, लेकिन गायक की गैर-मौजूदगी के कारण इस गाने को पेंडिंग में डालना पड़ा। दर-असल सतीश जी चाहते थे कि यह गाना जॉर्ज गाएँ, लेकिन उसी दौरान जॉर्ज की कुछ जाती दिक्कतें निकल आईं, जिस कारण वे दो-तीन महिनों तक गायन से दूर हीं रहें। हमें लगने लगा था कि यह गीत अब बन नहीं पाएगा, लेकिन हम इस धुन को गंवाना नहीं चाहते थे। तभी सतीश जी ने यह सुझाया कि क्यों न इसे किसी गायिका से गवाया जाए, लेकिन उसके लिए बोलों में बदलाव जरूरी था। अमूमन मैं एक धुन पर एक से ज्यादा बार लिखना पसंद नहीं करता, क्योंकि उसमें आप न चाहते हुए भी कई सारे शब्द या पंक्तियाँ दुहरा देते हैं, जिससे उस गीत में नयापन जाता रहता है। लेकिन यहाँ कोई और उपाय न होने के कारण मुझे फिर से कलम उठानी पड़ी। कलम उठ गई तो कुछ अलग लिखने की जिद्द भी साथ आ गई और देखते-देखते मैने अपनी सबसे प्रिय भाषा "ब्रिज भाषा" (इसमें कितना सफल हुआ हूँ.. पता नहीं, लेकिन कोशिश यही थी कि उर्दू के शब्द न आएँ और जितना हो सके उतना ब्रिज भाषा के करीब रहूँ) में "ढाई आखर" लिख डाला। कहते हैं कि गीत तब तक मुकम्मल नहीं होता जब तक उसे आवाज़ की खनक नहीं पहनाई जाती, इसलिए मैं तो इतना हीं कहूँगा कि सतीश जी और मैने "ढाई आखर" के शरीर का निर्माण किया था, इसमें रूह तो ह्रिचा जी ने डाली है। कुहू जी के बाद मैं इनकी भी आवाज़ का मुरीद हो चुका हूँ। उम्मीद करता हूँ कि ह्रिचा जी की आवाज़ में आपको यह गीत पसंद आएगा।

सतीश वम्मी
सतीश वम्मी मूलत: विशाखापत्तनम से हैं और इन दिनों कैलिफ़ोर्निया में रहते हैं। बिजनेस एवं बायोसाइंस से ड्युअल मास्टर्स करने के लिए इनका अमेरिका जाना हुआ। 2008 में डिग्री हासिल करने के बाद से ये एक बहुराष्ट्रीय बायोटेक कम्पनी में काम कर रहे हैं। ये अपना परिचय एक संगीतकार के रूप में देना ज्यादा पसंद करते हैं लेकिन इनका मानना है कि अभी इन्होंने संगीत के सफ़र की शुरूआत हीं की है.. अभी बहुत आगे जाना है। शुरू-शुरू में संगीत इनके लिए एक शौक-मात्र था, जो धीरे-धीरे इनकी ज़िंदगी का एक अहम हिस्सा बनता जा रहा है। इन्होंने अपनी पढाई के दिनों में कई सारे गाने बनाए जो मुख्यत: अंग्रेजी या फिर तेलगु में थे। कई दिनों से ये हिन्दी में किसी गाने की रचना करना चाहते थे, जो अंतत: "ज़ीनत" के रूप में हम सबों के सामने है। सतीश की हमेशा यही कोशिश रहती है कि इनके गाने न सिर्फ़ औरों से बल्कि इनके पिछले गानों से भी अलहदा हों और इस प्रयास में वो अमूमन सफ़ल हीं होते हैं। इनके लिए किसी गीत की रचना करना एक नई दुनिया की खोज करने जैसा है, जिसमें आपको यह न पता हो कि अंत में हमें क्या हासिल होने वाला है, लेकिन रास्ते का अनुभव अद्भुत होता है।

ह्रिचा देबराज नील मुखर्जी
२००२ में ह्रिचा लगातार ७ बार जी के सारेगामापा कार्यक्रम में विजेता रही है, जो अब तक भी किसी भी महिला प्रतिभागी की तरफ़ से एक रिकॉर्ड है. स्वर्गीय मास्टर मदन की याद में संगम कला ग्रुप द्वारा आयोजित हीरो होंडा नेशनल टेलंट हंट में ह्रिचा विजेता रही. और भी ढेरों प्रतियोगिताओं में प्रथम रही ह्रिचा ने सहारा इंडिया के अन्तराष्ट्रीय आयोजन "भारती" में ३ सालों तक परफोर्म किया और देश विदेश में ढेरों शोस् किये. फ़्रांस, जर्मनी, पोलेंड, बेल्जियम, इस्राईल जैसे अनेक देशों में बहुत से अन्तराष्ट्रीय कलाकारों के साथ एक मंच पर कार्यक्रम देने का सौभाग्य इन्हें मिला और साथ ही बहुत से यूरोपियन टीवी कार्यक्रमों में भी शिरकत की. अनेकों रेडियो, टी वी धारावाहिकों, लोक अल्बम्स, और जिंगल्स में अपनी आवाज़ दे चुकी ह्रिचा, बौलीवुड की क्रोस ओवर फिल्म "भैरवी" और बहुत सी राजस्थानी फ़िल्में जैसे "दादोसा क्यों परणाई", "ताबीज", "मारी तीतरी" जैसी फिल्मों में पार्श्वगायन कर चुकी हैं.

विश्व दीपक
विश्व दीपक हिन्द-युग्म की शुरूआत से ही हिन्द-युग्म से जुड़े हैं। आई आई टी, खड़गपुर से कम्प्यूटर साइंस में बी॰टेक॰ विश्व दीपक इन दिनों पुणे स्थित एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। अपनी विशेष कहन शैली के लिए हिन्द-युग्म के कविताप्रेमियों के बीच लोकप्रिय विश्व दीपक आवाज़ का चर्चित स्तम्भ 'महफिल-ए-ग़ज़ल' के स्तम्भकार हैं। विश्व दीपक ने दूसरे संगीतबद्ध सत्र में दो गीतों की रचना की। इसके अलावा दुनिया भर की माँओं के लिए एक गीत को लिखा जो काफी पसंद किया गया।
Song - Dhaayi Aakhar
Vocals - Hricha Debraj
Music - Satish Vammi
Lyrics - Vishwa Deepak "Tanha"
Graphics - Prashen's media


Song # 19, Season # 03, All rights reserved with the artists and Hind Yugm

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Friday, September 10, 2010

गीली आँखों के धुंधले मंजर में भी दिखी उम्मीद की लहर - बॉलीवुड अंदाज़ के जख्मों को हॉलीवुड अंदाज़ का मरहम

Season 3 of new Music, Song # 19

आज आवाज़ महोत्सव में पहली बार एक ऐसा गीत पेश होने जा रहा है, जिसमें रैप गायन है, जो दो पुरुष गायकों की आवाजों में है और जिसमें दो भाषाओं में शब्द लिखे गए हैं. "प्रभु जी" गीत की आपार सफलता के बाद श्रीनिवास पंडा फिर लौटे हैं इस सत्र में और जैसा हर बार होता है वो अपने श्रोताओं के लिए कुछ नया लेकर ही आये हैं. गीत दृभाषीय है, तो यहाँ हिंदी के शब्द सजीव सारथी ने लिखे है अंग्रेजी शब्द रचे हैं खुद रैपर आसिफ ने जो खुद को "रेग्गड स्कल" कहते हैं. श्रीराम की आवाज़ आप इससे पहले सूफी गीत "हुस्न-ए-इलाही" में सुन चुके है, आज के गीत में उनका अंदाज़ एकदम अलग है. ये एक एक्सपेरिमेंटल गीत है जिसमें संगीत के दो अलग अलग आयामों का मिश्रण करने की कोशिश की गयी है, हम उम्मीद करेंगें कि हमारे श्रोताओं को ये प्रयोग अच्छा लगेगा.

गीत के बोल -

सांसे चुभे सीने में जैसे खंजर,
गीली हैं ऑंखें धुंधला है सारा मंजर, (2)
मेरे पैरों हैं जमीं न सर पे आसमाँ है,
जब से वो खफा हुआ,
कोई पूछे क्या गिला है, जाने क्या वज़ा है,
जो वो बेवफा हुआ……

You should know nothin’ ever gonna last
But you dwellin’ on the past and you hurtin’ pretty bad
And I hate that I’m blunt but you gonna understand
In a week in, a month when you back up on the track
I can imagine what you going through I’ve been there
Cursin’ sometimes at the times that she been there
Lookin at her pictures reminiscing; it was rapture
The ones that hurt is the one with all the laughter [x2]
But the day will come when you gonna skip to another chapter
And then you gonna be smiling hereafter.

कोई कैसे मुस्कुराए, पलकों में छुपाये,
आंसू ओं का सैलाब,
कोई शम्मा न सितारा, दिल है बेसहारा,
मिटने को है बेताब,

खामोशियों में डूबी हर सदा है,
बेचैनियों का क्या ये सिलसिला है,
मेरे रूठे दो जहाँ हैं, टूटे सब गुमाँ है,
जब से वो जुदा हुआ,
कोई पूछे क्या गिला है, जाने क्या वज़ा है,
जो वो बेवफा हुआ……

I know at nights you be losin’ ya sleep
Bleedin inside from your wounds and it’s deep
Just breathe – hold it in for a second
Expellin’ all ya hurt, exhale the depression
Time waits for no man but heals all wounds
No time to waste thinkin it ended too soon
Never brood over love don’t be lost to the gloom
She ain’t know what she lost she ain’t got no clue
Remember the things that you loved in her dude
But you gotta live your life coz you’re worth one too
Gotta forget cuz I am sure that you through.

कोई कैसे भूल पाए, यादों से छुडाये,
लाये दिल को बहला,
कोई सपना वो नहीं था, अपना था यहीं था,
पल में जो है बदला,
कैसे सहें हम, गम जो ये मिला है,
चाक जिगर कब किसका सिला है,
उस पे सब कुछ मिटाके, जान-ओ-दिल लुटाके,
क्योंकर मैं फ़िदा हुआ,
कोई पूछे क्या गिला है, जाने क्या वज़ा है,
जो वो बेवफा हुआ……

Truth is you had something in your life
That most never find when they look all the time
And you stuck here waitin’ for the hurt to pass
But you can’t have the light without the dark it’s a fact
Move on – forget the past let it be
Where it be and you still got hope so believe
That you’ll find – someone more fine
With something more divine !!


यह गीत अब आर्टिस्ट एलोड़ पर बिक्री के लिए उपलब्ध है...जिसकी शर्तों के चलते इस पृष्ठ से निकाल दिया गया है, कृपया सुनने और खरीदने के लिए यहाँ जाएँ.

मेकिंग ऑफ़ "सांसें चुभे" - गीत की टीम द्वारा

श्रीनिवास पंडा: मैंने अपने बहुत से दोस्तों को अक्सर "ब्रेक अप" के बाद बेहद निराश और उदास होते देखा है. तो मन में ख्याल आया कि क्यों न एक गीत के माध्यम से उस दौर से गुजर रहे अपने साथियों कुछ प्रेरणा दूं. मैं इस गीत में रैप चाहता था, तो विचार आया कि इसे एक संवाद रूप में बनाया जाए, दो किरदारों के लिए अलग अलग स्वर लेकर. मैंने एक धुन बनायीं और सजीव जी से इस बारे में बात की. कुछ दिनों में ही उन्होंने इतना बढ़िया गाना उस धुन पर लिख भेजा कि मेरा भी अर्रेंज्मेंट करने का उत्साह बढ़ गया. इस गीत में सबसे बड़ी चुनौती थी, एक अच्छा रैपर ढूँढने की. इस काम में मित्र राहुल सोमन ने मदद की. हमें आसिफ जैसा रैपर ढूँढने में करीब ४ महीने लगे. अधिकतर रैपर अपने शब्द खुद लिखते हैं. आसिफ ने भी अपने लिखे शब्दों को गा कर मुझे भेजा अपनी तमाम व्यस्ताओं के बीच भी, वो भी मात्र एक माह में. इसी दौरान ऋषि के माध्यम से मुझे श्रीराम का परिचय मिला, उन्होंने भी गाने का निमंत्रण सहर्ष स्वीकार कर लिए और इस तरह करीब ६ महीनों की मेहनत के बाद बन कर तैयार हुआ ये गीत.

श्रीराम ईमनि: जब श्रीनि ने पहली बार मुझसे इस गीत की बात की तो उनकी बातों से लगा कि ये बहुत ही आसान सा गाना होगा. पर जब मैंने इसे सुना तो तो इसकी होंटिंग धुन और सोलफुल शब्दों ने मुझे डुबो ही दिया. उपर से रेग्गड़ स्कल के शानदार रैप इस पर चार चाँद लगा रहा था. मैंने फैसला किया कि मैं इस गीत को भरपूर समय दूँगा और जब तक पूरी तरह से रिहर्स न कर लूं अंतिम टेक नहीं लूँगा. धुन जो सुनने में सरल लगती है बहुत से उतार छडाव से भरी है, और दूसरी चुनौती ये थी कि अधिकतर पंक्तियाँ एक सांस में गाने वाली थी, तमाम शब्दों में छुपे भावों के ध्यान में रखकर. मुझे लगता है कि अंतिम परिणाम से श्रीनि भाई संतुष्ट होंगें. मैं रैपर रेग्गड़ स्कल को विशेष बधाई देना चाहूँगा, जब मैंने पहली बार सुना तो लगा कि किसी विदेशी फनकार ने किया होगा. यक़ीनन ये बहुत ही प्रो है. सजीव जी के शब्द और श्रीनिवास का अर्रेंज्मेंट ने इस गीत को एक अलग ही मुकाम दिया है, मेरे लिए इस गीत में काम करना एक संतोषजनक तजुर्बा रहा

सजीव सारथी: इस गीत में दो किरदार हैं और मेरा काम एक किरदार को शब्द देना था जो अपनी महबूबा या प्रेमिका के धोखे से बेहद दुखी और निराश है, उसकी सोच नकारात्मक है. काफी क्लीशे सिचुएशन था पर देखिये श्रीनि ने इसमें भी कितना नयापन प्रस्तुत कर दिखाया है. धुन का बहाव बहुत ही बढ़िया था, तो मुझे लगा कि यहाँ शब्दों को तोड़ तोड़ कर खेला जा सकता है. इस गीत पर काम करने में बहुत मज़ा आया, और श्रीराम को ख़ास आभार कि उन्होंने उन तोड़े हुए शब्दों को बेहद अच्छे से और भाव में डूब कर गाया. श्रीनि के साथ काम करना हमेशा ही एक सुखद अनुभव होता है, और मुझे ख़ुशी है कि उन्होंने इस अनूठे और दिलचस्प गीत का मुझे हिस्सा बनाया. राहुल और आसिफ को ख़ास धन्येवाद जिनके योगदान के बिना शायद ये संभव नहीं हो पाता.

आसिफ अकबर (Ragged Skull): जब श्रीनिवास ने पहले मुझे ये गीत सुनाया तो मुझे लगा कि ये मेरे लिए एक नयी जमीं पर खुदाई करने जैसा होगा. दरअसल मैं रोजमर्रा के जीवन पर अपनी कलम चलाता था, पर पहले कभी इस तरह के किसी विषय पर लिखने का नहीं सोचा, क्योंकि मैं जानता हूँ कि यादें कभी मरती नहीं हैं, वो छुपी रहती है, और जब कोई कुरेदे तो फिर जाग उठती हैं, तो यक़ीनन आसान नहीं है कहना कि भूल जाओ...श्रीनिवास की धुन में गीत के थीम के सभी भाव थे मुझे बस उसके बीट पकड़ने थे अपने शब्दों के लिए, सजीव ने जो लिखा उसने निश्चित ही मुझे प्रेरणा दी. ये मेरे पहले के सभी प्रोजेक्ट्स से अलग था, क्योंकि श्रीनिवास के जेहन में बिलकुल साफ़ था कि वो क्या चाहते हैं. अंतिम शब्द सरंचना से पहले हमारे बीच बहुत सी चर्चाएं हुई. मैं अपने काम से बेहद संतुष्ट हूँ और श्रीनिवास, सजीव और श्रीराम के साथ और भी इस तरह के विचारोत्तेजक गीतों में काम करना चाहूँगा.
श्रीराम ईमनि
मुम्बई में जन्मे और पले-बढे श्रीराम गायन के क्षेत्र में महज़ ७ साल की उम्र से सक्रिय हैं। ये लगभग एक दशक से कर्नाटक संगीत की शिक्षा ले रहे हैं। आई०आई०टी० बम्बे से स्नातक करने के बाद इन्होंने कुछ दिनों तक एक मैनेजमेंट कंसल्टिंग कंपनी में काम किया और आज-कल नेशनल सेंटर फॉर द परफ़ोर्मिंग आर्ट्स (एन०सी०पी०ए०) में बिज़नेस डेवलपेंट मैनेज़र के तौर पर कार्यरत हैं। श्रीराम ने अपने स्कूल और आई०आई०टी० बम्बे के दिनों में कई सारे स्टेज़ परफोरमेंश दिए थे और कई सारे पुरस्कार भी जीते थे। ये आई०आई०टी० के दो सबसे बड़े म्युज़िकल नाईट्स "सुरबहार" और "स्वर संध्या" के लीड सिंगर रह चुके हैं। श्रीराम हर ज़ौनर का गाना गाना पसंद करते हैं, फिर चाहे वो शास्त्रीय रागों पर आधारित गाना हो या फिर कोई तड़कता-फड़कता बालीवुड नंबर। इनका मानना है कि कर्नाटक संगीत में ली जा रही शिक्षा के कारण हीं इनकी गायकी को आधार प्राप्त हुआ है। ये हर गायक के लिए शास्त्रीय शिक्षा जरूरी मानते हैं। हिन्द-युग्म (आवाज़) पर यह इनका दूसरा गाना है।

श्रीनिवास पंडा
तेलगू, उड़िया और हिंदी गीतों में संगीत देने वाले श्रीनिवास पंडा का एक उड़िया एल्बम 'नुआ पीढ़ी' रीलिज हो चुका है। इन दिनों मुंबई में हैं और बैंक ऑफ अमेरिका में कार्यरत हैं। गीतकास्ट में लगातार चार बार विजेता रह चुके हैं। 'काव्यनाद' एल्बम में इनके 3 गीत संकलित हैं। पेशे से तकनीककर्मी श्रीनिवास हर गीत को एक नया ट्रीटमेंट देने के लिए जाने जाते हैं

सजीव सारथी
हिन्द-युग्म के 'आवाज़' मंच के प्रधान संपादक सजीव सारथी हिन्द-युग्म के वरिष्ठतम गीतकार हैं। हिन्द-युग्म पर इंटरनेटीय जुगलबंदी से संगीतबद्ध गीत निर्माण का बीज सजीव ने ही डाला है, जो इन्हीं के बागवानी में लगातार फल-फूल रहा है। कविहृदयी सजीव की कविताएँ हिन्द-युग्म के बहुचर्चित कविता-संग्रह 'सम्भावना डॉट कॉम' में संकलित है। सजीव के निर्देशन में ही हिन्द-युग्म ने 3 फरवरी 2008 को अपना पहला संगीतमय एल्बम 'पहला सुर' ज़ारी किया जिसमें 6 गीत सजीव सारथी द्वारा लिखित थे। पूरी प्रोफाइल यहाँ देखें।

आसिफ (रेग्गड़ स्कल)
आसिफ एक रैपर हैं जो त्रिचूर केरल में रहते है, बहुत से व्यावसायिक विज्ञापनों के लिए गा चुके हैं, मलयालम फिल्म "अनवर" के लिए भी गायन कर चुके हैं. हिंद युग्म के ये पहले रैपर हैं. अभी अंग्रेजी में गाते हैं, पर हमें उम्मीद है कि हिंद युग्म इनसे कभी हिंदी रैप भी गवा लेगा
Song - Sansen Chubhe (Tears and Hope)
Vocals - Sreeram Emaani & Asif (Ragged Skull)
Music - Srinvias Panda
Lyrics - Sajeev Sarathie (hindi)
rap lyrics - Asif (Ragged Skull)
Graphics - Prashen's media


Song # 19, Season # 03, All rights reserved with the artists and Hind Yugm

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Friday, August 20, 2010

जब हुस्न-ए-इलाही बेपर्दा हुआ वी डी, ऋषि और नए गायक श्रीराम के रूबरू

Season 3 of new Music, Song # 17

सूफी गीतों का चलन इन दिनों इंडस्ट्री में काफी बढ़ गया है. लगभग हर फिल्म में एक सूफियाना गीत अवश्य होता है. ऐसे में हमारे संगीतकर्मी भी भला कैसे पीछे रह सकते हैं. सूफी संगीत की रूहानियत एक अलग ही किस्म का आनंद लेकर आती है श्रोताओं के लिए, खास तौर पे जब बात हुस्न-ए-इलाही की तो कहने ही क्या. जिगर मुरादाबादी के कलाम को विस्तार दिया है विश्व दीपक तन्हा ने. दोस्तों गुलज़ार साहब इंडस्ट्री में इस फन के माहिर समझे जाते हैं. ग़ालिब, मीर आदि उस्ताद शायरों के शेरों को मुखड़े की तरह इस्तेमाल कर आगे एक मुक्कमल गीत में ढाल देने का काम बेहद खूबसूरती से अंजाम देते रहे हैं वो. हम ये दावे के साथ कह सकते हैं इस बार हमारे गीतकार उनसे इक्कीस नहीं तो उन्नीस भी नहीं हैं यहाँ. ऋषि ने पारंपरिक वाद्यों का इस्तेमाल कर सुर रचे हैं तो गर्व के साथ हम लाये हैं एक नए गायक श्रीराम को आपके सामने जो दक्षिण भारतीय होते हुए भी उर्दू के शब्दों को बेहद उ्म्दा अंदाज़ में निभाने का मुश्किल काम कर गए हैं इस गीत में. साथ में हैं श्रीविद्या, जो इससे पहले "आवारगी का रक्स" गा चुकी हैं हमारे लिए. तो एक बार सूफियाना रंग में रंग जाईये, और डूब जाईये इस ताज़ा गीत के नशे में.

गीत के बोल -


इश्क़.. इश्क़
मौला का करम
इश्क़... इश्क़
आशिक का धरम

हम कहीं जाने वाले हैं दामन-ए-इश्क़ छोड़कर,
ज़ीस्त तेरे हुज़ूर में, मौत तेरे दयार में.....

हबीब-ए-हुस्न-ए-इलाही
हबीब-ए-हुस्न-ए-इलाही

हम ने जिगर की
बातें सुनी हैं
मीलों आँखें रखके
रातें सुनी हैं
एक हीं जिकर है
सब की जुबां पे
साँसें सारी जड़ दे
शाहे-खुबां पे

सालों ढूँढा खुद में जो रेहां
हमने पाया तुझमें वो निहां..

खुल्द पूरा हीं वार दें, हम तो तेरे क़रार पे....

हबीब-ए-हुस्न-ए-इलाही...
हबीब-ए-हुस्न-ए-इलाही...

मोहब्बत काबा-काशी
मोहब्बत कासा-कलगी
मोहब्बत सूफ़ी- साकी,
मोहब्बत हर्फ़े-हस्ती..

एक तेरे इश्क़ में डूबकर हमें मौत की कमी न थी,
पर जी गए तुझे देखकर, हमें ज़िंदगी अच्छी लगी।



मेकिंग ऑफ़ "हुस्न-ए-इलाही" - गीत की टीम द्वारा

श्रीराम: मैं सूफ़ी गानों का हमेशा से हीं प्रशंसक रहा हूँ, इसलिए जब ऋषि ने मुझसे यह पूछा कि क्या मैं "हुस्न-ए-इलाही" गाना चाहूँगा, तो मैंने बिना कुछ सोचे फटाफट हाँ कह दिया। इस गाने की धुन और बोल इतने खूबसूरत हैं कि पहली मर्तबा सुनने पर हीं मैं इसका आदी हो चुका था। गाने की धुन साधारण लग सकती है, लेकिन गायक के लिए इसमें भी कई सारे रोचक चैलेंजेज थे/हैं। ऋषि चाहते थे कि कि "सालों ढूँढा खुद में जो रेहां" पंक्ति को एक हीं साँस में गाया जाए। अब चूँकि यह पंक्ति बड़ी हीं खूबसूरत है तो मुझे हर लफ़्ज़ में जरूरी इमोशन्स और एक्सप्रेसन्स भी डालने थे और बिना साँस तोड़े हुए (जो कि असल में टूटी भी) यह करना लगभग नामुमकिन था। मैं उम्मीद करता हूँ कि मैंने इस पंक्ति के साथ पूरा न्याय किया होगा। इस गाने में कुछ शब्द ऐसे भी हैं, जिन्हें पूरे जोश में गाया जाना था और साथ हीं साथ गाने की स्मूथनेस भी बरकरार रखनी थी, इसलिए आवाज़ के ऊपर पूरा नियंत्रण रखना जरूरी हो गया था। विशेषकर गाने की पहली पंक्ति, जो हाई-पिच पर है.. इसे ऋषि ने गाने में तब जोड़ा जब पूरे गाने की रिकार्डिंग हो चुकी थी। चूँकि यह मेरा पहला ओरिजिनल है, इसलिए मेरी पूरी कोशिश थी कि यह गाना वैसा हीं बनकर निकले, जैसा ऋषि चाहते थे। मैं यह कहना चाहूँगा कि इसे गाने का मेरा अनुभव शानदार रहा। साथ हीं मैं श्रीविद्या की तारीफ़ करना चाहूँगा। उनकी मधुर मेलोडियस आवाज़ ने इस गाने में चार चाँद लगा दिए हैं। और अंत में मैं ऋषि और विश्व दीपक को इस खूबसूरत गाने के लिए बधाई देना चाहूँगा।

श्रीविद्या:मेर हिसाब से हर गीत कुछ न कुछ आपको सिखा जाता है. इस गीत में मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित किया इसकी धुन ने जो सूफी अंदाज़ की गायिकी मांगती है. हालाँकि मेरा रोल गीत में बेहद कम है पर फिर भी मैं खुश हूँ कि मैं इस गीत का हिस्सा हूँ. ये ऋषि के साथ मेरा दूसरा प्रोजेक्ट है और मुझे ख़ुशी है विश्व दीपक और श्रीराम जैसे पतिभाशाली कलाकारों के साथ ऋषि ने मुझे इस गीत के माध्यम से काम करने का मौका दिया

ऋषि एस: "हुस्न-ए-इलाही" गाने का मुखड़ा "जिगर मुरादाबादी" का है.. मेरे हिसाब से मुखड़ा जितना खूबसूरत है, उतनी हीं खूबसूरती से वी डी जी ने इसके आस-पास शब्द डाले हैं और अंतरा लिखा है। आजकल की तकनीकी ध्वनियों (टेक्नो साउंड्स) के बीच मुझे लगा कि एक पारंपरिक तबला, ढोलक , डफ़्फ़ वाला गाना होना चाहिए, और यही ख्याल में रखकर मैंने इस गाने को संगीतबद्ध किया है। मुंबई के श्रीराम का यह पहला ओरिज़िनल गाना है। उन्होंने इस गाने के लिए काफ़ी मेहनत की है और अपने धैर्य का भी परिचय दिया है। मैंने उनसे इस गाने के कई सारे ड्राफ़्ट्स करवाए, लेकिन वे कभी भी मजबूरी बताकर पीछे नहीं हटे। उनकी यह मेहनत इस गाने में खुलकर झलकती है। आउटपुट कैसा रहा, यह तो आप गाना सुनकर हीं जान पाएँगें। इस गाने में फीमेल लाइन्स बहुत हीं कम हैं, फिर भी श्रीविद्या जी ने अपनी आवाज़ देकर गाने की खूबसूरती बढा दी है। इस गाने को साकार करने के लिए मैं पूरी टीम का तह-ए-दिल से आभारी हूँ।

विश्व दीपक: आवाज़ पर महफ़िल-ए-ग़ज़ल लिखते-लिखते न जाने मैंने कितना कुछ जाना, कितना कुछ सीखा और कितना कुछ पाया.. यह गाना भी उसी महफ़िल-ए-ग़ज़ल की देन है। जिगर मुरादाबादी पर महफ़िल सजाने के लिए मैंने उनकी कितनी ग़ज़लें खंगाल डाली थी, उसी दौरान एक शेर पर मेरी नज़र गई। शेर अच्छा लगा तो मैंने उसे अपना स्टेटस मैसेज बना लिया। अब इत्तेफ़ाक देखिए कि उस शेर पर ऋषि जी की नज़र गई और उन्होंने उस शेर को मेरा शेर समझकर एक गाने का मुखरा गढ डाला। आगे की कहानी यह सूफ़ियाना नज़्म है| जहाँ तक इस नज़्म में गायिकी की बात है, तो पहले हम इसे पुरूष एकल (मेल सिंगल) हीं बनाना चाहते थे, लेकिन हमें सही मेल सिंगर मिल नहीं रहा था। हमने यह गाना श्रीराम से पहले और दो लोगों को दिया था। एक ने पूरा रिकार्ड कर भेज भी दिया, लेकिन हमें उसकी गायिकी में कुछ कमी-सी लगी। तब तक हमारा काफ़ी समय जा चुका था। ऋषि इस गाने को जल्द हीं रिकार्ड करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने मुझसे पूछा कि हमारे पास फीमेल सिंगर्स हैं, क्या हम इसे फीमेल सॉंग बना सकते हैं। मुझे कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन ऋषि को हीं लगा कि गाने का मूड और गाने का थीम मेल सिंगर को ज्यादा सूट करता है। इस मुद्दे पर सोच-विचार करने के बाद आखिरकार हमने इसे दो-गाना (डुएट) बनाने का निर्णय लिया। श्रीविद्या ने अपनी रिकार्डिंग हमें लगभग एक महीने पहले हीं भेज दी थी। उनकी मीठी आवाज़ में आलाप और "इश्क़ इश्क़" सुनकर हमें अपना गाना सफल होता दिखने लगा। लेकिन गाना तभी पूरा हो सकता था, जब हमें एक सही मेल सिंगर मिल जाता। इस मामले में मैं कुहू जी का शुक्रिया अदा करना चाहूँगा, जिन्होंने ऋषि को श्रीराम का नाम सुझाया। श्रीराम की आवाज़ में यह गाना सुन लेने के बाद हमें यह पक्का यकीन हो चला था कि गाना लोगों को पसंद आएगा। मुज़िबु पर इस गाने को लोगों ने हाथों-हाथ लिया है, आशा करता हूँ कि हमारे आवाज़ के श्रोता भी इसे उतना हीं प्यार देंगे।

श्रीराम ऐमनी
मुम्बई में जन्मे और पले-बढे श्रीराम गायन के क्षेत्र में महज़ ७ साल की उम्र से सक्रिय हैं। ये लगभग एक दशक से कर्नाटक संगीत की शिक्षा ले रहे हैं। आई०आई०टी० बम्बे से स्नातक करने के बाद इन्होंने कुछ दिनों तक एक मैनेजमेंट कंसल्टिंग कंपनी में काम किया और आज-कल नेशनल सेंटर फॉर द परफ़ोर्मिंग आर्ट्स (एन०सी०पी०ए०) में बिज़नेस डेवलपेंट मैनेज़र के तौर पर कार्यरत हैं। श्रीराम ने अपने स्कूल और आई०आई०टी० बम्बे के दिनों में कई सारे स्टेज़ परफोरमेंश दिए थे और कई सारे पुरस्कार भी जीते थे। ये आई०आई०टी० के दो सबसे बड़े म्युज़िकल नाईट्स "सुरबहार" और "स्वर संध्या" के लीड सिंगर रह चुके हैं। श्रीराम हर ज़ौनर का गाना गाना पसंद करते हैं, फिर चाहे वो शास्त्रीय रागों पर आधारित गाना हो या फिर कोई तड़कता-फड़कता बालीवुड नंबर। इनका मानना है कि कर्नाटक संगीत में ली जा रही शिक्षा के कारण हीं इनकी गायकी को आधार प्राप्त हुआ है। ये हर गायक के लिए शास्त्रीय शिक्षा जरूरी मानते हैं। हिन्द-युग्म (आवाज़) पर यह इनका पहला गाना है।

श्रीविद्या कस्तूरी
कर्णाटक संगीत की शिक्षा बचपन में ले चुकी विद्या को पुराने हिंदी फ़िल्मी गीतों का खास शौक है, ये भी मुजीबु पे सक्रिय सदस्या हैं. ये इनका दूसरा मूल हिंदी गीत है। हिन्द-युग्म पर इनकी दस्तक सजीव सारथी के लिखे और ऋषि द्वारा संगीतबद्ध गीत "आवारगी का रक्स" के साथ हुई थी।

ऋषि एस
ऋषि एस॰ ने हिन्द-युग्म पर इंटरनेट की जुगलबंदी से संगीतबद्ध गीतों के निर्माण की नींव डाली है। पेशे से इंजीनियर ऋषि ने सजीव सारथी के बोलों (सुबह की ताज़गी) को अक्टूबर 2007 में संगीतबद्ध किया जो हिन्द-युग्म का पहला संगीतबद्ध गीत बना। हिन्द-युग्म के पहले एल्बम 'पहला सुर' में ऋषि के 3 गीत संकलित थे। ऋषि ने हिन्द-युग्म के दूसरे संगीतबद्ध सत्र में भी 5 गीतों में संगीत दिया। हिन्द-युग्म के थीम-गीत को भी संगीतबद्ध करने का श्रेय ऋषि एस॰ को जाता है। इसके अतिरिक्त ऋषि ने भारत-रूस मित्रता गीत 'द्रुजबा' को संगीत किया। मातृ दिवस के उपलक्ष्य में भी एक गीत का निर्माण किया। भारतीय फिल्म संगीत को कुछ नया देने का इरादा रखते हैं।

विश्व दीपक 'तन्हा'
विश्व दीपक हिन्द-युग्म की शुरूआत से ही हिन्द-युग्म से जुड़े हैं। आई आई टी, खड़गपुर से कम्प्यूटर साइंस में बी॰टेक॰ विश्व दीपक इन दिनों पुणे स्थित एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। अपनी विशेष कहन शैली के लिए हिन्द-युग्म के कविताप्रेमियों के बीच लोकप्रिय विश्व दीपक आवाज़ का चर्चित स्तम्भ 'महफिल-ए-ग़ज़ल' के स्तम्भकार हैं। विश्व दीपक ने दूसरे संगीतबद्ध सत्र में दो गीतों की रचना की। इसके अलावा दुनिया भर की माँओं के लिए एक गीत को लिखा जो काफी पसंद किया गया।

Song - Husn-E-Ilaahi
Voice - Sriraam and Srividya
Music - Rishi S
Lyrics - Vishwa Deepak
Graphics - Prashen's media


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Friday, July 23, 2010

दुम न हिलाओ, कान काट खाओ.....उबलता आक्रोश युवाओं का समेटा वी डी, ऋषि और उन्नी ने इस नए गीत में

Season 3 of new Music, Song # 15

"जला दो अभी फूंक डालो ये दुनिया...", गुरु दत्त के स्वरों में एक सहमा मगर संतुलित आक्रोश था जिसे पूरे देश के युवाओं में समझा. बाद के दशकों में ये स्वर और भी मुखरित हुए, कभी व्यंग बनकर (हाल चाल ठीक ठाक है) कभी गुस्सा (दुनिया माने बुरा तो गोली मारो) तो कभी अंडर करंट आक्रोश (खून चला) बनकर. कुछ ऐसे ही भाव लेकर आये हैं आज के युवा गीतकार विश्व दीपक "तन्हा" अपने इस नए गीत में. ऋषि पर आरोप थे कि उनकी धुनों में नयापन नहीं दिख रहा, पर हम बताना चाहेंगें कि हमारे अब तक के सभी सत्रों में ऋषि के गीत सबसे अधिक बजे हैं, जाहिर है एक संगीतकार के लिहाज से उनका अपना एक स्टाइल है जो अब निखर कर सामने आ रहा है, रही बात विविधता की तो हमें लगता है कि जितने विविध अंदाज़ ऋषि ने आजमाए हैं शायद ही किसी ने किये होंगें. अब आज का ही गीत ले लीजिए, ये उनके अब तक के सभी गीतों से एकदम अलग है. गायक उन्नी का ये दूसरा गीत है इस सत्र में, पर पहला एकल गीत भी है ये उनका. गीत के अंत में कुछ संवाद भी हैं जिन्हें आवाज़ दी है खुद विश्व दीपक ने, बैक अप आवाज़ तो ऋषि की है ही....तो लीजिए सुनिए आज का ये जोश से भरा दनदनाता गीत.

गीत के बोल -

सादी या आधी या पौनी थालियाँ,
भूखे को सारी……. हैं गालियाँ….

झटका ज़रा दो,
फ़टका जमा दो,
हक़ ना मिले तो,
ऐसी की तैसी……

दुम ना हिलाओ,
कान काट खाओ,
हड्डियाँ चबाओ,
ऐसी की तैसी….

भुलावे में जिये अभी तक,
चढावे में दिये उन्हें सब,
मावे की लगी जो हीं लत,
वादों पे लगी चपत…….

झटका ज़रा दो,
फ़टका जमा दो,
हक़ ना मिले तो,
ऐसी की तैसी……

दुम ना हिलाओ,
कान काट खाओ,
हड्डियाँ चबाओ,
ऐसी की तैसी….

लुट के, घुट के, फुट के, रोना क्या?
लुट के, घुट के, फुट के, रोना क्या?
लुट के, घुट के, फुट के, रोना क्या?
लुट के, घुट के, फुट के, रोना क्या?

बढ के गढ ले…. आ जा………. बरछा धर ले…….

ऐसी की तैसी….

मौका है ये
जाने ना दे
कांधे पर से

बेताल फिर डाल पर….

छलावे से छिने हुए घर ,
अलावे जां जमीं मुकद्दर,
दावे से तेरे होंगे सब,
हो ले जो ऐसा अजब…

झटका ज़रा दो,
फ़टका जमा दो,
हक़ ना मिले तो,
ऐसी की तैसी……

दुम ना हिलाओ,
कान काट खाओ,
हड्डियाँ चबाओ,
ऐसी की तैसी….

कचरा हटा दो,
ऐसी की तैसी….
लफ़ड़ा मिटा दो,
ऐसी की तैसी…

तुम्हें बिगड़ा कहे जो,
पिछड़ा कहे जो,
उसकी तो
ऐसी की तैसी…



ऐसी की तैसी - द रीबेल है मुज़ीबु पर भी, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा है... देखिए यहाँ

मेकिंग ऑफ़ "ऐसी की तैसी- द रीबेल" - गीत की टीम द्वारा

ऋषि एस: ये शायद मेरा पहला गाना है जो मेलोडी पर आधारित नहीं है। ऐसे गानों की उम्र कम होती है क्योंकि ५ या १० सालों बाद समकालीन संगीत (contemporary music) का साउंड बदल जाएगा और ऐसे गानों को सुनने में तब मज़ा नहीं आएगा जितना आज आता है। ऐसी हालत में गाने को जीवित रखने वाली बात उसके बोल में होती है, और इस गाने में वीडी ने सामाजिक मुद्दों से जुड़ा विषय चुना है। गाने में जो संदेश है वही इस गाने को समय के साथ बिखरने, बिगड़ने और पुराना होने से बचाएगा और यही संदेश गाने में जो मेलोडी की कमी है उसे पूरा करेगा। इसलिए मुझे इस गाने पर फख्र है। उन्नी के साथ यह मेरा पहला गाना है। भले हीं उन्नी ने इस जौनर का कोई भी गाना पहले नहीं गाया है, लेकिन पहले प्रयास में हीं उन्नी ने इस गाने को बखूबी निभाया है।

उन्नीकृष्णन के बी: ये एक बहुत ही शानदार तजुर्बा रहा मेरे लिए. अमूमन मैं कुछ शास्त्रीय या राग आधारित रोमांटिक गीत गाना अधिक पसंद करता था, पर ये गाना अपने संगीत में, शब्दों में ट्रीटमेंट में हर लिहाज से एकदम अलग था. इसे गाने के लिए मुझे अपने कम्फर्ट जोन से बाहर आना था, ऋषि और वी डी का ये आईडिया था और उन्हें इस पर पूरा विश्वास भी था, संशय था तो बस मुझे था क्योंकि मेरे लिए ये स्टाईल बिलकुल अलग था, पर इन दोनों के निर्देशन में मैंने ये कोशिश की, और मुझे गर्व है जो भी अंतिम परिणाम आया है, इस गीत का हिस्सा मुझे बनाया इसके लिए मैं ऋषि और वी डी का शुक्रगुजार हूँ.

विश्व दीपक तन्हा: बहुत दिनों से मेरी चाहत थी कि ऐसा हीं कुछ लिखूँ, लेकिन सही मौका नहीं मिल पा रहा था। फिर एक दिन ऋषि जी ने इस गाने का ट्युन भेजा। पहली मर्तबा सुनने पर हीं यह जाहिर हो गया कि इसके साथ कुछ अलग किया जा सकता है। लेकिन ऋषि जी ने समय की कमी का हवाला देकर यह कह दिया कि आप जो कुछ भी लिख सकते हो, लिख दो, जरूरी नहीं कि हम कोई ठोस संदेश दे हीं। फिर भी मैंने उन्हें विश्वास दिलाया कि कुछ न कुछ संदेश तो होगा हीं, क्योंकि किसी मस्ती भरे गाने के माध्यम से अगर हम समाज को मैसेज़ देने में कामयाब होते हैं तो इसमें हमारी जीत है। मैने उन्हें यह भी यकीन दिलाया कि मैं इसे लिखने में ज्यादा समय न लूँगा, इसलिए आप मेरी तरफ से निश्चिंत रहें। गाना लिखने के दौरान मैंने एक-दो जगहों पर ट्युन से भी छेड़-छाड़ की, जैसे "बेताल फिर डाल पर" यह पंक्ति कहीं भी फिट नहीं हो रही थी, फिर भी ऋषि जी ने मेरी भावनाओं का सम्मान करते हुए बोल के हिसाब से धुन में परिवर्त्तन कर दिया। गाने के बोल और धुन तैयार हो जाने के बाद गायक की बात आई तो ऋषि जी ने उन्नी के नाम का सुझाव दिया। मैने उन्नी को पहले सुना था और मुझे उनकी आवाज़ पसंद भी आई थी, इसलिए मैंने भी हामी भर दी। मेरे हिसाब से उन्नी ने इस गाने के लिए अच्छी-खासी मेहनत की है और यह मेहनत गाने में दिखती है। हम तीनों ने मिलकर जितना हो सकता था, उतना "आक्रोश" इस गाने में डाला है.. उम्मीद करता हूँ कि आप तक हमारी यह फीलिंग पहूँचेगी। और हाँ, इस गाने के अंतिम ५ या १० सेकंड मेरी आवाज़ में हैं। ऋषि जी कहते हैं कि यह मेरी गायकी की शुरूआत है, आपको भी ऐसा लगता है क्या? :)
उन्नीकृष्णन के बी
उन्नीकृष्णन पेशे से कम्प्यूटर इन्जीनियर हैं लेकिन संगीत का शौक बचपन से ही रखते हैं। कर्नाटक शास्त्रीय संगीत में इन्होंने विधिवत शिक्षा प्राप्त की है तथा स्कूल व कालिज में भी स्टेज पर गाते आये हैं। नौकरी शुरू करने के बाद कुछ समय तक उन्नी संगीत को अपनी दिनचर्या में शामिल नहीं कर पाये मगर पिछले काफी वक्त से वो फिर से नियमित रूप से रियाज़ कर रहे हैं‚ हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ले रहे हैं‚ गाने रिकार्ड कर रहे हैं और आशा करते हैं कि अपनी आवाज़ के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचें।

ऋषि एस
ऋषि एस॰ ने हिन्द-युग्म पर इंटरनेट की जुगलबंदी से संगीतबद्ध गीतों के निर्माण की नींव डाली है। पेशे से इंजीनियर ऋषि ने सजीव सारथी के बोलों (सुबह की ताज़गी) को अक्टूबर 2007 में संगीतबद्ध किया जो हिन्द-युग्म का पहला संगीतबद्ध गीत बना। हिन्द-युग्म के पहले एल्बम 'पहला सुर' में ऋषि के 3 गीत संकलित थे। ऋषि ने हिन्द-युग्म के दूसरे संगीतबद्ध सत्र में भी 5 गीतों में संगीत दिया। हिन्द-युग्म के थीम-गीत को भी संगीतबद्ध करने का श्रेय ऋषि एस॰ को जाता है। इसके अतिरिक्त ऋषि ने भारत-रूस मित्रता गीत 'द्रुजबा' को संगीत किया। मातृ दिवस के उपलक्ष्य में भी एक गीत का निर्माण किया। भारतीय फिल्म संगीत को कुछ नया देने का इरादा रखते हैं।

विश्व दीपक तन्हा
विश्व दीपक हिन्द-युग्म की शुरूआत से ही हिन्द-युग्म से जुड़े हैं। आई आई टी, खड़गपुर से कम्प्यूटर साइंस में बी॰टेक॰ विश्व दीपक इन दिनों पुणे स्थित एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। अपनी विशेष कहन शैली के लिए हिन्द-युग्म के कविताप्रेमियों के बीच लोकप्रिय विश्व दीपक आवाज़ का चर्चित स्तम्भ 'महफिल-ए-ग़ज़ल' के स्तम्भकार हैं। विश्व दीपक ने दूसरे संगीतबद्ध सत्र में दो गीतों की रचना की। इसके अलावा दुनिया भर की माँओं के लिए एक गीत को लिखा जो काफी पसंद किया गया।
Song - Aaissi Kii Taiisi
Voice - Unnikrishnan K B
Backup voice - Rishi S
Music - Rishi S
Lyrics - Vishwa Deepak Tanha
Graphics - samarth garg


Song # 15, Season # 03, All rights reserved with the artists and Hind Yugm

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Friday, July 16, 2010

बस करना है खुद पे यकीं....शारीरिक विकलांगता से जूझते लोगों के लिए बिस्वजीत, ऋषि और सजीव ने दिया एक नया मन्त्र

Season 3 of new Music, Song # 14

विकलांगता कोई अभिशाप नहीं है, न ये आपके पूर्वजन्मों के पापों की सजा है न आपके परिवार को मिला कोई श्राप. वास्तविकता यह है कि इस दुनिया में कोई भी परिपूर्ण नहीं है, कोई न कोई कमी हर इंसान में मौजूद होती है, कुछ नज़र आ जाती है तो कुछ छुपी रहती है. इसी तरह हर इंसान में कुछ न कुछ अलग काबिलियत भी होती है. अपनी कमियों को समझकर उस पर विजय पाना ही हर जिंदगी का लक्ष्य है. इंसान वही है जो अपनी खूबियों का पलड़ा भारी कर अपनी कमियों को पछाड़ देता है, और दिए हुए संदर्भों में खुद को मुक्कम्मल साबित करता है. पर ये भी सच है कि सामजिक धारणाओं और संकुचित सोच के चलते शारीरिक विकलांगता के शिकार लोगों को समाज में अपनी खुद की समस्याओं के आलावा भी बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. आवाज़ महोस्त्सव के चौदहवें गीत में आज हम इन्हीं हालातों से झूझ रहे लोगों के लिए ये सन्देश लेकर आये हैं हिम्मत और खुद पे विश्वास कर अगर वो चलें तो कुछ भी मुश्किल नहीं है. सजीव सारथी के झुझारू बोलों को सुरों में पिरोया है ऋषि एस ने और आपनी आवाज़ से इस गीत में एक नया जोश भरा है बिश्वजीत नंदा ने. आशा है कि हमारा ये प्रयास बहुत से निराश दिलों में प्रेरणा भरने में कामियाब रहेगा.

गीत के बोल -

ना कमी, तुझमें कोई
अब कर ले तू, खुद पे यकीं....
जीतेगा तू, हर कदम,
बस करना है, खुद पे यकीं...

हिम्मत बुलंद यारा,
मुश्किल है ज़ंग यारा,
तुझको कसम जो छोडे हौंसले,
खुद में मुक्कम्मल है तू,
मंजिल के काबिल है तू.
दिल से मिटा दे झूठे फासले,
फासले...
हिम्मत बुलंद यारा....

न कमी तुझमे कोई,
अब करे ले तू खुद पे यकीं,
जीतेगा तू हर कदम,
बस करना है खुद पे यकीं...
तेरी काबिलियत पे
होंगें तकाजे भी,
बंद मिलेंगें तुझको
लाखों दरवाज़े भी,
इन आज़माईशों से
तुझको गुजरना होगा,
हर इम्तहानों पे
सच्चा उतरना होगा,
खुद पे भरोसा कर,
खुद अपना साथी बन
आँधियों में जले,
तू ऐसी एक बाती बन,
ना डगमगाए तेरा....
खुद पे यकीं....
खुद पे यकीं

गुन्जायिश गलतियों की,
तुझको मयस्सर नहीं,
पर तेरी मेहनत हरगिज़,
होगी बेअसर नहीं,
सोये हुनर को अपने
तुझको जगाना होगा
हाँ सबसे बेहतर है तू,
तुझको दिखाना होगा,
हाँ सबसे बेहतर है तू,
तुझको दिखाना होगा,
दुनिया क्या सोचे तू,
इसकी परवा न कर,
जो कुछ हो बस में तू
वो बे डर होकर कर गुजर,
बढ़ता ही जाए तेरा,
खुद पे यकीं,
खुद पे यकीं...

खुद पे यकीं,
खुद पे यकीं...




मेकिंग ऑफ़ "खुद पे यकीं" - गीत की टीम द्वारा

ऋषि एस:लगभग ८-९ महीने हुए जब से इस गीत की धुन बनी पड़ी है, इस दौरान मेरे संगीत में बहुत से सकारात्मक बदलाव आ चुके थे. इतने विलंबित गीत को फिर से शुरू करने के पीछे एक कारण इसका सशक्त शब्द संयोजन भी था, जिसके लिए सजीव जिम्मेदार हैं. बिस्वजीत के साथ इतने लंबे समय के बाद काम करके बहुत मज़ा आया. जो कुछ भी मेरे जेहन में था इस गीत के लिए उनके गायन में लगभग वही परिपक्क्वता मिली मुझे, जबकि मुझे उन्हें कुछ खास निर्देशन नहीं देना पड़ा, केवल मेरे गाये संस्करण को सुनकर ही उन्होंने ये कर दिखाया.

बिस्वजीत:'खुद पे यकीन' पे काम करना मेरे खुद के लिए एक ब्लेस्सिंग है. सही में मेरा मानना है की कमी अगर कही होती है वो मन में होती है. मैं मोटिवेशनल स्पीकर निक उजिसिक जी का एक बड़ा फैन हूँ जो पैदा हुए थे बिना पांव और बिना हाथ के. लकिन उनका मानना है की ईश्वर उनको ऐसा बनाए क्योंकि वो जीसस के खास बंदे है. वो बोलते है कोई घर में जब एक छोटा सा बच्चा आता है मम्मी उसका मुंह देखने के लिए तरस जाती है और जब निक ने इस दुनिया में कदम रखा, उनकी मम्मी मुंह मोड लिए थे उनसे, वो सह नहीं पाए ऐसे एक बच्चे को देखने के लिए, ऐसी ज़िंदगी थी उनकी. पर आज वो ऐसे सक्सेस की बुलंदियों को छुए है जिसको मॅग्ज़िमम लोग शायद सपनो में भी सोच नहीं सकते. आज सिर्फ़ 20/25 साल के उम्र में दुनिया के वन ऑफ दा ग्रेटेस्ट मोटिवेशनल स्पीकर है और सारे दुनिया में बाइबल का ट्रू मीनिंग लोगो को समझते है. उनका ऑर्गनाइज़ेशन आज कितने डिसेबल्ड लोगो को फाइनान्शियल और नों-फाइनान्शियल हेल्प प्रवाइड करती है. पूरे बचपन में वो एक ही सवाल पूछे थे GOD से कि उन्होने उनको ऐसा क्यों बनाए, बाइबल से आन्सर खोजे, और उनको आन्सर मिला कि भगवान जब कोई फिज़िकल कमी देते है ये बताते है की वो इंसान उनके करीब होता है. फिर वो कभी नहीं रुके, पूरे दुनिया में जीसस की बातो को स्प्रेड किए, आज एक मिलियनेर है, कितने लोगो को रोज़गार दिए है, कितने डिसेबल्ड लोगो को वो फाइनान्शियल और नों फाइनान्शियल मदद देते है. अगर ये कमी है तो सबको ऐसी कमी मिले. एसलिए कमी नहीं होती है इंसान में, अगर कोई कमी है तो सोच में. खुद पे यकीन सबको मोटीवेट करे यही आशा कर रहा हूँ.

सजीव सारथी:ऋषि के साथ इतने गाने कर चुका हूँ कि अब हम बिना बोले एक दूसरे के मन में क्या है ये समझ लेते हैं. ऋषि की सबसे बड़ी खासियत ये है कि हमेशा लीक से हटकर अर्थात रोमांस आदि विषयों से हटकर कुछ ऐसे गीत रचने की कोशिश करते हैं को समाज के लिए किसी न किसी रूप में हितकारी हों. "जीत के गीत" और "वन वर्ल्ड" जैसे गीत इन्हीं कोशिशों का नतीजा है. दरअसल मैं खुद भी कुछ नया करने में अधिक रूचि लेता हूँ. चूँकि मैं खुद भी एक शारीरिक चुनौती से लड़ रहा हूँ अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में, तो मेरे लिए आप समझ सकते हैं कि ये गीत महज एक गीत ही नहीं है. ये मेरे जीवन के लक्ष्यों में से एक है. मेरा विश्वास है कि इस दुनिया में हर इंसान के जीवन का एक उद्देश्य अवश्य होता है. और यदि आपके हिस्से में कोई शारीरिक चुनौती आई है तो उसे भी पोसिटीविली लें और बिना रुके थमे अपनी राह पर चलते चलें. मैं शुक्रगुजार हूँ ऋषि और बिस्वा का जिन्होंने इस गीत को इस अंजाम तक पहुंचाकर मेरे लक्ष्य में मेरी मदद की है. अगर इस गीत से कोई एक शख्स भी मोटिवेट होता है तो मैं खुद को खुशकिस्मत समझूंगा
बिस्वजीत
बिस्वजीत युग्म पर पिछले 1 साल से सक्रिय हैं। हिन्द-युग्म के दूसरे सत्र में इनके 5 गीत (जीत के गीत, मेरे सरकार, ओ साहिबा, रूबरू और वन अर्थ-हमारी एक सभ्यता) ज़ारी हो चुके हैं। ओडिसा की मिट्टी में जन्मे बिस्वजीत शौकिया तौर पर गाने में दिलचस्पी रखते हैं। वर्तमान में लंदन (यूके) में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी कर रहे हैं। इनका एक और गीत जो माँ को समर्पित है, उसे हमने विश्व माँ दिवस पर रीलिज किया था।

ऋषि एस
ऋषि एस॰ ने हिन्द-युग्म पर इंटरनेट की जुगलबंदी से संगीतबद्ध गीतों के निर्माण की नींव डाली है। पेशे से इंजीनियर ऋषि ने सजीव सारथी के बोलों (सुबह की ताज़गी) को अक्टूबर 2007 में संगीतबद्ध किया जो हिन्द-युग्म का पहला संगीतबद्ध गीत बना। हिन्द-युग्म के पहले एल्बम 'पहला सुर' में ऋषि के 3 गीत संकलित थे। ऋषि ने हिन्द-युग्म के दूसरे संगीतबद्ध सत्र में भी 5 गीतों में संगीत दिया। हिन्द-युग्म के थीम-गीत को भी संगीतबद्ध करने का श्रेय ऋषि एस॰ को जाता है। इसके अतिरिक्त ऋषि ने भारत-रूस मित्रता गीत 'द्रुजबा' को संगीत किया। मातृ दिवस के उपलक्ष्य में भी एक गीत का निर्माण किया। भारतीय फिल्म संगीत को कुछ नया देने का इरादा रखते हैं।

सजीव सारथी
हिन्द-युग्म के 'आवाज़' मंच के प्रधान संपादक सजीव सारथी हिन्द-युग्म के वरिष्ठतम गीतकार हैं। हिन्द-युग्म पर इंटरनेटीय जुगलबंदी से संगीतबद्ध गीत निर्माण का बीज सजीव ने ही डाला है, जो इन्हीं के बागवानी में लगातार फल-फूल रहा है। कविहृदयी सजीव की कविताएँ हिन्द-युग्म के बहुचर्चित कविता-संग्रह 'सम्भावना डॉट कॉम' में संकलित है। सजीव के निर्देशन में ही हिन्द-युग्म ने 3 फरवरी 2008 को अपना पहला संगीतमय एल्बम 'पहला सुर' ज़ारी किया जिसमें 6 गीत सजीव सारथी द्वारा लिखित थे। पूरी प्रोफाइल यहाँ देखें।
Song - Khud Pe Yakeen
Voice - Biswajith Nanda
Backup voice - Rishi S
Music - Rishi S
Lyrics - Sajeev Sarathie
Graphics - samarth garg


Song # 14, Season # 03, All rights reserved with the artists and Hind Yugm

इस गीत का प्लेयर फेसबुक/ऑरकुट/ब्लॉग/वेबसाइट पर लगाइए

Friday, July 9, 2010

बिन तोड़े पीसे कड़वी सुपारी का स्वाद चखा कुहू, वी डी और ऋषि ने मिलकर

Season 3 of new Music, Song # 13

देखते ही देखते आवाज़ संगीत महोत्सव अपने तीसरे संस्करण में तेरहवें गीत पर आ पहुंचा है, हमारे बहुत से श्रोताओं की शिकायत रही है कि हम कुछ ऐसे गीत नहीं प्रस्तुत करते जो आज कल के फ़िल्मी गीतों को टक्कर दे सकें, तो इसे हमारे संगीतकारों ने एक चुनौती के तौर पर लिया है, और आपने गौर किया होगा कि इस सत्र में हमने बहुत से नए जोनरों पर नए तजुर्बे किये हैं. ऐसी ही एक कोशिश आज हो रही है, एक फ़िल्मी आइटम गीत जैसा कुछ रचने की, पर यहाँ भी हमने अपनी साख नहीं खोयी है. "बाबूजी धीरे चलना" से "बीडी जलाई ले" तक जाने कितने ऐसे आइटम गीत बने हैं जो सरल होते हुए भी कहीं न कहीं गहरी चोट करते है. ये गीत भी कुछ उसी श्रेणी का है. दोस्तों, इश्क मोहब्बत को फ़िल्मी गीतकारों ने दशकों से नयी नयी परिभाषाओं में बाँधा है, हमारे "इन हाउस" गीतकार विश्व दीपक तन्हा ने भी एक नया नाम दिया है इस गीत में मोहब्बत को. ऋषि एस, जो अमूमन अपने मेलोडियस गीतों के लिए जाने जाते हैं एक अलग ही दुनिया रचते हैं इस गीत में, और कुहू अपनी आवाज़ का एक बिलकुल ही नया रंग लेकर उतर जाती है गीत की मस्ती में. यही हमारे इन कलाकारों की सबसे बड़ी खासियत है कि ये हमेशा ही कुछ नया करने की चाह में रहते हैं और दोहराव से बचना चाहते हैं, बिलकुल वैसे ही जैसे पुराने दौर के फनकार होते थे इन मामलों में. तो सुनिए आज का ये ओर्जिनल गीत.

गीत के बोल -

ये कड़वी कड़वी कड़वी……
कड़वी सुपारी….

अब मैं
छिल-छिल मरूँ…
या घट-घट जिऊँ
तिल-तिल मरूँ
या कट-कट जिऊँ

जिद्दी आँखें….
आँके है कम जो इसे,
फाँके बिन तोड़े पिसे,
काहे फिर रोए, रिसे…

कड़वी सुपारी है,
मिरची करारी है…
कड़वी सुपारी है…… हाँ

कड़वी सुपारी है,
चुभती ये आरी है…
कड़वी सुपारी है…… हाँ

तोलूँ क्या? मोलूँ क्या?
क्या खोया …बोलूँ क्या?
घोलूँ क्या? धो लूँ क्या?
ग़म की जड़ी……

होठों के कोठों पे
जूठे इन खोटों पे
हर लम्हा सजती है
हर लम्हा रजती है…

टुकड़ों की गठरी ये
पलकों की पटरी पे
जब से उतारी है
…… नींदें उड़ीं!!

आशिक तो यारों
बला का जुआरी है
तभी तो कभी तो
बने ये भिखारी है……

मानो, न मानो
पर सच तो यही है
मोहब्बत बड़ी हीं
कड़वी सुपारी है…

गीत अब यहाँ उपलब्ध है

कड़वी सुपारी है मुजीबु पर भी, जहाँ श्रोताओं ने इसे खूब सराहा है देखिये यहाँ

मेकिंग ऑफ़ "कड़वी सुपारी" - गीत की टीम द्वारा

ऋषि एस: ये गीत फिर से एक कोशिश है एक नए जौनर पर काम करने की जिस पर मैंने पहले कभी काम नहीं किया, ये तीसरी बार है जब, वी डी, कुहू और मैंने एक साथ काम किया है. मैंने गीत का खाका रचा और इन दोनों ने उसमें सांसें फूंक दी है...बस यही कहूँगा

कुहू गुप्ता:काफी समय से हम लोग कुछ अलग तरह का गाना करना चाह रहे थे और एक दिन ऋषि इस गाने को ले आये जो बॉलीवुड मायने में कुछ कुछ एक आइटम नंबर जैसा था. मुझे उनका ये एक्सपेरिमेंट बहुत पसंद आया और कडवी सुपारी का राज़ खुलने का तरीका भी जो विश्व दीपक ने बखूबी लिखा है. ऋषि का हर गाना सुनने में बड़ा आसान लगता है लेकिन जब गाने बैठो तो तरह तरह की तकलीफें होती हैं :) ख़ासकर इस गाने में मुझे vibratos और volume dynamics एक ही साथ लेनी थी जो मेरे लिए एक चुनौती थी. आशा करती हूँ इस तकनीक को मैं वैसा निभा पायी हूँ जैसा ऋषि ने गाना बनाते वक्त सोचा था. इस तरह का आईटम नंबर गाना और वो भी ओरिजिनल, मेरे लिए एक बहुत ही नया और नायाब अनुभव था और गाना पूरा होने के बाद बहुत संतुष्टि भी हुई.

विश्व दीपक तन्हा:इस गाने के बोल पहले लिखे गए या फिर ट्युन पहले तैयार हुआ.. इसका फैसला आसान नहीं। हर बार की तरह ऋषि जी ने मुझे ट्युन भेज दिया और इस बार पूरे गाने का ट्युन था.. ना कि सिर्फ़ मुखरे का। मैंने दो-चार बार पूरा का पूरा ट्युन सुना .. और शब्दों की खोज में लग गया। कुछ देर बाद न जाने कैसे मेरे दिमाग में "कड़वी सुपारी है" की आमद हुई और फिर मैं भूल हीं गया कि मैं कोई गाना लिखने बैठा था और उस रात गाने के बदले एक कविता की रचना हो गई। अगली रात जब ऋषि जी ने पूछा कि गाना किधर है तो मैंने अपनी मजबूरी बता दी। फिर उन्होंने कहा कि अच्छा कविता हीं दो.. मैं कुछ करता हूँ। और फिर उस रात हम दोनों ने मिलकर आधी पंक्तियाँ कविता से उठाकर ट्युन पर फिट कीं और आधी नई लिखी गईं। और इस तरह मज़ाक-मज़ाक में यह गाना तैयार हो गया :) गाना किससे गवाना है, इसके बारे में कोई दो राय थी हीं नहीं। दर-असल कुहू जी ने हमसे पहले हीं कह रखा था कि उन्हें एक आईटम-साँग करना है। ऋषि जी के ध्यान में यह बात थी और इसी कारण यह गाना शुरू किया गया था। फ़ाईनल प्रोडक्ट आने के बाद जब कुहू जी को सुनाया गया तो उनके आश्चर्य की कोई सीमा नहीं थी और रिकार्ड होने के बाद हमारे आश्चर्य की। उम्मीद करता हूँ कि हमारा यह प्रयास सबों को पसंद आएगा। यह गाना एक प्रयोग है, इसलिए इसे पर्याप्त समय दें..
कुहू गुप्ता
पुणे में रहने वाली कुहू गुप्ता पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। गायकी इनका जज्बा है। ये पिछले 6 वर्षों से हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ले रही हैं। इन्होंने राष्ट्रीय स्तर की कई गायन प्रतिस्पर्धाओं में भाग लिया है और इनाम जीते हैं। इन्होंने ज़ी टीवी के प्रचलित कार्यक्रम 'सारेगामा' में भी 2 बार भाग लिया है। जहाँ तक गायकी का सवाल है तो इन्होंने कुछ व्यवसायिक प्रोजेक्ट भी किये हैं। वैसे ये अपनी संतुष्टि के लिए गाना ही अधिक पसंद करती हैं। इंटरनेट पर नये संगीत में रुचि रखने वाले श्रोताओं के बीच कुहू काफी चर्चित हैं। कुहू ने हिन्द-युग्म ताजातरीन एल्बम 'काव्यनाद' में महादेवी वर्मा की कविता 'जो तुम आ जाते एक बार' को गाया है, जो इस एल्बम का सबसे अधिक सराहा गया गीत है। इस संगीत के सत्र में भी यह इनका पांचवा गीत है।

ऋषि एस
ऋषि एस॰ ने हिन्द-युग्म पर इंटरनेट की जुगलबंदी से संगीतबद्ध गीतों के निर्माण की नींव डाली है। पेशे से इंजीनियर ऋषि ने सजीव सारथी के बोलों (सुबह की ताज़गी) को अक्टूबर 2007 में संगीतबद्ध किया जो हिन्द-युग्म का पहला संगीतबद्ध गीत बना। हिन्द-युग्म के पहले एल्बम 'पहला सुर' में ऋषि के 3 गीत संकलित थे। ऋषि ने हिन्द-युग्म के दूसरे संगीतबद्ध सत्र में भी 5 गीतों में संगीत दिया। हिन्द-युग्म के थीम-गीत को भी संगीतबद्ध करने का श्रेय ऋषि एस॰ को जाता है। इसके अतिरिक्त ऋषि ने भारत-रूस मित्रता गीत 'द्रुजबा' को संगीत किया। मातृ दिवस के उपलक्ष्य में भी एक गीत का निर्माण किया। भारतीय फिल्म संगीत को कुछ नया देने का इरादा रखते हैं।

विश्व दीपक तन्हा
विश्व दीपक हिन्द-युग्म की शुरूआत से ही हिन्द-युग्म से जुड़े हैं। आई आई टी, खड़गपुर से कम्प्यूटर साइंस में बी॰टेक॰ विश्व दीपक इन दिनों पुणे स्थित एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। अपनी विशेष कहन शैली के लिए हिन्द-युग्म के कविताप्रेमियों के बीच लोकप्रिय विश्व दीपक आवाज़ का चर्चित स्तम्भ 'महफिल-ए-ग़ज़ल' के स्तम्भकार हैं। विश्व दीपक ने दूसरे संगीतबद्ध सत्र में दो गीतों की रचना की। इसके अलावा दुनिया भर की माँओं के लिए एक गीत को लिखा जो काफी पसंद किया गया।
Song - Kadvi Supari
Voice - Kuhoo Gupta
Backup voice - Rishi S
Music - Rishi S
Lyrics - Vishwa Deepak Tanha
Graphics - samarth garg


Song # 13, Season # 03, All rights reserved with the artists and Hind Yugm

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Friday, July 2, 2010

सडकें छोटी थीं, दिल बड़े थे, उस शहर के जहाँ इत्तेफ़ाकन मिले थे नितिन, उन्नी और कुहू

Season 3 of new Music, Song # 12

आज बेहद गर्व के साथ हम युग्म के इस मंच पर पेश कर रहे हैं, दो नए फनकारों को, संगीतकार नितिन दुबे संगीत रचेता होने के साथ-साथ एक संवेदनशील गीतकार भी हैं, जिन्होंने अपने जीवन के अनुभवों को शब्दों और सुरों में पिरो कर एक गीत बनाया, जिसे स्वर देने के लिए उतरे आज के दूसरे नए फनकार उन्नीकृष्णन के बी, जिनका साथ दिया है। इस गीत में महिला स्वरों के लिए सब संगीतकारों की पहली पसंद बन चुकी गायिका कुहू गुप्ता। कुहू और उन्नी के स्वरों में ये गीत यक़ीनन आपको संगीत के उस पुराने सुहाने दौर की याद दिला देगा, जब अच्छे शब्द और मधुर संगीत से सजे युगल गीत हर जुबाँ पर चढ़े होते थे. सुनिए और आनंद लीजिए.

गीत के बोल -

एक शहर था जिसके सीने में
सडकें छोटी थीं, दिल बड़े थे
उस शहर से, भरी दोपहर में
मैं अकेला चला था
इस अकेले सफ़र पे

मैं अकेला चला था
इस अकेले सफ़र पे
क्या हसीं इत्तफाक था
बन गए हमसफ़र तुम

मेरे दिल के, एक कोने में
गहरे कोहरे थे, मुद्दतों से
फिर मौसम खुला, तुम दिखे थे
पास आकर रुके थे
साथ मिलकर चले थे

तन्हा ये काफिला था
लम्बे ये फासले थे
क्या हसीं इत्तफाक था
बन गए हमसफ़र तुम

तुमसे पहले मेरी ज़िन्दगी
एक धुंधला सा इतिहास है
मैं जिसके किस्से खुद ही लिख कर
खुद ही भूल चूका हूँ

याद आता नहीं जितना भी सोचूं
क्या वो किस्से थे
क्यों लिखे थे

फिर मौसम खुला, तुम दिखे थे
पास आकर रुके थे
साथ मिलकर चले थे

मैं अकेला चला था
इस अकेले सफ़र पे
क्या हसीं इत्तफाक था
बन गए हमसफ़र तुम

तन्हा ये काफिला था
लम्बे ये फासले थे
क्या हसीं इत्तफाक था
बन गए हमसफ़र तुम



मेकिंग ऑफ़ "क्या हसीन इत्तेफ़ाक" - गीत की टीम द्वारा

नितिन दुबे: जब मैंने इस गाने पर काम करना शुरू किया था तो इसका रूप थोड़ा अलग था। एक पूरा बीच का भाग पहले नहीं था और इसका अन्त भी अलग था। उन्नी और मैं अच्छे दोस्त हैं और कई कवर वर्ज़न्स पर हमने साथ काम किया है। धीरे धीरे हमें लगा कि एक मूल गाना भी हमें एक साथ करना चाहिये। मैं वैसे भी कुछ समय से इस गाने पर धीरे धीरे काम कर ही रहा था। सोचा क्यों न यही गाना साथ करें। मुझे खुशी है जिस तरह उन्नी ने इस गाने को निभाया है। कुहू इस गाने के लिये मेरी पहली और अकेली पसंद थीं। और उन्होंने इसे मेरी आशाओं से बढ़ कर ही गाया है। यह आज के युग में इन्टरनेट का ही कमाल है कि मैं कभी कुहू से मिला भी नहीं हूं मगर इस गाने में एक साथ काम किया है और यह मैं कुहू की प्रतिभा का कमाल कहूंगा कि बिना मेरे साथ सिटिंग किये और बिना मार्गदर्शन के ही उन्होंने गाने का मूड बहुत अच्छी तरह पकड़ा और पेश किया।

उन्नीकृष्णन के बी: “क्या हसीं इत्तेफाक था” एक ऐसा गाना है जो मेरे दिल के बेहद करीब है। जिन दिनों नितिन यह गाना बना रहे थे‚ उन दिनों उन का और मेरा मिलना काफी होता था और इसीलिये मैंने इस गाने को काफी करीब से रूप लेते देखा है। मेरे लिये यह गाना ज़रा कठिन था क्योंकि इस में थोड़ी ग़ज़ल की तरह की गायकी की ज़रूरत है और मेरी मातृभाषा दक्षिण भारतीय है तथा मैंने ग़ज़ल कभी ज़्यादा सुनी भी नहीं। लेकिन मैनें बहुत रियाज़ किया इस गाने के लिये जिसके लिये मुझे नितिन का बहुत मार्गदर्शन भी मिला। और इसके नतीजे से मैं खुश हूं। मुझे लगता है कि मैं इस गाने के मूड को ठीक से पकड़ पाया हूं और इसके लिये मैं नितिन व कुहू का विशेष रूप से शुक्रग़ुज़ार हूं। मैं आशा करता हूं कि भविष्य में भी हम और भी गानों पर साथ काम कर पायेंगे।

कुहू गुप्ता: नितिन की रचनाएं यूं भी मेरी बहुत पसंदीदा थी, मैं खुद उनके साथ कोई गीत करने को उत्सुक थी कि उनका एक मेल आया करीब ४ महीने पहले, वो चाहते थे कि मैं उनके लिए एक रोमांटिक युगल गीत गाऊं. मैंने तो ख़ुशी में गीत बिना सुने ही उन्हें हां कह दिया. क्योंकि मैं जानती थी की ये भी निश्चित ही एक बेमिसाल गीत होगा, और मेरा अंदाजा बिलकुल भी गलत नहीं हुआ यहाँ. गाना बहुत ही सूथिंग था, जिस पर खुद उन्होंने बहुत प्यारे शब्द लिखे थे, ये गीत चूँकि उनके व्यक्तिगत जीवन से प्रेरित था, तो उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण भी था, मैं उम्मीद करती हूँ कि मैंने अपने गायन में उनके जज़्बात ठीक तरह निभाए हैं. मेरे पहले टेक में कुछ कमियां थी जो नितिन ने दूर की. हम दोनों को इंतज़ार था कि पुरुष स्वर पूरे हों और गीत जल्दी से जल्दी मुक्कमल हो, पर तभी दुभाग्यवश बगलोर कार्टलोन दुर्घटना हुई और प्रोजेक्ट में रुकावट आ गयी....हम सब की प्रार्थना थी कि नितिन इन सब से उबर कर गीत को पूरा करें और देखिये किस तरह उन्होंने इस गीत को मिक्स करके वापसी की है. उन्नी ने अपना भाग बहुत खूबी से निभाया है, मैं हमेशा से उनकी आवाज़ की प्रशंसक रही हूँ. और मुझे ख़ुशी है कि इस गीत में हमें एक दूसरे के साथ सुर से सुर मिलाने का मौका मिला।
नितिन दुबे
नितिन संगीतकार भी हैं और एक शायर व गीतकार भी। अपने संगीतबद्ध किये गीतों को वह खुद ही लिखते हैं और उनका यह मानना हैं कि गाने के बोल उतना ही महत्व रखते हैं जितना कि उसकी धुन व संगीत। आर्किटेक्चर और सम्पत्ति विकास के क्षेत्र में विदेश से विशिष्ट शिक्षा प्राप्त करने के बाद नितिन कई वर्षों से व्यवसाय और संगीत के बीच वक्त बांट रहे हैं। अपने गीतों की अलबम ‘उड़ता धुआँ ’ तैयार करने के बाद नितिन अब इस कोशिश में हैं कि इस अलबम को व्यापक रूप से रिलीज़ करें और इसी लिये एक प्रोड्यूसर की खोज में हैं। “उड़ता धुआँ” रिलीज़ होने में चाहे जितना भी वक्त लगे‚ नितिन का कहना है कि वह गाने बनाते रहेंगे क्योंकि संगीत के बिना उन्हें काफी अधूरेपन का अहसास होता है।

उन्नीकृष्णन के बी
उन्नीकृष्णन पेशे से कम्प्यूटर इन्जीनियर हैं लेकिन संगीत का शौक बचपन से ही रखते हैं। कर्नाटक शास्त्रीय संगीत में इन्होंने विधिवत शिक्षा प्राप्त की है तथा स्कूल व कालिज में भी स्टेज पर गाते आये हैं। नौकरी शुरू करने के बाद कुछ समय तक उन्नी संगीत को अपनी दिनचर्या में शामिल नहीं कर पाये मगर पिछले काफी वक्त से वो फिर से नियमित रूप से रियाज़ कर रहे हैं‚ हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ले रहे हैं‚ गाने रिकार्ड कर रहे हैं और आशा करते हैं कि अपनी आवाज़ के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचें।

कुहू गुप्ता
पुणे में रहने वाली कुहू गुप्ता पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। गायकी इनका जज्बा है। ये पिछले 6 वर्षों से हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ले रही हैं। इन्होंने राष्ट्रीय स्तर की कई गायन प्रतिस्पर्धाओं में भाग लिया है और इनाम जीते हैं। इन्होंने ज़ी टीवी के प्रचलित कार्यक्रम 'सारेगामा' में भी 2 बार भाग लिया है। जहाँ तक गायकी का सवाल है तो इन्होंने कुछ व्यवसायिक प्रोजेक्ट भी किये हैं। वैसे ये अपनी संतुष्टि के लिए गाना ही अधिक पसंद करती हैं। इंटरनेट पर नये संगीत में रुचि रखने वाले श्रोताओं के बीच कुहू काफी चर्चित हैं। कुहू ने हिन्द-युग्म ताजातरीन एल्बम 'काव्यनाद' में महादेवी वर्मा की कविता 'जो तुम आ जाते एक बार' को गाया है, जो इस एल्बम का सबसे अधिक सराहा गया गीत है। इस संगीत के सत्र में भी यह इनका चौथा गीत है।

Song - Kya Haseen Itteffaq Tha
Voices - Unnikrishnan K B , Kuhoo Gupta
Music - Nitin Dubey
Lyrics - Nitin Dubey
Graphics - Prashen's media


Song # 12, Season # 03, All rights reserved with the artists and Hind Yugm

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