रविवार, 3 नवंबर 2013

दीपों के पर्व पर राग बागेश्री की चर्चा


स्वरगोष्ठी – 142 में आज

रागों में भक्तिरस – 10

‘मनमोहन श्याम सुन्दर रूप मनोहर सोहत अधर मुरलिया...’


   

रेडियो प्लेबैक इण्डिया के साप्ताहिक स्तम्भ स्वरगोष्ठी के मंच पर जारी लघु श्रृंखला रागों में भक्तिरस की दसवीं कड़ी में मैं कृष्णमोहन मिश्र, ज्योतिपर्व दीपावली के शुभ अवसर पर आप सब संगीतानुरागियों का हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ। मित्रों, अन्धकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देने वाला यह पर्व आप और आपके पूरे परिवार के लिए सुख-समृद्धि का कारक बने, हम यही कामना करते हैं। जारी श्रृंखला के अन्तर्गत हम आपसे भारतीय संगीत के कुछ भक्तिरस प्रधान राग और उनमें निबद्ध रचनाएँ प्रस्तुत कर रहे हैं। साथ ही उस राग पर आधारित फिल्म संगीत के उदाहरण भी आपको सुनवा रहे हैं। श्रृंखला की आज की कड़ी में हम आपसे रात्रि के दूसरे प्रहर में गाये-बजाए जाने वाले राग बागेश्री की चर्चा करेंगे। आपके समक्ष इस राग के भक्तिरस-पक्ष को स्पष्ट करने के लिए हम तीन भक्तिरस से अभिप्रेरित रचनाएँ प्रस्तुत करेंगे। पहले आप सुनेंगे राग बागेश्री के स्वरों में एक बन्दिश, सुप्रसिद्ध गायिका अश्विनी भिड़े देशपाण्डे से और उसके बाद सुप्रसिद्ध पार्श्वगायिका लता मंगेशकर से इसी राग पर आधारित फिल्म रंगोली का एक गीत। इसके साथ ही राग बागेश्री का आनन्द वाद्य संगीत पर कराने के लिए युवा संगीतसाधक विकास भारद्वाज सितार-वादन भी प्रस्तुत करेंगे। 
   


अश्विनी भिड़े देशपाण्डे 
राग बागेश्री भारतीय संगीत का अत्यन्त मोहक राग है। कुछ लोग इस राग को बागेश्वरी नाम से भी पुकारते हैं, किन्तु सुप्रसिद्ध गायिका विदुषी गंगूबाई हंगल के मतानुसार इस राग का नाम बागेश्री अधिक उपयुक्त है। इस राग को काफी थाट से सम्बद्ध माना जाता है। राग के वर्तमान प्रचलित स्वरूप के आरोह में ऋषभ स्वर वर्जित होता है और पंचम स्वर का अल्पत्व प्रयोग किया जाता है। अवरोह में सातों स्वर प्रयोग होते हैं। इस प्रकार यह राग षाड़व-सम्पूर्ण जाति का होता है। कुछ विद्वान आरोह में ऋषभ के साथ पंचम स्वर भी वर्जित करते हैं। इस राग में गान्धार और निषाद स्वर कोमल तथा शेष स्वर शुद्ध प्रयोग किए जाते हैं। कर्नाटक पद्यति में इस राग के समतुल्य राग नटकुरंजी है, जिसमें पंचम स्वर का प्रयोग नहीं किया जाता। राग बागेश्री में यदि पंचम और कोमल निषाद का प्रयोग न किया जाए तो यह राग आभोगी की अनुभूति कराता है। राग का वादी स्वर मध्यम और संवादी स्वर षडज होता है। रात्रि के दूसरे प्रहर में इस राग का गायन-वादन आदर्श माना जाता है। इस राग में भक्ति और श्रृंगार रस की रचनाएँ भली लगती है। अब हम आपको राग बागेश्री की एक मोहक बन्दिश का रसास्वादन कराते हैं। इसे प्रस्तुत कर रही हैं, जानी-मानी गायिका विदुषी अश्विनी भिड़े। इस खयाल रचना के बोल हैं- ‘मनमोहन श्याम सुन्दर रूप मनोहर सोहत अधर मुरलिया...’। अश्विनी जी जयपुर अतरौली परम्परा की गायकी में दक्ष हैं। खयाल के साथ-साथ ठुमरी और भजन गायकी में भी उन्हें महारत हासिल है। राग बागेश्री में प्रस्तुत इस बन्दिश में आपको भक्ति और श्रृंगार, दोनों भावों की सार्थक अनुभूति होगी।


राग बागेश्री : ‘मनमोहन श्याम, सुन्दर रूप...’ : अश्विनी भिड़े देशपाण्डे



राग बागेश्वरी अथवा बागेश्री का प्रयोग पाँचवें से सातवें दशक के बीच कई फिल्मों में किया गया। संगीतकार नौशाद ने 1946 में फिल्म ’शाहजहाँ’, दिलीप ढोलकिया ने फिल्म ‘प्राइवेट सेक्रेटरी’ में, सी. रामचन्द्र ने ‘अनारकली’ और ‘आज़ाद’ में, सलिल चौधरी ने ‘मधुमती’ में, मदनमोहन ने फिल्म ‘देख कबीरा रोया’ में, एस.एन. त्रिपाठी ने ‘संगीत सम्राट तानसेन’ में और शंकर जयकिशन ने 1962 की फिल्म ‘रंगोली’ में राग बागेश्री के स्वरों का अच्छा प्रयोग किया था। आज के अंक में हम आपको फिल्म ‘रंगोली’ से ही राग बागेश्री पर आधारित एक आकर्षक गीत ‘जाओ जाओ नन्द के लाला...’ प्रस्तुत करेंगे। गीतकार शैलेन्द्र के लिखे और शंकर-जयकिशन के संगीतबद्ध किये इस गीत में राधा-कृष्ण के छेड़-छाड़ का चित्रण है। यह गीत अभिनेत्री और नृत्यांगना वैजयन्तीमाला के नृत्य पर फिल्माया गया था। संगीतकार शंकर-जयकिशन ने गीत को राग बागेश्री के स्वरों और तीनताल में जिस खूबसूरती से बाँधा है, उतने ही मोहक अंदाज में लता मंगेशकर ने गाया है।
 

राग बागेश्री : ‘जाओ जाओ नन्द के लाला...’ : लता मंगेशकर : फिल्म रंगोली 




विकास भारद्वाज 
इस गीत के बाद हम राग बागेश्री का वाद्य संगीत पर एक अलग रंग प्रस्तुत करेंगे। तंत्रवाद्य सितार पर राग बागेश्री की एक रचना प्रस्तुत कर रहे हैं, प्रतिभावान युवा कलासाधक विकास भारद्वाज। कोटा, राजस्थान के विकास की प्रारम्भिक संगीत-शिक्षा कोटा की विदुषी सुधा अग्रवाल से और फिर उदयपुर के गुरु रामकृष्ण बोस एवं अजमेर के गुरु देवेन्द्र मिश्र से प्राप्त हुई। आगे चल कर सुप्रसिद्ध संगीतज्ञ पण्डित नयन घोष विकास के गुरु बने, जो आज भी उनका मार्गदर्शन कर रहे हैं। विकास की संगीत-शिक्षा बहुमुखी रही है। आरम्भ में उनकी संगीत-शिक्षा कण्ठ संगीत के क्षेत्र में हुई। बाद में उन्होने सितार वादन में दक्षता प्राप्त की और सुप्रसिद्ध बाँसुरी वादक पण्डित पन्नालाल घोष पर शोधकार्य भी किया है। ऐसे ही बहुमुखी प्रतिभा के धनी विकास भारद्वाज प्रस्तुत कर रहे हैं, सितार पर राग बागेश्री में तीनताल की एक गत।


राग बागेश्री : सितार पर तीनताल की गत : विकास भारद्वाज



  
आज की पहेली


‘स्वरगोष्ठी’ के 142वें अंक की पहेली में आज हम आपको वाद्य संगीत की एक रचना का अंश सुनवा रहे है। इसे सुन कर आपको दो प्रश्नों के उत्तर देने हैं। यह पाँचवें सेगमेंट की पहली पहेली है। 150वें अंक की समाप्ति तक जिस प्रतिभागी के सर्वाधिक अंक होंगे, उन्हें इस श्रृंखला (सेगमेंट) का विजेता घोषित किया जाएगा।


1 – इस संगीत रचना के अंश में आपको किस राग के दर्शन हो रहे हैं?

2 – यह कौन सा संगीत वाद्य है? वाद्य का नाम बताइए।

आप अपने उत्तर केवल radioplaybackindia@live.com या swargoshthi@gmail.com पर ही शनिवार मध्यरात्रि तक भेजें। comments में दिये गए उत्तर मान्य नहीं होंगे। विजेता का नाम हम ‘स्वरगोष्ठी’ के 144वें अंक में प्रकाशित करेंगे। इस अंक में प्रस्तुत गीत-संगीत, राग, अथवा कलासाधक के बारे में यदि आप कोई जानकारी या अपने किसी अनुभव को हम सबके बीच बाँटना चाहते हैं तो हम आपका इस संगोष्ठी में स्वागत करते हैं। आप पृष्ठ के नीचे दिये गए comments के माध्यम से अथवा radioplaybackindia@live.com या swargoshthi@gmail.com पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं।

  
पिछली पहेली के विजेता


‘स्वरगोष्ठी’ के 140वें अंक की पहेली में हमने आपको सन्त नामदेव रचित और पण्डित भीमसेन जोशी के गाये एक भक्तिपद का अंश सुनवा कर आपसे दो प्रश्न पूछे थे। पहले प्रश्न का सही उत्तर है- राग अहीर भैरव और दूसरे प्रश्न का सही उत्तर है- पण्डित भीमसेन जोशी। इस बार किसी भी प्रतिभागी ने प्रश्नो का सही उत्तर नहीं दिया।

यह 140वें अंक की पहेली वर्ष 2013 की चौथी श्रृंखला (सेगमंत) की अन्तिम पहेली थी। पहेली क्रमांक 131 से 140 तक प्रथम तीन स्थान पर निम्नलिखित प्रतिभागी रहे।

1- क्षिति तिवारी, जबलपुर – 16 अंक

2- डॉ. पी.के. त्रिपाठी, जौनपुर – 14 अंक

3- प्रकाश गोविन्द, लखनऊ – 10 अंक

तीनों प्रतिभागियों को ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ की ओर से हार्दिक बधाई।

  
झरोखा अगले अंक का



मित्रों, ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ पर जारी लघु श्रृंखला ‘रागों में भक्तिरस’ के अन्तर्गत आज के अंक में हमने आपसे राग बागेश्वरी या बागेश्री भक्तिरस के पक्ष पर चर्चा की। आगामी अंक में हम एक और भक्तिरस प्रधान राग में गूँथी रचनाएँ लेकर उपस्थित होंगे। अगले अंक में इस लघु श्रृंखला की ग्यारहवीं कड़ी के साथ रविवार को प्रातः 9 बजे हम ‘स्वरगोष्ठी’ के इसी मंच पर आप सभी संगीत-रसिकों की प्रतीक्षा करेंगे।

  
प्रस्तुति : कृष्णमोहन मिश्र

शनिवार, 2 नवंबर 2013

दीपावली की शुभकामनाओं के साथ प्रस्तुत है आज की 'सिने पहेली'

सिने पहेली – 86






'सिने पहेली' के सभी प्रतियोगियों और पाठकों को सुजॉय चटर्जी का सप्रेम नमस्कार, तथा ज्योति पर्व दीपावली पर 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' की तरफ़ से आप सभी को हार्दिक शुभकामनायें। यह पवित्र प्रकाश पर्व आप सभी के जीवन में सफलता, सम्पन्नता और शान्ति के लौ को प्रज्वलित करे, और आपके जीवन के हर अंधकार को मिटाये, ऐसी हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं। साथ ही यह कामना करते हैं कि समाज को कुप्रथाओं और उग्रवाद के अंधकार से मुक्ति मिले, तथा ज्ञान से, परिश्रम से, और सच्चाई की राह पर चल कर हम सब इस धरती को स्वर्ग बनायें। 

दोस्तों, हमें पता है कि दीपावली की तैयारियों में आप सब जुटे होंगे, इसलिए आज तो आपके पास बिल्कुल भी समय नहीं होगा पहेली को सुलझाने का, और न ही कल होगा क्योंकि कल ही तो दीवाली है। और न ही हम आप पर कोई दबाव डालेंगे; पर सोमवार से लेकर बृहस्पतिवार तक का समय भी काफ़ी है आज की पहेली को सुलझाने के लिए। तो तैयार हो जाइए आज की 'सिने पहेली' के लिए जो केन्द्रित है दीपावली पर केन्द्रित गीतों पर।



आज की पहेली : मनाइये दीवाली, सुलझाइये पहेली


आज की पहेली में आपको पहचानने हैं कुछ गीत जो दीपावली से संबंधित है। हर गीत के लिए कुछ सूत्र दिये गए हैं। कुल पाँच गीत हैं, हर सही जवाब के 2 अंक मिलेंगे, अर्थात् आज के कुल अंक हैं 10।

1. सन् 1951 की एक फ़िल्म का यह दीपावली गीत है आशा भोसले और साथियों का गाया हुआ। इस फ़िल्म में एक गीत ऐसा भी है जिसे लता मंगेशकर ने एक ऐसे शख्स के साथ मिल कर गाया है जो आगे चल कर एक संगीतकार जोड़ी के रूप में मशहूर हुए।

2. हास्य अभिनेता जॉनी वाकर पर फ़िल्माया हुआ यह दीपावली गीत है, जो एक तरह से उपहास है हमारे समाज का। गीत में कुछ लोगों की जमाखोरी, ग़रीबों का शोषण, काले पैसे इत्यादि की तरफ़ इशारा करते हुए यह कहा गया है कि ग़रीब लोग दीपावली कैसे मनायें!

3. एक नहीं बल्कि दो दो दीपावली गीत है इस फ़िल्म में। एक लता मंगेशकर का गाया happy song, और एक मुकेश का गाया sad song. यह फ़िल्म किसी तेलुगू फ़िल्म का रीमेक है और दोनों संसकरण के निर्देशक हैं सी. वी. श्रीधर। आपको पहचानना है मुकेश के गाये गीत को।

4. युद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी इस फ़िल्म के इस दीपावली गीत में निराशा के स्वर हैं। गीत की गायिका हैं लता मंगेशकर। गीत में "ख़ून", "अंधेरा" और "अमावस" जैसे शब्दों का उल्लेख है।

5. इस दीपावली गीत में चार प्रमुख अभिनेता और चार अभिनेत्रियाँ हैं। इनमें एक अभिनेता और एक अभिनेत्री गुलज़ार की एक बेहद चर्चित फ़िल्म में नज़र आये हैं। दूसरी अभिनेता-अभिनेत्री जोड़ी की एक अन्य फ़िल्म में लता मंगेशकर-शब्बीर कुमार का गाया एक युगल गीत है अनु मलिक का स्वरबद्ध किया हुआ। तीसरे अभिनेता दूसरे अभिनेता के परिवार के ही सदस्य हैं। तीसरी अभिनेत्री ने रीतेश देशमुख अभिनीत एक हास्य फ़िल्म में अभिनय किया था। चौथे अभिनेता एक हास्य अभिनेता हैं जिन्होंने बेशुमार फ़िल्मों में हमें ख़ूब हँसाया है; तथा चौथी अभिनेत्री ने एकता कपूर की एक बेहद मशहूर टीवी धारावाहिक में दर्शकों को गुदगुदाया है।


उपर पूछे गए सवालों के जवाब एक ही ई-मेल में टाइप करके cine.paheli@yahoo.com के पते पर भेजें। 'टिप्पणी' में जवाब कतई न लिखें, वो मान्य नहीं होंगे। ईमेल के सब्जेक्ट लाइन में "Cine Paheli # 86" अवश्य लिखें, और अंत में अपना नाम व स्थान लिखें। आपका ईमेल हमें बृहस्पतिवार 7 नवंबर शाम 5 बजे तक अवश्य मिल जाने चाहिए। इसके बाद प्राप्त होने वाली प्रविष्टियों को शामिल नहीं किया जाएगा।




पिछली पहेली का हल

उत्‍तर 1.  (i) कृष्ण चन्द्र डे
         (ii) अमीन सयानी

उत्‍तर 2.   (i)   मेरी भैंस को डण्‍डा क्‍यूं मारा........
             (ii)  ऐ भाई जरा देख के चलो.......
             (iii) तुम बिन जीवन कैसा जीवन......
             (iv) तूं प्‍यार का सागर है.....
             (v)  ऐ मेरे प्‍यारे वतन......
             (vi) तेरी गलियों में हम आए.....
             (vii) कमाल है, कमाल है ......



पिछली पहेली के विजेता

'सिने पहेली - 85' में इस बार कुल 5 प्रतियोगियों ने हिस्सा लिया, और सबसे पहले 100% सही जवाब भेज कर 'सरताज प्रतियोगी' बने हैं बेंगलुरू के श्री पंकज मुकेश। बहुत बहुत बधाई पंकज जी, आपको।

और अब इस सेगमेण्ट के सम्मिलित स्कोर-कार्ड पर एक नज़र...



कौन बनेगा 'सिने पहेली' महाविजेता?


1. सिने पहेली प्रतियोगिता में होंगे कुल 100 एपिसोड्स। इन 100 एपिसोड्स को 10 सेगमेण्ट्स में बाँटा गया है। अर्थात्, हर सेगमेण्ट में होंगे 10 एपिसोड्स। 

2. प्रत्येक सेगमेण्ट में प्रत्येक खिलाड़ी के 10 एपिसोड्स के अंक जोड़े जायेंगे, और सर्वाधिक अंक पाने वाले तीन खिलाड़ियों को सेगमेण्ट विजेता के रूप में चुन लिया जाएगा। 

3. इन तीन विजेताओं के नाम दर्ज हो जायेंगे 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में। सेगमेण्ट में प्रथम स्थान पाने वाले को 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में 3 अंक, द्वितीय स्थान पाने वाले को 2 अंक, और तृतीय स्थान पाने वाले को 1 अंक दिया जायेगा। आठवें सेगमेण्ट की समाप्ति तक 'महाविजेता स्कोरकार्ड' यह रहा-



4. 10 सेगमेण्ट पूरे होने पर 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में दर्ज खिलाड़ियों में सर्वोच्च पाँच खिलाड़ियों में होगा एक ही एपिसोड का एक महा-मुकाबला, यानी 'सिने पहेली' का फ़ाइनल मैच। इसमें पूछे जायेंगे कुछ बेहद मुश्किल सवाल, और इसी फ़ाइनल मैच के आधार पर घोषित होगा 'सिने पहेली महाविजेता' का नाम। महाविजेता को पुरस्कार स्वरूप नकद 5000 रुपये दिए जायेंगे, तथा द्वितीय व तृतीय स्थान पाने वालों को दिए जायेंगे सांत्वना पुरस्कार।

तो आज बस इतना ही, अगले सप्ताह फिर मुलाक़ात होगी 'सिने पहेली' में। लेकिन 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के अन्य स्तंभ आपके लिए पेश होते रहेंगे हर रोज़। तो बने रहिये हमारे साथ और सुलझाते रहिये अपनी ज़िंदगी की पहेलियों के साथ-साथ 'सिने पहेली' भी, अनुमति चाहूँगा, नमस्कार!

प्रस्तुति : सुजॉय चटर्जी

शुक्रवार, 1 नवंबर 2013

बुलट राजा आये हैं तमंचे पे डिस्को कराने

त्योहारों का मौसम गर्म है, यही वो समय होता है जब सभी नाम चीन सितारे जनता के दरबार में उतरते हैं अपने अपने मनोरंजन का पिटारा लेकर.  इस बार दिवाली पर हृतिक क्रिश का चोगा पहनेगें तो क्रिसमस पर अमीर धूम मचाने की तैयारी कर रहे हैं. शाहरुख, सलमान, अक्षय और अजय देवगन कुछ छुट्टी के मूड में थे तो उनकी कमी को भरने मैदान में उतरेगें शाहिद (आर...राजकुमार), इमरान (गोरी तेरे प्यार में) जैसे नए तीरंदाज़ तो सैफ (बुलट राजा) और सन्नी देओल (सिंह साहेब द ग्रेट) जैसे पक्के खिलाड़ी भी अपना जौहर लेकर दर्शकों के मनोरजन का पूरा इंतजाम रखेंगें. इन सभी फिल्मों के संगीत की हम बारी बारी चर्चा करेगें, तो चलिए आज जिक्र छेड़ते हैं सैफ अली खान और सोनाक्षी सिन्हा की बुलट राजा के सगीत की.

तिन्ग्मान्शु धुलिया पान सिंह तोमर और साहेब बीवी और गैंगस्टर जैसी लीक से हटकर फिल्मों के लिए जाने जाते हैं, पर जहाँ तक बुलट राजा का सवाल है, ऐसा लग रहा है कि ये बॉलीवुड व्यावसायिक फिल्मों की तरफ मसालों से भरी पूरी होने वाली है. संदीप नाथ, कौसर मुनीर, शब्बीर एहमद और रफ़्तार के हैं शब्द और प्रमुख संगीतकार हैं साजिद वाजिद, एक गीत देकर अतिथि संगीतकार की भूमिका निभा रहे हैं मशहूर पॉप बैंड RDB. 

बुलट राजा की संगीत एल्बम RDB के दनदनाते तमंचे पे डिस्को से खुलता है. गीत में निंदी कौर भी हैं RDB के साथ. गीत में पर्याप्त मस्ती है और रिदम भी कदम थिरकाने वाला है. शब्द बेतरतीब हैं जिनका जिक्र जरूरी नहीं है, गीत का उद्देश्य कदम थिरकाना और मौज मस्ती लुटाना है जिसमें गीत कामियाब है. 

श्रेया घोषाल की मधुर आवाज़ है गीत सामने है सवेरा में. गीत बेहद मधुर है, और साजिद वाजिद की चिरपरिचित छाप लिए हुए है. पुरुष स्वर है वाजिद की इस युगल गीत में. गीत में बोन्नी चक्रवर्ति का गाया एक छोटा सा बांग्ला पीस भी है जिसके साथ श्रेया के स्वर बेहद खूबसूरती से घुलमिल गए हैं. कह सकते है कि ये एल्बम का सबसे यादगार गीत होने वाला है. 

बहुत दिनों बाद सुनाई दिए नीरज श्रीधर, जो इन दिनों प्रीतम कैम्प से कुछ गायब से हैं. गीत है हरे गोविंदा हरे गोपाला. नीरज का ठप्पा है पूरे गीत में. यूँ भी वो सैफ के लिए बहुत से हिट गीतों में पार्श्व गायन कर चुके हैं. शब्द चुटीले हैं और धुन भी बेहद कैची है. गीत का फिल्मांकन इसे लोकप्रिय बनाने में मदद करेगा.  

ममता शर्मा के लेकर एक और मुन्नी सरीखा आईटम रचने की कोशिश की है साजिद वाजिद ने डोंट टच माई बॉडी में. ममता ने जरूरी उन्ह आह भरा है गीत में (कन्फुज शब्द का उच्चारण बेहद चुटीला लगता है). पर शब्दों की तुकबंदी बेअसर है, धुन और संयोजन में भी कोई नयापन नहीं मिलता. ममता जैसी गायिका से कुछ और भी तरह के गीत गवा लीजिए साजिद वाजिद भाई, और मुन्नी के हैंगओवर से बहार आ जाईये. 

कीर्ति सगाथिया ने सुखविंदर के अंदाज़ में गाया है बुलट राजा का शीर्षक गीत. गीत की रिदम और ताल बेशक जबरदस्त है. पर गीत साजिद वाजिद के दबंग और दबंग २ के शीर्षक गीतों से कुछ अलग और बेहतर पेश नहीं करता. हुर्र...चुर्र मुर्र...सब मसाले ज्यों के त्यों मौजूद हैं यहाँ भी. 

सटाके ठोको फिर एक ऐसा गीत है जहाँ बस एक पंच शब्द युग्म पर गीत परोसा गया है. कीर्ति सगाथिया ने अच्छा निभाया है गीत का. शब्दों में भी यहाँ कुछ विविधता है, और वाजिद वाजिद ने संयोजन भी सिचुएशन के हिसाब से बढ़िया किया है. गीत परदे पर बेहद बढ़िया लगेगा, हाँ फिल्म के जाने के बाद इसे याद रखा जायेगा या नहीं, कहना मुश्किल है.

एल्बम के बहतरीन गीत - सामने है सवेरा, तमंचे पे डिस्को, हरे गोविदा हरे गोपाला...
हमारी रेटिंग - ३.४/५ 

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