मंगलवार, 5 फ़रवरी 2013

ओ हेनरी की इबादत (अ सर्विस ऑफ़ लव)

'बोलती कहानियाँ' स्तम्भ के अंतर्गत हम आपको सुनवा रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने अनुराग शर्मा की आवाज़ में डा. अमर कुमार की लघुकथा ""अपनों ने लूटा" का पॉडकास्ट सुना था। आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं प्राख्यात अमेरिकी कथाकार ओ हेनरी की अंग्रेज़ी कहानी "A service of love" का हिन्दी अनुवाद "इबादत", अर्चना चावजी, अनुभव प्रिय और सलिल वर्मा की आवाज़ में। हिन्दी अनुवाद अनुभव प्रिय का है और प्रस्तुति को संगीत से संवारा है पद्मसिंह ने।

कहानी का कुल प्रसारण समय 13 मिनट 42 सेकंड है। आप भी सुनें और अपने मित्रों और परिचितों को भी सुनाएँ  और हमें यह भी बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

 यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।

“जब बिना कालर का चोर पकड़ा जाता हैं, तो उसे सबसे दुराचारी और दुष्ट कहा जाता है।”
ओ हेनरी

हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी कहानी

"अच्छा, जल्दी से हाथ मुँह धो लो, मैं खाना लगती हूँ।"
(ओ हेनरी की "इबादत" से एक अंश)

नीचे के प्लेयर से सुनें.
 
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VBR MP3

 #Fifth Story, Ibadat  O Henry/Hindi Audio Book/2013/5. Voice: Archana Chaoji 

सोमवार, 4 फ़रवरी 2013

तीन कहानियाँ - तीन डेविड - कुछ भिन्न संगीत

प्लेबैक वाणी -32 -संगीत समीक्षा - डेविड  



नए संगीत को परखने की हमारी इस कोशिश में आपका फिर एक बार से स्वागत है. आज जिस एल्बम की हम चर्चा कर रहे हैं वो है बिजॉय ‘शैतान’ नाम्बियार की नई फिल्म ‘डेविड’ के संगीत से सजी. एल्बम में ८ संगीतकारों और ११ गीतकारों ने अपना योगदान दिया है. चलिए देखें इन युवा संगीत कर्मियों ने किन किन रंगों से सजाया है ‘डेविड’ को.

एल्बम खुलता है रौक बैंड ब्रह्मफुत्रा के एक शानदार ट्रेक के साथ. ‘गुम हुए’ न सिर्फ अपनी गायिका और धुन के लिए वरन अपने शब्दों के कारण भी खास है. ‘ढूंढेगे उन्हीं राहों को, सुकूँ भरी छांओं को.....वो रास्ते जहाँ खोये थे हम...’ यक़ीनन श्रोताओं को कहीं दूर अपनी यादों में ले जाते हैं. ये बैंड मार्क फुल्गडो और गौरव गोडखिंडी से मिलकर बनता है और इस गीत में अपनी आवाज़ भरी है सिद्धार्थ बसरूर ने. यक़ीनन सिद्धार्थ भी एक जबरदस्त टेलेंट हैं, जिनसे भविष्य में भी श्रोता उम्मीद लगा सकते हैं.

८० के दशक से श्रोताओं के दिलों पर छाया हुआ एक गीत है ‘दमा दम मस्त कलंदर’ जिसे जाने कितने गायकों ने अपने अपने अंदाज़ में श्रोताओं तक पहुँचाया है. इस कालजयी गीत का नशा आज भी वैसा ही है जैसा तब था. इस एल्बम में इसे गाया है रेखा भारद्वाज ने. एल्बम में इसका एक रोंक संस्करण भी है जिसका असर भी उतना ही जादूई है.

अगला गीत भी एक संगीत समूह ‘मातिबानी’ का है. ये बैंड भारतीय शास्त्रीय और लोक अंदाज़ को विश्व संगीत के साथ जोड़ कर पेश करने के लिए मशहूर है. यहाँ उनका गठबंधन फ्रेच संगीत के साथ है. फ्रेच शब्दों को स्वर दिया है जॉयशांति ने जिसके साथ निराली कार्तिक की जुगलबंदी सुनते ही बनती है. ‘तोरे मतवाले नैना’ एक ऐसा गीत है जिसे आप बार बार सुनना चाहेंगें.

‘मरिया पिताचे’ में रेमो आपको गोवा के पारंपरिक लोक अंदाज़ में ले जायेंगें जहाँ वो मरिया के पिता की कहानी सुनाते हैं. गीत के अधिकतर शब्द कोंकणी भाषा में है, मगर बहुत सी साईटों पर आप इसका अनुवाद पढ़ सकते हैं. वैसे इस लाजवाब गीत का मज़ा लेने के लिए आपको शब्दों की समझ कतई जरूरी नहीं है. रेमो अपने संगीत से ऐसा समां बाँध देते हैं कि बस सुनते ही चले जाने का मन करता है.

चुटकी, सीटी, के साथ पियानो और गिटार के सरलतम और कम से कम इस्तेमाल कर अगले गीत ‘तेरे मेरे प्यार की कहानी’ को संगीतकार प्रशांत पिल्लई, एक खूबसूरत प्रेम कविता में बदल देते हैं. नरेश अय्यर और श्वेता पंडित की आवाजें पूरी तरह से एक दूजे में घुलती महसूस होती हैं, गोपाल दत्त के शब्द भी अच्छे हैं.

हार्डरोक् अंदाज़ का ‘बंदे’ एक छोटा सा गीत है जिसे मोडर्न माफिया नाम के बैंड ने रचा है. तेज रिदम और अंकुर तिवारी के शब्द इस गीत को मजेदार तो बनाते हैं, पर ये एकबम के बाकी गीतों जितना प्रभावी नहीं हो पाया शायद, या फिर संभव है कि इस जेनर के प्रति मेरी नापसंदगी इसकी वजह हो.

अनिरुद्ध रविचंदर को ‘कोलावारी डी’ ने रातों रात एक मशहूर संगीतकार में तब्दील कर दिया था, पर यहाँ आप उनका एक अलग ही रूप देखेंगें. ‘यूँ ही रे’ एक बहुत ही मधुर गीत है जिसकी धुन जितनी लुभावनी है संगीत संयोजन भी उतना ही दिलचस्प है. हल्की बारिश की स्वर ध्वनियों से खुलता है ये गीत जिसमें बाँसुरी और अन्य पारंपरिक वाध्यों का सुन्दर प्रयोग हुआ है. खुद अनिरुद्ध और श्वेता मोहन की आवाजें इस गीत में खूब जमी है. शब्द भी सुरीले है. वोइलेन के पीस पर आकर अंजाम तक पहुँचते हुए गीत अपनी खास छाप छोड़ जाता है. गीत हालाँकि रहमान के ‘चुपके से’ जैसे गीतों की याद दिलाता है मगर अपनी खुद की पहचान भी अवश्य बनाने में कामियाब है, इसमें कोई शक नहीं.

रिदम की तेज और दमदार थाप पर कार्तिक की दमदार आवाज़ बेहद प्रभावी लगती है, अगले गीत ‘रब दी मर्ज़ी’ में. यहाँ भी शब्द सशक्त हैं. यक़ीनन इस गीत की ऊर्जा इसे विशेष बनाती है.

‘आउट ऑफ कंट्रोल’ जैसे एक गीत की उम्मीद मुझे बिजॉय के एल्बम में थी. ये गीत अंग्रेजी और हिंदी में है. निखिल डी’सूजा बहुत से वेस्टर्न क्लास्सिकल गायकों की याद दिलाते हैं, हिंदी शब्द प्रीती की आवाज़ में है, ये दर्द भरा गीत अपनी सुन्दर जुगलबंदी के कारण बेहद सुन्दर बन पड़ा है. आखिर दर्द और कुंठा की कोई भाषा कहाँ होती है.

पर ठहरिये जरा, अभी एल्बम में और भी बहुत कुछ है. मसलन अगले गीत को लें. संगीतकार हैं प्रशांत पिल्लई और आवाज़ है मेरे पसंदीदा लकी अली की. उनकी आवाज़ और अंदाज़ एकदम अलग ही सुनाई देता है इस गीत में. ताजिया यात्रा के दौरान होने वाले नारों जैसा कोरस है पार्श्व में. तरुज़ के शब्द पूरे वाकये को तस्वीर में बदल देते हैं. लकी अली का ‘या हुसैन’ एक जबरदस्त ट्रेक है, जिसे सुनकर ही महसूस किया जा सकता है.

सौरभ रे के रोक् बैंड ने रचा है एक पूरी तरह का अंग्रेजी गीत ‘थ्री किल्स’ जो एक बार फिर आपको पारंपरिक वेस्टर्न रोक् गीतों की याद दिला जाएगा. एक और वाध्य रचना है रेमो का रचा जिसे नाम दिया गया है ‘लाईट हाउस सिम्फोनी’. एक बार फिर गोवा की खुश्बू को श्रोता इस ट्रेक में महसूस कर पायेंगें. कुल १५ रचनाएँ है एल्बम में और सभी किसी न किसी खास वजह से सुनने लायक है. सबका अपना एक मिजाज़ है और अपना ही अंदाज़ भी. ‘डेविड’ एक एल्बम के रूप में श्रोताओं को भरपूर संतुष्ट करती है. बशर्ते अगर आप कुछ नया, कुछ अलग सुनने के शौकीन हैं तो. बहरहाल हम रेडियो प्लेबैक पर इसी नयेपन को, इसी निरालेपन को हमेशा ही सराहते रहे है, इसीलिए अपने श्रोताओं को इस एल्बम को सुनने की खास सिफारिश के साथ देंगें इस ४.८ की रेटिंग. अगले हफ्ते फिर किसी नए संगीत की चर्चा लेकर हाज़िर होंगें तब तक दीजिए इज़ाज़त                  

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शनिवार, 2 फ़रवरी 2013

'सिने पहेली' में आज ताज महल का ज़िक्र


2 फ़रवरी, 2013
सिने-पहेली - 57  में आज 

याद कीजिये 'ताजमहल' वाले गीतों को


'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के सभी पाठकों और श्रोताओं को सुजॉय चटर्जी का प्यार भरा नमस्कार। दोस्तों, दुनिया के सात अजूबों में एक अजूबा है 'ताज महल'। ताज महल को प्रेम का स्मारक (Monument of Love) भी कहा गया है। इससे बेहतरीन प्यार की निशानी और कोई हो ही नहीं सकती। सन्‍ -1631 में जब मुग़ल बादशाह शाहजहाँ की तीसरी पत्नी मुमताज़ महल की 14-वीं सन्तान (गौहरा बेगम) के जन्म के समय मृत्यु हो गई, तब शाहजहाँ शोक में डूब गए थे। मुमताज़ के प्रति उनके दिल में इतना प्यार था कि इसके अगली ही साल, 1632 में उन्होंने मुमताज़ की याद में 'ताज महल' के निर्माण का कार्य शुरू कर दिया। इसका निर्माण 1648 में जा कर सम्पन्न हुआ, और इसके आस-पास की इमारतों और बगीचों के निर्माण में और 5 साल लग गए। शाहजहाँ ने ताज महल की कुछ इन शब्दों में व्याख्या की थी :


"Should guilty seek asylum here,
Like one pardoned, he becomes free from sin.
Should a sinner make his way to this mansion,
All his past sins are to be washed away.
The sight of this mansion creates sorrowing sighs;
And the sun and the moon shed tears from their eyes.
In this world this edifice has been made;
To display thereby the creator's glory."

दोस्तों, आप सोच रहे होंगे कि 'सिने पहेली' में अचानक आज ताज महल की बातें क्यों? दरसल बात ऐसी है कि आज की पहेली ताज महल के इर्द गिर्द ही घूमेगी। तो आइये, और समय गँवाये बिना सीधे पहुँच जाते हैं आज की पहेली पर।


आज की पहेली : ताज के तराने


दोस्तों, हमारी फ़िल्मों का आधार नायक-नायिका के प्रेम संबंध पर ही केन्द्रित होती आयी है। ऐसे में सबसे बड़ी प्रेम की निशानी, ताज महल, का उल्लेख और चित्रण भी फ़िल्मों में होता आया है। लेकिन अगर फ़िल्मी गीतों की बात करें तो कितने ऐसे गीत आप बता सकते हैं जिनमें 'ताज महल' का शाब्दिक उल्लेख हुआ है? चलिए ज़्यादा न सही, पर कम से कम पाँच गीत तो आप सुझा ही सकते हैं, क्यों? जी हाँ, यही है आज का सवाल। आपको पाँच ऐसे फ़िल्मी गीत बताने हैं जिनके मुखड़े या अन्तरे में 'ताज महल' शब्द आते हैं। हर सही गीत के लिए 2 अंक दिये जायेंगे।


जवाब भेजने का तरीका

उपर पूछे गए सवालों के जवाब एक ही ई-मेल में टाइप करके cine.paheli@yahoo.com के पते पर भेजें। 'टिप्पणी' में जवाब कतई न लिखें, वो मान्य नहीं होंगे। ईमेल के सब्जेक्ट लाइन में "Cine Paheli # 57" अवश्य लिखें, और अंत में अपना नाम व स्थान लिखें। आपका ईमेल हमें बृहस्पतिवार 7 फ़रवरी  शाम 5 बजे तक अवश्य मिल जाने चाहिए। इसके बाद प्राप्त होने वाली प्रविष्टियों को शामिल नहीं किया जाएगा।


पिछली पहेली का हल


1. "सुबह सवेरे सबसे पहले बोलो राम राम... मेरे देशवासियों, अपने देश को सम्भालो" (फ़िल्म: देशवासी, गायक: नितिन मुकेश, अनुराधा पौडवाल, साथी)

2. "चलो झूमते सर से बाँधे कफ़न, लहू माँगती है ज़मीने वतन" (फ़िल्म: काबुली ख़ान, अभिनेत्री: हेलेन)

3. "देखो वीर जवानो" (फ़िल्म 'आक्रमण') व "दे दी हमें आज़ादी" (फ़िल्म: 'जागृति')

4. "मेरे देश की धरती" (फ़िल्म: उपकार, गीतकार: गुल्शन बावरा)



पिछली पहेली का परिणाम

इस बार 'सिने पहेली' में कुल 7 प्रतियोगियों ने भाग लिया। सबसे पहली 100% सही जवाब भेज कर इस बार 'सरताज प्रतियोगी' बने हैं बीकानेर के श्री विजय कुमार व्यास। विजय जी, बहुत बहुत बधाई आपको। इस बार हमें निराशा हुई कि नियमित खिलाड़ी क्षिति तिवारी जी प्रतियोगिता में भाग नहीं ले सकीं। फिर भी वो तीसरे पायदान पर विराजमान हैं। आइए अब नज़र डालते हैं इस सेगमेण्ट के अब तक के सम्मिलित स्कोरकार्ड पर।




नये प्रतियोगियों का आह्वान

नये प्रतियोगी, जो इस मज़ेदार खेल से जुड़ना चाहते हैं, उनके लिए हम यह बता दें कि अभी भी देर नहीं हुई है। इस प्रतियोगिता के नियम कुछ ऐसे हैं कि किसी भी समय जुड़ने वाले प्रतियोगी के लिए भी पूरा-पूरा मौका है महाविजेता बनने का। अगले सप्ताह से नया सेगमेण्ट शुरू हो रहा है, इसलिए नये खिलाड़ियों का आज हम एक बार फिर आह्वान करते हैं। अपने मित्रों, दफ़्तर के साथी, और रिश्तेदारों को 'सिने पहेली' के बारे में बताएँ और इसमें भाग लेने का परामर्श दें। नियमित रूप से इस प्रतियोगिता में भाग लेकर महाविजेता बनने पर आपके नाम हो सकता है 5000 रुपये का नगद इनाम।


कैसे बना जाए 'सिने पहेली महाविजेता?

1. सिने पहेली प्रतियोगिता में होंगे कुल 100 एपिसोड्स। इन 100 एपिसोड्स को 10 सेगमेण्ट्स में बाँटा गया है। अर्थात्, हर सेगमेण्ट में होंगे 10 एपिसोड्स।

2. प्रत्येक सेगमेण्ट में प्रत्येक खिलाड़ी के 10 एपिसोड्स के अंक जुड़े जायेंगे, और सर्वाधिक अंक पाने वाले तीन खिलाड़ियों को सेगमेण्ट विजेताओं के रूप में चुन लिया जाएगा।

3. इन तीन विजेताओं के नाम दर्ज हो जायेंगे 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में। सेगमेण्ट में प्रथम स्थान पाने वाले को 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में 3 अंक, द्वितीय स्थान पाने वाले को 2 अंक, और तृतीय स्थान पाने वाले को 1 अंक दिया जायेगा। पाँचवें सेगमेण्ट की समाप्ति तक 'महाविजेता स्कोरकार्ड' यह रहा...



4. 10 सेगमेण्ट पूरे होने पर 'महाविजेता स्कोरकार्ड' में दर्ज खिलाड़ियों में सर्वोच्च पाँच खिलाड़ियों में होगा एक ही एपिसोड का एक महा-मुकाबला, यानी 'सिने पहेली' का फ़ाइनल मैच। इसमें पूछे जायेंगे कुछ बेहद मुश्किल सवाल, और इसी फ़ाइनल मैच के आधार पर घोषित होगा 'सिने पहेली महाविजेता' का नाम। महाविजेता को पुरस्कार स्वरूप नकद 5000 रुपये दिए जायेंगे, तथा द्वितीय व तृतीय स्थान पाने वालों को दिए जायेंगे सांत्वना पुरस्कार।

'सिने पहेली' को और भी ज़्यादा मज़ेदार बनाने के लिए अगर आपके पास भी कोई सुझाव है तो 'सिने पहेली' के ईमेल आइडी पर अवश्य लिखें। आप सब भाग लेते रहिए, इस प्रतियोगिता का आनन्द लेते रहिए, क्योंकि महाविजेता बनने की लड़ाई अभी बहुत लम्बी है। आज के एपिसोड से जुड़ने वाले प्रतियोगियों के लिए भी 100% सम्भावना है महाविजेता बनने का। इसलिए मन लगाकर और नियमित रूप से (बिना किसी एपिसोड को मिस किए) सुलझाते रहिए हमारी सिने-पहेली, करते रहिए यह सिने मंथन, आज के लिए मुझे अनुमति दीजिए, अगले सप्ताह फिर मुलाक़ात होगी, नमस्कार। 

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