गुरुवार, 3 दिसंबर 2009

मुझको तुम जो मिले ये जहान मिल गया...जिस अभिनेत्री को मिली गीता की सुरीली आवाज़, वो यही गाती नज़र आई

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 279

'गीतांजली' की नौवी कड़ी में आज गीता दत्त की आवाज़ सजने वाली है माला सिंहा पर। दोस्तों, हमने इस महफ़िल में माला सिंहा पर फ़िल्माए कई गीत सुनवा चुके हैं लेकिन कभी भी हमने उनकी चर्चा नहीं की। तो आज हो जाए? माला सिंहा का जन्म एक नेपाली इसाई परिवार में हुआ था। उनका नाम रखा गया आल्डा। लेकिन स्कूल में उनके सहपाठी उन्हे डाल्डा कहकर छेड़ने की वजह से उन्होने अपना नाम बदल कर माला रख लिया। कलकत्ते में कुछ बंगला फ़िल्मों में अभिनय करने के बाद माला सिंहा को किसी बंगला फ़िल्म की शूटिंग् के लिए बम्बई जाना पड़ा। वहाँ उनकी मुलाक़ात हुई थी गीता दत्त से। गीता दत्त को माला सिंहा बहुत पसंद आई और उन्होने उनकी किदार शर्मा से मुलाक़ात करवा दी। और शर्मा जी ने ही माला सिंहा को बतौर नायिका अपनी फ़िल्म 'रंगीन रातें' में कास्ट कर दी। लेकिन माला की पहली हिंदी फ़िल्म थी 'बादशाह' जिसमें उनके नायक थे प्रदीप कुमार। उसके बाद आई पौराणिक धार्मिक फ़िल्म 'एकादशी'। दोनों ही फ़िल्में फ़्लॊप रही और उसके बाद किशोर साहू की फ़िल्म 'हैमलेट' ने माला को दिलाई ख्याति, भले ही फ़िल्म पिट गई थी। १९५७ में गुरु दत्त ने माला को अपनी महत्वाकांक्षी फ़िल्म 'प्यासा' में एक महत्वपूर्ण किरदार निभाने का मौका दिया जिसे वो पहले मधुबाला को देना चाहते थे। माला ने उस किरदार में जान डाल दी। यह फ़िल्म ना केवल हिंदी सिनेमा की एक क्लासिक फ़िल्म है, बल्कि यह फ़िल्म माला सिंहा के करीयर की एक टर्निंग् पॊयन्ट भी सिद्ध हुई। इसके बाद माला सिंहा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। धूल का फूल, परवरिश, फिर सुबह होगी, मैं नशे में हूँ, लव मैरिज, बहूरानी, अनपढ़, आसरा, दिल तेरा दीवाना, गुमराह, आँखें, हरियाली और रास्ता, हिमालय की गोद में, जैसी सुपर डुपर हिट फ़िल्में माला की झोली में गई।

दोस्तों, गीता दत्त ने माला सिंहा के लिए जिन फ़िल्मों में पार्श्वगायन किया, वो फ़िल्में हैं - सुहागन ('५४), रियासत ('५५), फ़ैशन, प्यासा ('५७), जालसाज़, चंदन, डिटेक्टिव ('५८), आँख मिचोली ('६२), और सुहागन ('६४)। १९५७ की बंगला फ़िल्म 'प्रिथिबी आमारे चाय' में भी गीता जी ने माला जी का प्लेबैक किया था। आज हम जिस गीत को चुन लाए हैं वह एक बहुत ही ख़ूबसूरत युगल गीत है जिसमें गीता दत्त का साथ दिया है हेमन्त कुमार ने। फ़िल्म 'डिटेक्टिव' का यह गीत है जिसमें संगीत दिया था गीता दत्त के भाई मुकुल रॉय ने। गीत फ़िल्माया गया माला सिंहा और प्रदीप कुमार पर। ये मीठे सुरीले बोल हैं शैलेन्द्र के। इस फ़िल्म का निर्देशन किया था शक्ति सामंत ने। वाल्ट्ज़ के रीदम पर आधारित यह युगलगीत रूमानीयत के रस में डूबो डूबो कर रची गई है। मुकुल रॉय को बहुत ज़्यादा काम करने का मौका नहीं मिला। उनके संगीत निर्देशन में बस ४ फ़िल्में आईं - डिटेक्टिव, सैलाब, भेद, दो बहादुर। फ़िल्म 'डिटेक्टिव' में गीता जी का ही गाया एक और मशहूर गीत था "दो चमकती आँखों में कल ख़्वाब सुनहरा था जितना, हाए ज़िंदगी तेरी राह में आज अंधेरा है उतना"। क़िस्मत की विडंबना देखिए, जहाँ एक तरफ़ इस गीत को बेहद लोकप्रियता हासिल हुई, वहीं ऐसा लगा जैसे इस गीत के बोल हू-ब-हू मुकुल रॉय के लिए ही लिखे गए हों। प्रतिभा होते हुए भी वो आगे नहीं बढ़ सके। आज का यह अंक गीता जी के साथ साथ समर्पित है मुकुल रॊय की प्रतिभा को भी। सुनते हैं यह गीत.



और अब बूझिये ये पहेली. अंदाजा लगाइये कि हमारा अगला "ओल्ड इस गोल्ड" गीत कौन सा है. हम आपको देंगे तीन सूत्र उस गीत से जुड़े. ये परीक्षा है आपके फ़िल्म संगीत ज्ञान की. याद रहे सबसे पहले सही जवाब देने वाले विजेता को मिलेंगें 2 अंक और 25 सही जवाबों के बाद आपको मिलेगा मौका अपनी पसंद के 5 गीतों को पेश करने का ओल्ड इस गोल्ड पर सुजॉय के साथ. देखते हैं कौन बनेगा हमारा अगला (अब तक के चार गेस्ट होस्ट बने हैं शरद तैलंग जी (दो बार), स्वप्न मंजूषा जी, पूर्वी एस जी और पराग सांकला जी)"गेस्ट होस्ट".अगले गीत के लिए आपके तीन सूत्र ये हैं-

१. गुलज़ार साहब ने बहुत खूबसूरत बोल लिखे इस गीत के.
२. जिस अंदाज़ में इसे गीता जी गाया उसका कोई सानी नहीं, जिस अभिनेत्री पर इसे फिल्माया गया था उन्होंने बतौर बाल कलाकार उस फिल्म से शुरुआत की थी जिसमें उनकी बड़ी बहन को लौंच किया गया था.
३. पहला अंतरा शुरू होता है इस शब्द से -"सूरज".इस पहेली को बूझने के आपको मिलेंगें २ की बजाय ३ अंक. यानी कि एक अंक का बोनस...पराग जी इस प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सकेंगें.

पिछली पहेली का परिणाम -
इंदु जी ३ और शानदार अंक आपकी झोली में...बहुत बधाई, पाबला जी, अगर जवाब नहीं पता तो बोल दिया कीजिये बहाने क्यों बनाते हैं हा हा हा :)

खोज - पराग सांकला
आलेख- सुजॉय चटर्जी


ओल्ड इस गोल्ड यानी जो पुराना है वो सोना है, ये कहावत किसी अन्य सन्दर्भ में सही हो या न हो, हिन्दी फ़िल्म संगीत के विषय में एकदम सटीक है. ये शृंखला एक कोशिश है उन अनमोल मोतियों को एक माला में पिरोने की. रोज शाम 6-7 के बीच आवाज़ पर हम आपको सुनवाते हैं, गुज़रे दिनों का एक चुनिंदा गीत और थोडी बहुत चर्चा भी करेंगे उस ख़ास गीत से जुड़ी हुई कुछ बातों की. यहाँ आपके होस्ट होंगे आवाज़ के बहुत पुराने साथी और संगीत सफर के हमसफ़र सुजॉय चटर्जी. तो रोज शाम अवश्य पधारें आवाज़ की इस महफिल में और सुनें कुछ बेमिसाल सदाबहार नग्में.

बुधवार, 2 दिसंबर 2009

चंदा चांदनी में जब चमके...गीता दत्त और गीता बाली का अनूठा संगम

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 278

राग सांकला जी के चुने हुए गीता दत्त के गाए गानें इन दिनों आप सुन रहे हैं 'ओल्ड इज़ गोल्ड' की ख़ास लघु शृंखला 'गीतांजली' के अन्तर्गत। आज के अंक में गीता दत्त गा रहीं हैं गीता बाली के लिए। जी हाँ, वही गीता बाली जिनकी थिरकती हुई आँखें, जिनके चेहरे के अनगिनत भाव, जिनकी नैचरल अदाकारी के चर्चे आज भी लोग करते हैं। और इन सब से परे यह कि वो एक बहुत अच्छी इंसान थीं। गीता बाली का जन्म अविभाजित पंजाब में एक सिख परिवार में हुआ था। उनका असली नाम था हरकीर्तन कौर। देश के बँटवारे के बाद परिवार बम्बई चली आई और गरीबी ने उन्हे घेर लिया। तभी हरकीर्तन कौर बन गईं गीता बाली और अपने परिवार को आर्थिक संकट से उबारा एक के बाद एक फ़िल्म में अभिनय कर। बम्बई आने से पहले उन्होने पंजाब की कुछ फ़िल्मों में नृत्यांगना के छोटे मोटे रोल किए हुए थे। कहा जाता है कि जब किदार शर्मा, जिन्होने गीता बाली को पहला ब्रेक दिया, पहली बार जब वो उनसे मिले तो वो अपने परिवार के साथ किसी के बाथरूम में रहा करती थीं। किदार शर्मा ने पहली बार गीता बाली को मौका दिया १९४८ की फ़िल्म 'सुहाग रात' में। और इसी फ़िल्म से शुरु हुआ गीता बाली और गीता रॉय का साथ। गीता बाली और गीता दत्त, दोनों ने ही यह साबित किया कि दर्दीले और चुलबुले, दोनों तरह के किरदार और गीत गानें में वो अपनी अपनी जगह पारंगत हैं। १९५१ में गुरु दत्त की पहली हिट फ़िल्म 'बाज़ी' से गीता बाली एक नामचीन अदाकारा बन गईं। देव आनंद ने इस फ़िल्म के बारे में कहा था कि "People came repeatedly to theatres to see Geeta's spirited dancing to "tadbeer se bigdi hui taqdeer bana de". This cemented the bonding between Geeta Bali and Geeta Roy!" शम्मी कपूर गीता बाली की ज़िंदगी में आए जब वे दोनों 'मिस कोका कोला' और 'कॊफ़ी हाउस' जैसी फ़िल्मों में साथ साथ काम कर रहे थे। दोनों ने आगे चलकर शादी कर ली, लेकिन बहुत जल्द गीता बाली इस दुनिया से गुज़र गईं। उस वक़्त शम्मी कपूर 'तीसरी मंज़िल' फ़िल्म में काम कर रहे थे।

गीता बाली की थोड़ी चर्चा हमने की, और अब बारी है आज के गाने की। गीता दत्त की आवाज़ में पेश है गीता बाली पर फ़िल्माया फ़िल्म 'मुजरिम' का गीत "चंदा चांदनी में जब चमके"। वैसे आपको बता दें कि इस फ़िल्म में शम्मी कपूर की नायिका थीं रागिनी; गीता बाली तो बस होटल डान्सर की भूमिका में केवल इसी आइटम सॊंग् में नज़र आईं। इस गीत में गीता बाली को बर्मीज़ लुक्स दिए गए, जिस तरह से हेलेन दिखती थीं। बहुत ही खुशमिजाज़ गीत है और एक बार फिर से ओ. पी. नय्यर साहब की धुन, लेकिन इस बार गीतकार हैं मजरूह सुल्तानपुरी। इस गीत का शुरुआती संगीत काफ़ी हद तक हमें याद दिलाती है "मेरा नाम चिन चिन चू" के शुरुआती संगीत का। तो दोस्तों, आइए गीत को सुना जाए, पिछले दो गीतों की तरह आज भी बारी है झूमने की। गीता दत्त की आवाज़ में इस तरह के गानें इतने अच्छे लगते हैं कि सच में दिल झूम उठता है। ५० के दशक में नय्यर साहब ने बहुत से इस तरह के गानें गीता दत्त से गवाए हैं, जिनमें से बहुत से गानें आज कहीं से बिल्कुल सुनाई नहीं देते हैं। और आज का गीत उन्ही में से एक है। लेकिन पराग जी के प्रयास का नतीजा है कि आज हम इस गीत को एक बार फिर से जी रहे हैं। आइए सुनते हैं।



और अब बूझिये ये पहेली. अंदाजा लगाइये कि हमारा अगला "ओल्ड इस गोल्ड" गीत कौन सा है. हम आपको देंगे तीन सूत्र उस गीत से जुड़े. ये परीक्षा है आपके फ़िल्म संगीत ज्ञान की. याद रहे सबसे पहले सही जवाब देने वाले विजेता को मिलेंगें 2 अंक और 25 सही जवाबों के बाद आपको मिलेगा मौका अपनी पसंद के 5 गीतों को पेश करने का ओल्ड इस गोल्ड पर सुजॉय के साथ. देखते हैं कौन बनेगा हमारा अगला (अब तक के चार गेस्ट होस्ट बने हैं शरद तैलंग जी (दो बार), स्वप्न मंजूषा जी, पूर्वी एस जी और पराग सांकला जी)"गेस्ट होस्ट".अगले गीत के लिए आपके तीन सूत्र ये हैं-

१. एक नेपाली इसाई परिवार में जन्मी अभिनेत्री हैं ये जिन पर ये गीत फिल्माया गया है.
२. वो गायिका के भाई थे जिन्होंने इस गीत को संगीत से सजाया.
३. इस युगल गीत के मुखड़े की अंतिम पंक्ति में शब्द है -"कमल".इस पहेली को बूझने के आपको मिलेंगें २ की बजाय ३ अंक. यानी कि एक अंक का बोनस...पराग जी इस प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सकेंगें.

पिछली पहेली का परिणाम -
इंदु जी, एक बार फिर आपने पाबला जी को मात देकर बाज़ी मार ली, २१ अंकों के लिए बधाई, पराग जी....आपकी बात सर आँखों पर...सही कहा आपने, सच्चाई यही है.

खोज - पराग सांकला
आलेख- सुजॉय चटर्जी


ओल्ड इस गोल्ड यानी जो पुराना है वो सोना है, ये कहावत किसी अन्य सन्दर्भ में सही हो या न हो, हिन्दी फ़िल्म संगीत के विषय में एकदम सटीक है. ये शृंखला एक कोशिश है उन अनमोल मोतियों को एक माला में पिरोने की. रोज शाम 6-7 के बीच आवाज़ पर हम आपको सुनवाते हैं, गुज़रे दिनों का एक चुनिंदा गीत और थोडी बहुत चर्चा भी करेंगे उस ख़ास गीत से जुड़ी हुई कुछ बातों की. यहाँ आपके होस्ट होंगे आवाज़ के बहुत पुराने साथी और संगीत सफर के हमसफ़र सुजॉय चटर्जी. तो रोज शाम अवश्य पधारें आवाज़ की इस महफिल में और सुनें कुछ बेमिसाल सदाबहार नग्में.

मंगलवार, 1 दिसंबर 2009

किया यह क्या तूने इशारा जी अभी अभी...गीत दत्त के स्वरों में हेलन ने बिखेरा था अपना मदमस्त अंदाज़

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 277

न दिनों 'ओल्ड इज़ गोल्ड' पर जारी है गीता दत्त के गाए हुए गीतों की ख़ास लघु शृंखला 'गीतांजली', जिसके अन्तर्गत दस ऐसे गानें बजाए जा रहे हैं जो दस अलग अलग अभिनेत्रियों पर फ़िल्माए गए हैं। आज जिस अभिनेत्री को हमने चुना है वो नायिका के रूप में भले ही कुछ ही फ़िल्मों में नज़र आईं हों, लेकिन उन्हे सब से ज़्यादा ख्याति मिली खलनायिका के किरदारों के लिए। सही सोचा आपने, हम हेलेन की ही बात कर रहे हैं। वैसे हेलेन पर ज़्यादातर मशहूर गानें आशा भोसले ने गाए हैं, लेकिन ५० के दशक में गीता दत्त ने हेलेन के लिए बहुत से गानें गाए। आज हमने जिस गीत को चुना है वह है १९५७ की फ़िल्म 'दुनिया रंग रंगीली' से "किया यह क्या तूने इशारा जी अभी अभी, कि मेरा दिल तुझे पुकारा अरे अभी अभी"। राजेन्द्र कुमार, श्यामा, जॉनी वाकर, चाँद उस्मानी, जीवन व हेलेन अभिनीत इस फ़िल्म के गानें लिखे जान निसार अख़्तर ने और संगीत था ओ. पी. नय्यर साहब का। 'आर पार' की सफलता के बाद गीता दत्त को ही श्यामा के पार्श्वगायन के लिए चुना गया। इस फ़िल्म में श्यामा के नायक थे जॉनी वाकर और इस जोड़ी पर कई गानें भी फ़िल्माए गए जिनमें स्वर आशा भोसले का था। आशा जी ने इस फ़िल्म की मुख्य नायिका चाँद उस्मानी का भी पार्श्वगायन किया। ५० के दशक के शुरुआती सालों में नय्यर साहब गीता दत्त से बहुत सारे गानें गवाए थे, लेकिन जैसे जैसे यह दशक समापन की ओर बढ़ता गया, आशा भोसले बनती गईं नय्यर साहब की प्रधान गायिका। १९५८ की फ़िल्म 'हावड़ा ब्रिज' में नय्यर साहब ने गीता जी से केवल दो गीत गवाए जो हेलेन पर फ़िल्माए गए। इनमें से एक था "मेरा नाम चिन चिन चू" जिसने गीता दत्त और हेलेन, दोनों को लोकप्रियता की बुलंदी पर बिठाया।

वापस आते हैं आज के गीत पर। आज का यह गीत कहीं खो ही गया था, लेकिन १९९२ में एच. एम. वी (अब आर. पी. जी) ने "Geeta Dutt sings for OP Nayyar" नामक कैसेट में इस गीत को शामिल किया और इस तरह से यह गीत एक बार फिर से गीता दत्त और नय्यर साहब के चाहनेवालों के हाथ लग गई। यह गीत एक साधारण गीत होते हुए भी बहुत असरदार है जो एक चुलबुली हवा के झोंके की तरह आती है और गुदगुदाकर चली जाती है। गीता जी का ख़ास अंदाज़ इस तरह के गीतों में चार चाँद लगा देती थी। एक तरफ़ गीता जी का नशीला अंदाज़ और दूसरी तरफ़ हेलेन जॉनी वाकर को इस गीत में शराब पिलाकर फाँसने की कोशिश कर रही है। भले ही इस गीत के ज़रिए हेलेन जॉनी वाकर को बहकाने की कोशिश कर रही है लेकिन ना तो गीता जी की गायकी में कोई अश्लीलता सुनाई देती है और ना ही हेलेन के अंदाज़ और अभिनय में। इस गीत में हेलेन के डांस स्टेप्स हमें याद दिलाती हैं फ़िल्म 'अलबेला' में सी. रामचंद्र के धुनों पर थिरकते हुए गीता बाली और भगवान की। नय्यर साहब का संगीत संयोजन हर गीत में कमाल का रहा है। इस गीत के इंटर्ल्युड म्युज़िक में भी उनका हस्ताक्षर साफ़ सुनाई देता है। तो आइए सुनते हैं फ़िल्म 'दुनिया रंग रंगीली' का गीत। इस फ़िल्म का नाम याद आते ही पंकज मल्लिक की आवाज़ में "दुनिया रंग रंगीली बाबा" जैसे दिल में बज उठती है। यह गीत भी भविष्य में सुनेंगे, लेकिन आज बहक जाइए गीता दत्त और हेलेन के नशीले अंदाज़ में।



और अब बूझिये ये पहेली. अंदाजा लगाइये कि हमारा अगला "ओल्ड इस गोल्ड" गीत कौन सा है. हम आपको देंगे तीन सूत्र उस गीत से जुड़े. ये परीक्षा है आपके फ़िल्म संगीत ज्ञान की. याद रहे सबसे पहले सही जवाब देने वाले विजेता को मिलेंगें 2 अंक और 25 सही जवाबों के बाद आपको मिलेगा मौका अपनी पसंद के 5 गीतों को पेश करने का ओल्ड इस गोल्ड पर सुजॉय के साथ. देखते हैं कौन बनेगा हमारा अगला (अब तक के चार गेस्ट होस्ट बने हैं शरद तैलंग जी (दो बार), स्वप्न मंजूषा जी, पूर्वी एस जी और पराग सांकला जी)"गेस्ट होस्ट".अगले गीत के लिए आपके तीन सूत्र ये हैं-

१. इस अभिनेत्री का मूल नाम था हरकीर्तन कौर.
२. मजरूह के बोलों को धुनों में पिरोया है उस संगीतकार ने जिन्होंने गीत दत्त के शुरूआती करियर में अहम् भूमिका निभाई थी
३. मुखड़े में शब्द है -"चांदनी".इस पहेली को बूझने के आपको मिलेंगें २ की बजाय ३ अंक. यानी कि एक अंक का बोनस...पराग जी इस प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सकेंगें.

पिछली पहेली का परिणाम -
इंदु जी अच्छा लगा आपको वापस देखकर, १८ अंक हुए आपके, बधाई...

खोज - पराग सांकला
आलेख- सुजॉय चटर्जी


ओल्ड इस गोल्ड यानी जो पुराना है वो सोना है, ये कहावत किसी अन्य सन्दर्भ में सही हो या न हो, हिन्दी फ़िल्म संगीत के विषय में एकदम सटीक है. ये शृंखला एक कोशिश है उन अनमोल मोतियों को एक माला में पिरोने की. रोज शाम 6-7 के बीच आवाज़ पर हम आपको सुनवाते हैं, गुज़रे दिनों का एक चुनिंदा गीत और थोडी बहुत चर्चा भी करेंगे उस ख़ास गीत से जुड़ी हुई कुछ बातों की. यहाँ आपके होस्ट होंगे आवाज़ के बहुत पुराने साथी और संगीत सफर के हमसफ़र सुजॉय चटर्जी. तो रोज शाम अवश्य पधारें आवाज़ की इस महफिल में और सुनें कुछ बेमिसाल सदाबहार नग्में.

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