Showing posts with label Interview. Show all posts
Showing posts with label Interview. Show all posts

Saturday, June 16, 2018

चित्रकथा - 73: गीतकार आनन्द बक्शी के सुपुत्र राकेश बक्शी से बातचीत (भाग-2)

अंक - 73

गीतकार आनन्द बक्शी के सुपुत्र राकेश बक्शी से बातचीत (भाग-2)


"ज़िंदगी के सफ़र में..." 




रेडियो प्लेबैक इंडिया’ के साप्ताहिक स्तंभ ’चित्रकथा’ में आप सभी का स्वागत है। आज इस स्तंभ के माध्यम से हम आपसे मिलवाने जा रहे हैं हिन्दी सिने-संगीत जगत के सुप्रसिद्ध और लोकप्रियतम गीतकारों में से एक, आनद बक्शी के सुपुत्र राकेश बक्शी से। राकेश आनन्द बक्शी के नाम से अपना परिचय देने वाले राकेश जी बहुत ही उदारता का परिचय देते हुए ’रेडियो प्लेबैक इंडिया’ की इस प्रस्तुति के लिए आपके इस दोस्त से लम्बी बातचीत की थी वर्ष 2011 में। ’ओल्ड इज़ गोल्ड - शनिवार विशेष’ और ’बातों बातों में’ स्तंभों में पूर्वप्रकाशित यह साक्षात्कार हम आपके लिए फिर एक बार प्रस्तुत कर रहे हैं इस उद्येश्य से कि हमारे बहुत से पाठक जो हाल के वर्षों में हमसे जुड़े हैं, वो इस साक्षात्कार का आनन्द उठा सके। तो आइए प्रस्तुत है बक्शी साहब के बेटे राकेश बक्शी से सुजॉय चटर्जी की लम्बी बातचीत के संपादित अंश। आज पेश है इस बातचीत का दूसरा व अंतिम  भाग।



राकेश जी, अच्छा क्या ऐसा कभी हुआ कि आप ने जाने अंजाने उन्हें कोई गीत लिखने का सुझाव दिया हो या आपने कोई मुखड़ा या अंतरा सुझाया हो? या उन्होंने कभी आप बच्चों से पूछा हो कि भई बताओ, इस गीत को किस तरह से लिखूँ?

नहीं, कभी भी नहीं! लेकिन मुझे मालूम है कि एक गीत है १९८७ की फ़िल्म 'हिफ़ाज़त' का, "बटाटा वडा, बटाटा वडा, प्यार नहीं करना था, करना पड़ा"।

हा हा हा

यह गीत उन्होंने इसलिए लिखा था क्योंकि उनकी पोती को बटाटा वडा बहुत ज़्यादा पसंद थी।

क्या आप कभी रपने पिताजी के साथ रेकॉर्डिंग्‍ पर जाते थे?

जी हाँ, मैं रेकॉर्डिंग्‍ पर जाता था। और बहुत ही अच्छा अनुभव होता था और मुझे बहुत गर्व होता था। लेकिन साथ ही साथ अंतर्मुखी होने की वजह से मैं म्युज़िशियन्स, कम्पोज़र्स और सिंगर्स से शर्माता था और वो लोग मुझे प्यार करते थे। कुछ लोग तो बिना यह जाने कि मैं किनका बेटा हूँ, मुझे प्यार करते।

राकेश जी, आनंद बक्शी वो गीतकार हैं जिन्होंने फ़िल्मों में सब से ज़्यादा गीत लिखे हैं। इसका एक अर्थ यह भी निकलता है कि वो बहुत ज़्यादा व्यस्त भी रहते होंगे। तो किस तरह से वो 'वर्क-लाइफ़ बैलेन्स' को मेण्टेन करते थे? परिवार के लिए समय निकाल पाना क्या मुश्किल नहीं होता था?

वो सुबह ७ बजे से सुबह ११ बजे तक, और फिर शाम ४ बजे से रात ९ बजे तक लिखते थे। रात ९ बजे के बाद उनका समय हमारे लिए होता था। रात १०:३० बजे वो खाना खाते थे, और ९ से १०:३० तक का समय वो हमें देते थे। वो हमें ढेर सारी कहानियाँ सुनाते थे अपनी ज़िंदगी के तमाम तजुर्बों की, और तमाम उर्दू के उपन्यासों की, अंग्रेज़ी उपन्यासों की। वो रोज़ाना Readers' Digest पढ़ते थे। वो कहा करते थे कि हर किसी को हर रोज़ कोई न कोई नई चीज़ पढ़नी चाहिये। जिसने यह काम किसी रोज़ नहीं किया, तो उसने जीना छोड़ दिया। वो हर रोज़ एक नई कहानी पढ़ते थे। और शायद यही वजह है कि उन्हें फ़िल्मी कहानियों और दृश्यों की इतनी अच्छी समझ थी। बहुत से निर्माता और निर्देशक अपनी फ़िल्म के रिलीज़ होने से पहले पिताजी को अपनी फ़िल्म दिखाते थे ताकि वो अपने विचार और सुझाव उनके सामने रख सकें।

आपने बताया कि बक्शी साहब को पढ़ने का बेहद शौक था और रोज़ नई कहानी पढ़ते थे। किन किन लेखकों की किताबें उन्हें ज़्यादा पसंद थी?

सिडनी शेल्डन और डैनियल स्टील। वो कुछ उर्दू मासिक पत्रिकाएँ भी पढ़ते थे, ख़ास कर दिल्ली के शमा ग्रूप के। Readers' Digest उनकी पहली पसंद थी। He believed any person who has not read anything new in 24 hours, has nothing to contribute to society, to life.

अब मैं एक सवाल मैं आपसे पूछना चाहूँगा अगर आप उसे अन्यथा न लें तो।

पूछिये।

क्या आपको लगता है कि बक्शी साहब के इतने ज़्यादा गीत लिखने की वजह से उनके लेखन के स्तर में उसका असर पड़ा है? क्या आपको लगता है कि अगर वो क्वाण्टिटी के बदले क्वालिटी पर ज़्यादा ध्यान देते तो और उम्दा काम हुआ होता?

हाँ, कभी कभी मैं इस बात को मानता हूँ। मैं उन्हें पूछता भी था कि वो कुछ निर्देशकों के लिए हमेशा अच्छे गीत लिखते और कुछ निर्देशकों के लिए हमेशा बुरे गीत लिखते, ऐसा क्यों? और उनका जवाब होता कि कुछ निर्देशक उनके पास अच्छी कहानी और सिचुएशन लेकर आते थे, अच्छे किरदार लेकर आते थे, और उससे उनको प्रेरणा मिलती थी अच्छा गीत लिखने की। यानी वो यह कहना चाहते थे कि वो सिर्फ़ आइने का काम करते थे, जो जैसी चीज़ लेकर उनके पास आते थे, वो वैसी ही चीज़ उन्हें वापस करते।

अच्छा राकेश जी, आपने बताया कि आपका इम्पोर्ट का बिज़नेस था। क्या आपके परिवार के किसी और सदस्य ने बक्शी साहब के नक्श-ए-क़दम पर चलने का प्रयास किया है?

मैं ख़ुद एक राइटर-डिरेक्टर हूँ, और कोशिश कर रहा हूँ मेरी पहली हिंदी फ़ीचर फ़िल्म बनाने की। और कोई इस लाइन में नहीं है। मेरा भाई फ़ाइनन्शियल मार्केट में है, मेरी दो बहनों की शादी हो चुकी है वो अपना अपना घर सम्भालती है।

यह तो बहुत अच्छी बात है कि आप फ़िल्म-निर्माण में क़दम रख रहे हैं। लेकिन इस राह में आपने कुछ अनुभव भी हासिल किये हैं? 

जी हाँ, इस लाइन में मैने अपना करीयर १९९९ में शुरु किया था। इस वर्ष मैंने दो स्क्रिप्ट्स लिखे - सिनेविस्टा कम्युनिकेशन्स के लिए टीवी धारावाहिक 'सबूत', और धारावाहिक 'हिंदुस्तानी' में मैंने बतौर प्रथम सहायक निर्देशक काम किया। इसी साल फ़रवरी और अगस्त के दरमीयाँ मैं 'मुक्ता आर्ट्स' में बतौर सहायक निर्देशक काम किया, उनकी फ़िल्म 'ताल' में।

'मुक्ता आर्ट्स' यानी कि सुभाष घई की बैनर?

जी हाँ। 'ताल' में मैं 'शॉट कण्टिन्युइटी' के लिए ज़िम्मेदार था, और एडिटिंग्‍ के वक़्त डिरेक्टर के साथ तथा 'प्रीमिक्स' व 'फ़ाइनल मिक्स' में ऐसोसिएट डिरेक्टर के साथ था। फिर 'मुक्ता आर्ट्स' की ही अगली फ़िल्म 'यादें' में कास्टिंग्‍ और शेड्युलिंग्‍ से जुड़ा था, और तमाम तकनीकी पक्ष संभाला था।

यह तो थी फ़िल्म-निर्माण के तकनीकी पक्षों में आपका अनुभव। आपने यह भी बताया कि आप लिखते भी हैं। तो इस ओर आपने अब तक क्या काम किया है?

साल २००३ में मैंने निर्माता वाशु भगनानी के लिए अंग्रेज़ी में एक ऑरिजिनल फ़िल्म-स्क्रिप्ट लिखी, जिसका शीर्षक था 'दि इमिग्रैण्ट'। इसी के हिंदी ऐडप्टेशन पर बनी हिंदी फ़िल्म 'आउट ऑफ़ कण्ट्रोल'। मेरी खुद की लिखी और मेरे ही द्वारा बनाई और निर्देशित जो लघु फ़िल्में हैं, उनके नाम हैं - 'कीमत - दि वैल्यु', 'एनफ़ - वी आर नेवर टू पूओर टू शेयर', 'आइ विल बी देयर फ़ॉर यू - कीपिंग्‍ लव अलाइव' और 'सीकिंग्‍ - इन सर्च ऑफ़ ब्यूटी'। २००३ में ही मैं एक हिंदी लघु फ़िल्म में निर्देशक अभय रवि चोपड़ा के साथ मिलकर उसकी स्क्रिप्ट लिखी, जिसका शीर्षक था 'इण्डिया, १९६४'। अभय की यह फ़िल्म 'दि न्यु यॉर्क स्कूल ऑफ़ विज़ुअल आर्ट्स' में उनके ग्रैजुएशन यीअर की फ़िल्म थी। इस फ़िल्म को 'स्टुडेण्ट्स ऑस्कर' के लिए नामांकन मिला था। फ़िल्म में अभिनय है रणबीर ऋषी कपूर और शरद सक्सेना का।

वाह! अच्छा सुभाष घई के साथ और किन किन फ़िल्मों में आपने काम किया था?

स्क्रिप्ट-रीडिंग्‍ और स्क्रिप्ट-एडिटिंग्‍ में मैंने उन्हें ऐसिस्ट किया 'एक और एक ग्यारह', 'जॉगर्स पार्क', 'ऐतराज़', 'इक़बाल' और '३६ चायना टाउन' में। 'किस्ना' में मैं स्क्रिप्ट-ऐसिस्टैण्ट था जिसमें मैंने सचिन भौमिक, फ़ारुख़ धोंडी और सुभाष घई के साथ स्क्रिप्ट-कूओर्डिनेशन का काम किया। 

बहुत ख़ूब! आपने ज़िक्र किया था कि आप अपनी पहली हिंदी फ़ीचर फ़िल्म की राह पर बढ़ रहे हैं। इसके बारे में कुछ बताइये।

फ़िल्म का नाम है 'फ़ितरत', जिसका मैं राइटर-डिरेक्टर हूँ। कास्ट की तलाश कर रहा हूँ। इसके अलावा एक ऐडवेंचर थ्रिलर 'एवरेस्ट' भी प्लान कर रहा हूँ। मैंने एक ऐनिमेशन फ़िल्म 'लिबर्टी टेकेन' को लिखा व निर्देशित भी किया है।

बहुत सही है! और हमारी आपके लिए यह शुभकामना है कि आप एक बहुत बड़े फ़िल्म-मेकर बने और अपने पिता से भी ज़्यादा आपका नाम हो, और आप उनके नाम के मशाल को और आगे लेकर जा सकें।

बहुत शुक्रिया!

राकेश जी, बक्शी साहब एक आला दर्जे के गीतकार तो थे ही, पर हमने सुना है कि वो गाते भी अच्छा थे?

बक्शी जी को गायन से प्यार था और अपने आर्मी और नेवी के दिनों में अपने साथियों को गाने सुना कर उनका मनोरंजन करते थे। और आर्मी में रहते हुए ही उनके साथियों ने उनको गायन के लिए प्रोत्साहित किया। उन साथियों ने उन्हें बताया कि वो अच्छा गाते हैं और बहुत अच्छा लिखते हैं, इसलिए उन्हें फ़िल्मों में अपनी क़िस्मत आज़मानी चाहिये। मेरा ख़याल है कि वहीं पे उनके सपनों का बीजारोपण हो गया था। आर्मी के थिएटर व नाटकों में वो अभिनय भी करते थे और गीत भी गाते थे। फ़िल्मी पार्टियों में नियमीत रूप से वो अपनी लिखी हुई कविताओं और गीतों को गा कर सुनाते थे।

वाह! अच्छा, ये तो आपने बताया कि किस तरह से वो सेना में रहते समय साथियों के लिए गाते थे। लेकिन फ़िल्मों में उन्हें बतौर गायक कैसे मौका मिला?

दरसल क्या हुआ कि पिताजी अक्सर अपने गीतों को प्रोड्युसर-डिरेक्टर्स को गा कर सुनाया करते थे। ऐसे में एक दिन मोहन कुमार साहब ने उन्हें गाते हुए सुन लिया और उन्हें ज़बरदस्ती अपनी फ़िल्म 'मोम की गुड़िया' में दो गीत गाने के लिए राज़ी करवा लिया। इनमें से एक सोलो था और एक लता जी के साथ डुएट।

जी हाँ, और क्या ग़ज़ब का गीत था वह। उनकी आवाज़ भले ही हिंदी फ़िल्मी नायक की आवाज़ न हो, लेकिन कुछ ऐसी बात है उनकी आवाज़ में कि सुनते हुए दिल को अपने मोहपाश में बांध लेती है।

पता है "बाग़ों में बहार आयी" गीत की रेकॉर्डिंग्‍ पर वो बहुत सज-संवरकर गये थे। जब उनसे यह पूछा गया कि इतने बन-ठन के क्यों आये हैं, तो उन्होंने कहा कि पहली बार लता जी के साथ गाने का मौका मिला है, इसलिए यह उनके लिए बहुत ख़ास मौका है ज़िंदगी का।

बहुत सही है!

लेकिन वो लोगों के सामने गाने से कतराते थे। पार्टियों में वो तब तक नहीं गाते जब तक उनके दोस्त उन्हें गाने पर मजबूर न कर देते। पर एक बार गाना शुरु कर दिया तो लम्बे समय तक गाते रहते।

राकेश जी, बक्शी साहब ने हज़ारों गीत लिखे हैं, इसलिए अगर मैं आपसे आपका पसंदीदा गीत पूछूँ तो शायद बेवकूफ़ी वाली बात होगी। बताइये कि कौन कौन से गीत आपको बहुत ज़्यादा पसंद है आपके पिताजी के लिखे हुए?

"मैं शायर तो नहीं" (बॉबी), "गाड़ी बुला रही है" (दोस्त), "एक बंजारा गाये" (जीने की राह), "अच्छा तो हम चलते हैं" (आन मिलो सजना), "आदमी जो कहता है" (मजबूर), "ज़िंदगी हर क़दम एक नई जंग है" (मेरी जंग), "ये रेश्मी ज़ुल्फ़ें" (दो रास्ते), "हमको तुमसे हो गया है प्यार क्या करें" (अमर अकबर ऐन्थनी), "भोली सी सूरत आँखों में मस्ती" (दिल तो पागल है), और इसके अलवा और ३०० गीत होंगे जहाँ तक मेरा अनुमान है।

इसमें कोई ताज्जुब की बात नहीं!

उनके गीतों में गहरा दर्शन छुपा होता था। उनके बहुत से चाहनेवालों और निर्माता-निर्देशकों ने मुझे बताया और अहसास दिलाया कि सरल से सरल शब्दों के द्वारा भी वो गहरी से गहरी बात कह जाते थे। उनके लिखे तमाम गीत ले लीजिये, जैसे कि "चिंगारी कोई भड़के तो सावन उसे बुझाये", "यहाँ मैं अजनबी हूँ", "रोते रोते हँसना सीखो, हँसते हँसते रोना", "ज़िंदगी हर कदम एक नई जंग है", "तुम बेसहारा हो तो किसी का सहारा बनो", "गाड़ी बुला रही है, सीटी बजा रही है", "कैसे जीते हैं भला हम से सीखो ये अदा", "दुनिया में कितना ग़म है, मेरा ग़म कितना कम है", "ज़िंदगी क्या है एक लतीफ़ा है", "आदमी मुसाफ़िर है" (जिसके लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर अवार्ड मिला था), "दुनिया में रहना है तो काम कर प्यारे", "शीशा हो या दिल हो टूट जाता है", "ज़िंदगी के सफ़र में गुज़र जाते हैं जो मकाम, वो फिर नहीं आते", "माझी चल, ओ माझी चल", "हाथों की चंद लकीरों का, ये खेल है सब तकदीरों का", "चिट्ठी न कोई संदेस, जाने वो कौन सा देस, जहाँ तुम चले गये", "इक रुत आये इक रुत जाये, मौसम बदले, ना बदले नसीब", "जगत मुसाफ़िरखाना है", "आदमी जो कहता है", "दुनिया में ऐसा कहाँ सबका नसीब है", और भी न जाने कितने कितने उनके दार्शनिक गीत हैं जो कुछ न कुछ संदेश दे जाते हैं ज़िंदगी के लिए।

बिलकुल बिलकुल! अच्छा राकेश जी, आपने बहुत सारे गीतों का ज़िक्र किया। अब हम आपसे कुछ चुने हुए गीतों के बारे में जानना चाहेंगे जिनके साथ कुछ न कुछ ख़ास बात जुड़ी हुई है। इस तरह के कुछ गीतों के बारे में बताना चाहेंगे?

उनका लिखा गीत है 'बॉबी' का "मैं शायर तो नहीं"। वो मुझे कहते थे और बहुत से लेखों में भी मैंने उन्हें कहते पढ़ा है कि वो अपने आप को एक शायर नहीं, बल्कि एक गीतकार मानते थे, साहिर साहब को वो शायर मानते थे। 'अमर प्रेम' के गीत "कुछ तो लोग कहेंगे" को ही ले लीजिये; जावेद साहब इस कश्मकश में थे कि क्या उन्हें अपनी शादी को तोड़ कर एक नया रिश्ता कायम कर लेनी चाहिये, और इस गीत ने उन्हें परिणाम की परवाह किये बिना सही निर्णय लेने में मददगार साबित हुई। जावेद साहब से ही जुड़ा एक और क़िस्सा है, "ज़िंदगी के सफ़र में" गीत को सुनने के बाद जावेद साहब ने पिताजी से वह कलम माँगी जिससे उन्होंने इस गीत को लिखा था। पिताजी ने अगले दिन उन्हें दूसरा कलम भेंट किया। जावेद साहब ने ऐसा कहा था कि अगर यह दुनिया उन्हें एक सूनसान द्वीप में अकेला छोड़ दे, तो केवल इस गीत के सहारे वो अपनी ज़िंदगी के बाक़ी दिन काट सकते हैं।

वाक़ई एक लाजवाब गीत है, और मैं समझता हूँ कि यह गीत एक यूनिवर्सल गीत है, और हर इंसान को अपने जीवन की छाया इस गीत में नज़र आती होगी। "कुछ लोग जो सफ़र में बिछड़ जाते हैं, वो हज़ारों के आने से मिलते नहीं, बाद में चाहे लेके पुकारा करो उनका नाम, वो फिर नहीं आते", कमाल है!!! राकेश जी, बहुत अच्छा लग रहा है जो आप एक एक गीत के बारे में बता रहे हैं, और भी कुछ इसी तरह के क़िस्सों के बारे में बताइये न!

"नफ़रत की दुनिया को छोड़ के प्यार की दुनिया में", इस गीत में एक अंतरा है "जब जानवर कोई इंसान को मारे.... एक जानवर की जान आज इंसानो ने ली है, चुप क्यों है संसार", पिताजी कभी भी मुझे किसी पंछी को पिंजरे में क़ैद करने नहीं दिया, कभी मछली को अक्वेरियम में सीमाबद्ध नहीं करने दिया। वो कहते थे कि क्योंकि वो ब्रिटिश शासन में रहे हैं और उन्हें इस बात का अहसास है कि ग़ुलामी क्या होती है, इसलिए वो कभी नहीं चाहते कि किसी भी जीव को हम अपना ग़ुलाम बनायें।

वाह! राकेश जी, चलते चलते अब हम आपसे जानना चाहेंगे बक्शी साहब के लिखे उन गीतों के बारे में जो उन्हें बेहद पसंद थे।

यहाँ भी एक लम्बी लिस्ट है, कुछ के नाम गिना देता हूँ - "मैंने पूछा चांद से" (अब्दुल्ला), "परदेसियों से न अखियाँ मिलाना" (जब जब फूल खिले), "चिंगारी कोई भड़के" (अमर प्रेम), "मेरे दोस्त क़िस्सा ये क्या हो गया" (दोस्ताना), "डोली ओ डोली", "खिलौना जान कर तुम तो", "जब हम जवाँ होंगे", "बाग़ों में बहार आयी", "मैं ढूंढ़ रहा था सपनों में", "सुन बंटो बात मेरी", "जिंद ले गया वो दिल का जानी", "वो तेरे प्यार का ग़म", "सावन का महीना पवन करे सोर", "राम करे ऐसा हो जाये", "जिस गली में तेरा घर न हो बालमा", "ज़िंदगी के सफ़र में", "मेरे नसीब में ऐ दोस्त तेरा प्यार नहीं", "प्रेम से क्या एक आँसू", "दीवाने तेरे नाम के खड़े हैं दिल थाम के", "क्या कोई सूरत इतनी ख़ूबसूरत हो सकती है", "तेरे नाम के सिवा कुछ याद नहीं", "दुनिया में कितना ग़म है", "आज दिल पे कोई ज़ोर चलता नहीं", "चिट्ठी आयी है", "पनघट पे परदेसी आया", "मैं आत्मा तू परमात्मा", "घर आजा परदेसी तेरा देस बुलाये रे", "जब जब बहार आयी", "कुछ कहता यह सावन", "वो क्या है, एक मंदिर है", "हर एक मुस्कुराहट मुस्कान नहीं होती", "यहाँ मैं अजनबी हूँ", "मैं तेरी मोहब्बत को रुसवा करूँ तो", आदि।

राकेश जी, क्या बताऊँ, किन शब्दों से आपका शुक्रिया अदा करूँ समझ नहीं आ रहा। इतने विस्तार से आपने बक्शी जी के बारे में हमें बताया कि उनकी ज़िंदगी के कई अनछुये पहलुओं से हमें अवगत कराया। चलते चलते कुछ कहना चाहेंगे?

"मैं बर्फ़ नहीं हूँ जो पिघल जाऊँगा", यह कविता उन्होंने अपने लिए लिखी थी। बहुत अरसे बाद इसे फ़िल्मी गीत का रूप दिया सुभाष घई साहब ने। यह कविता उन्हें निरंतर अच्छे अच्छे गीत लिखने के लिए प्रेरीत करती रही। It is the essence of his life, his attitude to his profession, his soul.

वाह! अच्छा तो राकेश जी, बहुत अच्छा लगा आपसे लम्बी बातचीत कर, आपको एक उज्वल भविष्य के लिए हमारी तरफ़ से ढेरों शुभकामनाएँ, आप फ़िल्मनिर्माण के जिस राह पर चल पड़े हैं, ईश्वर आपको कामयाबी दे, और आनन्द बक्शी साहब के नाम को आप चार-चांद लगायें यही हमारी कामना है आपके लिए, बहुत बहुत शुक्रिया।

बहुत बहुत शुक्रिया आपका।

समाप्त


आख़िरी बात

’चित्रकथा’ स्तंभ का आज का अंक आपको कैसा लगा, हमें ज़रूर बताएँ नीचे टिप्पणी में या soojoi_india@yahoo.co.in के ईमेल पते पर पत्र लिख कर। इस स्तंभ में आप किस तरह के लेख पढ़ना चाहते हैं, यह हम आपसे जानना चाहेंगे। आप अपने विचार, सुझाव और शिकायतें हमें निस्संकोच लिख भेज सकते हैं। साथ ही अगर आप अपना लेख इस स्तंभ में प्रकाशित करवाना चाहें तो इसी ईमेल पते पर हमसे सम्पर्क कर सकते हैं। सिनेमा और सिनेमा-संगीत से जुड़े किसी भी विषय पर लेख हम प्रकाशित करेंगे। आज बस इतना ही, अगले सप्ताह एक नए अंक के साथ इसी मंच पर आपकी और मेरी मुलाक़ात होगी। तब तक के लिए अपने इस दोस्त सुजॉय चटर्जी को अनुमति दीजिए, नमस्कार, आपका आज का दिन और आने वाला सप्ताह शुभ हो!




शोध,आलेख व प्रस्तुति : सुजॉय चटर्जी 



रेडियो प्लेबैक इण्डिया 

Saturday, June 9, 2018

चित्रकथा - 72: गीतकार आनन्द बक्शी के सुपुत्र राकेश बक्शी से बातचीत (भाग-1)

अंक - 72

गीतकार आनन्द बक्शी के सुपुत्र राकेश बक्शी से बातचीत (भाग-1)


"ज़िंदगी के सफ़र में..." 




रेडियो प्लेबैक इंडिया’ के साप्ताहिक स्तंभ ’चित्रकथा’ में आप सभी का स्वागत है। आज इस स्तंभ के माध्यम से हम आपसे मिलवाने जा रहे हैं हिन्दी सिने-संगीत जगत के सुप्रसिद्ध और लोकप्रियतम गीतकारों में से एक, आनद बक्शी के सुपुत्र राकेश बक्शी से। राकेश आनन्द बक्शी के नाम से अपना परिचय देने वाले राकेश जी बहुत ही उदारता का परिचय देते हुए ’रेडियो प्लेबैक इंडिया’ की इस प्रस्तुति के लिए आपके इस दोस्त से लम्बी बातचीत की थी वर्ष 2011 में। ’ओल्ड इज़ गोल्ड - शनिवार विशेष’ और ’बातों बातों में’ स्तंभों में पूर्वप्रकाशित यह साक्षात्कार हम आपके लिए फिर एक बार प्रस्तुत कर रहे हैं इस उद्येश्य से कि हमारे बहुत से पाठक जो हाल के वर्षों में हमसे जुड़े हैं, वो इस साक्षात्कार का आनन्द उठा सके। तो आइए प्रस्तुत है बक्शी साहब के बेटे राकेश बक्शी से सुजॉय चटर्जी की लम्बी बातचीत के संपादित अंश। आज पेश है इस बातचीत का पहला भाग।




राकेश जी, 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' की तरफ़ से, हमारे तमाम पाठकों की तरफ़ से, और मैं अपनी तरफ़ से आपका हमारे इस मंच पर हार्दिक स्वागत करता हूँ, नमस्कार! यह हमारी ख़ुशनसीबी है कि आपसे मिलने और बातचीत करने का मौका मिला।

नमस्कार! मुझे भी यहाँ आकर बहुत अच्छा लग रहा है।

सच पूछिये तो हम अभिभूत हैं आपको हमारे बीच में पाकर। फ़िल्म संगीत के सफलतम गीतकारों में से एक थे आनंद बक्शी जी, और आज उनके बेटे से बातचीत करने का सौभाग्य हमें प्राप्त हुआ है, जिसके लिए आपको हम जितना भी धन्यवाद दें, कम होगी।

बहुत बहुत धन्यवाद!

राकेश जी, वैसे तो बक्शी साहब के बारे में, उनकी फ़िल्मोग्राफ़ी के बारे में, उनके करीयर के बारे में हम कई जगहों से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसलिए इस बातचीत में हम उस तरफ़ न जाकर उनकी ज़िंदगी के कुछ ऐसे पहलुयों के बारे में आपसे जानना चाहेंगे जो शायद पाठकों को मालूम न होगी। और इसीलिए बातचीत के इस सिलसिले का नाम हमने रखा है 'बेटे राकेश बक्शी की नज़रों में गीतकार आनंद बक्शी'।

जी ज़रूर!

कैसा लगता है 'राकेश आनंद बक्शी' होना? मान लीजिए आप कहीं जा रहे हैं, और अचानक कहीं से बक्शी साहब का लिखा गीत बज उठता है, किसी पान की दुकान पे रेडियो पर, कैसा महसूस होता है आपको?

उनके लिखे सभी गीत मुझे नॉस्टल्जिक बना देता है। उनके लिखे न जाने कितने गीतों के साथ कितनी हसीन यादें जुड़ी हुईं हैं, या फिर कोई पर्सनल ईक्वेशन। कहीं से उनका लिखा गीत मेरे कानों में पड़ जाये तो मैं उन्हें और भी ज़्यादा मिस करने लगता हूँ।

अच्छा राकेश जी, किस उम्र में आपको पहली बार यह अहसास हुआ था कि आप 'आनंद बक्शी' के बेटे हैं? उस आनंद बक्शी के, जो कि फ़िल्म जगत के सबसे लोकप्रिय गीतकारों में से एक हैं? अपने बालपन में शायद आपको अंदाज़ा नहीं होगा कि बक्शी साहब की क्या जगह है लोगों के दिलों में, लेकिन जैसे जैसे आप बड़े होते गये, आपको अहसास हुआ होगा कि वो किस स्तर के गीतकार हैं और इंडस्ट्री में उनकी क्या जगह है। तो कौन सा था वह पड़ाव आपकी ज़िंदगी का जिसमें आपको इस बात का अहसास हुआ था?

यह अहसास एक पल में नहीं हुआ, बल्कि कई सालों में हुआ। इसकी शुरुआत उस समय हुई जब मैं स्कूल में पढ़ता था। मेरे कुछ टीचर मेरी तरफ़ ज़्यादा ध्यान दिया करते। या डॉक्टर के क्लिनिक में, या फिर बाल कटवाने के सलून में, कहीं पर भी मुझे लाइन में खड़ा नहीं होना पड़ता। बड़ा होने पर मैंने देखा कि पुलिस कमिशनर और इन्कम टैक्स ऑफ़िसर, जिनसे लोग परहेज़ ही किया करते हैं, ये मेरे पिताजी के लगभग चरणों में बैठे हैं, और उनसे अनुरोध कर रहे हैं उनके लिखे किसी नये गीत या किसी पुराने हिट गीत को सुनवाने की। 

वाक़ई मज़ेदार बात है!

जब मैं पहली बार विदेश गया और वहाँ पर जब NRI लोगों को यह बताया गया कि मैं बक्शी जी का बेटा हूँ, तो वो लोग जैसे पागल हो गये, और मुझे उस दिन इस बात का अहसास हुआ कि कभी विदेश न जाने के बावजूद मेरे पिताजी ने कितना लम्बा सफ़र तय कर लिया है। और यह सफ़र है असंख्य लोगों के दिलों तक का। मैं आपको यह बता दूँ कि उनका पासपोर्ट बना ज़रूर था, लेकिन वो कभी भी विदेश नहीं गये क्योंकि उन्हें हवाईजहाज़ में उड़ने का आतंक था, जिसे आप फ़्लाइंग-फ़ोबिआ कह सकते हैं। लेकिन यहाँ पर यह भी कहना ज़रूरी है कि सेना में रहते समय वो पैराट्रूपिंग्‍ किया करते थे अपनी तंख्वा में बोनस पाने के लिए।

इस तरह के और भी अगर संस्मरण है तो बताइए ना!

जब हम अपने रिश्तेदारों के घर दूसरे शहरों में जाते, तो वहाँ हमारे ठहरने का सब से अच्छा इंतज़ाम किया करते, या सब से जो अच्छा कमरा होता था घर में, वह हमें देते। एक वाक़या बताता हूँ, एक बार मैंने कुछ सामान इम्पोर्ट करवाया और उसके लिए एक इम्पोर्ट लाइसेन्स का इस्तमाल किया जिसमें कोई तकनीकी गड़बड़ी (technical flaw) थी। कम ही सही, लेकिन यह एक ग़ैर-कानूनी काम था जो सज़ा के काबिल था। और उस ऑफ़िसर ने मुझसे भारी जुर्माना वसूल करने की धमकी दी। लेकिन जाँच-पड़ताल के वक़्त जब उनको पता चला कि मैं किनका बेटा हूँ, तो वो बोले कि पिताजी के गीतों के वो ज़बरदस्त फ़ैन हैं। उन्होंने फिर मुझे पहली बार बैठने को कहा, मुझे चाय-पानी के लिए पूछा, जुर्माने का रकम भी कम कर दिया, और मुझे सलाह दी कि भविष्य में मैं इन बातों का ख़याल रखूँ और सही कस्टम एजेण्ट्स को ही सम्पर्क करूँ ताकि इस तरह के धोखा धड़ी से बच सकूँ। उन्होंने यह भी कहा कि अगर मैं पुलिस या कस्टम्स में पकड़ा जाऊँगा तो इससे मेरे पिताजी का ही नाम खराब होगा। उस दिन से मैंने अपना इम्पोर्ट बिज़नेस बंद कर दिया। इन सब सालों में और आज भी मैं बहुत से लोगों का विश्वास और प्यार अर्जित करता हूँ, जिनसे मैं कभी नहीं मिला, जो मेरे लिए बिल्कुल अजनबी हैं। यही है बक्शी जी का परिचय, उनकी क्षमता, उनका पावर। और मैंने भी हमेशा इस बात का ख़याल रखा कि मैं कभी कोई ऐसा काम न करूँ जिससे कि उनके नाम को कोई आँच आये, क्योंकि मेरे जीवन में उनका नाम मेरे नाम से बढ़कर है, और मुझे उनके नाम को इसी तरह से बरकरार रखना है।

वाह! क्या बात है! अच्छा, आपने ज़िक्र किया कि स्कूल में आपको स्पेशल अटेंशन मिलता था बक्शी साहब का बेटा होने के नाते।

जी!

तो क्या आपको ख़ुशी होती थी, गर्व होता था, या फिर थोड़ा एम्बरेसिंग्‍ होता था, यानी शर्म आती थी?

मैं आज भी बहुत ही शाई फ़ील करता हूँ जब भी इस तरह का अटेंशन मुझे मिलता है, हालाँकि मुझे उन पर बहुत बहुत गर्व है। अगर मैं ऐसे किसी व्यक्ति से मिलता हूँ जो स्टेटस में मुझसे नीचे है, तो मैं अपना सेलफ़ोन या घड़ी छुपा लेता हूँ या उन्हें नहीं जानने देता कि मैं किस गाड़ी में सफ़र करता हूँ। मुझे ऐसा लगता है कि मैं उनके साथ घुलमिल जाऊँ और उनसे सहजता से पेश आ आऊँ और वो भी मेरे साथ सहजता अनुभव करें।

बहुत ही अच्छी बात है यह, और कहावत भी है कि फलदार पेड़ हमेशा झुके हुए होते हैं। आनंद बक्शी साहब भी इतने बड़े गीतकार होते हुए भी बहुत सादे सरल थे, और शायद यही बात आप में भी है। अच्छा, यह बताइए कि एक पिता के रूप में बक्शी साहब कैसे थे? किस तरह का रिश्ता था आप दोनों में?

वो एक सख़्त पिता थे। सेना में एक सिपाही और रॉयल इण्डियन नेवी के कडेट होने की वजह से उन्होंने हमें भी अनुशासन, पंक्चुअलिटी और अपने पैरों पर खड़े होने की शिक्षा दी। वो मुझे लेकर पैदल स्कूल तक ले जाते थे जब कि घर में गाड़ियाँ और ड्राइवर्स मौजूद थे। कॉलेज में पढ़ते वक़्त भी मैं बस और ट्रेन में सफ़र किया करता था। जब मैं काम करने लगा, तब भी मैं घर की गाड़ी और ड्राइवर को केवल रात की पार्टी में जाने के लिए ही इस्तमाल किया करता। पिताजी कभी भी सिनेमा घरों के मैनेजरों या मालिकों को फ़िल्म की टिकट भिजवाने के लिए नहीं कहते थे, क्योंकि उन्हें मालूम था कि वो पैसे नहीं लेंगे। इसलिए हम भी सिनेमाघरों के बाहर लाइन में खड़े होकर टिकट खरीदते। सिर्फ़ प्रीमियर या ट्रायल शो के लिए हमें टिकट नहीं लेना पड़ता और वो परिवार के सभी लोगों को साथ में लेकर जाते थे। 

वाह! बहुत मज़ा आता होगा उन दिनों!

जी हाँ! रात को जब वो घर वापस आते और हमें सोये हुए पाते, तो हमारे सर पर हाथ फिराते। वो चाहते थे कि हम इंजिनीयर या डॉक्टर बने। वो नहीं चाहते थे कि हम फ़िल्म-लाइन में आये।

राकेश जी, आप किस लाइन में गये, उसके बार में भी हम आगे चलकर बातचीत करेंगे, लेकिन इस वक़्त हम और जानना चाहेंगे कि बक्शी साहब किस तरह के पिता थे?

दिन के वक़्त, जब उनके लिखने का समय होता था, तब वो बहुत ही कम शब्दों के पिता बन जाते थे, लेकिन रात को खाना खाने से पहले वो हमें अपने बचपन और जीवन के अनुभवों की कहानियाँ सुनाया करते। उन्हें किताब पढ़ने का शौक था और ख़ुद पढ़ने के बाद अगर उन्हें अच्छा लगता तो हमें भी पढ़ने के लिए देते थे; ख़ास कर मासिक 'रीडर्स डाइजेस्ट'। हम देर रात तक घर से बाहर रहे, यह उन्हें पसंद नहीं था। जब हम स्कूल में थे, तब रात को खाने के वक़्त से पहले हमारा घर के अंदर होना ज़रूरी था। खेलकूद के लिए वो हमें प्रोत्साहित किया करते थे। हम पढ़ाई या करीयर के लिए कौन सा विषय चुनेगे, इस पर उनकी कोई पाबंदी नहीं थी, उनका बस यह विचार था कि हम पढ़ाई को जारी रखें और पोस्ट-ग्रैजुएशन करें। उनको उच्च शिक्षा का मोल पता था और वो कहते थे कि यह उनका दुर्भाग्य है कि वो सातवीं कक्षा के बाद पढ़ाई जारी नहीं रख सके, देश के बँटवारे की वजह से। उनका इस बात पर हमेशा ध्यान रहता था कि हम अपनी माँ की सब से ज़्यादा इज़्ज़त करें क्योंकि उन्होंने अपनी माँ को बहुत ही कम उम्र में खो दी थी। जिन्हें माँ का प्यार मिलता है, वो बड़े ख़ुशनसीब होते हैं, ऐसा उनका मानना था।

राकेश जी, आपने बताया कि किस तरह से बक्शी साहब ने आप सब को माँ की अहमीयत बतायी। किसी की सफलता के पीछे उसके जीवन-संगिनी का बड़ा हाथ होता है। तो बताइए बक्शी साहब की जीवन-संगिनी, यानी आपकी माताजी के बारे में।

शादी के बाद पिताजी की आमदनी इतनी नहीं थी कि बम्बई में घर किराये पर लेते। इसलिए शादी के बाद भी कुछ सालों तक मेरी माँ उनके माता-पिता के घर में ही रहती थीं, लखनऊ में। वो महिलाओं के कपड़े सीती थीं ताकि अपने पिता, जो एक रिटायर्ड आर्मी मैन थे, को कुछ आर्थिक मदद कर सके। एक दिन जब मैं मेरी माताजी के साथ गुस्से से पेश आया, तब पिताजी ने मुझे बताया कि बचपन में मेरी माँ अण्डे इसलिए नहीं खाती थीं ताकि हम बच्चों को अण्डे खाने के मौके मिले। उन दिनों हमारी आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी कि अच्छा नाश्ता कर पाते। इसलिए मेरी माताजी ने काफ़ी त्याग और समर्पण किये अपने चार बच्चों को बड़ा करने के लिए। और पिताजी ने उस दिन हम बच्चों को आगाह किया और चेतावनी भी दी कि हम कभी भी अपनी माँ के साथ बदतमीज़ी से पेश न आये।

सही बात है! अच्छा राकेश जी, ये तो थी उन दिनों की बातें जब आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। जब बक्शी साहब को दौलत और शोहरत हासिल हुई, उस वक़्त आपकी माताजी के व्यवहार में किसी तरह का परिवर्तन आया?

पिताजी के स्थापित होने के बाद और अमीर बनने के बाद भी माँ अपनी पुरानी साड़ियों और पुराने कपड़ों को पहनना नहीं छोड़ीं, क्योंकि वो जानती थी कि पिताजी जो कमाते थे, उसकी कीमत क्या थी। उसका मूल्य उन्हें मालूम था, और कितनी मेहनत से यह धन आता था, वह भी वो ख़ूब समझती थी। इसलिए कभी अपव्यय नहीं की। उन्होंने अपने जीवन में कभी भी पिताजी से किसी चीज़ की फ़रमाइश नहीं की। बल्कि पिताजी को ज़बरदस्ती से उन्हें कुछ अपने लिए दिलाना पड़ता था। बस एक बार मेरी माँ ने कुछ खरीदना चाहा था। यह बात थी उस वक़्त की जब पिताजी गुज़र गये थे और उन्हें हमारे रिश्तेदारों की Toyota Innova में बैठना पड़ा था, उस वक़्त उन्होंने कहा था कि हमें भी ऐसी एक गाड़ी खरीदनी चाहिये ताकि वो उसमें बैठकर हमारे पंचगनी के घर में जा सके। 

बक्शी साहब जब गीत लेखन के कार्य में बाहर जाते थे, या कभी दूसरे शहर में, या फिर कहीं हिल-स्टेशन में, तो क्या आपकी माताजी भी साथ जाया करतीं?

ज़्यादातर समय पिताजी अपने बेड-रूम में बैठ कर ही गीत लिखते थे, और कभी लिविंग्‍-रूम में बैठ कर। उनके 99% गीत उन्होंने घर में बैठ कर ही लिखे हैं, न कि किसी पर्वत, वादी या नदी या झील के किनारे बैठ के, जैसा कि कुछ फ़िल्मों में दिखाया जाता है। इस वजह से माँ ने अपना सोशल-लाइफ़ भी बहुत सीमित कर लिया था ताकि घर में रह कर पिताजी की ज़रूरतों की तरफ़ ध्यान दे सके, ताकि गीत-लेखन कार्य में उन्हें कोई कठिनाई न हो।

यही बात मैं कह रहा था कि जीवन-संगिनी का उसकी सफलता के पीछे बहुत बड़ा हाथ होता है। अच्छा इसका मतलब यह हुआ कि आपके माताजी की सखी-सहेलियों का दायरा बहुत ही छोटा होगा?

उनकी बस एक सहेली थी और दो तीन रिश्तेदार थे जिनके वो करीब थीं। वो इनके घर महीने दो महीने में एक बार जाती थीं। पिताजी के गुज़र जाने के बाद उन्होंने एक महाशून्य महसूस किया अपनी ज़िंदगी में।

और मेरे ख़याल से यह एक ऐसा शून्य है जिसकी भरपाई कोई नहीं कर सकता, अपने बच्चे भी नहीं।

बिलकुल सही! और पिताजी फ़िल्म जगत से जुड़े लोगों से ज़रा दूर दूर ही रहा करते थे, इसलिए कम्पोज़र, प्रोड्युसर और डिरेक्टर्स के परिवार वालों से हमारा ज़्यादा मेल-मिलाप नहीं हुआ। और इसलिए माँ भी फ़िल्मी पार्टियों में और अवार्ड फ़ंक्शन में नहीं जाती थीं। पिताजी की मृत्यु के बाद जब प्रेस वाले अपने न्युज़ कैमेरों से हमारे घर के अंदर शूट करना चाह रहे थे और पिताजी की पार्थिव शरीर को हमारे लिविंग्‍-रूम में रखा गया था, हमने उनसे पूछा कि क्या हमें प्रेस को अंदर कैमरों से शूट करने की अनुमति देनी चाहिये, तब उन्होंने कहा कि पिताजी अपनी पूरी ज़िंदगी प्रेस और पब्लिसिटी से दूर ही रहे ताकि उनका ध्यान लेखन से न हट जाये, और अब जब वो घर आना चाह रहे हैं, यह तुम्हारे पिताजी की उपलब्धि है, और यह उनका हक़ भी है, इसलिए उन्हें आने दो।

राकेश जी, आपकी स्मृतियों में आनन्द बक्शी साहब राज करते होंगे। उनमें से कुछ के बारे में बताइए न!

एक नहीं हज़ार हैं स्मृतियाँ, कौन कौन सा बताऊँ। हाँ, एक जो मैं बताना चाहूँगा, वह यह कि जब वो कभी रात को देर से घर लौटते थे और हमें सोया पाते थे, तो वो हमारे बगल में बैठ जाते और हमारे सर पे अपना हाथ फेरते। कभी कभी मैं जगा ही रहता था जब वो हाथ फेरते, लेकिन मैं सोने का नाटक करता था ताकि उनके हाथ फेरने का आनन्द लेता रहूँ।

वाह! वाक़ई अपने माता-पिता के छुवन से मुलायम दुनिया की और कोई चीज़ नहीं हो सकती। अच्छा राकेश जी, आप सब मिल कर, पूरा परिवार, कभी छुट्टी मनाने जाते थे? जैसे मान लीजिये कि किसी पर्वतीय स्थल पर गये हों, और वहाँ पर बक्शी जी को यकायक किसी गीत की प्रेरणा मिल गयी हो? इस तरह का वाकया कभी हुआ है?

हम हर साल महाबलेश्वर और पंचगनी जाते थे। हम अपनी गाड़ी लेकर जाते थे। उन सर्पीले रास्तों पर चढ़ाई करते हुए उनका जो फ़ेवरीट गाना था, वह था "Walk Don't Run, 64", यह 'The Ventures' का गाना है। वो अक्सर अपने फ़ेवरीट सिगरेट 555 के पैकिट के उपर झट से कोई भाव लिख लिया करते थे। ऐसा इसलिए कि भले ही वो अपना नोट-बूक भूल जायें साथ लेना, लेकिन 555 का पैकिट कभी नहीं भूलते थे। लगभग ५ से १० गीत ऐसे होंगे जो उन्होंने हिल-स्टेशन में लिखे होंगे। जैसा कि मैंने बताया था कि वो अधिकतर गीत बेडरूम और लिविंग्‍-रूम में बैठ कर ही लिखे हैं, और कभी कभी म्युज़िक डिरेक्टर्स के सिटिंग्‍ रूम में। और यह बात भी है कि छुट्टी में जाकर वो कभी नहीं लिखते थे। वो लिखते वक़्त कभी शराब नहीं पीते थे क्योंकि वो इसे माँ सरस्वती का अपमान मानते थे।

वो घर पर शराब पीते थे?

अगर कभी पीते भी थे तो रात के ९ बजे के बाद पीते थे, लेकिन डिनर के बाद कभी नहीं। यहाँ पर ऐसी मान्यता है कि शायर को लिखने के लिए पीना ज़रूरी होता है। लेकिन देखिये, पिताजी ने लिखते वक़्त शराब का कभी सहारा नहीं लिया। वो सिगरेट ज़रूर पीते थे या पान चबाते थे लिखते वक़्त। लिखते वक़्त वो व्हिसल भी बजाते थे। और मेरा ख़याल है कि कभी कभी वो ख़ुद धुन भी बनाने की कोशिश करते होंगे या व्हिसलिंग्‍ के माध्यम से मीटर पर लिखने की कोशिश करते होंगे। म्युज़िक डिरेक्टर्स भी कई बार उन्हें धुन बता देते थे, इसलिए भी वो उस धुन को व्हिसल कर उसपे बोल बिठाते। लेकिन बहुत बार उन्हें संगीतकार ने धुन नहीं भी दी। तब वो ख़ुद ही अपने बोलों को ख़ुद धुन पर बिठाते होंगे व्हिसलिंग्‍ के ज़रिये।

ऐसा कोई गीत आपको पता है जिसकी धुन बक्शी साहब ने ख़ुद बनायी या सुझायी होगी?

कुछ संगीतकारों ने ख़ुद मुझे यह बात बतायी है कि किस तरह से पिताजी उनका काम आसान बना देते थे। लेकिन मैं न उन संगीतकारों के नाम लूँगा और न ही उन गीतों के बारे में कुछ कहना चाहूँगा जिनकी धुने पिताजी ने बनाये थे। यह हक़ केवल पिताजी को था और उन्होंने कभी यह बात किसी को नहीं बतायी। इसलिए बेहतर यही होगा कि यह राज़ दुनिया के लिए राज़ ही बना रहे।

हम भी सम्मान करते हैं आपके इस फ़ैसले का। और बहुत सही किया है आपने। 

पिताजी उन्हें गीतों के साथ साथ धुने भी दे दिया करते, लेकिन कभी भी निर्माता से धुनों के लिए क्रेडिट या पब्लिसिटी की माँग नहीं की। और यही कारण है कि वो लोग उन्हें दूसरे गीतकारों की तुलना में इतना ज़्यादा सम्मान क्यों करते थे! मुझे उन संगीतकारों से ही पता चला कि पिताजी कभी कभी एक ही गीत के लिए १० से २० अंतरे लिख डालते थे, जब कि उनसे माँग दो या तीन की ही होती थी। यह उनकी प्रतिभा की मिसाल है। निर्माता और निर्देशक द्वंद में पड़ जाते थे कि उन १०-२० अंतरों में से किन तीन अंतरों को चुनना है क्योंकि सभी के सभी अंतरे एक से बढ़कर एक होते थे और उनमें से श्रेष्ठ तीन चुनना आसान काम नहीं होता था। यहाँ तक कि कई बार तो रेकॉर्डिंग्‍ के दिन तक यह फ़ैसला नहीं हो पाता था कि कौन कौन से अंतरे फ़ाइनल हुए हैं। उन्हें ऐसा लगता कि जिन अंतरों को वो नहीं ले रहे हैं, उनके साथ अन्याय हो रहा है। आज भी जब वो पुराने लोग मुझे मिलते हैं तो इस बात का ज़िक्र करते हैं।


समापन अगले सप्ताह...

आख़िरी बात

’चित्रकथा’ स्तंभ का आज का अंक आपको कैसा लगा, हमें ज़रूर बताएँ नीचे टिप्पणी में या soojoi_india@yahoo.co.in के ईमेल पते पर पत्र लिख कर। इस स्तंभ में आप किस तरह के लेख पढ़ना चाहते हैं, यह हम आपसे जानना चाहेंगे। आप अपने विचार, सुझाव और शिकायतें हमें निस्संकोच लिख भेज सकते हैं। साथ ही अगर आप अपना लेख इस स्तंभ में प्रकाशित करवाना चाहें तो इसी ईमेल पते पर हमसे सम्पर्क कर सकते हैं। सिनेमा और सिनेमा-संगीत से जुड़े किसी भी विषय पर लेख हम प्रकाशित करेंगे। आज बस इतना ही, अगले सप्ताह एक नए अंक के साथ इसी मंच पर आपकी और मेरी मुलाक़ात होगी। तब तक के लिए अपने इस दोस्त सुजॉय चटर्जी को अनुमति दीजिए, नमस्कार, आपका आज का दिन और आने वाला सप्ताह शुभ हो!




शोध,आलेख व प्रस्तुति : सुजॉय चटर्जी 



रेडियो प्लेबैक इण्डिया 

Tuesday, May 9, 2017

उषा छाबड़ा का साक्षात्कार - सजीव सारथी

लोकप्रिय स्तम्भ "बोलती कहानियाँ" के अंतर्गत हम हर सप्ताह आपको सुनवाते रहे हैं नई, पुरानी, अनजान, प्रसिद्ध, मौलिक और अनूदित, यानि के हर प्रकार की कहानियाँ। इस शृंखला में पिछली बार आपने अर्चना चावजी के स्वर में मालती जोशी की लघुकथा आखरी शर्त का वाचन सुना था।

आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं बाल साहित्य के क्षेत्र में एक जाना पहचाना नाम, उषा छाबड़ा, जिनसे बातचीत कर रहे हैं, रेडियो प्लेबैक इंडिया के संस्थापक व प्रमुख सम्पादक, सजीव सारथी। तो आइये, जानें उषा जी की साहित्य यात्रा को।

प्रस्तुत साक्षात्कार का कुल प्रसारण समय 15 मिनट 34 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।

उषा जी साहित्यिक अभिरुचि वाली अध्यापिका हैं। वे पिछले उन्नीस वर्षों से दिल्ली पब्लिक स्कूल ,रोहिणी में अध्यापन कार्य में संलग्न हैं। उन्होंने कक्षा नर्सरी से कक्षा आठवीं तक के स्तर के बच्चों के लिए पाठ्य पुस्तकें एवं व्याकरण की पुस्तक श्रृंखला भी लिखी हैं। वे बच्चों एवं शिक्षकों के लिए वर्कशॉप लेती रहती हैं। बच्चों को कहानियाँ सुनाना उन्हें बेहद पसंद है। उनकी कविताओं की पुस्तक "ताक धिना धिन" और उस पर आधारित ऑडियो सीडी प्रकाशित हो चुकी हैं। आप उनकी आवाज़ में पंडित सुदर्शन की कालजयी कहानी "हार की जीत" तथा उनकी अपनी कहानियाँ मुस्कान, "स्वेटर", "बचपन का भोलापन" व प्रश्न पहले ही सुन चुके हैं। आप उनसे उनके ब्लॉग अनोखी पाठशाला पर मिल सकते हैं।



हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी हिन्दी कहानी


केवल बच्चे ही नहीं, बड़े भी उतने ही शौक से कहानियाँ सुनते हैं।
 (उषा छाबड़ा के साक्षात्कार से एक अंश)



नीचे के प्लेयर से सुनें.


(प्लेयर पर एक बार क्लिक करें, कंट्रोल सक्रिय करें फ़िर 'प्ले' पर क्लिक करें।)
यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाऊनलोड कर लें:
उषा छाबड़ा का साक्षात्कार MP3

#Seventh Story, Interview; Usha Chhabra; Hindi Audio Book/2017/7. Voice: Sajeev Sarathie

Wednesday, June 8, 2016

"संगीत से जुडी हर बात मुझे आकर्षित करती है" - आश्विन भंडारे : एक मुलाक़ात ज़रूरी है

एक मुलाकात ज़रूरी है (14)

ज के एपिसोड में मिलिए गायक, गीतकार और संगीत निर्देशक आश्विन भंडारे से, जिनके संगीत से सजी मराठी फिल्म "वाल्या टू वाल्मीकि" जल्द ही रिलीस होने वाली है, साथ ही बतौर गीतकार इन्होने गीत भी लिखे हैं जल्द ही प्रदर्शित होने जा रही फिल्म "लव यू अलिया" के लिए, जिसमें दक्षिण के सुप्रसिद्ध संगीतकार जास्सी गिफ्ट ने संगीत दिया है. मिलिए आश्विन से जानिये उनके जीवन और संगीत से जुड़े कुछ खट्टे मीठे अनुभव 


एक मुलाक़ात ज़रूरी है के इस एपिसोड को आप यहाँ से डाउनलोड भी कर सकते हैं, लिंक पर राईट क्लिक करें और सेव एस का विकल्प चुनें 

Wednesday, May 18, 2016

"फिल्म का पार्श्व संगीत रचना एक नया मगर दिलचस्प अनुभव रहा"- अमानो मनीष

एक मुलाकात ज़रूरी है (11)

दोस्तों आज के हमारे मेहमान है, संगीत साधक अमानो मनीष, मंजे हुए स्लाईड गिटार वादक अमानो ने अभी हाल ही में ओशो के शुरूआती जीवन पर आधारित फिल्म "रेबेलियस फ्लावर" में बतौर संगीत निर्देशक काम किया है. जानिये आज की मुलकात में कि क्यों अमानो ने बहुत युवा उम्र में ही ओशो आश्रम में जाने का निर्णय लिया था, क्यों रहा रेबेलियस फ्लावर उनके लिए एक अनूठा मगर रोचक अनुभव. क्यों वो अध्यात्म और संगीत में बीच खुद को मानते हैं एक सच्चा साधक. और भी बहुत सी रोचक बातें हैं "एक मुलकात ज़रूरी है" के इस एपिसोड में सजीव सारथी के साथ. सुनिए और सुनाईये ....


एक मुलाकात ज़रूरी है का ये एपिसोड आप यहाँ से डाउनलोड भी करके सुन सकते हैं, लिंक पर राईट क्लिक करें और सेव एस चुनें.

Wednesday, March 16, 2016

मैं बचपन में अपने बेस्ट फ्रेंड की लिखी कवितायेँ पढता था - रत्न नौटियाल - एक मुलाक़ात ज़रूरी है


उभरते हुए गीतकार रत्न नौटियाल हैं, हमारे आज के मेहमान, कार्यक्रम "एक मुलाक़ात ज़रूरी है" में. सुनिए उत्तरांचल से मुंबई पहुंचें इस युवा गीतकार की अब तक की कहानी, उन्हीं की जुबानी...

Saturday, February 28, 2015

INTERVIEW OF LYRICIST HASRAT JAIPURI'S DAUGHTER KISHWARI JAIPURI

 बातों बातों में - 05

 गीतकार हसरत जयपुरी की पुत्री किश्वरी जयपुरी से सुजॉय चटर्जी की बातचीत

"तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे..." 






नमस्कार दोस्तो। हम रोज़ फ़िल्म के परदे पर नायक-नायिकाओं को देखते हैं, रेडियो-टेलीविज़न पर गीतकारों के लिखे गीत गायक-गायिकाओं की आवाज़ों में सुनते हैं, संगीतकारों की रचनाओं का आनन्द उठाते हैं। इनमें से कुछ कलाकारों के हम फ़ैन बन जाते हैं और मन में इच्छा जागृत होती है कि काश, इन चहेते कलाकारों को थोड़ा क़रीब से जान पाते; काश; इनके कलात्मक जीवन के बारे में कुछ जानकारी हो जाती, काश, इनके फ़िल्मी सफ़र की दास्ताँ के हम भी हमसफ़र हो जाते। ऐसी ही इच्छाओं को पूरा करने के लिए 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' ने फ़िल्मी कलाकारों से साक्षात्कार करने का बीड़ा उठाया है। । फ़िल्म जगत के अभिनेताओं, गीतकारों, संगीतकारों और गायकों के साक्षात्कारों पर आधारित यह श्रॄंखला है 'बातों बातों में', जो प्रस्तुत होता है हर महीने के चौथे शनिवार को। आज फ़रवरी माह का चौथा शनिवार है और आज प्रस्तुत है फ़िल्म जगत के सुप्रसिद्ध गीतकार हसरत जयपुरी की पुत्री किश्वरी जयपुरी से की गई हमारी लम्बी बातचीत के सम्पादित अंश।




किश्वरी जी, नमस्कार और बहुत बहुत स्वागत है आपका ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के मंच पर।

नमस्कार, और शुक्रिया मुझे याद करने के लिए।

हम बता नहीं सकते कि हमें कितनी ख़ुशी हो रही है कि हसरत जयपुरी साहब जैसे दिग्गज और लीजेन्डरी गीतकार की पुत्री, यानी कि आप आज हमारे बीच हैं और हमें आप के ज़रिए हसरत साहब की ज़िन्दगी और उनके गीतों से सम्बन्धित तमाम बातचीत करने का मौका मिल रहा है।

मुझे भी यकीनन बेहद ख़ुशी होगी, अपने डैडी के बारे में बताते हुए। 

किश्वरी जी, हसरत साहब के बारे में जो आम जानकारी है वो सब तो इन्टरनेट पर उपलब्ध है, उनके लिखे गीतों की फ़ेहरिस्त भी आसानी से मिल जाती है, इसलिए हमने सोचा कि आज के इस साक्षात्कार में हम आपसे कुछ ऐसे सवाल पूछें जो बिल्कुल एक्स्क्लूसिव हों। मेरा मतलब है कि एक बेटी की नज़र से हसरत साहब की शख़्सियत को हम जानना चाहेंगे।

जी ज़रूर! आप पूछ सकते हैं अपने सवाल।

शुक्रिया! सबसे पहले तो आप यह बताइए कि कैसा लगता है हसरत जयपुरी की बेटी कहलाना, वो हसरत जयपुरी जो हिन्दी फ़िल्म संगीत के सुनहरे दौर के सबसे लोकप्रिय गीतकारों में से एक थे?

मुझे अपने डैडी की एकलौती बेटी बनने का जो मौका मिला है, इससे मैं अपने आप को बहुत ही ज़्यादा ख़ुशनसीब समझती हूँ, I feel extremely privileged। मैं अल्लाह का शुक्रगुज़ार हूँ कि उन्होंने मुझे इस धरती पर रोमान्स के मशहूर शहंशाह की एकलौती बेटी बना कर भेजा है। इससे ज़्यादा और इससे बेहतर मैं कुछ नहीं माँग सकती थी। 

वाह, क्या बात है! वाकई आप ख़ुशक़िस्मत हैं कि आप हसरत जयपुरी की बेटी हैं। अच्छा किश्वरी जी, यह बताइए कि आपका जो बाल्यकाल था, यानी जब आप एक बच्ची के रूप में बड़ी हो रही थीं, वह दशक कौन सा दशक था?

मेरा जन्म साल 1963 को हुआ था और यह वह दौर था जब डैडी अपनी लोकप्रियता और कामयाबी की बुलन्दियों को छू रहे थे। 

जी, मेरा इशारा भी उसी तरफ़ था, मैं भी इसी बात पर आ रहा था कि हसरत साहब की उस सफल दौर में जब आप बड़ी हो रही थीं, तब क्या आपको यह अहसास था, क्या इतनी समझ थी उस वक़्त कि आप इतने बड़े गीतकार की बेटी हैं?

हसरत जयपुरी नन्ही किश्वरी के साथ
जी, जैसे जैसे मैं बड़ी हो रही थी, मेरा रिश्ता डैडी के गीतों के साथ जुड़ता और पनपता चला जा रहा था। मैं, मेरी माँ, मेरे दोनों भाई और डैडी, हम सब बैठ कर हमारे Philips Record Player पर उनके गीतों को सुना करते थे। अफ़सोस की बात है कि हम 40 और 50 के दशकों के उनके गीतों का आनन्द नहीं ले सके और उनकी कामयाबी के जश्नों को अपनी आँखों से नहीं देख सके। क्योंकि मेरा जन्म 1963 में हुआ, इसलिए 60 का दशक भी बहुत कम उम्र होने की वजह से समझ ही नहीं सकी। पर जैसे-जैसे बड़ी हुई, मैं उनके गीतों की तरफ़ खींचती चली गई, आकर्षित होती चली गई। उनका लहू मेरे रगों में दौड़ रहा है, इसलिए बाद में ही सही, पर मैं उनके गीतों से जुड़ ज़रूर गई।

हसरत साहब एक पिता के रूप में कैसे थे? किस तरह का सम्बन्ध था आप दोनों के बीच?

मेरा मेरे डैडी के साथ जो सम्बन्ध था वह इस दुनिया से परे था। यह रिश्ता बहुत ही ज़्यादा मज़बूत और बहुत ही ज़्यादा प्यार भरा था। क्योंकि मैं उनकी एकलौती बेटी थी, इसलिए लाड़-प्यार कुछ ज़्यादा ही करते थे। मैं उनकी आँखों का तारा थी, वो मुझसे इतना ज़्यादा प्यार करते थे कि अगर मैं कहती कि पिताजी, अभी दिन है, तो वो कहते हाँ दिन है, फिर चाहे वह रात ही क्यों न हो!

जो तुमको हो पसन्द वही बात कहेंगे, तुम दिन को अगर रात कहो रात कहेंगे... 

जी बिल्कुल! और फिर हर रात को सोने जाने से पहले वो हमारे बेडरूम में आते और हम तीनों से कहते - "अल्लाह इनकी हज़ारी उमर करे"। मैं क्या बताऊँ, वो एक बहुत ही ज़्यादा प्यार करने वाले पिता थे। आज भी मैं उन्हें बहुत ज़्यादा मिस करती हूँ, उनकी कमी को महसूस करती हूँ।

किश्वरी जी, मैं यही कह सकता हूँ कि भले वो शारीरिक रूप से हमारे बीच में नहीं हैं, पर उनका जो काम है, उनके जो लिखे हुए गीत हैं, वो हमेशा-हमेशा इस धरती पर गूँजते रहेंगे। इसलिए यह कहना अनुचित होगा कि आज वो हमारे बीच नहीं हैं। कलाकार भले इस फ़ानी दुनिया से चला जाए, पर उसकी कला अमर रहती है।

बिल्कुल सही कहा आपने!

पिता की गोद में किश्वरी; माँ और बड़े भाई के साथ
अच्छा किश्वरी जी, यह बताइए कि घर में सारे लोग जब मौजूद होते थे, पिताजी, माँ, दोनों भाई और आप, तो किस तरह का माहौल हुआ करता था घर में? अपनी यादों को ताज़ा करना चाहेंगी आप?

ज़रूर, पिताजी तो बड़े ही सीधे-सादे इंसान थे, फ़कीर थे, he was very down to earth। उन्हें मम्मी के हाथों से बना अच्छा मुग़लई खाना बहुत पसन्द था। शायरी तो ख़ैर उन्हें पसन्द थी। उन्होंने अपने तमाम सुनहरे हिट गीत हमारे खार स्थित एक बेडरूम-हॉल फ़्लैट में लिखे थे। 

यानी आप यह कहना चाहती हैं कि भीड़ में बैठ कर वो गाने लिखते थे, उन्हें एकान्त में लिखना पसन्द नहीं था? 
जी हाँ, क्योंकि वो God-gifted थे, उन्हें लिखने के लिए किसी तरह की प्राइवेसी की ज़रूरत नहीं पड़ती थी। मैंने उन्हें किसी गीत को मिनटों में लिखते हुए देखा है। वो छन्दों को इस क़दर लिख जाते थे कि जैसे ये छन्द उपर से उतार दिए हों किसी ने उन पर। जब वो किसी गीत के मुखड़े और अन्तरों को लिख डालते, तो वो माँ को बुलाते और कहते - "अजी सुनती हो, लो यह गाना सुनो"। अगर माँ उस कमरे में मौजूद ना हों तो ख़ुद किचन में चले जाते थे और खाना बनाती हुई मेरी माँ को उसी वक़्त अपना लिखा गाना सुनाने लग जाते।

बहुत ख़ूब! अच्छा आपने तो यह बता दिया कि हसरत साहब आपकी माँ को अपना लिखा हुआ गीत पढ़ कर सुनाते थे। क्या वो आप बच्चों को भी सुनाते थे या फिर किसी गीत को लिखते समय आप से सुझाव माँगते थे या आपकी राय लेते थे?

वो ज़्यादातर माँ के साथ ही अपने गीतों की चर्चा किया करते थे। कभी-कभार वो मुझे या मेरे भाइयों से अपने गीत को हिन्दी में लिखने के लिए कहते थे क्योंकि उन्हें हिन्दी लिखना और पढ़ना नहीं आता था।

"हिन्दी लिखना और पढ़ना नहीं आता था", मतलब???

जी हाँ, वो उर्दू में अपनी शायरी और गीत लिखते थे। उन्हें हिन्दी नहीं आती थी।

बहुत ही आश्चर्य हुआ यह जानकर। हिन्दी फ़िल्मों के सफलतम गीतकारों में से एक, और हिन्दी भाषा पढ़ना और लिखना नहीं जानते थे। कमाल की बात है! किश्वरी जी, यह बताइए कि क्या आपने कभी उन्हें किसी गीत में असिस्ट किया है?

एक गीत याद है मुझे जिसमें मैंने उनकी मदद की थी क्योंकि बहुत ही कम समय में उन्हें वह गीत तैयार करना था। और वह गीत था ’राम तेरी गंगा मैली’ फ़िल्म का "सुन साहिबा सुन प्यार की धुन"। "सुन साहिबा सुन" जुमला तैयार था, पर आगे का गीत उन्हें पूरा करना था। इसलिए उन्होंने मुझसे कहा कि "सुन" से तुकबन्दी करते हुए कुछ शब्द मैं सुझाऊँ। मैंने उन्हें "धुन", "चुन", "पुन", "बुन", "शगुन" जैसे शब्द सुझाए।

वाह क्या बात है, क्या बात है! इसका मतलब यह कि इस बेहद मशहूर गीत की सफलता में आपका भी योगदान रहा है। यह बड़ी ही अनोखी जानकारी आपने दी हमें। अच्छा उसके बाद क्या हुआ?

उसके बाद डैडी ने फ़टाफ़ट अन्तरों को पूरा किया और निकल गए। रेकॉर्डिंग् से वापस आकर उन्होंने मुझे 5000 रुपये इनाम में दिए, और मेरी ख़ुशी का ठिकाना ना रहा।

बहुत ख़ूब! गीतों की जब बात चल ही पड़ी है तो किश्वरी जी, यह बताइए कि हसरत साहब के लिखे अनगिनत गीतों में से वह एक गीत कौन सा है जिसे आप सबसे उपर रखना चाहेंगी, या जो आपको सबसे ज़्यादा अज़ीज़ है?

सबसे पसन्दीदा गीत तो वही गीत है जिसे Song of the Century कहा गया है, "बहारों फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है"। जैसे ही मेरे कानो में यह बात पहुँची कि डैडी के लिखे इस गीत को Song of the Century का ख़िताब दिया गया है, मैं तो जैसे आसमान में उड़ने लगी। डैडी हम सब से दूर जाने के बाद भी अमर हैं।

इसमें कोई संदेह नहीं! अच्छा यह बताइए कि इस गीत की क्या ख़ास बात है?

इस गीत की सबसे बड़ी ख़ासियत तो यही है कि भले यह एक रोमान्टिक गीत है, पर डैडी ने इसे किसी ख़ूबसूरत लड़की की कल्पना करते हुए नहीं लिखा था। यह गीत तो उन्होंने हमारे प्रोफ़ेट मोहम्मद की शान में लिखा था। यह मुझे डैडी ने ख़ुद एक बार बताया था।

क्या बात है! यानी कि इस गीत को अगर गहराई से समझा जाए तो इसे एक आध्यात्मिक गीत का दर्जा भी दिया जा सकता है। 

जी हाँ।

मुझे याद है ऐसा ही एक गीत एस. एच. बिहारी साहब का लिखा हुआ है "है दुनिया उसी की ज़माना उसी का, मोहब्बत में जो हो गया हो किसी का", इस गीत के साथ भी इसी तरह का क़िस्सा जुड़ा हुआ है।

जी।

किश्वरी जी, आपका सबसे चहीता गीत रफ़ी साहब की आवाज़ में "बहारों फूल बरसाओ" है। पर एक टीम हुआ करती थी राज कपूर, शैलेन्द्र-हसरत, शंकर-जयकिशन और मुकेश की। तो मुकेश का गाया और आपके पिताजी का लिखा हुआ वह कौन सा गीत है जो आपके दिल के बहुत क़रीब है?

वह गीत यकीनन फ़िल्म ’संगम’ का है, "ओ महबूबा, तेरे दिल के पास ही है मेरी मंज़िल-ए-मक़सूद"। यह दरअसल राज जी के जज़्बात थे वैजयन्तीमाला जी के लिए, जिसे डैडी ने इस ख़ूबसूरत रूमानी शायरी का जामा पहनाया। और आपको बताऊँ, यह गीत बिल्कुल उस वक़्त लिखा गया था जब राज जी और वैजयन्तीमाला जी का रोमान्स सर चढ़ कर बोल रहा था फ़िल्म ’संगम’ के निर्माण के दौरान।

किश्वरी जी, हमने अभी-अभी टीम की बात की, तो उस ज़माने में क्या आपकी भी मुलाक़ातें हुईं शंकर-जयकिशन, शैलेन्द्र जी, लता जी, मुकेश जी, और रफ़ी साहब जैसे दिग्गज हस्तियों के साथ?

जब मैं छोटी थी, तब मैं शंकर अंकल, जय अंकल, मुकेश जी और राज कपूर जी से कई बार मिली जब ये लोग डैडी से मिलने हमारे घर पर आते थे। जय अंकल तो दीवाली पर हमारे घर आनेवाले लोगों में सबसे पहले होते थे अपने एक बड़े से मिठाई के डब्बे और ड्राई फ़्रूट्स के साथ। मैं बहुत ख़ुशक़िस्मत हूँ कि मुझे ग्रेट रफ़ी साहब और मन्ना दा से भी मिलने का मौका मिला जब मैं डैडी के किसी गीत की रेकॉर्डिंग् पर उनके साथ गई थी। रफ़ी साहब और मैंने एक दूसरे को सलाम किया और उन्होंने मेरे माथे को चूमा। आशा जी भी बहुत ही प्यार से मिलीं जब मैं अपने पति के साथ उनकी किसी रेकॉर्डिंग् पर गई थी। इस तरह से मेरी ख़ुशनसीबी ही कहूँगी कि मुझे ऐसे बड़े-बड़े कलाकारों से मिलने का मौक़ा नसीब हुआ अपने डैडी की वजह से।

हसरत साहब की बेटी बन कर जन्म लेना ही अपने आप में एक सौभाग्य है। अच्छा, किश्वरी जी, अब हम जानना चाहेंगे आपकी माताजी के बारे में। कहा जाता है कि हर कामयाब आदमी के पीछे एक औरत का हाथ होता है, तो बताइए कि आपकी माताजी का आपके पिता की सफलता में कितना बड़ा योगदान था?

मेरी माँ मेरे डैडी का ताक़त स्तम्भ थीं। वो डैडी और उनकी कमाई का उचित देख-रेख किया करती थीं और चाहे ख़ुशहाली हो या तंगी, हर तरह के दिनों में, बिना किसी शर्त के, वो उनका साथ दिया करतीं। माँ डैडी के कई गीतों की प्रेरणा भी बनीं। "ग़म उठाने के लिए" एक ऐसा पछतावा भरा गीत है जिसे डैडी ने माँ के लिए लिखा था जिन्हे वो बहुत ज़्यादा प्यार करते थे।

"ग़म उठाने के लिए", आपका मतलब है फ़िल्म ’मेरे हुज़ूर’ का वह गीत?

जी हाँ।

"ग़म उठाने के लिए मैं तो जिए जाऊँगा, साँस की लय पे तेरा नाम लिये जाऊँगा"। बहुत ही ख़ूबसूरत गीत है यह।

"तू ख़यालों में मेरे अब भी चली आती है, अपनी पलकों पे उन अश्क़ों का जनाज़ा लेकर, तूने नींदे करी क़ुरबान मेरी राहों में, मैं नशे में रहा ग़ैरों का सहारा लेकर, ग़म उठाने के लिए मैं तो जिए जाऊँगा"

बहुत ख़ूब! अच्छा किश्वरी जी, यह गीत तो एक ऐसा गीत था जिसे हसरत साहब ने आपकी माताजी की याद में लिखा था। आप की राय में उनका लिखा वह कौन सा गीत होगा जिसे आप अपनी माँ की तरफ़ से हसरत साहब को समर्पित करना चाहेंगे?

"हम तेरे प्यार में सारा आलम खो बैठे"

वाह! वाह! क्या बात है!

"हम तेरे प्यार में सारा आलम खो बैठे" महज़ एक गीत नहीं है बल्कि ये प्यार की धाराएँ हैं जो स्वर्ग से धरती पर बरसी हैं। ऐसा गीत और कोई नहीं सिर्फ़ रोमान्स का बादशाह ही लिख सकता था। "हम प्यार के गंगाजल में बमलजी तन मन अपना धो बैठे"। यह गीत मुझे बेहद पसन्द है।

हम बात कर रहे थे आपकी माताजी की। उनसे जुड़ा और कोई वाक्या बताना चाहेंगी?

एक बार एक पार्टी में भगवान दादा और नादिरा जी मेरे डैडी से कहने लगे, "हसरत मिया, आप बहुत ख़ुशक़िस्मत हो जो आपको ऐसी बीवी मिली है, वरना आप जयपुर में या तो भीख माँग रहे होते या मज़दूरी कर रहे होते"। डैडी का जो ड्रीम-हाउस बंगला है ’ग़ज़ल’ के नाम से, उसके पीछे भी माँ का ही सबसे बड़ा हाथ है। डैडी माँ को ’बिलक़िस-ए-ज़मानी’ जिसका अर्थ है दुनिया की राजकुमारी। मेरी माँ का नाम बिलक़िस था।

वाह! किश्वरी जी, जब ऐसी रूमानियत भरी बातें हो रही हैं तो ऐसे में हसरत साहब के किस गीत का ज़िक्र करना चाहेंगी?

फ़िल्म ’तुमसे अच्छा कौन है" का लता जी और रफ़ी साहब का गाया "रंगत तेरी सूरत सी किसी में नहीं नहीं, ख़ुशबू तेरे बदन सी किसी में नहीं नहीं। युं तो हसीं लाख ह दुनिया की राह में, आता नहीं है कोई नहीं मेरी निगाहों में, तुझमें है जो अगन किसी में नहीं नहीं..."। इस गीत का हर एक लफ़्ज़ मोहब्बत की ख़ुशबू से भरा हुआ है। और यह गीत मुझे मेरी पहली मोहब्बत की भी याद दिला जाता है। मैं इस गीत को लगातार सुनती चली जा सकती हूँ और दिन के किसी भी वक़्त गुनगुना भी लेती हूँ।

वाह! एक वह दौर था, एक आज का दौर है। फ़िल्म-संगीत की धारा में बहुत सारे बदलाव आए हैं। तो आज के रोमान्टिक गीतों के बारे में आपके क्या विचार हैं?

आजकल के गीतों में रोमान्स के बारे में मेरा ख़याल यह है कि अब रोमान्स का वजूद ही नहीं है। डैडी के शब्दों में आज के गाने महज़ तुकबन्दी बन कर रह गए हैं। आज जिस तरह के गीत लिखे जा रहे हैं, कोई भी गीतकार बन सकता है, मैं भी लिख सकती हूँ।

क्या आपको भी लिखने का शौक़ है?

जी हाँ, थोड़ा बहुत लिख लेती हूँ। 

कुछ सुनाइए ना?

एक कविता जो मैंने डैडी को डेडिकेट करते हुए लिखा है, वह सुनाती हूँ।

ज़रूर!

हर एक मनज़र तमाशा दिखाई देता है
तेरे बिना सबकुछ फीका दिखाई देता है
अब आयें भी तो कहाँ से सदायें तेरी
ना तू है ना तेरा साया दिखाई देता है।

वाह! बहुत ख़ूब! पर एक हक़ीक़त यह भी है कि अपने गीतों के ज़रिए हसरत साहब हमेशा जीवित रहेंगे। एक और सुनाइए किश्वरी जी?

एक और ग़ज़ल सुनिए...
किस तरह जान को रोकूँ मैं, क्या करूँ मुझको यह ख़याल सताता है,
जाने का नाम जब भी लेता है वो, मैं क्या करूँ दिल मेरा डूब जाता है।

बहुत सुन्दर ग़ज़ल है! वैसे आपको हसरत साहब की कौन सी ग़ज़ल बहुत पसन्द है?

एक ग़ज़ल है फ़िल्म ’मेरे हुज़ूर’ फ़िल्म में रफ़ी साहब की आवाज़ में, "वह ख़ुशी मिली है मुझको", यह मुझे बहुत पसन्द है और हर प्यार करने वाला अपने आप को इस ग़ज़ल के साथ जोड़ सकता है।

इस ग़ज़ल के तमाम शेर आपको याद हैं?

जो गुज़र रही है मुझ पर, उसे कैसे मैं बताऊँ,
वह ख़ुशी मिली है मुझको, मैं ख़ुशी से मर ना जाऊँ।

मेरे दिल की धड़कनों का यह पयाम तुमको पहुँचे,
मैं तुम्हारा हमनशी हूँ, यह सलाम तुमको पहुँचे,
उसे बन्दगी मैं समझूँ जो तुम्हारे काम आऊँ
वह ख़ुशी मिली है मुझको मैं ख़ुशी से मर ना जाऊँ।

वाह!

मेरी ज़िन्दगी में हमदम कभी ग़म ना तुम उठाना,
कभी आए जो अन्धेरे मुझे प्यार से बुलाना,
मैं चिराग़ हूँ वफ़ा का, मैं अन्धेरे में जगमगाऊँ, 
वह ख़ुशी मिली है मुझको मैं ख़ुशी से मर ना जाऊँ।

और जो तीसरा शेर है, वह तो जैसे मेरे जसबात है डैडी के लिए....

मेरे दिल की महफ़िलों में वह मकाम है तुम्हारा,
कि ख़ुदा के बाद लब पर बस नाम है तुम्हारा,
मेरी आरज़ू यही है मैं तुम्हारे गीत गाऊँ,
वह ख़ुशी मिली है मुझको मैं ख़ुशी से मर ना जाऊँ।

वाह! क्या बात है! बहुत ही सुन्दर! अच्छा किश्वरी जी, क्या आपके दोनों भाई भी लिखते हैं? उन्हें भी शौक़ है?

जी नहीं, सिर्फ़ मैं ही थोड़ा-बहुत लिखती हूँ।

क्या नाम हैं आपके दो भाइयों के?

मेरे बड़े भाईसाहब का नाम है अख़्तर हसरत जयपुरी और मेरा छोटा भाई है आसिफ़ जयपुरी।

अच्छा किश्वरी जी, और कौन कौन से गीत हैं हसरत साहब के जो आपको पसन्द हैं?

मुकेश जी का गाया फ़िल्म ’दीवाना’ का गीत "तारों से प्यारे दिल के इशारे, प्यासे हैं अरमान आ मेरे प्यारे" मुझे बहुत पसन्द है। इस गीत को डैडी ने इतने प्यार से लिखा है कि जब भी मैं यह गीत सुनती हूँ तो रोमान्स की एक अलग ही दुनिया में पहुँच जाती हूँ। यह गीत सच्चे प्यार की ताक़त को बयान करता है...  आना ही होगा तुझे आना ही होगा...। फ़िल्म ’आख़िरी दाँव’ का एक गीत है "ऐसा ना हो कि इन वादियों में मैं खो जाऊँ, और तुम मुझे ढूंढा करो और मैं लौट के ना आऊँ", यह भी रफ़ी साहब का गाया हुआ है। डैडी लक्ष्मीकान्त-प्यारेलाल जी के ज़बरदस्त फ़ैन थे और उनकी एक दिली तमन्ना थी एल.पी के साथ काम करने की। इस तरह से लक्ष्मी-प्यारे जी की यह राजसी कम्पोज़िशन जिसे रफ़ी साहब की दिव्य आवाज़ ने संवारा है, मेरे दिल के बहुत करीब है क्योंकि यह मुझे डैडी की याद दिला जाता है। एक और गीत, यह भी रफ़ी साहब का ही गाया हुआ, "रुख़ से ज़रा नक़ाब उठा दो, मेरे हुज़ूर"। शहद से भरी हुई यह ग़ज़ल, और शायद ’मेरे हुज़ूर’ फ़िल्म के शीर्षक गीत के रूप में इससे बेहतर गीत नहीं सकता था। मिठास और ख़ुशबू लिए यह ग़ज़ल हर प्यार करने वाले को समर्पित है। फ़िल्म ’आरज़ू’ की ग़ज़ल "अजी रूठ कर अब कहाँ जाइयेगा" भी मुझे बेहद पसन्द है। डैडी ने प्यार के बेहद नाज़ुक शब्दों का इस्तेमाल इसमें किये हैं, जितनी भी तारीफ़ करूँ रुकती नहीं ज़ुबाँ। राजसी ग़ज़ल!

वाक़ई एक से बढ़ कर एक रचनाएँ हैं ये सभी, और आपकी पसन्द की भी दाद देता हूँ किश्वरी जी।

शुक्रिया!

किश्वरी जी, अब हम इस साक्षात्कार के अन्तिम चरण में पहुँच गए हैं। यह बताइए कि आपकी हसरत साहब से अन्तिम मुलाक़ात कब हुई थी?

डैडी से जो मेरी अन्तिम मुलाक़ात थी वह बहुत ही दिल को छू लेने वाली और दिल को मरोड़ कर रख देने वाली थी। मैं साल 1999 में भारत आई थी और यहाँ तीन महीने रही। तीन महीने ख़त्म हो गए और मेरे वापस जाने का समय आ गया। मुझे याद है कि जब मैं एअरपोर्ट के लिए निकल रही थी तब डैडी ने कस के मुझे गले से लगा लिया और ज़ोर ज़ोर से रोने लगे और कहने लगे कि बेटा, यह हमारी आख़िरी मुलाक़ात है। और हाँ, उनकी यह भविष्यवाणी सच साबित हुई और मेरे चले जाने के एक महीने बाद ही उनका देहान्त हो गया। मैंने उन्हें उस तरह से रोते हुए कभी नहीं देखा था पहले। उस दिन को याद करते हुए आज भी मेरी आँखें भर आती हैं।

मैं समझ सकता हूँ। आपको बस हसरत साहब का ही लिखा एक गीत याद दिलाना चाहूँगा, "तुम मुझे युं भुला ना पाओगे, जब कभी भी सुनोगे गीत मेरे, संग संग तुम भी गुनगुनाओगे.."

बिल्कुल सच बात है!

चलते-चलते हसरत साहब के किस गीत के ज़िक्र से इस मुलाक़ात को आप अंजाम देना चाहेंगी?

यकीनन "जाने कहाँ गए वो दिन...", एक बहुत ही दिल को मरोड़ कर रख देने वाला गीत, जो पैथोस से भरा हुआ है। इस गीत में डैडी ने जैसे अपनी निजी भावनाओं को ही गीत की शक्ल में उतार दिए हों, यह वह समय था जब उनके तथाकथित ’good friends' ने उनका साथ छोड़ दिया था। डैडी जब भी कभी यह सुनते, रोने लगते। मैं भी जब भी कभी यह गीत सुनती हूँ, मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

किश्वरी जी, बहुत-बहुत शुक्रिया आपका, आपने हमें इतना लम्बा समय दिया, हसरत साहब की इतनी सारी बातें हमें बताईं, उनके गीतों की चर्चा कीं, ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ की तरफ़ से और अपने पाठकों की तरफ़ से, और मैं अपनी तरफ़ से आपको बहुत बहुत धन्यवाद देता हूँ, नमस्कार!

आपका भी बहुत बहुत शुक्रिया जो आपने मुझे याद किया और डैडी से जुड़ी बातें बताने का मौका दिया। नमस्कार!


आपको हमारी यह प्रस्तुति कैसी लगी, हमे अवश्य बताइएगा। आप अपने सुझाव और फरमाइशें ई-मेल आईडी cine.paheli@yahoo.com पर भेज सकते है। अगले माह के चौथे शनिवार को हम एक ऐसे ही चर्चित अथवा भूले-विसरे फिल्म कलाकार के साक्षात्कार के साथ उपस्थित होंगे। अब हमें आज्ञा दीजिए।  



प्रस्तुति : सुजॉय चटर्जी 

Saturday, October 25, 2014

बातों बातों में : Interview with Pranay Dixit, Actor of Film 'Roar - Tigers of the Sundarbans'

बातों बातों में

फिल्म 'रोर - टाइगर ऑफ सुन्दरवन' से अपना फ़िल्मी सफ़र शुरु करने वाले टीवी अभिनेता प्रणय दीक्षित से सुजॉय चटर्जी की बातचीत

सपनों को अगर जीना है तो पागलपन का होना ज़रूरी है... 





आगामी शुक्रवार, 31 अकतूबर, 2014 को प्रदर्शित होने जा रही है इस साल की सबसे अनोखी फ़िल्म - 'रोर - टाइगर ऑफ सुन्दरवन'। अबीस रिज़वी निर्मित व कमल सदाना निर्देशित इस ऐक्शन थ्रिलर में अभिनय करने वाले कलाकारों में एक नाम लखनऊ के प्रणय दीक्षित का भी है। टेलीविज़न जगत में 'मिस्टर जुगाड़ूलाल', 'लापतागंज', 'एफ.आई.आर.', 'चिड़ियाघर', 'हम आपके हैं इन-लॉज़', 'बच्चन पाण्डे की टोली', 'गिलि गिलि गप्पा' जैसे धारावाहिकों में अपने हास्य अभिनय से हम सब का मनोरंजन करने वाले प्रणय दीक्षित इस फ़िल्म के माध्यम से अब बड़े परदे पर क़दम रख रहे हैं। आज प्रणय जी 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के मंच पर मौजूद हैं इसी फ़िल्म से सम्बन्धित कुछ दिलचस्प बातें बताने के लिए। साथ ही अपने करीयर का शुरू से लेकर अब तके के सफ़र की दास्तान भी वो हमारे साथ बाँट रहे हैं। तो आइए मिलिए अभिनेता प्रणय दीक्षित से, साक्षात्कार आधारित 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के स्तम्भ 'बातों बातों में' की इस कड़ी में। प्रणय दीक्षित से यह बातचीत आपके सुपरिचित स्तम्भकार सुजॉय चटर्जी ने की है।



प्रणय जी, सबसे पहले तो आपको हार्दिक बधाई, आपकी पहली फ़िल्म 'रोर - टाइगर ऑफ सुन्दरवन' के लिए। साथ ही शुभकामनाएँ इस फ़िल्म की कामयाबी के लिए, जो कि कुछ ही दिनों में रिलीज़ होने जा रही है। तो बताइये कि कैसा लग रहा है छोटे परदे से बड़े परदे पर पहुँचते हुए?

आपको लाखों धन्यवाद इस साक्षात्कार के लिए। यह मेरे लिए बहुत ही सौभाग्य की बात है कि मैं खुद को प्रणय दीक्षित के नाम से परिचय देने में समर्थ हुआ हूँ। मैं एक मैनेजमेंट के स्नातक होने और इस क्षेत्र में सफल होने के बाद अभिनय के क्षेत्र में आया हूँ। मैं नवाबों के शहर से ताल्लुक रखता हूँ, वह शहर जो अपनी नज़ाकत, नफासत और लजीज खानपान के लिए मशहूर है, यानी कि लखनऊ।
टेलीविज़न मेरा स्कूल रहा है। मैंने अभिनय का पहला पाठ यहीं पर पढ़ा, मेरी नीव बनी, और इसी ने आगे चलकर मुझे विश्वविद्यालय भेजा। जी हाँ, फिल्म 'रोर - टाइगर ऑफ सुन्दरवन' मेरा विश्वविद्यालय रहा। मैं विश्व की सबसे बड़ी फ़िल्म इंडस्ट्री, बॉलीवूड का आभारी हूँ जिसने मुझ पर भरोसा किया इस चुनौती के लिए। मैं अभिभूत हूँ। यह एक ऐसी अनुभूति है जिसे शब्दों में उल्लेख कर पाना असम्भव है। मुझे यह तो मालूम था कि एक दिन मुझे अपना बिग ब्रेक मिलेगा, पर इतना बड़ा ब्रेक अशातीत था। 'रोर...' नामक यात्रा के मंज़िल तक पहुँचने के लिए मैंने जी-जान लगा दिया और मुझ पर ईश्वर की कृपा रही जिन्होंने मेरा ख़याल रखा और मुझे विश्व के कुछ सर्वश्रेष्ठ प्रोफ़्रेशनल्स की निगरानी में काम करने का मौका मिला। बड़ों के आशिर्वाद से मुझे अपनी पहली फ़िल्म में एक सशक्त चरित्र को निभाने का मौका मिला। इस फ़िल्म में काम करते हुए मैंने बहुत कुछ सीखा, यूनिट के हर शख़्स से कुछ ना कुछ सीखने को मिला।

बहुत ख़ूब! प्रणय जी, मैं आपसे यह पूछना चाहूँगा कि आपको यह रोल कैसे मिला, पर उससे पहले मैं आपके सफर की शुरुआत से जानना चाहूँगा। मतलब आपका अब तक का सफ़र कैसा रहा? अभिनय का बीज कब बोया गया था, और यह बीज कब और कैसे अंकुरित हुआ? अभिनेता के रूप में कौन सा शो या धारावाहिक पहला था? तो उन शुरुआती दिनों का हाल बताइये ज़रा।

मुझे अच्छी तरह याद है कि जब मैं चौथी कक्षा में था, तब दीवाली के फ़ंक्शन में एक लघु-नाटक में मैंने एक पण्डित का रोल किया था जो विवाह करवाता है। मेरे उस अभिनय को देख कर सभी आंटी, अंकल और युवा वर्ग मुझसे प्यार करने लगे। पर उसी फ़ंक्शन के एक अन्य आइटम में जब मैंने "चोली के पीछे क्या है..." गीत गाकर सुनाया तो सभी कुछ अटपटा सा महसूस करने लगे, जिनमें मेरे माता-पिता भी शामिल थे। पर चौथी कक्षा का वह छोटा बच्चा पूरे मोहल्ले में चर्चा का विषय तो बन ही गया था। इस तरह से अभिनय मेरे अन्दर शायद जन्म से ही था। उसके बाद एक लम्बा अन्तराल रहा और मैं बतौर ऑल-राउन्डर पूरी तरह से क्रिकेट के साथ जुड़ा रहा, कुछ सालों तक। उसके बाद बारहवीं की परीक्षा पास कर जब होस्टल लाइफ़ में प्रवेश किया तो पूरी शिद्दत से तरह-तरह के एक्स्ट्रा-करिकुलर ऐक्टिविटीज़ में भाग लेने लगा; पर अपने पारिवारिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए अभिनेता बनने के सपने को तूल नहीं दिया और अपनी उच्च शिक्षा और फिर उसके बाद कॉरपोरेट नौकरी की तरफ़ ध्यान देने लगा। लेकिन मेरे द्वारा जीते हुए तमाम ट्रॉफ़ी और सर्टिफ़िकेट मेरे सामने प्रश्नवाचक चिह्न बन कर दिन-प्रतिदिन खड़े हो जाते। जीवन में आगे चलकर मैं अफ़सोस नहीं करना चाहता था, इसलिए अपने पिताजी को भरोसा दिलाकर मैंने अपनी अच्छी-खासी नौकरी छोड़ दी और साल 2010 में सपनों के शहर मुम्बई आ गया, अपने जीवन का सबसे बड़ा रिस्क लेकर। मेरी माँ सोच में पड़ गईं कि फ़िल्म इंडस्ट्री में बिना किसी जान-पहचान के मैं कैसे कुछ कर पाऊँगा। पर मेरा आत्मविश्वास हमेशा मुझसे यह कहता था कि एक दिन मैं कमयाब ज़रूर बनूँगा। और अब मैं हर चुनौती के लिए एकदम तैयार हूँ।

वाह, क्या बात है! तो अब आप मायानगरी मुम्बई पहुँच गए। यहाँ पर किस तरह से यह लड़ाई आपने शुरू की?

मैंने लगभग 18 महीने अपने बचपन के एक दोस्त के साथ थाणे में गुज़ारे। उसने मेरी हर सम्भव मदद की, यकीन मानिए हर तरह से। मैं रोज़ चार घंटे का सफ़र करता; थाणे से मुम्बई आता ओपेन ऑडिशन के लिए, और फिर थाणे वापस चला जाता, और यह मैं छह महीनों तक लगातार करता रहा। 


अच्छा, आगे बढ़ने से पहले क्या मैं यह जान सकता हूँ कि क्या आपने कभी थिएटर के साथ जुड़ने का नहीं सोचा था लखनऊ में?

जी नहीं! मैनेजमेण्ट की पढ़ाई करते हुए कभी मौका ही नहीं मिला क्योंकि उसमें काफ़ी समय देना पड़ता है, काफ़ी सीरियस होना पड़ता है। मेरे अन्दर जो अभिनय की प्रतिभा है वह ईश्वर प्रदत्त है। मैंने कहीं से नहीं सीखा, यह मेरे अन्दर ही था। पर मुम्बई आने के बाद मैं हिन्दी थिएटर के साथ जुड़ा। अनभिज्ञ होने की वजह से मुझे स्टेज पर परफ़ॉर्म करने का मौका नहीं मिलता था, बैक-स्टेज ही सँभाला करता, कभी ब्लैक-आउट के दौरान बैकड्रॉप की सेटिंग्स बदलता तो कभी कलाकारों को चाय-समोसे सर्व करता। केवल देख-देख कर उन कलाकारों से मैंने बहुत कुछ सीखा पर कम से कम एक बार स्टेज पर जाने की लालसा बार-बार मन-मस्तिष्क पर हावी रहता। कॉलेज में जितने भी बार मैं स्टेज पर गया, पहला पुरस्कार (या कम से कम दूसरा) लिए बगैर नहीं लौटा। मेरे दोस्त इस बात की शर्त लगाया करते थे। अपने कॉलेज का एक परफ़ॉर्मर होने के बावजूद मैंने यहाँ इस तरह के काम करने का निर्णय लिया ताकि मैं अन्दर से और भी ज़्यादा मज़बूत बन जाऊँ। मुझे अब भी याद है कि जब भी मैं किसी को अपने प्रोफ़ेशनल बैकग्राउण्ड के बारे में बताता था तो वो चौंक पड़ते और कहते कि आप पागल हैं जो इतना अच्छा करीयर छोड़ कर ऐक्टिंग करने आ गए। यकीन मानिये कि अपने सपनों को अगर जीना है तो पागलपन का होना ज़रूरी है।


बिल्कुल सही बात है! अच्छा फिर उसके बाद क्या हुआ?

उसके बाद शुरू से ही मेरी नज़र अपने लक्ष्य पर ही थी। मैं फ़िल्मों से शुरुआत नहीं करना चाहता था, मैंने यह निर्णय लिया कि फ़िल्म में काम तभी करूँगा जब मुझे कोई यादगार किरदार निभाने का मौका मिलेगा। मैं ऐसा कोई रोल नहीं करना चाहता जिस पर किसी का ध्यान ही ना जाये। इसालिए मैंने धैर्य से काम लिया। मैंने अपना ऐक्टिंग करीयर टेलीविज़न से शुरू किया। फ़िल्म के मुकाबले टीवी में प्रेशर बहुत ज़्यादा है क्योंकि इनका दैनिक प्रसारण होता है। इस तरह से टीवी में काम करते हुए कलाकार शारीरिक और मानसिक तौर पर मज़बूत बन जाता है। मेरे सेल्स/मार्केटिंग की नौकरी में भी बहुत प्रेशर रहता था, और मेरी कई उपलब्धियाँ भी वहाँ रही। कॉलेज में मैं स्किट्स, नाटक वगैरह करता था और बहुत सारे ट्रॉफी और सर्टिफ़िकेट जीते। अब समय था कि उन तमाम अनुभवों को अपने ऐक्टिंग में लगाने का। अनगिनत ऑडिशन देने के बाद मुझे अहसास हुआ कि कैमरे के सामने अभिनय करना बिल्कुल अलग चीज़ है और चुनौती भरा भी।


आपका पहला ऑडिशन कौन सा था?

मैंने अपना पहला ऑडिशन यहीं मुम्बई में दिया एक नामी टैल्कम पाउडर ब्रैण्ड के विज्ञापन के लिए और सौ से भी अधिक कलाकारों के बीच में से मैं शॉर्टलिस्ट हुआ। इससे मेरा आत्मविश्वास और भी बढ़ गया और मैंने सोचा कि आज अगर मैं शॉर्टलिस्ट हुआ हूँ तो कल सेलेक्ट भी हो जाऊँगा। छह महीने मैंने जी-तोड़ मेहनत की। इन छह महीनों में मैंने लगभग 300+ ऑडिशन्स दिये पर कुछ 50 में फ़िट हो सका, 15-20 में मैं शॉर्टलिस्ट हुआ, पर फ़ाइनल सीलेक्शन एक में भी नहीं हुआ। मेरी समझ में यह आ गया कि यह दुनिया की सबसे ज़्यादा मुश्किल जगह है, पर मेरा शॉर्ट-लिस्ट होना मुझे ऊर्जा देता रहा और वही मेरी एकमात्र आशा की किरण थी। एक समय ऐसा भी आया कि जब एक के बाद एक नाकामयाबी मुझे नसीब हो रही थी और सारी जमा-पूँजी भी खतम हो चुकी थी। ऐसी स्थिति में मैंने अँधेरी स्थित एक कम्पनी में नाइट शिफ़्ट की मामूली सी नौकरी कर ली। मेरी योग्यता के हिसाब से मुझे अच्छी नौकरियाँ मिल रही थीं पर मैं दोबारा उनमें उलझ कर अपना मकसद फिर से खोना नहीं चाहता था। मैंने डेढ़ महीने तक वह नौकरी की।


प्रणय जी, आपकी इस तपस्या को सलाम करता हूँ। अच्छा, फिर कैसे आगे बढ़े आप?

अन्त में एक दिन आया जब टेलीविज़न ने मुझे आवाज़ दी और मुझे 'लापतागंज' धारावाहिक में ब्रेक मिला। एक छोटा सा रोल था उसमें पर एक ही सप्ताह के अन्दर मुझे मेरा पहला बड़ा रोल, जुगाड़ूलाल का, जो मुख्य चरित्र था, वह मुझे मिल गया। उसके बाद फिर मुझे पीछे मुड़ कर देखने की ज़रूरत नहीं पड़ी।


बहुत ख़ूब! बहुत लोकप्रिय रहा है 'जुगाड़ूलाल'। अच्छा यह बताइये कि शुरू-शुरू में टीवी धारावाहिक में काम करते हुए किन मुश्किलों का सामना करना पड़ा आपको?

शुरू-शुरू में मुझे यह भी मालूम नहीं था कि संवाद के लाइन कैसे याद किये जाते हैं, संवाद कैसे बोले जाते हैं, मूवमेण्ट कैसे ली जाती है, परछाई को कैसे काबू में किया जाता है, रीफ़्लेक्टर का सामना कैसे किया जाता है, कन्टिन्यूइटी कैसे मेनटेन की जाती है, आवाज़ को कैसे मोडुलेट किया जाता है, उसमें कैसे वेरिएशन लाई जाती है, टाइमिंग वगैरह, यह सब कुछ भी मुझे मालूम नहीं था। पर मेरी किस्मत अच्छी थी कि मुझे बहुत ही अच्छे लोग मिले जिन्होंने मेरी बिना किसी शर्त के मदद की। टीवी मेरा स्कूल बन गया और कुछ ही महीनो में मेरा हर शॉट निर्देशकों, निर्माताओं, एडिटर, सह-कलाकारों और दर्शकों की वाह-वाही लूटने लगा। बहुत जल्द मैंने टीवी के हास्य जगत में नाम कर लिया, और आज कॉमेडी जौनर के हर निर्देशक और सीनियर कलाकार मुझे पहचानते हैं और मेरे काम को सराहते हैं। और इन बड़े कलाकारों के साथ स्क्रीन स्पेस शेअर करते हुए मुझे गर्व और आभार का अहसास होता है। और बताना ज़रूरी है कि वो सभी 'रोर...' के लिए काफ़ी उत्साहित हैं।


और हम सब भी उतने ही उत्साहित हैं। इससे पहले कि हम फिल्म 'रोर...' की चर्चा करें, यह बताइये कि किन-किन टीवी धारावाहिकों में आपने काम किया और उनमें से कौन सा किरदार आपके दिल के सबसे करीब है?

मिस्टर जुगाड़ूलाल, लापतागंज, एफ.आई.आर., चिड़ियाघर, हम आपके हैं इन-लॉज़, बच्चन पाण्डे की टोली, गिलि गिलि गप्पा, आदि। इन सभी में मेरा काम लोगों ने सराहा, पर जुगाड़ूलाल मेरे दिल के सबसे करीब है। शायद इसलिए कि इसी से मेरे अभिनय सफ़र की शुरुआत हुई थी। उन 85 एपिसोड्स को करते हुए मैं काफ़ी मँझ गया। जब कोई बाहरवाला सेट पर आता, तो मुझे देख कर हैरान रह जाता क्योंकि कैमरे के बाहर मैं एक बिल्कुल अलग शख़्सियत होता, दिखने में, और बोलचाल में भी। यहाँ तक कि मेरी नायिका की सहेलियाँ भी धोखे में रहती कि क्या यही जुगाड़ू है, ये तो बिल्कुल अलग दिखता है और बोलता भी बहुत अच्छा है।


यही तो एक अच्छे अभिनेता की ख़ासियत होती है कि वो उस चरित्र में बिल्कुल ढल जाता है। प्रणय जी, अब यह बताइये कि टीवी में काम करते करते फ़िल्म जगत में पदार्पण का जो यह ट्रान्ज़िशन था, वह कैसे सम्भव हुआ?

मैं फ़िल्में एक संक्रमण की तरह देखा करता था। साथ-साथ ऑबज़र्वेशन और लर्निंग भी जारी था। जब भी मुझे समय मिलता मैं जाकर ऑडिशन दे आता अपना आकलन करने के लिए। और एक समय जाकर मैंने यह महसूस किया कि टीवी में अभिनय और फ़िल्मों में अभिनय दो बिल्कुल अलग चीज़ें हैं। फ़िल्मों में अभिनय करना बच्चों का खेल नहीं, यह बात समझ में आ गई और इसलिए मैंने सोचा कि अब समय आ गया है कि और मेहनत से अपने अभिनय को अगले स्तर तक पहुँचाया जाए। इसलिए ऑडिशन जारी रखा, और करीब करीब 1500 ऑडिशन्स मैंने दिए, और ढाई साल बाद मुझे 'रोर...' के ऑडिशन के लिए बुलावा आया। कास्टिंग डिरेक्टर का कॉल आया और उन्होंने मुझे बताया कि इस फ़िल्म में एक चरित्र के लिए वो एक ऐसे अभिनेता की तलाश कर रहे हैं जो काफ़ी डायनामिक हो। तो क्या आप इस चरित्र को निभाने के लिए ऑडिशन दोगे? मैं वहाँ गया, उन्होंने मुझे उस किरदार के बारे में विस्तार में बताया। ऑडिशन टेक से पहले मैंने अपने बालों को भिगोया और अलग ही स्टाइल में कंघी की (जो इस फिल्म में मेरी हेअर स्टाइल बनी)। और फ़ाइनल टेक के बाद उन्होंने मुझसे कहा कि परिणाम वो मुझे बाद में सूचित करेंगे। अगले दिन मुझे उनका फ़ोन आया और उन्होंने मुझसे पूछा कि ये तुमने क्या किया? उन्होंने बताया कि निर्देशक महोदय मुझसे कल मिलना चाहते हैं। अगले दिन जब मैं कमल सदाना जी के दफ़्तर पहुँचा तो उन्होंने मुझे देखते ही कहा, "वेलकम मधु" उनके बाद निर्माता अबीस रिजवी साहब आए और कहा, "अरे मधु, कैसे हैं आप?" फिर प्रोडक्शन हेड अन्दर आए और कहने लगे कि क्या आप ही मधु हैं? मेरी समझ में आ गया कि ऑडिशन सुपरहिट रहा है। मुझे दो और सीन अदा करने को कहा गया, और उसके बाद निर्देशक साहब आए और कहा कि "यू आर इन"। और अब मैं 31 अक्तुबर को आप सबके बीच "आउट" हो जाऊँगा।

अच्छा प्रणय जी, 'रोर...' का ट्रेलर हमने देखा है। फ़िल्म की जो ओवरऑल पैकेजिंग है, वह बहुत ही ज़्यादा लुभावना है, और लग रहा है कि फ़िल्म लीक से अलग हट कर होगी। आपको क्या लगता है कि वह कौन सी बात है इस फ़िल्म की जो इसे कामयाबी की बुलन्दी तक लेकर जा सकती है?

अबीस रिजवी इस फ़िल्म के केवल निर्माता ही नहीं हैं, बल्कि वो इस पूरे प्रोजेक्ट में एक ढाल बन कर खड़े रहे और उनके बिना किसी के लिए एक क़दम भी आगे चलना सम्भव नहीं होता। मेरे लिए तो वो एक बड़े भाई से कम नहीं हैं और रिज़वी साहब और कमल साहब, दोनों ने इस पूरे हसीन सफ़र में हम सब का पूरा-पूरा ख़याल रखा। इस फ़िल्म में रिज़वी साहब की बहुत बड़ी पूँजी दाव पर तो लगी है ही, उससे भी बड़ी बात है कि वो फ़िल्म के हर वी.एफ.एक्स. शॉट की पूरी-पूरी जानकारी रखते थे और स्क्रिप्ट की हर लाइन उन्हें पता थी। मैंने पहले कभी ऐसा नहीं सुना था कि किसी निर्माता और निर्देशक ने वी.एफ.एक्स. का कोर्स किया हो। यह 800 वी.एफ.एक्स. शॉट्स की फ़िल्म है और यह निर्माता और निर्देशक के प्रोफ़ेशन्लिज़्म का ही उदाहरण है जो पूरी दुनिया के सामने बहुत जल्द ही आने वाला है। रिज़वी साहब ने विश्व के सर्वश्रेष्ठ टेक्निशियनों को इस फ़िल्म में लिया है अपने सपने को साकार करने के लिए। मैंने बहुत सी वी.एफ.एक्स. फ़िल्में देखी हैं पर 'रोर...' में वी.एफ.एक्स. का स्तर बहुत ही ऊँचा है। इसके लिए श्रेय जाता है जेश कृष्णमूर्ति जी (हॉलीवुड के साथ जिनका अच्छा अनुभव रहा है) और उनके 400 कर्मचारियों को जिन्होंने रात-दिन कठिन परिश्रम कर आश्चर्यचकित कर देने वाली वी.एफ.एक्स. डिज़ाइनिंग की है। लॉस ऐंजेलेस के मिस्टर माइकल वाटसन, जो वी.एफ.एक्स. के विशेषज्ञ हैं, उन्हें इस फ़िल्म में फोटोग्राफी निर्देशक लिया गया है, जिन्होंने 'स्काईलाइन', 'स्टेप अप 2' जैसी फिल्मों की फोटोग्राफी की है। उन्होंने सुन्दरवन के जंगलों को बहुत ही ख़ूबसूरती के साथ कैमरे में क़ैद किया है। मुझे रसूल पूकुट्टी की निगरानी में काम करके भी बहुत अच्छा लगा। पूकुट्टी जी भारत की शान तो हैं ही, विश्व के श्रेष्ठ साउण्ड डिज़ाइनरों में से एक होने का भी उन्हें गौरव प्राप्त है। 'स्लमडॉग मिलिओनेअर' के लिए वो ऑस्कर भी जीत चुके हैं। उनके साउण्ड इफ़ेक्ट्स का महत्वपूर्ण योगदान है इस फ़िल्म में। फ़िल्म के सभी सहयोगी अभिनेताओं के साथ काम करके मुझे बेहद आनन्द आया और सभी ने एक दूसरे का अन्त तक साथ दिया। कुछ दिनों की शूटिंग के बाद मुझे अहसास हुआ कि अब हम महज़ अभिनेता नहीं रहे, बल्कि 'रोर...' नामक परिवार में अपना योगदान कर रहे हैं।


प्रणय जी, इस फ़िल्म का मूल उद्येश्य क्या है? 

इस फ़िल्म के ज़रिए हम पूरी दुनिया को पश्चिम बंगाल के सुन्दरवन का हाल बताना चाहते हैं जहाँ आदमख़ोर बाघ मछुआरों और शहद निकालने वाले लोगों पर हमला करते हैं और उनकी मौत के कारण बनाते हैं। उन लोगों के परिवारों की दुर्दशा को दिखाया गया है जो अपनी जान जोखिम में डाल कर इस भयानक जंगल के अन्दर जाते हैं, अपने पेट की आग को शान्त करने के लिए। इसके साथ ही बाघों और शेरों के संरक्षण (Save the Tiger) का उपयोगी सन्देश भी है इस फ़िल्म में जो कि अब एक ग्लोबल मुद्दा है। इंसान और शेर के बीच जो रिश्ता है उसे पहली बार एक अलग ही नज़रिये से दिखाया गया है इस फ़िल्म में। और जब इस फ़िल्म को पूरी दुनिया भर से ज़बरदस्त प्रतिक्रिया मिली, 2014 के कान फ़िल्म महोत्सव में, तो हमारा हौसला और भी बढ़ गया। दुनिया भर के जाने-माने फ़िल्म वितरकों ने इस फ़िल्म के ट्रेलर को देख कर इस फ़िल्म में गहरी रुचि दिखाई है। 'रोर...' विश्व के सबसे ख़तरनाक जंगलों में से एक - सुन्दरबन - पर केन्द्रित है। वहाँ के सुन्दर लोकेशन्स को फ़िल्म के परदे पर दर्शकों को पहली बार देखने का मौका मिलेगा, यह भी अपने आप में बड़ी बात है। और मैं आप सब को दावत देता हूँ पॉप-कॉर्न के साथ सुन्दरबन, हमारे कमांडोज़, हमारी हिरोइन और वहाँ के आकर्षक सफ़ेद बाघों से मिलने के लिए। आइए और इन सबसे आकर मिलिए। बाघ, मगरमच्छ, साँप, जैसे डरावने जन्तुओं और विशालकाय जंगल के बीच दिल दहलाने वाले ऐक्शन के गवाह बनिए। ये सब आपका इन्तज़ार कर रहे हैं।


बहुत ही सुन्दर तरीके से आपने इस फ़िल्म का वर्णन किया। यह सब जान कर हम भी बेहद उत्सुक हो उठे हैं फ़िल्म को देखने के लिए। अच्छा आपने ज़िक्र किया था कि आपके चरित्र का नाम "मधु" है। प्रणय जी, ये मधु, मेरा मतलब है कि यह तो लड़कियों का नाम होता है, माफ़ी चाहता हूँ पर यह कैसा नाम है आपके चरित्र के लिए?

हा हा हा.... नाम लड़की का ज़रूर है पर चरित्र शत-प्रतिशत पुरुष का है। मधुसूदन बंकिमचन्द्र सेनगुप्ता एक किलोमीटर लम्बा बांग्ला नाम है। इसलिए लोग मुझे मधु कह कर बुलाते हैं। मधु हिन्दी में ही बात करता है पर उसमें बांग्ला उच्चारण का स्पर्श भी है। मधु सुन्दरबन में पर्यटकों के लिए स्थानीय गाइड का काम करता है। एक युवा फ़ोटोग्राफ़र के सहायक के रूप में उसने काम किया था जो एक सफ़ेद शेरनी के द्वारा मारा गया। ईश्वर से डरने वाला और बहुत ही सच्चे दिल वाला मधु अपने स्वभाव के ख़िलाफ़ जाकर उस फ़ोटोग्राफ़र के अवैध शिकार में उसका साथ देता है। फ़ोटोग्राफ़र के मरने के बाद मधु को लगने लगता है कि वह शेरनी उसे भी मार डालेगी। मधु उस शेरनी को मारने की सोचता है। आगे क्या होता है, यह तो आपको थिएटर में जाकर ही पता चलेगा।


प्रणय जी, अब हम आप से जानना चाहेंगे फ़िल्म के निर्देशक कमल सदाना साहब के बारे में। उनके बारे में कुछ बताइए।

कमल जी मेरे करीयर के अब तक के बेस्ट बॉस रहे हैं। उनको मुझे डिरेक्ट करते हुए अच्छा लगा और मैंने भी उन्हें हर सीन में चौंका दिया। सुन्दरबन में रोज़ सुबह 6 बजे से रात 1 बजे तक उनके काम करने का जो पैशन था, उससे मैं बहुत मुतासिर हुआ। मुझे अब भी उनका कही पंक्ति याद है - "Lets make a movie"; जो बाद में यूनिट के हर किसी की पसंदीदा पंक्ति बन गई। शुरू से ही वो प्रोडक्शन और डिरेक्शन, दोनो सँभाल रहे थे क्योंकि हमारे प्रोडक्शन हेड स्वास्थ्य कारणों से सुन्दरबन नहीं जा सके थे। कैसे भूल सकता हूँ वह क्षण कि जब नायिका को एक सीन में एक गहरे खाल में छलाँग मार कर और काफ़ी दूर तक उसमें तैर कर एक नाव तक पहुँचना था, तो इस सीन को करने के लिए नायिका का डरना बिल्कुल स्वाभाविक था। नायिका के डर को देख कर कमल जी ने ख़ुद छलाँग मार कर सीन को कर दिखाया जिससे नायिका का डर निकल गया। कमल जी भीगे कपड़ों में काँप रहे थे, वैसे ही मौनिटर के पीछे जाकर कमान सम्भाला और वह सीन एक ही बार में ओके हो गया। इससे ज़ाहिर होता है कि कमल जी और उनकी पूरी टीम ने इस फ़िल्म के पीछे कितनी कड़ी मेहनत की है। कमल जी अक्सर कहते थे कि Respect Nature। मुझे याद है कि जब उन्होंने मुझे 'रोर...' का ऑफ़र दिया था, तब मैंने उन्हें धन्यवाद देते हुए कहा था कि "I will not let you down sir", उनका तुरन्त जवाब था "I will not let you to let us down"। इस तरह उनका मुझ पर विश्च्वास रहा है। फ़िल्म को बेहद ख़ूबसूरती से उन्होंने शूट तो किया ही है, उससे भी अच्छा काम उनका एडिटिंग टेबल पर रहा है। हम सब ने उन्हें हर सीन को एडिट करते हुए देखा है और बहुत कुछ सीखा भी है। कमल जी का दिल सोने का है। उनका सेन्स ऑफ़ ह्यूमर भी कमाल का है। अपने आप में वो एक रचनात्मक संस्था है जिनमें निर्देशन, पटकथा, एडिटिंग, पार्श्वसंगीत, और प्रोमोशन के गुण कूट-कूट कर भरे हुए हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि उन्होंने फ़िल्म के कलाकारों से केवल अभिनय ही नहीं करवाया, बल्कि फ़िल्म निर्माण के सभी पक्षों के बारे में सिखाया है।


वाह! क्या बात है! ऐसे बहुत कम ही निर्देशक होंगे जो अभिनेताओं को इस तरह की सीख देते होंगे। अच्छा प्रणय जी, सुन्दरबन में इतने दिन आप सब रहे, वहाँ के अनुभव भी बेहद रोमांचक रहे होंगे। तो सुन्दरबन से जुड़ी कुछ मज़ेदार और रोमांचक क़िस्से बताइए।

150 लोगों का यूनिट चार बड़े क्रूज़ में 'No man's land' में ठहरे हुए थे।


माफ़ कीजिएगा, पर 'No man's land' मतलब???

मतलब समुद्र का वह इलाका जो ना भारत का है ना बांग्लादेश का।


अच्छा अच्छा!

तो बिना इन्टरनेट, बिना मोबाइल नेटवर्क के हम सब रहे। एक नहीं, दो नहीं बहुत सारी घटनाएँ यादों में समेट कर हम सब वापस लौटे हैं। हमें बांग्लादेश सरकार से 25 रेंजर मिले हुए थे जो रोज़ तीन-चार राउण्ड गोलियाँ हवा में चलाकर ख़ूंखार जानवरों को हमारे शूटिंग्‍ के इलाके से दूर भगाया करते थे। एक दिन जब हम बंगाल की खाड़ी में शूट कर रहे थे, कैमरा टीम का एक सदस्य बोट से नीचे समन्दर में गिर गया। उसे तैरना भी नहीं आता था। पर वहाँ मौजूद एक स्थानीय नाविक ने तुरन्त पानी में छलाँग मार कर उन्हें बचा लिया। हम सब बहुत डर गए थे और उस बांग्लादेशी नाविक को धन्यवाद दिया। उन स्थानीय नाविकों ने हमारा पूरा-पूरा साथ दिया और कई बार ऐसे मुश्किल की घड़ियों में हमारी नैया को किनारे लगाया। ना उन्हें हिन्दी आती थी और ना हमें बांग्ला, पर एक दूसरे की बात परस्पर पहुँचाने में मुश्किल नहीं हुई। यूनिट के सभी लोग रोज़ अपने पाँव डीज़ल से धोया करते थे क्योंकि कीचड़ और कीटों के बीच शूटिंग करने से कोई न कोई इन्फ़ेक्शन हो ही जाता था। और शूट के अन्तिम दिन में तो एक क्रूज़ पर आग ही लग गई। क़िस्मत अच्छी थी कि हमारी टीम, कैमरे और अन्य सामान सब सुरक्षित थे और हम सब आसपास ही थे, इसलिए जल्द से जल्द आग पर काबू पा लिया गया। अगर हम जंगल के अन्दर शूटिंग कर रहे होते तो बहुत ज़्यादा नुक्सान हो सकता था। उस जहाज़ में रहने वाले यूनिट के सदस्यों को एक होटल में पहुँचाया गया और कुछ को तो अस्पताल में भर्ती करवा कर ऑक्सीज़न भी देना पड़ा। हम सब मिल कर अस्पताल गए, और अगले ही दिन हम भारत के लिए रवाना हो गए।


वाक़ई बड़ा हादसा होते होते बचा। अच्छा यह बताइए कि क्या रात को भी शूटिंग होती थी?

जी नहीं, हम सुबह 4 बजे से शाम 4 बजे तक लगभग 5 सप्ताह तक शूटिंग करते रहे। रात को शूटिंग करना खतरे से खाली नहीं था। मतलब दिन में जंगल के अन्दर, और रातों को समन्दर में। भाटे के वक़्त जब हमारे 15 छोटे-छोटे नाव कीचड़ में फँस जाते थे तब यूनिट को घंटों ज्वार का इन्तज़ार करना पड़ता समन्दर के बीच खड़े जहाज़ों तक पहुँचने के लिए। ऐसे में समय निकालने के लिए हम गाना गाते, नकल उतारते, चुटकुले सुनाते।


आपके साथ कोई हादसा हुआ?

एक बार मेरे दाहिने हाथ में चोट लग गई थी, जिसकी वजह से एक सीन में मैंने हाथों को फ़ोल्ड कर रखा था ताकि उस पर लगा बैंडेज दिखाई न दे। अन्तिम दिन के शूट के दौरान मेरी दाहिने आँख में भी चोट लग गई। वापस लौट कर अपने शहर लखनऊ में एक छोटा सा ऑपरेशन करवाना पड़ा। 


वहाँ पर यूनिट में कोई डॉक्टर नहीं था?

जी हाँ, डॉक्टर थे, और वो निरन्तर पूरी यूनिट को फ़र्स्ट-ऐड देने में दिन-रात जुटे रहते थे।


और कोई याद जो आप बताना चाहें?

शूटिंग खतम हो जाने के बाद हम सब इतने ख़ुश थे कि हमने अचानक यह तय किया कि हम अपने जहाज़ों के साथ रेस खेलेंगे। तो हम सब नारे लगाते हुए विशाल समन्दर में रेस लगाई और जैसे एक असम्भव को सम्भव बनाने का जो आनन्द है उसे सेलिब्रेट किया। वहाँ मौजूद सैलानी हमें देख रहे थे और अचम्भित हो रहे थे।


वाह! प्रणय जी, अभी हाल ही में इस फ़िल्म का ट्रेलर जारी हुआ है सलमान ख़ान के कर-कमलों से। 

यह जैसे एक सपना था मेरे लिए जब सलमान ख़ान ने 'रोर...' का थिएट्रिकल ट्रेलर लौंच किया। मैं बचपन से उनका डाइ-हार्ड फ़ैन रहा हूँ और सदा उनके डान्स के स्टेप्स और तौर-तरीकों को अपनाया है। इस ट्रेलर लौंच में जाकर मुझे लगा कि आइ ऐम बैक। 2002-07 के दौरान कालेज के स्टेज पर सैंकड़ों युवक-युवतियों की तालियाँ मैंने सुनी है, नोटिस बोर्ड पर अपनी तस्वीरें देखी हैं; और आज 2014 में 70mm स्क्रीन, नामी फ़िल्म-जगत की हस्तियाँ, मीडिया, हज़ारों कैमरों की चकाचौंध, दुनिया भर के लाखों-करोड़ों दर्शकों की यू-ट्यूब पर सराहना, अखबारों के मुख्य-पृष्ठ पर ज़िक्र, मुझ पर यकीनन ईश्वर की कृपा है, बस यही कह सकता हूँ।


ज़रूर ज़रूर, और प्रणय जी, 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' की तरफ से और हमारी तरफ़ से भी इस अनोखी और रोमांचक फ़िल्म की सफलता के लिए शुभकमानाएँ आपको देते हैं। फ़िल्म जगत में इस फ़िल्म से आपकी यात्रा शुरू हो रही है, आगे भी आप ढेर सारी फ़िल्मों में अभिनय करें, सफल हों जीवन में, यही ईश्वर से प्रार्थना करते हैं।


सुजॉय जी, मैं तहे दिल से आपका और 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' का शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ जो इतने अच्छे-अच्छे सवाल आपने मुझसे पूछे और मुझे पूरी दुनिया के सामने पेश होने का मौका दिया। आपके इन सवालों के माध्यम से मैंने अपनी पूरी ज़िन्दगी को सबके सामने रख पाया और मुझे बेहद अच्छा लगा। आपको और आपकी टीम को भी बहुत शुभकामनाएँ।



यह अगले सप्ताह प्रदर्शित होने वाली फिल्म 'रोर - टाइगर ऑफ सुन्दरवन' के अभिनेता प्रणय दीक्षित से सुजॉय चटर्जी की अन्तरंग बातचीत के सम्पादित अंश की प्रस्तुति है। आपको हमारी यह प्रस्तुति कैसी लगी, हमें अवश्य लिखिएगा। आप अभिनेता प्रणय दीक्षित को शुभकामना सन्देश भी भेज सकते हैं। हमारा ई-मेल पता है - radioplaybackindia@live.com  


प्रस्तुति : सुजॉय चटर्जी 
 सम्पादक : कृष्णमोहन मिश्र



अपना मनपसन्द स्तम्भ पढ़ने के लिए दीजिए अपनी राय 



नए साल 2015 में शनिवार के नियमित स्तम्भ रूप में आप कौन सा स्तम्भ पढ़ना सबसे ज़्यादा पसन्द करेंगे?

1.  सिने पहेली (फ़िल्म सम्बन्धित पहेलियों की प्रतियोगिता)

2. एक गीत सौ कहानियाँ (फ़िल्मी गीतों की रचना प्रक्रिया से जुड़े दिलचस्प क़िस्से)

3. स्मृतियों के स्वर (रेडियो (विविध भारती) साक्षात्कारों के अंश)

4. बातों बातों में (रेडियो प्लेबैक इण्डिया द्वारा लिये गए फ़िल्म व टीवी कलाकारों के साक्षात्कार)

5. बॉलीवुड विवाद (फ़िल्म जगत के मशहूर विवाद, वितर्क और मनमुटावों पर आधारित श्रृंखला)


अपनी राय नीचे टिप्पणी में अथवा cine.paheli@yahoo.com  पर अवश्य बताएँ।  






Total Pageviews

The Radio Playback Originals (Click on the covers to reach out the Albums)



Popular Posts

खरा सोना गीत

खरा सोना गीत - ऑडियो पॉडकास्ट
आपको प्यार छुपाने की बुरी आदत है
सी ए टी कैट...कैट माने बिल्ली
डम डम डिगा डिगा
रुला के गया सपना मेरा
शोख नज़र की बिजिलियाँ
टिम टिम टिम तारों के दीप जले
मेरी दुनिया है माँ तेरे आँचल में
वो हमसे चुप हैं
माई री मैं कासे कहूँ
यार बादशाह
आज की ताज़ा खबर
आँखों से जो

मिलिए रेडियो प्लेबैक के इन दमदार आर्टिस्टों से

संग्रहालय

Labels

sujooi chatterjee (863) old is gold (848) old classics (753) lata mangeshkar (304) krishnamohan mishra (285) suno kahani (279) sajeev sarathie (239) sujoy chatterjee (237) Anurag Sharma (217) amit tiwari (214) vishwa deepak tanha (148) सुनो कहानी (148) taaza sur taal (139) mohammad rafi (132) बोलती कहानियाँ (129) sujoy chaterji (118) mehfil-e-ghazal (116) Aaj ka Gaana (115) Bolti Kahaniyan (115) krishn mohan mishra (109) kahani (103) mukesh (101) Famous stories (96) Hindi audio book (93) .lata mangeshkar (92) hindi kahaniyan (92) stories (91) story narration (91) story in voice (90) kishore kumar (89) kahaniyon mein aawaaz (88) manna dey (86) Hindi (84) majrooh sultanpuri (83) Shailendra (80) anand bakshi (78) Sangya Tandon (77) gulzaar (77) s d burman (76) old classic (75) r d burman (75) taaza sangeet (74) अनुराग शर्मा (73) Shankar Jaikishan (67) Interview (64) krishna mohan mishra (63) sahir ludhayanvi (62) Audiology (60) cine paheli (60) asha bhonsle (58) Naushad (55) Podcast (55) audio book (55) laxmikant pyarelal (55) asha bhonsale (54) premchand (53) Hind Yugm (52) Madan Mohan (52) geeta dutt (51) vishwa deepak (51) Audio (50) sujoi chatterjee (50) sur sangam (50) ek mulakaat zaroori hai (47) ghazal collections... (47) music review (47) jagjit singh (46) krishnmohan mishra (46) Rashmi Prabha (45) ek geet sau kahaniyan (45) indian classical music (44) download (43) hemant kumar (43) old is gold revival (43) swar goshthi (42) shakeel badayuni (40) 100 years of indian cinema (39) gulzar (39) a r rahman (38) cover version (38) saturday special (38) Archana Chaoji (37) Salil Chaudhari (37) khara sona geet (36) playback india broadcast (36) Talat Mahmood (35) Kavita (34) hasrat jaipuri (34) mirza ghalib (34) o p nayyar (34) pooja anil (34) hindiyugm (33) rag bhairavi (33) Poem (32) pandit bhimsen joshi (32) लघुकथा (32) Composed Song (31) kalyanji anand ji (30) win 5000 cash (30) c ramchandra (29) k l sehgal (29) sundaymorning coffee (29) Awaz (28) Geet Ateet (28) emailkebahaneyaadonkekhazane (26) roshan (26) anuraag sharma (25) shradhanjali (25) Abhishek Ojha (24) death Anniversary (24) kaifi aazmii (24) khayyam (24) raj kapoor (24) Harishankar Parsai (23) Reetesh Khare (23) kavyapaath (23) mohd rafi (23) naushaad (23) vasant desai (23) sameer goswami (22) sonu nigam (22) आवाज़ (22) Filmy Chakra (21) Music (21) asha bhosale (21) audio story (21) jaidev (21) mehfil e kahkshaan (21) season # 03 (21) ustad amir khan (21) Podcast Kavi Sammelan (20) Shaifali Gupta (20) raja mehandi ali khan (20) Kuhoo Gupta (19) ghazal (19) pritam (19) rafique sheikh (19) rajendra krishan (19) ravi composer (19) rishi s (19) shreya ghoshal (19) anil biswaas (18) devotional songs (18) har geet ki ek kahani hoti hai (18) indeevar (18) javed akhtar (18) lata sangeet parv (18) musical tribute (18) nida fazli (18) rare gems (18) songs reviews (18) sujoy chatterji (18) swargoshthi (18) amitabh bhattacharya (17) bharat vyas (17) blogger's choice with rashmi prabha (17) irshad kamil (17) short story (17) sumit chakravorthy (17) suresh wadkar (17) FEATURED ARTIST OF THE WEEK (16) Hindi audio (16) Shanno Aggarwal (16) biswajit nanda (16) girija devi (16) maine dekhi pahli film (16) pankaj subeer (16) playback vani (16) sanjay patel (16) shankar ehsaan loy (16) surraiya (16) thumari (16) ustad bismillah khan (16) Munshi Premchand (15) amit trivedi (15) classical music (15) kavi pradeep (15) rajesh roshan (15) sangya tondon (15) Khushbu (14) Sangeet Sameeksha (14) Shobha Mahendru (14) hariharan (14) mehender kapoor (14) nusrat fateh ali khan (14) qamar jalalabaadi (14) ravindra jain (14) sangya tandan (14) suman kalyanpur (14) ustad rashid khan (14) NEW RELEASE (13) dev anand (13) featured album of the month (13) indian folk music (13) music review 2011 (13) music review 2013 (13) original uploads (13) rajender krishan (13) shamshaad begum (13) Geetcast (12) Rahat Fateh Ali Khan (12) awaaz mahotsav (12) bhupendra (12) mohit chauhan (12) new songs (12) noorjahan (12) prakash pandit (12) shamshad begum (12) sufi music (12) thaath (12) vishv deepak tanha (12) Deepali Pant Tiwari (11) RAG BASED SONGS OF MADAN MOHAN (11) RAG BASED SONGS OF NAUSHAD (11) RAG BASED SONGS OF ROSHAN (11) Rabindra Nath Tagore (11) Radio Salaam namaste (11) Sajeev Sarthie (11) Sharad Tailang (11) Swapn Manjusha (11) broadcasting (11) chitragupt (11) dilip kavathekar (11) featured artist of the month (11) hridaynath mangeshkar (11) judgement first round (11) k.l. sahgal (11) lakshmikant pyarelal (11) lata birthday (11) lavanya shah (11) mukesh special (11) rag kedar (11) remembering ghalib (11) roop kumar rathod (11) shishir parkhie (11) sukhvinder singh (11) sunidhi chauhaan (11) Articles (10) DAS THAT BEES RAG & BEES GEET (10) FIMON KE ANGAN MEN THUMAKATI PARAMPARIK THUMARI (10) Jaishankar Prasad (10) Shivani Singh (10) aaj ka kalaakaar (10) amitabh bachan (10) asad bhopali (10) baal Kavita (10) bachchon ki kavitayen (10) bhupen hazarika (10) geeta datt (10) indian classical (10) jaan nisaar akhtar (10) last series (10) male lories (10) music directors worked for raj kapoor (10) neelam Mishra (10) new song every friday (10) o p naiyyar (10) prashn pratiyogita (10) rare song (10) ravindra jain special (10) satire (10) season 2 (10) shabdon ki chaak par (10) shailesh bharatwasi (10) tapan sharma chintak (10) yogesh (10) उषा छाबड़ा (10) साहित्य (10) Aditya Prakash (9) Baal Udyan (9) Girijesh Rao (9) HINDI SONGS (9) Himesh Reshmiya (9) Kishor Kumar (9) Mridul Kirti (9) Pawas ke rag (9) RAGAS OF FIVE NOTES (9) SHAAN (9) abida parveen (9) amit kumar (9) amrita pritam (9) bahadur shah zafer (9) ek pal kii umr lekar (9) friday release (9) kailash kher (9) kamal barot (9) khemchandra prakash (9) kishore kumar series (9) lata di (9) mahendra kapoor (9) music news (9) music news week (9) new hindi song (9) new upload (9) nikhil anand giri (9) pandit jasraj (9) pandit ravishankar (9) parasmani acharya (9) purvaayi (9) rag bhimpalasi (9) rag kafi (9) rag malkauns (9) rare songs of lata (9) s h bihari (9) shabdon ke chaak par (9) shankar mahadevan (9) songs 2013 (9) songs 2014 (9) story (9) sudha malhotra (9) varsha geet (9) win 5000 (9) 2nd season (8) Anita Kumar (8) Gungunate Lamahe (8) Manna De (8) RAGAS AND TIME (8) Ranjana Bhatia (8) Top 50 songs of year 2008 (8) ahteraam (8) anil vishwas (8) bappi lahiri (8) begum akhtar (8) bimal roy (8) hind yugm awaaz (8) kajari songs (8) kk (8) manuj mehta (8) mazrooh sultanpuri (8) mehdi hasan (8) new composer singer (8) new song review (8) nutan (8) pandit ajay chakravorthy (8) pandit narender sharma (8) pandit ravi shankar (8) prem dhawan (8) rag bageshri (8) rag khamaj (8) s n tripathi (8) sameer (8) swanand kirkire (8) traditional thumaries (8) ustad bade gulam ali khan (8) vani jayaram (8) vidushi girija devi (8) अर्चना चावजी (8) पूजा अनिल (8) Dr. Prabha Atre (7) FILMY GEETON MEN THUMARI KE TATWA (7) Geeton Bhari Kahani (7) Har Geet Kii Ek Kahaani Hoti Hai (7) KAHKASHAN (7) Kajal Kumar (7) Poetry recital (7) RAGAS WITH TWO MADHYAMS (7) Ranjana Bhatia Ranju (7) Srinivas Panda (7) The radio playback originals (7) Urdu (7) Usha Chhabra (7) ahmed faraz (7) alka yagnik (7) amit khanna (7) anjaan (7) annual countdown 2008 (7) anu malik (7) anuradha paudwal (7) asha bhosle (7) ashok kumar (7) azeem shayaron ko salaam (7) basant desai (7) baton baton men (7) boigraphy (7) chitalkar (7) chitra singh (7) d n madhok (7) dhrupad (7) dilip kumar (7) entertainment news (7) filmon men thumri (7) gold series (7) hindi music (7) husnlaal bhagtram (7) indian instrumental music (7) k j yesudas (7) khemchand prakash (7) madan mohan special (7) mahatma gandhi (7) malini rajurkar (7) manoj kumar (7) mitti ke geet (7) naksh lyalpuri (7) new track (7) pandit kumar gandharva (7) prasoon joshi (7) radio interview (7) rag jogiya (7) rag lalit (7) rag megh malhar (7) rag pahadi (7) raj kapoor vishesh (7) rupesh rishi (7) sitar recital (7) sumit chakravarthy (7) tribute (7) tripti shakya (7) tujhase naraz nahin zindagi (7) ustad shayaron ko salaam (7) varshik geetmaala (7) vishaal bhardwaj (7) vishaal shekhar (7) vishva deepak tanha (7) wikipedia (7) Asghar Wajahat (6) Faiz Ahmad Faiz (6) Har Geet Kii Ek Kahani Hoti Hai (6) Kabir (6) Mahadevi Verma (6) Meenakshi (6) Meenu (6) Music Article (6) PAWAS RITU KE RAG (6) R.D. Burman (6) SHREYA GHOSAL (6) SINGER (6) SUNITA YADAV (6) Sakshatkar (6) ali sardar zafari (6) anil biswas (6) ashwini bhide deshpande (6) birthday special (6) chaiti (6) choice of sharad tailang (6) festival special (6) film chacha zindabad (6) film godan (6) geet sameeksha (6) ghulam ali (6) gurudutt (6) holi special (6) jaydev (6) johrabai ambalewali (6) kaumudi majumdaar (6) kishori amonkar (6) krishan raj kumar (6) kumar aditya (6) manto (6) meer taki meer (6) mohammad ibrahim zauk (6) muveen (6) muzaffer ali (6) n dutta (6) neeraj (6) nirala (6) pandit omkarnath thakur (6) pankaj malik (6) pankaj udhaas (6) parag sankla (6) r c boral (6) rag bahar (6) rag bhupali (6) rag gaud malhar (6) rag pilu (6) rag yaman kalyan (6) rajesh khanna (6) s.n. tripathi (6) sachindev barman (6) sangam (6) sangeet sameksha (6) shahnai (6) shubha mudgal (6) sunil dutt (6) tarana (6) ujjwal kumar (6) vasant dev (6) vidushi malini rajurkar (6) waah ustad waah (6) yesudas (6) Aparajita Kalyani (5) Bhisham Sahni (5) Chhayawaadi Kavita (5) Gaurav Solanki (5) Gopal Das Neeraj (5) Happy new year (5) Hindi Famous stories (5) Krishna Raj Kumar (5) Pakistani Singer (5) Pittsburgh (5) Priti Sagar (5) Pt. Sudarshan (5) Usha Mangeshkar (5) Ustad Ameer Khan (5) Voice (5) amirbai karnataki (5) arijit singh (5) artist of hind yugm (5) b r chopra (5) bhajan (5) bhimsen joshi (5) birth anniversary (5) chhaya ganguli (5) classical singer (5) dadara (5) darna jhukna (5) dr. n. rajam (5) faiz ahmed faiz (5) film baiju bawara (5) film jhanak jhanak payal baaje (5) film ladaki (5) film ramrajya (5) film tansen (5) g m durrani (5) harivansh ray bachan (5) hemant badaya (5) hindi kavitayen (5) hit pared 2013 (5) hrishikesh mujherjee (5) indivar (5) instrumental music (5) kajri (5) kshiti tiwari (5) kuldeep singh (5) kumar sanu (5) linta manoj (5) lyricist shailendra (5) mahesh bhatt (5) majaz lakhnavi (5) meena kapoor (5) meenu singh (5) meera bhajan (5) mere ye geet yaad rakhna (5) mubarak begum (5) music director roshan (5) nirmala devi (5) online release of book (5) pandit chhannulal mishra (5) pandit narendra sharma (5) pandit rajan mishra (5) parul ghosh (5) playback vaani (5) rabindra sangeet (5) racheta tandon (5) radio playback india (5) rag basant bahar (5) rag bhatiyar (5) rag kamod (5) rag sohani (5) rag todi (5) rajendra krishna (5) rashmi nair (5) reader's choice (5) sajjad hussain (5) salim sulemaan (5) sameeksha (5) shakil badayunni (5) shakti samanta (5) shankar jayakishan (5) shweta pandey (5) singer manna dey (5) slumdog millionaire (5) snehil bhatkar (5) sooraj chand aur sitare (5) subhojit (5) talat azeez (5) talat mehmood (5) usha khanna (5) ustaad vilayat khan (5) ustad abdul kareem khan (5) ustad amjad ali khan (5) ustad shahid parvez (5) vandana gupta (5) video download (5) vishal bhardwaj (5) waah ustaad waah series (5) yeshudas (5) अभिषेक ओझा (5) प्रेमचंद (5) 500th episode of old is gold (4) Alok Shankar (4) FAGUN KE RANG (4) Harihar Jha (4) Ismat Chugtai (4) KAHAKASHAN (4) Krishan Chander (4) Madhavi Ganapule (4) Maithilisharan Gupt (4) Monica Gupta (4) RAG SE ROGOPACHAR (4) S D Barman (4) SANGEET KE SHIKHAR PAR (4) Sangeet Sameekshak (4) Sudha Arora (4) Ustad Raashid Khan (4) Vimochan (4) adnan sami (4) aisa nahi ki aaj mujhe (4) akhiri baar bas (4) amir khusro (4) amol palekar (4) amrita imroz (4) anuj srivastav (4) anvita das guptan (4) aradhna (4) atal bihari vajpeyee (4) awara dil (4) azam khan (4) baiju bawara (4) been (4) begam parvin sultana (4) best songs of 2009 (4) bhupendra singh (4) caravan cine-sangeet ka (4) chale jaana (4) d. harina madhavi (4) deep jagdeep (4) dil padosi hai (4) dipti saxena (4) famous interview (4) film bideshiya (4) film hamdard (4) film malhar (4) film meera (4) film mera saya (4) film sur sangam (4) ghulam mohammad (4) golden globe (4) gulshan bawara (4) gundecha bandhu (4) hafiz hoshiyaarpuri (4) hansraj behal (4) hasarat jaypuri (4) hemlata (4) hind yugm specials (4) hindi film sangeet (4) illayaraja (4) imroz (4) independence day (4) iqbal bano (4) jeet ke geet (4) kahkashaan (4) kalyan jee-anand jee (4) kamaal amrohi (4) kamal sadana (4) kaminey (4) kausar munir (4) kavita podcast (4) khushmizaz mitti (4) kidaar sharma (4) laxmi pyare (4) laxmikant pyarelaal (4) lyricist (4) madhubala (4) main aur mera saaya (4) main nadi (4) mallika pukhraaz (4) manish vandemataram (4) mayuri veena (4) meena kumari (4) mika (4) momin khan momin (4) mughle azam (4) muhammad rafi (4) mukul roy (4) music 2013 (4) music review -year 2009 (4) music video (4) nargis (4) neeraj shridhar (4) new song download (4) new tracks (4) new years special (4) nitin mukesh (4) o muniya (4) o sahibaa (4) p l santoshi (4) palash sen (4) pancham (4) pandit shiv kumar sharma (4) pankaj mukesh (4) paravin sultana (4) piyush mishra (4) pradeep somsundaran (4) pt. ravishankar (4) qateel shifai (4) rachita tandon (4) radhika budhkar (4) radio playback top 25 (4) rag adana (4) rag asavari (4) rag bhairav (4) rag bilawal (4) rag hansdhwani (4) rag miyan ki malhaar (4) rag tilak kamod (4) rag yaman (4) rahuldev barman (4) raja harishchandra (4) rakesh bakshi (4) ram sampat (4) ramdhari singh dinkar (4) rasoolan baai (4) ravivaar subah ki coffee aur kuch durlabh geet (4) rekha bhardwaaj (4) sach bolta hai (4) sadhna sargam (4) sahir ludhiyanavi (4) salim (4) sangeet dilon ka utsav hai (4) sanskaar geet (4) sarangi (4) saraswati devi (4) sartaj geet (4) shabbir kumar (4) shamsha begum (4) sharada (4) shiv hari (4) short film series (4) sitar (4) sridevi (4) subhash ghai (4) subodh sathe (4) sunidhi chauhan (4) suraj jagan (4) surya kant tripathi (4) terrorism (4) third judge (4) thumri (4) top 25 radio playback india (4) tribute to the legand poets (4) udit narayan (4) uma devi (4) ustaad amjad ali khan (4) ustaad bade gulaam ali khaan (4) ustad ali akbar khan (4) ustad faiyaaz khan (4) ustad vilayat khan (4) ustad zakir hussain (4) uttar pradesh (4) v. shantaram (4) vani jayram (4) vijay akela (4) vijaya rajkotiya (4) vishal dadlani (4) vivek srivastava (4) vividh bharti (4) weekly news update (4) yearly review (4) yunus khan (4) 1st judge (3) 2017 (3) AIR FM Gold (3) Bachpan (3) Cartoonist (3) Dharmendra Kumar Singh (3) Divya Prakash (3) Ek Gadhe Ki Vapasi (3) Film - Baiju Bavara (3) HOLI & CHAITI SONGS (3) Hindi recording (3) Kavyanaad (3) LP (3) Lyrics writer (3) Madhavi Ganpule (3) Madhukar Rajasthani (3) Mahavijeta Special (3) Media (3) Nazim Naqvi (3) Nikhil (3) O Henry (3) Pakistani Shayra (3) Pradeep Manoria (3) Pradeep Sharma (3) Pratham Rashmi (3) Rajkumar singh (3) Raksha Bandhan (3) Renu Sinha (3) Shaqil Badayuni (3) Shyam Sakha (3) Sudha Om Dhingra (3) Sumitra Nandan Pant (3) Thumari - Bhairavi (3) Vande Mataram (3) Vimal Chandra Pandey (3) Vivek Asthana (3) aapki baat (3) aarti anklikar (3) abhishek bhola (3) ahmed hussain (3) allama iqbal (3) aman kii asha (3) ameen sayani (3) ameerbai karnataki (3) amir meenai (3) amitabh verma (3) antara chakravarthy (3) anushka manchandani (3) anvita dutt guptan (3) appeal (3) archana (3) artist profile (3) asha (3) awaara (3) awaaz collection (3) babul mora naihar chooto jaaye (3) bade gulam ali khan (3) badhe chalo (3) balamurli balu (3) balika vadhu (3) basant dev (3) begum abida parveen (3) beintehaa pyaar (3) bhent mulaqat (3) bhojpuri (3) bollywood music composer (3) brand new ghazal (3) bulo c rani (3) chaya ganguli (3) chinmayi (3) composers (3) deepawali (3) delhi (3) devika raani (3) diler mehandi (3) dilraj kaur (3) dosti (3) dr. lalmani mishra (3) drut khayal (3) east india company (3) ek mulkaat zaroori hai (3) featured artists of the month (3) film basant bahar (3) film bhakt surdas (3) film goonj uthi shahnai (3) film guddi (3) film kohinoor (3) film sangeet samrat tansen (3) flute (3) flutist (3) gam diye mustakil kitna nazuk hai dil (3) gauhar jaan (3) geet sameksha (3) ghalib ke khat (3) ghulam haider (3) golden era of urdu poetry (3) goonj uthi shahnayi (3) gopal singh nepali (3) guddo dadi (3) happy diwali (3) harshdeep kaur (3) hasan kamaal (3) hasrat mohani (3) hemant (3) hemanti shukla (3) hindi poem (3) hindustani classical (3) hindyugm (3) hiradevi mishra (3) hit pared (3) holi songs (3) husn (3) hussain brothers (3) ibne insha (3) ibrahim ashq (3) indian folk music series (3) indu jain (3) indu puri goswami (3) interview with sujoy chatterjee (3) jaddan bai (3) jai ho (3) jaideep sahani (3) jalaluddin rumi (3) jatin lalit (3) javed ali (3) kabban mirza (3) kalpana (3) kanan devi (3) kathapath (3) kavita krihsnamurthy (3) kavita krishnamoorthy (3) kavvalli (3) kedar sharma (3) khayal (3) khursheed anwar (3) khurshid begam (3) kolkatta (3) krishna pandit (3) kumar (3) kundanlal sahagal (3) lalit pandit (3) listen stories (3) lyricists (3) lyrics (3) madanmohan (3) madhushree (3) mala sinha (3) mani ratnam (3) manish kumar (3) master salim (3) meenu purushotham (3) mehboob khan (3) mera naam jokar (3) mere sarkaar (3) mirza daag dehalvi (3) mithun (3) mohammad hussain (3) mohd irfan (3) mujra songs in bollywood films (3) mumbai (3) music competition (3) music director ramlal (3) musician (3) nakshab jarachabi (3) naqsh lyallpuri (3) new album (3) new season (3) o.p.naiyar (3) oscar (3) padosan (3) pahala sur (3) pandit d v paluskar (3) pandit hari prasad chaurasia (3) pandit rajan sajan mishra (3) pandit ramnarayan (3) pandit ravi kichalu (3) pandit vidyadhar mishra (3) parasmani acahrya (3) patriotic (3) pehla sur (3) podcast on ahmed faraz (3) podcast pustak sameeksha (3) poetry book release (3) preeti sagar (3) pt. hariprasad chaurasiya (3) pustak charcha (3) raag kaafi (3) raaj kapoor (3) rag aabhogi (3) rag basant (3) rag darbari (3) rag gaud sarang (3) rag jayant malhar (3) rag jhinjhoti (3) rag mishra khamaj (3) rag ramdasi malhar (3) rag shyam kalyan (3) ragas & time (3) rahaten saari (3) rahman (3) rajender krishn (3) rajendra kumar (3) ramkali (3) rare images of kishore and other singers (3) ravii (3) recitation (3) remembering meer (3) republic day special (3) reshma (3) runa laila (3) sajeevsarathie (3) sajid wajid (3) sajjad ali (3) salil chaudhary (3) salman khan (3) sangeet hind yugm (3) sanjog (3) santosh anand (3) saptaah kii sangeet surkhiyan (3) sarod recital (3) shammi kapoor (3) shamshad begam (3) shanakar jaikishan (3) shashi kapoor (3) sheela dixit (3) shevan rizvi (3) short film (3) shuddh sarang (3) singer composer (3) singing competition (3) sitamber ke sikander (3) sohail sen (3) songs of october (3) songs that became part of indian freedom struggle (3) soulful melodies (3) special series (3) special songs (3) sreeram emaani (3) sudeep yashraj (3) sufism in india (3) sulakshan pandit (3) suleiman (3) surinder kaur (3) taaza khabar (3) tansen (3) tanveer naqvii (3) telephonic interview (3) tere chehre pe (3) the originals (3) thumri in films (3) total scores (3) tumsa nahi dekha (3) tushar bhatia (3) unreleased song (3) ustad asad ali khan (3) ustad bade ghulam ali khan (3) ustad faiyaz khan (3) ustad rais khan (3) v shantaram (3) vaada (3) vaani jayraam (3) vaijaiyantimala (3) vanaraj bhatiya (3) varanasi (3) violin (3) vishal (3) wahida rahman (3) woh kaun thi (3) yash chopra (3) माधवी चारुदत्ता (3) 2 states (2) 50 years of bhojpuri cinema (2) Aamir khan (2) Abbas Raza Alvi (2) Abhijit Ghoshal (2) Agyeya (2) Ajay Navaria (2) Ajay Yadav (2) Alam Ara (2) Amitabh Meet (2) Anupama Chauhan (2) Arjun Rampal (2) Arun Ye Madhumay Desh Hamara (2) Ati Kya Khandala (2) Australia (2) B. Raghav (2) Balkavi Bairagi (2) Band Darwaza (2) Bhairavi Thumari (2) Bharatendu Harishchandra (2) Bollywood music review (2) CHAITI GEET (2) CHITRAKATHA (2) Chaand Shukla Hadiabadi (2) DELHI BELLY (2) DU-FM (2) Dashte Tanhai mein (2) De de khuda ke naam pe (2) Deepak Baba (2) Deepak Mashal (2) Deepali Aab (2) Dipak Mashal (2) Dr. Kirit Chhaya (2) Film - Sur Sangam (2) Film mugal-e-azam (2) Geetkast (2) Girijesh Kumar (2) Gori Tore Naina Kaajar Bin Kaare (2) Guide (2) Hindi kids poetry (2) Holi aayi re (2) Internet kavi goshthi (2) Jagdish Rawtani (2) Kabuliwala (2) Kahanipath (2) Kala (2) Kamal Kishor Singh (2) Kamalpreet Singh (2) Kavita Verma (2) Kavyagoshthi (2) Krishnamoahan Mishra (2) LP sucess story with top directors (2) Lokarpan (2) Lokpreey Geet (2) MANASI PIMPLEY (2) Madhavi Charudatta (2) Manohar Lele (2) Mantra (2) Mithila (2) Munshi (2) Naseeb Apna Apna (2) Nautanki Saala (2) Neelam Prabha (2) Pandit Rajan & Sajan Mishra (2) Parul (2) Parul Pukhraj (2) Pittsburg (2) Poetry (2) Prafull Patel (2) Premchand Sahajwala (2) Puranchand Wadali (2) Puraskaar (2) Purushottam Pandey (2) Pyarelal Wadali (2) RISHI S BALAJI (2) Rag - Adana (2) Rag - Bhupali (2) Rag - Desh (2) Rag - Kafi (2) Rag - Khamaj (2) Rag - Malkauns (2) Rag - Pilu (2) Rag - Puriya Dhanashri (2) Rag - Tilang (2) Rag Khamaaj (2) Rag Marubihag (2) Raja (2) Rajeev Ranjan Prasad (2) Rajkumar Rao (2) Rakhi (2) Ramchandra Bhave (2) Rashmi Ravija (2) Rasoolan Bai (2) Salil Varma (2) Sangeetkaar (2) Saraswati Prasad (2) Satish Vammi (2) Sawal-jawab (2) Seema Sachdev (2) Seema Singhal (2) Shahnai Recital (2) Sharad Joshi (2) Sharda Arora (2) Shikha Varshney (2) Shishir Krishna Sharma (2) Srikant Mishra 'Kant' (2) Sujoy Chaiterji (2) Suman Patil (2) Sumedha (2) Suresh Vadkar (2) Sydney (2) Taal - Dadara (2) Tulsidas (2) Tushar Joshi (2) Ustad Abdul Karim Khan (2) Ustad NIsar Husain Khan (2) VOI (2) Vikash Kumar (2) Vishnu Bairagi (2) Vishnu Prabhakar (2) Web Radio (2) aag (2) aalam aara (2) aalha (2) aap kyon roye (2) abhi to main jaavan hoon (2) abis rizavi (2) about india (2) about manna dey (2) abraar alwi (2) acharya sajiv salil verma (2) achchhan bai (2) acting (2) actor (2) adharshila films (2) aggay (2) ak deepesh (2) akshay kumar (2) alama iqbaal (2) album hawa hawa (2) ali zafar (2) alia bhatt (2) all india radio (2) altaf raja (2) ameer khusro (2) amir khusaro (2) anand (2) anand milind (2) andheri raat ka sooraj (2) anmol ghadi (2) anpadh (2) antara chakravarthi (2) anup jalota (2) anupama (2) anuraag kashyap (2) anuradha (2) anuroop (2) anushka sharma (2) anvita dutt (2) arafat mehmood (2) arijeet singh (2) arpita (2) arshna singh (2) arun kumar (2) arvind tiwari (2) arzoo laknawi (2) asaam folk music (2) asha birthday (2) ashok pandey (2) augest ke ashvarohi geet (2) baal udhaan (2) baarish (2) baba bulle shah (2) baba nagarjun (2) babul (2) bachchan singh (2) bade ramdas (2) bageshri (2) balraj sahani (2) bandini (2) bappa lahiri (2) bappi lahri (2) baramasa (2) basant prakash (2) basu bhattacharya (2) beat of indian youth (2) bees saal baad (2) begam akhtar (2) begum parveen sultana (2) beintehaa (2) benny dayal (2) bharat ratn (2) bharateey gyanpeeth (2) bhatiyar (2) bhikhari thakur (2) bhopal (2) bhupendra-mitali (2) biddu (2) bikram ghosh (2) billu barber (2) blue (2) bollywood (2) bollywood dairies (2) bollywood top 10 2017 (2) bombay ka babu (2) bombay talkies (2) bulle shah (2) c a t cat (2) c. ramchandra (2) chaha tha ek shaksh ko jaane kahan chala gaya.. (2) chaitanya bhatt (2) chaiti songs (2) chal ri sajani (2) chaliya (2) chandan sa badan chanchal chitwan (2) chandidas (2) chandrakauns (2) chaturang (2) chhalla (2) chhath geet (2) chitchor (2) cochin (2) complete boigraphy (2) concert (2) cricket world cup 2011 theme song (2) d.n. madhok (2) daag (2) danish iqbal (2) dastak (2) dattaram (2) dedh ishkiya (2) delhi 6 (2) deshi (2) dev kohli (2) devotional music (2) dhamar (2) dhaniraam (2) dhaniram (2) dharmendra (2) dhoom 3 (2) dhruvapad (2) dil aaj shayar hai gam aaj nagma hai (2) dil hi to hai (2) dilli 6 (2) dilruba (2) dipali tiwari (2) do biigha zameen (2) dr. kamala shankar (2) dr. soma ghosh (2) dr.mukesh garg (2) durlabh geeton ki duniya (2) dutta ram (2) ek charcha sangya tandon ke saath (2) ek dhakka do (2) ek manzil raahi do (2) ek parichay (2) ek raat men (2) euphoria (2) evening ragas (2) faiyaz haashmi (2) fareeda khanum (2) farhaan akhtar (2) farhan akhter (2) farhat shazad (2) farida khannum (2) film bandini (2) film bazar (2) film chashmebaddoor (2) film chitralekha (2) film dekh kabira roya (2) film dhool ka phool (2) film dhoop chhano 1935 (2) film guide (2) film hum dono (2) film kismat (2) film kshudhit pashan (2) film mugal-e-aazam (2) film narasi bhagat (2) film naubahar (2) film personalities (2) film prempatra (2) film roar - tigers of sundarban (2) film sangam (2) film sanjog (2) film sardari begam (2) film sehra (2) film shaq (2) film silsila (2) film songs based on rabindra sangeet (2) film songs of 2008 (2) filmfare report (2) filmi chakra (2) flute recital (2) folk song (2) gaman (2) gangubai hangal (2) gazal (2) geet (2) geet chaturvedi (2) geet gaaya patharon ne (2) ghajini (2) ghalib asad bhopali (2) ghatam (2) ghazal collections of begum akhtar (2) ghazal singer composer (2) go green (2) govind nihalani (2) grammy awards (2) greatest flute player (2) guitar (2) gulzaar birthday special (2) gumraah (2) gyaan dutt (2) gyandutt (2) habib wali mohammed (2) hafiz jalandhari (2) hai apna dil to awaara na jaane kis pe aayega (2) haqiqat (2) harindranath chattopadhyay (2) harmandir singh hamraaz (2) hasan jahangir (2) haule haule (2) helen (2) highway (2) hind yugm video (2) hind-yugm choices (2) hindi bhavan (2) hori folk songs (2) hricha mukherjee (2) hum bekhudi men tumko pukare chale gaye (2) ila arun (2) ina meena dika (2) ineterview (2) inse miliye (2) interview with kishore kumar (2) interview with rohan kapoor (2) iqubal bano (2) ismat chugtayi (2) j m soren (2) jaane tu ya jaane na (2) jab se mili tose akhiyan jiyara dole re (2) jagdeep singh (2) jagjeet singh (2) jagjit kaur (2) jagmohan bakshi (2) janmashthmi (2) javed badayuni (2) jeena yahan marna yahan (2) jeet ganguli (2) jeet ka junoon (2) jigar muradabaadi (2) jise tu kabool kar le wo ada kahan se laaon (2) jo chala gaya use bhool jaa (2) jodha akbar (2) josh (2) josh malihabadi (2) joy kumar (2) july ke jadugar (2) junaid warsi (2) k c dey (2) k. aasif (2) k.c. dey (2) kaanchi (2) kabir by abida (2) kagaz ke phool (2) kaif bhopali (2) kajari (2) kalam aaj unki jai bol (2) kalyanj anand ji (2) kamal dasgupta (2) kanika kapoor (2) kanu roy (2) karaoke track (2) karthik (2) kashmir (2) kashmir ki kali (2) kavita seth (2) kavitanjali (2) kavitayen (2) khuda ke liye (2) khwaza ahmed abbas (2) khyyam (2) kismat (2) kitaab (2) kohinoor (2) kohra (2) krishmamohan mishra (2) krishn dayal (2) kumaar (2) kumaar aditya (2) kumar gandharv (2) laayi hayaat aaye (2) lakshmi shankar (2) lakshmikaant pyarelal (2) lambi judai (2) lata mangeshkar special (2) lata sings ghalib (2) laxmi (2) leela naidu (2) leena chandavarkar (2) lengendary actress (2) letters of ghalib (2) lok geet (2) lokgeet (2) london dreams (2) love aajakal (2) m m kreem (2) m.s. shubhlakshmi (2) madhavi bandhopadhyay (2) madhu rani (2) mahalakshmi ayyar (2) mahendra bhatnagar (2) mahiya debut song. song 21 (2) makhdoom muhiuddin (2) malvika kanan (2) manhar (2) marasim (2) master gulam haidar (2) maya govind (2) meera (2) meet brothers anjaan (2) mehandi hasan (2) mehboob (2) mehfil-e-kahkashan (2) melody (2) memories (2) mera kuch saman (2) meri duniya hai maa (2) merry christmas (2) micheal jackson (2) microstory (2) mirza galib (2) mirzapur (2) mohammad rafi sauda (2) mohan veena (2) mohinder kumar (2) moinuddin aulliya (2) moinuddin chisti (2) monika hathila (2) monty sharma (2) morning ragas (2) mother india (2) motilal (2) mr and mrs 55 (2) muhammad husain and ahamad husain (2) mujra (2) mukhde pe gesu aa gaye aadhe idhar aadhe udhar (2) multani (2) music director n. dutta (2) music today (2) music video of the month (2) my name is khan (2) n v krishnan (2) naag (2) naagin (2) nadeem shrawan (2) nagarjun (2) nagin (2) nakkara (2) nanda (2) nandini (2) naqsh fariyaadi hai (2) navlekhan award (2) naya gyanoday (2) naziya hasan (2) neelesh mishra (2) neeraj guru (2) neha bhasin (2) nepali sarangi (2) new composer ghazal (2) new movie (2) new series on awaaz (2) new theatars (2) new video (2) new york (2) nigaahon ke saaye (2) nishant akshar (2) nitin dubey (2) non filmy ghazals (2) noor dewasi (2) nyay sharma (2) official trailor (2) oh re taal mile nadi ke jal men (2) old is gold special (2) old is gold weekly special (2) online (2) online kavi sammelan (2) padmini kolhapuri (2) pahli ghazal (2) pakistani ghazal singer (2) pamela chopra (2) pandit bheemsen joshi (2) pandit channu lal mishra (2) pandit d.v. paluskar (2) pandit govind ram (2) pandit nikhil benerjee (2) pandit raghunath seth (2) pandit rajan and sajan mishra (2) pandit sreekumar misra (2) pandit vinayak rao patvardhan (2) pankaj awasthi (2) parasmani (2) parichay (2) parveen sultana (2) perub (2) play fresh song (2) playback india vaani (2) poems for schools (2) poets of hind yugm (2) poll (2) prabha aatre (2) pradeep pathak (2) prakash mehra (2) pritam chakravarthy (2) prithviraj kapur (2) priya (2) pt. ajay chakravarti (2) pt. jasraj (2) pt. omkarnath thakur (2) pt. shrikumar mishra (2) pune (2) purab aur paschim (2) purane tarane (2) pyarelaal (2) pyasa (2) queen (2) r.c. boral (2) raag bageshri (2) raag basant bahaar (2) raag bhairav (2) raag bhairavi (2) raag chhayanat (2) raag gaud malhar (2) raag jaijaivanti (2) raag miyan ki malhar (2) raag pahadi (2) raag shankara (2) raamlaal (2) rabbi shergil (2) radio (2) radio playback artists (2) radio playback hit pared (2) radio sabrang (2) rag - bhairavi (2) rag adaana (2) rag bihag (2) rag charukeshi (2) rag chhayanat (2) rag des malhar (2) rag desi (2) rag hamir (2) rag jaijaivanti (2) rag jayjayvanti (2) rag jog (2) rag kafi hori (2) rag kalyan (2) rag kalyan or yaman (2) rag kirwani (2) rag marava (2) rag marawa (2) rag maru bihag (2) rag multani (2) rag nand (2) rag paraj (2) rag puriya dhanashri (2) rag ramkali (2) rag shuddh sarang (2) rag sohni (2) rag sur malhar (2) rag tilang (2) raga based film songs (2) ragini (2) ragmala song (2) raja hasan (2) rajasthani folk (2) rajnigandha (2) rajshree films (2) rakesh anand bakshi (2) rakesh khandelwal (2) ramakant and umakant gundecha (2) raman mahadevan (2) ramgopal verma (2) ramlakshman (2) rang malhar ke (2) rare ghazals (2) rare love songs of geeta dutt (2) rashtrakavi (2) rasulan bai (2) re man sur men gaa (2) rekha (2) rekha bhardwaj (2) richa sharma (2) rishi kapoor (2) rock on (2) roshan aara begum (2) rudra (2) s p balasubramanium (2) s. janaki (2) s. n. tripathi (2) s.d. barman (2) saadgi (2) sabita banerjee (2) sachin jigar (2) sachiv dev burman (2) sadhana (2) sagar (2) sagar patel (2) sajeev saarthie (2) salil chowdhury (2) salma aaga (2) salute to the martyr (2) sameer lal (2) sangeet samraat taansen (2) sangeeta shankar (2) sanjay leela bansali (2) sanjeev abhyankar (2) saptaah kii surkhiyan (2) saraswati kumar deepak (2) saraswati rane (2) sargam (2) sarod (2) sarveshwar dayal saxena (2) saturday specail (2) satyajit baroh (2) sawan kii ghata (2) school days (2) scores so far (2) season # 02 (2) seema gupta (2) shaam se aankh men (2) shabdon men sansaar (2) shafakat amanat ali khan (2) shaharyaar (2) shahida parveen (2) shahjahan (2) shahrukh khan (2) shail hada (2) shammi (2) shankar hussain (2) shankarrao vyas (2) shantanu moitra (2) shanti mathur (2) shashikala (2) shaukat ali (2) shilpa rao (2) shobha gurtu (2) shokh nazar kii bijiliyan (2) shola aur shabnam (2) shradha bhilave (2) shyaam sunder (2) shyam benegal (2) singer rajkumari (2) singer sudha malhotra (2) snake films bollywood (2) song from UK (2) songs (2) songs of july (2) songs of kishore kumar for amitabh bachhan (2) songs of mukesh (2) songs of o p nayyar (2) sonik omi (2) special editions (2) special feature (2) srividya kasturi (2) stage shows (2) star voice of india (2) story book vimochan (2) story collection (2) story to play (2) subhojet (2) success mantra (2) sudershan fakir (2) sudhir fadke (2) sufi song (2) sujata (2) sujoi home (2) sunday ke sunday (2) suprabha sarkar (2) suraiya (2) surayya (2) surbahar (2) sushma shreshth (2) swami ramanand (2) swargoshthi 253 (2) taal se taal mila (2) tahira syed (2) talaash (2) tanvi shah (2) tapas relia (2) tappa (2) tara balakrishnan (2) tarannum malik (2) taza nazm (2) teentaal (2) teental (2) teesari kasam (2) tere sur aur mere geet (2) thandi hawa kaali ghata aa hi gayi jhoom ke (2) the return of alam aara (2) thumari bhairavi (2) tim tim tim taaron ke deep jale (2) timir baran (2) title track (2) tochi raina (2) top 10 hind films till 2000 (2) top 10 songs of year 2008 (2) top 20 songs of 2012 (2) tu rubaru (2) tulsi kumar (2) tum kahan ho (2) tum kya jaano tumhari yaad men ham kitna roye (2) udta parinda (2) unnikrishnan k b (2) uper gagan vishaal (2) upkaar (2) usha uthup (2) ustaad shayaar (2) ustad abdul rasheed khan (2) ustad akhtar ali (2) ustad amjad ali khaan (2) ustad ghulam mohamad saaznawaaz (2) ustad gulam mustafa khan (2) ustad sultan khan (2) vanraj bhatia (2) varun dhawan (2) veena sahastabuddhe (2) vichitra veena (2) vidushi n. rajam (2) vijay anand (2) vinay prajapati nazar (2) vinayak rao patvardhan (2) vinod (2) vinod bhardwaj (2) vinod khanna (2) vipin chaudhary (2) vishesh (2) vividh bharati (2) vocal classic singer (2) wake up sid (2) whats your raashi (2) writing articles (2) yaadein (2) yaar badshah yaar dilruba (2) yaas yagana changezi (2) yaman (2) yatindra mishra (2) year 2010 songs (2) zafar gorakhpuri (2) zubeen garg (2) उपेंद्रनाथ अश्क (2) कमलेश्वर (2) गिरिजेश राव (2) घुघूतीबासूती (2) छोटे मियाँ (2) निराला (2) विष्णु प्रभाकर (2) सलिल वर्मा (2) 10 rare songs of gulzaar (1) 100th episode (1) 14 september 2008 (1) 150 th episode (1) 1949 (1) 1956 (1) 1958 (1) 1968 (1) 1982 a love marriage (1) 2008-09 (1) 26 november (1) 2nd october (1) 3 idiots (1) 300 years completed (1) 5 years of radio playback india (1) 50th episode (1) A Service Of Love (1) A Strange Story (1) ABCD (1) ACTOR MODEL & FORMER CRICKETER SAJIL KHANDELWAL (1) AFFAN QURESHI: (1) AIR (1) AIR FM Rainbow (1) AKARSHAN (1) ARR (1) AVM (1) AZEEM NAWAZ RAHI (1) Aadar Jain (1) Aakhen (1) Aakrosh (1) Aam Adami (1) Aaran Chaudhary (1) Aarazu Lakhanavi (1) Aashim Gulati (1) Aashiqui 2 (1) Aawaaz ke vahak (1) Abhinav Shukla (1) Abhishek Kashyap (1) Abhishek Patni (1) Abrar Zahoor (1) Achchan Baai (1) Achchha Bura (1) Adbhut Samvad (1) Adhar (1) Adhatiya (1) Aditya Pathak (1) Agni Samarpan (1) Agnisamadhi (1) Ahan Shetty (1) Ahmed Sagheer Siddiqui (1) Ajat Shatru (1) Ajay Singh Rathaur (1) Ajay pandey "sahaab" (1) Akbar Ke Navaratna (1) Akeli Si (1) Akhiri Tohfa (1) Akshay Rangshahi (1) Akshay mann (1) Alokananda Dasgupta (1) Altaf Fatima (1) Amar Ujala (1) Ami Mishra (1) AmitTiwari (1) Amrit Kumbh Ki Khoj Mein (1) Amritlal Nagar (1) An Astrologer's Day (1) Anand Math (1) Anandam (1) Andhe Jahan ke Andhe Raste (1) Anil Chadda (1) Anil Vishwaas (1) Anokhi Kalakriti (1) Anshuman Jha (1) Anton Chekhov (1) Anubhav Priya (1) Anugoonj (1) Anup manchalwar (1) Anurag Arya (1) Anybody Can Dance (1) Apanapan (1) Apnon Ne Loota (1) Appeal ka Jadoo (1) April 2009 (1) Arjun Gupta (1) Arjun Kapoor (1) Armaan Jain (1) Arsh Sehrawat (1) Asakti Ki Mrigtrishna (1) Asamarth Data (1) Asha Gupta Ashu (1) Ashalata Biswas (1) Ashfaq Ullah Khan (1) Ashish Bisht (1) Ashish Sankrityaayan (1) Ashlil (1) Ashok Bajpai (1) Ashok Bhatia (1) Ashok vajpayee (1) Ashwini Bhide Deshpandey (1) Asit Kumar Mishra (1) Assamese film music (1) Athanni Ka Chor (1) Atma-sangeet (1) Atmaram (1) Audio songs (1) August (1) Aurangzeb (1) Avanish Gautam (1) B.L Nastik (1) BHK (1) BIBO (1) Babu Ki Badli (1) Badchalan (1) Bade Ghar Ki Beti (1) Bahubali 2 The Conclusion (1) Baizzat Bari (1) Bal Mukund Gupta (1) Banka Zamindar (1) Bankim Chandra Chattopadhyay (1) Barish (1) Bechara Bhala Admi (1) Begum Jaan (1) Bekhud (1) Bemel Vivah (1) Benazara (1) Bhagvati Charan Varma (1) Bhagwan Raam (1) Bhakti Kaal (1) Bharat Mata par geet (1) Bharat Vyaas (1) Bhola (1) Bhookh (1) Bhool Bhuliya (1) Bhupendra Kumar (1) Bikharate Rishte (1) Bohni (1) Bollywood Top Songs 2017 (1) Bollywoof music review 2017 (1) Bore (1) Brocheta Espanya (1) Buddhijiviyon Ka Dayitva (1) Butarkhaunki (1) C.I.D (1) CAS studio (1) CHAYAGEET (1) CINE PAHELI MAHAMUKABALA (1) Campus (1) Canberra Radio (1) Chamchasan (1) Chand Paradeshi (1) Chandrashekhar Phanase (1) Channulal Mishra (1) Chappal (1) Char Bete (1) Charles (1) Chatterjee (1) Chaube Ji (1) Cheel (1) Chester Bennington (1) Chetas Pandey (1) Chhannulal (1) Chhipkali Adami (1) Chhota Jadugar (1) Chhote Miyan (1) Chirag Jain (1) Chirag Paswan (1) Chitrangada (1) Chori Ka Arth (1) Chris Cornell (1) Cine Paheli 67 (1) Cine Paheli 75 (1) Cine Paheli 78 (1) Cine Paheli 79 (1) Cine Paheli 80 (1) Cine Paheli 81 (1) Comrade (1) Cycle ki Savari (1) D-lab hyderabaad (1) DDLJ (1) Daadara (1) Daadaraa (1) Dadi Jee Ki Chidiya (1) Dadra (1) Dag Dehalavi (1) Dajyu (1) Dakshin Bharat (1) Daler Mehndi (1) Dard E Disco (1) Dard Ki Mehak (1) Darshan Singh Ashat (1) Darshan do ghanshyam (1) Datta Davajekar (1) Daur saifi (1) David (1) Dawat (1) Deepika Padukon (1) Deputy Collector: Harishankar Parsai (1) Devendra Pathak (1) Devi (1) Dhamaar (1) Dheemi (1) Dhela Patta (1) Dhrupad Rag Bhairavi (1) Digvijay Singh Pariyar (1) Dinesh Mehta (1) Do Hath (1) Doosara Kamra (1) Doosri Shadi (1) Dr Preeti Prakash Prajapati (1) Dr Rekha Vyas (1) Dr. Amar Kumar (1) Dr. M. Balmurali Krishna (1) Dr. Mridul Kirti (1) Dr.Prabha Atre (1) Dum Dum (1) Durga Ka Mandir (1) EK GEET SAU KAHANIYAN 100 (1) EK GEET SAU KAHANIYAN 86 (1) EK GEET SAU KAHANIYAN 93 (1) EK GEET SAU KAHANIYAN 95 (1) EK GEET SAU KAHANIYAN 96 (1) EK GEET SAU KAHANIYAN 98 (1) EK GEET SAU KAHANIYAN 99 (1) EKGEET SAU KAHANIYAN (1) Ek Ashuddh Bevaqoof (1) Ek Gadha Nefa Mein (1) Ek Padhi Likhi Stri (1) Ek Raat (1) Ek Thi Daayan (1) Ek Tokri Bhar Mitti (1) Ek Vichitra Kahani (1) Ekansh Bhardwaj (1) Ekta Agarwal (1) Ektaal (1) Episode 01 (1) Episode 9 (1) F C Mehra (1) FICCI auditorium (1) FIRST AND SECOND MAHAVIJETA (1) Faisala (1) Fariyal (1) Fark (1) Farukh Kaisar (1) Favorite songs (1) Female duet (1) Feri Vala (1) Film - Aapki Seava Men (1) Film - Bajuband (1) Film - Banjarin (1) Film - Bees Sal Baad (1) Film - Bekasoor (1) Film - Bhabhi Ki Chudiyan (1) Film - Bhartrihari (1) Film - Bideshiya (1) Film - Chitralekha (1) Film - Dekh Kabira Roya (1) Film - Devdas (1) Film - Dhool Ka Phool (1) Film - Dil Diya Dard Liya (1) Film - Dil Hi To Hai (1) Film - Dil Ki Rahen (1) Film - Dooj Ka Chand (1) Film - Goonj Uthi Shahnai (1) Film - Jagate Raho (1) Film - Jhanak Jhanak Payal Baje (1) Film - Kalapani (1) Film - Kshudhit Pashan (1) Film - Ladaki (1) Film - Main Nashe Men Hoon (1) Film - Main Suhagan Hoon (1) Film - Malhar (1) Film - Manzil (1) Film - Mugal-e-azam (1) Film - Pakiza (1) Film - Ramrajya (1) Film - Saaj (1) Film - Sangeet Samrat Tansen (1) Film - Sanjog (1) Film - Sautela Bhai (1) Film - Shabab (1) Film - Shaq (1) Film - Sharmili (1) Film - Street Singer (1) Film - Swami (1) Film - Utsav (1) Film -Nai Umar Ki Nai Fasal (1) Film Aarati (1) Film Amar (1) Film Babar (1) Film Bhinna Shadaj (1) Film Dadi Man (1) Film Gaman (1) Film Mother India (1) Film Naubahaar (1) Film Sanskar (1) Film Sant Gyaneshwar (1) Film Seema (1) Film Son Of India (1) Film Surat aur sirat (1) Film Tajmahal (1) Film naya andaz (1) Folk Kajari Songs (1) Folklore (1) Fun Asia (1) Fusion music (1) G S Kohali (1) GAK (1) GUDIA HAMSE ROOTH RAHOGI (1) Gair Mulki Ladki (1) Ganapat vandana (1) Ga