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Monday, January 26, 2009

२७ गीतों ने पार किया समीक्षा के पहले चरण का विशाल समुन्दर

दोस्तों, दूसरे सत्र में प्रकाशित हमारे २७ गीतों ने आज अपनी समीक्षा के पहले चरण का पड़ाव पार कर लिया है. अर्थात् ५ समीक्षकों में से ३ ने अपने अंक दे दिए हैं. इस पहले चरण के बाद सभी गीतों की जो अब तक की स्थिति है उसका ब्यौरा आज हम यहाँ प्रस्तुत करने जा रहे हैं. समीक्षा का दूसरा और अन्तिम चरण अभी जारी है. जिसके बाद हम उदघोषणा करेंगें हमारे टॉप १० गीतों का और उनमें से एक होगा हमारा सरताज गीत. आज हम दिसम्बर के दिग्गज गीतों की, तीनों समीक्षकों की समीक्षाएं और अन्तिम अंक तालिका यहाँ प्रस्तुत करने जा रहे हैं पर उससे पहले नवम्बर के नम्बरदार गीतों की जो तीसरी समीक्षा छूट गई थी, पहले उस पर एक नज़र डाल लें.

तीसरे समीक्षक ने नवम्बर के नम्बरदार गीतों के बारे में कुछ यूँ राय रखी है -

गीत # १९. उड़ता परिंदा
गीत अच्‍छा लिखा गया है । संगीत बढिया है । पर गायकी कमज़ोर लगी । एक और बात । उच्‍चारण दोष सुधारना गायकों के लिए बहुत ज़रूरी है । दीवार को दिवार और ख़त को खत कहा है । जिससे रस-भंग हो जाता है ।
गीत--४, धुन और संगीत संयोजन-४, गायकी और आवाज़-३, ओवारोल प्रस्तुति-४, कुल - १५/२०=७.५/१०.
पहले चरण के कुल अंक - २१/३०.

गीत # २० - गीत-वो बुतख़ाना ये मयख़ाना

गीत, गायकी और संगीत सभी बढिया । कहीं कहीं गायकी कमज़ोर लगी ।
गीत--५, धुन और संगीत संयोजन-५, गायकी और आवाज़-४, ओवारोल प्रस्तुति-५, कुल - १९ /२०=९.५/१०.
पहले चरण के कुल अंक - २५.५/३०.

गीत # २१, माहिया -
गीत बहुत अधिक प्रभावित नही करता.
गीत--४, धुन और संगीत संयोजन-३, गायकी और आवाज़-३, ओवारोल प्रस्तुति-३, कुल - १३/२०=६.५/१०.
पहले चरण के कुल अंक - १८.५ /३०.

गीत # २२, - तू रूबरू
गीत के बोल बहुत बढिया हैं । धुन मिक्सिंग अच्‍छी लगी । कहीं कहीं उच्‍चारण की दिक्क़त यहां भी दिखी । पर कुल मिलाकर एक प्रभावी गीत । गायक में बहुत संभावनाएं हैं । बेहद युवा और आकर्षक स्‍वर ।
गीत--५, धुन और संगीत संयोजन-४, गायकी और आवाज़-४, ओवारोल प्रस्तुति-४, कुल - १७/२०=८.५/१०.
पहले चरण के कुल अंक - २४/३०.

चलिए अब बढ़ते हैं दिसम्बर के दिग्गज गीतों की तरफ़, टिपण्णी किसी एक समीक्षक की दे रहे हैं पर अंक तीनों के अलग अलग दिए जा रहे हैं-

गीत # २३, वन वर्ल्ड -हमारी एक सभ्यता

वन वर्ल्‍ड बहुत अच्‍छा लिखा और कंपोज़ किया गया है । बस एक ही कसर रह गयी है । कहीं कहीं क्‍लेरिटी/स्‍पष्‍टता का अभाव है । यही वजह है कि अगर इबारत ना देखें तो कई जगहों पर आते । काश कि इस गाने में स्‍पष्‍टता का ख्‍याल रखा गया होता तो ये एक बेहतर जनगीत का दरजा हासिल कर सकता था ।
पहले समीक्षक - १९/२०
दूसरे समीक्षक - १४.५/२०.
तीसरे समीक्षक - १९/२०.
कुल अंक - २६.५/३०.

गीत # २४, चाँद का आँगन

इस बार के गीत बोलों के मामले में बहुत आगे हैं। इस गीत के बोल कविता जैसे हैं। ऐसे बोलों को स्वरबद्ध करना बहुत ही मुश्किल काम है। लेकिन कुमार आदित्य ने जैसा संगीत दिया है, उसमें बेहतर संयोजन का आभाव होने बावज़ूद बार-बार सुनने का मन होता है। पूरे गीत में बेसिक धुन ही बजती रहती है, फिर भी संगीत को बार-बार सुनना कानों को नहीं थकाता। कुमार आदित्य की आवाज़ बहुत रूखी है, फिर भी इस गीत पर फब रही है।
पहले समीक्षक - २०/२०
दूसरे समीक्षक - १५/२०.
तीसरे समीक्षक - १८/२०.
कुल अंक - २६.५/३०.

गीत # २५, जिस्म कमाने निकल गया है

इस ग़ज़ल के शे'र कमाल के हैं। नाज़िम नक़वी की जितनी तारीफ़ की जाय वह कम है। आदित्य विक्रम का संगीत बढ़िया है। राहत देता ह, लेकिन गायक वह जान नहीं डाल पाया है, वह ट्रीटमेंट नहीं दे पाया है, जिसकी आवश्यकता इस ग़ज़ल को थी। इस ग़ज़ल को सुनने में वह आनंद नहीं है, जो इसे पढ़ने में आता है।
पहले समीक्षक - २०/२०
दूसरे समीक्षक - १५.५/२०.
तीसरे समीक्षक - १४/२०.
कुल अंक - २४.५/३०.

गीत # २६, मुझे वक्त दे मेरी जिंदगी

इस गीत का सबसे मज़बूत पक्ष इसका संगीत और उसका संयोजन है, लेकिन उस स्तर की गायकी नहीं है। हालाँकि गायिका ने इस गीत का संगीत भी दिया है, उस हिसाब के संगीत का मूड उन्हीं भली-भाँति पता था, शायद रियाज़ की कमी हो। गीतकार ने सम मात्राओं का ध्यान नहीं दिया है, तभी गायिका को 'कि ना रेत' को 'किनारेत' की तरह गाना पड़ा है।
पहले समीक्षक - १८/२०
दूसरे समीक्षक - १७/२०.
तीसरे समीक्षक - १६/२०.
कुल अंक - २५.५/३०.

गीत # २७, जो शजर

यह ग़ज़ल इस महीने की सबसे उम्दा प्रस्तुति है। दौर सैफ़ी के शे'रो का तो कोई जवाब ही नहीं। दिल को छू देने वाले शे'रों को जब रफीक़ शेख़ की आवाज़ मिली है तो ग़ज़ल मुकम्मल बन पड़ी है। इस पर क्या कहना, बस सुनते रहें...
पहले समीक्षक - १६/२०
दूसरे समीक्षक - १७/२०.
तीसरे समीक्षक - २०/२०.
कुल अंक - २६.५/३०.

तो लीजिये, अब जानिए कि पहले चरण के बाद किस किस पायदान पर हैं हमारे दूसरे सत्र के २७ नगीने गीत-

तेरा दीवाना हूँ - २७/३०.
वन वर्ल्ड -हमारी एक सभ्यता - २६.५/३०
जो शजर - २६.५/३०
चाँद का आंगन - २६.५/३०
मुझे वक्त दे मेरी जिंदगी- २५.५/३०
हुस्न - २५.५/३०
खुशमिजाज़ मिटटी - २५/३०.
जीत के गीत - २४.५/३०.
सच बोलता है - २४.५/३०.
जिस्म कमाने निकल गया है - २४.५/३०
संगीत दिलों का उत्सव है - २४/३०.
आवारा दिल - २४/३०.
ओ साहिबा - २४/३०
ऐसा नही - २४/३०.
तू रूबरू - २४/३०
सूरज चाँद और सितारे - २२.५/३०.
चले जाना - २१.५/३०.
तेरे चहरे पे - २१/३०.
उड़ता परिंदा - २१/३०
डरना झुकना - २०.५/३०.
बेइंतेहा प्यार - २०.५/३०.
बढे चलो - २०/३०.
ओ मुनिया - १९.५/३०.
मैं नदी - १९/३०.
माहिया - १८.५/३०
राहतें सारी - १८/३०.
मेरे सरकार - १६.५/३०.


Friday, October 24, 2008

तेरा दीवाना हूँ...मेरा ऐतबार कर...

दूसरे सत्र के सत्रहवें गीत का विश्वव्यापी उदघाटन आज -

अपनी पहली ग़ज़ल "सच बोलता है..." गाकर रफ़ीक शेख ने ग़ज़ल गायन में अपनी पकड़ साबित की थी. आज वो लेकर आए हैं एक ताज़ी नज़्म -"आखिरी बार बस...". यह नज़्म रफ़ीक साहब की आवाज़ का एक नया अंदाज़ लिए हुए है, उनकी अब तक की तमाम ग़ज़लों से अलग इस नज़्म की नज़ाकत को उन्होंने बहुत बखूबी से निभाया है.रफ़ीक साहब की एक और खासियत ये है कि वो हमेशा नए शायरों की रचनाओं को अपनी आवाज़ में सजाते हैं. इस तरह वो हमारे मिशन में मददगार ही साबित हो रहे हैं. उनकी पिछली ग़ज़ल के शायर अज़ीम नवाज़ राही भी किसी ऐसे स्थान पर रहते हैं जहाँ इन्टरनेट आदि की सुविधा उपलब्ध नहीं है, यही कारण है कि हमें अब तक उनकी तस्वीर और अन्य जानकारियाँ उपलब्ध नहीं हो पायी हैं. लेकिन इस बार के रचनाकार मोइन नज़र के विषय में हमारे बहुत से श्रोता पहले से ही परिचित होंगे। मोइन नज़र वही शायर हैं जिनका कलाम 'इतना टूटा हूँ कि छूने से बिखर जाऊँगा, अब अगर और दुआ दोगे तो मर जाऊँगा' गाकर ग़ज़ल गायक गुलाम अली ने दुनिया में अपना परचम फहराया। मोइन नज़र साहब रेलवे में चाकरी करते हैं और फिलहाल मुम्बईवासी हैं। कहते हैं फनकार का काम बोलता है, तो आप भी सुनिए मोईन साहब ने क्या खूब बोल लिखे हैं यहाँ. अपने विचार देकर रफ़ीक शेख और नये शायर मोईन नज़र की हौसलाफजाई अवश्य करें.

नज़्म को सुनने के लिए प्लेयर पर क्लिक करें-



Here comes song no.17 for the season 2. "Akhiri baar bas..." is composed and rendered by Rafique Sheikh, and penned by a new writer Moin Nazar. This sad romantic nazm will surely touch your heart, so hear it and share your thoughts about it. Your valuable comments will help us to improvise.

To listen,please click on the player below -



बोल - Lyrics

आखिरी बार बस, तेरा दीदार कर,
मैं चला जाऊँगा, छोड़कर ये शहर,

अपनी चिलमन से बाहर निकल के ज़रा,
दुनिया वालों से छुप के संभल के ज़रा,
दो कदम आ मेरी सिम्त चल के ज़रा,
बैठ पहलु में मेरे, तू मचल के ज़रा,
तेरा दीवाना हूँ, तेरा दीवाना हूँ,
मेरा ऐतबार कर .....

तेरे जलवे चुरा लूँ, इन निगाहों में आ,
मैं तेरे हुस्न को, भर लूँ बाहों में आ,
साए में ताज के, चांदनी रात में,
दुधिया जिस्म को ले पनाहों में आ,
देख लूँ मैं तुझे, देख लूँ मैं तुझे,
आज भर के नज़र....

फ़िर उसके बाद मुलाकात न होगी शायद,
धड़कते दो दिलों में बात न होगी शायद,
जमीन प्यार की बंज़र मेरे हो जायेगी,
बरसों इन आँखों से बरसात न होगी शायद,
साथ मेरे तू चल, साथ मेरे तू चल,
ये सनम बाम पर...

SONG # 17, SEASON # 02, "AKHIRI BAAR BAS..." OPENED ON 24/10/2008 ON AWAAZ, HIND YUGM.
Music @ Hind Yugm, Where music is a passion

Sunday, October 19, 2008

पहले चरण की दूसरी समीक्षा में कांटे की टक्कर, सितम्बर के सिकंदरों की

सितम्बर के सिकंदर गीत समीक्षा की पहली परीक्षा से गुजर चुके हैं, आईये जानें हमारे दूसरे समीक्षक की क्या राय है इनके बारे में -

पहला गीत खुशमिज़ा़ज मिट्टी

मेरा मानना है कि ये गीत अब तक के सबसे संपूर्ण गीतों में से एक है । इस पर बहस की कोई गुंजाईश ही नहीं है । गायक संगीतकार ने इसके बोलों को बहुत ही संवेदनशीलता के साथ निभाया है । सुबोध साठे को बधाई । गौरव के बोल एक पके हुए गीतकार की कलम से निकले लगते हैं । आवाज़ के सबसे अच्‍छे गीतों में से एक है ये ।

गीत- 5, धुन और संगीत संयोजन—5, गायकी और आवाज़—5, ओवारोल प्रस्तुति—5
कुल अंक 20 / 20 यानी 10 / 10, कुल अंक अब तक (पहली और दूसरी समीक्षा को मिला कर)= 19 /20

दूसरा गीत—राहतें सारी

मुझे लगता है कि इस गाने से किसी भी पक्ष में पूरा न्‍याय नहीं हुआ है । मोहिंदर जी के इस गीत के पहले दो अंतरे अच्‍छे हैं । पर आखिरी दो अंतरे कमजोर लगे । उनमें ‘गेय तत्‍त्‍व’ की कमी नज़र आई । कृष्‍ण राज कुमार ने कोशिश की है कि इस गाने को बहुत ही नाजुक-सा बनाया जाये । पर मुझे लगता है कि इस आग्रह की वजह से गाने के प्रभाव पर बहुत बुरा असर पड़ा है । इस गाने को और चमकाया जा सकता है ।

गीत- 3 धुन और संयोजन- 3 गायकी और आवाज-4 ओवरऑल प्रस्‍तुति- 3
कुल अंक 13 /20 यानी 6.5 / 10, कुल अंक अब तक (पहली और दूसरी समीक्षा को मिला कर)= 11.5 / 20

तीसरा गीत-- ओ मुनिया मेरी गुडिया---

इससे पहले मैं जे एम सोरेन को सुना नहीं था । पर इस गाने को सुनकर मुझे लगा कि वो सही मायनों में रॉक स्‍टार हैं । एक सच्‍चा रॉक स्‍टार सरोकार वाले गीतों की कुशल प्रस्‍तुति करता है । और सोरेन ने यही किया है । एकदम हार्ड म्‍यूजिक के बावजूद इस गाने की संवदेना दबी नहीं है । सजीव का ये गीत उनके बाक़ी गीतों से बेहतर है और एकदम अलग तरह का भी ।

गीत- 5 धुन और संयोजन- 4 गायकी और आवाज़- 4 ओवरॉल प्रस्‍तुति- 5
कुल अंक 18 / 20 यानी 09 / 10, कुल अंक अब तक (पहली और दूसरी समीक्षा को मिला कर)= 17 / 20

चौथा गीत/ग़ज़ल—सच बोलता है

अजीम नवाज़ राही की इस ग़ज़ल के सारे शेर अच्‍छे हैं । एक भी कमज़ोर शेर नहीं है । इसके लिए शायर बधाई का पात्र है । इस ग़ज़ल में इंटरल्‍यूड पर कोरस का प्रयोग अच्‍छा लगा । कुल मिलाकर एक अच्‍छी कंपोज़ीशन और अच्‍छी गायकी ।

रचना- 5 धुन और संयोजन- 4 गायकी और आवाज़- 4 ओवरऑल- 5
कुल अंक 18 / 20 यानी 9 / 10, कुल अंक अब तक (पहली और दूसरी समीक्षा को मिला कर)= 16.5 / 20

चलते चलते -

खुशमिजाज़ मिटटी में दूसरे सप्ताह भी अपनी बढ़त मजबूत रखी है. ओ मुनिया और सच बोलता है भी कसौटी पर खरे उतरे हैं. सितम्बर के सिअकंदेरों की तीसरे और पहले दौर की अन्तिम समीक्षा के साथ हम जल्द ही उपस्थित होंगे.

Friday, October 10, 2008

ऐसा नही कि आज मुझे चाँद चाहिए...

दूसरे सत्र के पन्द्रहवें गीत का विश्वव्यापी उदघाटन आज.

आज आवाज़ पर एक बार फ़िर लौटी है शिवानी सिंह और रुपेश ऋषि की जोड़ी और साथ में हैं गायिका प्रतिष्ठा भी, प्रतिष्ठा की आवाज़ को "पहला सुर" एल्बम की ग़ज़ल "ये ज़रूरी नही" में भी हमारे श्रोताओं ने सुनी थी,

वो एक युगल गीत था ये उनका सोलो है, जिसमें उन्होंने खुल कर अपनी आवाज़ में शिवानी के जज़्बात उभारे हैं और शिल्पी हैं एक बार फ़िर रुपेश ऋषि. संयोग से युग्म के सभी महिला श्रोताओं /पाठकों के लिए आने वाले करवा चौथ का तोहफा बन कर आई है ये ग़ज़ल आज, क्योंकि इस ग़ज़ल में जो भाव व्यक्त किए गए हैं वो शायद हर महिला के मन की आवाज़ है, ऐसा हमें लगता है. हम किस हद तक ठीक हैं ये आप सुन कर फैसला दें.

दरअसल ये ग़ज़ल जब रिकॉर्ड हुई थी उन दिनों प्रतिष्ठा डी.ऐ.वी स्कूल में संगीत की अध्यापिका थी,और आल इंडिया रेडियो में उर्दू ग़ज़ल गाती थी. अब दुर्भाग्यवश उनके विवाह उपरांत उनका कोई संपर्क सूत्र नही हो पाने के कारण हम उनकी तस्वीर को आपके रूबरू नही कर पा रहे हैं, पर इस उभरती हुई गायिका की आवाज़ हमें यकीं है आपके दिल में अपनी विशेष जगह बनाने में अवश्य सफल होगी, तो सुनिए इस ताज़ा प्रस्तुति को और अपनी राय / सुझाव टिप्पणियों के माध्यम से हम तक अवश्य पहुंचायें.


बोल / Lyrics

ऐसा नही की आज मुझे चाँद चाहिए,
मुझको तुम्हारे प्यार में विश्वास चाहिए...

मिल न सको मुझे तुम हकीक़त में गर कभी,
जन्नत में बस तुम्हारा मुझे साथ चाहिए...

न की कभी भी ख्वाहिश, मैंने सितारों की,
ख्वाबों में बस तुम्हारा मुझे दीदार चाहिए...

जाओगे दफ्न करने जब मेरे जिस्म को,
बस आखिरी दो पल का मुझे साथ चाहिए...

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SONG # 15, SEASON # 02, "AISA NAHI..." OPENED ON AWAAZ, HIND YUGM ON 10/10/2008.
Music @ Hind Yugm, Where music is a passion.

Tuesday, October 7, 2008

जानिए ज़ोरबा के माने पेरुब से

सूफी रॉक संगीत के नए पहरुए हैं लुधिआना के पेरुब और उनके जोडीदार जोगी सुरेंदर और अमन दीप कौशल. "ज़ोरबा" ग्रुप के इन पंजाबी मुंडों का नया गीत "डरना झुकना" इन दिनों आवाज़ पर धूम मचा रहा है. आवाज़ के लिए अर्चना शर्मा ने की उनसे एक ख़ास मुलकात. पेश है उसी संवाद के ये अंश -



पेरुब, संगीत को जीवन मार्ग बनाने की प्रेरणा किससे मिली आपको ?

संगीत की प्रेरणा मुझे मेरी माता जी ने और मेरे बड़े भाइयों ने दी ......

कितना समय हो गया आपको संगीत को अपना कैरियर बनाये हुए ?

इस क्षेत्र मैं मुझे तकरीबन आठ साल से जयादा हो गए हैं ...........

आपके गुरु कौन रहे ? मतलब संगीत की तालीम आपने किससे ली ?

गुरु तो बहुत हैं संगीत के .... मगर संगीत की सही शिक्षा मैंने प्रोफ. मनमोहन सिंह जी से ...प्रोफ. श्री. शान्ति लाल जी से और संत मोहन सिंह, सुखदेव सिंह नामधारी जी से प्राप्त की .....

ज़ोरबा का क्या अर्थ है पेरुब ?

ज़ोरबा का अर्थ है जो नाच सके बिना ताल के, जो गा सके बिना साज़ के, जो संसार के हर रंग में रहते हुए, संसार से, जिसको अलग हो जाना है बिना कुछ किए....हर आदमी ज़ोरबा ही है " who is going to be buddha, is zorba " इस से जयादा कहना मुश्किल होगा .....वैसे ज़ोरबा हम ने आपने बैंड ग्रुप का नाम रखा है ...जोगी और मैं दोनों एक साथ स्कूल मैं ही पड़ते थे .जोगी पहले से ही गाता था. जोगी अमन और मैं एक ही गुरुजनों से सीखे हुए हैं . यूँ कहें की हम गुरुभाई है . जोगी अमन और मैं बचपन के ही दोस्त हैं और हम तीनो को बचपन से ही संगीत मैं रुची थी और अब यही profession बन गया है हम सबका.

आपने अब तक के सफर के बारे में एक संक्षित सा ब्यौरा दीजिये पेरुब ?

मेरा जन्म १९८१ मैं लुधिअना हुआ और बचपन की शिक्षा आपने माता पिता से दादी से और शहर के स्कूल से ही प्राप्त की, बाद मैं प्राइवेट कॉलेज मैं बी.बी.ए. से ड्राप आउट हूँ :-).........स्कूल मैं रहते ही संगीत से बहुत लगाव था...संगीत का सफर भी स्कूल से शुरू हो गया था .......पिता जी के देहान्त के बाद काफी कुछ बदल गया और फिर मुझे आपने पैरों पर जल्दी ही खड़ा होना था..........सो तब से लेकर आज तक struggle चल रही है.......

आपका झुकाव सूफियाना संगीत की तरफ ज्यादा है, कोई ख़ास वजह ?

वैसे तो हर किस्म का संगीत सुनना पसंद करता हूँ : जहाँ तक सूफी म्यूजिक का सवाल है, इस का कारण बताना मुश्किल है : बस यही कहूँगा की मेरे दिल को जल्दी छू लेता है...............

पहला सुर से पहले क्या आपकी कोई और भी एल्बम आयी है ?

पहला सुर एल्बम से पहले मैंने ९ धार्मिक एल्बमस (हिन्दी,पंजाबी दोनों) और २ documentries फिल्मों (जैन धरम पर आधारित) और ११ पंजाबी गानों में संगीत दिया ..........

कैसा रहा हिंद युग्म के साथ काम करने का अनुभव ?

हिन्दयुग्म के साथ काम करके मुझे बहुत अच्छा लगा, मैं चाहता हूँ की जो भी वह सब प्रयास कर रहे है, उसमे वह सफल हों

भविष्य की योजनायें क्या है ?

आने वाले सालों मैं मेरी यही कोशिश है की अच्छा संगीत लोगो तक पंहुचा सकूँ जो दिल को सुकून दे सके .............


संगीत के अलाव और क्या क्या करना पसंद है ?

संगीत के अलावा मुझे घूमने और नई जगहों पर जाना पसंद है , हाँ कुछ पुस्तकें पढने का भी शौंक है..........

अपने श्रोताओं और चाहने वालों के नाम कोई संदेश ?

बस यही कहूँगा की अच्छा सुने अच्छा गायें और अच्छा सुनायें ..

पेरुब और उनकी टीम को हिंद युग्म की तरफ़ से भी बहुत सी शुभकामनायें. आईये एक बार फ़िर से आनंद लें उनके इस नये गीत "डरना झुकना छोड़ दे" का (गीत को सुनने के लिए नीचे के पोस्टर पर क्लिक करें)
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Friday, October 3, 2008

है मुमकिन वो करना तुझे, जो नामुमकिन दुनिया कहे...

दूसरे सत्र के चौदहवें गीत का विश्वव्यापी उदघाटन आज.

"पहला सुर" एल्बम में अपने सूफी गीत "मुझे दर्द दे" से धूम मचाने वाले पंजाबी मुंडे एक बार फ़िर लौटे हैं नए सत्र में, एक नए गीत "डरना झुकना छोड़ दे" लेकर. पेरुब के नेतृत्व में जोगी सुरेंदर और अमनदीप कौशल ने गाया है इसे और सजीव सारथी ने लिखे हैं बोल इस नए गीत के. इस गीत के मध्यम से पेरुब एक संदेश देना चाहते हैं आज के युवा वर्ग को उन्हें उम्मीद है कि उनका यह प्रयास हमारे श्रोताओं को पसंद आएगा.

The team of sufiyaana singers from ludhiana is back with a bang, Perub composed this new song "darna jhukna" penned by Sajeev Sarathie and sung by Jogi Surender and Aman Deep Kaushal along with Perub.This song has a strong massage for new generation of India, that is way Perub wants this song to be opened a day after Gandhi jayanti. So here we present the song for all our audience. please spare a few moment to give your valuable comment/suggestion about this brand new song

तो लीजिये प्रस्तुत है ये नया गीत, जो दो संस्करण में है. पहला है क्लब मिक्स और दूसरा है पंजाबी तड़का (जिसमें ढोलक और तबला का अतिरिक्त प्रभाव दिया गया है). पेरुब और उनकी टीम को आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतज़ार रहेगा.

डरना झुकना ....( क्लब मिक्स )



डरना झुकना... ( पंजाबी तड़का )





गीत के बोल - lyrics

डरना झुकना छोड़ दे,
सब जंजीरें तोड़ दे,
आ चल अपने इस जोश में,
अब तूफानों को मोड़ दें...
यारा वे.....

जुल्म भला अब क्यों सहें,
चुप बे - वजहा क्यों रहें,
आवाज़ उठा अब बात कर,
आँखों में ऑंखें डाल कर

यारा वे...

खोल दरीचे सोच के,
राहें नई चुन खोज के,
सब झूठे आडम्बर हटा,
तू भेद भाव सारे मिटा,

यारा वे...

ताक़त अपनी जान ले,
ख़ुद को तू पहचान ले,
है मुमकिन वो करना तुझे,
जो नामुमकिन दुनिया कहे,

यारा वे...

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डरना झुकना ....( क्लब मिक्स )




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डरना झुकना... ( पंजाबी तड़का )




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SONG # 14, SEASON # 02, "DARNA JHUKNA CHOD DE" OPENED ON AWAAZ HIND YUGM ON 03/10/2008.
Music @ Hind Yugm, Where music is a passion.

Friday, September 19, 2008

ओ मुनिया मेरी गुड़िया...जरा संभल के चल...

दूसरे सत्र के बारहवें गीत का विश्वव्यापी उदघाटन आज.

आज जो गीत हम लेकर उपस्थित हैं वो अब तक के सभी गीतों से कुछ तेज़ रफ़्तार का है, दरअसल "पहला सुर" एल्बम में अपने सम्मोहन से सबको सम्मोहित करने वाले जे एम् सोरेन ने इस गीत के साथ दूसरे सत्र में पहली बार अपनी उपस्थिति दर्ज करायी है. सम्मोहन को सुनने के बाद एक फ़िल्म निर्देशक 'यश' ने युग्म से संपर्क किया, वो सोरेन से अपनी एक फ़िल्म का शीर्षक गीत बनवाना चाहते थे, शीर्षक था- "पापा अंकल". कुछ हद तक फ़िल्म की कहानी का भाव है गीत में.
आजकल इसके एक डेमो विडीयो पर काम जारी है. यश जी इस गीत को आवाज़ पर लाकर जानना चाहते हैं कि उनकी फ़िल्म के इस शीर्षक गीत में कितना दम है.गीतकार हैं सजीव सारथी और गीत को आवाज़ दी है ख़ुद जे एम् सोरेन ने, गीत पूरी टीम की उपस्थिति में कोच्ची के CAS स्टूडियो में रिकॉर्ड हुआ है, बेस गीटार पर है लिओन और मिक्सिंग का काम संभाला है रोबिन ने. तो प्रस्तुत है हमारे गुणी संगीत प्रेमी साथियों के मधुर कानों के लिए ये ताज़ातरीन गीत "ओ मुनिया"...अपनी राय हमें अवश्य बतायें.

गीत को सुनने के लिए नीचे के प्लेयर पर क्लिक करें -



J M Soren (sammohan fame from pahla sur) is back with his first entry in this new season. This is what he wants to say about the song -
"Hi folks, after a long time Sajeev has again put me in limelight. A good experience though, coz' for this song we were together. Believe me !! I had to postpone my leaves as I was going to Lucknow for my vacation. Man it was an experience. A small project nonetheless it was really a fun. Actually when Sajeev gave me this project i was happy as it was a different type of song for me. Generally i am into romantic. This was a dance number. It took me nearly a month to finish the minus track. Had to change it nearly 10 to 15 times.

Sometimes adding this sometimes deleting something. Actually composing never takes time but arrangement really eats up your HOURS. The dummy which i had made in was approved over the phone, but as i was finalising it , Sajeev could not approve it, even though i was sure. But when we mixed it in the studio before the " voice over " it turned out to be something different. To be more honest I really want to thank Sajeev for the final picture of the song. In fact the length was shorter. It wansn't spiced up but the incessant coaxing of Sajeev made me give the song a new dimension. Actually many of the other things we did in the CAC Studio were the ideas of Sajeev. Other things came out all by itself. Thanx to Leons for his walking BASS . We can't undermine the talent of Mr. Robin whose brains while mixing gives a song a new definition. I have tried to sing well---- actually this time i did not become PITCH-OUT. Hats of Soren -n- Sajeev."
Do let us know what is your opinion about the song.

To listen to the song please click on the player below -



Other Credits-

Lyrics --- Sajeev Sarathie
Singer --- J.M. Soren
Composer/ Arranger J.M.Soren
Rythm Guitarist. J.M.Soren
Bassist -- Leons
Sound Engineer -- Robin
Studio. -- CAC Digital Studio.

गीत के बोल ( lyrics )

ओ मुनिया मेरी गुडिया
ज़रा संभल के चल
ये दुनिया बड़ी ही शातिर है
तू भी ख़ुद को ज़रा बदल
ओ मुनिया

तू न जाने कदम कदम पर धोखे हैं हर राह में,
छल जाते है सपने अक्सर सपनों की इस चाह में,
काटों से अब बचके निकलना होगा तुझको नन्ही कली,
थाम के उंगली "पापा अंकल" की तू चलना भोली परी.
ओ मुनिया...

मोड़ हजारों आयेंगे जो सब्र तेरा आजमायेंगे,
ऐसे सितम भी होंगे जो दिल को दुख भी जायेंगे,
तूफानों से लड़ना होगा लेकर ये विश्वास तुझे,
'पापा अंकल" साथ हैं तेरे छूना है आकाश तुझे.
ओ मुनिया....

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चित्र में सोरेन गीत को गाते हुए ( उपर ), CAS स्टूडियो में रोबिन और लिओन के साथ सजीव सारथी ( नीचे )

SONG # 12, SEASON # 02, "O MUNIYA" OPENED ON AWAAZ HIND YUGM ON 19/09/2008
Music @ Hind Yugm, Where music is a passion


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Friday, August 29, 2008

इस बार, नज़रों के वार, आर या पार...

दूसरे सत्र के नवें गीत का विश्वव्यापी उदघाटन आज.

इन्टरनेट गठजोड़ का एक और ताज़ा उदाहरण है ये नया गीत, IIT खड़कपुर के छात्र ( आजकल पुणे में कार्यरत ), और हिंद युग्म के बेहद मशहूर कवि विश्व दीपक 'तनहा' ने अपना लिखा गीत भेजा, युग्म के सबसे युवा संगीतकार सुभोजित को, और जब गीत को आवाज़ दी दूर ब्रिस्टल (UK) में बैठे गायक बिस्वजीत ने, तो बना, सत्र का नवां गीत. "आवारा दिल", सुभोजित के ये दूसरा गीत है, वहीँ "जीत के गीत" गाते, बिस्वजीत अब युग्म के चेहेते गायक बन चुके हैं, तनहा का ये पहला गीत है, इस आयोजन में, जिनका कहना है -

"प्रेयसी सब को प्रिय होती है,परंतु जिसकी प्रेयसी हो हीं नहीं,उसके लिए तो प्रेयसी कुछ और हीं हो जाती है। यह गीत मुझ जैसे हीं एक अनजान प्रेमी की कहानी है,जो जानता नहीं कि उसकी प्रेयसी कहाँ है, लेकिन यह जानता है कि अगर उसकी प्रेयसी कहीं है तो वो उसका आग्रह अस्वीकार नहीं कर सकती। "सरकार" अपनी प्रजा का बुरा तो नहीं चाहेगी ना ;),वैसे भी वह दूर कैसे जा सकेगी, जबकि उस प्रेमी का हर कदम अपनी प्रेयसी की हीं ओर है।"

तो दोस्तों, इस दुआ के साथ की कि हमारे मित्र "तन्हा", की तनहायी जल्दी ही दूर हो, सुनते हैं ये ताज़ा तरीन गीत. आप अपने विचार टिप्पणियों के मध्यम से हम तक अवश्य पहुंचायें.

गीत को सुनने के लिए नीचे के प्लेयर पर क्लिक करें -




Biswajith this time sung for the youngest composer of our Awaaz team, Subhojit, while the lyrics, penned for the first time by Vishwa Deepak 'Tanha', a well known poet from Hind Yugm.
This is what subhojit said about the song "This song, I composed is my best till date, according to me. Firstly, the lyrics was very good and romantic. Secondly, the music was made many times but ultimately this one was selected. Lastly Biswajit sung this song very well. Hope everyone will like this song".
Biswajith too hope the same here "When i heard Mere sarkaar for the first time, I fell in love with it. What really amazed me is the simplicity yet deep feelings the lyrics carries, hats off to Vishwa Deepakji. About the music of Shubhojit, I have only word - "Rocking".While singing this song, I had to really live the character and then it was easy for me to perform. I really enjoyed singing this beautiful song. It's always interesting to feel romantic and sing a song full of love and passion"
We hope our audience will also enjoy listening to this one, feel free to convey your thoughts to us through your valuable comments.

Please click on the player to listen to this brand new song -




सुभोजेतबिस्वजीत

Lyrics - गीत के बोल -

इस बार
मेरे सरकार
चलो तुम जिधर
चलूँ मैं यार।
इस बार
तेरी झंकार
सुनूँ मैं जिधर
मुड़ूँ मैं यार।

इस बार
नज़रों के वार,
आर या पार।

तुम ना जानो , इस शहर में
विश्व दीपक तन्हा


कोई भी तुम-सी नहीं,
बोल कर सब, कुछ ना कहे जो,
ऐसी कोई गुम-सी नहीं;
एक गज़ल है ये बदन तेरा,
तेरे रूख से जागे सवेरा।

मैं बेकरार , हूँ बेकरार,
इस बार
नज़रों के वार,
आर या पार।

जो कहे तू, तेरी खातिर,
सारी दुनिया छोड़ दूँ,
घर करूँ मैं, तेरे दिल में,
मेरे घर को तोड़ हीं दूँ;
होगा तब हीं ये प्यार जन्म,
एक रूह जो बन जाए हम।

मैं बेकरार , हूँ बेकरार,
इस बार
नज़रों के वार,
आर या पार।

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SONG # 09, SEASON # 02, "MERE SARKAAR", OPENED ON 29/08/2008, AWAAZ, HIND YUGM
Music @ Hind Yugm, where music is a passion

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