रविवार, 11 जनवरी 2015

पहेली के विजेताओं का अभिनन्दन : SWARGOSHTHI – 202 : RAG BHAIRAVI & PURIYA KALYAN



स्वरगोष्ठी – 202 में आज

राग भैरवी और पूरिया कल्याण

संगीत पहेली की तीनों महिला विजेताओं को सुनिए और उनका अभिनन्दन कीजिए




‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ के मंच पर सभी संगीत-प्रेमियों का नए वर्ष के दूसरे अंक में हार्दिक अभिनन्दन है। पिछले अंक में हमने आपसे ‘स्वरगोष्ठी’ स्तम्भ के बीते वर्ष की कुछ विशेष गतिविधियों की चर्चा की थी। इस अंक में भी हम गत वर्ष की कुछ अन्य गतिविधियों का उल्लेख करने के साथ ही संगीत पहेली के वार्षिक विजेताओं की घोषणा करेंगे और उनका सम्मान भी करेंगे। ‘स्वरगोष्ठी’ के पाठक और श्रोता जानते हैं कि इस स्तम्भ के प्रत्येक अंक में संगीत पहेली के माध्यम से हम हर सप्ताह आपसे दो प्रश्न पूछते हैं। आपके दिये गये सही उत्तरों के प्राप्तांकों की गणना दो स्तरों पर की जाती है। ‘स्वरगोष्ठी’ की दस-दस कड़ियों को पाँच श्रृंखलाओं (सेगमेंट) में बाँट कर और फिर वर्ष के अन्त में सभी पाँच श्रृंखलाओं के प्रतिभागियों के प्राप्तांकों की गणना की जाती है। वर्ष 2014 की पहेलियों में कुल 17 प्रतियोगियों ने हिस्सा लिया। चार प्रतिभागी पहली बार पहेली में शामिल हुए। इनमें से तीन के उत्तर सही नहीं थे। चौथे प्रतिभागी लखनऊ के चन्द्रकान्त दीक्षित हैं जिनका एक उत्तर ठीक था। पेंसिलवानिया की श्रीमती विजया राजकोटिया ने 164वें अंक से भाग लेना शुरू किया और उसके बाद नियमित रहीं। हैदराबाद की डी. हरिणा माधवी और जबलपुर, मध्यप्रदेश की श्रीमती क्षिति तिवारी की सहभागिता नियमित रही। आज के इस सिंहावलोकन अंक में हम विजयी प्रतिभागियों की आवाज़ में उनके गाये गीत भी सुनवाएँगे।



र्ष 2014 अपनी कुछ खट्टी-मीठी यादों के साथ बीत गया। पिछले सप्ताह नए वर्ष का हमने स्वागत भी किया है। आज हम आपके साथ बीते वर्ष की कुछ सुखद स्मृतियाँ बाँटेंगे और पहेली की विजेताओं का परिचय भी देंगे। वर्ष 2014 में प्रकाशित कुल 50 पहेलियों के 100 अंक निर्धारित थे। 200वें अंक के सम्पन्न होने के बाद सर्वाधिक प्राप्तांक के तीन प्रतिभागियों को विजेता के रूप में चुन लिया। यह तथ्य भी रेखांकन के योग्य हैं कि सर्वाधिक अंक अर्जित करने वाली तीनों प्रतिभागी महिलाएँ हैं और संगीत की अध्यापिकाएँ हैं। पहेली में 68 अंक अर्जित कर पेंसिलवानिया, अमेरिका की श्रीमती विजया राजकोटिया ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है।

संगीत की साधना में पूर्ण समर्पित विजया जी ने लखनऊ स्थित भातखण्डे संगीत महाविद्यालय (वर्तमान में विश्वविद्यालय) से संगीत विशारद की उपाधि प्राप्त की है। बचपन में ही उनकी प्रतिभा को पहचान कर उनके पिता, विख्यात रुद्रवीणा वादक और वीणा मन्दिर के प्राचार्य श्री पी.डी. शाह ने कई तंत्र और सुषिर वाद्यों के साथ-साथ कण्ठ संगीत की शिक्षा भी प्रदान की। श्री शाह की संगीत परम्परा को उनकी सबसे बड़ी सुपुत्री विजया जी ने आगे बढ़ाया। आगे चलकर विजया जी को अनेक संगीत गुरुओं से मार्गदर्शन मिला, जिनमें आगरा घराने के उस्ताद खादिम हुसेन खाँ की शिष्या सुश्री मिनी कापड़िया, पण्डित लक्ष्मण प्रसाद जयपुरवाले, सुश्री मीनाक्षी मुद्बिद्री और सुविख्यात गायिका श्रीमती शोभा गुर्टू प्रमुख नाम हैं। विजया जी संगीत साधना के साथ-साथ ‘क्रियायोग’ जैसी आध्यात्मिक साधना में संलग्न रहती हैं। उन्होने अपने गायन का प्रदर्शन मुम्बई, लन्दन, सैन फ्रांसिस्को, साउथ केरोलिना, न्यू जर्सी, और पेंसिलवानिया में किया है। सम्प्रति विजया जी पेंसिलवानिया के अपने स्वयं के संगीत विद्यालय में हर आयु के विद्यार्थियों को संगीत की शिक्षा प्रदान कर रही हैं। ‘स्वरगोष्ठी’ की पहेली की विजेता के रूप में अब हम आपको विजया जी का गाया एक भजन सुनवाते है। भक्त कवयित्री मीराबाई का यह भक्तिपद राग भैरवी के सुरों की चाशनी से पगा हुआ है। लीजिए, सुनिए और उन्हें बधाई दीजिए।


भजन : ‘जोगी मत जा, मत जा, मत जा...’ : स्वर – विजया राजकोटिया : कवयित्री – मीराबाई



संगीत पहेली के कुल 100 अंको में से 93 अंक प्राप्त कर दूसरे स्थान पर विजयी रहीं, हैदराबाद की सुश्री डी. हरिणा माधवी। “संगीत जीवन का विज्ञान है”, इस सिद्धान्त को न केवल मानने वाली बल्कि अपने जीवन में उतार लेने वाली हरिणा जी दो विषयों की शिक्षिका का दायित्व निभा रही हैं। हैदराबाद के श्री साईं स्नातकोत्तर महाविद्यालय में विगत 15 वर्षो से स्नातक और स्नातकोत्तर कक्षाओं को लाइफ साइन्स पढ़ा रही हैं। इसके साथ ही स्थानीय वासवी कालेज ऑफ म्यूजिक ऐंड डांस से भी उनका जुड़ाव है, जहाँ विभिन्न आयुवर्ग के विद्यार्थियों का मार्गदर्शन भी करती हैं। हरिणा जी को प्रारम्भिक संगीत शिक्षा अपनी माँ श्रीमती वाणी दुग्गराजू से मिली। आगे चल कर अमरावती, महाराष्ट्र के महिला महाविद्यालय की संगीत विभागाध्यक्ष श्रीमती कमला भोंडे से विधिवत संगीत सीखना शुरू किया। हरिणा जी के बाल्यावस्था के एक और संगीत गुरु एम.वी. प्रधान भी थे, जो एक कुशल तबला वादक भी थे। इनके अलावा हरिणा जी ने गुरु किरण घाटे और आर. डी. जी. कालेज, अकोला के संगीत विभागाध्यक्ष श्री नाथूलाल जायसवाल से भी संगीत सीखा। हरिणा जी ने मुम्बई के अखिल भारतीय गन्धर्व महाविद्यालय से संगीत अलंकार की शिक्षा प्राप्त की है। आज के इस विशेष अंक में हम आपको सुश्री डी. हरिणा माधवी की आवाज़ में राग पूरिया कल्याण में निबद्ध एक द्रुत खयाल प्रस्तुत करते हैं। यह तीनताल की रचना है।


राग पूरिया कल्याण : ‘बहुत दिन बीते...’ : स्वर- डी. हरिणा माधवी : द्रुत तीनताल



वर्ष 2014 की संगीत पहेली में 98 अंक अर्जित कर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली जबलपुर, मध्यप्रदेश की श्रीमती क्षिति तिवारी की संगीत शिक्षा लखनऊ और कानपुर में हुई। लखनऊ के भातखण्डे संगीत महाविद्यालय से गायन में प्रथमा से लेकर विशारद तक की परीक्षाएँ उत्तीर्ण की। बाद में इस संस्थान को विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त हुआ, जहाँ से उन्होने संगीत निपुण और उसके बाद ठुमरी गायन मे तीन वर्षीय डिप्लोमा भी प्राप्त किया। इसके अलावा कानपुर के वरिष्ठ संगीतज्ञ पण्डित गंगाधर राव तेलंग जी के मार्गदर्शन में खैरागढ़, छत्तीसगढ़ के इन्दिरा संगीत कला विश्वविद्यालय की संगीत स्नातक और स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। क्षिति जी के गुरुओं में डॉ. गंगाधर राव तेलंग के अलावा पण्डित सीताशरण सिंह, पण्डित गणेशप्रसाद मिश्र, डॉ. सुरेन्द्र शंकर अवस्थी, डॉ. विद्याधर व्यास और श्री विनीत पवैया मुख्य रूप से हैं। क्षिति जी को स्नातक स्तर पर भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से ग्वालियर घराने की गायकी के अध्ययन के लिए छात्रवृत्ति भी मिल चुकी है। कई वर्षों तक लखनऊ के महिला कालेज और जबलपुर के एक नेत्रहीन बच्चों के विद्यालय मे माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों को संगीत की शिक्षा देने के बाद वर्तमान में क्षिति जी स्नातक स्तर के छात्र-छात्राओं का मार्गदर्शन कर रहीं हैं। खयाल, ठुमरी और भजन गायन के अलावा उन्होने प्रोफेसर कमला श्रीवास्तव से गुरु-शिष्य परम्परा के अन्तर्गत लोक संगीत भी सीखा है, जिसे अब वह अपने विद्यार्थियों को बाँट रही हैं। क्षिति जी कथक नृत्य और नृत्य नाटिकाओं में गायन संगत की विशेषज्ञ हैं। सुप्रसिद्ध नृत्यांगना डॉ. कुमकुम धर और नृत्यांगना डॉ. विधि नागर के कई कार्यक्रमों में अपनी इस प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकी हैं। आज के इस विशेष अंक में श्रीमती क्षिति तिवारी महाप्राण सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ की चर्चित सरस्वती वन्दना को अपना स्वर दे रही हैं।

सरस्वती वन्दना : ‘वर दे वीणावादिनी वर दे...’ : स्वर – क्षिति तिवारी और साथी : कवि – सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’




संगीत पहेली


‘स्वरगोष्ठी’ के 202वें अंक की संगीत पहेली में आज हम आपको कण्ठ संगीत के एक रचना का अंश सुनवा रहे हैं। इसे सुन कर आपको निम्नलिखित दो प्रश्नों के उत्तर देने हैं। ‘स्वरगोष्ठी’ के 210वें अंक की समाप्ति तक जिस प्रतिभागी के सर्वाधिक अंक होंगे, उन्हें इस वर्ष की पहली श्रृंखला (सेगमेंट) का विजेता घोषित किया जाएगा।



1 – संगीत का यह अंश सुन कर बताइए कि यह भारतीय संगीत की कौन सी शैली है?

2 – इस संगीत शैली में ताल देने के लिए किस वाद्य का प्रयोग किया जाता है? ताल वाद्य का नाम बताइए।

आप अपने उत्तर केवल swargoshthi@gmail.com या radioplaybackindia@live.com पर इस प्रकार भेजें कि हमें शनिवार 17 जनवरी, 2015 की मध्यरात्रि से पूर्व तक अवश्य प्राप्त हो जाए। comments में दिये गए उत्तर मान्य नहीं होंगे। इस पहेली के विजेताओं के नाम हम ‘स्वरगोष्ठी’ के 204वें अंक में प्रकाशित करेंगे। इस अंक में प्रकाशित और प्रसारित गीत-संगीत, राग, अथवा कलासाधक के बारे में यदि आप कोई जानकारी या अपने किसी अनुभव को हम सबके बीच बाँटना चाहते हैं तो हम आपका इस संगोष्ठी में स्वागत करते हैं। आप पृष्ठ के नीचे दिये गए comments के माध्यम से तथा swargoshthi@gmail.com अथवा radioplaybackindia@live.com पर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं।


पिछली पहेली के विजेता


‘स्वरगोष्ठी’ की 200वें अंक की संगीत पहेली में हमने आपको संगीत के दो शीर्षस्थ कलासाधकों, उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ (शहनाई) और उस्ताद विलायत खाँ (सितार) की जुगलबन्दी का एक अंश सुनवा कर आपसे दो प्रश्न पूछे थे। पहले प्रश्न का सही उत्तर है- राग भैरवी और पहेली के दूसरे प्रश्न का सही उत्तर है- वाद्य शहनाई और सितार। इस बार पहेली के दोनों प्रश्नो के सही उत्तर एकमात्र प्रतिभागी पेंसिलवानिया, अमेरिका से विजया राजकोटिया ने ही दिया है। विजया जी को ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ की ओर से हार्दिक बधाई।


पहेली के वार्षिक विजेता


वर्ष 2014 की पहेली में सर्वाधिक 98 अंक अर्जित कर जबलपुर, मध्यप्रदेश की श्रीमती क्षिति तिवारी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है। 93 अंक पाकर प्रतियोगिता में दूसरा स्थान हैदराबाद की सुश्री डी. हरिणा माधवी ने हस्तगत किया है। तीसरे स्थान को विजित करने वाली विदुषी विजया राजकोटिया, अमेरिका के पेंसिलवानिया शहर की निवासी हैं और भारतीय संगीत की खयाल और भजन गायकी की साधना, प्रदर्शन और प्रचार-प्रसार में संलग्न रहती हैं। पहेली प्रतियोगिता में उन्होने 68 अंक प्राप्त कर तीसरा स्थान प्राप्त किया है। पहेली के तीनों शीर्ष स्थानों पर विजयी प्रतिभागी महिलाएँ हैं और तीनों ही विदुषी संगीत की अध्यापिकाएँ हैं। तीनों विजेताओं को ‘रेडियो प्लेबैक इंडिया’ टीम की ओर से हार्दिक बधाई और शुभकामना।


अपनी बात


मित्रों, ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ के मंच पर अगले सप्ताह से एक नई लघु श्रृंखला शुरू कर रहे हैं। इस श्रृंखला का शीर्षक होगा- ‘भारतीय संगीत की विविध शैलियाँ’। यदि आप भी संगीत के किसी भी विषय पर हिन्दी में लेखन की इच्छा रखते हैं तो हमसे सम्पर्क करें। हम आपकी प्रतिभा को निखारने का अवसर देंगे। आगामी श्रृंखलाओं के बारे में आपके सुझाव सादर आमंत्रित हैं। ‘स्वरगोष्ठी’ स्तम्भ के आगामी अंकों में आप क्या पढ़ना और सुनना चाहते हैं, हमे आविलम्ब लिखें। अपनी पसन्द के विषय और गीत-संगीत की फरमाइश अथवा अगली श्रृंखलाओं के लिए आप किसी नए विषय का सुझाव भी दे सकते हैं। अगले रविवार को एक नए अंक के साथ प्रातः 9 बजे ‘स्वरगोष्ठी’ के इसी मंच पर सभी संगीतानुरागियों का हम स्वागत करेंगे।


प्रस्तुति : कृष्णमोहन मिश्र 


शनिवार, 10 जनवरी 2015

अभिनेत्री जयश्री टी. और माला सिन्हा की स्मृतियों में मोहम्मद रफ़ी, मुकेश और लता मंगेशकर


स्मृतियों के स्वर - 15

अभिनेत्री जयश्री टी. और माला सिन्हा की स्मृतियों में रफ़ी, मुकेश और लता 





'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' के सभी श्रोता-पाठकों को सुजॉय चटर्जी का प्यार भरा नमस्कार! दोस्तों, एक ज़माना था जब घर बैठे प्राप्त होने वाले मनोरंजन का एकमात्र साधन रेडियो हुआ करता था। गीत-संगीत सुनने के साथ-साथ बहुत से कार्यक्रम ऐसे हुआ करते थे जिनमें कलाकारों से साक्षात्कार करवाये जाते थे और जिनके ज़रिये फ़िल्म और संगीत जगत के इन हस्तियों की ज़िन्दगी से जुड़ी बहुत सी बातें जानने को मिलती थी। गुज़रे ज़माने के इन अमर फ़नकारों की आवाज़ें आज केवल आकाशवाणी और दूरदर्शन के संग्रहालय में ही सुरक्षित हैं। मैं ख़ुशक़िस्मत हूँ कि शौकीया तौर पर मैंने पिछले बीस वर्षों में बहुत से ऐसे कार्यक्रमों को लिपिबद्ध कर अपने पास एक ख़ज़ाने के रूप में समेट रखा है। 'रेडियो प्लेबैक इण्डिया' पर, महीने के हर दूसरे और चौथे शनिवार को इसी ख़ज़ाने में से मैं निकाल लाता हूँ कुछ अनमोल मोतियाँ हमारे इस स्तंभ में, जिसका शीर्षक है - स्मृतियों के स्वर, जिसमें हम और आप साथ मिल कर गुज़रते हैं स्मृतियों के इन हसीन गलियारों से। आज की कड़ी में प्रस्तुत है अभिनेत्री जयश्री टी. और माला सिन्हा की स्मृतियाँ। बरसों बरस पहले जयश्री टी. ने मोहम्मद रफ़ी और मुकेश के साथ कई सारे स्टेज शोज़ किये हैं और इस तरह से इन दो गायकों को करीब से देखा और जाना है। जयश्री टी. बता रही हैं रफ़ी साहब और मुकेश जी के बारे में। इसी तरह माला जी बता रही हैं लता से उनकी मुलाक़ात के बारे में। 




सूत्र: 'उजाले उनकी यादों के', विविध भारती


जयश्री टी - मोहम्मद रफ़ी

"मैंने रफ़ी साहब के साथ बहुत शोज़ किये हैं। साउथ अफ़्रीका मैं गई थी उनके साथ, वहाँ पर हम लोगों ने बहुत सारे शोज़ किये। वहाँ जाने के लिए हमें बड़ी तकलीफ़ हुई, मतलब तकलीफ़ in the sense कि हमें काफ़ी वेट करना पड़ा। लेकिन वहाँ जाने के बाद जो प्यार मोहब्बत मिली है वहाँ के लोगों से यह आप इमाजिन नहीं कर सकते। जितनी पब्लिक अन्दर थी, वहाँ ऐसे टेण्ट जैसे लगे होते थे बड़े-बड़े, उसके अन्दर जितनी पब्लिक होती थी, उतनी ही पब्लिक बाहर होती थी। सूट-बूट पहने हुए लोग, कहते थे हमको टिकट दे दीजिये, हम कहीं भी नीचे बैठ जायेंगे, हमको शो देखना है। और जयश्री टी, मीना टी, मोहम्मद रफ़ी। उन दिनो मतलब इतने सारे शोज़, इतने सारे आर्टिस्ट्स नहीं आते थे। यानी कि हीरो-हीरोइन तो कोई आता ही नहीं था। लोग मुझसे कहते थे कि जयश्री, तुम स्टेज पे कैसे डान्स कर लेती हो, तुम तो फ़िल्मस्टार हो। मैंने कहा तो क्या हुआ? I was much ahead of time. वहाँ पर लोगों ने हमें बहुत रेस्पॉन्स दिया, वन्स मोर हमें मिलता था। और रफ़ी साहब was a great man, मैं रफ़ी साहब के बारे में एक बात कहना चाहूँगी कि जब हम स्टेज पे जाते थे, हम उनके पैर छूते थे, लेकिन वो जब स्टेज पे जाते थे तो मेरी माँ के पैर छूते थे और कहते थे माँ भगवान का रूप होती है। बहुत ही प्यारे, बहुत ही नेक इंसान थे। तो उनके साथ प्रोग्राम करने में बहुत मज़ा आया, और हम लोग वहाँ पे खाना खाते थे तो रफ़ी साहब कहते थे कि पहले सबको बुलाओ, एक साथ बैठ के खाना खायेंगे। बिल्कुल परिवार का माहौल था और हम घूमने भी जाते थे तो सबको साथ में लेके जाते थे। उनकी मिसेस, उनके जो ज़हीर साहब थे, और मेरी माँ थीं, मीना टी थीं, मेरी सिस्टर, तो हम लोग सब साथ में ही जाते थे।

रफ़ी साहब गाते हुए बीच में कभी-कभी हाथ को ऐसे उठा कर, जैसे ऐक्शन करते थे तो पब्लिक खिल जाती थी, तालियाँ मार कर सपोर्ट करती थी। तो कभी कभी ऐसा जेस्चर मार कर, ख़ुश हो जाती थी पब्लिक। रफ़ी साहब बातें बहुत कम करते थे। और आपस में जब हम बात करते थे तो बहुत सॉफ़्ट स्पोकेन एक दम, एक दम आहिस्ते से बात करते थे, कभी उनको ऊँची आवाज़ में आज तक सुना ही नहीं, किसी से भी नहीं। बहुत अच्छे से बात करते थे। रफ़ी साहब के साथ हम कई बार स्टेज पे गये, तो उनसे कहा जाता था कि दो शब्द कहिये। तो वो कहते थे कि मैं दो शब्द नहीं, दो लाइन गा के सुनाऊँगा। और वो हमेशा गा के सुनाते थे। कुछ कहते नहीं थे।"



जयश्री टी - मुकेश

"मुकेश जी के साथ मैंने बचपन में शोज़ किये हैं। जब मैं छोटी थी तो हम लोगों ने गुजरात के बहुत दौरे किये। तो हम क्या करते थे कि शो ख़तम हो जाने के बाद हम कार में बैठ के दूसरे गाँव जाते थे और वहाँ पे हम होटल में जाते थे। तो मुकेश जी हमेशा मुझसे और मेरी माँ से कहते थे कि आप लोग सो जाओ, मैं ड्राइवर से बात करता हूँ ताकि वो सोये नहीं ट्रैवलिंग में। और मुकेश जी was the first person who told me कि जयश्री, देखो तुम फ़िल्मों में आयी हो, तुम्हारा नाम हो गया है, तो सबसे पहले यह शो बिज़नेस है, यहाँ पे तुम जितना शो-ऑफ़ करोगी, उतना तुम्हारा मार्केट बढ़ेगा। यह उन्होंने मुझे सिखाया। और उन्होंने सबसे पहले मुझको बताया कि तुम घर लेने से पहले गाड़ी ले लो। एक बड़ी गाड़ी ले लो और इसलिए मैंने फ़ोर्ड की गाड़ी उस वक़्त ली थी। और एक बात बताना चाहूँगी, पता नहीं रफ़ी साहब और मुकेश जी के साथ, शायद मेरी माँ का, अगले जनम का, या मैं उनकी माँ रह चुकी हूँ पता नहीं, जब मुकेश जी फ़ॉरेन चले गये अमरीका शो के लिये तो जाने से पहले वहाँ हमारे घर आ के हमसे मिल के गये। और मेरी माँ से भी आशीर्वाद लेके गये। और वहाँ जाने के बाद वो गुज़र गये।"


माला सिन्हा - लता मंगेशकर

"लता जी, लता जी, लता जी से हम मिलने गये तो मैं उनको निहारती ही रही, निहारती ही गई। पर लता जी जो हैं, वो धरती पर हैं, धरती के उपर न उनका दिमाग़ है और न पैर। तो उनको देखा, खिलखिलाके हँसती हैं, बहने कहकर बातचीत करती हैं, हमने सब बातचीत की, मैंने कहा कि दीदी, मुझे आपकी आवाज़ बहुत अच्छी लगती है, आपने इतने गाने गाये, मेरे लिये भी गाये, मैं तो बचपन से आपका फ़ैन रह चुकी हूँ। मैं आपका गाना गा गा कर मुझे 'बेबी लता' का खिताब मिला हुआ था। तो उन्होंने कहा कि फिर गाना क्यों प्रैक्टिस करती? उन्होंने मुझे कहा, मुझे डाँटा कि अरे इतनी अच्छी आवाज़ है, उन्होंने सुना भी मुझे, गाके बता, प्रैक्टिस किया करो, उनके भाई भी, हृदयनाथ जी ने भी कहा, दोनो ने मुझे सुना है, फ़ंक्शन में, गाना गाते हुए, क्योंकि बाँग्ला में मैंने बहुत सारे फ़ंक्शन में गाने गाये हैं। कल्याणजी-आनन्दजी भाई के गाने गाये, "कंकरिया मार के जगाया", यह गाना मैंने, तो उन्होंने मेरी आवाज़ सुनी हुई है। तो बोली कि तू पागल है, रियाज़ किया कर। तो मैंने बोला कि दीदी, आपके होते हुए मैं क्यों गाऊँ? आप इतना अच्छा गाती हैं मेरे लिए, मेरी ऐक्टिंग ही ठीक है।"



कॉपीराइट: विविध भारती



तो दोस्तों, आज बस इतना ही। आशा है आपको यह प्रस्तुति पसन्द आयी होगी। अगली बार ऐसे ही किसी स्मृतियों की गलियारों से आपको लिए चलेंगे उस स्वर्णिम युग में। तब तक के लिए अपने इस दोस्त, सुजॉय चटर्जी को अनुमति दीजिये, नमस्कार! इस स्तम्भ के लिए आप अपने विचार और प्रतिक्रिया नीचे टिप्पणी में व्यक्त कर सकते हैं, हमें अत्यन्त ख़ुशी होगी।



प्रस्तुति : सुजॉय चटर्जी 

मंगलवार, 6 जनवरी 2015

घुघूती बासूती की कहानी क्या अगले साल

इस साप्ताहिक स्तम्भ "बोलती कहानियाँ" के अंतर्गत हम हर सप्ताह आपको हिन्दी में मौलिक और अनूदित, नई और पुरानी, प्रसिद्ध कहानियाँ और छिपी हुई रोचक खोजें सुनवाते रहे हैं। पिछली बार आपने अनुराग शर्मा के स्वर में वरुण कुमार जायसवाल की छोटी सी लेकिन मर्मस्पर्शी कथा "लाज" का पाठ सुना था।

आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं घुघूती बासूती की हृदयस्पर्शी संस्मरणात्मक कथा क्या अगले साल जिसे स्वर दिया है अनुराग शर्मा ने।

"क्या अगले साल" का गद्य घुघूती बासूती ब्लॉग पर उपलब्ध है। उनका व्यंग्य "ओह" हम आपको पहले सुना चुके हैं।

कहानी "क्या अगले साल" का कुल प्रसारण समय 3 मिनट 39 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।

संसार में कुछ अंतिम कुछ प्रथम नहीं होता। संसार एक तरह का मेरी गो राउंड है। सब कुछ जाता है सब कुछ वापिस आता है। बस जब अपने सामने आए तो पकड़ लो, थाम लो इक पल। जी लो वही इक पल!
घुघूती बासूती

हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी हिन्दी कहानी

"सोचा कि माँ और बाबा शायद कोई विस्मयकारी गुप्त योजना बना रहे हैं।"
 (घुघूती बासूती रचित "क्या अगले साल" से एक अंश)


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यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाऊनलोड कर लें:
क्या अगले साल MP3

#First Story, Kya Agle Saal: Ghughuti Basuti/Hindi Audio Book/2015/1. Voice: Anurag Sharma

The Radio Playback Originals (Click on the covers to reach out the Albums)



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