सोमवार, 2 मार्च 2009

चुनिए प्रदर्शित 27 गीतों में से अपनी पसंद

हिन्द-युग्म ने इंटरनेटीय जुगलबंदी से बने पहले एल्बम 'पहला सुर' को जब ३ फरवरी २००८ को विश्व पुस्तक मेला, नई दिल्ली में रीलिज किया था, तभी से यह तय कर लिया था कि इसे नई प्रतिभाओं को उभारने का कुशल माध्यम बनायेगा।

सजीव सारथी के अनुभवी संयोजन में ४ जुलाई २००८ से प्रत्येक शुक्रवार इसी इंटरनेट जैमिंग से बने स्वरबद्ध गीत का विश्वव्यापी प्रदर्शन इसी वेबसाइट पर किया जाने लगा। उद्देश्य था कि हिन्दी को विश्वव्यापी पहुँच मिले और गायक, संगीतकार और गीतकार को एक मंच। ३१ दिसम्बर २००८ तक एक-एक करके गीत रीलिज किये गये। इस तरह से कुल २७ गीत वर्ष २००८ (सत्र २००८-०९) में प्रदर्शित हुए।

नियमित श्रोता जानते हैं कि हम इन गीतों की समीक्षा २ चरणों में ५ अलग-अलग संगीत पारखियों से करवायी जा चुकी है।

हिन्द-युग्म ने तय किया है कि समीक्षकों द्वारा चुने गये शीर्ष गीत को नगद इनाम भी देगा। वह सरताज़ गीत होगा।
आम श्रोता की पसंद समीक्षकों से अलग हो सकती है। हम एक लोकप्रिय गीत भी चुनना चाहते हैं। जिसके लिए हम श्रोताओं को अवसर दे रहे हैं। श्रोताओं की राय पर समीक्षकों की राय का असर न पड़े, इसलिए हम समीक्षकों द्वारा तय सरताज़ गीत की जानकारी नहीं प्रकाशित कर रहे हैं। हम श्रोताओं द्वारा चुने गये सर्वश्रेष्ठ गीत की टीम को भी नग़द इनाम देंगे।
ऊपर के लिंक से आप हर गीत के बनने की कहानी पढ़ सकते हैं और अलग से सुन भी सकते हैं। आप नीचे के प्लेयर से सभी गीतों को एक साथ सुन सकते हैं। एक-एक करके सुन सकते हैं। जो श्रोता नये हैं, वे इसी प्लेयर से सभी गीत को सुन सकते हैं।



आपका निर्णय






वोटिंग विंडो २८ मार्च रात्रि ११.५९ तक खुली रहेगी. ३० मार्च सोमवार को हम सरताज गीत, लोकप्रिय गीत और टॉप १० गीतों के नतीजे आपके सामने रखेंगे.

रविवार, 1 मार्च 2009

यार बादशाह...यार दिलरुबा...कातिल आँखों वाले....

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 10

ओ पी नय्यर. एक अनोखे संगीतकार. आशा भोसले को आशा भोंसले बनाने में ओ पी नय्यर के संगीत का एक बडा हाथ रहा है, इस बात को झुठलाया नहीं जा सकता, और यह बात तो आशाजी भी खुद मानती हैं. आशा और नय्यर की जोडी ने फिल्म संगीत को एक से एक नायाब नग्में दिए हैं जो आज भी उतने ही लोकप्रिय हैं जितने कि उस समय थे. यहाँ तक कि नय्यर साहब के अनुसार वो ऐसे संगीतकार रहे जिन्हे ता-उम्र सबसे ज़्यादा 'रायल्टी' के पैसे मिले. आज 'ओल्ड इस गोल्ड' में आशा भोंसले और ओ पी नय्यर के सुरीले संगम से उत्पन्न एक दिलकश नग्मा आपके लिए लेकर आए हैं. सन 1967 में बनी फिल्म सी आइ डी 909 का यह गीत हेलेन पर फिल्माया गया था. जब जोडी का ज़िक्र हमने किया तो एक और जोडी हमें याद आ रही है, हेलेन और आशा भोसले की. जी हाँ दोस्तों, हेलेन पर फिल्माए गये आशाजी के कई गाने हैं जो मुख्य रूप से 'क्लब सॉंग्स', 'कैबरे सॉंग्स', 'डिस्को', या फिर मुज़रे हैं. फिल्म सी आइ डी 909 का यह गीत भी एक 'क्लब सॉंग' है.

सी आइ डी 909 में कई गीतकारों ने गीत लिखे, जैसे कि अज़ीज़ कश्मीरी, एस एच बिहारी, वर्मा मलिक और शेवन रिज़वी. यह गीत रिज़वी साहब का लिखा हुआ है. इस गीत की अवधि उस ज़माने के साधारण गीतों की अवधि से ज़्यादा है. 5 'मिनिट' और 55 'सेकेंड्स' के इस गीत का 'प्रिल्यूड म्यूज़िक' करीब करीब 1 'मिनिट' और 35 'सेकेंड्स' का है और यही वजह है इस गीत की लंबी अवधि का. 'प्रिल्यूड म्यूज़िक' के बाद गाने का 'रिदम' बिल्कुल ही बदल जाती है और गीत शुरू हो जाता है. गीत के 'इंटरल्यूड म्यूज़िक' में अरबिक संगीत की झलक मिलती है. इस गाने के 'रेकॉर्डिंग' से जुडा एक किस्सा आप को बताना चाहेंगे दोस्तों. हुआ यूँ कि इस गाने की 'रेकॉर्डिंग' शुरू होनेवाली थी जब नय्यर साहब को उनके घर से संदेश आया कि उनके बेटे का 'आक्सिडेंट' हो गया है. नय्यर साहब विचलित नहीं हुए और ना ही उन्होने इस बात की किसी को भनक तक पड़ने दी और जब गाने की 'फाइनल रेकॉर्डिंग' खत्म हो गयी तब जाकर उन्होने आशा भोंसले को यह बात बताई. यह बात सुनकर आशाजी ने उन्हे बहुत डांटा. यह घटना उजागर करती है नय्यर साहब की अपने काम के प्रति लगन और निष्ठा को. तो नय्यर साहब के इसी लगन और मेहनत को सलाम करते हुए सुनिए सी आइ डी 909 फिल्म का गीत "यार बादशाह यार दिलरुबा".



और अब बूझिये ये पहेली. अंदाजा लगाईये कि हमारा अगला "ओल्ड इस गोल्ड" गीत कौन सा है. हम आपको देंगे तीन सूत्र उस गीत से जुड़े. ये परीक्षा है आपके फ़िल्म संगीत ज्ञान की. अगले गीत के लिए आपके तीन सूत्र ये हैं -

१. इत्तेफाक से अगला गीत भी आशा और ओ पी नय्यर की जबरदस्त जोड़ी का है.पर ये कोई क्लब गीत न होकर रोमांटिक अंदाज़ का है.
२. मजरूह सुल्तानपुरी के बोलों को परदे पर अभिनीत किया है आशा पारेख ने. नायक है जोय मुख़र्जी.
३. मुखड़े में शब्द है -"तस्वीर"

कुछ याद आया...?

पिछली पहेली का कोई भी सही जवाब नहीं दे पाया ताज्जुब है, जबकि गीत इतना मशहूर है...खैर आज के लिए शुभकामनायें

प्रस्तुति - सुजॉय चटर्जी



ओल्ड इस गोल्ड यानी जो पुराना है वो सोना है, ये कहावत किसी अन्य सन्दर्भ में सही हो या न हो, हिन्दी फ़िल्म संगीत के विषय में एकदम सटीक है. ये शृंखला एक कोशिश है उन अनमोल मोतियों को एक माला में पिरोने की. रोज शाम ६-७ के बीच आवाज़ पर हम आपको सुनवायेंगे, गुज़रे दिनों का एक चुनिंदा गीत और थोडी बहुत चर्चा भी करेंगे उस ख़ास गीत से जुड़ी हुई कुछ बातों की. यहाँ आपके होस्ट होंगे आवाज़ के बहुत पुराने साथी और संगीत सफर के हमसफ़र सुजॉय चटर्जी. तो रोज शाम अवश्य पधारें आवाज़ की इस महफिल में और सुनें कुछ बेमिसाल सदाबहार नग्में.

कैटरीना कैफ को हिंदी सिखायेंगे क्या ?

सप्ताह की संगीत सुर्खियाँ (12)
चमकते सितारों ने मनाया हिंदी फिल्मों का सबसे बड़ा उत्सव
ऑस्कर के चर्चे पुराने हुए, अब बारी है हमारी अपनी फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े पुरस्कार समारोह की. YRF स्टूडियो अँधेरी (मुंबई) में संपन्न हुए ५४ वें फिल्म फेयर समारोह में कल सितारे जमीं पर उतरे. "कहने को जश्ने बहारां है.." लिखने वाले जावेद अख्तर साहब ने सर्वश्रेष्ठ गीतकार के लिए तो संगीतकार ए आर रहमान ने "जाने तू या जाने न" के लिए सर्वश्रेष्ठ संगीतकार का खिताब जीता. श्रेया घोषाल "तेरी ओर..." (सिंग इस किंग) गाने से सर्वश्रेष्ठ गायिका चुनी गयी, ओर वहीँ "हौले हौले..." से दिलों पर राज़ करने वाले सुखविंदर ने सर्वश्रेष्ठ गायक के लिए फिल्म फेयर ट्रोफी जिसे "ब्लैक लेडी" भी कहा जाता है, हासिल किया. फिल्म "जोधा अकबर" के लिए ए आर आर ने सर्वश्रेष्ठ पार्श्व संगीत का सम्मान जीता ओर सर्वश्रेष्ठ ध्वनि रिकॉर्डिंग के लिए बेयलोन फोन्सेका और विनोद सुब्रमनियन ने फिल्म "रॉक ऑन" के लिए इसे प्राप्त किया. उभरते हुए संगीत कर्मी को दिए जाने वाला आर डी बर्मन सम्मान मिला "जाने तू..", "गजिनी" और "युवराज" के सफल गानों को गाने वाले प्रतिभाशाली गायक बेन्नी दयाल को. "पप्पू कांट डांस" गाने के लिए सर्वश्रेष्ठ नृत्य संयोजन का पुरस्कार जीता लोनिगिनस फर्नांडीस ने. ऋतिक रोशन सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और प्रियंका चोपडा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री चुनी गयी. आशुतोष गोवारिकर को उनकी फिल्म "जोधा अकबर" के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक घोषित किया गया और उनकी फिल्म को सर्वश्रेष्ठ फिल्म. इस पूरे समारोह की विस्तृत रिपोर्ट हम अगले रविवार के एपिसोड में लेकर आयेंगे. फिलहाल सभी विजेताओं को जम कर बधाई.



ऑस्कर और भारतीय

ऑस्कर के लेकर विवादों का सिलसिला जारी है. ऑस्कर में भारतीयों के अब तक के प्रदर्शन पर एक नज़र -
ए आर आर से पहले भानु अथैया (परिधान सज्जा) पहले भारतीय थे जिन्हें फिल्म "गाँधी" के लिए ऑस्कर मिला. गौरतलब है कि ये फिल्म भी "स्लम डोग" की ही तरह भारतीय परिवेश पर बनी विदेशी फिल्म थी.
फिल्म गाँधी के लिए ही पंडित रवि शंकर को सर्वश्रेष्ठ संगीतकार श्रेणी में नामांकन मिला था.
सत्यजित राय ने अपनी उत्कृष्ट फिल्मों के योगदान के विशेष पुरस्कार जीता १९९२ में.
१९५८ में सर्वश्रेष्ठ विदेशी फिल्म श्रेणी में नामांकित हुई "मदर इंडिया", १९८९ में मीरा नायर की "सलाम बॉम्बे" और २००२ में आमिर खान की आशुतोष गोवरिकर निर्देशित "लगान" ने भी इस तरफ कदम बढाए, पर अंतिम सफलता हाथ नहीं लगी.
और अंत में हम तो इतना ही कहेंगे कि "जय हो" गीत के लिए रहमान- गुलज़ार को मिला सम्मान, सम्मान है हिंदी फिल्म संगीत का जिसे आज दुनिया भर में सुना जा रहा है. क्या ये काफी नहीं जश्न के लिए.


कुछ और सुर्खियाँ

कैटरीना कैफ नज़र आयेंगीं बेहद कम मेक अप के साथ फिल्म "राजनीति" में, और वो इस फिल्म के लिए हिंदी भी सीखना चाहती हैं. पर क्या आपको नहीं लगता कि हिंदी फिल्मों में काम चाहने वाले हर कलाकार के लिए हिंदी सीखना अनिवार्य होना चाहिए ? खैर कैटरीना इस शुभ काम के लिए हमारे किसी भी हिंदी ब्लोग्गर बधुओं से संपर्क कर सकती हैं :)

कैलाश खेर आखिरकार विवाह बंधन में बंध ही गए. उनकी धरमपत्नी का नाम शीतल है. जब पत्रकारों ने शीतल से पूछा कि कहीं ये प्रेम विवाह तो नहीं तो वो बोली कि क्या आपको लगता है कि कैलाश प्रेम विवाह जैसा कोई कदम उठाने वाले इंसान हैं. सीधे सरल और पारंपरिक चाल चलन वाले कैलाश और शीतल को वैवाहिक जीवन की शुभकामनाएं.

करण जोहर ने शाहरुख़ अभिनीत अपनी आने वाली फिल्म "माई नेम इस खान" के लिए जावेद साहब को शीर्षक गीत लिखने के लिए तैयार कर लिया है पहले जावेद साहब ये कहकर मुकर गए थे कि वो किसी अन्य गीतकार के साथ क्रेडिट शेयर नहीं करेंगे. इस फिल्म के लिए अन्य गीत एक नए गीतकार के होंगे.


मरम्मत मुक्कदर की कर दो मौला

इस सप्ताह का गीत है फिल्म "दिल्ली ६" से. दिल्ली ६ की मसकली से तो आपको पहले ही मिलवा चुके हैं, और गायिका रेखा भारद्वाज के बहाने हमने "गैन्दाफूल" का भी जिक्र किया था. तो आज पेश है इसी फिल्म का और मधुर गीत- "अर्जियाँ". फिल्म प्रर्दशित हो चुकी है और मिली जुली प्रतिक्रियां आई हैं जनता की. पर जहाँ तक फिल्म के संगीत की बात है, सब एकमत हैं कि फिल्म का संगीत फिल्म की जान है. प्रस्तुत गीत में आवाजें हैं कैलाश खेर और रहमान के प्रिय गायक जावेद अली की. प्रसून के लिखे और ए आर रहमान के संगीतबद्ध इस गीत की लम्बाई आम गीतों से कुछ ज्यादा है. ८-९ मिनट लम्बे इस सूफियाना गीत को फिल्म में अलग अलग सन्दर्भों में स्थान मिला है, और यही वो गीत है जो फिल्म के मूल सन्देश को हम तक पहुंचाता है. तो इस रविवार की सुबह को रोशन कीजिये इस गुजारिश से -
जो भी तेरे दर आया, झुकने जो सर आया,
मस्तियाँ पिये सबको झूमता नज़र आया,
प्यास लेके आया था. दरिया वो भर लाया,
नूर की बारिश में भीगता सा तर आया....
दरारें दारारें हैं माथे पे मौला...मरम्मत मुक्कदर की कर दो मौला...
मेरे मौला....

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