Tuesday, September 18, 2018

ऑडियो: रामनिवास मानव की लघुकथा परिचित

लोकप्रिय स्तम्भ "बोलती कहानियाँ" के अंतर्गत हम हर सप्ताह आपको सुनवाते रहे हैं नई, पुरानी, अनजान, प्रसिद्ध, मौलिक और अनूदित, यानि के हर प्रकार की कहानियाँ। पिछली बार आपने शीतल माहेश्वरी के स्वर में दीपक मशाल की लघुकथा बेचैनी" का वाचन सुना था।

आज प्रस्तुत है रामनिवास मानव की लघुकथा परिचित, जिसे स्वर दिया है शीतल माहेश्वरी ने।

प्रस्तुत लघुकथा "परिचित" का कुल प्रसारण समय 2 मिनट 26 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिकों, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।

डॉ. रामनिवास मानव
जन्म: 2 जुलाई 1954; तिगरा, महेन्द्रगढ़ (हरियाणा)। अब तक कुल बत्तीस पुस्तकें प्रकाशित। हरियाणा के समकालीन हिन्दी-साहित्य के प्रथम शोधार्थी तथा अधिकारी विद्वान।


हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी हिन्दी कहानी

"बिना ख़ाना-पूर्ति किये हम सामान तुम्हें कैसे दे सकते हैं?”
 (रामनिवास मानव की लघुकथा "परिचित" से एक अंश)


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परिचित MP3

#20th Story, Parichit; Ramnivas Manav; Hindi Audio Book/2018/20. Voice: Sheetal Maheshwari

Sunday, September 16, 2018

राग भैरवी : SWARGOSHTHI – 385 : RAG BHAIRAVI






स्वरगोष्ठी – 385 में आज

राग से रोगोपचार – 14 : सदा-सुहागिन राग भैरवी

अस्वाभाविक शारीरिक और मानसिक समस्याओं से मुक्ति दिलाता है यह राग





विदुषी परवीन सुल्ताना
पण्डित भीमसेन जोशी
‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ के मंच पर जारी हमारी श्रृंखला “राग से रोगोपचार” की चौदहवीं और समापन कड़ी में मैं कृष्णमोहन मिश्र, इस श्रृंखला के लेखक, संगीतज्ञ और इसराज तथा मयूरवीणा के सुविख्यात वादक पण्डित श्रीकुमार मिश्र के साथ आप सब संगीत-प्रेमियों का हार्दिक स्वागत करता हूँ। मानव का शरीर प्रकृति की अनुपम देन है। बाहरी वातावरण के प्रतिकूल प्रभाव से मानव के तन और मन में प्रायः कुछ विकृतियाँ उत्पन्न हो जाती हैं। इन विकृतियों को दूर करने के लिए हम विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों की शरण में जाते हैं। पूरे विश्व में रोगोपचार की अनेक पद्धतियाँ प्रचलित है। भारत में हजारों वर्षों से योग से रोगोपचार की परम्परा जारी है। प्राणायाम का तो पूरा आधार ही श्वसन क्रिया पर केन्द्रित होता है। संगीत में स्वरोच्चार भी श्वसन क्रिया पर केन्द्रित होते हैं। भारतीय संगीत में 7 शुद्ध, 4 कोमल और 1 तीव्र, अर्थात कुल 12 स्वरों का प्रयोग होता है। इन्हीं स्वरों के संयोजन से राग की उत्पत्ति होती है। स्वर-योग या श्रव्य माध्यम से गायन या वादन के सुरीले, भावप्रधान और प्रभावकारी नाद अर्थात संगीत हमारे मस्तिष्क के संवेदनशील भागों में प्रवेश करता है। मस्तिष्क में नाद के प्रभाव का विश्लेषण होता है। ग्राह्य और उपयोगी नाद को मस्तिष्क सुरक्षित कर लेता है जहाँ नाद की परमाणु ऊर्जा के प्रभाव से सशक्त और उत्तम कोटि के हारमोन्स का सृजन होता है। यह हारमोन्स शरीर की समस्त कोशिकाओं में व्याप्त हो जाता है। इसकी ऊर्जा से अनेक मानसिक और मनोदैहिक समस्याओं का उपचार सम्भव हो सकता है। इसके साथ ही चिकित्सक के सुझावानुसार औषधियों का सेवन भी आवश्यक हो सकता है। मन की शान्ति, सकारात्मक तथा मृदु संवेदना और भक्ति में एकाग्रता के लिए राग भैरवी के कोमल स्वर प्रभावकारी सिद्ध होते हैं। इसी प्रकार विविध रागों के गायन-वादन के माध्यम से प्रातःकाल से रात्रिकालीन परिवेश में प्रभावकारी होता है। अलग-अलग स्वर-भावों और गीत के साहित्य के रसों के अनुसार उत्पन्न सशक्त भाव-प्रवाह के द्वारा डिप्रेशन, तनाव, चिन्ताविकृति आदि मानसिक समस्याओं का उपचार सम्भव है। इस श्रृंखला में हम विभिन्न रागो के स्वरो से उत्पन्न प्रभावों का क्रमशः विवेचन कर रहे हैं। श्रृंखला की इस समापन कड़ी में आज हम राग भैरवी के स्वरों से विभिन्न रोगों के उपचार पर चर्चा करेंगे और आपको पण्डित भीमसेन जोशी के स्वरों में राग भैरवी में निबद्ध दो खयाल रचना प्रस्तुत करेंगे। इसके साथ ही “स्वरगोष्ठी” की परम्परा के अनुसार 1981 में प्रदर्शित फिल्म “कुदरत” से इसी राग में पिरोया एक मधुर गीत विदुषी परवीन सुल्ताना के स्वर में प्रस्तुत करेंगे।



जाने-माने मयूर वीणा और इसराज वादक पण्डित श्रीकुमार मिश्र के अनुसार भारतीय रागदारी संगीत से राग भैरवी को अलग करने की कल्पना ही नहीं की जा सकती। यदि ऐसा किया गया तो मानव जाति प्रातःकालीन ऊर्जा की प्राप्ति से वंचित हो जाएगा। राग भैरवी मानसिक शान्ति प्रदान करता है। इसकी अनुपस्थिति से मनुष्य डिप्रेशन, उलझन, तनाव जैसी असामान्य मनःस्थितियों का शिकार हो सकता है। प्रातःकाल सूर्योदय का परिवेश परमशान्ति का सूचक होता है। ऐसी स्थिति में भैरवी के कोमल स्वर- ऋषभ, गान्धार, धैवत और निषाद, मस्तिष्क की संवेदना तंत्र को सहज ढंग से ग्राह्य होते है। कोमल स्वर मस्तिष्क में सकारात्मक हारमोन रसों का स्राव करते हैं। इससे मानव मानसिक और शारीरिक विसंगतियों से मुक्त रहता है। भैरवी के विभिन्न स्वरों के प्रभाव के विषय में श्री मिश्र ने बताया कि कोमल ऋषभ स्वर करुणा, दया और संवेदनशीलता का भाव सृजित करने में समर्थ है। कोमल गान्धार स्वर आशा का भाव, कोमल धैवत जागृति भाव और कोमल निषाद स्फूर्ति का सृजन करने में सक्षम होता है। भैरवी का शुद्ध मध्यम इन सभी भावों को गाम्भीर्य प्रदान करता है। धैवत की जागृति को पंचम स्वर सबल बनाता है। इस राग के प्रभाव से उत्पन्न हारमोन्स रस की ऊर्जा से उदर विकार, वायु विकार, हृदय रोग, स्नायु सम्बन्धी अस्वाभाविकता, ज्वर, डिप्रेशन, फोबिया, तनाव, अनिद्रा आदि की समस्याओं से मुक्ति प्राप्त हो सकती है। इस राग के गायन-वादन का सर्वाधिक उपयुक्त समय प्रातःकाल होता है। भैरवी के स्वरों की सार्थक अनुभूति कराने के लिए अब हमने राग भैरवी में निबद्ध दो खयाल का चुनाव किया है। इन खयाल में स्वर पण्डित भीमसेन जोशी के हैं।

राग भैरवी : विलम्बित ‘फुलवन गेंद से...’ और द्रुत खयाल- ‘हमसे पिया...’ : पं. भीमसेन जोशी


सम्पूर्ण जाति का राग भैरवी, भैरवी थाट का ही आश्रय राग माना जाता है। राग भैरवी में ऋषभ, गान्धार, धैवत और निषाद सभी कोमल स्वरों का प्रयोग किया जाता है। इस राग का वादी स्वर मध्यम और संवादी स्वर षडज होता है। राग भैरवी के आरोह स्वर हैं, सा, रे॒ (कोमल), ग॒ (कोमल), म, प, ध॒ (कोमल), नि॒ (कोमल), सां तथा अवरोह के स्वर, सां, नि॒ (कोमल), ध॒ (कोमल), प, म ग (कोमल), रे॒ (कोमल), सा होते हैं। यूँ तो इस राग के गायन-वादन का समय प्रातःकाल, सन्धिप्रकाश बेला में है, किन्तु आम तौर पर इसका गायन-वादन किसी संगीत-सभा अथवा समारोह के अन्त में किये जाने की परम्परा बन गई है।

नौवें दशक के आरम्भिक वर्ष अर्थात वर्ष 1981 में फिल्म ‘कुदरत’ प्रदर्शित हुई थी। इसके संगीतकार राहुलदेव बर्मन थे। उन्होने फिल्म के एक प्रसंग के लिए राग भैरवी के स्वरों में एक गीत की धुन बनाई। फिल्म में यह गीत दो भिन्न प्रसंगों में और दो भिन्न आवाज़ों में शामिल किया गया है। गीत का एक संस्करण पार्श्वगायक किशोर कुमार की आवाज़ में है तो दूसरा संस्करण विदुषी परवीन सुल्ताना की आवाज़ में है। आज हम आपको परवीन जी की आवाज़ में राग भैरवी के स्वरों में पिरोया वही गीत सुनवाते हैं। बेगम परवीन सुल्ताना का नाम देश की शीर्षस्थ गायिकाओं में शामिल है। उनका जन्म नौगाँव, असम में 10 जुलाई 1950 को एक संगीतप्रेमी परिवार में हुआ था। बचपन में ही उन्हें संगीत की शिक्षा अपने दादा मोहम्मद नजीब खाँ से मिली। बाद में बंगाल के जाने-माने संगीतज्ञ पण्डित चिन्मय लाहिड़ी से विधिवत प्रशिक्षण प्राप्त किया। पटियाला घराने की परम्परागत गायकी का मार्गदर्शन उन्हें उस्ताद दिलशाद खाँ ने प्रदान किया। बाद में उस्ताद दिलशाद खाँ से ही उनका विवाह हुआ। दोनों का पहला सार्वजनिक जुगलबन्दी गायन का प्रदर्शन अफगानिस्तान के जाशीन समारोह में हुआ था। परवीन जी का पहला एकल गायन का प्रदर्शन 1962 में मात्र 12 वर्ष की आयु में हुआ था और 1965 से ही उनके संगीत की रिकार्डिंग होने लगी थी। भारत सरकार ने उन्हें 1976 में ‘पद्मश्री’ सम्मान और इसी वर्ष यानी 2014 में ‘पद्मभूषण’ सम्मान प्रदान किया है। इसके अलावा 1986 में देश के प्रतिष्ठित ‘तानसेन पुरस्कार’ और 1999 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार’ से भी अलंकृत किया जा चुका है। परवीन सुल्ताना जी ने खयाल, ठुमरी, भजन के साथ ही कुछ फिल्मों में भी गीत गाये हैं। फिल्म ‘कुदरत’ के अलावा ‘दो बूँद पानी’, ‘पाकीजा’ और ‘गदर’ जैसी फिल्मों के गीत गाये हैं। आज की ‘स्वरगोष्ठी’ में फिल्म कुदरत का जो गीत हम प्रस्तुत कर रहे हैं, उसके बोल हैं- ‘हमें तुमसे प्यार कितना ये हम नहीं जानते...’। जैसा कि हमने पूर्व में उल्लेख किया है, इस गीत का एक और संस्करण पार्श्वगायक किशोर कुमार की आवाज में है। उस वर्ष के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए गीत के दोनों संस्करण नामित हुए थे, किन्तु पुरस्कार मिला, महिला वर्ग में परवीन जी के गाये इसी गीत को। इसके अलावा फिल्म के लेखक और निर्देशक सुप्रसिद्ध फ़िल्मकार चेतन आनन्द को सर्वश्रेष्ठ लेखन का फिल्मफेयर पुरस्कार भी प्राप्त हुआ था। इस गीत के संगीतकार राहुलदेव बर्मन और गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी हैं। परदे पर यह गीत सुप्रसिद्ध अभिनेत्री अरुणा ईरानी पर फिल्माया गया है। लीजिए, आप यह गीत सुनिए और मुझे आज के इस अंक को यहीं विराम देने की अनुमति दीजिए।

राग भैरवी : ‘हमें तुमसे प्यार कितना...’ : फिल्म – कुदरत : विदुषी परवीन सुल्ताना



संगीत पहेली

‘स्वरगोष्ठी’ के 385वें अंक की संगीत पहेली में आज हम आपको वर्ष 1955 में प्रदर्शित एक फिल्म से रागबद्ध गीत का अंश सुनवा रहे हैं। गीत के इस अंश को सुन कर आपको दो अंक अर्जित करने के लिए निम्नलिखित तीन में से कम से कम दो प्रश्नों के उत्तर देने आवश्यक हैं। यदि आपको तीन में से केवल एक अथवा तीनों प्रश्नों का उत्तर ज्ञात हो तो भी आप प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं। 390वें अंक की ‘स्वरगोष्ठी’ तक जिस प्रतिभागी के सर्वाधिक अंक होंगे, उन्हें वर्ष 2018 के चौथे सत्र का विजेता घोषित किया जाएगा। इसके साथ ही पूरे वर्ष के प्राप्तांकों की गणना के बाद वर्ष के अन्त में महाविजेताओं की घोषणा की जाएगी और उन्हें सम्मानित भी किया जाएगा।




1 – इस गीतांश को सुन कर बताइए कि इसमें किस राग का स्पर्श है?

2 – इस गीत में प्रयोग किये गए ताल को पहचानिए और उसका नाम बताइए।

3 – इस गीत में मुख्य स्वर किस उस्ताद गायक के हैं?

आप उपरोक्त तीन मे से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर केवल swargoshthi@gmail.com या radioplaybackindia@live.com पर ही शनिवार, 22 सितम्बर, 2018 की मध्यरात्रि से पूर्व तक भेजें। आपको यदि उपरोक्त तीन में से केवल एक प्रश्न का सही उत्तर ज्ञात हो तो भी आप पहेली प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं। COMMENTS में दिये गए उत्तर मान्य हो सकते हैं, किन्तु उसका प्रकाशन पहेली का उत्तर देने की अन्तिम तिथि के बाद किया जाएगा। “फेसबुक” पर पहेली का उत्तर स्वीकार नहीं किया जाएगा। विजेता का नाम हम उनके शहर, प्रदेश और देश के नाम के साथ ‘स्वरगोष्ठी’ के 387वें अंक में प्रकाशित करेंगे। इस अंक में प्रस्तुत गीत-संगीत, राग, अथवा कलासाधक के बारे में यदि आप कोई जानकारी या अपने किसी अनुभव को हम सबके बीच बाँटना चाहते हैं तो हम आपका इस संगोष्ठी में स्वागत करते हैं। आप पृष्ठ के नीचे दिये गए COMMENTS के माध्यम से तथा swargoshthi@gmail.com अथवा radioplaybackindia@live.com पर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं।


पिछली पहेली के विजेता

‘स्वरगोष्ठी’ की 383वें अंक की संगीत पहेली में हमने आपको वर्ष 1959 में प्रदर्शित फिल्म “चाचा ज़िंदाबाद” के एक रागबद्ध गीत का अंश सुनवा कर आपसे तीन में से किसी दो प्रश्न के उत्तर पूछा था। पहले प्रश्न का सही उत्तर है; राग – ललित, दूसरे प्रश्न का सही उत्तर है; ताल – तीनताल और तीसरे प्रश्न का सही उत्तर है; स्वर – लता मंगेशकर और मन्ना डे

“स्वरगोष्ठी” की इस पहेली प्रतियोगिता में तीनों अथवा तीन में से दो प्रश्नो के सही उत्तर देकर विजेता बने हैं; वोरहीज, न्यूजर्सी से डॉ. किरीट छाया, कल्याण, महाराष्ट्र से शुभा खाण्डेकर, चेरीहिल न्यूजर्सी से प्रफुल्ल पटेल, मैरिलैण्ड, अमेरिका से विजया राजकोटिया, जबलपुर, मध्यप्रदेश से क्षिति तिवारी, फिनिक्स, अमेरिका से मुकेश लाडीया और हैदराबाद से डी. हरिणा माधवी। उपरोक्त सभी प्रतिभागियों को ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ की ओर से हार्दिक बधाई। सभी प्रतिभागियों से अनुरोध है कि अपने पते के साथ कृपया अपना उत्तर ई-मेल से ही भेजा करें। इस पहेली प्रतियोगिता में हमारे नये प्रतिभागी भी हिस्सा ले सकते हैं। यह आवश्यक नहीं है कि आपको पहेली के तीनों प्रश्नों के सही उत्तर ज्ञात हो। यदि आपको पहेली का कोई एक भी उत्तर ज्ञात हो तो भी आप इसमें भाग ले सकते हैं।


अपनी बात

मित्रों, ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ पर जारी हमारी महत्त्वाकांक्षी श्रृंखला “राग से रोगोपचार” की चौदहवीं और समापन कड़ी में आपने कुछ शारीरिक और मनोशारीरिक रोगों के उपचार में सहयोगी राग भैरवी का परिचय प्राप्त किया। आपने पण्डित भीमसेन जोशी द्वारा प्रस्तुत राग भैरवी के दो खयाल रचनाओं का रसास्वादन किया। साथ ही आपने विदुषी परवीन सुल्ताना के स्वर में इस राग पर केन्द्रित एक फिल्मी गीत फिल्म “कुदरत” से सुना। हमें विश्वास है कि हमारे अन्य पाठक भी “स्वरगोष्ठी” के प्रत्येक अंक का अवलोकन करते रहेंगे और अपनी प्रतिक्रिया हमें भेजते रहेगे। आज के अंक और श्रृंखला के बारे में यदि आपको कुछ कहना हो तो हमें अवश्य लिखें। हमारी वर्तमान अथवा अगली श्रृंखला के लिए यदि आपका कोई सुझाव या अनुरोध हो तो हमें swargoshthi@gmail.com पर अवश्य लिखिए। अगले अंक में रविवार को प्रातः 7 बजे हम ‘स्वरगोष्ठी’ के इसी मंच पर एक बार फिर सभी संगीत-प्रेमियों का स्वागत करेंगे।


शोध व आलेख : पं. श्रीकुमार मिश्र   
सम्पादन व प्रस्तुति : कृष्णमोहन मिश्र   

रेडियो प्लेबैक इण्डिया 
राग भैरवी : SWARGOSHTHI – 385 : RAG BHAIRAVI : 16 सितम्बर, 2018

Tuesday, September 11, 2018

बोलती कहानियाँ: बेचैनी (लघुकथा)

लोकप्रिय स्तम्भ "बोलती कहानियाँ" के अंतर्गत हम हर सप्ताह आपको सुनवाते रहे हैं नई, पुरानी, अनजान, प्रसिद्ध, मौलिक और अनूदित, यानि के हर प्रकार की कहानियाँ। पिछली बार आपने शीतल माहेश्वरी के स्वर में शरद जोशी के व्यंग्य रेल यात्रा" का वाचन सुना था।

आज प्रस्तुत है दीपक मशाल की लघुकथा बेचैनी, जिसे स्वर दिया है शीतल माहेश्वरी ने।

प्रस्तुत लघुकथा "बेचैनी" का कुल प्रसारण समय 2 मिनट 26 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिकों, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।

कुछ बड़े लोगों से मिला था कभी,
तबसे कोई बड़ा नहीं लगता
इतनी बौनी है दुनिया कि कोई,
खड़ा हुआ भी खड़ा नहीं लगता
 ~ दीपक मशाल

हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी हिन्दी कहानी

"हाँ जी पहुँच गये हैं गेट पर।”
 (दीपक मशाल की लघुकथा "बेचैनी" से एक अंश)


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बेचैनी MP3

#19th Story, Bechaini; Dipak Mashal; Hindi Audio Book/2018/19. Voice: Sheetal Maheshwari

Sunday, September 9, 2018

राग ललित : SWARGOSHTHI – 384 : RAG LALIT






स्वरगोष्ठी – 384 में आज

राग से रोगोपचार – 13 : सूर्योदय से पूर्व का राग ललित

नवचेतना, आशा और मनोबल का संचार करने में सहायक है यह राग




उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ
लता मंगेशकर
‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ के मंच पर जारी हमारी श्रृंखला “राग से रोगोपचार” की तेरहवीं कड़ी में मैं कृष्णमोहन मिश्र, इस श्रृंखला के लेखक, संगीतज्ञ और इसराज तथा मयूरवीणा के सुविख्यात वादक पण्डित श्रीकुमार मिश्र के साथ आप सब संगीत-प्रेमियों का हार्दिक स्वागत करता हूँ। मानव का शरीर प्रकृति की अनुपम देन है। बाहरी वातावरण के प्रतिकूल प्रभाव से मानव के तन और मन में प्रायः कुछ विकृतियाँ उत्पन्न हो जाती हैं। इन विकृतियों को दूर करने के लिए हम विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों की शरण में जाते हैं। पूरे विश्व में रोगोपचार की अनेक पद्धतियाँ प्रचलित है। भारत में हजारों वर्षों से योग से रोगोपचार की परम्परा जारी है। प्राणायाम का तो पूरा आधार ही श्वसन क्रिया पर केन्द्रित होता है। संगीत में स्वरोच्चार भी श्वसन क्रिया पर केन्द्रित होते हैं। भारतीय संगीत में 7 शुद्ध, 4 कोमल और 1 तीव्र, अर्थात कुल 12 स्वरों का प्रयोग होता है। इन्हीं स्वरों के संयोजन से राग की उत्पत्ति होती है। स्वर-योग या श्रव्य माध्यम से गायन या वादन के सुरीले, भावप्रधान और प्रभावकारी नाद अर्थात संगीत हमारे मस्तिष्क के संवेदनशील भागों में प्रवेश करता है। मस्तिष्क में नाद के प्रभाव का विश्लेषण होता है। ग्राह्य और उपयोगी नाद को मस्तिष्क सुरक्षित कर लेता है जहाँ नाद की परमाणु ऊर्जा के प्रभाव से सशक्त और उत्तम कोटि के हारमोन्स का सृजन होता है। यह हारमोन्स शरीर की समस्त कोशिकाओं में व्याप्त हो जाता है। इसकी ऊर्जा से अनेक मानसिक और मनोदैहिक समस्याओं का उपचार सम्भव हो सकता है। इसके साथ ही चिकित्सक के सुझावानुसार औषधियों का सेवन भी आवश्यक हो सकता है। मन की शान्ति, सकारात्मक तथा मृदु संवेदना और भक्ति में एकाग्रता के लिए राग भैरवी के कोमल स्वर प्रभावकारी सिद्ध होते हैं। इसी प्रकार विविध रागों के गायन-वादन के माध्यम से प्रातःकाल से रात्रिकालीन परिवेश में प्रभावकारी होता है। अलग-अलग स्वर-भावों और गीत के साहित्य के रसों के अनुसार उत्पन्न सशक्त भाव-प्रवाह के द्वारा डिप्रेशन, तनाव, चिन्ताविकृति आदि मानसिक समस्याओं का उपचार सम्भव है। इस श्रृंखला में हम विभिन्न रागो के स्वरो से उत्पन्न प्रभावों का क्रमशः विवेचन कर रहे हैं। श्रृंखला की तेरहवीं कड़ी में आज हम राग ललित के स्वरों से विभिन्न रोगों के उपचार पर चर्चा करेंगे और आपको उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ की शहनाई के स्वरों में राग ललित की एक मोहक रचना प्रस्तुत करेंगे। इसके साथ ही “स्वरगोष्ठी” की परम्परा के अनुसार 1959 में प्रदर्शित फिल्म “चाचा ज़िन्दाबाद” से इसी राग में पिरोया एक मधुर गीत मन्ना डे और लता मंगेशकर के स्वर में प्रस्तुत करेंगे।



दुखद परिस्थिति से पीड़ित मन को भोर में साढ़े चार बजे से पाँच के दौरान नींद से जागने पर जब राग ललित का भावप्रधान गायन या वादन सुनने का अवसर मिलता है, तब उसके मन को काफी शान्ति प्राप्त होती है। उसके मन में नवचेतना, आशा और मनोबल का संचार होता है। राग ललित का वादी स्वर मध्यम और संवादी स्वर षडज होता है। इस राग में दोनों प्रकार के मध्यम स्वर का उपयोग होता है। जब शुद्ध मध्यम से तीव्र मध्यम का स्वर संयोग करते हैं तो एक श्रुत्यान्तर का तीव्र मध्यम प्रयोग किया जाता है। परन्तु जब गान्धार या कोमल धैवत पर लौटना हो तो दो श्रुत्यान्तर तीव्र मध्यम प्रयोग होगा। प्रथम प्रयोग से अपार शान्ति मिलेगी तथा दूसरे प्रयोग से आशा और नवचेतना का संचार होगा। तनाव, चिन्ताविकृति, डिप्रेसन आदि को दूर का रास्ता दिखाने तथा उक्त मनःस्थिति के कारण उत्पन्न होने वाली शारीरिक विकारों; जैसे धड़कन में वृद्धि, श्वास की समस्या, उदर विकार, सिर में दर्द आदि परेशानियों का निदान करने की क्षमता राग ललित में है। आपको राग ललित का उदाहरण सुनवाने के लिए हमने विश्वविख्यात शहनाईनवाज उस्ताद बिस्मिलाह खाँ की शहनाई को चुना है। उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ अपनी शहनाई पर राग ललित में तीनताल की निबद्ध गत प्रस्तुत कर रहे हैं। लीजिए, आप भी इस मधुर शहनाई पर राग ललित का रसास्वादन कीजिए।

राग ललित : शहनाई पर तीनताल की गत : उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ


आज के अंक में अब हम आपसे राग ललित की संरचना पर कुछ चर्चा कर रहे हैं। राग ललित, भारतीय संगीत का अत्यन्त मधुर राग है। यह राग पूर्वी थाट के अन्तर्गत माना जाता है। इस राग में कोमल ऋषभ, कोमल धैवत तथा दोनों मध्यम स्वरों का प्रयोग किया जाता है। आरोह और अवरोह दोनों में पंचम स्वर पूर्णतः वर्जित होता है। इसीलिए इस राग की जाति षाड़व-षाड़व होती है। अर्थात, राग के आरोह और अवरोह में 6-6 स्वरों का प्रयोग होता है। पण्डित विष्णु नारायण भातखण्डे जी ने राग ललित में शुद्ध धैवत के प्रयोग को माना है। उनके अनुसार यह राग मारवा थाट के अन्तर्गत आता है। राग ललित की जो स्वर-संरचना है उसके अनुसार यह राग किसी भी थाट के अनुकूल नहीं है। मारवा थाट के स्वरों से राग ललित के स्वर बिलकुल मेल नहीं खाते। राग ललित में शुद्ध मध्यम स्वर बहुत प्रबल है और यह राग का वादी स्वर भी है। इसके विपरीत मारवा में शुद्ध मध्यम सर्वथा वर्जित होता है। राग का वादी स्वर शुद्ध मध्यम और संवादी स्वर षडज होता है।

मन्ना डे
आज हमने इस राग के फिल्मी उदाहरण के लिए संगीतकार मदन मोहन के जिस गीत को हमने चुना है, वह है फ़िल्म ’चाचा ज़िन्दाबाद’ से। लता मंगेशकर और मन्ना डे की युगल आवाज़ों में "प्रीतम दरस दिखाओ..." शास्त्रीय संगीत पर आधारित बनने वाले फ़िल्मी गीतों में विशेष स्थान रखता है। 1959 में निर्मित इस फ़िल्म का गीत-संगीत बिल्कुल असाधारण था। फ़िल्म में एक स्थिति ऐसी थी कि नायिका अपने गुरु से शास्त्रीय संगीत सीख रही है। इस स्थिति के लिए मदन मोहन ने राजेन्द्र कृष्ण से "प्रीतम दरस दिखाओ..." गीत लिखवा कर राग ललित में उसे स्वरबद्ध किया। उनकी इच्छा थी कि इस गीत को उस्ताद अमीर ख़ाँ साहब और लता मंगेशकर गाएँ। लेकिन जब लता जी के कानों में यह ख़बर पहुँची कि मदन जी उनके साथ उस्ताद अमीर ख़ाँ साहब को गवाने की सोच रहे हैं, वो पीछे हो गईं। उन्होंने निर्माता ओम प्रकाश और मदन मोहन से कहा कि उन्हें इस गीत के लिए माफ़ कर दिया जाए और किसी अन्य गायिका को ख़ाँ साहब के साथ गवाया जाए। मदन मोहन अजीब स्थिति में फँस गए। वो लता जी के सिवाय किसी और से यह गीत गवाने की सोच नहीं सकते थे, और दूसरी तरफ़ ख़ाँ साहब को गवाने की भी उनकी तीव्र इच्छा थी। जब उन्होंने लता जी से कारण पूछा तो लता जी ने उन्हें कहा कि वो इतने बड़े शास्त्रीय गायक के साथ गाने में बहुत नर्वस फ़ील करेंगी जिनकी वो बहुत ज़्यादा इज़्ज़त करती हैं। लता जी ने भले उस समय यह कारण बताया हो, पर कुछ और कारण भी थे। वो नहीं चाहती थीं कि उनके साथ ख़ाँ साहब की तुलनात्मक विश्लेषण लोग करे। अन्ततः "प्रीतम दरस दिखाओ...” को मन्ना डे और लता जी ने गाया। लीजिए, अब आप राग ललित के स्वरों में यह प्यारा युगल गीत सुनिए और मुझे आज के इस अंक को यहीं विराम देने की अनुमति दीजिए।

राग ललित : ‘प्रीतम दरस दिखाओ...’ : मन्ना डे और लता मंगेशकर : फिल्म – चाचा ज़िन्दाबाद



संगीत पहेली

‘स्वरगोष्ठी’ के 384वें अंक की संगीत पहेली में आज हम आपको वर्ष 1980 में प्रदर्शित एक फिल्म से रागबद्ध गीत का अंश सुनवा रहे हैं। गीत के इस अंश को सुन कर आपको दो अंक अर्जित करने के लिए निम्नलिखित तीन में से कम से कम दो प्रश्नों के उत्तर देने आवश्यक हैं। यदि आपको तीन में से केवल एक अथवा तीनों प्रश्नों का उत्तर ज्ञात हो तो भी आप प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं। 390वें अंक की ‘स्वरगोष्ठी’ तक जिस प्रतिभागी के सर्वाधिक अंक होंगे, उन्हें वर्ष 2018 के चौथे सत्र का विजेता घोषित किया जाएगा। इसके साथ ही पूरे वर्ष के प्राप्तांकों की गणना के बाद वर्ष के अन्त में महाविजेताओं की घोषणा की जाएगी और उन्हें सम्मानित भी किया जाएगा।






1 – इस गीतांश को सुन कर बताइए कि इसमें किस राग का आधार है?

2 – इस गीत में प्रयोग किये गए ताल को पहचानिए और उसका नाम बताइए।

3 – इस गीत को किस विदुषी गायिका ने स्वर दिया है?

आप उपरोक्त तीन मे से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर केवल swargoshthi@gmail.com या radioplaybackindia@live.com पर ही शनिवार, 15 सितम्बर, 2018 की मध्यरात्रि से पूर्व तक भेजें। आपको यदि उपरोक्त तीन में से केवल एक प्रश्न का सही उत्तर ज्ञात हो तो भी आप पहेली प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं। COMMENTS में दिये गए उत्तर मान्य हो सकते हैं, किन्तु उसका प्रकाशन पहेली का उत्तर देने की अन्तिम तिथि के बाद किया जाएगा। “फेसबुक” पर पहेली का उत्तर स्वीकार नहीं किया जाएगा। विजेता का नाम हम उनके शहर, प्रदेश और देश के नाम के साथ ‘स्वरगोष्ठी’ के 386वें अंक में प्रकाशित करेंगे। इस अंक में प्रस्तुत गीत-संगीत, राग, अथवा कलासाधक के बारे में यदि आप कोई जानकारी या अपने किसी अनुभव को हम सबके बीच बाँटना चाहते हैं तो हम आपका इस संगोष्ठी में स्वागत करते हैं। आप पृष्ठ के नीचे दिये गए COMMENTS के माध्यम से तथा swargoshthi@gmail.com अथवा radioplaybackindia@live.com पर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं।


पिछली पहेली के विजेता

‘स्वरगोष्ठी’ की 382वें अंक की संगीत पहेली में हमने आपको वर्ष 1961 में प्रदर्शित फिल्म “स्त्री” के एक रागबद्ध गीत का अंश सुनवा कर आपसे तीन में से किसी दो प्रश्न के उत्तर पूछा था। पहले प्रश्न का सही उत्तर है; राग – बसन्त, दूसरे प्रश्न का सही उत्तर है; ताल – तीनताल व दादरा और तीसरे प्रश्न का सही उत्तर है; स्वर – आशा भोसले और महेन्द्र कपूर

“स्वरगोष्ठी” की इस पहेली प्रतियोगिता में तीनों अथवा तीन में से दो प्रश्नो के सही उत्तर देकर विजेता बने हैं; वोरहीज, न्यूजर्सी से डॉ. किरीट छाया, फिनिक्स, अमेरिका से मुकेश लाडीया, चेरीहिल न्यूजर्सी से प्रफुल्ल पटेल, मैरिलैण्ड, अमेरिका से विजया राजकोटिया, जबलपुर, मध्यप्रदेश से क्षिति तिवारी, नवीन मुम्बई, महाराष्ट्र से शिरीष ओक और हैदराबाद से डी. हरिणा माधवी। उपरोक्त सभी प्रतिभागियों को ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ की ओर से हार्दिक बधाई। सभी प्रतिभागियों से अनुरोध है कि अपने पते के साथ कृपया अपना उत्तर ई-मेल से ही भेजा करें। इस पहेली प्रतियोगिता में हमारे नये प्रतिभागी भी हिस्सा ले सकते हैं। यह आवश्यक नहीं है कि आपको पहेली के तीनों प्रश्नों के सही उत्तर ज्ञात हो। यदि आपको पहेली का कोई एक भी उत्तर ज्ञात हो तो भी आप इसमें भाग ले सकते हैं।


अपनी बात

मित्रों, ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ पर जारी हमारी महत्त्वाकांक्षी श्रृंखला “राग से रोगोपचार” की तेरहवीं कड़ी में आपने कुछ शारीरिक और मनोशारीरिक रोगों के उपचार में सहयोगी राग ललित का परिचय प्राप्त किया। आपने उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ द्वारा शहनाई पर प्रस्तुत राग बसन्त की एक रचना का रसास्वादन किया। साथ ही आपने मन्ना डे और लता मंगेशकर के स्वर में इस राग पर केन्द्रित एक फिल्मी गीत फिल्म “चाचा ज़िन्दाबाद” से सुना। हमें विश्वास है कि हमारे अन्य पाठक भी “स्वरगोष्ठी” के प्रत्येक अंक का अवलोकन करते रहेंगे और अपनी प्रतिक्रिया हमें भेजते रहेगे। आज के अंक के बारे में यदि आपको कुछ कहना हो तो हमें अवश्य लिखें। हमारी वर्तमान अथवा अगली श्रृंखला के लिए यदि आपका कोई सुझाव या अनुरोध हो तो हमें  swargoshthi@gmail.com पर अवश्य लिखिए। अगले अंक में रविवार को प्रातः 7 बजे हम ‘स्वरगोष्ठी’ के इसी मंच पर एक बार फिर सभी संगीत-प्रेमियों का स्वागत करेंगे।


शोध व आलेख : पं. श्रीकुमार मिश्र   
सम्पादन व प्रस्तुति : कृष्णमोहन मिश्र   

रेडियो प्लेबैक इण्डिया 

राग ललित : SWARGOSHTHI – 384 : RAG LALIT : 9 सितम्बर, 2018

Tuesday, September 4, 2018

ऑडियो कहानी: रेल यात्रा (शरद जोशी)

'सुनो कहानी' स्तम्भ के अंतर्गत हम आपको सुनवा रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने कान्ता राॅय लिखित लघुकथा "साइकिल चोर" का पॉडकास्ट शीतल माहेश्वरी के स्वर में सुना था। आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं शरद जोशी लिखित व्यंग्य "रेल यात्रा", जिसको स्वर दिया है शीतल माहेश्वरी ने।

प्रस्तुत व्यंग्य का गद्य "हिन्दी समय" पर उपलब्ध है। "रेल यात्रा" का कुल प्रसारण समय 11 मिनट 16 सेकंड है। सुनिए और बताइये कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं हमसे संपर्क करें। अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।



लेखन मेरा निजी उद्देश्य है ... मैं इससे बचकर जा भी नहीं सकता।
~ पद्मश्री शरद जोशी (जन्म 21 मई 1931; उज्जैन)

हर शनिवार को आवाज़ पर सुनें एक नयी कहानी

सामान रख दोगे तो बैठोगे कहाँ? बैठ जाओगे तो सामान कहाँ रखोगे? दोनों कर दोगे तो दूसरा कहाँ बैठेगा? वो बैठ गया तो तुम कहाँ खड़े रहोगे? खड़े हो गये तो सामान कहाँ रहेगा?
(शरद जोशी के व्यंग्य "रेल यात्रा" से एक अंश)

नीचे के प्लेयर से सुनें.
(प्लेयर पर एक बार क्लिक करें, कंट्रोल सक्रिय करें फ़िर 'प्ले' पर क्लिक करें।)

यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाउनलोड कर लें:
रेल यात्रा MP3

#18th Story, Rail Yatra: Sharad Joshi/Hindi Audio Book/2018/18. Voice: Sheetal Maheshwari

Sunday, September 2, 2018

राग बसन्त : SWARGOSHTHI – 383 : RAG BASANT






स्वरगोष्ठी – 383 में आज


राग से रोगोपचार – 12 : ऋतु प्रधान राग बसन्त


गहरी निद्रा दिलाने में राग सोहनी का पूरक है राग बसन्त



पण्डित भीमसेन जोशी
आशा भोसले और महेन्द्र कपूर
‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ के मंच पर जारी हमारी श्रृंखला “राग से रोगोपचार” की बारहवीं कड़ी में मैं कृष्णमोहन मिश्र, इस श्रृंखला के लेखक, संगीतज्ञ और इसराज तथा मयूरवीणा के सुविख्यात वादक पण्डित श्रीकुमार मिश्र के साथ आप सब संगीत-प्रेमियों का हार्दिक स्वागत करता हूँ। मानव का शरीर प्रकृति की अनुपम देन है। बाहरी वातावरण के प्रतिकूल प्रभाव से मानव के तन और मन में प्रायः कुछ विकृतियाँ उत्पन्न हो जाती हैं। इन विकृतियों को दूर करने के लिए हम विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों की शरण में जाते हैं। पूरे विश्व में रोगोपचार की अनेक पद्धतियाँ प्रचलित है। भारत में हजारों वर्षों से योग से रोगोपचार की परम्परा जारी है। प्राणायाम का तो पूरा आधार ही श्वसन क्रिया पर केन्द्रित होता है। संगीत में स्वरोच्चार भी श्वसन क्रिया पर केन्द्रित होते हैं। भारतीय संगीत में 7 शुद्ध, 4 कोमल और 1 तीव्र, अर्थात कुल 12 स्वरों का प्रयोग होता है। इन्हीं स्वरों के संयोजन से राग की उत्पत्ति होती है। स्वर-योग या श्रव्य माध्यम से गायन या वादन के सुरीले, भावप्रधान और प्रभावकारी नाद अर्थात संगीत हमारे मस्तिष्क के संवेदनशील भागों में प्रवेश करता है। मस्तिष्क में नाद के प्रभाव का विश्लेषण होता है। ग्राह्य और उपयोगी नाद को मस्तिष्क सुरक्षित कर लेता है जहाँ नाद की परमाणु ऊर्जा के प्रभाव से सशक्त और उत्तम कोटि के हारमोन्स का सृजन होता है। यह हारमोन्स शरीर की समस्त कोशिकाओं में व्याप्त हो जाता है। इसकी ऊर्जा से अनेक मानसिक और मनोदैहिक समस्याओं का उपचार सम्भव हो सकता है। इसके साथ ही चिकित्सक के सुझावानुसार औषधियों का सेवन भी आवश्यक हो सकता है। मन की शान्ति, सकारात्मक तथा मृदु संवेदना और भक्ति में एकाग्रता के लिए राग भैरवी के कोमल स्वर प्रभावकारी सिद्ध होते हैं। इसी प्रकार विविध रागों के गायन-वादन के माध्यम से प्रातःकाल से रात्रिकालीन परिवेश में प्रभावकारी होता है। अलग-अलग स्वर-भावों और गीत के साहित्य के रसों के अनुसार उत्पन्न सशक्त भाव-प्रवाह के द्वारा डिप्रेशन, तनाव, चिन्ताविकृति आदि मानसिक समस्याओं का उपचार सम्भव है। इस श्रृंखला में हम विभिन्न रागो के स्वरो से उत्पन्न प्रभावों का क्रमशः विवेचन कर रहे हैं। श्रृंखला की बारहवीं कड़ी में आज हम राग बसन्त के स्वरों से विभिन्न रोगों के उपचार पर चर्चा करेंगे और आपको पण्डित भीमसेन जोशी के स्वरों में राग बसन्त की एक खयाल रचना प्रस्तुत करेंगे। इसके साथ ही “स्वरगोष्ठी” की परम्परा के अनुसार 1961 में प्रदर्शित फिल्म “स्त्री” से इसी राग में पिरोया एक मधुर गीत आशा भोसले, महेन्द्र कपूर और साथियों के स्वर में प्रस्तुत करेंगे।

राग बसन्त का वादी स्वर षडज और संवादी स्वर पंचम है। इस राग के गायन-वादन का सटीक समय रात्रि के चतुर्थ प्रहर में 3 बजे से साढ़े 4 बजे के मध्य है। परन्तु बसन्त ऋतु में इसे किसी भी समय गाया-बजाया जा सकता है। इस राग के बाद ललित, भैरव आदि रागों का समय आरम्भ होता है। विरह या चिन्ताविकृति से ग्रस्त व्यक्ति, तनाव, कुंठा, फोबिया, पैनिकडिसार्डर, हिस्टीरिया, विषाद एवं अनेक मनोदैहिक विकृतियों का उपचार राग सोहनी से करने के बाद मन की शान्ति और निद्रा का अनुभव हो तो राग बसन्त का उपचार सर्वथा उपयोगी हो सकता है। रात्रि के चतुर्थ प्रहर में शान्त, शीतल और सुखदायी वातावरण में राग बसन्त का प्रभाव मन और शरीर पर अवश्य पड़ता है। ऐसा विश्वास है कि उपरोक्त समस्याओं के निदान में राग बसन्त का श्रवण करने पर काफी शान्ति व सुख की प्राप्ति हो सकती है। ‘नान रैपिड आई मूवमेंट स्लीप’ का आनन्द मरीज को प्राप्त हो सकता है। एक महीने तक रागात्मक प्रक्रिया के अन्तर्गत यदि उपचार किया जाए तो पीड़ितको इन समस्याओं से मुक्ति मिल सकती है। अब हम आपको राग बसन्त की एक रचना सुनवाते हैं। सात दशक तक भारतीय संगीताकाश पर छाए रहने वाले पण्डित भीमसेन जोशी का भारतीय संगीत की विविध विधाओं; ध्रुवपद, खयाल, तराना, ठुमरी, भजन, अभंग आदि सभी पर समान अधिकार था। उनकी खरज भरी आवाज़ का श्रोताओं पर जादुई असर होता था। बन्दिश को वे जिस माधुर्य के साथ बढ़त देते थे, उसे केवल अनुभव ही किया जा सकता है। तानें तो उनके कण्ठ में दासी बन कर विचरती थी। संगीत-जगत के सर्वोच्च स्थान पर प्रतिष्ठित होने के बावजूद स्वयं अपने बारे में बातचीत करने के मामले में वे संकोची रहे। आइए भारत के इस अनमोल रत्न के स्वर में एक रचना सुनते हैं। अब आप सुनिए; पण्डित भीमसेन जोशी के स्वर में राग बसन्त की तीनताल में निबद्ध यह मनोहारी प्रस्तुति। तबला पर पण्डित नाना मुले और हारमोनियम पर पुरुषोत्तम तलवलकर ने संगति की है।

राग बसन्त : ‘फगवा ब्रज देखन को चलो री...’ : स्वर – पण्डित भीमसेन जोशी




राग बसन्त ऋतु प्रधान राग है। बसन्त ऋतु में इसे किसी भी समय गाया-बजाया जा सकता है। अन्य अवसरों पर इस राग को रात्रि के तीसरे प्रहर में गाने-बजाने की परम्परा है। पूर्वी थाट के अन्तर्गत आने वाले इस राग की जाति औडव-सम्पूर्ण होती है, आरोह में पाँच स्वर और अवरोह में सात स्वर प्रयोग किये जाते हैं। आरोह के स्वर हैं- स, ग, म॑, (कोमल), नि, सं, तथा अवरोह के स्वर हैं- सं, नि, (कोमल), प, म॑, ग, रे, स। इस राग में ललित अंग से दोनों मध्यम का प्रयोग होता है। आरोह में ऋषभ और पंचम स्वर वर्जित है। राग बसन्त का वादी स्वर षडज और संवादी स्वर पंचम होता है। कभी-कभी संवादी स्वर के रूप में मध्यम का प्रयोग भी होता है। यह एक प्राचीन राग है। ‘रागमाला’ में इसे हिंडोल का पुत्र कहा गया है। अब आप राग बसन्त पर आधारित एक फिल्मी गीत सुनिए। वर्ष 1961 में वी. शान्ताराम की फिल्म “स्त्री” का प्रदर्शन हुआ था। इस फिल्म का एक गीत; “बसन्त है आया रंगीला...” राग बसन्त पर आधारित है। गीत को स्वर दिया है आशा भोसले, महेन्द्र कपूर और साथियों और संगीतकार सी. रामचन्द्र हैं। आप यह गीत सुनिए और हमें आज के इस अंक को यहीं विराम देने की अनुमति दीजिए।

राग बसन्त : “बसन्त है आया रंगीला...” : आशा भोसले, महेन्द्र कपूर और साथी



संगीत पहेली

‘स्वरगोष्ठी’ के 383वें अंक की संगीत पहेली में आज हम आपको वर्ष 1959 में प्रदर्शित एक फिल्म से रागबद्ध गीत का अंश सुनवा रहे हैं। गीत के इस अंश को सुन कर आपको दो अंक अर्जित करने के लिए निम्नलिखित तीन में से कम से कम दो प्रश्नों के उत्तर देने आवश्यक हैं। यदि आपको तीन में से केवल एक अथवा तीनों प्रश्नों का उत्तर ज्ञात हो तो भी आप प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं। 390वें अंक की ‘स्वरगोष्ठी’ तक जिस प्रतिभागी के सर्वाधिक अंक होंगे, उन्हें वर्ष 2018 के चौथे सत्र का विजेता घोषित किया जाएगा। इसके साथ ही पूरे वर्ष के प्राप्तांकों की गणना के बाद वर्ष के अन्त में महाविजेताओं की घोषणा की जाएगी और उन्हें सम्मानित भी किया जाएगा।





1 – इस गीतांश को सुन कर बताइए कि इसमें किस राग का स्पर्श है?

2 – इस गीत में प्रयोग किये गए ताल को पहचानिए और उसका नाम बताइए।

3 – इस गीत को किन युगल गायकों ने स्वर दिया है?

आप उपरोक्त तीन मे से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर केवल swargoshthi@gmail.com या radioplaybackindia@live.com पर ही शनिवार, 8 सितम्बर, 2018 की मध्यरात्रि से पूर्व तक भेजें। आपको यदि उपरोक्त तीन में से केवल एक प्रश्न का सही उत्तर ज्ञात हो तो भी आप पहेली प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं। COMMENTS में दिये गए उत्तर मान्य हो सकते हैं, किन्तु उसका प्रकाशन पहेली का उत्तर देने की अन्तिम तिथि के बाद किया जाएगा। “फेसबुक” पर पहेली का उत्तर स्वीकार नहीं किया जाएगा। विजेता का नाम हम उनके शहर, प्रदेश और देश के नाम के साथ ‘स्वरगोष्ठी’ के 385वें अंक में प्रकाशित करेंगे। इस अंक में प्रस्तुत गीत-संगीत, राग, अथवा कलासाधक के बारे में यदि आप कोई जानकारी या अपने किसी अनुभव को हम सबके बीच बाँटना चाहते हैं तो हम आपका इस संगोष्ठी में स्वागत करते हैं। आप पृष्ठ के नीचे दिये गए COMMENTS के माध्यम से तथा swargoshthi@gmail.com अथवा radioplaybackindia@live.com पर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं।


पिछली पहेली के विजेता

‘स्वरगोष्ठी’ की 381वें अंक की संगीत पहेली में हमने आपको वर्ष 1960 में प्रदर्शित फिल्म “मुगल-ए-आजम” के एक रागबद्ध गीत का अंश सुनवा कर आपसे तीन में से किसी दो प्रश्न के उत्तर पूछा था। पहले प्रश्न का सही उत्तर है; राग – सोहनी, दूसरे प्रश्न का सही उत्तर है; ताल – दीपचन्दी और तीसरे प्रश्न का सही उत्तर है; स्वर – उस्ताद बड़े गुलाम अली खाँ

“स्वरगोष्ठी” की इस पहेली प्रतियोगिता में तीनों अथवा तीन में से दो प्रश्नो के सही उत्तर देकर विजेता बने हैं; चेरीहिल न्यूजर्सी से प्रफुल्ल पटेल, वोरहीज, न्यूजर्सी से डॉ. किरीट छाया, मैरिलैण्ड, अमेरिका से विजया राजकोटिया, जबलपुर, मध्यप्रदेश से क्षिति तिवारी, फिनिक्स, अमेरिका से मुकेश लढ़िया और हैदराबाद से डी. हरिणा माधवी। उपरोक्त सभी प्रतिभागियों को ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ की ओर से हार्दिक बधाई। सभी प्रतिभागियों से अनुरोध है कि अपने पते के साथ कृपया अपना उत्तर ई-मेल से ही भेजा करें। इस पहेली प्रतियोगिता में हमारे नये प्रतिभागी भी हिस्सा ले सकते हैं। यह आवश्यक नहीं है कि आपको पहेली के तीनों प्रश्नों के सही उत्तर ज्ञात हो। यदि आपको पहेली का कोई एक भी उत्तर ज्ञात हो तो भी आप इसमें भाग ले सकते हैं।


अपनी बात

मित्रों, ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ पर जारी हमारी महत्त्वाकांक्षी श्रृंखला “राग से रोगोपचार” की बारहवीं कड़ी में आपने कुछ शारीरिक और मनोशारीरिक रोगों के उपचार में सहयोगी राग बसन्त का परिचय प्राप्त किया। आपने पण्डित भीमसेन जोशी द्वारा प्रस्तुत राग बसन्त की एक रचना का रसास्वादन किया। साथ ही आपने आशा भोसले, महेन्द्र कपूर और साथियों के स्वर में इस राग पर केन्द्रित एक फिल्मी गीत फिल्म “स्त्री” से सुना। हमें विश्वास है कि हमारे अन्य पाठक भी “स्वरगोष्ठी” के प्रत्येक अंक का अवलोकन करते रहेंगे और अपनी प्रतिक्रिया हमें भेजते रहेगे। आज के अंक के बारे में यदि आपको कुछ कहना हो तो हमें अवश्य लिखें। हमारी वर्तमान अथवा अगली श्रृंखला के लिए यदि आपका कोई सुझाव या अनुरोध हो तो हमें  swargoshthi@gmail.com पर अवश्य लिखिए। अगले अंक में रविवार को प्रातः 7 बजे हम ‘स्वरगोष्ठी’ के इसी मंच पर एक बार फिर सभी संगीत-प्रेमियों का स्वागत करेंगे।


शोध व आलेख : पं. श्रीकुमार मिश्र   
सम्पादन व प्रस्तुति : कृष्णमोहन मिश्र   
रेडियो प्लेबैक इण्डिया 
राग बसन्त : SWARGOSHTHI – 383 : RAG BASANT : 2 सितम्बर, 2018

Tuesday, August 28, 2018

ऑडियो: साइकिल चोर (कान्ता राॅय)

इस लोकप्रिय स्तम्भ "बोलती कहानियाँ" के अंतर्गत हम हर सप्ताह आपको सुनवाते रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछली बार आपने स्पेन से पूजा अनिल के स्वर में के स्वर में सुधीर द्विवेदी की लघुकथा  "एक बार फिर" का वाचन सुना था।

आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं कांता रॉय की लघुकथा 'साइकिल चोर', शीतल माहेश्वरी के स्वर में।

प्रस्तुत लघुकथा का गद्य "सेतु पत्रिका" पर उपलब्ध है। "साइकिल चोर" का कुल प्रसारण समय 2 मिनट 2 सेकंड है। सुनिए और बताइये कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें।



कान्ता राॅय: हिंदी लेखिका संघ मध्यप्रदेश, अखिल भारतीय साहित्य परिषद, मध्यप्रदेश लेखक संघ , कलामंदिर भोपाल, विश्व मैत्री संघ मुंबई. सेवाभारती, आनंद आश्रम भोपाल की आजीवन सदस्य, राष्ट्रभाषा प्रचार समिति की सम्मानित सदस्य।

वाचिका: शीतल माहेश्वरी - पुणे निवासी शीतल माहेश्वरी ने चाइल्ड एजुकेशन में डिप्लोमा किया है। पढ़ने ओर लिखने में रूचि के साथ-साथ चित्रकारी का भी शौक है।

हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी हिन्दी कहानी


"हाँ, शायद वही है।" चश्मे को ठीक करते हुए आँख चुराकर उसने जबाव दिया।
 (कान्ता राॅय कृत 'साइकिल चोर' से एक अंश)


नीचे के प्लेयर से सुनें.


(प्लेयर पर एक बार क्लिक करें, कंट्रोल सक्रिय करें फ़िर 'प्ले' पर क्लिक करें।)
यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाऊनलोड कर लें:
साइकिल चोर MP3

#Seventeenth Story, Cycle Chor Kanta Roy; Hindi Audio Book/2018/17. Voice: Sheetal Maheshwari

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