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Thursday, October 8, 2009

मन को अति भावे सैयां....ताजा सुर ताल पर शंकर, हरिहरण, अलीशा और मर्दानी सुनिधि का धमाल

ताजा सुर ताल TST (28)

दोस्तों, ताजा सुर ताल यानी TST पर आपके लिए है एक ख़ास मौका और एक नयी चुनौती भी. TST के हर एपिसोड में आपके लिए होंगें तीन नए गीत. और हर गीत के बाद हम आपको देंगें एक ट्रिविया यानी हर एपिसोड में होंगें ३ ट्रिविया, हर ट्रिविया के सही जवाब देने वाले हर पहले श्रोता की मिलेंगें २ अंक. ये प्रतियोगिता दिसम्बर माह के दूसरे सप्ताह तक चलेगी, यानी 5 ओक्टुबर के एपिसोडस से लगभग अगले 20 एपिसोडस तक, जिसके समापन पर जिस श्रोता के होंगें सबसे अधिक अंक, वो चुनेगा आवाज़ की वार्षिक गीतमाला के ६० गीतों में से पहली १० पायदानों पर बजने वाले गीत. इसके अलावा आवाज़ पर उस विजेता का एक ख़ास इंटरव्यू भी होगा जिसमें उनके संगीत और उनकी पसंद आदि पर विस्तार से चर्चा होगी. तो दोस्तों कमर कस लीजिये खेलने के लिए ये नया खेल- "कौन बनेगा TST ट्रिविया का सिकंदर"

TST ट्रिविया प्रतियोगिता में अब तक -

पिछले एपिसोड में सबसे पहले पहुंची सीमा जी, तीनों जवाब उन्होंने दिए पर दो सही एक गलत, दो सही जवाबों के लिए सीमा जी ने जीते ४ अंक, और अंतिम जवाब का सही जवाब देकर दिशा जी ने कमाए २ अंक, तो अभी तक है दो महिलाओं में टक्कर, मजहर कामरान ने सुजॉय घोष और राम गोपाल वर्मा के लिए छायांकन किया है, और ब्लू के अन्य गीतों में अब्बास टायरवाला है पर थीम गीत के बोल रकीब आलम और सुखविंदर ने ही लिखे हैं जैसा कि दिशा जी जवाब में लिखा है, बधाई आप दोनों को. मंजू जी का धन्येवाद जिन्होंने अपनी रेटिंग दी गीतों को

सजीव - सुजॉय, सब से पहले तो तुम्हे 'वेल्कम बैक' कहता हूँ। उम्मीद है तुमने दुर्गा पूजा बड़ी धूम धाम से मनाई होगी!

सुजॉय - बिल्कुल सजीव, कैसे ये १० दिन निकल गए पता ही नहीं चला, और अब एक बार फिर से, पूरे जोश के साथ वापस आ गया हूँ 'आवाज़' की महफिल में। तो बताइए, आज 'ताज़ा सुर ताल' में सब से पहले कौन सा गीत आप बजाने जा रहे हैं?

सजीव - आज का पहला गीत है फ़िल्म 'दिल बोले हड़िप्पा' का, जिसका शीर्षक गीत हमने पहले सुनवाया था। आज सुनवा रहे हैं एक और वैसी ही पंजाबी रंग का "भंगड़ा बिस्तर"। इसे गाया है अलिशा चिनॉय, सुनिधि चौहान और हार्ड कौर ने।

सुजॉय - सजीव, आपको नहीं लगता कि जितनी जल्दी इस फ़िल्म का शीर्षक गीत लोगो की ज़ुबान पर चढ़ा था, उसी रफ़्तार से फ़िल्म सिनेमा घरों से उतर भी गई?

सजीव - हाँ, फ़िल्म तो फ़्लॊप रही, लगता है शाहीद और रानी की जोड़ी को लोग हज़म नहीं कर पाए। उपर से कहानी बहुत ही अवास्तविक थी, जिसकी वजह से लोगों को बहुत ज़्यादा पसंद नहीं आई। सोचिये किसी टीम के यदि ९ खिलाडी ५० रनों पर आउट हो जाए तो क्या वो टीम २३२ का लक्ष्य पार कर सकती है....:)

सुजॉय - ये जो गीत है आज का, गायक कलाकारों के नाम से मुझे ऐसा लग रहा है कि अलिशा और सुनिधि का एक साथ गाया हुआ यह पहला गीत होना चाहिए, वैसे मैं बहुत ज़्यादा श्योर नहीं। यह गीत फ़िल्माया गया है रानी और राखी सावंत पर। रानी का प्लेबैक किया सुनिधि ने और राखी का अलिशा ने। सुनिधि ने कुछ हद तक लड़के की आवाज़ में गाने की कोशिश की है क्योंकि सरदार बनी रानी के किरदार के लिए एक ऐसी आवाज़ की ज़रूरत थी कि जो लड़की की भी हो, लेकिन कुछ मर्दाना अंदाज़ के साथ।

सजीव - सुजॉय, तुम्हारी इन बातों को सुनकर मुझे तो फ़िल्म 'क़िस्मत' का वो हिट गीत याद आ रही है "कजरा मोहब्बतवाला", जिसमें शमशाद बेग़म ने बिश्वजीत का प्लेबैक किया था।

सुजॉय - हाँ, 'रफ़ू चक्कर' में भी आशा भोसले ने ऋषी कपूर का और उष मंगेशकर ने पेंटल का पार्श्वगायन किया था "छक छक छुक छुक बॉम्बे से बरोडा तक" गीत में। तो चलिए सुनते हैं यह गीत। गीतकार जयदीप साहनी और संगीत प्रीतम का। एक बात और इस गीत का फिल्मांकन बहुत शानदार हुआ है, जयदीप ने शुद्ध पंजाबी शबों से गीत को गढा है, मुझे आश्चर्य है भंगडा बिस्तर बीयर बटेर में बटेर शब्द के इस्तेमाल पर किसी ने आपत्ति नहीं उठायी, वर्ना हमारे देश लोग बस इंतज़ार करते हैं कि ऐसा कुछ मिले :)

भांगडा बिस्तर बीयर बटेर (दिल बोले हडिप्पा)
आवाज़ रेटिंग - ***1/2.



TST ट्रिविया # 04 - "दिल बोले हडिप्पा" की कहानी किस शेक्सपियर के उपन्यास पर आधारित अंग्रेजी फिल्म से प्रेरित है?


सुजॉय - थिरकता हुआ गीत हमने सुना। अब किस गीत की बारी है सजीव?

सजीव - अब बारी है 'लंदन ड्रीम्स' फ़िल्म के एक गीत की। शंकर महादेवन और साथियों की आवाज़ों में है यह गीत "मन को अति भावे स‍इयाँ"। शंकर अहसान लॊय के संगीत से लोगों को हमेशा ही उम्मीदें रहती हैं, और वे हर बार उन्हे निराश नहीं करते, भले ही फ़िल्म ज़्यादा चले या ना चले। 'लंदन ड्रीम्स' भी ऐसी ही एक फ़िल्म है।

सुजॉय - स्टार कास्ट तो ज़बरदस्त है इस फ़िल्म की, देखना है कि फ़िल्म कैसी चलती है। इस फ़िल्म में कुल ८ गानें हैं और ३ रिमिक्स वर्ज़न भी हैं। इस फ़िल्म के भी दो गीत हम बजा चुके हैं। इस गीत की क्या ख़ास बात है?

सजीव - इस गीत की ख़ासीयत हम यही कह सकते हैं कि यह एक तरह का फ़्युज़न है। शास्त्रीय गायन भी है, लोक संगीत का एक अंग भी है, और रीदम पाश्चात्य है। गीत के बोल में भी शुद्ध भाषा का प्रयोग हुआ है। आजकल इस तरह की शुद्ध भाषा का प्रयोग फ़िल्मी गीतों में सुनाई नहीं देता है। फ़िल्म में किस सिचुयशन में इस गीत को शामिल किया गया है यह तो नहीं मालूम, लेकिन जो भी है गीतकार प्रसून जोशी ने अच्छा ही लिखा है गीत को।

सुजॉय - शुद्ध भाषा से याद आया, फ़िल्म संगीत के सुनहरे युग में कुछ गिने चुने गीतकार ऐसे थे जिन्होने शुद्ध हिंदी का बेहद ख़ूबसूरत इस्तेमाल किया है, जैसे कि कवि प्रदीप, जी एस. नेपाली, भरत व्यास, पंडित नरेन्द्र शर्मा प्रमुख। अगर किसी और उल्लेखनीय गीतकार का नाम मैं भूल रहा हूँ तो मुझे माफ़ कीजिएगा। चलिए सुनते हैं 'लंदन ड्रीम्स' का यह गीत।

सजीव - शंकर की आवाज़ है इस गीत में, और शुद्ध हिंदी भाषा के शब्दों का इस्तेमाल इस गीत को एक अलग मुकाम देता है, सुनिए -

मन को अति भाये (लन्दन ड्रीम्स)
आवाज़ रेटिंग - ****



TST ट्रिविया # 05 - वो पहला गीत कौन सा है जो प्रसून ने किसी फिल्म के लिए लिखा..?

सुजॉय - शास्त्रीय, लोक, और पाश्चात्य संगीत का अच्छा फ़्युज़न सुना हम सब ने। और अब आज का आखिरी गीत कौन सा है?

सजीव - यह एक बड़ा ही नर्मोनाज़ुक गीत है फ़िल्म 'व्हाट्स योर राशी' का। इस फ़िल्म का गुजराती रंग में रंगा गीत "सु छे" हमने सुना था। इस फ़िल्म के कुल १३ गीतों में से आज जो गीत हमने चुना है वह है "बिखरी बिखरी सी ज़ुल्फ़ें हैं क्यों"।

सुजॉय - बड़ा ही सुंदर गीत है हरिहरण की आवाज़ में। और सब से अच्छा लगता है गीत में तबले के प्रयोग का। बहुत लम्बे अरसे के बाद किसी गीत में इस तरह से तबले की ध्वनियों का प्रॊमिनेन्ट इस्तेमाल हुआ है। अच्छा, इस फ़िल्म के १२ गीत तो १२ अलग अलग राशी के किरदारों से जुड़ा हुआ है ना, तो फिर यह भी बताइए कि यह गीत किस राशी के नाम समर्पित है?

सजीव - यह है कैन्सर, यानी कि कर्कट राशी के किरदार के नाम। सोहैल सेन का इस गीत के लिए हरिहरण की आवाज़ को चुनना सार्थक रहा। हरिहरण की मखमली आवाज़ को बहुत सूट किया है यह गीत। तो सुनते हैं।

बिखरी बिखरी (व्हाट्स यूर राशि)
आवाज़ रेटिंग -****



TST ट्रिविया # 06 -आशुतोष की ये फिल्म "व्हाट्स यूर राशि" किस उपन्यास पर आधारित है और उसकी लेखिका कौन है ?

आवाज़ की टीम ने इन गीतों को दी है अपनी रेटिंग. अब आप बताएं आपको ये गीत कैसे लगे? यदि आप समीक्षक होते तो प्रस्तुत गीतों को 5 में से कितने अंक देते. कृपया ज़रूर बताएं आपकी वोटिंग हमारे सालाना संगीत चार्ट के निर्माण में बेहद मददगार साबित होगी.

शुभकामनाएँ....



अक्सर हम लोगों को कहते हुए सुनते हैं कि आजकल के गीतों में वो बात नहीं. "ताजा सुर ताल" शृंखला का उद्देश्य इसी भ्रम को तोड़ना है. आज भी बहुत बढ़िया और सार्थक संगीत बन रहा है, और ढेरों युवा संगीत योद्धा तमाम दबाबों में रहकर भी अच्छा संगीत रच रहे हैं, बस ज़रुरत है उन्हें ज़रा खंगालने की. हमारा दावा है कि हमारी इस शृंखला में प्रस्तुत गीतों को सुनकर पुराने संगीत के दीवाने श्रोता भी हमसे सहमत अवश्य होंगें, क्योंकि पुराना अगर "गोल्ड" है तो नए भी किसी कोहिनूर से कम नहीं. क्या आप को भी आजकल कोई ऐसा गीत भा रहा है, जो आपको लगता है इस आयोजन का हिस्सा बनना चाहिए तो हमें लिखे.

Thursday, September 10, 2009

मने कही दो....आशुतोष गोवारिकर ने क्यों खेला नए संगीतकार सोहैल सेन पर दांव "व्हाट यौर राशि" के लिए

ताजा सुर ताल (21)

ताजा सुर ताल में आज में आज सुनिए गुजराती अंदाज़ में ढाला एक प्यारा सा गीत

सजीव- सुजॉय, तुमने किसी अभिनेता को एक ही फ़िल्म में सब से ज़्यादा कितने किरदार निभाते हुए देखा है?

सुजॉय - जहाँ तक मुझे याद है, संजीव कुमर ने 'नया दिन नई रात' में नौ किरदार निभाए थे। क्या इससे भी ज़्यादा कोई उदाहरण है?

सजीव- हाँ मराठी अभिनेता राजेश श्रृंगारपुरे ने "शंभू मज़ा नावाचा" में १२ अलग अलग किरदारों को निभाया था...

सुजॉय - वाह, यह तो मुझे मालूम नहीं था। लेकिन आज हम इन सब बातों में क्यों उलझ रहे हैं सजीव?

सजीव - वही तो, आज हम सुनने जा रहें हैं फ़िल्म 'व्हाट्स योर राशी' का एक गीत। इस फ़िल्म में प्रियंका चोपड़ा ने कुल १२ किरदार निभाए हैं १२ अलग अलग राशी के लड़कियों के। और यह दिखाया गया है कि किस राशी के किस तरह के चरित्र, गुण और स्वभाव होते हैं अमूमन...

सुजॉय - अच्छा तो ये बात है! इस फ़िल्म में प्रियंका के साथ नज़र आएँगे हरमन बवेजा, जिनका 'लव स्टोरी २०५०' से फ़िल्म जगत में पदार्पण हुआ था बतौर नायक। इस फ़िल्म में भी प्रियंका बनीं थीं उनकी नायिका। फ़िल्म तो बुरी तरह पिटी थी, लेकिन शान का गाया गीत "मिलो ना मिलो" काफ़ी हिट हुआ था।

सजीव- उसके बाद 'विक्टरी' नामक फ़िल्म में भी हरमन कुछ कमाल नहीं दिखा सके। अब देखा यह है कि इस फ़िल्म में वो क्या कमाल दिखाते हैं! अच्छा, तुम्हे पता है 'व्हाट्स योर राशी' के संगीतकार कौन हैं?

सुजॉय - हाँ, ये एक नए संगीतकार हैं, उनका नाम है सोहैल सेन, जो कि एक गायक भी हैं।

सजीव- ठहरो सुजय, कहीं ये सोहैल सेन वही तो नहीं जिन्होने २००८ की फ़िल्म 'सिर्फ़' मे संगीत दिया था?

सुजॉय - बिल्कुल ठीक! सोहैल सेन और शिवानी कश्यप ने मिलकर उस गुमनाम फ़िल्म का संगीत तैयार किया था। लेकिन हैरत की बात है कि आशुतोश गोवारिकर एक तो इस तरह की हास्य फ़िल्म पहली बार बना रहे हैं (स्वदेस, लगान, जोधा अक़बर जैसी फ़िल्में बनानेवाले) और दूसरे कि उन्होंने ए. आर. रहमान के बदले इस नए संगीतकार को मौका दिया है।

सजीव- मैं भी हैरान हूँ, और ख़ास तौर से इस बात पे हैरान हूँ कि इस फ़िल्म में कुल १३ गानें हैं जिनमें से १२ गानों में १२ अलग अलग राशियों के किरदारों को दर्शाया गया है। ऐसे महत्वपूर्ण गीतों के लिए किसी सुप्रतिष्ठित संगीतकार के बजाय इस नए कलाकार को मौका देने के पीछे आशुतोश का कोई तो प्लान ज़रूर होगा! अब देखना यह है कि सोहैल आशुतोश के उम्मीदों पर कितने खरे उतरते हैं।

सुजॉय - हाँ सजीव, १३ अलग अलग तरह के गीतों का संगीत एक दम से तैयार करना आसान काम नहीं है, सोहैल की तारीफ़ किए बगैर आगे नहीं बढ़ा जा सकता। और ज़रूरी बात यह भी है कि सोहैल ने और संगीतकारों की तरह इस फ़िल्म में ना ही पंजाबी भँगड़े का सहारा नहीं लिया और ना ही हिप-हॊप शैली का रुख़ किया।

सजीव- गीत सुनवाने से पहले हम अपने श्रोताओं और पाठकों को ये बारह गीत और उनसे जुड़ी राशी के बारे में बता देते हैं।

सुजॉय - ज़रूर!

Aries - व्हाट्स यौर राशी (शीर्षक गीत)
Aquarius - जायो ना
Gemini - आजा लहराते
Cancer - बिखरी बिखरी
तुला - मानूँगा मानूँगा
मीन - सौ जनम
scropio - आ ले चल
कन्या- प्यारी प्यारी
Taurus - सु छे
Sagittarius - सलौने क्या
सिंह - धड़कन धड़कन
Capricorns - कोई जाने ना

और जो तेरहवाँ गीत है, "चेहरे जो देखे हैं", वह इन सभी गीतों का निचोड़ है, यानी कि हीरो उन सभी १२ लड़कियों के बारे में कहता है जिनसे वो मिला है।

सजीव- जब इतने सारे गानें हैं तो ज़ाहिर है बहुत से गायकों ने अपनी आवाज़ मिलाई होगी?

सुजॉय - बिल्कुल हाँ, कुछ नए, कुछ पुराने। सोहैल सेन तो हैं ही, साथ में हैं अल्का याज्ञ्निक, मधुश्री, अस्लेशा गोवारिकर, तरन्नुम मलिक, बेला शेंडे, उदित नारायण, रजब अली भारती, भाव्या पंडित, शान, मरियन डी'क्रुज़, पमेला जैन, और ख़ुद आशुतोश गोवारिकर भी।

सजीव- हाँ, मैने आशुतोश की आवाज़ महसूस की है "मानूँगा मानूँगा" गीत में। मुझे तो 'स्वदेस' फ़िल्म का वह गीत "पल पल है भारी विपदा है आई" याद आ गई। और भाव्या पंडित भी वही लड़की है न जिसे हमने 'इंडियन आइडल' में देखा था पिछले साल?

सुजॉय - हाँ, मुझे भी ऐसा ही लगता है। तो सजीव, इतने सारे गीतों में से कौन सा गीत सुनवाया जाए?

सजीव- चलो "सु छे" सुनते हैं और सभी को सुनवाते हैं। क्योंकि यह फ़िल्म एक गुजराती कहानी पर आधारित है, तो गुजराती अंदाज़ वाला यह गीत सुनवाने का कुछ अर्थ तो बनता है। इस गीत को गाया है सोहैल सेन और बेला शेंडे ने। तुमने तो गीत को सुना होगा, कितने अंक दोगे इसे?

सुजॉय - माफ़ी चाहूँगा, लेकिन मैं २.५ से ज़्यादा नहीं दे पा रहा हूँ, संगीत में ना कुछ नयापन दिखा और बहुत ही साधारण कोम्पोसिशन लगा मुझे। X-factor की कमी लगी, बाक़ी सोहैल सेन की क़िस्मत! मैं उन्हे शुभकामनाएँ देता हूँ कि आगे चलकर वो एक कामयाब संगीतकार बनें और अच्छे से अच्छा संगीत सुननेवालो को दें।

सजीव - आ हाँ ....यहाँ एक एक कैच है सुजॉय....दरअसल ये गीत जब मैंने भी पहली बार सुना था मुझे भी कुछ खास नहीं लगा पर मेरी छठी इन्द्री कहती है कि इस गीत कुछ तो ख़ास है, तभी मैंने इसे चुना....बेला ने जिस अंदाज़ में "माने कही दे" बोला है वो धीरे धीरे अपना असर करता है....हाँ दूसरे हिस्से सोहेल की आवाज़ आने पर गीत कुछ कमजोर सा हो जाता है फिर भी मैं इसे ५ में ३ अंक दूंगा, वैसे इस फिल्म के किसी भी गीत में X फैक्टर जैसी कोई बात नहीं है, पर मुझे लगता है यदि ये गीत अच्छे फिल्माए गए हों और फिल्म दिलचस्प बनी हो तो सभी गीत फिल्म के साथ न्याय कर जायेंगें....

सुजॉय - ठीक है सजीव तो बाकी काम श्रोताओं पर छोड़ते हैं......और सुनते हैं "सो छे...."



आवाज़ की टीम ने दिए इस गीत को 2.75 की रेटिंग 5 में से. अब आप बताएं आपको ये गीत कैसा लगा? यदि आप समीक्षक होते तो प्रस्तुत गीत को 5 में से कितने अंक देते. कृपया ज़रूर बताएं आपकी वोटिंग हमारे सालाना संगीत चार्ट के निर्माण में बेहद मददगार साबित होगी.

क्या आप जानते हैं ?
आप नए संगीत को कितना समझते हैं चलिए इसे ज़रा यूं परखते हैं.फिल्म मोहनदास में दो गीतकारों ने गीत लिखे हैं, कौन हैं इस साहित्यिक कृति पर आधारित फिल्म के गीतकार और संगीतकार...बताईये और हाँ जवाब के साथ साथ प्रस्तुत गीत को अपनी रेटिंग भी अवश्य दीजियेगा.

पिछले सवाल का सही जवाब दिया का सही जवाब दिया एक बार फिर सीमा जी ने. उदय प्रकाश जी से हम आपकी मुलाकात भी जल्द ही करायेंगें...इस शृंखला में....मंजू जी और शमिख जी ने भी रेटिंग दी धन्येवाद...



अक्सर हम लोगों को कहते हुए सुनते हैं कि आजकल के गीतों में वो बात नहीं. "ताजा सुर ताल" शृंखला का उद्देश्य इसी भ्रम को तोड़ना है. आज भी बहुत बढ़िया और सार्थक संगीत बन रहा है, और ढेरों युवा संगीत योद्धा तमाम दबाबों में रहकर भी अच्छा संगीत रच रहे हैं, बस ज़रुरत है उन्हें ज़रा खंगालने की. हमारा दावा है कि हमारी इस शृंखला में प्रस्तुत गीतों को सुनकर पुराने संगीत के दीवाने श्रोता भी हमसे सहमत अवश्य होंगें, क्योंकि पुराना अगर "गोल्ड" है तो नए भी किसी कोहिनूर से कम नहीं. क्या आप को भी आजकल कोई ऐसा गीत भा रहा है, जो आपको लगता है इस आयोजन का हिस्सा बनना चाहिए तो हमें लिखे.

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