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Wednesday, September 9, 2009

रोको आत्महत्याएँ....जगाओ आत्मविश्वास... अभिजीत सावंत और पल्लव पाण्डया की संगीतमयी पहल

दोस्तों नए फनकारों को एक मंच देने आवाज़ का परम उद्देश्य है. इसी कोशिश में आज एक कड़ी और जुड़ रही है. मिलिए संगीतकार, गायक और परामर्शदाता पल्लव पाण्डया से. दुनिया भर में प्रतिवर्ष हजारों लोग जीवन से हताश होकर अपनी जीवन लीला स्वयं समाप्त कर देते हैं और इश्वर के दिए इस अनमोल तोहफे को यूंही जाया कर देते हैं. अधिकतर मामलों में आत्महत्या लम्बे समय से चल रहे घुटन का नतीजा होती है जिसे रोका जा सकता है यदि सही समय पर उस व्यक्ति की मनोदशा को समझने वाला या सिर्फ सुनने वाला ही कोई मिल जाए. हमारे आज के कलाकार पल्लव प्रतिदिन ५ से १० व्यक्तियों में अपनी "कौन्सिलिंग" से जीवन को वापस जीने का उत्साह भरते हैं. वो इस आंकडे को और बढ़ाना चाहते हैं ताकि आत्महत्या करने वाले व्यक्तियों की तादाद घटे. अपनी इसी कोशिश को संगीत के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने का नेक इरादा लेकर पल्लव ने इस गीत को लिखा और संगीतबद्ध किया. इस नेक काम से जुड़े पहले इंडियन आइडल रहे अभिजीत सावंत भी जिन्होंने इस गीत को अपनी आवाज़ दी. पल्लव संगीत के असर को, उसके महत्त्व को बखूबी समझते हैं, इसीलिए आज आवाज़ के माध्यम से वो इस गीत को आप सब श्रोताओं के समक्ष रख रहे हैं.

दोस्तों जिस तरह स्वायिन फ्लू और एच आई वी जैसी महामारियों को रोकने के लिए सरकार के साथ साथ हम सब कटिबद्ध है, आत्महत्या प्रवर्ति भी जो आज के समाज में एक बड़े नासूर की तरह अपनी जड़ें फैला रही है उसे भी नियंत्रण में करने की जरुरत साफ़ नज़र आती है. पूरी दुनिया में हर ४० सेकंड में एक व्यक्ति अपने जीवन का अंत करने की कोशिश कर रहा है और उससे भी भयावह ये है कि इनमें से ६० प्रतिशत अभागे भारत चीन और जापान से हैं. हाल ही में दसवीं बोर्ड परीक्षाओं को हटा कर सरकार ने एक शानदार पहल की है. दोस्तों कल विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस है इस अवसर पर आईये हम सब पल्लव के इस गीत को सुनते हुए ये प्रण करें कि अपने व्यस्त रोजमर्रा के जीवन में भी हम समय निकालें किसी के मन की बात सुनने के लिए....किसी से दो बोल मीठे कहने के लिए....किसी को देख कर मुस्कुराने के लिए....हो सकता है आपकी एक छोटी सी कोशिश किसी को जीने की उम्मीद दे दे.....

पल्लव के बारे में हम आपको बता दें कि वो पिछले ३० सालों से संगीत और मानव सेवा में लगे हैं. ७ वर्षों तक आशा भोंसले के साथ काम करने का बाद इन दिनों आप सोनू निगम के साथ बतौर group leader काम कर रहे हैं. इनके काम और संगीत के बारे में अधिक जानकारी आप उनके जाल स्थल से भी प्राप्त कर सकते हैं....फिलहाल देखते और सुनते हैं इस गीत को जिसका शीर्षक है यूं कैन डू इट....

SONG : YOU CAN DO IT
WRITTEN AND COMPOSED BY :PALLAV PANDAYA
SINGERS : ABHIJIT SAWANT AND PALLAV PANDAYA

Sunday, May 10, 2009

"माँ तो माँ है...", माँ दिवस पर विश्व की समस्त माँओं को समर्पित एक नया गीत

यूँ तो यह माना जाता है कि कवि किसी भी विषय पर लिख सकता है, अपने भाव व्यक्त कर सकता है और अमूमन ऎसा होता भी है। लेकिन दुनिया में अकेली एक ऎसी चीज है जिसे आज तक कोई भी शब्दों में बाँध नहीं सका है। और उस शय का नाम है "माँ"। माँ....जो बच्चे के मुख से निकला पहला शब्द होता है और शायद अंतिम भी, माँ जो हर रोज सुबह को जगाती है और शाम को चादर दे सुला देती है, माँ जो हर कुछ में है लेकिन ऎसा व्यक्त करती है मानो कुछ में भी न हो। माँ.......जो पिता का संबल है, बेटे की जिद्द है और बेटी की रीढ है ... माँ जो निराशा में आशा की एक किरण है, चोट में मलहम है, धूप में गीली मिट्टी है और ठण्ड में हल्की सी धूप है, माँ .....जो और कुछ नहीं, बस माँ है... बस माँ!!

मिट्टी पे दूब-सी,
कुहे में धूप-सी,
माँ की जाँ है,
रातों में रोशनी,
ख्वाबों में चाशनी,
माँ तो माँ है,
चढती संझा, चुल्हे की धाह है,
उठती सुबह,फूर्त्ति की थाह है।

माँ...खुद में हीं बेपनाह है । ....ऎसी मेरी , उनकी, आपकी, हम सबकी माँ है।


ये शब्द हैं कवि और गीतकार, विश्व दीपक "तन्हा" के. पर क्या शब्दों में बांधा जा सकता है "माँ" को ? शायद नहीं. हम सब सिर्फ कोशिश कर सकते हैं.
हिंद युग्म से जुड़े सबसे पहले संगीतकार ऋषि एस उन दिनों दूसरे सत्र में अपने अंतिम गीत को सजाने सवांरने में लगे थे, कि अचानक उनकी माँ की तबियत बिगड़ गयी और उन्हें आई सी यू में दाखिल करना पड़ा. पूरा युग्म परिवार सकते में था. लगभग १ माह तक अस्पताल में रहने के बाद आखिर सबकी दुआओं ने उन्हें वापस स्वस्थ कर दिया और वो सकुशल घर लौट आयी. लेकिन इस मुश्किल दौर में ऋषि के जेहन में दौड़ती रही वो सब यादें जो उनके बचपन से जुडी थी, माँ से जुडी थी...उन्होंने तन्हा से माँ पर एक गीत रचने को कहा. मूल रूप से ये गीत उनके व्यक्तिगत संकलन के लिए ही था. पर जब बन कर सामने आया तो हर सुनने वाले की ऑंखें नम हो गयी. तभी ये विचार आया कि क्यों न आवाज़ के माध्यम से माँ दिवस पर इसे विश्व की समस्त माँओं को समर्पित किया जाए. तो लीजिये इस माँ दिवस पर आप सब भी अपनी अपनी माँओं को भेंट करें हिद युग्म की संगीत टीम द्वारा रचित ये नया और ताजा गीत. गीत को अपने मधुर स्वर में सजाया है हम सबके चहेते गायक बिश्वजीत नंदा ने. बिस्वजीत इस अवसर पर माँ के लिए ये सन्देश देना चाहते हैं -

माँ,
"इस धरती पर मेरी देवी हो आप,
ममता की मूरत हो आप,
मेरे लिए सारा संसार हो आप "

मुझे आज भी याद है बचा हुआ एक लड्डू आप मुझे खिला देती थीं, खुद न खाते हुए भी. खुदके लिए कुछ भी न खरीदकर मेरे लिए किताबें खरीदती थीं . रात रात भर जागके मुझे पढाती थी. साइंस के काम्प्लेक्स चीजों को समझने को कोशिश करती थी मुझे पढाने के लिए.

क्या इन सबको मैं शब्दों में बयां कर सकता हूँ ?

उस दिन मैंने आपसे पूछा था "माँ ! कुछ लाऊँ आप के लिए विदेश से? आप बोली: तू ठीक है न बेटा, मेरे लिए सारा संसार तो तू ही है, तू ही आजा ना जल्दी"

इस प्यार का क्या कोई मोल है माँ ? हैरान हूँ में ये सोचकर कि आपमें इतना निस्वार्थ प्यार कैसे है? आपसे मैं बहुत प्यार करता हूँ माँ. आपको सारी खुशियाँ मिले यही दुआ है मेरी.


लगता है बिश्वजीत की यही भावनायें उनके स्वर में भी भर गयी हैं इस गीत गाते समय....तो सुनिए विश्वदीपक "तन्हा", ऋषि एस और बिस्वजीत के दिल से निकले जज़्बात....माँ तो माँ है.....



गीत के बोल -

माँ मेरी लोरी की पोटली,
माँ मेरी पूजा की आरती!

अपनों की जीत में
बरसों की रीत में
माँ की जाँ है।
प्यारी सी ओट दे,
थामे है चोट से
माँ तो माँ है॥
चंपई दिन में
छाया-सी साथ है,
मन की मटकी
मैया के हाथ है।

माँ मेरी लोरी की पोटली,
माँ मेरी पूजा की आरती!

मेरी हीं साँस में
सुरमई फाँस में
माँ की जाँ है।
रिश्तों की डोर है
हल्की सी भोर है,
माँ तो माँ है॥
रब की रब है
काबा है,धाम है,
झुकता रब भी
माँ ऎसा नाम है।

माँ मेरी भोली सी मालिनी,
माँ मेरी थोड़ी सी बावली!

Special Songs Series # 06, Music @ Hind Yugm, Song "Maa To Maa Hai"
माँ तुझे सलाम.....



Tuesday, March 24, 2009

ए आर रहमान और ढेरों युवा संगीत कर्मियों के जोश को समर्पित एक गीत

ए आर रहमान का ऑस्कर जीतना पूरे भारत के युवा संगीत कर्मियों के लिए एक अनूठी प्रेरणा बन गया है. पहले हमारे संगीत योद्धा जो अब तक फिल्म फेयर या रास्ट्रीय पुरस्कारों के सपने सजाते थे अब उनमें साहस आ गया है कि वो बड़े अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों और सम्मानों के भी ख्वाब देख पा रहे हैं. उनमें अब ये यकीन भर गया है कि अब उनका मंच एक "ग्लोबल औडिएंस" का है और उनके यानी भारतीय अंदाज़ के संगीत के श्रोता और कद्रदान देश विदेश में फैले भारतीय ही नहीं बल्कि वो विदेशी श्रोता भी हैं जो अब तक भारतीय विशेषकर लोकप्रिय भारतीय फिल्म और गैर फ़िल्मी संगीत से जी चुराते थे.

"It is being an interesting Journey till now. I have come across criticism, flattery, highs and lows" - A.R. Rahman.
ए आर के इसी वक्तव्य से प्रेरित होकर आवाज़ के एक संगीत कर्मी प्रदीप पाठक ने एक गीत रचा,
प्रदीप पाठक
इन्टरनेट पर ही मिले संगीतकार सागर पाटिल ने जब इसे पढ़ा तो वो उसे स्वरबद्ध करने के लिए प्रेरित हुए. पुनीत देसाई ने इसे अपनी आवाज़ दी और इस तरह मात्र इंटरनेटिया प्रयासों से तैयार हुआ संगीत के बादशाह ए आर रहमान को समर्पित ये जोशीला गीत जो युवाओं को बेहद सशक्त रूप से प्रेरित करने की कुव्वत रखता है.

इस गीत के गीतकार, प्रदीप पाठक हिंदुस्तान टाईम्स में सॉफ्टवयेर प्रोफेशनल हैं, दिल से कवि हैं और अपने जज़्बात कलम के माध्यम से दुनिया के सामने रखते हैं. मूल रूप से उत्तराखंड निवासी प्रदीप गुलज़ार साहब और प्रसून जोशी के "फैन" हैं. ज़ाहिर है ए आर रहमान उनके पसंदीदा संगीतकार हैं. संगीतकार सागर पाटिल पिछले 3 वर्षों से एक अंतर्राष्ट्रीय संगीत संस्थानों के लिए कार्यरत हैं. उन्हें नए प्रयोगों में आनंद मिलता है, इस कारण ये प्रोजेक्ट भी उनके लिए विशेष महत्त्व रखता है. गीत के गायक पुनीत देसाई वैसे तो इंजीनियरिंग की पढाई कर रहे हैं पर वो खुद को एक गायक के तौर पर देखना अधिक पसंद करते हैं. वो एक रॉक बैंड के सदस्य भी है और गिटार भी अच्छा बजा लेते हैं. तो सुनिए आवाज़ का एक और नजराना, इंटरनेटिया गठबंधन से बना एक और थीम गीत. संगीतकार ए आर रहमान और संगीत की दुनिया में अपना सितारा बुलन्द करने की ख्वाहिश में दिन रात एक करते देश के ढेरों युवा संगीत कर्मियों के जोश को समर्पित ये गीत जिसका सही शीर्षक दिया है प्रदीप ने - "The Journey".



गीत के बोल -
सागर पाटिल
पुनीत देसाई

चुनी राहें हमने भी, खोली बाहें हमने भी ,
सब रातें खाली हुईं हैं ! हम जागे हैं जब कभी।
कुछ सियाही सी , नदिया जो रेत की -
गलियों से गुजरती, भागे है जब कभी।

रुख जो हवाओं का , संग ले गया ज़मी,
वो मस्त बहारों का- रंग, ले गया नमी,
हम जोश मे अपने, करतब दिखाते हैं,
मिट जायें! कभी नही ! ख्वाब वो सजाते हैं।

फिज़ाओं से बही जो- पलकों की बूँद तक,
सजी आँखों मे अपने- खुदा की रूह जब कभी।
चुनी राहें हमने भी...........

मासूम सा एक पल, नई ज़िन्दगी अपनी,
हर इश्क पे सजदा है, नई बंदगी अपनी,
हम होश मे अपने- इश्क को मिलाते हैं,
थम जायें! कभी नही- धुन वो जगाते हैं।

फ़िर चमकती शाम मे, नई मौज सी लगी,
छुपी पत्तों पे जैसे- सूरज की लौ जब कहीं।

चुनी राहें हमने भी, खोली बाहें हमने भी,
सब रातें खाली हुईं हैं ! हम जागे हैं जब कभी



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