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Monday, March 30, 2009

ये रहे सरताज गीत, लोकप्रिय गीत और शीर्ष 10 गीत

आज दिन है आवाज़ पर बहुप्रतीक्षित परिणामों का. आवाज़ पर नए संगीत का दूसरा सत्र जुलाई 2008 के प्रथम शुक्रवार से आरंभ हुआ था जो दिसम्बर के अंतिम शुक्रवार को संपन्न हुआ। इस दौरान कुल 27 नए गाने प्रसारित किये गए। संगीत के इस महाकुम्भ में कुल 47 नए संगीत कर्मियों ने अपने फन का जौहर दुनिया के सामने रखा, जिसमें 15 संगीतकार, 13 गीतकार, 24 गायक/गायिकाएँ, 2 संगीत सहायक शामिल हैं। इससे पहले अपने पहले सत्र के 10 गीतों को लेकर युग्म ने अपना प्रथम संगीत एल्बम "पहला सुर" फरवरी 2008 में जारी किया गया था। पर दूसरा सत्र हर लिहाज से बेहतर रहा; अपने पहले सत्र की तुलना में. पहले से अधिक संगीत कर्मी, पहले से अधिक रचनाएँ और तकनीकी स्तर पर भी लगभग हर गीत की गुणवत्ता इस सत्र के गीतों में बहुत बेहतर रही, इन सभी गीतों को श्रोताओं का भरपूर प्यार मिला, इन गीतों को हमने 5 संगीत विशेषज्ञों ने भी सुना, परखा, और दो चरण में सपन्न हुए इस प्रक्रिया में इन गीतों को अंक दिए गए, जिनके आधार पर निर्धारित किया गया कि एक सरताज गीत चुना जायेगा, और श्रेष्ठ 10 चुने हुए गीतों को हिंद युग्म अपने दूसरे संगीत एल्बम का हिस्सा बनाएगा। श्रोताओं की राय जानने के लिए एक पोल भी आयोजित हुआ, जिसमें कुल श्रोताओं ने अपनी राय रखी। श्रोताओं ने जिस गीत को सबसे अधिक पसंद किया उसे सत्र का सबसे लोकप्रिय गीत माना जायेगा. आज इन्हीं परिणामों की घोषणा करते हुए आवाज़ का संचालन दल बेहद गर्व और ख़ुशी अनुभव कर रहा है।

समीक्षक क्या कहते हैं?

हालांकि हमने अपने सभी समीक्षकों के नाम गुप्त रखे थे पर अंतिम समीक्षक जो कि देश के सबसे अनुभवी संगीत समीक्षकों में जाने जाते हैं, उनके कुछ विचार आप तक पहुँचाना जरूरी है, अजात शत्रु एक ऐसा नाम है जिससे संगीत से जुड़े सभी लोग अच्छी तरह से वाकिफ हैं, अपनी तमाम व्यस्तताओं के बीच भी उन्होंने हिंद युग्म के लिए इस कार्य को करने का बीड़ा उठाया, चूँकि वो इन्टरनेट से दूर हैं उन्होंने खुद इन पक्तियों के लेखक को फ़ोन कर बधाई दी और सत्र के गीतों कि मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा -"इस संकलन की सबसे बड़ी उपलब्धि है, कविता-शायरी. "आवाज़ के पंखों पर...", "खुशमिजाज़ मिटटी पहले उदास थी...", तथा "ओ मुनिया मेरी गुड़िया संभल के चल..." जैसे गीत तो बेसाख्ता "वाह" कहा ले जाते हैं, मेलोडी के हिसाब से "ओ मुनिया" संकलन का सर्वोत्तम गीत है, यही वो धुन और संगीत्तना है जिस पर मेरी दो साल पूरी करती नातिन, एक अबोध बच्ची, थिरक उठी थी. गायक भी बेबाक है और खुलकर गाता है...". अजात शत्रु जी गायकों से अधिक संतुष्ट नज़र नहीं आये. उन्होंने कहा -" संकलन में एक दो गायकों की आवाज़ में बेस है, पर संवेदनशील गायन किसी का नहीं है, और न ही उनके गायन में कोई चौंकाने वाला तत्व है, 'अचानक' भी गायक से कुछ हो जाता है जो रिहर्सल के वक़्त नहीं था मगर रिकॉर्डिंग में पैदा हो जाता है. 'अचानक' का ये तत्व सभी में गायब है। फिर भी अपनी सीमा में उन्होंने प्रशंसनीय काम किया है"। हालाँकि उन्होंने यहाँ भी 'ओ मुनिया' के गायक की तारीफ की -"ओ मुनिया गीत का गायक ही इस आयोजन का पहला और अंतिम गायक है जिस पर किसी गायन, परंपरा या ज़माने का असर नहीं है वह सिर्फ अपने तौर पर गाता है..."। संगीतकारों को उन्होंने गायकों का चुनाव करने सम्बंधित ये सुझाव दिया -"सबसे पहले धुन पर ध्यान दें, फिर गायक का चुनाव करें, अच्छी शायरी भी मधुर धुन के बिना असर नहीं छोड़ती, अधिक से अधिक वह पढ़ने की चीज़ है. पर गाना प्रथमतः सिर्फ सुने जाने के लिए होता है। धुन की मेलोडी पर बहुत मेहनत करनी चाहिए, कहिये कि धुन ही सब कुछ है, जिस गीत पर बच्चा, पागल और गंवार थिरक उठे, वही अल्लाह का संगीत है"। अजात शत्रु जी ने और भी बहुत सी बातें कही, पर एक बात जो उन्होंने कही वो परिणामों की घोषणा करने से पहले हम भी कहना चाहेंगे- "कोई भी फैसला अंतिम या सम्पूर्ण नहीं होता। जो आज असफल वो कल संभवतः हीरो होंगे, हमारी नज़र में तो इस आयोजन में शामिल सभी कलाकार विजेता हैं। तो एक बार फिर सभी प्रतिभागियों को तहे दिल से ढेरों शुभकामनायें देते हुए सबसे पहले हम घोषणा कर रहे हैं सरताज गीत की।

सरताज़ गीत

सरताज गीत के रूप में टाई हुआ है दो गीतों को 40.5 अंक मिले हैं जो अधिकतम है। इस कारण हम इन दो गीतों को सामूहिक रूप से सरताज गीत घोषित करते हैं। मज़े की बात ये है कि इन दोनों गीतों या कहें गज़लों के गायक/संगीतकार एक ही हैं, जी हाँ आपने सही पहचाना- दूसरे सत्र की नायाब खोज - रफीक शेख. और ग़ज़लें हैं "जो शजर" और "सच बोलता है" जिनके शायर हैं क्रमशः दौर सैफी और अज़ीम नवाज़ राही। इसके अलावा इनकी टीम में एक संगीत संयोजक भी हैं- अविनाश। सभी 4 लोगों को बहुत बहुत बधाई। सरताज गीत को हिंद युग्म की तरफ से 6000 रुपए का नकद पुरस्कार दिया जायेगा. समीक्षकों के अंतिम अंक तालिका के अनुसार टॉप १० गीत जो चुने गए वो इस प्रकार हैं-

टॉप 10 गीत

1. जो शजर 40.5/50
2. सच बोलता है 40.5/50
3. चाँद का आंगन 40/50
4. वन अर्थ- हमारी एक सभ्यता 39.5/50
5. आखिरी बार बस 39/50
6. जीत के गीत 38/50
7. हुस्न 38/50
8. मुझे वक़्त दे 38/50
9. संगीत दिलों का उत्सव है 37.5/50
10. खुशमिजाज़ मिटटी 37.5/50
11. आवारदिल 37.5/50

चूँकि अंतिम 3 गीतों के अंक बराबर हैं इस कारण 10 के स्थान पर 11 गीतों को एल्बम में शामिल किया जायेगा. अन्य गीतों के कुछ इस प्रकार अंक मिले हैं -

12. चले जाना 36.5/50
13. जिस्म कमाने निकल गया है 35.5/50
14. चाँद नहीं विश्वास चाहिए 35/50
15. तेरे चेहरे पे 34/50
16. ओ साहिबा 34/50
17. सूरज चाँद और सितारे 33/50
18. तू रूबरू 33/50
19. मैं नदी 32/50
20. बढ़े चलो 31/50
21. बे इंतेहा 31/50
22. उड़ता परिंदा 31/50
23. ओ मुनिया 30/50
24. डरना झुकना 30/50
25. माहिया 28/50
26. राहतें सारी 27.5/50
27. मेरे सरकार 24/50

लोकप्रिय गीत

हिन्द-युग्म ने 2 मार्च से 28 मार्च 2009 के मध्य एक पोल का भी आयोजन किया, जिसके माध्यम से लोकप्रिय गीत (श्रोताओं की पसंद) जानने की कोशिश की गई। इस पिल पृष्ठ को अब तक 3165 बार देखा गया जो किसी भी हिन्द) वेबसाइट के किसी एक पेज इतनी बार इतने समय अंतराल में कभी नहीं देखा गया। कुल 1067 मत मिले जिसमें से 233 मत फॉल्स हैं। चूँकि 25 मार्च को संध्या 7 से 9 बजे के बीच हमारे पास मात्र 57 श्रोता आये और 'चाँद नहीं विश्वास चाहिए' को इतने ही समय में 290 मत मिल गये, जो कि सम्भव नहीं है, क्योंकि हम एक सिस्टम से एक मत मान रहे थे। हम 57 मत चाँद नहीं विश्वास चाहिए को दे रहे हैं।

'संगीत दिलों का उत्सव है' और 'मेरे सरकार' के बीच जबरदस्त टक्कर रही। जहाँ 'संगीत दिलों का उत्सव है' को 223 वोट मिले, वहीं 'मेरे सरकार' को 221 । 'चाँद नहीं विश्वास चाहिए' को अधिकतम 57 देने के बाद 177। इस तरह 'संगीत दिलों का उत्सव है' को हम लोकप्रिय गीत चुन रहे हैं। इस गीत के टीम को रु 4000 का नग़द इनाम दिया जायेगा। सुनिए लोकप्रिय गीत-



हिन्द-युग्म सरताज गीत, लोकप्रिय गीत और शीर्ष 10 गीतों का एल्बम भी निकालने की योजना बना चुका है। यह एल्बम जल्द ही किसी सार्वजनिक महोत्सव में ज़ारी किया जायेगा।

स्पॉनसर करें (प्रायोजक बनें)

हिन्द-युग्म अपने कलाकारों के साथ मिलकर बहुत से सांगैतिक कार्यक्रमों को आयोजित करने की योजना बना है, जिसके लिए हम स्पॉन्सर (Sponsorer) की तलाश कर रहे हैं। स्पान्सर को निम्नलिखित लाभ होगा-

1. हिन्द-युग्म डॉट कॉम नेटवर्क के सभी वेबसाइट की लाखों की ट्रैफिक।
2. छः महीने तक सभी नेटवर्क पर बैनर फ्लैश करने का अवसर
3. कार्यक्रमों (जैसे सिंगिंग शो, ग़ज़ल कंसर्ट इत्यादि) के माध्यम से जन समुदाय तक अपना बॉन्ड पहुँचाने का मौका।

अधिक जानकारी के लिए admin@radioplaybackindia.com पर ईमेल करें या 9873734046, 9871123997 पर फोन करें।

Monday, March 2, 2009

चुनिए प्रदर्शित 27 गीतों में से अपनी पसंद

हिन्द-युग्म ने इंटरनेटीय जुगलबंदी से बने पहले एल्बम 'पहला सुर' को जब ३ फरवरी २००८ को विश्व पुस्तक मेला, नई दिल्ली में रीलिज किया था, तभी से यह तय कर लिया था कि इसे नई प्रतिभाओं को उभारने का कुशल माध्यम बनायेगा।

सजीव सारथी के अनुभवी संयोजन में ४ जुलाई २००८ से प्रत्येक शुक्रवार इसी इंटरनेट जैमिंग से बने स्वरबद्ध गीत का विश्वव्यापी प्रदर्शन इसी वेबसाइट पर किया जाने लगा। उद्देश्य था कि हिन्दी को विश्वव्यापी पहुँच मिले और गायक, संगीतकार और गीतकार को एक मंच। ३१ दिसम्बर २००८ तक एक-एक करके गीत रीलिज किये गये। इस तरह से कुल २७ गीत वर्ष २००८ (सत्र २००८-०९) में प्रदर्शित हुए।

नियमित श्रोता जानते हैं कि हम इन गीतों की समीक्षा २ चरणों में ५ अलग-अलग संगीत पारखियों से करवायी जा चुकी है।

हिन्द-युग्म ने तय किया है कि समीक्षकों द्वारा चुने गये शीर्ष गीत को नगद इनाम भी देगा। वह सरताज़ गीत होगा।
आम श्रोता की पसंद समीक्षकों से अलग हो सकती है। हम एक लोकप्रिय गीत भी चुनना चाहते हैं। जिसके लिए हम श्रोताओं को अवसर दे रहे हैं। श्रोताओं की राय पर समीक्षकों की राय का असर न पड़े, इसलिए हम समीक्षकों द्वारा तय सरताज़ गीत की जानकारी नहीं प्रकाशित कर रहे हैं। हम श्रोताओं द्वारा चुने गये सर्वश्रेष्ठ गीत की टीम को भी नग़द इनाम देंगे।
ऊपर के लिंक से आप हर गीत के बनने की कहानी पढ़ सकते हैं और अलग से सुन भी सकते हैं। आप नीचे के प्लेयर से सभी गीतों को एक साथ सुन सकते हैं। एक-एक करके सुन सकते हैं। जो श्रोता नये हैं, वे इसी प्लेयर से सभी गीत को सुन सकते हैं।



आपका निर्णय






वोटिंग विंडो २८ मार्च रात्रि ११.५९ तक खुली रहेगी. ३० मार्च सोमवार को हम सरताज गीत, लोकप्रिय गीत और टॉप १० गीतों के नतीजे आपके सामने रखेंगे.

Sunday, January 4, 2009

"हौले हौले" से "जय हो"...- सुखविंदर सिंह का जलवा

सुनिए गोल्डन ग्लोब के लिए नामांकित फ़िल्म स्लमडोग मिलनिअर का जबरदस्त गीत "जय हो..."

आवाज़ के टीम और श्रोताओं ने मिल कर जिस गीत को साल २००८ का सरताज गीत चुना वो है फ़िल्म "रब ने बना दी जोड़ी" का "हौले हौले..." . हौले हौले से जादू बिखेरने वाले इस गीत को गाया है "छैयां छैयां" से रातों रातों सुपर सिंगर बने सुखविंदर सिंह ने. तब से अब तक हर साल सुखविंदर अपने किसी न किसी गीत के माध्यम से टॉप सूची में रहते ही हैं. जहाँ इसी साल फ़िल्म टशन में उनका गाया "दिल हारा रे..." भी हमारी सूची में अपनी जगह बनने में कामियाब रहा वही बीते सालों पर नज़र डालें तो "दर्द-ऐ-डिस्को", "चक दे इंडिया" और ओमकारा के शीर्षक गीत के अलावा इसी फ़िल्म का "बीडी जलाई ले" खासा लोकप्रिय हुआ था. पर कई मायनों में अगर हम देखें तो "हौले हौले" उनकी परिचित शैली से बिल्कुल अलग तरह का गीत है और पहली बार सुनने पर यकीं ही नही होता कि ये वाकई सुखविंदर का गीत है.


और अब हॉलीवुड के सबसे बड़े निर्देशक स्टीवन स्पीलबर्ग की फ़िल्म के लिए भी वो गा रहे हैं. ख़ुद सुखविंदर के शब्दों में "स्टीवन स्पीलबर्ग की टीम ने मुझसे संपर्क किया और ये गीत गाने की गुजारिश की, ये एक पारंपरिक लोक गीत है जो कच्छ गुजरात की मिटटी का है और ये गीत जीवन के उत्सव की बात करता है, वैसे मेरा हॉलीवुड कनेक्शन तो "स्लमडोग मिलनिअर" से ही शुरू हो चुका था जहाँ मैंने रहमान जी का स्वरबद्ध किया और गुलज़ार जी का लिखा "जय हो" गीत गाया था. ये गीत मेरा ख़ुद का बहुत पसंदीदा है, मैं जब भी इसे सुनता हूँ, मुस्कुराने लगता हूँ..."

गौरतलब है कि रहमान को इसी फ़िल्म के लिए गोल्डन ग्लोब का नामांकन मिला है. रहमान के बारे में सुखविंदर कहते हैं -"वो एक जीनिअस हैं जिन्होंने भारतीय संगीत को विश्व मंच दिया है. स्वभाव से भी वो बहुत शांत और जमीन से जुड़े हुए इंसान हैं, उन्हें कविता से प्रेम है और वह शख्स संगीत खाता है संगीत पीता है और संगीत से ही साँस लेता है, उनके रोम रोम में संगीत है और उनके जेहन में दिन रात बस संगीत का जनून छाया रहता है..."

बहरहाल इस नए साल में हम सब तो यही चाहेंगें कि रहमान साहब अपनी इस फ़िल्म के लिए गोल्डन ग्लोब जीते. ये भारतीय संगीत के लिए एक बड़ी घटना होगी. सुखविंदर भी इस साल अपने नए गीतों से हम सब को चकित करते रहें. आने वाली फ़िल्म "बिल्लू बार्बर" में उनके गाये गीत श्रोता जल्दी ही सुनेंगें, फिलहाल हम आपको सुनवाते हैं, गोल्डन ग्लोब के लिए नामांकित फ़िल्म "स्लमडोग मिलनिअर" से सुखविंदर का गाया गीत "जय हो...". कहते हैं जीनिअस के काम पहली बार में कम समझ आता है, पर हमारे शब्दों पर यकीन करें इस गीत को धैर्य के साथ ४-५ बार सुनें और अगर इसका जादू आपके सर चढ़ कर न बोले तो कहियेगा. तो सुनिए और दुआ कीजिये कि "जय हो" हमारे संगीत कर्णधारों की विश्व मंच पर भी.



Sunday, August 3, 2008

जुलाई के जादूगरों की पहली भिडंत

जैसा की आवाज़ के श्रोता वाकिफ हैं, कि संगीत का ये दूसरा सत्र जुलाई महीने के पहले शुक्रवार से आरंभ हुआ था और दिसम्बर के अन्तिम शुक्रवार तक चलेगा, इस दौरान रीलीस होने वाले तमाम गीतों में से एक गीत को चुना जाएगा "सत्र का सरताज गीत", लेकिन सरताज गीत बनने के लिए हर गीत को पहले पेश होना पड़ेगा जनता की अदालत में, और फ़िर गुजरना पड़ेगा समीक्षा की परीक्षा से भी, ये समीक्षा करेंगे हिंद युग्म, आवाज़ के लिए संगीत / मीडिया और ब्लॉग्गिंग से जुड़े हमारे वरिष्ट और अनुभवी समीक्षक. हम आपको बता दें, कि समीक्षा के दो चरण होंगे, पहले चरण में ३ निर्णायकों द्वारा, बीते महीने में जनता के सामने आए गीतों की परख होगी और उन्हें अंक दिए जायेंगे, हर निर्णायक के द्वारा दिए गए अंक गीत के खाते में जुड़ते जायेंगे. दूसरे और अन्तिम चरण में, २ निर्णायक होंगे जो जनता के रुझान को भी ध्यान में रख कर अंक देंगे, दूसरे चरण की समीक्षा सत्र के खत्म होने के बाद यानि की जनवरी के महीने में आरंभ होगी, हर गीत को प्राप्त हुए कुल अंकों का गणित लेकर हम चुनेगें अपना - सरताज गीत.

तो "जुलाई के जादूगर" गीतों की पहले चरण की समीक्षा आज से शुरू हो रही है, आईये जानते हैं कि जुलाई के इन जादूगरों को हमारे पहले समीक्षक ने अपनी कसौटी पर आंक कर क्या कहा और कितने अंक दिए हर गीत को.

निर्णायक की नज़र में हिंद युग्म का ये प्रयास -

हिन्द-युग्म” के एक उत्कृष्ट प्रयास के तौर पर युवा गायकों और संगीतकारों को मौका देने के पवित्र उद्देश्य से शुरु हुआ “आवाज़” का सफ़र प्रारम्भ हो चुका है। युग्म ने मुझसे गीतों की समीक्षा का आग्रह किया जिसे मैं टाल नहीं सका। असल में मेरे जैसे “कानसेन” (एक होता है तानसेन, जो अच्छा गाता है और एक होता है कानसेन जो सिर्फ़ अच्छा सुनता है) से गीतों की समीक्षा करवाना कुछ ऐसा ही है जैसे किसी लुहार से नाक में पहनने का काँटा बनवाना.

जुलाई माह के दौरान चार नये गीत “रिलीज़” हुए। चारों गीत युवाओं की टीम ने आपसी सामंजस्य और तकनीकी मदद से बनाये हैं और तकनीकी तौर पर कुछ गलतियाँ नज़र-अंदाज़ कर दी जायें (क्योंकि ये लोग अभी प्रोफ़ेशनल नहीं हैं और साधन भी होम स्टूडियो के अपनाये हैं) तो इन युवाओं की मेहनत बेहद प्रभावशाली लगती है।


गीत समीक्षा

संगीत दिलों का उत्सव है ....

पहला गीत है “संगीत दिलों का उत्सव है…” इसे सजीव सारथी ने लिखा है और निखिल-चार्ल्स की जोड़ी ने इसकी धुन बनाई है। गीत की धुन कहीं धीमी, कहीं तेज लगती है, खासकर शुरुआत में जब मुखड़ा शुरु होने से पहले के वाद्य तो बेहतरीन बजते हैं, लेकिन “बेजान” शब्द ऐसा लगता है कि जल्दी-जल्दी में गा दिया गया हो, “बेजान” शब्द में यदि थोड़ा भी आलाप दिया जाता या उसे थोड़ा सा और लम्बा खींचा जाता तो और भी प्रभावशाली होता, इसी प्रकार दूसरी पंक्ति का अन्तिम शब्द “जब” यह भी जल्दी से समाप्त हुआ सा लगता है और अस्पष्ट सा सुनाई देता है। चूंकि यह अन्तिम शब्द है, जहाँ गीत की एक पंक्ति “लैण्ड” कर रही है और कई बार कर रही है, वह शब्द एकदम साफ़ होना चाहिये। गीत को पहली बार सुनते ही समझ में आ जाता है कि यह किसी दक्षिण भारतीय ने गाया है, क्योंकि हिन्दी उच्चारण का दोष तुरन्त सुनाई दे जाता है, यह नहीं होना चाहिये। कई जगह इस प्रकार की छोटी-छोटी गलतियाँ हैं, लेकिन पहली कोशिश के तौर पर इसे नज़रअंदाज़ किया जा सकता है। मिथिला जी का स्वर भी काफ़ी दबा हुआ सा लगता है, जैसे कि हिचकिचाते हुए गाया गया हो, आवाज में जो खुलापन होना चाहिये वह फ़िलहाल नदारद है। गीत की धुन अच्छी बन पड़ी है और हमें केरल के बैकवाटर में ले जाती है। गीत पर “येसुदास इफ़ेक्ट” को भी साफ़ महसूस किया जा सकता है। कुल मिलाकर देखा जाये तो कुछ बिन्दुओं को छोड़कर गीत को दस में से छः अंक दिये जा सकते हैं।

संगीत दिलों का उत्सव है... को पहले निर्णायक द्वारा मिले 6 /10 अंक, कुल अंक अब तक 6 /10

बढे चलो.

दूसरा गीत है “बढ़े चलो…”, यह गीत अपेक्षाकृत बेहतर बन पड़ा है। संगीतकार ॠषि ने इस पर काफ़ी मेहनत की है, धुन जोशीली है और खासकर ढोल का आभास देती कोरस आवाजें एक उत्साह सा जगाती हैं। गीत में पुरुष आवाज कुछ बनावटीपन लिये हुए है, शायद संगीतकार ने अधिक जोश भरने के लिये गायक की आवाज में परिवर्तन करवाया है, ऐसा प्रतीत होता है। बताया गया है कि यह गीत कुछ छः माह में तैयार हुआ है, जो कि स्वाभाविक भी है, इतने लोगों को विभिन्न जगहों से नेट पर एकत्रित करके इस प्रकार का उम्दा काम निकलवाना अपने आप में एक जोरदार प्रयास है और इसमें पूरी टीम सफ़ल भी हुई है और हमें एक बेहतरीन गाना दिया है। गीत के बोल तो युवाओं का प्रतिनिधित्व करते ही हैं, बीच-बीच में दी गई “बीट्स” भी उत्तेजना पैदा करने में सक्षम हैं। इस गीत को मैं दस में सात अंक दे सकता हूँ।

बढे चलो, को पहले निर्णयक से अंक मिले 7 / 10, कुल अंक अब तक 7 /10.

आवारा दिल.

तीसरा गीत है, “आवारा दिल…”। समीक्षा के लिये प्रस्तुत चारों गीतों में से यह सर्वश्रेष्ठ है। संगीतकार सुभोजित ने इसमें जमकर मेहनत की है। युवाओं को पसन्द आने वाली सिसकारियों सहित, तेज धुन बेहद “कैची” (Catchy) बन पड़ी है। “आवारा दिल” में “ल्ल्ल्ल्ल” कहने का अन्दाज बहुत ही अलहदा है, इसी प्रकार की वेरियेशन अन्य गायकों और संगीतकारों से अपेक्षित है, इस गीत में रोमांस छलकता है, एक साफ़ झरने सा बहता हुआ। सारथी के शब्द भी अच्छे हैं, और गायक की आवाज और उच्चारण एकदम स्पष्ट हैं। हालांकि कई जगह दो लाइनों और दो शब्दों के बीच में साँस लेने की आवाज आ जाती है, लेकिन कुल मिलाकर इस गीत को मैं दस में से आठ अंक देता हूँ।

आवारा दिल, को पहले निर्णायक से मिले 8 / 10, कुल अंक अब तक 8 / 10.


तेरे चेहरे पे ...

आखिरी गीत एक गज़ल है “तेरे चेहरे पे…”। यह गज़ल पूर्णरूप से गज़ल के “मूड” में गाई गई है, निशांत की आवाज़ में एक विशिष्ट रवानगी है, उनका उर्दू तलफ़्फ़ुज़ भी काफ़ी अच्छा है। उनकी आवाज़ को परखने के लिये अभी उनका और काम देखना होगा, लेकिन गज़ल के “मीटर” पर उनकी आवाज़ फ़िट बैठती लगती है। गज़ल के बोलों की बात करें तो यह काफ़ी छोटी सी लगती है, ऐसा लगता है कि शुरु होते ही खत्म हो गई। काफ़िया कहीं-कहीं नहीं मिल रहा, लेकिन इसे नज़र-अंदाज़ किया जा सकता है क्योंकि यह आजकल का “ट्रेंड” है। गज़ल की धुन ठीक बन पड़ी है, हालांकि यह एक “रूटीन” सी धुन लगती है और “कुछ हट के” चाहने वालों को निराश करती है। फ़िर भी यह एक अच्छा प्रयास कहा जा सकता है। इसे मैं दस में से छः अंक देता हूँ।

तेरे चेहरे पे..., को पहले निर्णायक ने मिले 6 /10, कुल अंक अब तक 6 /10

चलते चलते...

जुलाई माह का स्टार सुभोजित / साठे की जोड़ी को घोषित किया जा सकता है, जिन्होंने सर्वाधिक प्रभावित किया है। प्रस्तुत समीक्षा युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिये है, जो छोटी-छोटी गलतियाँ गिनाई हैं उन्हें आलोचना नहीं, बल्कि एक स्वस्थ सुझाव माना जाये। युवाओं में जोश है और यही लोग नई तकनीक के पुरोधा हैं सो अगली बार इनसे और बेहतर की उम्मीद रहेगी। जाहिर है कि यह प्राथमिक प्रयास हैं, जैसे-जैसे संगीतकारों में अनुभव आयेगा वे और भी निखरते जायेंगे…

तो दोस्तों पहले निर्णायक के फैसले के बाद सुभोजित / सुबोध के गीत आवारा दिल है अब तक सबसे आगे, लेकिन बाकि दो निर्णायकों के निर्णय आने अभी बाकी हैं, पहले चरण के बाद कौन बाजी मारेगा, अभी कहना मुश्किल है, दूसरे समीक्षक की पारखी समीक्षा लेकर हम उपस्थित होंगे अगले रविवार को. हिंद युग्म, आवाज़ द्वारा संगीत के क्षेत्र में हो रहे इस महाप्रयास के लिए अपना बेशकीमती समय निकल कर, युवा कलाकारों को प्रोत्साहन/ मार्गदर्शन देने के उद्देश्य से आगे आए हमारे समीक्षकों के प्रति हिंद युग्म की पूरी टीम अपना आभार व्यक्त करती है.

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