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Tuesday, June 29, 2010

"मिस्टर सिंह ऐण्ड मिसेज मेहता" के घर सुमधुर गीतों और ग़ज़लों के साथ आए हैं उस्ताद शुजात खान और शारंग देव

ताज़ा सुर ताल २४/२०१०

विश्व दीपक - ७० के दशक के मध्य भाग से लेकर ८० के दशक का समय कलात्मक सिनेमा का स्वर्णयुग माना जाता है। उस ज़माने में व्यावसायिक सिनेमा और कलात्मक सिनेमा के बीच की दूरी बहुत ही साफ़-साफ़ नज़र आती है। और सब से बड़ा फ़र्क था कलात्मक फ़िल्मों में उन दिनों गीतों की गुजाइश नहीं हुआ करती थी। लेकिन धीरे धीरे सिनेमा ने करवट बदली, और आज आलम कुछ ऐसा है कि युं तो समानांतर विषयों पर बहुत सारी फ़िल्में बन रही हैं, लेकिन उन्हे कलात्मक कह कर टाइप कास्ट नहीं किया जाता। इन फ़िल्मों की कहानी भले ही समानांतर हो, लेकिन फ़िल्म में व्यावसायिक्ता के सभी गुण मौजूद होते हैं। और इसलिए ज़ाहिर है कि गीत-संगीत भी शामिल होता है।

सुजॊय - आपकी इन बातों से ऐसा लग रहा है कि 'ताज़ा सुर ताल' में आज हम ऐसे ही किसी फ़िल्म के गानें सुनने जा रहे हैं।

विश्व दीपक - बिलकुल! आज हमने चुना है आने वाली फ़िल्म 'मिस्टर सिंह ऐण्ड मिसेज मेहता' के गीतों को।

सुजॊय - मैंने इस फ़िल्म के बारे में कुछ ऐसा सुन रखा है कि इसकी कहानी विवाह से बाहर के संबंध पर आधारित है और इस एक्स्ट्रा-मैरिटल संबंध का एक कारण है बांझपन। वैसे इस तरह की कहानी का अंदाज़ा आप फ़िल्म के शीर्षक से ही लगा सकते हैं। विश्व दीपक जी, अभी आप समानांतर सिनेमा की बात कर रहे थे, तो मैं यह जोड़ना चाहूँगा कि इस फ़िल्म के निर्देशक हैं प्रवेश भरद्वाज, जिन्होने फ़िल्म निर्माण की बारिक़ियाँ सीखी है श्याम बेनेगल, गुलज़ार, अरुणा राजे और गोविंद निहलानी जैसे दिग्गज फ़िल्मकारों से जो समानांतर और कलात्मक सिनेमा के स्तंभ माने जाते रहे हैं। तो अब देखना यह है कि प्रवेश ने इस फ़िल्म को कैसी ट्रीटमेण्ट दी है।

विश्व दीपक - तो फ़िल्म की थोड़ी सी भूमिका हमने अपने पाठकों को दी, अब सीधे आ जाते हैं फ़िल्म के गीतों पर। इससे पहले कि गीतों की चर्चा शुरु करें, आइए इस फ़िल्म का पहला गीत यहाँ सुन लिया जाए, फिर बात को आगे बढ़ाएँगे।

गीत: ऐ ख़ुदा तू कुछ तो बता ज़रा


सुजॊय - यह गीत था उस्ताद शुजात हुसैन ख़ान की आवाज़ में। जी हाँ, ये वही शुजात हुसैन ख़ान हैं जो एक जाने माने सितार वादक हैं इमदादख़ानी घराना के। शुजात खान साहब मशहूर सितार वादक उस्ताद विलायत खान के सुपुत्र हैं। इस फ़िल्म का संगीत शुजात खान साहब ने हीं तैयार किया है, सह-संगीतकार शारंग देव पंडित के साथ मिल कर।

विश्व दीपक - गीत सुन कर अच्छा लगा, कुछ-कुछ उस्ताद राशिद ख़ान साहब का गाया 'जब वी मेट' के गीत "आओगे जब तुम ओ साजना" की तरफ़ लगा कुछ जगहों पर। गीत का संगीत साफ़ सुथरा और कर्णप्रिय है, साज़ों के महाकुंभ के ना होने से एक सूदिंग अहसास होता है। एक सुकून का अहसास होता है गीत को सुनते हुए। शास्त्रीय कलाकार होने की वजह से इस मिट्टी के संगीत की मधुरता को शुजात साहब ने इस गीत में भली भांति समा दिया है।

सुजॊय - शुजात हुसैन ख़ान का जन्म १४ अगस्त १९६० में हुआ था। उनके सितार के ६० से उपर ऐल्बम्स बने हैं और उन्हे ग्रैमी नॊमिनेशन भी मिल चुका है। उनकी गायकी के भी चर्चे हैं। वे बैण्ड 'ग़ज़ल' में केहान कल्होर के साथ परफ़ार्म भी कर चुके हैं।

विश्व दीपक - चलिए अब दूसरे गीत की तरह नज़र दौड़ाते हैं। यह गीत है श्रेया घोषाल की आवाज़ में - "बारहाँ दिल में एक सवाल आया, आज सोचा तो ये ख़याल आया, दो क़दम साथ बस चले तुम हम, हमसफ़र तो ना थे ना कभी तुम हम"। न जाने कितने अरसे के बाद इस तरह के ग़ज़लनुमा अल्फ़ाज़ किसी हिंदी फ़िल्मी गीत में सुनने को मिल रहे है। इसके लिए हम धन्यवाद देते हैं फ़िल्म के गीतकार अमिताभ वर्मा को। श्रेया के आवाज़ की मिठास ने गीत की मधुरता को कई गुणा बढ़ा दिया है।

गीत: बारहाँ दिल में एक सवाल आया (श्रेया)


विश्व दीपक - इसी गीत का एक मेल वर्ज़न भी है के.के की आवाज़ में। अगर आप इजाज़त दें तो इसे भी सुनते चले?

सुजॊय - नेकी और पूछ पूछ?

गीत: बारहाँ दिल में एक सवाल आया (के.के)


सुजॊय - जैसा कि मैंने सोचा था, ठीक वैसे ही के.के ने फिर एक बार हमे निराश नहीं किया। मुझे इस दौर के गायकों में के.के. की आवाज़ सब से ज़्यादा अच्छी लगती है। वो अपना एक लो प्रोफ़ाइल मेन्टेन करते हैं, और एक के बाद एक लाजवाब गीत गाते चले जा रहे हैं।

विश्व दीपक - अच्छा सुजॊय जी, ये बताईये कि यह गीत था या ग़ज़ल?

सुजॊय - बढिया मज़ाक करते हैं आप। एक तरफ़ तो ’महफ़िल-ए-ग़ज़ल' आप होस्ट करते हैं, और दूसरी तरफ़ सवाल मुझसे पूछ रहे हैं :-) चलिए यूँ करते हैं, इस गीत के बोल यहाँ लिख डालते हैं, और फिर मैं गेस करता हूँ कि क्या यह ग़ज़ल की परिभाषा को पूरा करती है या नहीं!

"बारहाँ दिल में एक सवाल आया, आज सोचा तो ये ख़याल आया,

दो क़दम साथ बस चले तुम हम, हमसफ़र तो ना थे ना कभी तुम हम।

तेरी बातों पे मुस्कुराए आँखें, तेरी ख़ुशबू से गुनगुनाए साँसें,

मेरे इस दिल को बस एक ही ग़म, हमसफ़र तो न थे कभी तुम हम।

आज फिर तेरी याद आई है, पास मेरे मेरी तन्हाई है,

चलो अच्छा है टूटे सारे भरम, हमसफ़र तो न थे कभी तुम हम।"

सुजॊय - मुझे तो ग़ज़ल ही लग रही है, थोड़ा सा कन्फ़्युज़न है। चलिए आप ही बता दीजिए।

विश्व दीपक - सुजॊय जी, भले हीं महफ़िल-ए-ग़ज़ल मैं होस्ट करता हूँ, लेकिन मैं ग़ज़लों की परिभाषा से दूर हीं रहता हूँ, लेकिन चूँकि प्रश्न मैंने पूछा था तो जवाब भी देना हीं पड़ेगा। रदीफ़ और काफ़िये के हिसाब से तो ये गज़ल है.. बस इसमें मतला नहीं है। लेकिन कई सारी ऐसी ग़ज़लें लिखी गई हैं, जो बिना मतला और बिना मक़ता के होती हैं। अगर मैं "बहर" की बात न करूँ, जो कि मैं जानकारियों के अभाव में कर भी नहीं सकता, तो मेरे हिसाब से ये सोलह आने ग़ज़ल हीं है। अब मैं पाठकों और श्रोताओं से कहूँगा कि जिन किन्हीं को "बहर" की जानकारी हो, वो अंतिम निर्णय दें। खैर "ग़ज़ल" की बाकी बातें फिर कहीं किसी और महफ़िल में की जाएगी। अभी तो आगे बढते हैं और सुनते हैं अगला गीत "फ़रियाद है शिकायत है" जिसे रीचा शर्मा ने गाया है अपने उसी अंदाज़ में। लेकिन आवाज़ को उन्होने उतना ऊँचा नहीं उठाया है जितना वो अक्सर करती हैं, बल्कि कुछ नर्म अंदाज़ में गाने को निभाया है।

सुजॊय - और गीत में एक क़व्वालीनुमा अंदाज़ है... रीदम में और संगीत की शैली में। तो चलिए सुनते हैं यह गाना।

गीत: फ़रियाद है शिकायत है


विश्व दीपक - ’मिस्टर सिंह ऐण्ड मिसेस मेहता' के निर्देशक और संगीतकारों के नाम तो हम बता चुके है, साथ ही गीतकार का नाम भी। अब यह बता दें कि इस फ़िल्म के निर्माता हैं टुटु शर्मा और मनु एस. कुमारन, तथा फ़िल्म में मुख्य कलाकार हैं प्रशांत नारायण, अरुणा शील्ड्स, नावेद असलम और लुसी हसन।

सुजॊय - विश्व दीपक जी, टुटु शर्मा का नाम सुनकर मुझे एक ऐसी बात याद आ गई, जो भले हीं इस फिल्म के गानों से न जुड़ी है, लेकिन इस फिल्म से उसका गहरा नाता है। आपने अभी तक इस बात का जिक्र नहीं किया कि यह फिल्म रीलिज होने के पहले हीं लीक हो चुकी थी। मार्केट में इसकी "सीडी" खुलेआम बिकने लगी थी। इस फिल्म से पहले ऐसी हीं घटना दो और फिल्मों के साथ हो चुकी है। वे फिल्में हैं - "पाँच" और "तेरा क्या होगा जॉनी"... और आश्चर्य की बात तो ये है कि इन तीनों फिल्मों का निर्माता एक हीं इंसान है... टुटु शर्मा।

विश्व दीपक - यानि कि फिल्म लीक करने में टुटु शर्मा का भी हाथ हो सकता है। लेकिन इससे इनका क्या फायदा होगा। खैर हमें क्या लेना.. इन घटनाओं से। हमें तो बस संगीत से दरकार है। इसलिए इन बातों में न उलझते हुए हम अगले गाने की ओर रूख करते हैं, जिसे अपनी आवाज़ें दी हैं उदित नारायण और श्रेया घोषाल ने। यह भी एक नर्मोनाज़ुक रोमांटिक डुएट है "बेहोशी नशा ख़ुशबू, क्या क्या ना हमारी सांसों में"।

सुजॊय - ये बोल सुन कर लग रहा है कि एक और ग़ज़लनुमा अंदाज़ का गाना। बहुत दिनों के बाद उदित जी की आवाज़ सुनाई दे रही है इस फ़िल्म में। शुजात साहब का सुकूनदायक संगीत और अमिताभ वर्मा के पुर-असर बोल। बस इतना ही कहने को जी चाहता है कि अच्छी गायकी, उम्दा संगीत, पुर-असर बोल, क्या क्या न मौजूद है इस गाने में"! सुनिए, कुल ८ मिनट १९ सेकण्ड्स का यह गीत है।

गीत: बेहोशी नशा ख़ुशबू


विश्व दीपक - और अब हम आ पहुँचे हैं फ़िल्म के अंतिम गीत पर। और इस बार आवाज़ है रूप कुमार राठौड़ की। इसमें भी वही ठहराव, वही मासूमियत, वही सुकून, वही ग़ज़लनुमा अंदाज़। शुजात साहब ने तो जैसे मेलडी और अच्छे संगीत की धारा उतार कर रख दी है फ़िल्म संगीत संसार में, और साथ ही यह सिद्ध भी शायद करने वाले हैं कि अच्छा संगीत किसी युग किसी दौर का मोहताज नहीं होता। अगर कलाकार चाहे तो अच्छा काम किसी भी दौर में, किसी भी परिस्थिति में किया जा सकता है।

सुजॊय - बिलकुल ठीक कहा आपने। इस गीत की बात करें तो इसमें जगजीत सिंह के गायन शैली का प्रभाव सुनाई देता है। गीत के बोल हैं "इन्ही में डूब के एक रोज़ ख़ुद को खोया था, इन्ही की याद में कई रात मैं ना सोया था, इन्ही की हर ख़ुशी हर ग़म में साथ रोया था"। आगे अमिताभ वर्मा लिखते हैं कि "तब ऐसी अजनबी लगती नहीं थीं ये आँखें", इसलिए गीत को शीर्षक दिया गया है "अजनबी आंखें"। वैसे गीत में इस मिट्टी की महक है, लेकिन इसका जो रीदम और ऒरकेस्ट्रेशन है, वह पश्चिमी है। ख़ास कर इंटरल्युड म्युज़िक में तो हेवी इन्स्ट्रुमेण्ट्स का प्रयोग हुआ है, रॊक शैली का।

गीत: अजनबी आँखें


"मिस्टर सिंह ऐण्ड मिसेस मेहता" के संगीत को आवाज़ रेटिंग ****१/२

सुजॊय - वाह! मज़ा आ गया। सच पूछिए तो एक लम्बे अरसे के बाद इतना उम्दा संगीत किसी हिंदी फ़िल्म में सुनने को मिला। हर गीत अच्छा है, बोल और संगीत, दोनों की दृष्टि से ही। दूसरे गीतकार कुछ सबक ज़रूर लेंगे ऐसी उम्मीद हम करते हैं। सस्ते गीत लिख कर उसे व्यावसायिकता की ज़रूरत करार देते हुए जो गीतकार फ़िल्म संगीत के समुंदर में गंदगी डाल रहे हैं, उनसे यही गुज़ारिश है कि कृपया इस फ़िल्म के गीतों को सुनें।

विश्व दीपक - अच्छा सुजॊय जी, आपने ज़िक्र किया था कि इस फ़िल्म में शारंग देव पंडित भी संगीतकार हैं, तो उन्होने किस गीत की धुन बनाई?

सुजॊय - नहीं, ये सभी गानें शुजात साहब के ही थे। दर-असल इस फ़िल्म के साउण्ड ट्रैक में चार इन्स्ट्रुमेण्टल पीसेस भी शामिल किए गए हैं जो शारंग जी की काम्पोज़िशन्स हैं। तो चलिए... मुझे जितना कहना था मैंने कह दिया, अब आपकी बारी है।

विश्व दीपक - सुजॊय जी, मैं भी आपसे इत्तेफ़ाक़ रखता हूँ कि इस फिल्म के संगीत में सब कुछ खास है। मेरे हिसाब से इतना "मनभावन" संगीत इस साल अभी तक किसी और फिल्म में सुनने को नहीं मिला। फिल्म चलेगी या पिटेगी... यह अलग मुद्दा है, लेकिन यह संगीत हिट है। दुआ करता हूँ कि आने वाले दिनों में किसी और संगीतकार की झोली से भी ऐसा हीं संगीत बरसे। खत्म हो रही मेलोडी और गुम हो रही फिल्मी-ग़ज़लों को बचाने का इससे अच्छा कोई और रास्ता मुझे नज़र नहीं आ रहा। दिल में एक सुकून लेकर चलिए अब हम दोनों श्रोताओं से विदा लेते हैं... खुदा हाफ़िज़!

और अब आज के ३ सवाल

TST ट्रिविया # ७०- आप ने फ़िल्म 'वैसा भी होता है -२' मे अपने अभिनय के लिए सराहे गए थे और आपने केतन मेहता की फ़िल्म 'रंग रसिया' में भी एक किरदार निभाया था। बताइए हम किस अभिनेता या अभिनेत्री की बात कर रहे हैं?

TST ट्रिविया # ७१- इंगलैण्ड के किस संगीत विद्यालय ने उस्ताद शुजात हुसैन ख़ान का विज़िटिंग्‍ फ़ैकल्टी के रूप में स्वागत किया था?

TST ट्रिविया # ७२- उदित नारायण और श्रेया घोषाल ने 'मिस्टर सिंह....' फ़िल्म में एक युगल गीत गाया है। बताइए कि इन दोनों की आवाज़ में वह कौन सा युगल गीत है जिसमें "बेकल", "सहयोग", "वातावरण", "झरना" जैसे शब्दों का प्रयोग हुआ है।


TST ट्रिविया में अब तक -
पिछले हफ़्ते के सवालों के जवाब:

१. फ़िल्म 'फ़िदा' के गीत "आजा वे माही"।
२. 'रन' (२००४)।
३. फ़िल्म 'दिल माँगे मोर' का "ऐसा दीवाना हुआ ये दिल आप के प्यार में" और फ़िल्म 'राज़' का "आप के प्यार में हम संवरने लगे"।

पिछली बार की बैठक खाली हीं गई... किसी ने हमारी महफ़िल की तरह रूख नहीं किया। सीमा जी, किधर हैं आप? उम्मीद करते हैं कि दुबारा ऐसी स्थिति नहीं आएगी।

Tuesday, June 22, 2010

बहुत कुछ खत्म होके भी हिमेश भाई और संगीत के दरम्यां कुछ तो बाकी है.. और इसका सबूत है "मिलेंगे मिलेंगे"

ताज़ा सुर ताल २३/२०१०

सुजॊय - सभी श्रोताओं व पाठकों का स्वागत है 'ताज़ा सुर ताल' के एक और ताज़े अंक में। इस शुक्रवार वह फ़िल्म आख़िर रिलीज़ हो ही गई जिसकी लोग बड़ी बेसबरी से इंतज़ार कर रहे थे। 'रावण'। अभी दो दिन पहले एक न्यूज़ चैनल पर इस फ़िल्म से संबंधित 'ब्रेकिंग्‍ न्यूज़' का शीर्षक था "मिया पर बीवी हावी"। ग़लत नहीं कहा था उस न्यूज़ चैनल ने। हालाँकि अभिषेक ने अच्छा काम किया है, लेकिन ऐश की अदाकारी की तारीफ़ करनी ही पड़ेगी। देखते हैं फ़िल्म कैसा व्यापार करता है इस पूरे हफ़्ते में।

विश्व दीपक - मैने रावण देखी और मुझे तो बेहद पसंद आई। मैने ना सिर्फ़ इस फिल्म का हिन्दी संस्करण देखा बल्कि इसका तमिल संस्करण (रावणन) भी देखा.. और दुगना आनंद हासिल किया । चलिए 'रावण' से आगे बढ़ते हैं। आज हम इस स्तंभ में जिस फ़िल्म के गानें सुनने जा रहे हैं, वह कई दृष्टि से अनोखा है। पहली बात तो यह कि इस फ़िल्म की मेकिंग बहुत पहले से ही शुरु हो गई थी जब शाहीद और करीना का ब्रेक-अप नहीं हुआ था। तभी तो यह जोड़ी नज़र आएगी इस फ़िल्म में। शायद यही बात फ़िल्म की सफलता का कारण बन जाए, किसे पता! दूसरी बात यह कि इसमें हिमेश रेशम्मिया का संगीत है, लेकिन वैसा संगीत नहीं जैसा कि वो आजकल की फ़िल्मों में दे रहे हैं। मेरा ख़याल है कि इस फ़िल्म के गानें भी बहुत पहले से ही बन चुके होंगे, जिस समय हिमेश अपनी आवाज़ के मुकाबले सोनू निगम, शान, अलका याज्ञ्निक, श्रेया घोषाल जैसे गायकों को ज़्यादा मौका दिया करते थे। इसलिए जिन श्रोताओं को हिमेश की आवाज़ से ऐलर्जी है, वो शायद इस बार इस फ़िल्म के गानें सुनने में दिलचस्पी लें।

सुजॊय - सही कहा आपने। दरसल मुझे जितना पता है, 'मिलेंगे मिलेंगे' आज से पाँच साल पहले प्लान की गई थी, और उस समय हिमेश का स्टाइल कुछ और ही हुआ करता था। इस फ़िल्म के गीतों में सुनने वालों को उस पुराने हिमेश और आज के हिमेश का संगम सुनाई देगा। 'मिलेंगे मिलेंगे' के निर्देशक हैं सतीश कौशिक, जिनके साथ हिमेश ने अपनी सब से बेहतरीन फ़िल्म 'तेरे नाम' में संगीत दिया था। इसके अलावा 'वादा' और 'रन' फ़िल्म में भी ये दोनों साथ में आए थे। और कहने की ज़रूरत नहीं कि इन दो फ़िल्मों के गानें भी चले थे भले ही फ़िल्में फ़्लॊप हुईं थीं। आज इस फ़िल्म के गीतों को सुनते हुए हमें अहसास हो जाएगा कि क्या हिमेश फिर से एक बार पिछले दशक के अपने मेलोडियस गीतों की तरह इस फ़िल्म में भी वैसा ही कुछ संगीत दे पाएँ हैं! 'तेरे नाम', 'दिल मांगे मोर', 'चुरा लिया है तुमने' आदि फ़िल्मों का ज़माना क्या वापस आ पाएगा इस फ़िल्म के ज़रिए?

विश्व दीपक - अब बातों को देते हैं विराम और सुनते हैं फ़िल्म का पहला गीत हिमेश की आवाज़ में। फ़िल्म के गानें लिखे हैं गीतकार समीर ने। और आपको बता दें कि इस गीत के ज़रिए ही फ़िल्म का प्रोमो इन दिनों दिखाया जा रहा है टेलीविज़न पर।

गीत: कुछ तो बाक़ी है


सुजॊय - "कुछ तो बाक़ी है"। विश्व दीपक जी, इस गीत को सुन कर हिमेश की आवाज़ और गायन शैली के बारे में कुछ नहीं कहूँगा क्योंकि कुछ नयी बात कहने की कोई गुंजाइश बाक़ी नहीं है। लेकिन संगीत और संगीत संयोजन अच्छा है और इतना तो ज़रूर कह सकते हैं कि हिमेश के संगीत में अभी बहुत कुछ बाक़ी है। आपका क्या ख़याल है?

विश्व दीपक - यह गीत यक़ीनन एक ऐसा गीत है जो एक मूड बना देता है और दोबारा सुनने के लिए उकसा देता है। समीर की लेखन शैली और स्टाइल साफ़ झलकता है इस गीत में। और जहाँ तक ऒर्केस्ट्रेशन का सवाल है, इसमें तबला, हारमोनियम और सारंगी जैसे साज़ों की ध्वनियों का सुंदर प्रयोग किया गया है। और सब से बड़ी बात यह कि इस गीत के जो बोल हैं वो फ़िल्म के किरदारों पर ही नहीं बल्कि शाहीद-करीना की निजी ज़िंदगी को भी छू जाते हैं। "सब ख़त्म होके भी तेरे मेरे दरमीयाँ कुछ तो बाक़ी है" - अब इस तरह के बोल जान बूझ कर डाले गऎ है या फिर एक महज़ इत्तेफ़ाक़ है, यह तो हम नहीं जानते हैं, लेकिन जो भी है मज़ेदार बन पड़ा है। मीडिया को भी भरपूर ख़ुराक मिलने वाला है इस फ़िल्म के रिलीज़ पर।

सुजॊय - आगे बढ़ते हैं और दूसरा जो गीत है उसे गाया है अलका याज्ञ्निक और जयेश गांधी ने। यह फ़िल्म का शीर्षक गीत है "मिलेंगे मिलेंगे", और इसी का एक और वर्ज़न भी है जिसे हम आगे चलकर सुनेंगे।

गीत: मिलेंगे मिलेंगे (अलका/जयेश)


सुजॊय - बहुत दिनों के बाद अलका की आवाज़ सुन कर अच्छा लगा। एक बात जो मैंने नोटिस की इस गीत को सुनते हुए कि इस गीत का जो ऒरकेस्ट्रेशन है, वह हिमेश के पहले के गीतों में कई कई बार हो चुका है। मुझे पता नहीं वह कौन-सा साज़ है, लेकिन इस गीत में आपको उस साज़ की धुन सुनाई देगी जिसका हिमेश ने "चुरा लिया है तुमने" गीत में भी प्रोमिनेण्ट तरीके से किया था। पार्श्व में कोरस का इस्तेमाल भी हिमेश ने अपने उसी पुराने शैली में किया है। गीत ठीक ठाक है, लेकिन कोई नई बात नज़र नहीं आई।

विश्व दीपक - और अब सोनू निगम और अलका याज्ञ्निक की युगल आवाज़ें। सुजॊय, क्या आप बता सकते हैं कि इससे पहले आपने सोनू और अलका की युगल आवाज़ें किस फ़िल्म में आख़िरी बार सुना था?

सुजॊय - मेरा ख़याल है पिछले ही साल फ़िल्म 'लाइफ़ पार्टनर' में "कल नौ बजे तुम चांद देखना" जो गीत है, उसी में ये दोनों साथ में आए थे।

विश्व दीपक - और उस गीत की तरह यह गीत भी नर्मोनाज़ुक है और इस जोड़ी ने पूरा न्याय किया है। वैसे इसे पूरी तरह से युगल कहना ग़लत होगा। भले ही फ़िल्म के सी.डी पर सोनू और अलका के नाम दिए गए हैं, लेकिन इसमें सुज़ेन डी'मेलो ने अंग्रेज़ी के बोल गाए हैं जिनकी इस गीत में कोई ज़रूरत नहीं थी।

गीत: तुम चैन हो


सुजॊय - बिलकुल सही कहा था आपने कि उन अंग्रेज़ी के शब्दों की कोई ज़रूरत नहीं थी। ज़रा याद कीजिए फ़िल्म 'लगान' के उस गीत को, "ओ री छोरी", जिसमें वसुंधरा दास ने अंग्रेज़ी की पंक्तियाँ गाईं थीं। इसका ज़िक्र मैं यहाँ इसलिए कर रहा हूँ यह बताने के लिए कि उस गीत में वह न्यायसंगत था, लेकिन इस गीत में उसकी ज़रूरत शायद ही थी। ख़ैर, सोनू निगम ने फिर एक बार अपने बेहतरीन अंदाज़ में गायन प्रस्तुत किया है, और हिमेश के अनुसार वो हैं ही आज के नंबर वन गायक। एक बार करण जोहर के 'कॊफ़ी विथ करण' में जब करण ने कई गायकों को १ से १० के स्केल में रेट करने को कहा था, तब हिमेश ने उदित नारयण को ७ और सोनू निगम को १० की रेटिंग्‍ दी थी। अलका के खाते में आए थे ८ की रेटिंग। ख़ैर, ये तो हिमेश की व्यक्तिगत राय थी।

विश्व दीपक - अगला गीत है "इश्क़ की गली है मखमली"। राहत फ़तेह अली ख़ान और जयेश गांधी की आवाज़ें। राहत साहब गाने की शुरुआत करते हैं और फिर उसके बाद जयेश गीत को आगे बढ़ाते हैं। राहत साहब अपने अंदाज़ के ऊँचे सुर में "इश्क़ की गली है मखमली रब्बा" गाते हैं, जब कि जयेश भी अपने ही अंदाज़ में "मेरे दिल को तुमसे कितनी मोहब्बत" गाते हैं। उनकी आवाज़ भी मौलिक आवाज़ है और किसी और से नहीं मिलती।

सुजॊय - इससे पहले राहत फ़तेह अली ने हिमेश रेशम्मिया की धुन पर फ़िल्म 'नमस्ते लंदन' का मशहूर गीत "मैं जहाँ रहूँ" गाया था। लेकिन उस गीत में जो बात थी, वह असर 'मिलेंगे मिलेंगे' के इस गीत में नहीं आ पाया है। चलिए सुनते हैं।

गीत: इश्क़ की गली है मखमली


विश्व दीपक - अगला जो गीत है वह थोड़ा सा अलग हट के है इसलिए क्योंकि आजकल इस तरह के गानें बनने लगभग बंद ही हो गए हैं। ९० के दशक और २००० के दशक के शुरुआती सालों तक इस तरह के "चूड़ी-कंगन" वाले गानें बहुत बनें हैं, लेकिन आज के फ़िल्मों के विषयवस्तु इस तरह के होते हैं कि इस तरह के गीतों के लिए कोई जगह या सिचुएशन ही नहीं पैदा हो पाती। यह है अलका यज्ञ्निक और साथियों की आवाज़ों में "ये हरे कांच की चूड़ियाँ, पहनी तेरे नाम की, राधा हो गई श्याम की"। वैसे बोल तो साधारण हैं लेकिन धुन ऐसी कैची है कि सुनते हुए अच्छा लगता है।

सुजॊय - और गाने के अंत में "मिलेंगे मिलेंगे" वाले गीत की धुन पर कोरस "मिलेंगे मिलेंगे" गा उठते हैं। और विश्व दीपक जी, इस गाने से याद आया कि ६० के दशक में एक फ़िल्म आई थी 'हरे काँच की चूड़ियाँ', जिसमें आशा भोसले का गाया शीर्षक गीत था "बज उठेंगे हरे काँच की चूड़ियाँ"। शैलेन्द्र जी ने उस गीत में मुखड़े और अंतरे में अंतर ना रखते हुए बड़े ही ख़ूबसूरत तरीक़े से लिखा था "धानी चुनरी पहन, सज के बन के दुल्हन, जाउँगी उनके घर, जिन से लागी लगन, आयेंगे जब सजन, जीतने मेरा मन, कुछ न बोलूँगी मैं, मुख न खोलूँगी मैं, बज उठेंगी हरे कांच की चूड़ियाँ, ये कहेंगी हरे कांच की चूड़ियाँ"।

विश्व दीपक - बिलकुल मुझे भी याद है यह गीत और इसे हमने 'ओल्ड इज़ गोल्ड' पर भी तो सुनवाया था। ख़ैर, अलका और सखियों की आवाज़ों में आइए यह गीत सुना जाए और हमारे श्रोताओं को सुनवाया जाए।

गीत: ये हरे काँच की चूड़ियाँ


सुजॊय - और अब हम आ पहुँचे हैं इस फ़िल्म के अंतिम गीत पर। जैसा कि उपर हमने बताया था कि अलका याज्ञ्निक और जयेश गांधी के गाए फ़िल्म के शीर्षक गीत "मिलेंगे मिलेंगे" का एक और वर्ज़न है, तो अब बारी है उसी दूसरे वर्ज़न को सुनने की जिसे ख़ुद हिमेश भाई और श्रेया घोषाल ने गाया है। यक़ीन मानिए, अलका-जयेश वाले वर्ज़न से यह वला वर्ज़न मुझे ज़्यादा अपील किया। और "मिलेंगे मिलेंगे" वाले जगह की ट्युन ऐसी है कि एक हौंटिंग वातावरण जैसा बन जाता है, और इसमें शक़ नहीं कि पूरे फ़िल्म में इसी ट्युन का बार बार इस्तेमाल होता रहेगा।

विश्व दीपक - और इस गीत में शाहीद कपूर भी कुछ लाइनें कहते हैं। सिंथेसाइज़र्स का ख़ूबसूरत इस्तेमाल हुआ है। और फिर से उसी "चुरा लिया है तुमने" वाले साज़ का इस्तेमाल ऒरकेस्ट्रेशन में सुनाई देता है। हिमेश और श्रेया की आवाज़ें एक साथ अच्छी लगती है। फ़िल्म 'रेडियो' का "जानेमन" गीत भी इन दोनों ने ख़ूब गाया था।

गीत: मिलेंगे मिलेंगे (हिमेश/श्रेया)


"मिलेंगे मिलेंगे" के संगीत को आवाज़ रेटिंग ***१/२

सुजॊय - इन सभी गीतों को सुन कर मैं यह कह सकता हूँ कि भले ही इन गीतों में बहुत ख़ास कोई बात नहीं है, लेकिन गानें मेलोडियस हैं, सुन कर अच्छा लगा। हालाँकि इन गीतों में वो बात नहीं है कि जो फ़िल्म को हिट करा दे, लेकिन अगर फ़िल्म दूसरे पक्षों की वजह से हिट हो जाती है तो ये गानें भी ख़ूब चलेंगे, जैसा कि हमेशा से होता आया है। बस हिमेश भाई को शुभकामनाएँ देते हुए यही कहूँगा कि हिमेश भाई, अभी भी आप में बहुत कुछ बाक़ी है, बेस्ट ऒफ़ लक!

विश्व दीपक - फिर भी इतना तो कहना होगा कि हिमेश भाई का पुराना प्रयास उनके नए प्रयासों से कई कदम आगे है। अपने हीं आप में टाईप-कास्ट हो चुके हिमेश भाई से हम यही अपील करते हैं कि कभी-कभार वो अपने खोल से बाहर निकला करें और "तेरे नाम" जैसे गाने तैयार किया करें। इसी उम्मीद के साथ हम चलते हैं। हाँ, चलते चलते 'ताज़ा सुर ताल' के श्रोताओं व पाठकों से हम यही कहेंगे कि अगले हफ़्ते फिर एक बार आप से इस स्तंभ में यकीनन मिलेंगे मिलेंगे।

और अब आज के ३ सवाल

TST ट्रिविया # ६७- "मिलेंगे मिलेंगे" शीर्षक गीत में शाहीद कपूर ने कुछ लाइनें कही हैं। क्या आप कोई और गीत बता सकते हैं जिसमें शाहीद कपूर की आवाज़ शामिल है?

TST ट्रिविया # ६८- 'मिलेंगे मिलेंगे' बोनी कपूर की फ़िल्म है। बोनी कपूर की वह और कौन सी फ़िल्म है जिसमें हिमेश रेशम्मिया ने संगीत दिया है?

TST ट्रिविया # ६९- यह एक सोनू निगम - अलका याज्ञ्निक डुएट है। हिमेश रेशम्मिया का म्युज़िक है। शाहीद कपूर ही नायक हैं। गीत का मुखड़ा उन चार शब्दों से ख़त्म होता है जिन चार शब्दों से अलका याज्ञ्निक का गाया हुआ वह गीत शुरु होता है जो एक मशहूर हॊरर फ़िल्म का है और जिसमे नायिका बनी थीं बिपाशा बासु। बताइए हम किन दो गीतों की बात कर रहे हैं।


TST ट्रिविया में अब तक -
पिछले हफ़्ते के सवालों के जवाब:

१. नरेश शर्मा
२. 'चश्म-ए-बद्दूर'
३. पलाश सेन

सीमा जी, आपने तीनों सवालों के सही जवाब दिए। बधाई स्वीकारें। "इंडलि" जी, हमें आपके प्रस्ताव पर विचार करने के लिए कुछ वक्त चाहिए। विधु जी, गाने पसंद करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

Tuesday, June 1, 2010

बस प्यार का नाम न लेना, आइ हेट लव स्टोरीज़, यही गुनगुनाते आ पहुँचे हैं विशाल, शेखर, कुमार और अन्विता

ताज़ा सुर ताल २०/२०१०

सुजॊय - 'ताज़ा सुर ताल' के आज के अंक में आप सब का स्वागत है। विश्व दीपक जी, पिछले हफ़्ते फ़िल्म 'काईट्स' प्रदर्शित हुई, लेकिन आश्चर्य की बात रही कि फ़िल्म को वो लोकप्रियता हासिल नहीं हो सकी जिसकी उम्मीदें की गईं थी। ऐसा सुनने में आया है कि जिन लोगों को अंग्रेज़ी फ़िल्में देखने का शौक है, उन्हे यह फ़िल्म पसंद आई, लेकिन बॊलीवुड मसाला फ़िल्मों के दर्शकों को यह फ़िल्म ज़्यादा हज़म नहीं हुई। आपके क्या विचार हैं 'काइट्स' को लेकर?

विश्व दीपक - सुजॊय जी, मैंने अभी तक काईट्स देखी नहीं है, इसलिए कुछ भी कहने की हालत में नहीं हूँ। इस शनिवार देखने का विचार है, उसी के बाद अपने विचार जाहिर करूँगा। हाँ, लेकिन यह तो है कि ज्यादातर दर्शकों को फिल्म की कहानी में कुछ भी नया नज़र नहीं आया है, उन सब का कहना है कि ऋतिक रोशन का इस फिल्म के लिए ढाई साल का ब्रेक लेना हजम नहीं होता। वहीं मुझे एकाध ऐसे भी लोग मिले हैं जिन्हें यह फिल्म "फिल्मांकन" (सिनेमाटोग्राफी) के कारण पसंद आई है तो दो-चार ऐसे भी हैं जिन्हें बारबारा मोरी के अभिनय ने प्रभावित किया है। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि इस फिल्म को इसी के हाईप (हद से ज्यादा प्रचार और उम्मीदों) से सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है।

सुजॊय - चलिए, हम काईट्स से आगे बढते हैं। आज हम जिस फ़िल्म के संगीत की चर्चा करने जा रहे हैं, उस फ़िल्म से भी लोगों की उम्मीदें हैं। और क्यों ना हो जब फ़िल्म करण जोहर के 'धर्मा प्रोडक्शन्स' के बैनर तले बन रही हो! जी हाँ, आज 'ताज़ा सुर ताल' में ज़िक्र 'आइ हेट लव स्टोरीज़' के संगीत की।

विश्व दीपक - इस फ़िल्म के संगीत की चर्चा तो हम करेंगे, लेकिन आपने ग़ौर किया है कि फ़िल्म के टाईटल को किस तरह से स्पेल किया गया है? 'I Hate Luv Storys' - जिस तरह से हम SMS में टाइप करते हैं, उसी शैली को अपनाया गया है, शायद टाईटल के ज़रिये भी आज के युवा वर्ग को आकर्षित करने का प्रयास हुआ है। ख़ैर, 'आइ हेट लव स्टोरीज़' में इमरान ख़ान और सोनम कपूर ने मुख्य भूमिकाएँ निभाई हैं। मूलत: यह एक रोमांटिक कॊमेडी है जिसका निर्देशन किया है नवोदित निर्देशक पुनीत मल्होत्रा ने, जो मशहूर डिज़ाइनर मनीष मल्होत्रा के भतीजे हैं और जिन्होने पहले करण जोहर के सहायक के रूप में काम कर चुके हैं। यह फ़िल्म प्रदर्शित हो रही है २ जुलाई के दिन।

सुजॊय - इस फ़िल्म में संगीत है विशाल-शेखर का, और गानें लिखे हैं अन्विता दत्त गुप्तन, कुमार और विशाल दादलानी। विशाल-शेखर का ट्रैक-रिकार्ड अच्छा रहा है। 'ओम शांति ओम', ’दोस्ताना’ और 'बचना ऐ हसीनों' के हिट संगीत के बाद अब देखना है कि क्या उनका कमाल इस फ़िल्म में भी चलता है। वैसे काफ़ी यंग फ़िल्म है और म्युज़िक भी भी उसी अंदाज़ का है। तो सुनते हैं पहला गीत जिसे विशाल दादलानी ने गाया है और लिखा है अन्विता ने।

गीत: जब मिला तू


सुजॊय - यह एक पेप्पी नंबर था, और कई ईलेक्ट्रॊनिक इन्स्ट्रूमेण्ट्स के इस्तेमाल से एक शार्प फ़ील आया है गीत में। "रु तु रु तु" गीत का कैच लाइन है जो गीत को दिल-ओ-दिमाग़ पर बसाने का काम करता है। विशाल ने अपने जानदार गायकी से गीत को वही रफ़ फ़ील दिया है जिसकी इस गीत को ज़रूरत थी। अच्छी बात यह भी है कि पाश्चात्य और पेपी नंबर होते हुए भी गीत के बोल वज़नदार हैं। कहने का मतलब यह कि सिर्फ़ संगीत पर ही नहीं, बल्कि बोलों पर भी ध्यान दिया गया है। और विश्व दीपक जी, अन्विता के लिखे इस गीत को सुनते हुए यकायक फ़िल्म 'दोस्ताना' के "जाने क्यों दिल चाहता है" गीत की याद आ ही जाती है। कुछ कुछ वैसा अंदाज़ मिलता है इस गीत में। मेरे ख़याल से तो इस गीत को अच्छा रेस्पॊन्स मिलने वाला है।

विश्व दीपक - जी सुजॊय जी, मेरा भी यही ख्याल है। जहाँ विशाल अपनी अलग तरह की आवाज़ के लिए जाने जाते हैं तो अन्विता भी इन दिनों अपने शब्दों का लोहा मनवा रही हैं। मेरे जहन में अन्विता का लिखा "खुदा जाने" (बचना ऐ हसीनों) अभी तक जमा हुआ है। तब से मैं इनकी लेखनी का फैन हूँ। अभी हाल में हीं "बदमाश कंपनी" का "चस्का" भी इनके लफ़्ज़ों के कारण लीक से हटकर साबित हुआ है। गौरतलब है कि बालीवुड में महिला गीतकारों की बेहद कमी है, इसलिए दुआ करता हूँ कि अन्विता इस पुरूष-प्रधान संगीत की दुनिया में अपना स्थान पक्का कर लें।

सुजॊय - आमीन! चलिए अब सुना जाए दूसरा गीत जिसे शफ़ाक़त अमानत अली और सुनिधि चौहान ने गाया है, गीतकार हैं विशाल दादलानी। जी हाँ, विशाल आज के दौर के उन गिने चुने कलाकारों में से हैं जो एक संगीतकार भी हैं, एक गायक भी, और एक गीतकार के हैसियत से भी अच्छा परिचय दे रहे हैं। कोरस और अकॊस्टिक गिटार के साथ गीत आरम्भ होता है। शफ़ाक़त अमानत अली, जो करण जोहर की कई फ़िल्मों में गीत गा चुके हैं ("मितवा" - कभी अलविदा ना कहना, "तेरे नैना" - माइ नेम इज़ ख़ान), इस गीत में भी उनकी आवाज़ ने वही असर किया है, और इस गीत के मूड के मुताबिक उनकी आवाज़ अच्छी जमी है।

गीत: बिन तेरे


विश्व दीपक - गीत को सुनकर यह कहना ही पड़ेगा कि विशाल दादलानी एक बहुत ही अच्छे गीतकार हैं। उन्होंने इस गीत में रोमांस का माहौल बनाने के लिए उर्दू का जिस तरह इस्तेमाल किया है, वैसा इस्तेमाल आजकल के गीतों में बहुत कम ही सुनाई देता है। सुनिधि की आवाज़ इस गीत में अंतिम हिस्से में आतॊ है और बहुत ही नाज़ुकी के साथ उन्होने गाया है। दर=असल सुनिधि के आवाज़ के दो रूप हैं, एक रूप वह जिसमें वो "धूम मचाले" और "ऐसा जादू डाला रे" जैसे गीत गाती हैं और दूसरा रूप वह जिसमें वो इस तरह की नरमी वाले गानें गाती हैं। और दोनों ही में उन्हे महारथ हासिल है। इसमें कोई शक़ नहीं कि इस दौर की अग्रणी गायिका हैं सुनिधि। लेकिन जहाँ तक इस गीत की बात है, कुछ कमी सी लगती है, वह एक्स-फ़ैक्टर मिसिंग है जो गीत को हिट बनाने के लिए ज़रूरी होता है। देखते हैं कैसा चलता है यह गीत।

सुजॊय - और अब इस फ़िल्म का शीर्षक गीत और एक बार फिर विशाल दादलानी की आवाज़। इस बार गीतकार हैं कुमार। गीत एक डान्स नंबर है जिसकी धुन बहुत ही कैची है, बहुत ही ऐडिक्टिव है, जिसे फ़िल्म के परदे पर इमरान ख़ान एक क्लब में डान्स करते हुए नज़र आएँगे। 'जाने तू या जाने ना' के "पप्पु काण्ट डान्स साला" के लोकप्रिय डान्स के बाद अब देखना यह है कि क्या इस डान्स नंबर को भी वही सफलता प्राप्त होती है। चलिए गीत सुन लेते हैं, फिर इस गीत की थोड़ी और चर्चा करते हैं।

गीत: आइ हेट लव स्टोरीज़


सुजॊय - "मिल गए जो छोरा छोरी, हुई मस्ती थोड़ी थोड़ी, बस प्यार का नाम ना लेना, आइ हेट लव स्टोरीज़" - शायद आज की युवा पीढी को काफ़ी रास आएँगे ये बोल। जो भी है, विशाल दादलानी ने फिर एक बार गायक और संगीतकार की दोहरी भूमिका निभाई है। कुमार के शब्द हास्यप्रद होते हुए भी रचनात्मक सुनाई देते हैं। जिस तरह का चलन आज कर फ़िल्मी गीतों में छाया हुआ है कि हर गीत में कुछ कुछ अंग्रेज़ी के शब्द डाले जा रहे हैं, तो इस फ़िल्म के गीतों में भी मौजूद हैं, और विशाल शेखर एक ऐसे संगीतकार रहे हैं जिन्होने इस शैली का काफ़ी इस्तेमाल किया है।

विश्व दीपक - जी सही कह रहे हैं आप। मज़े की बात तो यह है कि अन्विता की तरह "कुमार" भी विशाल-शेखर के काफी प्रिय हैं। आप ’दोस्ताना’ का ’माँ दा लाडला’ कैसे भूल सकते हैं! कुमार इस तरह के गाने लिखने में खासे माहिर हैं। इन दिनों तो "कुमार" लगभग हर फिल्म में नज़र आ रहे हैं। जैसे कि "आल द बेस्ट", "जश्न", "दिल दोस्ती इटीसी", "चांस पे डांस", "गोलमाल", "गोलमाल रिटर्न्स", "सिकंदर" और "लाईफ़ पार्टनर"। वैसे क्या आपको यह पता है कि "ओम शांति ओम" में "जावेद अख्तर" और "विशाल दादलानी" (आँखों में तेरे) के अलावा एक और गीतकार थे और वो थे "कुमार"। उन्होंने उस फिल्म का सबसे ज्यादा सोलफुल नंबर (जग सूना-सूना लागे) लिखा था। मुझे यह बात जानकर बड़ा हीं सुखद आश्चर्य हुआ और मैं इस बात को आपसे शेयर किए बिना नहीं रह पाया।

सुजॊय - अरे वाह! मुझे तो यह पता हीं नहीं था। हम आगे बढेंगे तो हमें ऐसी हीं और भी बातें मालूम चलेंगी। तो चलिए फ़िल्म का चौथा गीत सुनते हैं जिसमें आवाज़ें हैं श्रेया घोषाल और सोना महापात्रा की। श्रेया का नाम सुनते ही सॊफ़्ट रोमांटिक गीत की कल्पना हम करते हैं। इस गीत में भी वही बात है। ९० के दशक में कई गीत ऐसे बने थे जिनमें इला अरुण ने राजस्थानी लोक शैली में कुछ कुछ पंक्तियाँ गाईं थीं जैसे कि फ़िल्म 'लम्हे' में "मोरनी बागा मा बोले आधी रात मा" या फिर "मेघा रे मेघा", फ़िल्म 'बटवारा' में "हाए उसके डंक बिछवा का", आदि। इन सभी गीतों में मुख्य गायिका रहीं लता जी। अब 'आइ हेट...' के इस गानें में मुख्य गायिका हैं श्रेया और राजस्थानी के शब्द गाईं हैं सोना महापात्रा ने। इन दोनों की आवाज़ों में जो कॊन्ट्रास्ट है, वही है गीत का आकर्षण। "बहारा बहारा हुआ दिल पहली बार है", सुनते हैं यह गीत और देखें कि आपका दिल भी बहारा हो पाता है या नहीं। और इस गीत के ज़रिए इस चिलचिलाती गरमी में हम निमंत्रण देते हैं सावन को। गीतकार हैं कुमार।

गीत: बहारा बहारा हुआ दिल पहली बार है


विश्व दीपक - सुजॊय जी, आपने तो इस गीत के बारें में सब कुछ हीं कह दिया है। इसलिए मेरे कहने के लिए कुछ ज्यादा नहीं बचता। फिर भी मैं सोना महापात्रा के बारे में कुछ बताना चाहूँगा। सोना कालेज आफ़ इन्जीनियरिंग एंड टेक्नोलोजी, भुवनेश्वर से अभियांत्रिकी स्नातक (बी०ई०) हैं, उन्होंने पुणे के सिम्बायोसिस से एम०बी०ए० की डिग्री हासिल की है और वो मारिको, इंडिया में बांड मैनेजर भी रह चुकी हैं। उनकी छोटी बहन प्रतीचि महापात्रा "विवा" बैंड के लिए गाती हैं। विशाल-शेखर की प्रिय "अनुश्का मनचंदा" भी इसी बैंड की हैं। सोना का पहला वीडियो सिंगल "बोलो ना" एम०टी०वी० पे सबसे ज्यादा देखा गया और फरमाईश किया गया वीडियो है। वहीं "तेरे इश्क़ नचाया" तो इतना ज्यादा म़क़बूल हुआ कि इसे विश्व के अमूमन हर चैनल पर प्रसारित किया गया। कुल मिलाकर "सोना" को ब्युटी विद व्याएस एंड ब्रेन कहा जा सकता है।

सुजॊय - जी। वैसे क्या आपको यह पता है कि "सोना" का नया एलबम "दिलजले" हिन्दुस्तान का पहला और एकमात्र ऐसा डिजीटल एलबम है जिसे पूरे विश्व के नोकिया म्युज़िक स्टोर्स में एक साथ रीलिज किया गया/जा रहा है। इस एलबम में संगीत है "राम संपत" का और बोल लिखे हैं "मुन्ना धीमन" और "राम संपत" ने। खैर ये सब बातें कभी और। अभी तो इस फ़िल्म के अंतिम गीत की बारी है। सूरज जगन और महालक्ष्मी अय्यर की आवाज़ों में "सदका किया यूँ इश्क़ का", बोल अन्विता के। साधारणत: सूरज जगन ने अब तक तेज़ और हार्ड हिटिंग रॊक शैली के गाने गाए हैं, लेकिन इस गीत में उनके आवाज़ के नरम पक्ष का परिचय हमें मिलता है। लगता है इस गीत को वही कामयाबी मिलेगी जो कामयाबी "ख़ुदा जाने ये क्या हुआ है" को मिली है। विश्व दीपक जी, आपका क्या कहना है इस गीत के बारे में?

विश्व दीपक - इस गीत की जो बात मुझे सबसे ज्यादा पसंद आई, वह है इस गीत का "कैची फ्रेज" यानि कि "सदका किया"। "अन्विता" ने बहुत हीं प्यारा लेकिन अनूठा शब्द हमारे बीच रखा है। मैं ज्यादा गहराई में तो नहीं जाना चाहूँगा लेकिन इतना बताता चलूँ कि सदका करने का अर्थ होता है ईश्वर या अल्लाह के नाम पर दान करना, किसी पर कुछ निछावर करना। आपने "सदके जाऊँ" का इस्तेमाल तो कई जगह देखा और सुना होगा। तो वहाँ भी यही सदका है। अरे, सदका करते-करते तो मैं "सूरज जगन" को भूल हीं गया। माफ़ कीजिएगा। तो जहाँ तक "सूरज" का सवाल है तो हमने उन्हें पहली मर्तबा "प्यार में कभी-कभी" में "हम नवजवां" गाते हुए सुना था। लेकिन वह गाना कुछ ज्यादा चला नहीं, इसलिए सूरज का भी नाम न हुआ। सही मायनें में सूरज को जाना गया "दिल दोस्ती ईटीसी" के "दम लगा" के कारण। उसके बाद "रॊक ऒन" के "जहरीले" ने तो उन्हें "रॊक स्टार" हीं बना दिया। आगे की कहानी तो जगजाहिर है। तो चलिए हम इसी बात पर "सदका किया" का लुत्फ़ उठाते हैं।

गीत: सदका किया


"आइ हेट लव स्टोरीज़" के संगीत को आवाज़ रेटिंग ****

सुजॊय - इस पूरे एल्बम की बात करें तो मुझे इसके ज़्यादातर गानें पसंद आए हैं, ख़ास तौर से "जब मिला तू", "बहारा बहारा" और "सदका किया"। विशाल शेखर ने हमें निराश नहीं किया।

विश्व दीपक - सुजॊय जी, निराश करना तो दूर की बात है, उल्टे मैं यह कहूँगा कि विशाल-शेखर उम्मीदों से बढकर साबित हुए हैं। मुझे इस फिल्म के सारे गाने पसंद आएँ। इन पाँच गानों के अलावा एलबम में दो और गाने हैं- पहला शेखर की आवाज़ में बिन तेरे (रिप्राईज) और दूसरा राहत फतेह अली खान की आवाज़ में बहारा (चिल वर्सन)। ये दोनों वर्सन्स भी कमाल के बन पड़े हैं। मैं सभी पाठकों/श्रोताओं से यह आग्रह करूँगा कि वे इन दोनों गानों को भी जरूर सुनें, खासकर शेखर की आवाज़ में "बिन तेरे"। इस गाने में "शेखर" की आवाज़ को बेहद सराहा गया है।

और अब आज के ३ सवाल

TST ट्रिविया # ५८- फ़िल्मी संगीतकार बनने से पहले विशाल दादलानी किस मशहूर बैण्ड में गाया करते थे(आज भी गाते हैं)?

TST ट्रिविया # ५९- आपने पहली बार फ़िल्म 'फ़ैमिली' में गीत गाया था। उसके बाद फ़िल्म 'जम्बो' में सोनू निगम के साथ आपने अपना पहला युगल गीत गाया था। आपने इंजिनीयरिंग् की हुई है और आप एम.बी.ए. भी हैं। बताइए हम किस गायक/गायिका की बात कर रहे हैं?

TST ट्रिविया # ६०- सूरज जगन ने हाल में एक ब्लॊकबस्टर फ़िल्म में एक गीत गाया था जो बेहद बेहद कामयाब हुई थी। गीत के बोल अंग्रेज़ी के थे जिसका भाव कुछ ऐसा था कि मुझे एक मौका और दे दो, मैं फिर से एक बार छोटे से बड़ा होना चाहता हूँ। बहुत आसान है, बताइए हम सूरज जगन के गाए किस गीत की बात कर रहे हैं?


TST ट्रिविया में अब तक -
पिछले हफ़्ते के सवालों के जवाब:

१. किशोर कुमार की जीवनी पर बनने वाली फ़िल्म में रणबीर किशोर दा का चरित्र निभाएँगे। लता से किशोर दा की शख़सीयत के कुछ पहलुओं से अपने आप को अवगत करवाने के लिए वो लता जी से मिलने वाले थे।
२. फ़िल्म 'बाबुल' का "कहता है बाबुल ओ मेरी बिटिया"।
३. फ़िल्म 'हिप हिप हुर्रे' में।

सीमा जी, आपने पहले सवाल का सही जवाब दिया है। तीसरे सवाल में आप बहुत नज़दीक थीं। बधाई स्वीकारें!!

Thursday, October 22, 2009

शुक्रान अल्लाह वल हम्दुल्लाह....खुदा की नेमतों पर झुके सोनू निगम, श्रेया और सलीम के स्वर

ताजा सुर ताल TST (32)

दोस्तों, ताजा सुर ताल यानी TST पर आपके लिए है एक ख़ास मौका और एक नयी चुनौती भी. TST के हर एपिसोड में आपके लिए होंगें तीन नए गीत. और हर गीत के बाद हम आपको देंगें एक ट्रिविया यानी हर एपिसोड में होंगें ३ ट्रिविया, हर ट्रिविया के सही जवाब देने वाले हर पहले श्रोता की मिलेंगें 2 अंक. ये प्रतियोगिता दिसम्बर माह के दूसरे सप्ताह तक चलेगी, यानी 5 अक्टूबर से 14 दिसम्बर तक, यानी TST के 40 वें एपिसोड तक. जिसके समापन पर जिस श्रोता के होंगें सबसे अधिक अंक, वो चुनेगा आवाज़ की वार्षिक गीतमाला के 60 गीतों में से पहली 10 पायदानों पर बजने वाले गीत. इसके अलावा आवाज़ पर उस विजेता का एक ख़ास इंटरव्यू भी होगा जिसमें उनके संगीत और उनकी पसंद आदि पर विस्तार से चर्चा होगी. तो दोस्तों कमर कस लीजिये खेलने के लिए ये नया खेल- "कौन बनेगा TST ट्रिविया का सिकंदर"

TST ट्रिविया प्रतियोगिता में अब तक-

पिछले एपिसोड में फिर एक बार सीमा जी छाई रही, पर जवाब बस दो ही सही दिए उन्होंने, खैर आपका स्कोर हुआ 20. यदि किसी ने तीसरे जवाब के लिए कोशिश किया होता तो यकीनन दो अंक मिल सकते थे, तीसरे सवाल का सही जवाब है गीतकार प्रवीण भारद्वाज. अगले 9 एपिसोड में 18 सवाल और आयेंगें आपके सामने, उसके बाद विजेता कौन होगा ये तो हम अभी से नहीं कह सकते, पर ये तय है कि सीमा जी को टक्कर देना अब वाकई बहुत मुश्किल होगा. पर चुनौतियाँ आपको मजबूत बनाती है, तो कमर कसिये इन नयी चुनौतियों के लिए

सुजॉय - सजीव, आज TST में तरोताज़ा क्या सुनवाने जा रहे हैं?

सजीव - धर्मा प्रोडक्शन्स् की नवीन प्रस्तुति 'क़ुर्बान' फ़िल्म के गीत से आज हम शुरुआत कर रहे हैं। करण जोहर निर्मित, रेन्सिल डी'सिल्वा निर्देशित इस फ़िल्म के मुख्य कलाकार हैं सैफ़ अली ख़ान और करीना कपूर।

सुजॉय - मैने सुना है इस फ़िल्म की कहानी जिहाद पर आधारित है। आप ने सुना है कुछ इस बारे में?

सजीव - सुना तो मैने भी यही है। सैफ ने एक ताजा बयान में कहा है कि एक मुसलमान हो कर इस फिल्म को करने में उन्हें गर्व है और उनके साथ करीना का होना भी लोगों में दिलचस्पी पैदा करेगा. फ़िल्म के संगीत में सुफ़ियाना अंदाज़ है। पता है कौन हैं इस फ़िल्म के संगीतकार?

सुजॉय - हाँ, सलीम-सुलेमान की जोड़ी ने संगीत दिया है। इस फ़िल्म के कुल पाँच गीतों में से आज कौन सा गीत आप लेकर आए हैं?

सजीव - आज जो गीत हम सुनेंगे वो मेरे ख़याल से इस ऐल्बम का सब से अच्छा गीत है, "शुक्रां अल्लाह"। इस गीत को सुनते हुए तुम्हे फ़िल्म 'फ़ना' के गीत "सुभानल्लाह सुभानल्लाह" की शायद याद आए।

सुजॉय - एक मिनट सजीव, 'फ़ना' का बैकग्राउंड म्युज़िक सलीम-सुलेमान ने ही बनाया था न?

सजीव - बिल्कुल, और मैने तो यह भी सुना है कि "सुभानल्लाह" वाली धुन भी इसी जोड़ी ने बनाई थी जिसे जतिन-ललित ने इस्तेमाल की अपनी धुन "चाँद सिफ़ारिश जो करता हमारी" के साथ। यानी कि "सुभानल्लाह" वाली धुन सलीम-सुलेमान की थी और "चाँद सिफ़ारिश" वाली जगह जतीन-ललित की।

सुजॉय - सोनू निगम, श्रेया घोषाल और सलीम मर्चैंट ने गाया है 'कुर्बान' का यह गीत। ऐज़ युज़ुयल सोनू और श्रेया के नर्म और मासूम अंदाज़ इस गीत में भी सुनाई देती है। और सलीम ने इस गीत में जिस तरह से "शुक्रन अल्लाह" वाली जगह गाया है, एक पाक़ समां सा बंध जाता है।

सजीव - और गीतकार निरंजन अय्यंगर ने लिखा भी है बढ़िया इस गीत को। तो चलो सुनते हैं यह गीत

सुजॉय - चलते चलते बता दें कि "शुक्रां अल्लाह वल हम्दुल्लाह" का मतलब है है- खुदा तेरा शुक्रिया खुदा तेरा करम है....और श्रेय घोषाल अवश्य ही इन दिनों ये मंत्र दोहरा रही होंगी, कल राष्ट्रपति भवन में उन्हें तीसरी बार सर्वश्रेष्ठ गायिका का सम्मान दिया गया, और उन्होंने वहां "ये इश्क हाय" गाकर सबको मन्त्र मुग्ध कर दिया, श्रेया को बधाई देते हुए सुनें उनका ये नया गीत.

शुक्रान अल्लाह (कुर्बान)
आवाज़ रेटिंग - ****1/2



TST ट्रिविया # 16- तुलिप जोशी अभिनीत किस "रियलिस्टिक" फिल्म में सलीम सुलेमान ने संगीत दिया था.?

सुजॉय - वाक़ई बहुत अच्छा गाना था। अब किस गीत की बारी?

सजीव - इस हफ़्ते रिलीज़ हुई है फ़िल्म 'ब्लू'। काफ़ी उत्सुकता से लोग इस फ़िल्म का इंतेज़ार कर रहे थे। तो क्यों ना इसी फ़िल्म से एक और गीत हम अपने श्रोताओं को सुनवाएँ!

सुजॉय - बिल्कुल सुनवाते हैं। लेकिन पहले यह बताइए कि आप ने यह फ़िल्म देखी है? मैने तो नहीं अभी नहीं देखी लेकिन मेरे दफ़्तर के दोस्तों ने देखी है और अफ़सोस की बात है कि लोगों को फ़िल्म कुछ ख़ास पसंद नहीं आ रही है।

सजीव - मैंने भी प्रशेन की समीक्षा पढ़ी तो मन ही नहीं हुआ फिल्म देखने का. यह वाक़ई अफ़सोस की बात है! बॉलीवुड की सब से महँगी फ़िल्म अगर पिट जाए तो अफ़सोस के साथ साथ हैरत भी होती है। लेकिन इस तरफ़ के हादसे पहले भी हुए हैं। याद है ९० के दशक में अनिल कपूर और श्रीदेवी की एक फ़िल्म आयी थी 'रूप की रानी चोरों का राजा', जो उस ज़माने की सब से महँगी फ़िल्म थी और कितनी बुरी से पिटी थी?

सुजॉय - बिल्कुल याद है सजीव। लेकिन अभी 'ब्लू' के बारे में किसी निश्कर्ष पर पहुँचना जल्द बाज़ी होगी। कई बार ऐसा भी देखा गया है कि फ़िल्म दूसरे या तीसरे सप्ताह से तेज़ी पकड़ लेती है और फिर हिट हो जाती है। वैसे खबर है कि इस फिल्म की टीम ने ब्लू का दूसरा भाग बनाने की योजना को भी अंतिम रूप दे दिया है, इसमें ज्यादा खतरनाक शार्क मछलियाँ होंगी, यानी बजट भी और खतरनाक... ख़ैर, अब बताइए कौन सा गीत हम बजा रहे हैं?

सजीव - यह है विजय प्रकाश और श्रेया घोषाल का गाया "फ़िक़राना होके हम जीयें"। ए. आर. रहमान ने काफ़ी इलेक्ट्रॊनिक्स का इस्तेमाल किया है।

सुजॉय - गाना बुरा नहीं है, लेकिन मुझे कहीं ऐसा लगता है कि ज़्यादा इलेक्ट्रॊनिक्स के इस्तेमाल से गीत में शार्पनेस तो आई है लेकिन गोलाई कहीं दूर चली गई है। बहुत ज़्यादा कृत्रिम सुनाई देता है।

सजीव - तुम्हारी बात सही है, लेकिन एक नयापन भी है गीत में। रहमान ने कम से कम अपने आप को उस वृत्त से बाहर निकालना चाहा जिसके अंदर वो कुछ सालों से फँस गए थे और एक ही तरह का संगीत उनकी तरफ़ से आ रहे थे। पर वाद्यों का शोर इस हद तक हावी है कि कई जगह तो शब्द समझ ही नहीं आते. वैसे धुन ऐसी है कि आप गुनगुना सकें.

सुजॉय - तो चलिए सुनते हैं यह गीत।

फिकराना (ब्लू)
आवाज़ रेटिंग - ***



TST ट्रिविया # 17- किस संगीत कंपनी ने "ब्लू" का एल्बम रीलिस किया है ?

सुजॉय - और अब आज के तीसरे और अंतिम गीत की बारी। कौन सा गीत है?

सजीव - फ़िल्म 'लंदन ड्रीम्स' के चार गानें हमने सुने हैं, आज इसी फ़िल्म के पाँचवे गीत की बारी। इस फ़िल्म में वैसे कुल ८ गानें हैं, और हर एक में कुछ ना कुछ बात ज़रूर है, और शायद इसी वजह से हम इस फ़िल्म के गानें सुनते और सुनवाते चले जा रहे हैं।

सुजॉय - फ़िल्म की कहानी भी शायद रॊक बैंड पर आधारित है। सलमान ख़ान और अजय देवगन की दोस्ती नज़र आएगी इस फ़िल्म में। 'हम दिल दे चुके सनम' के बाद शायद इसी फ़िल्म में ये दोनों साथ साथ नज़र आएँगे। अच्छा, आज किस गीत को आप चुन लाए हैं?

सजीव - "बरसो रे", जिसे गाया है विशाल दादलानी और रूप कुमार राठौड़ ने। याद दिला दूँ कि इस फ़िल्म में विशाल-शेखर का नहीं बल्कि शंकर अहसान लॉय का संगीत है।

सुजॉय - यह आप ने अच्छी बात की तरफ़ इशारा किया है। एक संगीतकार का किसी दूसरे संगीतकार से अपनी फ़िल्म में गानें गवाना बहुत बड़ी और स्पोर्टिंग्‍ स्पिरिट वाली बात होती है। विशाल से राजेश रोशन तक ने गानें गवाए हैं फ़िल्म 'क्रेज़ी फ़ोर' में।

सजीव - शायद इसी वजह से कि बहुत दम है विशाल की आवाज़ में। एक जो रॉक की फ़ील होती है न, उसे हर गायक नहीं निभा सकते। विशाल और के.के जैसे गायक आज के दौर में इस तरह के रॊक शैली के गीतों को बख़ूबी निभाते हैं। वैसे मैं व्यक्तिगत तौर पर इनकी आवाज़ का कायल नहीं हूँ, पर लगता है हमारे सभी संगीतकार उनके जबरदस्त फैन बन चुके हैं.

सुजॉय - हाँ, और इस गीत में भी वही रॉक अंदाज़ है। पर्काशन और माडर्न साज़ों का भरपूर इस्तेमाल हुआ है। पूरे जोश और ज़िंदादिली से इस गीत को हर एक कलाकार ने निभाया है। बेशक़ इस गीत को युवा पीढ़ी को आकृष्ट करने के लिए बनाया गया होगा। जैसे जैसे गीत आगे बढ़ती है, उसमें देसीपन बढ़ती चली जाती है। और तब देती है सुनाई रूप कुमार राठौड़ की आवाज़ और एक नाज़ुकी सी छा जाती है गीत में।

सजीव - और अंत में एक बार फिर से वही रॉक अंदाज़। रॉक होते हुए भी गीत समाप्त होता है "हनुमान की जय" के साथ। और यही अंतिम हिस्सा इस गीत एक साधारण गीत ख़ास बना देता है तो चलो सुनते हैं यह गीत। ये गानें हम पहली पहली बार सुन रहे हैं, इसलिए शायद एक ही बार में बहुत अच्छा ना लगे सुनने में, लेकिन धीरे धीरे हो सकता है कि हमारे कानों से होते हुए ये दिल में भी जगह बना लें। देखते हैं क्या होता है, फिलहाल सुनते हैं यह गीत

बरसो (लन्दन ड्रीम्स)
आवाज़ रेटिंग -****



TST ट्रिविया # 18- लन्दन ड्रीम्स के निर्देशक ने अपनी एक हिट फिल्म में एक मशहूर होली गीत फिल्माया था, कौनसा था ये गीत और कौन थे इस गीत के संगीतकार ?

आवाज़ की टीम ने इन गीतों को दी है अपनी रेटिंग. अब आप बताएं आपको ये गीत कैसे लगे? यदि आप समीक्षक होते तो प्रस्तुत गीतों को 5 में से कितने अंक देते. कृपया ज़रूर बताएं आपकी वोटिंग हमारे सालाना संगीत चार्ट के निर्माण में बेहद मददगार साबित होगी.

शुभकामनाएँ....



अक्सर हम लोगों को कहते हुए सुनते हैं कि आजकल के गीतों में वो बात नहीं. "ताजा सुर ताल" शृंखला का उद्देश्य इसी भ्रम को तोड़ना है. आज भी बहुत बढ़िया और सार्थक संगीत बन रहा है, और ढेरों युवा संगीत योद्धा तमाम दबाबों में रहकर भी अच्छा संगीत रच रहे हैं, बस ज़रुरत है उन्हें ज़रा खंगालने की. हमारा दावा है कि हमारी इस शृंखला में प्रस्तुत गीतों को सुनकर पुराने संगीत के दीवाने श्रोता भी हमसे सहमत अवश्य होंगें, क्योंकि पुराना अगर "गोल्ड" है तो नए भी किसी कोहिनूर से कम नहीं. क्या आप को भी आजकल कोई ऐसा गीत भा रहा है, जो आपको लगता है इस आयोजन का हिस्सा बनना चाहिए तो हमें लिखे.

Monday, July 20, 2009

तेरे बिन कहाँ हमसे जिया जायेगा....शान और श्रेया की आवाजों का है ये जादू

ताजा सुर ताल (11)

जाने क्या जादू है प्रेम गीतों में कि हम कभी इनसे ऊबते नहीं. कठोर से कठोर आदमी के मन में कहीं एक छुपा हुआ प्रेम का दरिया रहता है, कभी तन्हाई में जब कभी वो इन गीतों को सुनता है वह दरिया उसके मन का बहने लगता है. यदि मैं आपसे पूछूँ कि आपके सबसे पसंदीदा १० गीत कौन से हैं तो यकीनन उनमें से कम से कम ६ गीत प्रेम गीत होंगें और उनमें भी युगल गीतों के क्या कहने, यदि किसी प्रेम गीत को गायक और गायिका ने पूरी शिद्दत से प्रेम में डूब कर गीत के भावों को समझ कर गाया हो तो वो गीत एकदम ही आपके दिल के तार झनका देता है. अभी कुछ दिन पहले इस शृंखला में हमने आपको फिल्म "शोर्टकट" का एक मधुर प्रेम गीत सुनवाया था. आज भी बारी है एक और प्रेम गीत की. बेहद सुरीले हैं शान और श्रेया घोषाल और जब दोनों की सुरीली आवाजें मिल जाए तो गीत यूं भी संवर जाता है.

आज का गीत है फिल्म "जश्न" से. रॉक ऑन की तरह ये फिल्म भी एक रॉक गायक के जीरो से हीरो बनने की दास्तान है. फिल्म संगीत प्रधान है तो जाहिर है संगीतकार के लिए एक अच्छी चुनौती भी है और एक बहतरीन मौका भी खुद को साबित करने का. शारिब और तोशी की जोड़ी ने संतुलित रॉक गीतों से सजाया है इस एल्बम को. फिल्म के अन्य सभी गीत रॉक आधारित है, पर एक यही गीत है एकलौता जिसमें मेलोडी है. जहाँ अधिकतर गीत पुरुष सोलो है, जो नायक के व्यावसायिक संघर्ष की जुबान है वहीं प्रस्तुत गीत एकदम अलग मन की कोमल भावनाओं का युगल बयां है. चूँकि फिल्म के अन्य गीत कहानी और थीम के हिसाब से अधिक महत्वपूर्ण हैं तो उनके बीच इस गीत का प्रचार ज़रा कम कर हो रहा है. "दर्द - ए- तन्हाई" और "आया रे" जैसे गीत इन दिनों खूब धूम मचा रहे हैं. पर आने वाले समय में ये सुरीला प्रेम गीत श्रोताओं को अवश्य भायेगा ऐसा हमारा अनुमान है. नीलेश मिश्रा के बोलों में कुछ ख़ास नयापन नहीं है. संगीत भी सामान्य ही है, हाँ धुन ज़रूर कर्णप्रिय है, पर ये शान और श्रेया जैसे गायकारों का दम ख़म है जो इस गीत को इतना तारो ताजा बना देता है. गीत एक बार में ही आपके जेहन में घर कर लेता है और धीरे धीरे होंठों पर चढ़ भी जाता है. तो आज ताजा सुर ताल के इस अंक में सुनते हैं हम और आप यही गीत -

तेरे बिन कहाँ हमसे जिया जायेगा,
जिद छोड़ दी लो आज कह दिया...

जिंदगी भाग कर हमसे आगे चली,
थाम लो न हमें चाँद तारों तले...
तोड़ डाली तन्हाई है,
अब मोहब्बत रुत आई है....

तेरे बिन....

जाने कितने बरस धूप में मैं चला,
तुम मिले जिस घडी जैसे बादल मिला...
बरसो न टूट कर ज़रा,
भीग जाए मन ये बावरा....

तेरे बिन....



आवाज़ की टीम ने दिए इस गीत को 3.5 की रेटिंग 5 में से. अब आप बताएं आपको ये गीत कैसा लगा? यदि आप समीक्षक होते तो प्रस्तुत गीत को 5 में से कितने अंक देते. कृपया ज़रूर बताएं आपकी वोटिंग हमारे सालाना संगीत चार्ट के निर्माण में बेहद मददगार साबित होगी.

क्या आप जानते हैं ?
आप नए संगीत को कितना समझते हैं चलिए इसे ज़रा यूं परखते हैं. फिल्म "जश्न" से एक नए स्टार पुत्र का फिल्म जगत में पदार्पण हो रहा है. क्या आप जानते हैं उस नए कलाकार का नाम ? और हाँ जवाब के साथ साथ प्रस्तुत गीत को अपनी रेटिंग भी अवश्य दीजियेगा.

पिछले सवाल का सही जवाब था गीत "हम जो चलने लगे...." फिल्म जब वी मेट का. पर अफ़सोस किसी ने भी सही जवाब नहीं दिया. हाँ इस बार शमिख जी ने रेटिंग जरूर दी. शुक्रिया जनाब. मनु जी क्या रेटिंग है आपकी ? ये सस्पेंस क्यों. मंजू और दिशा जी आपने गीत का आनंद लिया हमें अच्छा लगा. रेटिंग भी देते तो और मज़ा आता.


अक्सर हम लोगों को कहते हुए सुनते हैं कि आजकल के गीतों में वो बात नहीं. "ताजा सुर ताल" शृंखला का उद्देश्य इसी भ्रम को तोड़ना है. आज भी बहुत बढ़िया और सार्थक संगीत बन रहा है, और ढेरों युवा संगीत योद्धा तमाम दबाबों में रहकर भी अच्छा संगीत रच रहे हैं, बस ज़रुरत है उन्हें ज़रा खंगालने की. हमारा दावा है कि हमारी इस शृंखला में प्रस्तुत गीतों को सुनकर पुराने संगीत के दीवाने श्रोता भी हमसे सहमत अवश्य होंगें, क्योंकि पुराना अगर "गोल्ड" है तो नए भी किसी कोहिनूर से कम नहीं. क्या आप को भी आजकल कोई ऐसा गीत भा रहा है, जो आपको लगता है इस आयोजन का हिस्सा बनना चाहिए तो हमें लिखे.

Wednesday, July 16, 2008

लता मंगेशकर को अपना रोल मॉडल मानती हैं, गायिका -मानसी पिम्पले, आवाज़ पर इस हफ्ते का उभरता सितारा

आवाज़ पर इस हफ्ते की हमारी "फीचर्ड आर्टिस्ट" हैं - मानसी पिम्पले, हिंद युग्म पर अपने पहले गीत "बढ़े चलो" से चर्चा में आयीं मानसी रमेश पिम्पले, मूल रूप से महाराष्ट्र से हैं, और इन्हे हिंद युग्म से जोड़ने का श्रेय जाता है, युग्म की बेहद सक्रिय कवयित्री सुनीता यादव को. मानसी इन्हीं की शिष्या थीं कभी, और तभी से सुनीता ने इनके हुनर को परख लिया था. मानसी ने अभी-अभी ही अपनी बारहवीं की पढ़ाई पूरी की है, और अब अपने कैरियर से जुड़ी दिशा की तरफ़ अग्रसर है. संगीत को अपना जनून मानने वाली मानसी, लता जी को अपना रोल मॉडल मानती हैं, तथा आज के दौर के, श्रेया घोषाल और शान इनके सबसे पसंदीदा गायिका/गायक हैं. Zee tv के कार्यक्रम Hero Honda सा रे गा मा पा, के लिए भी मानसी का चुनाव हुआ था,जहाँ हिमेश रेशमिया भी बतौर जज़ मौजूद थे, पर नियति ने शायद पहले ही, उनकी कला को दुनिया तक पहुँचने का माध्यम, हिंद युग्म को चुन लिया था. चित्रकला और टेबल टेनिस का भी शौक रखने वाली मानसी, युग्म को एक शानदार प्लेटफोर्म मानती हैं, नए कलाकारों के लिए. जब हमने उनसे बात की तो वो अपने पहले गीत को मिली आपार सराहना से बेहद खुश नज़र आयीं. "I saw a means of pursuing my passion through Hind Yugm, which is a very good platform for new talent and art" - ये कथन थे मानसी के.

नीचे पेश है, हिंद युग्म की मानसी से हुई बातचीत के कुछ अंश, आप भी मानसी की आवाज़ में ये दमदार गीत "बढ़े चलो" अवश्य सुनें और इस उभरती हुई प्रतिभावान गायिका को अपना स्नेह दे.

हिंद युग्म - मानसी स्वागत है एक बार फ़िर, ये बताइए कि संगीत आपके जीवन में क्या महत्त्व रखता है ?

मानसी - संगीत मेरा जनून है, और ये मेरे जीवन में विशेष स्थान रखता है, मेरा मानना है शब्द जब संगीत में ढल कर आते हैं तो हर व्यक्ति तक अपनी पहुँच बना पाते हैं, संगीत वो कड़ी है जो आपको इश्वर से जोड़ती है.

हिद युग्म - आप zee tv के सा रे गा मा पा शो के लिए भी चुनी गई थीं, उसके बारे में बताइए.

मानसी - मैं २००४ में चुनी गई थी पहले राउंड के लिए मगर १८ वर्ष से कम उम्र होने के कारण प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं बन पायी, उसके बाद कभी कोशिश नही की, फ़िर पढ़ाई की तरफ फोकस बदल गया.

हिंद युग्म - क्या आपके अभिभावक आपके इस जनून को बढ़ावा देते हैं ?

मानसी - जी बिल्कुल, ये उनकी प्रेरणा और मार्गदर्शन ही है जो मैं आज यहाँ हूँ, वो मेरे सबसे अच्छे समीक्षक है, जब भी मुझे कुछ गाना होता है, सब से पहले उन्हें ही सुनाती हूँ, ध्यान से सुनकर वो मेरी कमियों को दुरुस्त करते हैं, अगर मैंने कुछ अच्छा गाया है तो ये उन्ही की बदौलत है .

हिंद युग्म - अब आप B Pharma की पढ़ाई करने जा रही हैं, पढ़ाई के साथ-साथ अपने शौक को कैसे प्लान किया है आपने ?

मानसी - अभी तो सारा ध्यान दाखिले और पढ़ाई की तरफ़ ही है, पर संगीत तो हमेशा ही दिनचर्या का हिस्सा रहेगा, मेरी कोशिश रहेगी की इस दौरान अपने रियाज़ के लिए और अधिक समय निकालूं और ख़ुद को इतना काबिल कर लूँ कि किसी भी नए गीत और उन्दा तरीके से निभा पाऊं.

हिंद युग्म - आप हिंद युग्म के लिए एक खोज हैं, हमारे संगीतकार ऋषि एस के साथ काम करना कैसा रहा ?

मानसी - मैं सुनीता मेम की शुक्रगुजार हूँ जिन्होंने मुझे हिंद युग्म और ऋषि एस से मिलवाया, ऋषि जी के संगीत के एक आत्मा है, वो हर गीत पर बहुत मेहनत करते हैं, और गायक को अपनी बात बड़े अच्छे तरीके से समझाते हैं, वो आपको हमेशा सहज महसूस कराते हैं, उनके साथ काम करना बेहद बढ़िया अनुभव रहा.

हिंद युग्म - "बढे चलो" में आपकी गायकी की बहुत तारीफ हुई है, आप कैसा महसूस कर रही हैं ?

मानसी - मैं बहुत खुश हूँ, साथ ही धन्येवाद देना चाहूंगी ऋषि जी और सजीव जी को, जिन्होंने मुझे इस गीत को गाने का मौका दिया, और अलोक शंकर जी का जिन्होंने बहुत सुंदर लिखा इस गीत को, और अपने तमाम समीक्षकों /श्रोताओं का जिन्होंने अपनी टिप्पणियों से मुझे प्रोत्साहित किया, मेरा सोलो गीत "मैं नदी" भी सब को पसंद आएगा, ऐसी मुझे आशा है.

हिंद युग्म - बहुत बहुत शुक्रिया मानसी, आपके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनायें, संगीत का जनून बरकरार रहे और आप इसी तरह मधुर गीत गाती रहें, यही हमारी कामना है ...

मानसी - जी शुक्रिया, मैं हर गाने में अपना बेस्ट देने की कोशिश करूंगी, और उम्मीद करती हूँ कि हिंद युग्म परिवार भी मुझे यूँ ही प्रोत्साहित करता रहेगा .


मूल इंटरव्यू ( original interview )

Hind Yugm - Hi Manasi, Welcome once again, first of all tell us, what place music has in your life, how you connect with music?

Manasi - Music is my passion. It is very close to my heart and it holds a very high place in my life. Music has the power to convey every human feeling which words alone cannot do. And I feel that music is a form of worship, too.

Hind Yugm - You also got selected for ZEE TV, sa re ga ma pa, what was that story?

Manasi- I gave the auditions for Sa Re Ga Ma in 2004 and I just got short-listed in the preliminary round when they informed me that I was under-age (below 18) and so could not participate in the competition. So there was no further development in that and I haven’t tried to participate again after that as studies became my priority.

Hind Yugm - Do your parents support your interest?

A patriotic SongManasi - Oh yes, of course. Without their support and guidance I couldn’t have been whatever I am today. They are my biggest and best critics. If I have to perform or sing, they personally hear the song and point out all the mistakes and make me correct them before I give my performance. Their guidance and support is of extreme importance in my life.

Hind Yugm - Now you are going to study B Pharma, what plan you have, to manage your interest of singing in the coming days ?

Manasi - Right now I am concentrating mainly on my admission and studies. But that doesn’t mean I’ll put a full stop to my passion. I would try to train my voice in this period of my studies so that I can sing even better and be prepared to face any sort of challenge, i.e., to be able to sing any song flawlessly and with the same ease. I would try to continue my ‘riyaaz’ so that I stay in touch with music.

Hind Yugm - You are a found to hind yugm ( thanks to sunita yadav ) how was the experience of working with Rishi S. the composer ?

Manasi - Definitely, I myself wish to thank Sunita ma’am for introducing me to Hind Yugm and Rishi S Balaji. It was really a pleasant experience working on these two songs with Rishi Sir. He is an excellent upcoming composer and his music is definitely the soul of his songs. He makes it a point that the singer understands whatever he wants them to sing and is ready to explain it until it is understood. I consider myself very fortunate to have worked with such a talented person.

Hind Yugm - We are looking forward to hear your first solo song “main nadi",”badhe chalo“ is also well received by the audience, how is the feeling?

Manasi - I am feeling elated and at the same time I wish to thank Rishi sir and Sajeev sir for giving me an opportunity to sing these two songs. and Alok Shankar ji for providing such excellent lyrics, I also wish to thank all our critics who have given their precious comments which will help us to eliminate our flaws and present something much better. I only wish to request all of them to always give their support and encouragement. I am myself looking forward to the release of ‘Main Nadi’ and I hope it gets a good response.

Hind Yugm - Thank you very much manasi, and all the best for your future plans.....keep this passion for music, and keep singing such beautiful songs always ...

Manasi - Thanks for everything. I’ll try my best to give my best to each song I sing and I hope my association with Hind Yugm continues…

बिल्कुल मानसी, हम भी यही उम्मीद करेंगे, कि आप युहीं अपनी आवाज़ का जादू अपने हर गीत में बिखेरती रहें, हिंद युग्म कि समस्त टीम की तरफ़ से आपके उज्जवल भविष्य के लिए ढेरों शुभकामनायें.

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