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Sunday, March 10, 2019

राग मारू बिहाग : SWARGOSHTHI – 410 : RAG MARU BIHAG






स्वरगोष्ठी – 410 में आज

कल्याण थाट के राग – 8 : राग मारू बिहाग

उस्ताद फ़ैयाज़ खाँ से राग मारू बिहाग का खयाल और इस राग में पिरोया फिल्म सेहरा का गीत सुनिए




उस्ताद फ़ैयाज़ खाँ
मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर
“रेडियो प्लेबैक इण्डिया” के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ के मंच पर जारी हमारी लघु श्रृंखला “कल्याण थाट के राग” के आठवें अंक में मैं कृष्णमोहन मिश्र, आप सब संगीत-प्रेमियों का हार्दिक स्वागत करता हूँ। भारतीय संगीत के अन्तर्गत आने वाले रागों का वर्गीकरण करने के लिए मेल अथवा थाट-व्यवस्था है। भारतीय संगीत में 7 शुद्ध, 4 कोमल और 1 तीव्र, अर्थात कुल 12 स्वरों का प्रयोग होता है। एक राग की रचना के लिए उपरोक्त 12 स्वरों में से कम से कम 5 स्वरों का होना आवश्यक है। संगीत में थाट रागों के वर्गीकरण की पद्धति है। सप्तक के 12 स्वरों में से क्रमानुसार 7 मुख्य स्वरों के समुदाय को थाट कहते हैं। थाट को मेल भी कहा जाता है। दक्षिण भारतीय संगीत पद्धति में 72 मेल प्रचलित हैं, जबकि उत्तर भारतीय संगीत पद्धति में 10 थाट का प्रयोग किया जाता है। इसका प्रचलन पण्डित विष्णु नारायण भातखण्डे जी ने प्रारम्भ किया था। वर्तमान समय में रागों के वर्गीकरण के लिए यही पद्धति प्रचलित है। भातखण्डे जी द्वारा प्रचलित ये 10 थाट हैं- कल्याण, बिलावल, खमाज, भैरव, पूर्वी, मारवा, काफी, आसावरी, तोड़ी और भैरवी। इन्हीं 10 थाटों के अन्तर्गत प्रचलित-अप्रचलित सभी रागों को सम्मिलित किया गया है। भारतीय संगीत में थाट स्वरों के उस समूह को कहते हैं जिससे रागों का वर्गीकरण किया जा सकता है। पन्द्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में 'राग तरंगिणी’ ग्रन्थ के लेखक लोचन कवि ने रागों के वर्गीकरण की परम्परागत 'ग्राम और मूर्छना प्रणाली’ का परिमार्जन कर मेल अथवा थाट प्रणाली की स्थापना की। लोचन कवि के अनुसार उस समय सोलह हज़ार राग प्रचलित थे। इनमें 36 मुख्य राग थे। सत्रहवीं शताब्दी में थाटों के अन्तर्गत रागों का वर्गीकरण प्रचलित हो चुका था। थाट प्रणाली का उल्लेख सत्रहवीं शताब्दी के ‘संगीत पारिजात’ और ‘राग विबोध’ नामक ग्रन्थों में भी किया गया है। लोचन कवि द्वारा प्रतिपादित थाट प्रणाली का प्रयोग लगभग 300 सौ वर्षों तक होता रहा। उन्नीसवीं शताब्दी के अन्तिम और बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भिक दशकों में पण्डित विष्णु नारायण भातखण्डे ने भारतीय संगीत के बिखरे सूत्रों को न केवल संकलित किया बल्कि संगीत के कई सिद्धान्तों का परिमार्जन भी किया। भातखण्डे जी द्वारा निर्धारित दस थाट में से पहला थाट कल्याण है। इस श्रृंखला में हम कल्याण थाट के दस रागों पर क्रमशः चर्चा कर रहे हैं। प्रत्येक थाट का एक आश्रय अथवा जनक राग होता है और शेष जन्य राग कहलाते हैं। आज के अंक में कल्याण थाट के एक और जन्य राग “मारू बिहाग” पर चर्चा करेंगे। इस राग में पहले हम आपको आगरा घराने के सुविख्यात गायक उस्ताद फ़ैयाज़ खाँ के स्वर में राग मारू विहाग में निबद्ध खयाल रचना सुनवाएँगे। इसके साथ ही “स्वरगोष्ठी” की परम्परा के अनुसार 1963 में प्रदर्शित फिल्म “सेहरा” से इसी राग में पिरोया एक युगलगीत मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर के स्वर में प्रस्तुत करेंगे।



राग मारू विहाग का वादी स्वर गान्धार और संवादी स्वर निषाद माना जाता है। इस राग के गायन-वादन का सटीक समय रात्रि में 8 से 9 बजे तक होता है। इस राग में दोनों मध्यम और शेष स्वर शुद्ध लगते हैं। इस राग के आरोह में नि, सा, ग, म॑, प, नि, सां और अवरोह में सां, नि, प, ध, प, म॑, ग, रे, सा, स्वरों का प्रयोग किया जाता है। राग मारू विहाग में यमन और बिहाग रागों की छाया दृष्टिगत होती है। नि, सा, ग; प, नि, सा; सा, म॑, ग; से बिहाग तथा म॑, प, ध, प; सां, नि, प, ध, म॑, प, म॑, ग, म॑, रे, सा; में यमन अथवा कल्याण राग की झलक मिलती है। इस राग का भाव करुण, समर्पित तथा पुकार से युक्त प्रतीत होता है। सुप्रसिद्ध संगीतज्ञ और मयूरवीणा वादक पण्डित श्रीकुमार मिश्र के अनुसार जब व्यक्ति दिन भर के परिश्रम के बाद भी निराशा का अनुभव करता है, तब राग मारवा के स्वर उसकी पीड़ा पर मरहम का कार्य करते हैं। इसके बाद व्यक्ति प्रभु के सामने समर्पित होकर पुकार-पुकार कर अपनी अपनी करुण आवाज़ में प्रार्थना करता है। इस मनःस्थिति को राग मारू विहाग के स्वर सहज रूप से अभिव्यक्त करते हैं। यदि व्यक्ति की चिन्ता और निराशा भाव सामान्य है इस राग के स्वर इसका निदान कर सकते हैं। सामान्य चिन्ता की स्थिति में उपजे विकारों में राग मारू विहाग का श्रवण सार्थक हो सकता है। उदाहरणस्वरूप अब हम आपको उस्ताद फ़ैयाज़ खाँ के स्वर में राग मारू विहाग का एक खयाल सुनवा रहे हैं।

राग मारू विहाग : “तोरी मोरी बात...” : उस्ताद फ़ैयाज़ खाँ


राग मारू बिहाग कल्याण थाट का राग है। इसे सन्धिप्रकाश राग भी कहा जाता है। यह राग औडव-सम्पूर्ण जाति का है, अर्थात आरोह में पाँच और अवरोह में सात स्वर प्रयोग किये जाते हैं। आरोह में ऋषभ और धैवत स्वरों का प्रयोग नहीं होता। राग में तीव्र मध्यम स्वर का प्रयोग मुख्यतः किया जाता है। शेष सभी स्वर शुद्ध प्रयोग होते हैं। राग का वादी स्वर गान्धार और संवादी स्वर निषाद होता है। राग मारू बिहाग में कल्याण और बिहाग रागों का मिश्रण होता है। इस राग में तीव्र मध्यम के साथ शुद्ध मध्यम का प्रयोग भी होता है। तीव्र मध्यम आरोह और अवरोह दोनों में किया जाता है, जबकि शुद्ध मध्यम केवल आरोह में षडज के साथ प्रयोग होता है। इस राग का चलन तीनों सप्तकों में समान रूप से होता है। 1963 में वी. शान्ताराम के निर्देशन में फिल्म ‘सेहरा’ का प्रदर्शन हुआ था। इस फिल्म के संगीतकार वाराणसी के कुशल शहनाई-वादक रामलाल ने कई गीत रागों में बाँधे थे। राग मारू बिहाग पर आधारित यह गीत भी इस फिल्म में शामिल था। गीत में लता मंगेशकर और मुहम्मद रफी ने युगल-स्वर दिया था। राग मारू विहाग की स्पष्ट छाया इस गीत में मिलती है। आप यह गीत सुनिए और मुझे आज के अंक को यहीं विराम देने की अनुमति दीजिए।

राग मारू बिहाग : “तुम तो प्यार हो...” : लता मंगेशकर और मुहम्मद रफी : फिल्म – सेहरा




संगीत पहेली

“स्वरगोष्ठी” के 410वें अंक की संगीत पहेली में आज हम आपको वर्ष 1957 में प्रदर्शित एक फिल्म के रागबद्ध गीत का अंश सुनवा रहे हैं। गीत के इस अंश को सुन कर आपको दो अंक अर्जित करने के लिए निम्नलिखित तीन में से कम से कम दो प्रश्नों के सही उत्तर देने आवश्यक हैं। यदि आपको तीन में से केवल एक अथवा तीनों प्रश्नों का उत्तर ज्ञात हो तो भी आप प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं। इस पहेली के परिणाम आने तक जिस प्रतिभागी के सर्वाधिक अंक होंगे, उन्हें वर्ष 2019 के पहले सत्र का विजेता घोषित किया जाएगा। इसके साथ ही पूरे वर्ष के प्राप्तांकों की गणना के बाद वर्ष के अन्त में महाविजेताओं की घोषणा की जाएगी और उन्हें सम्मानित भी किया जाएगा।




1 – इस गीतांश को सुन कर बताइए कि इस गीत में किस राग का स्पर्श है?

2 – इस गीत में प्रयोग किये गए ताल को पहचानिए और उसका नाम बताइए।

3 – इस गीत में किस पार्श्वगायिका के स्वर हैं?

आप उपरोक्त तीन मे से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर केवल swargoshthi@gmail.com या radioplaybackindia@live.com पर ही शनिवार, 16 मार्च, 2019 की मध्यरात्रि से पूर्व तक भेजें। आपको यदि उपरोक्त तीन में से केवल एक प्रश्न का सही उत्तर ज्ञात हो तो भी आप पहेली प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं। COMMENTS में दिये गए उत्तर मान्य हो सकते हैं, किन्तु उसका प्रकाशन पहेली का उत्तर देने की अन्तिम तिथि के बाद किया जाएगा। “फेसबुक” पर पहेली का उत्तर स्वीकार नहीं किया जाएगा। विजेता का नाम हम उनके शहर, प्रदेश और देश के नाम के साथ ‘स्वरगोष्ठी’ के अंक संख्या 412 में प्रकाशित करेंगे। इस अंक में प्रस्तुत गीत-संगीत, राग, अथवा कलासाधक के बारे में यदि आप कोई जानकारी या अपने किसी अनुभव को हम सबके बीच बाँटना चाहते हैं तो हम आपका इस संगोष्ठी में स्वागत करते हैं। आप पृष्ठ के नीचे दिये गए COMMENTS के माध्यम से तथा swargoshthi@gmail.com अथवा radioplaybackindia@live.com पर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं।


पिछली पहेली के सही उत्तर और विजेता

‘स्वरगोष्ठी’ क्रमांक 408 की पहेली में हमने आपसे वर्ष 1961 में प्रदर्शित फिल्म “भाभी की चूड़ियाँ” के एक गीत का एक अंश सुनवा कर तीन प्रश्नों में से पूर्ण अंक प्राप्त करने के लिए कम से कम दो प्रश्नों के सही उत्तर की अपेक्षा की थी। पहेली के पहले प्रश्न का सही उत्तर है; राग – भूपाली अथवा भूप, दूसरे प्रश्न का सही उत्तर है; ताल – कहरवा और तीसरे प्रश्न का सही उत्तर है; स्वर – लता मंगेशकर

‘स्वरगोष्ठी’ की इस पहेली का सही उत्तर देने वाले हमारे विजेता हैं; चेरीहिल न्यूजर्सी से प्रफुल्ल पटेल, कल्याण, महाराष्ट्र से शुभा खाण्डेकर, अहमदाबाद, गुजरात से मुकेश लाडिया, वोरहीज, न्यूजर्सी से डॉ. किरीट छाया, जबलपुर, मध्यप्रदेश से क्षिति तिवारी और हैदराबाद से डी. हरिणा माधवी। उपरोक्त सभी प्रतिभागियों को ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ की ओर से हार्दिक बधाई। सभी प्रतिभागियों से अनुरोध है कि अपने पते के साथ कृपया अपना उत्तर ई-मेल से ही भेजा करें। इस पहेली प्रतियोगिता में हमारे नये प्रतिभागी भी हिस्सा ले सकते हैं। यह आवश्यक नहीं है कि आपको पहेली के तीनों प्रश्नों के सही उत्तर ज्ञात हो। यदि आपको पहेली का कोई एक भी उत्तर ज्ञात हो तो भी आप इसमें भाग ले सकते हैं।


अपनी बात

मित्रों, ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ पर जारी श्रृंखला “कल्याण थाट के राग” की आठवीं कड़ी में आज आपने राग “मारू विहाग” का परिचय प्राप्त किया। साथ ही इस राग के शास्त्रीय स्वरूप को समझने के लिए सुविख्यात गायक उस्ताद फ़ैयाज़ खाँ के स्वर में एक खयाल रचना का रसास्वादन किया। इसके बाद इसी राग पर आधारित एक गीत फिल्म “सेहरा” से लता मंगेशकर के स्वर में प्रस्तुत किया गया। संगीतकार राम लाल ने इस गीत को राग मारू विहाग के स्वरों का आधार दिया है। इस गीत को लता मंगेशकर ने गाया है। “स्वरगोष्ठी” पर हमारी पिछले अंकों के बारे में हमें अनेक पाठकों की प्रतिक्रिया लगातार मिल रही है। हमें विश्वास है कि हमारे अन्य पाठक भी “स्वरगोष्ठी” के प्रत्येक अंक का अवलोकन करते रहेंगे और अपनी प्रतिक्रिया हमें भेजते रहेगे। आज के अंक और श्रृंखला के बारे में यदि आपको कुछ कहना हो तो हमें अवश्य लिखें। हमारी वर्तमान अथवा अगली श्रृंखला के लिए यदि आपका कोई सुझाव या अनुरोध हो तो हमें swargoshthi@gmail.com पर अवश्य लिखिए। अगले अंक में रविवार को प्रातः 7 बजे हम ‘स्वरगोष्ठी’ के इसी मंच पर एक बार फिर सभी संगीत-प्रेमियों का स्वागत करेंगे। 


प्रस्तुति : कृष्णमोहन मिश्र  

रेडियो प्लेबैक इण्डिया 
 राग मारू बिहाग : SWARGOSHTHI – 410 : RAG MARU BIHAG : 10 मार्च, 2019 
 

Sunday, January 14, 2018

वर्ष के महाविजेता - 2 : SWARGOSHTHI – 352 : MAHAVIJETA OF THE YEAR - 2




स्वरगोष्ठी – 352 में आज

महाविजेताओं की प्रस्तुतियाँ – 2

संगीत पहेली के महाविजेताओं क्षिति, हरिणा और प्रफुल्ल की प्रस्तुतियों से अभिनन्दन





क्षिति तिवारी
डी.हरिणा माधवी
‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ के मंच पर सभी संगीत-प्रेमियों का नए वर्ष के दूसरे अंक में कृष्णमोहन मिश्र की ओर से हार्दिक अभिनन्दन है। पिछले अंक में हमने आपसे ‘स्वरगोष्ठी’ स्तम्भ के बीते वर्ष की कुछ विशेष गतिविधियों की चर्चा की थी। साथ ही पहेली के चौथे और पाँचवें महाविजेता डॉ. किरीट छाया और विजया राजकोटिया से आपको परिचित कराया था और उनकी प्रस्तुतियों को भी सुनवाया था। इस अंक में भी हम गत वर्ष की कुछ अन्य गतिविधियों का उल्लेख करने के साथ ही संगीत पहेली के प्रथम, द्वितीय और तृतीय महाविजेताओं की घोषणा करेंगे और उनका सम्मान भी करेंगे। ‘स्वरगोष्ठी’ के पाठक और श्रोता जानते हैं कि इस स्तम्भ के प्रत्येक अंक में संगीत पहेली के माध्यम से हम हर सप्ताह भारतीय संगीत से जुड़े तीन प्रश्न देकर पूर्ण अंक प्राप्त करने के लिए आपसे कम से कम दो प्रश्नों का उत्तर पूछते हैं। आपके दिये गये सही उत्तरों के प्राप्तांकों की गणना दो स्तरों पर की जाती है। ‘स्वरगोष्ठी’ की दस-दस कड़ियों को पाँच सत्रों (सेगमेंट) में बाँट कर और फिर वर्ष के अन्त में सभी पाँच सत्रों के प्रतिभागियों के प्राप्तांकों की गणना की जाती है। वर्ष 2017 की संगीत पहेली में अनेक प्रतिभागी नियमित रूप से भाग लेते रहे। 349वें अंक की पहेली के परिणाम आने तक शीर्ष के पाँच महाविजेता चुने गए। चौथे और पाँचवें महाविजेता का सम्मान हम पिछले अंक में कर चुके हैं। आज के अंक में हम प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान के महाविजेताओं क्रमशः, क्षिति तिवारी, हरिणा माधवी और प्रफुल्ल पटेल का अभिनन्दन करेंगे और उनकी प्रस्तुतियाँ सुनवाएँगे।



र्ष 2017 की संगीत पहेली में सर्वाधिक 98 अंक अर्जित कर मध्यप्रदेश की क्षिति तिवारी ने प्रथम महाविजेता होने का सम्मान प्राप्त किया है। यह तथ्य भी रेखांकन के योग्य हैं कि सर्वाधिक अंक अर्जित करने वाली दोनों प्रतिभागी महिलाएँ हैं और संगीत की कलाकार और शिक्षिका भी है। संगीत पहेली में प्रथम महाविजेता होने का सम्मान प्राप्त करने वाली जबलपुर, मध्यप्रदेश की श्रीमती क्षिति तिवारी की संगीत शिक्षा लखनऊ और कानपुर में सम्पन्न हुई। लखनऊ के भातखण्डे संगीत महाविद्यालय से गायन में प्रथमा से लेकर विशारद तक की परीक्षाएँ उत्तीर्ण की। बाद में इस संस्थान को विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त हुआ, जहाँ से उन्होने संगीत निपुण और उसके बाद ठुमरी गायन मे तीन वर्षीय डिप्लोमा भी प्राप्त किया। इसके अलावा कानपुर के वरिष्ठ संगीतज्ञ पण्डित गंगाधर राव तेलंग जी के मार्गदर्शन में खैरागढ़, छत्तीसगढ़ के इन्दिरा संगीत कला विश्वविद्यालय की संगीत स्नातक और स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। क्षिति जी के गुरुओं में डॉ. गंगाधर राव तेलंग के अलावा पण्डित सीताशरण सिंह, पण्डित गणेशप्रसाद मिश्र, डॉ. सुरेन्द्र शंकर अवस्थी, डॉ. विद्याधर व्यास और श्री विनीत पवइया प्रमुख हैं। क्षिति को स्नातक स्तर पर भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से ग्वालियर घराने की गायकी के अध्ययन के लिए छात्रवृत्ति भी मिल चुकी है। कई वर्षों तक लखनऊ के महिला कालेज और जबलपुर के एक दिवयांग बच्चों के विद्यालय मे माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों को संगीत की शिक्षा देने के बाद वर्तमान में जबलपुर के ‘महाराष्ट्र संगीत महाविद्यालय’ में संगीत गायन की शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं। ध्रुपद, खयाल, ठुमरी और भजन गायन के अलावा उन्होने प्रोफेसर कमला श्रीवास्तव से गुरु-शिष्य परम्परा के अन्तर्गत लोक संगीत भी सीखा है, जिसे अब वह अपने विद्यार्थियों को बाँट रही हैं। क्षिति जी कथक नृत्य और नृत्य नाटिकाओं में गायन संगति की विशेषज्ञ हैं। सुप्रसिद्ध नृत्यांगना और भातखण्डे संगीत विश्वविद्यालय की प्रोफेसर कुमकुम धर और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कला संकाय की प्रोफेसर और नृत्यांगना विधि नागर के कई कार्यक्रमों में अपनी इस प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकी हैं। आज के इस विशेष अंक में क्षिति तिवारी राग देश में निबद्ध एक चतुरंग प्रस्तुत कर रही हैं। संगीत के चार विभिन्न अंगों के समावेश से युक्त गीत को चतुरंग कहते हैं। तीनताल में निबद्ध इस चतुरंग के बोल हैं- “डारत मोपे रंग देखो बार बार...”। इस प्रस्तुति में तबले पर सोमनाथ सोनी और हारमोनियम पर अभिषेक पडवार ने संगति की है। लीजिए, अब आप यह चतुरंग सुनिए और प्रथम महाविजेता क्षिति तिवारी का अभिनन्दन कीजिए।

राग देश : चतुरंग : “डारत मोपे रंग देखो बार बार...” : क्षिति तिवारी


‘स्वरगोष्ठी’ की संगीत पहेली 2017 में 96 अंक प्राप्त कर चौथी महाविजेता बनीं हैं, हैदराबाद की डी. हरिणा माधवी। हम उन्हें सहर्ष सम्मानित करते हैं। “संगीत जीवन का विज्ञान है”, इस सिद्धान्त को केवल मानने वाली ही नहीं बल्कि अपने जीवन में उतार लेने वाली हरिणा जी दो विषयों की शिक्षिका का दायित्व निभा रही हैं। हैदराबाद के श्री साईं स्नातकोत्तर महाविद्यालय में विगत 16 वर्षो से स्नातक और स्नातकोत्तर कक्षाओं को लाइफ साइन्स पढ़ा रही हैं। इसके साथ ही स्थानीय वासवी कालेज ऑफ म्यूजिक ऐंड डांस से भी उनका जुड़ाव है, जहाँ विभिन्न आयुवर्ग के विद्यार्थियों का मार्गदर्शन भी करती हैं। हरिणा जी को प्रारम्भिक संगीत शिक्षा अपनी माँ श्रीमती वाणी दुग्गराजू से मिली। आगे चल कर अमरावती, महाराष्ट्र के महिला महाविद्यालय की संगीत विभागाध्यक्ष श्रीमती कमला भोंडे से विधिवत संगीत सीखना शुरू किया। हरिणा जी के बाल्यावस्था के एक और संगीत गुरु एम.वी. प्रधान भी थे, जो एक कुशल तबला वादक भी थे। इनके अलावा हरिणा जी ने गुरु किरण घाटे और आर. डी. जी. कालेज, अकोला के संगीत विभागाध्यक्ष श्री नाथूलाल जायसवाल से भी संगीत सीखा। हरिणा जी ने मुम्बई के अखिल भारतीय गन्धर्व महाविद्यालय से संगीत अलंकार की उपाधि प्राप्त की है। आज के इस विशेष अंक में हम ‘स्वरगोष्ठी के इस अंक के माध्यम से ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के सभी संचालक और सम्पादक मण्डल के सदस्य, शिक्षिका और विदुषी डी. हरिणा माधवी का महाविजेता के रूप में हार्दिक अभिनन्दन करते हैं और आपको हरिणा जी की आवाज़ में राग पूरिया धनाश्री में एक द्रुत खयाल रचना सुनवाते हैं। इस खयाल रचना को हरिणा जी द्रुत एकताल में निबद्ध कर प्रस्तुत कर रही हैं। रचना के बोल हैं, -“बिन देखे चैन नाहीं...”

राग पूरिया धनाश्री : खयाल : “बिन देखे चैन नाहीं...” : डी. हरिणा माधवी



प्रफुल्ल पटेल
पहेली प्रतियोगिता में 94 अंक प्राप्त कर तीसरे महाविजेता बने हैं, चेरीहिल, न्यूजर्सी से प्रफुल्ल पटेल। भारतीय शास्त्रीय संगीत में गहरी रुचि रखने वाले प्रफुल्ल पटेल न्यूजर्सी, अमेरिका में रहते हैं। साप्ताहिक स्तम्भ, ‘स्वरगोष्ठी’ को पसन्द करने वाले प्रफुल्ल जी शास्त्रीय संगीत के अलावा भारतीय लोकप्रिय संगीत भी रुचि के साथ सुनते हैं। इस प्रकार के संगीत से उन्हें गहरी रुचि है। परन्तु कहते हैं कि उन्हें पाश्चात्य संगीत ने कभी भी प्रभावित नहीं किया। पेशे से इंजीनियर भारतीय मूल के प्रफुल्ल जी पिछले पचास वर्षों से अमेरिका में रह रहे हैं। प्रफुल्ल जी स्वांतःसुखाय हारमोनियम बजाते हैं और स्वयं गाते भी है, किन्तु बताते हैं कि उनकी गायन और वादन का स्तर ‘स्वरगोष्ठी’ में प्रसारित गायन अथवा वादन जैसा नहीं है। जब हमने उनसे उनका गाया अथवा बजाया अथवा उनकी पसन्द का कोई ऑडियो क्लिप भेजने का अनुरोध किया तो उन्होने किसी एक कलाकार को चुनने में असमंजस के कारण संकोच के साथ टाल दिया। ‘स्वरगोष्ठी’ की पहेली में नियमित रूप से भाग लेने वाले प्रफुल्ल जी के संगीत-ज्ञान का अनुमान इस तथ्य से किया जा सकता है कि संगीत पहेली में 94 अंक अर्जित कर उन्होने वार्षिक महाविजेताओ की सूची तीसरे महाविजेता का सम्मान प्राप्त किया है। ‘स्वरगोष्ठी के आज के इस अंक के माध्यम से ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के सभी संचालक और सम्पादक मण्डल के सदस्य, संगीत-प्रेमी प्रफुल्ल पटेल का महाविजेता के रूप में हार्दिक अभिनन्दन करते हैं और अपनी ओर से उनकी अभिरुचि का ध्यान रखते हुए हारमोनियम वाद्य का एकल वादन प्रस्तुत कर रहे हैं। वादक हैं, मिलिन्द कुलकर्णी। हारमोनियम जैसे संगति वाद्य पर श्री कुलकर्णी राग जनसम्मोहिनी में आलाप, जोड़ और झाला प्रस्तुत कर रहे हैं। आप इस मोहक वादन का रसास्वादन कीजिए और हमे आज के इस अंक को यहीं विराम देने की अनुमति दीजिए। इस अंक से हमारी पहेली प्रतियोगिता पुनः आरम्भ हो रही है। आप सभी इसमें भाग लेना न भूलिए।

राग जनसम्मोहिनी : हारमोनियम पर एकल वादन : मिलिन्द कुलकर्णी




संगीत पहेली

‘स्वरगोष्ठी’ के 352वें अंक की संगीत पहेली में आज हम आपको एक रागबद्ध फिल्मी गीत का अंश सुनवा रहे हैं। गीत के इस अंश को सुन कर आपको निम्नलिखित तीन में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर देने हैं। यदि आपको तीन में से केवल एक अथवा दो प्रश्न का उत्तर ज्ञात हो तो भी आप प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं। 360वें अंक की ‘स्वरगोष्ठी’ तक जिस प्रतिभागी के सर्वाधिक अंक होंगे, उन्हें वर्ष 2018 के प्रथम सत्र का विजेता घोषित किया जाएगा। इसके साथ ही पूरे वर्ष के प्राप्तांकों की गणना के बाद वर्ष के अन्त में महाविजेताओं की घोषणा भी की जाएगी।





1 – इस गीतांश को सुन कर बताइए कि इसमें किस राग की झलक है?

2 – इस गीत में प्रयोग किये गए ताल का नाम बताइए।

3 – इस गीत में किस सुप्रसिद्ध पार्श्वगायिका की आवाज़ है?

आप उपरोक्त तीन मे से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर केवल swargoshthi@gmail.com या radioplaybackindia@live.com पर ही शनिवार, 20 जनवरी, 2018 की मध्यरात्रि से पूर्व तक भेजें। आपको यदि उपरोक्त तीन में से केवल एक प्रश्न का सही उत्तर ज्ञात हो तो भी आप पहेली प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं। COMMENTS में दिये गए उत्तर मान्य हो सकते हैं, किन्तु उसका प्रकाशन पहेली का उत्तर देने की अन्तिम तिथि के बाद किया जाएगा। विजेता का नाम हम उनके शहर, प्रदेश और देश के नाम के साथ ‘स्वरगोष्ठी’ के 354वें अंक में प्रकाशित करेंगे। इस अंक में प्रस्तुत गीत-संगीत, राग, अथवा कलासाधक के बारे में यदि आप कोई जानकारी या अपने किसी अनुभव को हम सबके बीच बाँटना चाहते हैं तो हम आपका इस संगोष्ठी में स्वागत करते हैं। आप पृष्ठ के नीचे दिये गए COMMENTS के माध्यम से तथा swargoshthi@gmail.com अथवा radioplaybackindia@live.com पर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं।


पिछली पहेली के विजेता

‘स्वरगोष्ठी’ की 350वीं कड़ी में हमने आपके लिए कोई भी पहेली नहीं दी थी। इस अंक और अगले अंक में पहेली न पूछे जाने के कारण हम पहेली का सही हल और विजेताओं के नाम की घोषणा नहीं कर रहे हैं। 354वें अंक से हम इस अंक की पहेली का हल और विजेताओं के नाम पूर्ववत प्रकाशित करेंगे।


अपनी बात

मित्रों, ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ के इस अंक में भी आपने पहेली के महाविजेताओं के संगीत का रसास्वादन किया। अगले अंक से हम एक नई श्रृंखला शुरू कर रहे हैं। इस नई श्रृंखला का शीर्षक होगा “पाँच स्वर के राग”। इस श्रृंखला और आगामी श्रृंखलाओं के लिए यदि आपका कोई सुझाव या फरमाइश हो तो हमें swargoshthi@gmail.com पर अवश्य लिखिए। अगले अंक में रविवार को प्रातः 7 बजे हम ‘स्वरगोष्ठी’ के इसी मंच पर सभी संगीत-प्रेमियों का स्वागत करेंगे।


प्रस्तुति : कृष्णमोहन मिश्र  

रेडियो प्लेबैक इण्डिय

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