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Friday, January 29, 2010

19वाँ विश्व पुस्तक मेला में होगा आवाज़ महोत्सव, ज़रूर पधारें

हिन्द-युग्म साहित्य को कला की हर विधा से जोड़ने का पक्षधर है। इसलिए हम अपने आवाज़ मंच पर तमाम गतिविधियों के साथ-साथ साहित्य को आवाज़ की विभिन्न परम्पराओं से भी जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

इसी क्रम में हमने प्रेमचंद की कहानियों को 'सुनो कहानी' स्तम्भ के माध्यम से पॉडकास्ट करना शुरू किया ताकि उन्हें इस माध्यम से भी संग्रहित किया जा सके। 19वाँ विश्व पुस्तक मेला जो प्रगति मैदान, नई दिल्ली में 30 जनवरी से 7 फरवरी 2010 के मध्य आयोजित हो रहा है, में हिन्द-युग्म प्रेमचंद की 15 कहानियों के एल्बम 'सुनो कहानी' को जारी करेगा।

इसी कार्यक्रम में जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, महादेवी वर्मा, रामधारी सिंह दिनकर, मैथिलीशरण गुप्त की प्रतिनिधि कविताओं के संगीतबद्ध एल्बम ‘काव्यनाद’ का लोकार्पण भी होगा। उल्लेखनीय है कि 18वें विश्व पुस्तक मेला में भी हिन्द-युग्म ने इंटरनेट की हिन्दी दुनिया का प्रतिनिधित्व किया था और अपने पहला उत्पाद के तौर पर कविताओं और संगीतबद्ध गीतों के एल्बम 'पहला सुर' को जारी किया था।

सन् 2008 में इंटरनेट पर हिन्दी का जितना बड़ा संसार था, आज उससे कई गुना विस्तार उसे मिल चुका है। इसलिए हिन्द-युग्म ने भी अपनी सक्रियता, अपनी प्रचार रणनीति में विस्तार किये हैं। यह इंटरनेट जगत के लिए अपने आप में बड़ी बात है कि इंटरनेट पर काम करने वाला एक समूह विश्व पुस्तक मेला में 3X3 मीटर2 का क्षेत्रफल घेर रहा है, जहाँ की हर बात इंटरनेट से जुड़ी है।

हिन्द-युग्म हिन्दी के 6 स्तम्भ कवियों की प्रतिनिधि कविताओं के संगीतबद्ध एल्बम ‘काव्यनाद’ और प्रेमचंद की 15 मशहूर कहानियों के एल्बम ‘सुनो कहानी’ के विमोचन कार्यक्रम में आपको आमंत्रित करता है। पूरा विवरण निम्नवत् है-

स्थान व समय- प्रगति मैदान सभागार, नई दिल्ली, 1 फरवरी 2010, दोपहर 2-4 (19वाँ विश्व पुस्तक मेला 2010, नई दिल्ली)

मंचासीन अतिथि-

अशोक बाजपेयी, वरिष्ठ कवि, निदेशक, ललित कला अकादमी, नई दिल्ली ('काव्यनाद' का विमोचन करेंगे)

राजेन्द्र यादव, वरिष्ठ कथाकार और हंस के प्रधान सम्पादक ('सुनो कहानी' का विमोचन करेंगे)

डॉ॰ मुकेश गर्ग, संगीत विशेषज्ञ, संगीत-संकल्प पत्रिका के सम्पादक (दोनों एल्बमों की समीक्षा करेंगे)

आदित्य प्रकाश, काव्यनाद (गीतकास्ट प्रतियोगिता) के सूत्रधार और फन एशिया के रेडियो कार्यक्रम हिन्दी यात्रा के उद्‍घोषक, डैलस, अमेरिका

ज्ञान प्रकाश सिंह, गीतकास्ट प्रोजेक्ट के सहयोगी, लंदन, यूके

संचालक- प्रमोद कुमार तिवारी

मुख्य आकर्षण

  • जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, महादेवी वर्मा, रामधारी सिंह दिनकर, मैथिलीशरण गुप्त की प्रतिनिधि कविताओं के संगीतबद्ध एल्बम ‘काव्यनाद’ का विमोचन
  • प्रेमचंद की 20 कहानियों के ऑडियो एल्बम ‘सुनो कहानी’ का विमोचन
  • केरल के युवा गायक-संगीतकार निखिल-चार्ल्स और मिथिला द्वारा संगीतमयी प्रस्तुति।
  • पुणे के गायक-संगीतकार रफ़ीक़ शेख द्वारा कविता-गायन
  • 2008-09 के संगीत-सत्र के पुरस्कारों का वितरण

अपनी उपस्थिति सुनिश्चत करें।

निवेदक-
सजीव सारथी
संपादक, आवाज़
हिन्द-युग्म
9871123997
sajeevsarathie@gmail.com

Thursday, October 29, 2009

'नर हो न निराश करो मन को' को संगीतबद्ध कीजिए और जीतिए रु 7000 के नगद पुरस्कार

पिछले महीने हमने गीतकास्ट प्रतियोगिता में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कविता 'कलम, आज उनकी जय बोल' को संगीतबद्ध कविता करने की प्रतियोगिता आयोजित की थी। छठवीं गीतकास्ट प्रतियोगिता के आयोजन की उद्‍घोषणा करने में हमें लगभग 20 दिनों का विलम्ब हुआ क्योंकि कोई प्रायोजक नहीं मिल पाया था। परंतु जहाँ चाह है, वहाँ राह है। दुनिया में साहित्य और भाषा प्रेमियों की कमी नहीं है। जब हमने छठवीं गीतकास्ट प्रतियोगिता का प्रायोजक बनने का प्रस्ताव उत्तरी आयरलैण्ड के क्वीन'स विश्वविद्यालय के शोधार्थी दीपक मशाल के समक्ष रखा तो उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया। इन्होंने यह ज़रूर कहा कि रु 7000 की धनराशि एक विद्यार्थी के लिए जुटाना थोड़ा मुश्किल है, तो ये अपने दो अन्य शोधार्थी मित्रों को इस आयोजन के प्रायोजकों में जोड़ना चाहेंगे। हमने इन तीन शोधार्थी मित्रों के साथ मिलकर छठवीं गीतकास्ट प्रतियोगिता में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की कविता 'नर हो न निराश करो मन को' का निश्चय किया है।

दीपक मशाल एक कवि भी हैं और सितम्बर 2009 के यूनिकवि घोषित किये गये हैं। दीपक के अनुसार इनके दादाजी राम बिहारी चौरसिया 'बिहारी दद्दा' मैथिली शरण गुप्त के बहुत करीबी थे। बिहारी दद्दा दीपक मशाल को मैथिली शरण गुप्त से जुड़े बहुत-से संस्मरण सुनाते रहते हैं। दीपक मानते हैं कि इनके अंदर कविता का बीजारोपण इनके बिहारी दद्दा और इनके गुरू वैदेही शरण लोहकर 'जोगी' ने ही किया है।

गीत को केवल पढ़ना नहीं बल्कि गाकर भेजना होगा। हर प्रतिभागी इस गीत को अलग-अलग धुन में गाकर भेजे (कौन सी धुन हो, यह आपको खुद सोचना है)।

1) गीत को रिकॉर्ड करके भेजने की आखिरी तिथि 15 नवम्बर 2009 है। अपनी प्रविष्टि podcast.hindyugm@gmail.com पर ईमेल करें।
2) इसे समूह में भी गाया जा सकता है। यह प्रविष्टि उस समूह के नाम से स्वीकार की जायेगी।
3) इसे संगीतबद्ध करके भी भेजा जा सकता है।
4) श्रेष्ठ तीन प्रविष्टियों को क्वीन्स विश्वविद्यालय की ओर से क्रमशः रु 4000, रु 1500 और रु 1500 के नग़द पुरस्कार दिये जायेंगे।
5) सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टि को डलास, अमेरिका के एफ॰एम॰ रेडियो स्टेशन फन एशिया के कार्यक्रमों में बजाया जायेगा। इस प्रविष्टि के गायक/गायिका से आदित्य प्रकाश रेडियो के किसी कार्यक्रम में सीधे बातचीत करेंगे, जिसे दुनिया में हर जगह सुना जा सकेगा।
6) सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टि को 'हिन्दी-भाषा की यात्रा-कथा' नामक वीडियो/डाक्यूमेंट्री में भी बेहतर रिकॉर्डिंग के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है।
8) श्रेष्ठ प्रविष्टि के चयन का कार्य आवाज़-टीम द्वारा किया जायेगा। अंतिम निर्णयकर्ता में आदित्य प्रकाश का नाम भी शामिल है।
9) हिन्द-युग्म का निर्णय अंतिम होगा और इसमें विवाद की कोई भी संभावना नहीं होगी।
10) निर्णायकों को यदि अपेक्षित गुणवत्ता की प्रविष्टियाँ नहीं मिलती तो यह कोई ज़रूरी भी नहीं कि पुरस्कार दिये ही जायँ।

मैथिली शरण गुप्त की कविता 'नर हो न निराश करो मन को'

नर हो न निराश करो मन को
कुछ काम करो कुछ काम करो
जग में रह के निज नाम करो।

यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो!
समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो।
कुछ तो उपयुक्त करो तन को
नर हो न निराश करो मन को।

सँभलो कि सुयोग न जाए चला
कब व्यर्थ हुआ सदुपाय भला!
समझो जग को न निरा सपना
पथ आप प्रशस्त करो अपना।
अखिलेश्वर है अवलम्बन को
नर हो न निराश करो मन को।।

निज गौरव का नित ज्ञान रहे
हम भी कुछ हैं यह ध्यान रहे।
सब जाय अभी पर मान रहे
मरणोत्तर गुंजित गान रहे।
कुछ हो न तजो निज साधन को
नर हो न निराश करो मन को।।

Wednesday, August 12, 2009

महादेवी वर्मा की विरह-कविता गायें और स्वरबद्ध करें

हिन्द-युग्म ने मई 2009 से गीतकास्ट प्रतियोगिता के माध्यम से महाकवियों की कविताओं को संगीतबद्ध करने की परम्परा शुरू की है। इस क्रम में सबसे पहले हमने हिन्दी कविता के स्वर्णिम काल छायावादी युग के चार स्तम्भ कवियों की एक-एक कविता को संगीतबद्ध करवाने का संकल्प लिया है। उल्लेखनीय है कि हमने चार में से तीन कवियों (जयशंकर प्रसाद, सुमित्रा नंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला) की एक-एक कविता को संगीतबद्ध करने की प्रतियोगिता का सफल आयोजन कर भी लिया है।

आज हम महीयसी महादेवी वर्मा की कविता के लिए संगीतबद्ध प्रविष्टियाँ भेजने की उद्‍घोषणा लेकर उपस्थित हैं। महादेवी वर्मा को विरह की कवयित्री भी कहा जाता है। हमने इनकी एक विरह और मिलन की कल्पना से उपजने वाले भावों से पिरोई कविता 'जो तुम आ जाते एक बार' को संगीतबद्ध करवाने का निर्णय लिया है।

इस कड़ी के प्रायोजक है डैलास, अमेरिका के अशोक कुमार हैं जो पिछले 30 सालों से अमेरिका में हैं, आई आई टी, दिल्ली के प्रोडक्ट हैं। डैलास, अमेरिका में भौतिकी के प्रोफेसर हैं, अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति के आजीवन सदस्य हैं। और हिन्दी-सेवा के लिए डैलास में एक सक्रिय नाम हैं।

गीत को केवल पढ़ना नहीं बल्कि गाकर भेजना होगा। हर प्रतिभागी इस गीत को अलग-अलग धुन में गाकर भेजे (कौन सी धुन हो, यह आपको खुद सोचना है)।

1) गीत को रिकॉर्ड करके भेजने की आखिरी तिथि 31 अगस्त 2009 है। अपनी प्रविष्टि podcast.hindyugm@gmail.com पर ईमेल करें।
2) इसे समूह में भी गाया जा सकता है। यह प्रविष्टि उस समूह के नाम से स्वीकार की जायेगी।
3) इसे संगीतबद्ध करके भी भेजा जा सकता है।
4) श्रेष्ठ तीन प्रविष्टियों को अशोक कुमार की ओर से क्रमशः रु 2000, रु 1000 और रु 1000 के नग़द पुरस्कार दिये जायेंगे।
5) सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टि को डलास, अमेरिका के एफ॰एम॰ रेडियो स्टेशन रेडियो सलाम नमस्ते के कार्यक्रमों में बजाया जायेगा। इस प्रविष्टि के गायक/गायिका से आदित्य प्रकाश रेडियो के किसी कार्यक्रम में सीधे बातचीत करेंगे, जिसे दुनिया में हर जगह सुना जा सकेगा।
6) सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टि को 'हिन्दी-भाषा की यात्रा-कथा' नामक वीडियो/डाक्यूमेंट्री में भी बेहतर रिकॉर्डिंग के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है।
8) श्रेष्ठ प्रविष्टि के चयन का कार्य आवाज़-टीम द्वारा किया जायेगा। अंतिम निर्णयकर्ता में आदित्य प्रकाश का नाम भी शामिल है।
9) हिन्द-युग्म का निर्णय अंतिम होगा और इसमें विवाद की कोई भी संभावना नहीं होगी।
10) निर्णायकों को यदि अपेक्षित गुणवत्ता की प्रविष्टियाँ नहीं मिलती तो यह कोई ज़रूरी भी नहीं कि पुरस्कार दिये ही जायँ।

महादेवी वर्मा की कविता 'जो तुम आ जाते एक बार'

जो तुम आ जाते एक बार

कितनी करुणा कितने संदेश
पथ में बिछ जाते बन पराग
गाता प्राणों का तार तार
अनुराग भरा उन्माद राग

आँसू लेते वे पथ पखार
जो तुम आ जाते एक बार

हँस उठते पल में आर्द्र नयन
धुल जाता होठों से विषाद
छा जाता जीवन में बसंत
लुट जाता चिर-संचित विराग

आँखें देतीं सर्वस्व वार
जो तुम आ जाते एक बार

Thursday, July 9, 2009

इस बार स्वरबद्ध कीजिए निराला की एक कविता को

गीतकास्ट प्रतियोगिता के दो अंकों का सफल आयोजन हो चुका है। जहाँ जयशंकर प्रसाद की कविता 'अरुण यह मधुमय देश हमारा' को 12 प्रविष्टियाँ प्राप्त हुईं, वहीं सुमित्रानंदन पंत की कविता 'प्रथम रश्मि' के लिए 19 स्वरबद्ध/सुरबद्ध प्रविष्टियाँ मिलीं। आलम यह रहा कि 'प्रथम रश्मि'' की 8 संगीतमय प्रस्तुतियाँ प्रसारित करनी पड़ीं।

जब पहली बार इस प्रतियोगिता के आयोजन की उद‍्‍घोषणा हुई थी, तब तय किया गया था कि कुल रु 2000 का नग़द पुरस्कार दिया जायेगा, लेकिन इसे पहली बार ही बढ़ाकर रु 2500 करना पड़ा। 'प्रथम रश्मि' को संगीतबद्ध करने की उद्‍घोषणा के समय यह राशी बढ़ाकर रु 3000 की गई, लेकिन परिणाम प्रकाशित करते वक़्त प्रायोजक इतने खुश थे कि राशि बढ़कर रु 4000 हो गई। अब से यह राशि हमेशा के लिए रु 4000 की जा रही है।

आज छायावादी कविताओं को स्वरबद्ध/सुरबद्ध की कड़ी में बारी है महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविता की। निराला की कौन सी कविता स्वरबद्ध करायी जाये, इस संदर्भ में हमने अपने श्रोताओं से भी राय ली थी। 'राम की शक्तिपूजा' को स्वरबद्ध करने का सुझाव अधिकाधिक श्रोताओं ने दिया, लेकिन हमारी टीम मानती है कि वह कविता स्वरबद्ध करना बहुत आसान है नहीं है, शुरूआत किसी सरल कविता से हो। इसलिए हम निराला के एक नवगीत से इसकी शुरूआत कर रहे हैं। इस गीत की अनुशंसा भी बहुत से श्रोताओं ने की है।

इस कड़ी के प्रायोजक हैं डॉ॰ ज्ञान प्रकाश सिंह, जो पिछले 30 वर्षों से मानचेस्टर, यूके में प्रवास कर रहे हैं। कवि हृदयी, कविता-मर्मज्ञ और साहित्यिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने वाले- ये सभी इनके विशेषण हैं।

गीत को केवल पढ़ना नहीं बल्कि गाकर भेजना होगा। हर प्रतिभागी इस गीत को अलग-अलग धुन में गाकर भेजे (कौन सी धुन हो, यह आपको खुद सोचना है)।

1) गीत को रिकॉर्ड करके भेजने की आखिरी तिथि 31 जुलाई 2009 है। अपनी प्रविष्टि podcast.hindyugm@gmail.com पर ईमेल करें।
2) इसे समूह में भी गाया जा सकता है। यह प्रविष्टि उस समूह के नाम से स्वीकार की जायेगी।
3) इसे संगीतबद्ध करके भी भेजा जा सकता है।
4) श्रेष्ठ तीन प्रविष्टियों को डॉ॰ ज्ञान प्रकाश सिंह की ओर से क्रमशः रु 2000, रु 1000 और रु 1000 के नग़द पुरस्कार दिये जायेंगे।
5) सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टि को डलास, अमेरिका के एफ॰एम॰ रेडियो स्टेशन रेडियो सलाम नमस्ते के कार्यक्रम 'कवितांजलि' में बजाया जायेगा। इस प्रविष्टि के गायक/गायिका से आदित्य प्रकाश (कार्यक्रम के संचालक) कार्यक्रम में सीधे बातचीत करेंगे, जिसे दुनिया में हर जगह सुना जा सकेगा।
6) अन्य उल्लेखनीय प्रविष्टियों को भी कवितांजलि में बजाया जायेगा।
7) सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टि को 'हिन्दी-भाषा की यात्रा-कथा' नामक वीडियो/डाक्यूमेंट्री में भी बेहतर रिकॉर्डिंग के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है।
8) श्रेष्ठ प्रविष्टि के चयन का कार्य आवाज़-टीम द्वारा किया जायेगा। अंतिम निर्णयकर्ता में आदित्य प्रकाश का नाम भी शामिल है।
9) हिन्द-युग्म का निर्णय अंतिम होगा और इसमें विवाद की कोई भी संभावना नहीं होगी।
10) निर्णायकों को यदि अपेक्षित गुणवत्ता की प्रविष्टियाँ नहीं मिलती तो यह कोई ज़रूरी भी नहीं कि पुरस्कार दिये ही जायँ।

निराला की कविता 'स्नेह-निर्झर बह गया है'

स्नेह-निर्झर बह गया है।
रेत ज्यों तन रह गया है।

आम की यह डाल जो सूखी दिखी,
कह रही है- "अब यहाँ पिक या शिखी
नहीं आते, पंक्‍ति मैं वह हूँ लिखी
नहीं जिसका अर्थ-
जीवन दह गया है।"

"दिये हैं मैंने जगत् को फूल-फल,
किया है अपनी प्रतिभा से चकित-चल;
पर अनश्‍वर था सकल पल्लवित पल-
ठाट जीवन का वही
जो ढह गया है।"

अब नहीं आती पुलिन पर प्रियतमा,
श्याम तृण पर बैठने को, निरुपमा।
बह रही है हृदय पर केवल अमा;
मैं अलक्षित हूँ, यही
कवि कह गया है।

Wednesday, June 10, 2009

छायावादी कविता-गायन में इस बार गायें पंत की कविता 'प्रथम रश्मि'

गीतकास्ट प्रतियोगिता की शुरूआत बहुत ही धमाकेदार रही। आवाज़ को उम्मीद से अधिक प्रतिभागी मिले और आदित्य प्रकाश को उनकी पसंद की कविता 'अरुण यह मधुमय देश हमारा' को उम्मीद से बेहतर गायकी और संगीत-संयोजन। हम जब गीतकास्ट प्रतियोगिता की शुरूआत करने जा रहे थे तभी तय कर लिया था कि हिन्दी के सभी महत्वपूर्ण कवियों की कम से कम एक कविता को स्वरबद्ध/सुरबद्ध ज़रूर करवायेंगे। और यह कहना अनुचित नहीं होगा कि स्वप्न मंजूषा 'शैल' और कृष्ण राज कुमार के प्रयास ने हमें हौसला दिया और प्रायोजकों को विश्वास की इस तरह का प्रयास भी सराहा जा सकता है।

पिछले रविवार डैलास, अमेरिका के एफएम चैनल रेडियो सलाम नमस्ते पर जब स्वप्न मंजूषा और कृष्ण राज कुमार की आवाज़ उभरी तो उसे दुनिया ने सुना और सर-आँखों पर बिठा लिया।

जैसाकि हमने अपनी पहली प्रतियोगिता के परिणाम को प्रकाशित करते समय इस बात का ज़िक्र किया था कि हम शुरूआत में छायावाद के चारों प्रमुख कवियों की कविताओं के साथ यह अभिनव प्रयोग करेंगे, आज इस कड़ी में हम सुमित्रानंदन पंत की प्रसिद्ध कविता 'प्रथम रश्मि' को आपके समक्ष रख रहे हैं। इस बार आपको इसी कविता को संगीतबद्ध/सुरबद्ध करके हमें भेजना है।

आपको यह जानकर खुशी होगी कि इस बार से इनाम की राशि भी बढ़ाई जा रही है। अब से प्रथम और द्वितीय दो पुरस्कार दिये जायेंगे । प्रथम विजेता को रु 2000 का नग़द इनाम और द्वितीय स्थान के विजेता को रु 1000 का नग़द इनाम दिया जायेगा। इस बार के इन इनामों के प्रायोजक हैं शेर बहादुर सिंह जोकि अमेरिका की अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के वरिष्ठ सदस्य तथा इसके न्यू यार्क चैप्टर के अध्यक्ष हैं।

गीत को केवल पढ़ना नहीं बल्कि गाकर भेजना होगा। हर प्रतिभागी इस गीत को अलग-अलग धुन में गाकर भेजे (कौन सी धुन हो, यह आपको खुद सोचना है)।

1) गीत को रिकॉर्ड करके भेजने की आखिरी तिथि 30 जून 2009 है। अपनी प्रविष्टि podcast.hindyugm@gmail.com पर ईमेल करें।
2) इसे समूह में भी गाया जा सकता है। यह प्रविष्टि उस समूह के नाम से स्वीकार की जायेगी।
3) इसे संगीतबद्ध करके भी भेजा जा सकता है।
4) श्रेष्ठ दो प्रविष्टियों को शेर बहादुर सिंह की ओर से क्रमशः रु 2000 और रु 1000 के नग़द इनाम दिये जायेंगे।
5) सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टि को डलास, अमेरिका के एफ॰एम॰ रेडियो स्टेशन रेडियो सलाम नमस्ते के कार्यक्रम 'कवितांजलि' में बजाया जायेगा। इस प्रविष्टि के गायक/गायिका से आदित्य प्रकाश (कार्यक्रम के संचालक) कार्यक्रम में सीधे बातचीत करेंगे, जिसे दुनिया में हर जगह सुना जा सकेगा।
6) अन्य 2 प्रविष्टियों को भी कवितांजलि में बजाया जायेगा।
7) सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टि को 'हिन्दी-भाषा की यात्रा-कथा' नामक वीडियो/डाक्यूमेंट्री में भी बेहतर रिकॉर्डिंग के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है।
8) श्रेष्ठ प्रविष्टि के चयन का कार्य आवाज़-टीम द्वारा किया जायेगा। अंतिम निर्णयकर्ता में आदित्य प्रकाश का नाम भी शामिल है।
9) हिन्द-युग्म का निर्णय अंतिम होगा और इसमें विवाद की कोई भी संभावना नहीं होगी।
10) निर्णायकों को यदि अपेक्षित गुणवत्ता की प्रविष्टियाँ नहीं मिलती तो यह कोई ज़रूरी भी नहीं कि पुरस्कार दिये ही जायँ।

सुमित्रा नंदन पंत की 'प्रथम रश्मि' कविता से कुछ पंक्तियों को हटाया गया है ताकि संगीतबद्ध करना आसान हो और ज्यादा लम्बी रिकॉर्डिंग न हो।

पंत की कविता 'प्रथम रश्मि'

प्रथम रश्मि का आना रंगिणि!
तूने कैसे पहचाना?
कहां, कहां हे बाल-विहंगिनि!
पाया तूने यह गाना?

सोयी थी तू स्वप्न नीड़ में,
पंखों के सुख में छिपकर,
ऊंघ रहे थे, घूम द्वार पर,
प्रहरी-से जुगनू नाना।

शशि-किरणों से उतर-उतरकर,
भू पर कामरूप नभ-चर,
चूम नवल कलियों का मृदु-मुख,
सिखा रहे थे मुसकाना।

स्नेह-हीन तारों के दीपक,
श्वास-शून्य थे तरु के पात,
विचर रहे थे स्वप्न अवनि में
तम ने था मंडप ताना।

कूक उठी सहसा तरु-वासिनि!
गा तू स्वागत का गाना,
किसने तुझको अंतर्यामिनि!
बतलाया उसका आना!

छिपा रही थी मुख शशिबाला,
निशि के श्रम से हो श्री-हीन
कमल क्रोड़ में बंदी था अलि
कोक शोक में दीवाना।

प्रथम रश्मि का आना रंगिणि
तूने कैसे पहचाना?
कहाँ-कहाँ हे बाल विहंगिनी
पाया यह स्वर्गिक गाना ............

हम समय-समय पर इस तरह का आयोजन करते रहेंगे। आप भी अपनी ओर से हिन्दी के स्तम्भ कवियों की कविताओं को सुरबद्ध करने के काम को प्रोत्साहित करना चाहते हों, अपनी ओर से इनाम देना चाहते हों, तो संपर्क करें।

रिकॉर्डिंग संबंधी सहायता यहाँ उपलब्ध है।

Sunday, June 7, 2009

जयशंकर प्रसाद की कविता का सुरबद्ध और संगीतबद्ध रूप (परिणाम)

गीतकास्ट प्रतियोगिता- परिणाम-1: अरुण यह मधुमय देश हमारा

पिछले महीने जब महान कवियों की कविताओं को सुरबद्ध और संगीतबद्ध करने का विचार बना था, तो हमारे मन एक डर था कि बहुत सम्भव है कि इसमें प्रतिभागिता बहुत कम हो। क्योंकि यह प्रतियोगिता कविता प्रतियोगिता जितनी सरल नहीं है। इसमें एक ही कविता को कई बार गाकर, रिकॉर्ड करके साधना होता है। लेकिन आपको भी यह जानकर आश्चर्य होगा कि गीतकास्ट प्रतियोगिता के पहले ही अंक में 12 प्रतिभागियों ने भाग लिया। जयशंकर प्रसाद की प्रसिद्ध कविता 'अरुण यह मधुमय देश हमारा' को 12 अलग धुनों में पिरोया गया। इतना ही नहीं, हमने बहुत से प्रतिभागियों से जब यह कहा कि रिकॉर्डिंग और उच्चारण में कुछ कमी रह गई है, तो उन्होंने दुबारा, तिबारा रिकॉर्ड करके भेजा।

गीतकास्ट प्रतियोगिता के माध्यम से हमारी कोशिश है कि पॉडकास्टिंग की रचनात्मक परम्परा हिन्दी में जुड़े। इस शृंखला में हम पहला प्रयोग या प्रयास छायावाद के चार स्तम्भ कवियों की कविताओं को संगीतबद्ध/सुरबद्ध करके करना चाहते हैं। पाठकों, श्रोताओं, गायकों और संगीतकारों की पूर्ण सहभागिता के बिना यह सफल नहीं हो पायेगा। छायावाद के कवियों की कविताओं के संगीत-संयोजन की पहली कड़ी गीतकास्ट प्रतियोगिता की पहली कड़ी है, जिसमें हमने जयशंकर प्रसाद की कविता को संगीतबद्ध/सुरबद्ध करवाया है। अगली कड़ी सुमित्रानंदन पंत की कविता की होगी, जिसकी उद्‍घोषणा 10 जून 2009 को की जायेगी।

जयशंकर प्रसाद की कविता 'अरुण यह मधुमय देश हमारा' के लिए प्राप्त कुल 12 प्रविष्टियों से श्रेष्ठ प्रविष्टि चुनने के लिए दो चरणों में निर्णय कराया गया। पहले चरण में तीन निर्णयकर्ता रखे गये। यहाँ से 6 प्रविष्टियों को अंतिम निर्णयकर्ता आदित्य प्रकाश को भेजा गया। आदित्य प्रकाश पहले और दूसरे स्थान की प्रविष्टि में उलझ गये। बहुत सोचा कि किसे प्रथम रखूँ, किसे द्वितीय? यह तय कर पाना उनके लिए मुश्किल हो रहा था क्योंकि एक प्रविष्टि में कविता की आत्मा पूरी तरह से मुखरित हो रही थी तो दूसरे में संगीत का नया प्रयोग नवपीढ़ियों को लगभग 100 साल पुरानी कविता से जोड़ पा रहा था। एक में आवाज़ की मधुरता मन मोह रही थी तो दूसरे में संगीत की विविधता थिरका रही थी। तो आखिरकार आदित्य प्रकाश ने यह निर्णय लिया कि दोनों को प्रथम स्थान दिया जाय और रु 1000 का नग़द इनाम दोनों को ही दिया जाय। मतलब कुल रु 2000 का नगद इनाम पहले स्थान के लिए।

ये दोनों कौन हैं और इन्होंने कैसा गाया है आप खुद पढ़ लें और सुन लें।

स्वप्न मंजूषा 'शैल'

24 अगस्त को राँची में जन्मी स्वप्न मंजूषा 'शैल' कविमना हैं। कला के प्रति रुझान बचपन से रहा, नाटक और संगीत में भरपूर रूचि होने के कारण आकाशवाणी और दूरदर्शन से लम्बे समय तक जुड़ी रहीं, टी-सीरिज में गाने का सौभाग्य मिला और प्रोत्साहन भी, संगीत की बहुत सारी प्रतियोगिताओं में भाग लिया और पुरस्कृत हुईं। आकाशवाणी रांची और दिल्ली के कई नाटकों में आवाज़ दी, जैसे महाभारत में रामायण, एक बेचारा शादी-शुदा इत्यादि। इंदिरा गाँधी मुक्त विश्वविद्यालय में, सॉफ्टवेर इंजिनियर के पद पर ५ वर्षों तक कार्यरत होने के बाद, मॉरीसस ब्रोडकास्टिंग कारपोरेशन के लिए २ वर्षों तक टेलिविज़न पर प्रोग्राम प्रस्तुत किया, मॉरीसस में, हिंदी को टेलिविज़न के माध्यम से लोकप्रिय, बनाने की शुरुआत में, पति संतोष शैल और इन्होंने एक छोटी सी लेकिन महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पिछले कई वर्षों से कनाडा में हैं और कनाडियन गवर्नमेंट के विभिन्न विभागों ( HRDC, PWGSC, National Defence, Correctional Services of Canada ) में सिस्टम्स अनालिस्ट के पद पर कार्यरत रह चुकी हैं। अब पेशे से प्रोजेक्ट मैनेजेर हैं, हाल ही में Ethiopian Govenment की Educational Television Program production का प्रोजेक्ट जिसमें ४५० फिल्में मात्र ३ महीने में बनायीं गई, कि प्रोजेक्ट मैनेजेर ये ही थीं।
२००४ में कनाडा में Chin Radio पर हिंदी में "आरोही " प्रोग्राम ९७.९ FM की शुरुआत की और उसे लोगों के दिलों तक पहुँचाया, इस कार्यक्रम ने लोकप्रियता का नया कीर्तमान ओटावा कि भूमि पर स्थापित किया।
बचपन से ही कविता लिखने का शौक़ रहा, इनकी २ कवितायेँ पुरस्कृत हुई हैं "गुमशुदा" और 'एकादशानन' ।
कई कविताएँ 'काव्यालय', 'अभिव्यक्ति', 'अनुभूति', 'गर्भनाल', जैसी साइट्स पर छप चुकीं हैं, इनकी एक पुस्तक भी छपी है, जिसका नाम है 'काव्य मंजूषा'।

पुरस्कार- प्रथम पुरस्कार, रु 1000 का नग़द इनाम
विशेष- भारतीय समयानुसार 8 जून 2009 की सुबह 7:30 बजे डैलास, अमेरिका के एफएम चैनल रेडियो सलाम नमस्ते के 'कवितांजलि' कार्यक्रम में आदित्य प्रकाश से इस गीत पर सीधी बात।
गीत सुनें-
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कृष्ण राज कुमार

एक नौजवान संगीतकार और गायक हैं। कृष्ण राज कुमार जो मात्र २२ वर्ष के हैं, और जिन्होंने अभी-अभी अपने B.Tech की पढ़ाई पूरी की है, पिछले १४ सालों से कर्नाटक गायन की दीक्षा ले रहे हैं। इन्होंने हिन्द-युग्म के दूसरे सत्र के संगीतबद्धों गीतों में से एक गीत 'राहतें सारी' को संगीतबद्ध भी किया है। ये कोच्चि (केरल) के रहने वाले हैं। जब ये दसवीं में पढ़ रहे थे तभी से इनमें संगीतबद्ध करने का शौक जगा।

पुरस्कार- प्रथम पुरस्कार, रु 1000 का नग़द इनाम
विशेष- भारतीय समयानुसार 8 जून 2009 की सुबह 7:30 बजे डैलास, अमेरिका के एफएम चैनल रेडियो सलाम नमस्ते के 'कवितांजलि' कार्यक्रम में आदित्य प्रकाश से इस गीत पर सीधी बात।
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अब हम बात करते हैं तीसरे स्थान के विजेता की, जिन्होंने संगीतबद्ध तो नहीं किया, लेकिन सुरबद्ध ज़रूर किया है।

धर्मेंद्र कुमार सिंह

हिंदी-भोजपुरी के युवा गायक हैं. स्टेज, रेडियो, दूरदर्शन और विभिन्न चैनलों पर कार्यक्रम पेश कर चुके हैं, लेकिन अभी भी एक ऐसा प्लेटफार्म मिलना बाकी है जो इन्हें मुकाम तक पहुँचा सके। आजकल भोजपुरी के स्तरीय गीतों और गज़लों को आवाज देने में लगे हैं।

पुरस्कार- तृतीय पुरस्कार, रु 500 का नग़द इनाम
विशेष- भारतीय समयानुसार 15 जून 2009 की सुबह 7:30 बजे डैलास, अमेरिका के एफएम चैनल रेडियो सलाम नमस्ते के 'कवितांजलि' कार्यक्रम में आदित्य प्रकाश से इस गीत पर सीधी बात।
गीत सुनें-
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इसके अतिरिक्त हमारी टीम को मनोहर लेले की प्रविष्टि भी सराहनीय लगी। हम वह प्रविष्टि भी अपने श्रोताओं के समक्ष रख रहे हैं।



विभा झालानी, लतिका भटनागर, कमल किशोर सिंह, रमेश धुस्सा, पूजा अनिल, कमलप्रीत सिंह, मुकेश सोनी और अम्बरीष श्रीवास्तव के भी आभारी हैं जिन्होंने इस प्रतियोगिता में भाग लेकर इसे सफल बनाया। इन सभी प्रतिभागियों की प्रविष्टियों में भी कविता को अलग ढंग से सुनने का अपना आनंद है, लेकिन कविता और रिकॉर्डिंग दोनों की तकनीकी और कलात्मक खूबियों और ख़ामियों के मद्देनज़र हमारी टीम ने उपर्युक्त निर्णय लिया है। हम उम्मीद करते हैं कि सभी प्रतिभागी इसे सकारात्मक लेंगे और गुजारिश करते हैं कि अगली बार भी गीतकास्ट आयोजन में ज़रूर भाग लें।

इस कड़ी के प्रायोजक रेडियो सलाम नमस्ते के उद्‍घोषक, कवि, वैज्ञानिक और हिन्दीकर्मी आदित्य प्रकाश हैं। यदि आप भी इस आयोजन को स्पॉनसर करता चाहते हैं तो hindyugm@gmail.com पर सम्पर्क करें।

Wednesday, May 13, 2009

जयशंकर प्रसाद की कविता गाइए और जीतिए रु 2000 के नग़द इनाम

हिन्द-युग्म यूनिकवि एवं यूनिपाठक प्रतियोगिता के माध्यम से हिन्दी में लिखने-पढ़ने वालों का प्रोत्साहन पिछले 29 महीनों से करने का प्रयास कर रहा है। हिन्दी को आवाज़ की दुनिया से जोड़ने की स्थाई शुरूआत 4 जुलाई 2008 को 'आवाज़' के माध्यम से हुई थी। आज हम पॉडकास्टिंग को प्रोत्साहित करने के लिए 'गीतकॉस्ट' प्रतियोगिता का आयोजन कर रहे हैं।

इसमें भाग लेने के लिए आपको जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित प्रसिद्ध देशगान 'अरुण यह मधुमय देश हमारा' को अपनी आवाज़ में रिकॉर्ड करके हमें भेजना होगा। गीत को केवल पढ़ना नहीं बल्कि गाकर भेजना होगा। हर प्रतिभागी इस गीत को अलग-अलग धुन में गाकर भेजे (कौन सी धुन हो, यह आपको खुद सोचना है)।

1) गीत को रिकॉर्ड करके भेजने की आखिरी तिथि 31 मई 2009 है। अपनी प्रविष्टि podcast.hindyugm@gmail.com पर ईमेल करें।
2) इसे समूह में भी गाया जा सकता है। यह प्रविष्टि उस समूह के नाम से स्वीकार की जायेगी।
3) इसे संगीतबद्ध करके भी भेजा जा सकता है।
4) श्रेष्ठ तीन प्रविष्टियों को आदित्य प्रकाश की ओर से क्रमशः रु 1000, रु 500 और रु 500 के नग़द इनाम दिये जायेंगे।
5) सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टि को डलास, अमेरिका के एफ॰एम॰ रेडियो स्टेशन रेडियो सलाम नमस्ते के कार्यक्रम 'कवितांजलि' में बजाया जायेगा। इस प्रविष्टि के गायक/गायिका से आदित्य प्रकाश (कार्यक्रम के संचालक) कार्यक्रम में सीधे बातचीत करेंगे, जिसे दुनिया में हर जगह सुना जा सकेगा।
6) अन्य 2 प्रविष्टियों को भी कवितांजलि में बजाया जायेगा।
7) सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टि को 'हिन्दी-भाषा की यात्रा-कथा' नामक वीडियो/डाक्यूमेंट्री में भी बेहतर रिकॉर्डिंग के साथ इस्तेमाल किया जायेगा।
8) श्रेष्ठ प्रविष्टि के चयन का कार्य आवाज़-टीम द्वारा किया जायेगा। अंतिम निर्णयकर्ता में आदित्य प्रकाश का नाम भी शामिल है।
9) हिन्द-युग्म का निर्णय अंतिम होगा और इसमें विवाद की कोई भी संभावना नहीं होगी।

जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित देशगान

अरुण यह मधुमय देश हमारा।
जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को
मिलता एक सहारा।

सरस तामरस गर्भ विभा पर
नाच रही तरुशिखा मनोहर।
छिटका जीवन हरियाली पर
मंगल कुंकुम सारा।।

लघु सुरधनु से पंख पसारे
शीतल मलय समीर सहारे।
उड़ते खग जिस ओर मुँह किए
समझ नीड़ निज प्यारा।।

बरसाती आँखों के बादल
बनते जहाँ भरे करुणा जल।
लहरें टकरातीं अनंत की
पाकर जहाँ किनारा।।

हेम कुंभ ले उषा सवेरे
भरती ढुलकाती सुख मेरे।
मदिर ऊँघते रहते जब
जग कर रजनी भर तारा।।

हम समय-समय पर इस तरह का आयोजन करते रहेंगे। आप भी अपनी ओर से हिन्दी के स्तम्भ कवियों की कविताओं को सुरबद्ध करने के काम को प्रोत्साहित करना चाहते हों, अपनी ओर से इनाम देना चाहते हों, तो संपर्क करें।

रिकॉर्डिंग संबंधी सहायता यहाँ उपलब्ध है।


Wednesday, May 6, 2009

आदित्य प्रकाश की भाषा साधना, कवितांजलि तीसरे वर्ष में

हिन्दी भाषा तथा साहित्य की जितनी सेवा हिन्दी को उच्च-शिक्षा के दरम्यान विषय न रखने वाले हिन्दी-प्रेमियों ने की है, उतनी शायद हिन्दी साहित्य में शोध तक करने वाले हिन्दीविदों ने भी नहीं की। कई हिन्दी प्रेमियों के लिए उनकी भाषा ही खाना-पीना व ओढ़ना-बिछाना है। ऐसे ही एक हिन्दी प्रेमी हैं आदित्य प्रकाश

आदित्य प्रकाश से इंटरनेट पर विचरने वाले ज्यादातर हिन्दी प्रेमी परिचित हैं। डैलास, अमेरिका से और इंटरनेट से चौबीसों घंटे चलने वाले एफ एम चैनल 'रेडियो सलाम नमस्ते' पर हर रविवार स्थानीय समय अनुसार रात्रि 9 बजे उनकी आवाज़ सुनाई देती है। आदित्य प्रकाश अंतराष्ट्रीय हिन्दी समिति की ओर से संकल्पित हिन्दी कविता के विशेष कार्यक्रम 'कवितांजलि' को प्रस्तुत करते हैं। यह कार्यक्रम अपने तीसरे वर्ष में प्रवेश कर चुका है।

'कवितांजलि' की सराहना कई कारणों से ज़रूरी है। भारत में, जहाँ कि हिन्दी बहुत बड़े भूभाग पर बोली जाती है, वहाँ के रेडियो चैनलों या अन्य मीडिया माध्यमों में कवितांजलि जैसे कार्यक्रम नहीं होते। यदि होते भी हैं तो बहुत ही स्थानीय स्तर पर। राष्ट्रीय रेडियो चैनलों में 1-2 कवियों का एकल-पाठ, सुनने वालों को कोई खास आकर्षित नहीं करता, इसलिए कोई सुनता भी नहीं। लेकिन आदित्य प्रकाश ने अपने प्रयासों से हिन्दी कविता के कार्यक्रम को बहुत रोचक और सुनने लायक बना रखा है।

हिन्दी, संस्कृत, नेपाली और अंग्रेजी जैसी भाषाओं पर पकड़ रखने वाले आदित्य प्रकाश प्राणि विज्ञान में एम एस सी करने के बाद भारत और नेपाल में जीव विज्ञान पढ़ाते रहे। पटना में इन्होंने शैरोन पब्लिक स्कूल की स्थापना की और उसके प्रिसिंपल भी रहे। 1998 में ये अमेरिका आ गये और डलास शहर में बस गये। यहाँ एक डिफेन्स फम्पनी के माइक्रोवेब इंजीनियरिंग विभाग में काम करते हुए भी साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय हैं। शायद हिन्दी भाषा का कोई कर्ज था या स्व-भाषाप्रेम जो विदेश में भी इन्होंने भाषा सेवा नहीं छोड़ी।

कवितांजलि कार्यक्रम को बहुत शुरू से ही आदित्य प्रकाश प्रस्तुत कर रहे हैं और वो भी पूर्णतया बिना किसी धनार्जन के। अपने घर से रेडियो सलाम नमस्ते आने और लौटने तक की यात्रा में जो पेट्रोल उड़ता है, वो खर्च भी नहीं लेते आदित्य प्रकाश। इतना होने के बाद भी इनके समर्पण में कभी कोई कमी नहीं आई। पिछले 2 साल से अनवरत हर रविवार नियत समय पर यह कार्यक्रम होता रहा। कितना सुखद है कि यह कार्यक्रम जीवंत प्रस्तुत होता है। जिसने भी इस कार्यक्रम को सुना आदित्य प्रकाश की आवाज़ में इतना ज़रुर याद रख गया- मंगल कामनाओं का अनवरत राग- यानी कवितांजलि।

इस कार्यक्रम के लिए आदित्य केवल इतना ही नहीं करते। बल्कि अपने खर्चे से दुनिया भर से हिन्दी कवियों को खोजना और उन्हें फोन करने के साथ-साथ उनसे लगातार संपर्क बनाए रखना ताकि इन नवांकुरों लगातार लिखने और भाषा की सेवा करने का प्रोत्साहन मिलता रहे। आदित्य प्रकाश हम हिन्दी कर्मियों के लिए एक प्रेरणा हैं। इनके इस समर्पण का सम्मान अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिती ने इस वर्ष 'भाषा सेवा सम्मान' देकर किया। इससे पहले भी छत्तीसगढ़ की संस्था सृजन-सम्मान द्वारा इन्हें प्रवासी सम्मान दिया जा चुका है। लेकिन ये सारे सम्मान फीके पड़ जाते हैं जब हम कभी कवितांजलि सुनते हैं और उस कार्यक्रम के श्रोताओं का प्रेम आदित्य प्रकाश के प्रति महसूस करते हैं।

आदित्य प्रकाश के प्रयासों से हमारे भूगोल के अलग-अलग भाग से कवितांजलि में 60 से अधिक कवियों ने अपना राग सुनाया है। कुछ महत्वपूर्ण नामों को गिनाना भी ज़रूरी समझता हूँ-

भारत से- मनीषा कुलश्रेष्ठ (हिन्दी नेस्ट डॉट कॉम की संपादिका), कुमार विश्वास, दीपक गुप्ता, राजेश चेतन, गजेन्द्र सोलंकी, सुरेन्द्र दुबे, सुनील जोगी, पवन दीक्षित, ओम व्यास ओम, उदय भानू हंस, कविता वाचकनवी, दिनेश रघुवंशी, मनोज कुमार मनोज, नलिनी पुरोहित, जयप्रकाश मानस (सृजनगाथा डॉट कॉम के संपादक), मधुमोहिनी मिश्रा, अर्जुन सिसोदिया, सुरेन्द्र अवस्थी, गौरव सोलंकी, विपुल शुक्ला, अनुपमा चौहान, निखिल आनंद गिरि, सुनीता चोटिया, रंजना भाटिया, आलोक शंकर, अनुराग शर्मा, मनीष वंदेमातरम् इत्यादि।

भारत के बाहर से- लावण्या शाह, डॉ॰ अंजना संधीर, अभिनव शुक्ला, सुधा ओम धींगरा, रेखा मैत्रा, प्रो॰ महाकवि हरिशंकर आदेश, डॉ॰ ज्ञान प्रकाश, देवेन्द्र सिंह, अर्चना पाण्डा, शशि पाधा, रेनुका भटनागर, राहुल उपाध्याय, डॉ॰ चमन लाल रैना, दॉ॰ सुषम बेदी, डॉ॰ बिन्देश्वरी अग्रवाल, इला प्रसाद, कुसुम सिन्हा, रेनू राजवंशी, डॉ॰ सुरेन्द्र गम्भीर, प्रो॰ ओलेफन हारमन, सुरेन्द्र तिवारी, रिपुदमन पचौरी, डॉ॰ कमल सिंह, अमरेन्द्र कुमार, सौमित्र सक्सेना, रचना श्रीवास्तवा, वीणा शर्मा, शैलेश मिश्रा इत्यादि।

आज यही आदित्य प्रकाश आवाज़ के श्रोताओं के लिए अपना संदेश लेकर आये हैं। सुनें-



हिन्दी के साथ-साथ आदित्य अमेरिका में भोजपुरी के भी प्रचार-प्रसार में प्रयासरत हैं। सामुदायिक पत्रिकाओं का संपादन भी करते हैं।

हमारा सलाम!!

Friday, May 1, 2009

जब अनुराग बोले रेडियो से

अनुराग शर्मा हिन्द-युग्म का बहुत जाना-पहचाना नाम है। कहानी-वाचन के लिए ये आवाज़ के श्रोताओं के दिलों में अपनी ख़ास जगह बना चुके हैं। ये एक अच्छे कवि और विचारक भी हैं। पिछले सप्ताह 19 अप्रैल 2009 को रेडियो सलाम नमस्ते पर अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति द्वारा प्रस्तुत हिन्दी कविता के विशेष कार्यक्रम ' कवितांजलि' में इनका साक्षात्कार प्रसारित हुआ। कार्यक्रम के उद्‍घोषक आदित्य प्रकाश ने इनसे संक्षिप्त बातचीत की। अब तक इस कार्यक्रम में आलोक शंकर, गौरव सोलंकी, विपुल शुक्ला, अनुपमा चौहान, निखिल आनंद गिरि, रंजना भाटिया, सुनीता शानू, मनीष वंदेमातरम् और शैलेश भारतवासी इत्यादि के काव्यपाठ और बातचीत प्रसारित हो चुके हैं।

आज सुनिए अनुराग शर्मा से बातचीत-

अनुराग शर्मा के साथ सजीव सारथी की बातचीत पढ़ने के लिए क्लिक करें।

The Radio Playback Originals (Click on the covers to reach out the Albums)



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