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सुरों की मशाल लाया सुपर हीरो "क्रिश 3"

को ई मिल गया और क्रिश की कामियाबी ने भारतीय फिल्म परदे को दिया है, सुपरमैन स्पाईडरमैन सरीखा एक सुपर हीरो जो दर्शकों में, विशेषकर बच्चों में ख़ासा लोकप्रिय है, इसी लोकप्रियता को अपने अगले मुकाम तक ले जाने के लिए निर्देशक राकेश रोशन लेकर आये हैं क्रिश ३ . राकेश की अब तक की सभी फिल्मों में उनके भाई राजेश रोशन का ही संगीत रहा है और इस परंपरा का निर्वाह क्रिश ३ में भी हुआ है. इससे पहले कि फिल्म, वर्ष २०१३ में आपकी दिवाली को जगमगाए आईये देखें फिल्म का संगीत क्या ऐसा है जिसे आप चाहें कि गुनगुनाएं.  देसी सुपर हीरो क्रिश को अपने पहले संस्करण में कोई थीम गीत नहीं मिला था, तो चलिए इस कमी को पूरा कर दिया है इस एल्बम में. क्रिश का शीर्षक गीत ममता शर्मा की आवाज़ में है जिसमें खुद राजेश रोशन और अनिरुद्ध भोला ने बैक अप स्वरों का रंग मिलाया है. आखिरकार लगभग दो सालों तक मात्र आईटम गीतों की अपनी आवाज़ देने के बाद किसी बॉलीवुड संगीतकार ने ममता से कुछ अलग गवाया है, और उम्मीद के अनुरूप ममता ने गीत के साथ पूरा न्याय किया है. हाँ क्रिश जैसे सुपर हीरो के लिए कुछ इससे बेहतर गीत भी हो सकता था.  शां

गिरिजेश राव कृत दूसरा कमरा

इस लोकप्रिय स्तम्भ "बोलती कहानियाँ" के अंतर्गत हम हर सप्ताह आपको सुनवाते रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने माधवी चारुदत्ता के स्वर में मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित रोचक कहानी " शिकारी राजकुमार " सुनी थी। आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं गिरिजेश राव द्वारा लिखित मार्मिक कहानी दूसरा कमरा जिसे स्वर दिया है अनुराग शर्मा ने। प्रस्तुत कहानी का गद्य " एक अलसी का चिटठा " पर उपलब्ध है। " दूसरा कमरा " का कुल प्रसारण समय 6 मिनट 34 सेकंड है। सुनिए और बताइये कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं। यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं तो अधिक जानकारी के लिए कृपया admin@radioplaybackindia.com पर सम्पर्क करें। तो चलिए एक पौधा रोपते हैं और उसे जिलाते हैं।            ~ गिरिजेश राव हर सप्ताह यहीं पर सुनें एक नयी हिन्दी कहानी "सबसे अच्छा बड़का है - स्टैंड पर टेबल फैन की तरह घूमता दोनों की बारी बारी सुनता है और जब आँखें

‘मन तड़पत हरिदर्शन को आज...’

      स्वरगोष्ठी – 139 में आज रागों में भक्तिरस – 7 राग मालकौंस का रंग : पण्डित ओंकारनाथ ठाकुर के संग ‘रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ के साप्ताहिक स्तम्भ ‘स्वरगोष्ठी’ के मंच पर इन दिनों जारी लघु श्रृंखला ‘रागों में भक्तिरस’ की सातवीं कड़ी में मैं कृष्णमोहन मिश्र, एक बार पुनः आप सब संगीत-रसिकों का स्वागत करता हूँ। इस श्रृंखला के अन्तर्गत हम आपके लिए भारतीय संगीत के कुछ भक्तिरस प्रधान राग और उनमें निबद्ध रचनाएँ प्रस्तुत कर रहे हैं। साथ ही उस राग पर आधारित फिल्म संगीत के उदाहरण भी आपको सुनवा रहे हैं। आज माह का पाँचवाँ रविवार है और इस दिन ‘स्वरगोष्ठी’ का अंक हमारे अतिथि संगीतज्ञ द्वारा प्रस्तुत किया जाता है। आज का यह अंक प्रस्तुत कर रहे हैं, मयूर वीणा और इसराज के सुप्रसिद्ध वादक पण्डित श्रीकुमार मिश्र। श्रृंखला के आज के अंक में श्रीकुमार जी आपसे अत्यन्त लोकप्रिय राग मालकौंस पर चर्चा करेंगे। आज हम आपको राग मालकौंस के भक्तिरस के पक्ष को स्पष्ट करने के लिए तीन रचनाएँ प्रस्तुत करेंगे। सबसे पहले हम आपको सुनवाएँगे, 1952 में प्रदर्शित फिल्म ‘बैजू बावरा’ का भक्तिरस से